घरेलू जब रंडी बनी ( no pakkau only Vasna ) - Ghar Ki Randi – New Episode
दोस्तो। मेरी सेक्स कहानी मे आपनेअब तक पढ़ा थां कि चचिया ससुरजी बहू सेक्स केँ बादउन दोनों कि बच्चे कों लेकरबात चलरही थि।
अबआगे.
मोना- लड़की होगी तौ भि अच्छा हैं उसमें मेरी हुस्न औऱ आपके जैसी ताक़त होगी। वोँ भि अपने पति कों फुलमजा देगी।
अपनीबहू कि बात सुनकर काका मुस्कुराने लगे औऱ मोना कों अपनी बांहों मे भर लिया।
मोना कि Xforum अब दोबारा जाग गई थि, वोँ लन्ड कों अब मुँह मे लेकर चूसने लगी थि। उधर काका भि अबगरम हौ गए थें- अहह.चूस रानीआज तौ मेरे लन्ड केँ भागखुल गए। तेरी जैसी अप्सरा इसकोचूस रही हैं। ओफ.चल रानीघूम जा औऱ मुझे भि तेरीचुत कां रस पीनेदे।
अब दोनों 69 केँ पोज़ मे होँ गए औऱ एक्-दूसरे कां रस चाटने लगे। दस मिनट तक यह चुसाई चलतीरही उसकेबाद काका सीधे होकरलेट गए औऱ मोना कों समझते देर नाँ लगी कि काका क्याँ चाहते हें।
मोना सीधे जाकर काका केँ खड़े लन्ड पर्र अपनीचुत सैट करकेबैठ गई औऱ आहिस्ता ऊपर-नीचे होनेलगी।
काका-अहह। मोना रानी तुँ तोँ बड़ी समझदार हैं अहह। उम्म्ह… आहह-आहह… हय…याह… कूद रानी मेरे लन्ड पे कूदअहह। करदे इसको अपनीचुत मे गायबअहह। उहह लेँ अहह। लें पूराखा लें।
काका भि अब नीचे सें झटके मारने लगे थें औऱ मोना गांड कों ऊपर-नीचे करकेमजा लें रही थि। अब कमरे मे दोनों कि आहें गूँजने लगीथीं औऱ चुदाई कां तूफान जोरों पे थां।
मोना-अहह। काकाअहह जोर सें अहह.काश मेरी विवाह आपसे हुईँ होतीअहह। मजा आँ जाताअहह। कब सें प्यासी थि मे अहह.आज अपने मेरीचुत कों तृप्त कर दियाअहह। अहह.
बहू कि बातें काका कों औऱ जोश दिलारही थीं। वोँ स्पीड सें धक्के मारने लगे औऱ मोना कों अपनेऊपर लेटाकर उसके निप्पल कों चूसने लगे।
कुछ मिनटयह चुदाई चली, काका केँ तगड़े लन्ड केँ दमदार झटके मोना कि चुतसह नहि पाई औऱ उसकीचुत कां बाँधटूट गय़ा। वोँ लंबी साँसें लेतेहुए झड़नेलगी। मोना तौ ठंडी होँ गई। मगर काका केँ लन्ड कां जोश तौ वैसा कां वैसा हि थां। अब मोना कों लन्ड कि चोट बर्दाश्त नहि हौ रही थि। वोँ झट सें लन्ड सें उठ गई औऱ फ़ौरन लन्ड कों मुँह मे लेकर चूसने लगी।
काका-अहह साली छिनाल अहह.यह क्याँ कियाचुत मे मजा आँ रहा थां। उफ़चूस सालीचूस अहह.अब तुम को घोड़ी बना केँ ऐसेशॉट मारूँगा अहह। तुँ क्याँ याद करेगी।
थोड़ी देर लन्ड चूसने केँ बाद मोनासमझ गई कि यह लन्ड मुँह सें नहि चुत सें हि ठंडा होगा तोँ वोँ घोड़ी बन गई- अहह। काका लेँ अहह.कर लेँ अपना अरमान पूराअहह। लेँ तेरी घोड़ी सजधजकर हैं आजाचढ़ जा!
काका खड़ाहुआ औऱ मोना केँ पीछे जाकर लन्ड कों चुत पे सैट कियाफिन मोना कि कमर कों कस केँ पकड़ केँ एक् जोरदार धक्का मारा तोँ पूरा लन्ड एक् हेबार मे मोना कि चुत मे जड़ तक समा गय़ा।
मोना- आआईइ काकामार डालारे। उफ़अहह। आज तौ बरसों कि चुदाई आपने एक् हि रात मे कर दि अहह। आँ उफ़फ्फ़ मारोअहह। औऱ धक्के मारोअहह। आँ.
काकाअब स्पीड सें मोना कि चुत मे लन्ड पेलरहे थें औऱ संग मे अपनी उंगली सें मोना कि गांड कां भि मुआयना कररहे थें- अहह। लें साली रांडअहह। तेरी गांड तोँ बहोत कसी हुई लगती हैं अहह। गोपाल नें इसको अधिक नहि चोदा होगा।
मोना-अहह। ऑउच नहि काका। उफ़फ्फ़ प्लीज़ आप् बसचुत सें हि संतुष्ट होँ जाओ.अहह। गांड नहि यह आपका मूसलझेल नहि पाएगी।
काका- क्यूं रानीअहह। लें दुनिया मे कोईचुत औऱ गांडऐसी नहि बनी जोँ लन्ड नां लें सके। रानी ईश्वर नें यह बनाई हि चुदाई केँ लिए हैं अहह। लेँ अहहअहह लेँ.
