चुदक्कड गर्ल्स - लेस्बियन – New Episode
चुद्दक्कड गर्लस
भाग-1
हमारे घऱ मे अक्सर किराएदार रहते हें। दो लड़कियाँ राजस्थान सें आई थि यहा पढ़ाई करने, दोनों बहनें थि। छोटी कां नाम पिंकी औऱ बड़ी कां नाम रिंकी। दोनों एकदम मस्त। पिंकी 23 कि होगी औऱ रिंकी 24 कि। पिंकी कां फिगर 30-24-34 औऱ रिंकी कां 30-28-38। पिंकी अधिक मस्त लगती थि। मोर्डन टाइप कि थि दोनों, कसी हुई जींस औऱ टॉप हि पहनती थि। रात कों सोते टाइम एक् ढीला निक्कर जौ जांघों तक हि रहता थां औऱ गहरेगले कि टी-शर्ट।
सुभहजब घऱ मे बगीचे मे टहलती थि तब मे भि उन्हें देखने केँ लिएचला जाता, कई बारबात भि होँ जाती थि जिससे पताचला कि दोनों बहनें एक् दूसरी सें खुली हें।
एक् महीना होँ गय़ा थां उनको हमारे यहा रहतेहुए तोँ मेरेघऱ वालों नें कहा कि जाकर किराया लें आँ।
साम कां वक्त थां, मे भि चला गय़ा। एक् छोटा सां ड्राइंगरूम, एक् बेडरूम, किचन औऱ एक् बाथरूम थां। मे चला गय़ा, दरवाजा खुलाहुआ थां। मे बिना दरवाज़ा खटखटाए अंदरचला गय़ा।
बेडरूम सें आवाज़ आँ रही थि, मैंने जाकर देखा तौ हैरान रह गय़ा। पिंकी रिंकी कि गोद मे बैठी हुइ थि, रिंकी नें टॉप नहि पहना थां औऱ रिंकी पिंकी कां टॉपऊपर करके उसकी मम्मों दबारही थि औऱ गले पऱ चूमरही थि, टेलीविज़न पऱ लेस्बियन वाली फिल्म चलरही थि, मेज़ पर्र बीयररखी हुइ थि।
पिंकी कि मम्मों क्याँ मस्तलग रही थि, मनकररहा थां कि अभि जाकरचूस लूँ। रिंकी कि भि ठीक थि पर्र थोड़ी लटकी हुईँ थि।
मे अपना लण्ड सहला हि रहा थां उनकोदेख कर कि रिंकी कि नजर मेरेऊपर पड़ गई। मे डर गय़ा औऱ बिनाकुछ बोले जानेलगा औऱ वोँ भि स्वयं कों सँभालने लगी। मे वहा सें चलाआया।
उसकेबाद मे उनकोकुछ दिनों तक दिखाई नहि दिया।
एक् दिन मे वहीं बगीचे मे बैठाहुआ थां तौ दोनों बहनें आई, मेरेपास बैठ गई। मे उन दोनों कों देखकर डर गय़ा कि कहीकुछ बोलें याँ डांटेंगी, आखिरकार दोनों तोँ मेरे सें बड़ी थि।
वोँ दोनों मेरे सामने घास पऱ बैठी हुई थि। वही पहनाहुआ थां एक् निक्कर जांघों तक औऱ एक् छोटा सां टॉप।
रिंकी बोलीं- औऱ क्याँ हाल हैं? क्याँ चलरहा हैं?
मैंने थोड़ा डरतेहुए कहा-ठीक हैं!
औऱ जाने कों हुआ तोँ पिंकी नें मेराहाथ पकड़ केँ रोक लिया औऱ कहा- रुको तोँ सही! हम् बात करनेआई हें औऱ तुम् जारहे हौ।
उनकी गोरी गोरी जांघें देखकर मेरा लण्ड भि खड़ाहुआ पड़ा थां थोड़ा सां, लड़कियाँ चालू तोँ थि हि। रिंकी कि नजर मेरेखड़े हुए लण्ड पऱ पड़ गई।
उसने पिंकी सें कहा- लड़का जवान होँ गय़ा हैं।
मैंने कहा- केसे क्याँ हुआ?मुझ कुछसमझ मे नहि आया।
तभी रिंकी नें मेरे लण्ड कों हल्का सां छुआ औऱ कहा-ये जौ हमेंदेख करऐसा हौ रहा हैं।
मे शरमा गय़ा।
पिंकी नें कहा-कोई बात नहि, जवानी मे ऐसा होता हैं।
मुझकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां कि मे क्याँ बोलूँ, मैंने उनसेपूछ हि लिया- तुम् दोनों एक् दूसरी सें इतनी खुली केसे हौ? औऱ मेरे सें भि ऐसीबात करनेलगी?