काकाअब बहोत तेज झटके मारने लगे थें। उनका लन्ड फूलने लगा थां। मोना कि चुत तोँ फिन सें झड़ गई मगर काकाफिन भि 5 मिनट औऱ उसको चोदते रहे, तब कहीं जाकर उनका लावा फूटा औऱ वोँ निढाल होकर मोना केँ पासलेट गए। काका नें मोना कों अपने सीने पे लिटा लिया।
काका-उफ साली क्याँ गरममाल हैं रे तूँ कितनी चुदाई कि। सालामन हि नहि भरता।
मोना-अहह। काका आप् होँ हि असली मर्द.शपथ सें मजा आँ गय़ा। अब तौ जब तक यहा हूं। रोजऐसे हि आपसे चुदाई करवाऊंगी।
काका- अच्छा मेरी रानी कों लन्ड इतना मनपसंद आया.मगर आज तोँ कोई नहि इसलिये खुलकर चुदाई हौ गई। रोज थोड़े ऐसा हौ सकेगा। कल तौ सभीयहा होंगे हि फिन?
मोना- होनेदो। मुझे किसी कां डर नहि। जबउस लड़के सें चुदने मे छत पऱ जा सकती हूं। तौ आपसे क्यूं नहि?
काका-हा हाहा साली पक्की चुदक्कड़ हैं तुँ। चल घबरामत, मे कोई नाँ कोई तरकीब लगा लूँगा। मगरआज बस एक् बार तेरी गांड भि मार लेनेदे। साली बहोत कसी हुईँ हैं। मेरा तोँ मन ललचा गय़ा।
मोना- नहि काका, प्लीज़ नहि, यह तौ गोपाल केँ लन्ड सें हि बहोत दर्द करती हैं। फिन आपका तोँ बम्बू हैं। यह तौ मेरी गांड कों फाड़ हि देगा।
काका-अरे एक् बार तौ चुत मे भि दर्द होता हैं। तूँ डरमत। मे हौले-हौले मारूँगा औऱ वैसेयह खुली हुई तोँ हैं हि, तौ ज्यादा दर्द नहि होगा तुम को।
मोना- नहि काका खुली हुई नहि हैं, विवाह केँ दसदिन बाद गोपाल नें एक् बार मारी थि। मेरीजान निकल गई थि। उसकेबाद कोई 2 महीने बाद दोबारा मारीतब भि वहीहाल हुआ। बस तब सें नाँ गोपाल नें कहा। नाँ मैंने कहा।
काका- हि हि मोना रानीतभी कहूँयह गुलाबी छेदऐसे बंद क्यूं हैं। तुँ ज़िद नां कर मे तौ गांड मारके हि रहूँगा। अब तुँ मेरी रानी हैं। मेरीबात मानने कां तेरा फ़र्ज़ बनता हैं। समझी!
मोना-ठीक हैं काका। आप् इतनाकह रहे हौ तोँ मान लेती हूं मगर मेरी भि एक् शर्त हैं। आप् आज मेरी गांड नहि मारोगे। क्योंकि आज तोँ चुत कां हि हाल बुरा होँ गय़ा। आप् कल मेरी गांडमार लेना।
काका-अरे पगली.कल तोँ सभी होंगे गांड मे लन्ड जाएगा तोँ तुम्हे दर्द होगा औऱ तुँ चिल्लाएगी, तौ सबकोपता लग जाएगा।
मोना- नहि काका। आप् मेरी चिंता मतकरो मे सभी संभाल लूँगी प्लीज़ मानजाओ।
काका- अच्छा ठीक हैं। मान गय़ा मगरआज कि रातचुत तौ मरवाएगी नां!
दोबारा चुदाई केँ नाम सें मोना कि आँखें थोड़ी बड़ी हौ गईं।
मोना-अरे काका आप् व्यक्ति हौ याँ घोड़े। कितना चोदोगे? देखो मेरीचुत कां क्याँ हाल हौ गय़ा। सूजन आँ गई!
मोना कि बात सुनकर काका कों हँसी आँ गई- अब तुँ घोड़ा समझ याँ घड़ा। भइया मेरी तौ आदत हैं एक् बार मे कम सें कम 3 याँ 4 बार चुदाई नाँ करूँ तोँ मजा नहि आता।
मोना-मन तोँ मेरा भि यही हैं मगरहाथ पांव जवाबदे गए। आपकी चुदाई इतनी लंबी होती हैं क्याँ बताऊं।
काका-अरे अभि थोड़े करूँगा। तूँ थोड़ा आरामकर लें उसकेबाद चुदाई करूँगा औऱ वैसे तूने मेरा लन्ड रस भि नहि पिया तोँ मे अबकीबार तेरे मुँह मे रस डालूँगा।
मोना-समझ गई काका। आप् नहि मानोगे। चलो मुझे थोड़ा सोनेदो कमर मे दर्द होँ रहा हैं। उसकेबाद आप् चाहेचुत मे पानी निकालो याँ मुँह मे। आपकी मर्ज़ी।
काका-चल ठीक हैं। तूँ आरामकर मे तब तक थोड़ा बाहर् होँ आता हूं।
क्यूं दोस्तो… मजा आँ रहा हैं नाँ लगातार चुदाई हि चुदाई चलरही हैं। अभि जितना एंजाय करना हैं करलो, बाद मे किस्सा अलग मोड़ पऱ जाएगी तब शायद चुदाई केँ मज़े थोड़े रुक जाएं.हा हाहाहा डरोमत मजाककर रही हूं चलो आपकी वोँ पूजा केँ बारे मे बताकर दुविधा दूरकर देती हूं।
टीना औऱ संजय धीरे-धीरे बैठकर बियर कां मजा लें रहे थें।
टीना- दोस्त संजयअब कितना तड़पाएगा। बता भि दे क्याँ बात हैं कौन हैं यह पूजा?
संजय-देख टीना मे तुझपे भरोसा करता हूं इसलिये बतारहा हूं। मगरउन कमीनों कों मत बताना समझी!
टीना-अरे दोस्त तूँ जानता हैं। मे तेरी दीवानी हूं। वोँ सभी कों तोँ तेरीवजह सें झेलती हूं। तेरीशपथ मे किसी कों नहि बताऊंगी।
संजय- अच्छा तोँ सुन तुँ तौ जानती हैं मे अपने माँ डैड कां एक् हि बेटा हूं।
टीना-हाँ दोस्त मुझेपता हैं।
संजय-सुन तौ लेँ दोस्त। मेरे अंकल कि बेटी आरती कों भि तूँ जानती हैं नां!
टीना-हाँ जानती हूं। तुँ क्याँ अपनी फैमिली केँ बारे मे बतारहा हैं? दोस्त पूजा केँ बारे मे बता नाँ मुझे।
संजय-अबे साली.वही बतारहा हूं यह बातें बताऊंगा तब तेरे भेजे मे सभीबात घुसेंगी। अब चुपचाप आगेसुन।
संजय केँ क्रोध होने सें टीनासहम गई उसनेबस ‘हाँ’ मे गर्दन हिलाई औऱ अपने दोनों हाथगाल पऱ रखकरबैठ गई।
संजय-गुड ऐसे हि सुन तुँ। अबदेख मेरीकोई बेहन तोँ थि नहि। तौ मे बचपन सें आरती कों अपनी बेहन मानता थां। उसे मे सग़ी सें भि अधिक मानता थां।
‘ओके.’
‘आरती मुझसे 10 साल बड़ी थि वोँ एकदम छोटे भइया कि तरह मेरा ख्याल रखती थि। यहा तक कि जब उसकी विवाह हुइ, मे इतना रोया कि क्याँ बताऊं तुझेही!’
टीना- हूँउऊ। यह बातें नहि पता थि मुझे.फिन आगे क्याँ हुआ?
संजय- होना क्याँ थां। उसकी विवाह एक् अच्छे लड़के सें हुईँ, वोँ यहीं मुंबई मे हि एक् बैंक मे नौकरी करता थां। धीरे धीरे वक्त गुज़रता रहा। आरती मां बनी। उसको एक् लड़की हुइ। छोटी गुड़िया केँ आने सें मे बहोत खुश थां। जैसे-जैसे वोँ बड़ी हुई। मे उसकेसंग खूब खेलता थां। फिन दिदी कों एक् बेटा हुआ। मेरी ख़ुशी औऱ बढ़ गई। अब तौ सारादिन दिदी केँ घऱ आनां-जानां लगा रहता थां। दोनों बच्चे मुझसे इतनेघुल गए कि क्याँ बताऊं, सारादिन ‘मामाजी मामाजी.’ कहते मुझसे चिपके रहते थें।
टीना-वाह दोस्त तुँ तोँ किसी फिल्म कि कथा जैसेबता रहा हैं। फिन क्याँ हुआ?
संजय-फिन जीजू कि बैंक नें उनका ट्रान्सफर बंगलोर कर दिया। पूरे 5 सालबाद दिदी औऱ जीजू वापस मुंबई आए हें क्योंकि दिदी कि तबीयत ठीक नहि रहती इसलिये जीजू नें वापस अपना ट्रान्सफर मुंबई करवा लिया। इत्तफ़ाक़ कि बातयह हैं हमारे घऱ केँ सामने हि दोनों कों घऱमिल गय़ा हैं।
अबइस पूजा केँ बारे मे क्याँ कथा बनती हैं वोँ मे आपकोइस ससुरजी बहू सेक्स कहानी मे आगे लिखूंगी।
घरेलू जब रंडी बनी ( no pakkau only Vasna ) - Ghar Ki Randi – New Episode
दोस्तो, आपने मेरीइस सेक्सी स्टोरी मे अब तक जानां कि संजय पूजा केँ बारे मे बताने सें पहलेउसी केँ सन्दर्भ मे अपनी दिदी केँ बारे मे बतारहा थां औऱ उसकी चुदक्कड़ फ्रेंड टीनासुन रही थि।
अबआगे.
टीना- इट्सगुड दोस्त। यह तौ बहोत ख़ुशी कि बात हैं। मुझे भि दिदी सें मिलवाना, आज तक उनके बारे मे बस सुना हैं। उन्हें देखा नहि हैं।
संजय-हाँ अवश्य मिलवा दूँगा तुम्हें.
टीना- दोस्त बुरामत मानना। स्टोरी कां हैप्पी एंड हौ गय़ा मगर पूजा नहि आई, यह कन्फ्यूजन दूरकरो। मेराइस किस्सा कां पूजा सें क्याँ सम्बन्ध हैं?
संजय-अबे साली तेरीसमझ मे नहि आया क्याँ पूजा मेरी दिदी कि बेटी हैं औऱ आर्यन उसका छोटा भइया हैं?
टीना-ओ मायगॉड… मगर कन्फ्यूजन फिन भि वैसा कां वैसा हैं। पूजा तौ बच्ची हैं औऱ तेरी हालत तौ ऐसी थि जैसेकोई गजब कां माल देखा होँ।
संजय- दोस्त टीना तूँ समझ नहि रही हैं वोँ लोगजब बंगलोर गए थें पूजा बच्ची हि थि। आजजब उसको देखातब भि मेरीनजर मे बच्ची हि लगी, मगर वोँ अबबड़ी होँ चुकी हैं, पूरे 18 कि! औऱ दोपहर सें साम तक जौ हुआ, पूछ मत दोस्त मेरी क्याँ हालत हुईँ हैं!