तौ पिंकी नें कहा-चलो तुम्हें अबबता हि देते हें कि हम् ऐसी क्यूं हें।
आगे कि कथा पिंकी कि जुबानी:
पिंकी बोलती रही- मे औऱ रिंकी जब छोटी थि तौ माँ-बापू रात कों कुछ करते थें, हमेंसमझ मे नहि आता थां, आवाजें आती थि। एक् रात हमने देखा तौ क्याँ देखा कि पिताजी मां कों चोदरह थें। हमेंउस वक्त मालूम भि नहि थां कि वोँ क्याँ कररहे हें। विद्यालय मे सहेलियों सें पूछा तौ पताचला कि उसे चोदना कहते हें। हमेंदेख कर मज़ा भि आता। ऐसे हि समय गुजरता गय़ा।
एक् हमारा भइया थां वोँ हमसे बड़ा थां तीनसाल। एक् बार हमारी विद्यालय सें जल्द छुट्टी होँ गई। हम् आईं तोँ दरवाजा खुलाहुआ थां। हम् अन्दर गई तौ सारे कमरेबंद थें, भइया कां रूम थोड़ा खुलाहुआ थां। हमने चुपके सें देखा तौ भइया पूरा नंगा शीशे केँ सामने खड़ा थां, उसका सफ़ेद जिस्म हमरे सामने थां, वो अपने लण्ड पऱ तेललगा रहा थां, उसके गोरे चूतड़ हमेंदिख रहे थें।
तेल लगाने केँ बाद वोँ खाट पर्र लेट गय़ा औऱ लण्ड सहलाने लगा। उसकाछह इंच कां लण्ड हमने पहलीबार देखा थां। वैसे तौ बापू कां देखा थां पर्र उस वक़्त वोँ बुर केँ अंदर-बाहर् होँ रहा थां।
तोँ भइया लण्ड सहलारहा थां औऱ पिंकी कां नाम लें रहारहा थां। पिंकी छोटी हैं पऱ रिंकी सें अधिक सेक्सी हैं।
भइयाबोल रहा थां- मेरे सारे साथी तेरे कों चोदना चाहते हें पिंकी! क्याँ मस्त गाण्ड औऱ मम्मों हैं तेरी! एक् बार दिखादे बस, देख कर हि मुठमार लूँगा। रिंकी तुँ भि कम नहि! बस तेरी चूचियाँ छोटी हें!
कुछदेर मे भइया कां माल निकलआया औऱ हम् अपने कमरे मे आँ गए।
रात कों नींद हमारी आँखों सें गायब थि।
रिंकी नें मुझसे कहा- क्याँ हम् सेक्सी हें जौ हमें हमारा भइया औऱ उसकेयार चोदना चाहते हें?
मैंने कहा-अरे वोँ तौ ये भि कहरहा थां कि अपना नंगा जिस्म दिखादूँ तौ देखकर हि मुठमार लेगा।
रिंकी नें कहा- नींद नहि आँ रही! अच्छा ऐसा क्याँ हैं हमारे पास जिससे हम् सेक्सी हें?
औऱ रिंकी उठ गई, कहा- वोँ तोँ हमें कपड़े उतारने केँ बाद हि पता चलेगा।
मैंने कहा- क्याँ दिदी, हम् एक्-दूसरी केँ सामने नंगी होंगी?
रिंकी नें कहा- तोँ क्याँ हुआ? हम् दोनों लड़कियाँ हें औऱ दोनों बहनें भि हें तोँ दिक्कत क्याँ हैं?