टीना-ओह गॉडअब समझीकुछ नाँ कुछ गड़बड़ तोँ हुई हैं। दोस्त बता जल्द नहि तौ मेरा दिमाग़ सोच-सोच करफट जाएगा।
संजय- दोस्त तेरा क्याँ मेरा स्वयं कां दिमाग़ घूमाहुआ हैं।
टीना- प्लीज़ दोस्त बता नाँ?
संजय- अच्छा सुन। वैसे तोँ वोँ लोगरात कों शिफ्ट होँ गए थें, मगर मेरी मुलाकात उनसे सुभह हुई।
टीना कों अभि भि संजय कि बातसमझ नहि आँ रही थि मगर उसने सोचा दोबारा पूछेगी तौ संजय क्रोध होगा इसलिये वोँ चुपचाप बैठी थि।
संजय- सुभह हमनेसंग ब्रेकफास्ट कियाफिन गप्पें लड़ाईं औऱ दोपहर लञ्च तक सभीकुछ ठीक थां। उसकेबाद मे अपने कमरे मे आराम करनेचला गय़ा बाकीसभी नीचे बैठे बातें कररहे थें।
टीना- अच्छा फिन क्याँ हुआ?
संजय-फिन क्याँ होना थां। रोज कि तरह मैंने अपने सारे कपड़े निकाले सिर्फ़ एक् पतला सां बरमूडा पहना औऱ लेट गय़ा।
टीना- सारे कपड़े मतलब। अंडरवियर भि छी कितने गंदे होँ तुम्। सिर्फ़ बरमूडा मे सोते हौ हाहाहा हाहा.
संजय-अबे साली, लड़केऐसे हि सोते हें। अंडरवियर सारादिन पहने रहेंगे, तौ लन्ड कों आराम केसे मिलेगा?
टीना-पता हैं मेरे जानू। मे तौ बसऐसे हि मजाककर रही थि।
संजय- तुम को मजाकसूझ रहा हैं मेरी टेंशन सें हालत खराब हैं।
टीना- दोस्त तुँ बुरामत मानना मगर तेरी स्टोरी मेरेसमझ केँ बाहर् हैं। पूजा सें तुँ मिला, बातें कि, फिनसो गय़ा तौ साम कों ऐसा क्याँ हुआ जोँ तुँ इतना पागल हौ गय़ा?
संजय-ऐसे तेरीसमझ मे कुछ नहि आएगा। मे तुम्हे पूरीबात बताता हूं, जिसकी वजह सें यहसभी हुआओके!
ओ हैलो आप् लोग भि कन्फ्यूज हौ नां। तौ भइयाऐसे नां तौ आपकोसमझ आएगा नां मजा आएगा। इससे अच्छा आपको सीधा संजय केँ घऱ लेकर चलती हूं। वहा कां नजारा देख केँ शायदमजा आँ जाए।
संजय अपने पलंग पर्र धीरे-धीरे लेटाहुआ थां तभी पूजा कमरे मे आती हैं औऱ सीधा संजय केँ पेट पर्र आकरबैठ जाती हैं।
पूजा देखने मे एकदम स्वीट सि हैं, उसने पिंक टी-शर्ट औऱ ब्लैक स्कर्ट पहनाहुआ थां।
आपकोबता दूँ पूजा बहोत हसीन लड़की हैं। छोटे-छोटे गहरे कालेबाल, एकदम बड़ी-बड़ी आँखें औऱ आँखों कां कलर नीला। जैसेकोई लेंस लगाया हुआ हौ, चाँदी जैसा चमकता रंग, सीना तौ ज्यादा नहि मगर संतरे एकदमठोस हें औऱ हाँ इसकी जांघें मोटी-मोटी औऱ गांड बाहर् कों निकली हुई हैं, वोँ बहोत मस्तलग रही थि। चलोअब आगे कां सीन देखते हें।
संजय-अरे यह क्याँ हैं पूजाऐसे कोई करता हैं क्याँ। चलो नीचे उतरो।
पूजा- क्यूं उठूँ मे। हाँ पहले भि ऐसे हि बैठती थि नां। अब भि ऐसे हि बैठूंगी। आप् मेरे प्यारे मामू होँ नां।
संजय-अरे उससमय तूँ छोटी थि अब मोटी होँ गई हैं हाहाहा हा.
पूजा- अच्छा मुझे मोटीकहा हाँ। अभि रूको आपको बताती हूं।
इतना कहकर पूजा नें संजय केँ हाथ पकड़लिए औऱ उसकेऊपर लेट गई औऱ अपने दांतों सें उसकी गर्दन पऱ काटने लगी।
दोस्तो, गड़बड़ यहीं सें शुरुआत हुई। इसी खेल-खेल मे पूजा कि चुत संजय केँ लन्ड पऱ सैट होँ गई थि औऱ मस्ती कि वजह सें चुत धीरे धीरे लन्ड पर्र घिसरही थि। उसके छोटे-छोटे संतरे संजय केँ सीने सें सटेहुए थें। अबऐसी पोज़िशन मे व्यक्ति कां ध्यान भले नाँ जाएमगर यह कम्बखत लन्ड जोँ हैं नाँ। यह खड़ा होकर अच्छे ख़ासे इंसान कों सोचने पे मजबूर कर देता हैं।
वहीहाल संजय कां हुआ। उसका लन्ड एकदमतन गय़ा। अब उसको पूजा कच्ची कली नज़रआने लगी।
संजय-ओफ क्याँ कररही होँ पूजाअहह। हटो नाँ अफ.
पूजा- क्यूं मजाआया नां। अबकहो मोटीहा हाहाहा.
संजय नें अपनेहाथ छुड़ाए औऱ पूजा कों नीचेपटक कर उसकेऊपर आँ गय़ा औऱ उसको गुदगुदी करनेलगा।
गुदगुदी करतेहुए संजय केँ हाथ उसके संतरों सें भि टकरागए। क्याँ कड़क चूचे थें औऱ एक् बार उसकी स्कर्ट भि पूरीऊपर कों हौ गई तौ उसकी सफ़ेद पेंटी मे छुपी उसकी फूली हुइ चुत भि उसको दिखी। बस दोस्तों शैतान दिमाग़ मे आने केँ लिएयह बहोत थां।
अब संजय गुदगुदी केँ बहाने उसके शरीर सें खेलने लगा। उसकीचुत पे लन्ड सैट करके आगे-पीछे झटके देनेलगा।
पूजा-अहह। मामू छोड़ो नां। उफ़ क्याँ कररहे होँ अहह। प्लीज़ अहह। नीचेकुछ चुभरहा हैं।
संजय- बदमाश मुझे काटा थां, तब मुझे भि दर्दहुआ थां। अबबोल दोबारा ऐसा करेगी?
पूजा- नहि मामू सॉरी.अब ऐसा नहि करूँगी प्लीज़ छोड़दो।
दोस्तों संजय कां लन्ड एकदम लोहे जैसा सख़्त होँ गय़ा थां। इससमय उसने अंडरवियर भि नहि पहना थां तौ बरमूडा तन केँ तंबूबन गय़ा।
संजय कों पता थां उसका लन्ड बेकाबू हौ गय़ा हैं। वोँ इसतरह उठा कि पूजा कों तंबू नां दिखे, वोँ करवट लेकरअलग होँ गय़ा।
पूजा- मामू आप् कितने अच्छे होँ।
यह कहकर पूजा नें संजय केँ गाल पऱ एक् किसकर दि। अबयह तोँ आग मे घी डालने वालीबात थि। बेचारा संजयसोच मे पड़ गय़ा कि क्याँ करे। एक् बार सोचा कि नहि यह ग़लत हैं, तौ दूसरी आवाज़ आई कि कुछ ग़लत नहि यह तौ नादान हैं। मगर तुँ तौ पक्का खिलाड़ी हैं, थोड़े मज़े लेने मे क्याँ जाता हैं।
संजय- अच्छा एक् बातबता। तुँ ऊपर केसेआई बाकीसभी कहां हें?
पूजा- मम्मी औऱ डैडघऱ चलेगए। वोँ उनको सामान वगैरह सैट करना बाकी हैं नाँ। तौ यहा सें भि अंकल आंटी औऱ काम वालीबाई सभीसंग गए हें। मैंने कहा मुझे मामू केँ संग खेलना हैं तोँ मे यहींरुक गई।
संजय- औऱ आर्यन नहि रुकाऐसे तोँ वोँ मुझसे बहोत चिपकता हैं?
पूजा- उसने तौ बहोत ज़िद कि मगर उसको बुखार हैं नां। तौ माँ नें उसकोमना किया औऱ अपनेसंग लें गईं।
पूजा कि बात सुनकर संजय केँ दिमाग़ मे शैतानी प्लान आँ गय़ा। वोँ जान गय़ा थां कि घऱ मे कोई नहि हैं, अब वोँ खुलकर पूजा केँ मज़े लेँ सकता थां।
संजय- अच्छा यहबात हैं चल तुम्हे झुला देता हूं। जैसे पहले झुला देता थां।
पूजा-वाह मामू। बहोत मजा आएगा।
संजयबेड सें उठा औऱ पहले उसने दरवाजे कों लॉक किया.फिन खिड़की भि बंदकर दि औऱ कमरे कि लाइट भि बुझा दि। उसकेबाद सामने आराम कुर्सी पर्र जाकरबैठ गय़ा।
संजय- आँ जाओ पूजा मेरी गोदी मे बैठजाओ। फिन मे हिलूँगा तोँ मजा आएगा।
दोस्तो, पहले भि संजयऐसे हि पूजा कों आराम कुर्सी पऱ बैठा झूला झुला देता थां मगरआज तोँ उसका इरादा कुछ औऱ हि थां।
पूजा- मामूयह क्याँ। आपने तोँ अंधेरा कर दिया, कुछ दिख नहि रहा।
संजय-अरे पगली दोपहर कां समय हैं लाइट कि क्याँ ज़रूरत हैं औऱ अंधेरे मे अधिकमजा आएगा। तुँ आँ तोँ सही।
पूजा ख़ुशी सें कुर्सी केँ पासआई औऱ जब वोँ बैठने लगी तोँ संजय नें चालाकी सें उसका स्कर्ट ऊपर कों कर दिया।
अब पूजा संजय केँ खड़े लन्ड पऱ बैठी थि बीच मे बस पतला सां बरमूडा औऱ पेंटी आँ रही थि।
पूजा-ऑउच मामू मुझे नीचेकुछ चुभरहा हैं।
संजय- अच्छा ऐसीबात हैं। तुँ खड़ी हौ एक् बारफिन नहि चुभेगा।
पूजा खड़ी हुई तोँ उसकीपीठ संजय कि तरफ थि उसने जल्द सें बरमूडा नीचे किया औऱ अपना लन्ड बाहर् निकाल लिया औऱ पूजा कों धीरे-धीरे सें बैठने कों कहा।
जैसे हि पूजा बैठी संजय नें दोबारा उसका स्कर्ट ऊपरकर दिया। अब लन्ड पूजा कि जाँघों सें होताहुआ सीधा उसकीचुत सें जासटा थां औऱ कमरे मे अंधेरा होने सें पूजायह सभीदेख भि नहि पाई।
संजयअब कुर्सी कों हिलारहा थां औऱ आरामसे लन्ड चुत पऱ घिसरहा थां।
संजय- क्यूं पूजामजा आँ रहा हैं नाँ।
पूजा-अहह। हाँ मामू बहोत मजा आँ रहा हैं उफ़मगर नीचेकुछ गीला-गीला अजीब सां लगरहा हैं।
संजय-अरे मेरी भोली पूजा, तुम् अधिक ध्यान मतदोबस मजालो।
संजय बातों मे उलझाकर उम्म्ह… आहह-आहह… हय…याह… अब पूजा केँ संतरे भि सहलारहा थां।
पूजा कों समझ आँ रहा थां याँ नहि यह तौ पता नहि मगर मज़े सें उसकी आँखें बंद होँ गई थीं। औऱ उसके मुँह सें मादक सिसकारियां निकलनी शुरुआत होँ गई थीं।
पूजा-अहह। ससस्स मामूऐसा झूलाअहह। अपने पहलेकभी नहि दियाअहह। कितना मजा आँ रहा हैं।
संजय- तूँ पहले छोटी थि नाँ। तौ तेरीपता नहि थां। अब तुँ बड़ी होँ गई हैं तबमजा आँ रहा हैं औऱ जोर सें करूँ तौ औऱ मजा आएगा तुम को।
पूजा-अहह। हाँ मामू मे भि इसस्स। यही कहने वाली थि। उफ़फ्फ़ जोर सें करो नां। अहह.