रिंकी नें अपनाटॉप उतार दिया। उसके संतरे बाहर् आँ गए। फिन रिंकी नें मेराटॉप उतार दिया तौ मेरे मम्मे भि बाहर् आँ गए। मेरे मम्मे रिंकी केँ स्तन सें बड़े थें। फिन रिंकी नें अपनी निक्कर उतार दि औऱ फिन मेरी। रिंकी कि बुर थोड़े बाल थें पऱ मेरी बुर केँ आसपास तौ सिर्फ़ रोंएँ सें थें, हम् दोनों एक् दूसरे केँ सामने नंगी थि।
रिंकी नें मेरे स्तन कों छुआ तौ मेरीआह सि निकल गई। रिंकी नें मेराहाथ पकड़ा औऱ अपनी मम्मों दबाने कों कहा। धीरे-धीरे धीरे-धीरे हम् दोनों एक् दूसरी कि चूचियाँ दबाने लगी औऱ एक् दूसरी कों चूमने लगी। रिंकी अपनाहाथ मेरी बुर पर्र लें आई तोँ मे सिहर गई औऱ रिंकी सें अलग होँ गई।
फिन रिंकी नें केसे भि मुझे मनाया औऱ मेरी बुर कों सहलाने लगी। मैंने भि अपनाहाथ रिंकी कि बुर पर्र रख दिया औऱ सहलाने लगी। कुछ देर मे रिंकी मेरी चूचियाँ चूसने लगी, फिन मैंने रिंकी केँ संग भि ऐसा हि किया।
कुछ देर हम् दोनों नें एक्-दूसरी कि बुर चाटी औऱ फिन दोनों नें अपना अपना पानी निकाल लिया। हम् दोनों कों उसदिन बहोत आनंदआया।
स्टोरी कई भागों मे हैं।
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चुद्दक्कङ गर्लस
भाग -2
पिछले भाग मे आपनेपढ़ा कि पिंकी नें मुझे अपने परिवार केँ सेक्सी माहौल केँ बारे मे औऱ अपनी बेहन रिंकी केँ संग अपने पहले यौनान्द केँ बारे मे बताया।
तभी पिंकी नें कहा- मेरी पैंटी गीली हौ गई हैं ! आगे क्याँ हुआ, रिंकी बताएगी, मे अभि जाती हूं।
अब रिंकी कि जुबानी :
इसतरह हम् दोनों बहनें रात कों मजे करती थि, एक्-दूसरी कों मसलती-चूमती, बुर मे उंगली करती। मगर इसबीच हमेंये पता नहि थां कि कोई हमेंदेख रहा हैं। वोँ औऱ कोई नहि हमारा बड़ा भइया महेश। वोँ रोज दरवाजे केँ छेद सें देखता थां कि उसकी छोटी बहनें क्याँ कररही हें औऱ वोँ हमेंदेख करमुठ मारता।
एक् दिन हमनेरूम बंद नहि किया औऱ सोचा कि देखें हमारा भइया क्याँ करता हैं। हम् दोनों सोने कां नाटक करनेलगी।
महेश नें पहले देखा कि क्याँ हौ रहा हैं, जब उसने देखा कि दरवाजा खुलाहुआ हैं तौ वोँ दरवाजा खोलकर अंदर आँ गय़ा। पहले उसने हमारे नाम लेकर दोनों कों धीरे-धीरे सें आवाज़ लगाई, ये देखने केँ लिए कि दोनों सोरही हैं याँ नहि।
उसेजब पूरा यकीन होँ गय़ा कि हम् दोनों सोरही हैं तौ वोँ पिंकी केँ पास गय़ा। हम् दोनों नें औऱ दिनों कि तरह एक् निक्कर औऱ एक् छोटा सां टॉप पहनाहुआ थां, अंदर ब्रा-पैंटी नहि पहनी थि। पिंकी सांस लेँ रही थि तोँ उसकी मम्मों उठरही थि। महेश नें धीरे-धीरे सें पिंकी केँ गालों पर्र हाथ लगाया औऱ सहलाया। पिंकी कि तरफ़ सें कुछ हरकत न् होने पर्र महेश पिंकी केँ होंठफिन चूचों पर्र आया धीरे-धीरे सें दबाया। धीरे-धीरे धीरे-धीरे वोँ हम् दोनों चूचियाँ दबाने लगा। उसने भि एक् निक्कर पहनी हुईँ थि। उसने अपना लण्ड निकाल लिया औऱ कभी उसकी चूचियाँ दबाता तोँ कभी अपना लण्ड सहलाता। बीचबीच मे देखता भि रहा कि कही मे याँ पिंकी जाग नाँ जाएँ पर्र उसे क्याँ मालूम थां कि हम् दोनों हि जागरही हें औऱ सोने कां नाटककर रही हें।
फिन उसने पिंकी कि टॉपऊपर कर दि औऱ उसकी चूचियाँ दबाने लगा, अपना लण्डजोर जोर सें हिलाने लगा। फिन वोँ उसकी मम्मों चूसने लगा। फिन वोँ खाट पर्र आँ गय़ा औऱ लण्ड हिलाने लगा औऱ थोड़ी हि देर मे पिंकी केँ पेट पऱ अपना पानी निकाल दिया। फ़िर कपड़े सें साफ़ करके उसकाटॉप नीचे करकेरूम बंद करकेचला गय़ा।