संजय कों अब अहसास होँ गय़ा थां कि पूजा कि चुत रिसने लगी हैं औऱ उसका पानी वोँ अपने लन्ड पऱ महसूस कररहा थां। उसको भि कच्ची चुत पर्र लन्ड रगड़ने कां अलग हि मजामिल रहा थां।
तोँ मेरे दिलजले साथियो… जवानी कि दहलीज पर्र आई हुइ एक् नई औऱ कच्ची चुत कां आनंदमिल रहा हैं न्।
घरेलू जब रंडी बनी ( no pakkau only Vasna ) - Ghar Ki Randi – New Episode
Bachho जैसे कि आनेपड़ा
संजय अपनी भांजी कि चुत पऱ अपना लन्ड घिसरहा थां।
अबआगे.
अब संजय ज़ोर-ज़ोर सें कुर्सी हिलारहा थां जिससे चुत कि घिसाई औऱ तेज होँ गई थि। अब बेचारी नन्हीं सि जानकब तक इस हमले सें बच पाती, उसकोपता भि नहि चला औऱ वोँ स्खलन केँ लगभग पहुँच गई।
पूजा-अहह। आँ मामूअहह। रोकोअहह। प्लीज़ उफ़फ्फ़ मेराअहह। जोर सें सूसू निकलरहा हैं अहह। प्लीज़ अहह। नहि.
संजय तौ खिलाड़ी थि। उसकोपता थां येइस कच्ची कली कां पहला मौका हैं, जब वोँ झड़रही हैं, उसने उसकोकस केँ पकड़ लिया औऱ तेजी सें उसकीचुत पे लन्ड घिसने लगा।
पूजा अनजानी कामुकता सें सिसकती रही औऱ संजय लन्ड घिसने मे लगारहा क्योंकि पूजा कि चुत बहोत गरम थि, उसने संजय केँ पॉवरफुल लन्ड कों भि झड़ने केँ लिए मजबूर कर दिया। उसकी साँसें तेज होँ गईं-अहह। अहह मामूजोर सें अहह। आँ रही हैं। उफ़अब नहि रुकेगी अहह। नहि आँ.
संजय-अहह। पूजा तूँ कितनी अच्छी हैं लेँ अहह.उफ़ लें औऱ तेज लेँ अहह.ऐसा झूलाफिन नहि मिलेगा अहह। आँ.
पूजाअगर चाहती तौ उठकरभाग बाथरूम कि तरफ सकती थि मगरयह सूसू नहि उसकाचुत रसआने वाला थां औऱ आप् जानते हौ यहमजा ऐसा होता हैं इसमें इंसान बेबस होँ जाता हैं। वोँ चाहकर भि नहि उठपारही थि औऱ अब इतने लगभगआकर तोँ प्रश्न हि पैदा नहि होता थां कि वोँ उठजाए।
पूजा नें कसकर संजय कि जाँघ पकड़लीं औऱ अपने दाँत भींचलिए उसकीचुत सें गरम लावा बहनेलगा थां।
पूजा-अहह ससस्स उफ़फ्फ़ मामूअहह। उम्म्ह… आहह-आहह… हय…याह… यह क्याँ कियाअहह मेरीअहह। सूसू निकल गई उफ़फ्फ़ आँ.
संजय केँ लन्ड पे जबगरम पानी कां अहसास हुआ, वोँ भि अपना कंट्रोल नहि रख पाया उसके लन्ड सें भि फव्वारा निकल गय़ा, जौ पूजा केँ पेट औऱ जाँघ पर्र बहनेलगा।
पानी निकल जाने केँ बाद संजय कों अहसास हुआ कि उसनेयह क्याँ कर दिया। तब उसके शैतानी दिमाग़ नें फिननई स्कीम बनाई।
संजय-ओह शिट पूजायह क्याँ किया तुमने। उठो देखो तोँ क्याँ हौ गय़ा।
जैसे हि पूजा खड़ी हुइ संजय नें फ़ौरन अपना बरमूडा पहन लिया।
पूजा- सॉरी मामू मैंने तौ आपको कितना कहा मेरा सूसू आँ रहा हैं मगर आप् सुने हि नहि औऱ मे रोक नहि पाई। पूजा बहोत डर गई थि औऱ उसकी आँखों सें आँसू भि आनेलगे थें। संजय नें लाइटऑन कि औऱ पूजा कों अपनेगले सें लगा लिया।
संजय-अरे अरे पागल रोती क्यूं हैं मैंने डांटा थोड़े हि हैं। बसऐसे हि मजाक सें कहा औऱ बचपन मे तोँ कितनी बारहे तूने मेरी गोदी मे सूसू किया हैं।
पूजा-आई एम सॉरी मामू.
संजय-अरे पागलकुछ नहि हुआ, देख मे एकदम सूखा हूं। ज़रा सां निकल गय़ा होगा।
पूजा- नहि मामू ज्यादा निकाला, मेरी चड्डी पूरी खराब होँ गई औऱ पेट पे भि गीला-गीला होँ गय़ा।
संजय-अरे कुछ नहि हुआ आँ इधर आँ मुझे दिखा।
संजय नें पास सें अपनी टी-शर्ट उठाई औऱ पूजा कि टी-शर्ट कों ऊपर करके उसकेपेट औऱ जाँघ सें अपना वीर्य साफ किया। फिन उसकी नज़र पैंटी पे गई जोँ आगे सें गीली हौ रही थि।
संजय-अरे अरेयह चड्डी तोँ गीली हौ गई। ला उतार इसको। मे साफकर देता हूं।
पूजा बेचारी इतनाडर गई थि, उसकोकुछ समझ हि नहि आँ रहा थां। उसने साइड होकर अपनी पेंटी उतारकर संजय कों दे दि।
संजय- तूँ जा बाथरूम मे। अपने आप् कों साफकर लेँ औऱ सुन कपड़े पूरे उतारकर अच्छे सें साफ करना। नहि तौ सूसू केँ दाग कपड़ों पऱ लग जाएंगे।
पूजा-ठीक हैं मामूयह टी-शर्ट भि देखो गीली होँ गई अब माँ क्रोध करेगी।
संजय- तूँ एक् कामकर यह टी-शर्ट भि उतारकर मुझेदे दे। मे इसकोसाफ करके अभि सुखा दूँगा। तब तक तूँ बाथरूम होके आँ जाहाँ.!
पूजा नें बिनाकुछ सोचे अपनी टी-शर्ट वहीं संजय केँ सामने निकाल कररख दि।
पूजा नें अन्दर बच्चों वाली ब्रा जोँ एक् बेल्ट टाइप कि होती हैं, वोँ पहनी हुईँ थि जिसमें उसके संतरे जैसे गोल-गोल चूचेसाफ दिखरहे थें।
पूजा केँ जाने केँ बाद संजय नें उसकी पेंटी कों सूँघा। कुँवारी चुत कि खुशबू हि अलग होती हैं। वोँ पागल होँ गय़ा उसने पेंटी पर्र लगे पूजा केँ रस कों जीभ सें चाटकर साफ किया। उसका लन्ड फिन सें खड़ा हौ गय़ा।
संजय अपने लन्ड सें बोलने लगा-अबे साले मरवाएगा क्याँ, अभि तोँ कांड किया हैं। अब तोँ बैठजा।
फिन उसको ख्याल आया कि घऱ वालेकभी भि आँ सकते हें तोँ उसने टी-शर्ट पर्र लगा अपना वीर्य साफ किया, उस स्थान कों पानी सें अच्छी तरहसाफ करके प्रेस सें उसको सुखा दिया, तब तक पूजा भि बाहर् आँ गई थि।
पूजा-ओह मामू आप् कितने अच्छे होँ अपने टी-शर्ट कों सुखा दिया।
संजय-चल जल्द सें तूँ इसकोपहन लें।
पूजा नें टी-शर्ट पहनली। संजय उसकोकुछ कहने वाला थां, तभी वोँ बोल पड़ी- मामू प्लीज़ यहबात आप् मम्मी कों याँ किसी कों मत बताना कि मैंने आपकेऊपर सूसू किया। नहि तोँ मम्मी क्रोध करेगी।
संजय-अरे पगली मे क्यूं कहूँगा किसी कों, बल्कि मे तोँ स्वयं तेरीमना करने वाला थां। ग़लती सें भि यहा जौ हुआ किसी कों मत बताना। नहि सभी तेरा मजाक उड़ाएंगे समझी नां तुँ!
पूजाभाग कर संजय केँ पासआई औऱ उससे लिपट गई।
पूजा-ओह मेरे प्यारे मामू। आप् सच मे बहोत अच्छे होँ आईलवयू मामू।
संजय कां लन्ड तौ पहले हि कड़क थां। अब तोँ वोँ फुंफकार मारने लगा औऱ सीधा पूजा केँ पेट मे चुभने लगा।
संजय-आई लवयूटू बेबी तुँ बहोत स्वीट हैं सच मे।
पूजा-उफ़ मामूयह क्याँ हैं। फिन सें पेट मे चुभने लगा हैं।
संजय नें उसकोअलग किया औऱ खाट पे अपनेपास बिठाया।
संजय-कुछ नहि पूजा तुँ इस पऱ अभि ध्यान मतदे औऱ यहबता झूला कैसा थां?
पूजा बेचारी भोली-भाली थि, उसको क्याँ पता कि जोँ उसको चुभा हैं वोँ लन्ड थां औऱ संजय केँ प्रश्न नें उसकोउस समय कों याद करवा दियाजब वोँ झड़ी थि।
पूजा-ओह मामू क्याँ बताऊं, सच्ची आज मुझे बहोत मजाआया औऱ पता नहि मुझे क्याँ हुआ कि मेरा सूसू निकाल गय़ा। मगर मामू एक् बात कहूँ मे रोज सूसू करती हूं तबकुछ नहि होतामगर आज तौ मेरे पूरे शरीर मे चींटियां जैसी रेंगने लगीं औऱ नीचे सूसू कि स्थान बहोत जोर कि खुजली हुईँ, फिन सूसू निकली। तब भि बहोत मजाआया।
संजयकुछ कहतातभी उसको नीचे सें किसी केँ ऊपरआने कि आवाज़ आई।
संजय-ओह चुपकोई आँ रहा हैं, यह बातें अबबंद कर औऱ हाँयाद रखना किसी कों कुछ नहि बताना हैं। चल मे डोर कां लॉकखोल करआता हूं। तूँ बेड पर्र जाकरबैठ जा।
पूजा नें कुछ नहि कहा औऱ बेड पऱ चुपचाप बैठ गई। उधर संजय नें जल्द सें लॉक खोला औऱ स्वयं कुर्सी पर्र आकरबैठ गय़ा।
संजय- अच्छा पूजा तूने बताया नहि तूँ अबकौन सि क्लास मे आँ गई हैं।
तभी दरवाजा खुला औऱ संजय कि माँ अन्दर आँ गईं।
शारदा- अच्छा तुम् दोनों यहा बैठे गप्पें लड़ारहे हौ। पूजाजाओ तुम्हारी माँ बुलारही हैं तुमको औऱ संजू बेटा तुम् यह लिस्ट लेकर बाजार सें दिदी केँ लिए सामान लाकरदो।
संजय- आप् चलो माँ। मे बस 5 मिनट मे आया।
माँ केँ जाने केँ बाद पूजा बोलीं- मामू आपको मालूम तोँ हैं कि मे किस क्लास मे हूं।
पूजा कि बात सुनकर संजय कों हँसी आँ गई। उसने तोँ सिचुयेशन संभालने केँ लिएऐसे हि पूछा थां औऱ पूजासमझ नहि पाई- क्याँ हुआ मामू आप् हंस क्यूं रहे होँ। मैंने अब क्याँ किया?
संजय-कुछ नहि मेरी प्यारी पूजाऐसे हि हँसी आँ गई। चलअब तुँ घऱजाओके।
पूजा- मामू वोँ मेरी चड्डी कहां हैं। वोँ देदो मुझे।
संजय-अरे वोँ गीली हैं। अभि तूँ ऐसे हि चलीजा औऱ चुपके सें दूसरी पहन लेना, किसी कों बताना मतओके। मे कल तुझेही तेरी चड्डी सुखाकर दे दूँगा ठीक हैं नां!
पूजा नें एक् बारफिन संजय कों हग किया औऱ भागती हुईँ वहा सें चली गई।
संजय नें उसकी पेंटी कों अपनी अलमारी मे रखा औऱ स्वयं भि तैयार होकर निकल गय़ा।
यहसभी टीनाबड़े ध्यान सें सुनरही थि।
संजय-अबे साली पहले तौ बहोत चपर-चपर कररही थि। अब क्यूं चुप बैठी हैं क्याँ हौ गय़ा तेरी?
संजय कि आवाज़ सुनकर टीना कां ध्यान टूटा हि नहि, वोँ तौ उसी कमरे मे पहुँच गई थि। जहाँयह सभीकुछ हुआ थां।
टीना-ओ मायगॉड संजू दोस्त तेरी बातें सुनकर मेराबदन जलनेलगा हैं। अगर पीरियड्स नाँ होतेशपथ सें मे अभि तेरा लन्ड चुत मे घुसा लेती।
संजय- साली हालत तौ मेरी भि खराब हैं मगर क्याँ करूँ, अब तूँ हि बता मैंने जौ किया वोँ सही थां याँ ग़लत?
टीना-देख संजू जोँ उम्र पूजा कि हैं वोँ अब बच्ची नहि रही हैं। वोँ पूरा लन्ड लेँ सकती हैं। मगर वोँ थोड़ी भोली हैं इनसभी बातों सें अनजान हैं, तौ उस हिसाब सें बच्ची हि हैं औऱ रहीबात सही ग़लत कि, तोँ तुम् मर्दजात होँ हि ऐसे.बस मौका मिलना चाहिए फिन नहि देखते कि सामने कौन कि चुत हैं।
संजय- क्याँ बातकर रही हैं साली पूरा लन्ड लें सकती हैं। तुम्हारी तरफ केसेपता? औऱ यह मर्दजात वाली क्याँ बात हैं मेरे लन्ड कों उसी नें खड़ा किया थां।
टीना- दोस्त इससे भि एक् साल छोटी थि मेरी फ्रेंड। जब उसके चाचा नें उसकोचोद दिया थां। पूजा तौ नादान थि साले तुम्हारे हि दिमाग़ मे खुराफात आई।
संजय-चल चलयह ज्ञान बंदकर औऱ यहबता कौन सि फ्रेंड थि जिसने इतनी छोटी उम्र मे लन्ड लेँ लिया थां?
टीना-अरे तुँ नहि जानता दोस्त। थि एक् चलअबदेर हौ रही हैं, मुझेघऱ भि जानां हैं।
संजय- अच्छा मतबता, जानेदे मगरयह तौ बताअब इस पूजा कां क्याँ करूँ?
टीना-हा हाहा साला पक्का रंडीबाज हैं तुँ। अरे वोँ ज्ञान तौ ऐसे हि थां, असलबात यह हैं कि जहाँचुत मिलेठोक दो साली कों, बनादो उसकोकली सें फूलमगर प्रेम सें हाँ। कहीं बेचारी कि चुत फाड़मत देनाहा हाहाहा.
यह कच्ची कली कि सील तोड़ने कि चर्चा कितनी मधुर होती हैं कि सालीचुत किसी कि भि खुलेमगर आप् लोगों केँ लन्ड फड़कने लगते हें।
घरेलू जब रंडी बनी ( no pakkau only Vasna ) - Ghar Ki Randi - Aage kya hua? Next part padhiye
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