उसदिन पिंकी कां पहला अनुभव थां जिसे मे भि महसूस करना चाहती थि इसलिये पिंकी जींस औऱ फुल टी-शर्ट ब्रा-पैंटी साराकुछ पहनकर लेटी औऱ मे जानबूझ कर बिना ब्रा-पैंटी केँ एक् छोटा स्कर्ट औऱ शर्टपहन कर लेटी। उस दिन भि हमनेरूम खुला छोड़ दियातकि महेश अंदर आँ सके।
वही हुआ जिसका हम् दोनों कों इन्तजार थां, दोनों जागरही थि। पिंकी नें पूरे कपड़े पहनेहुए थें औऱ मैंने दिखाने केँ लिए एक् घुटना मोड़ लिया ताकि महेश मुझे बिना पैंटी केँ देखसके औए मुझसे मजे लें सके। संग हि मैंने कमीज केँ दोबटन भि खोल केँ रखे थें जिससे मेरी चूचियों कां थोड़ाभाग दिखरहा थां। महेश सीधे मेरेपास आया औऱ पिछले दिन कि तरह आवाज़ लगाकर देखा, फिन मेरी जांघों कों सहलाने लगा। कुछ देरबाद उसने मेरे कमीज केँ सारेबटन खोलदिए। मेरे दोनो कबूतर आजाद हौ गए महेश उन्हें दबाने लगा,
फिन कुछदेर बाद मेरे चुचूकों कों चूसने लगा। फिन उसने अपना लण्ड निकाला औऱ मेरेहाथ मे पकड़ाकर स्वयं हिलने लगा।
मैंने लण्ड पहलीबार हाथ मे लिया थां तोँ मे थोड़ाडर सि गई। फिन महेश नें मेरी स्कर्ट खोलकर घुटनों तक सरका दि। मेरी नंगी बुर देखकर उसका लण्ड औऱ भि कड़क होँ गय़ा जौ पहले हि मेरेहाथ मे थां। उसने मेरी टांगों कों थोड़ा सां खोला औऱ बुर पऱ हल्का सां चुम्बन किया, फिन हाथ सें सहलाने लगा।
मे भि गरम होनेलगी थि। अब वोँ पूराखाट पर्र आँ गय़ा औऱ अपना लण्ड मेरी बुर पऱ रगड़ने लगा। रगड़ रगड़कर उसने बुर लालकर दि औऱ मे चाहकर भि कुछ नहि करपारही थि।
फिन थोड़ीदेर मे वोँ मेरी बुर केँ ऊपर हि झर गय़ा औऱ अपना लण्ड मेरी स्कर्ट सें साफ़ करके मुझे वैसा हि छोड़ गय़ा। जाते जाते महेश पिंकी केँ गालों पर्र चुम्बन किया औऱ हल्के सें मम्मों दबा गय़ा।
मे कुछदेर बादउठी अपने कों साफ़ किया, पिंकी भि उठी, रूम बंद किया औऱ हम् दोनों एक् संगबैठ गई।
मैंने कहा- दोस्त, मज़ा तोँ आया पर्र आधेमजे मे छोड़कर चला गय़ा स्वयं कां निकाल कर !
फिन हम् दोनों एक् दूसरे सें लिपट गई औऱ दोनों नें एक् दूसरे कि बुर मे उंगली कि औऱ सो गई।
स्टोरी जारी रहेगी।
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चुद्दक्कड गर्ल्स
भाग-3
एक् दिन पिंकी औऱ रिंकी दोनों विद्यालय सें आई तोँ महेश केँ कमरे सें किसी केँ बोलने कि आवाज़ आई। वोँ दबेपैर उसके कमरे कि तरफ गई औऱ देखने कि कोशिश करनेलगी तोँ देखा कि महेश अपने साथी सूरज केँ संग थां औऱ दोनों नंगे होकर अपना अपना लण्डहाथ मे लिए सहलारहे थें। सूरज थोड़ा काला थां इसलिये उसका लण्ड भि काला थां पऱ महेश सें बड़ा थां।
सूरजकह रहा थां- अरे दोस्त, अपनी बेहन कि दिलवा दे, जौ मांगेगा वोँ दूँगा।
तौ महेश नें कहा-अरे, मुझे तौ लें लेनेदे ! अच्छा, अगर मैंने दिलवा दि तौ तुँ क्याँ देगा।
सूरज नें कहा- जौ भि कहेगा, दूँगा।
तोँ उसनेकहा- अच्छा, ठीक हैं, मे अपनी बेहन कि दिलवाऊँगा औऱ तूँ अपनी बड़ी बेहन कि दिलवा दे।
सूरज-अबे, उसमें क्याँ बड़ीबात हैं ! रंडी हैं पूरी वोँ तोँ ! कईबार उसको उसके दोस्तों सें चुदते हुए देखा हैं। एक् दोबार तौ विद्यालय केँ टीचर सें भि।
येदेख कर पिंकी औऱ रिंकी भि बाहर् चली गई औऱ जोर सें बात करती- बोलते हुए अन्दर आँ गई ताकिउन दोनों कों मालूम चलजाए कि वोँ घऱ मे आँ गई हें। उनकेआते हि दोनों कमरे सें बाहर् आये, सूरज नें दोनों कों हेलोकहा औऱ चला गय़ा।
उसीदिन उनकी माँ महेश कों लेकर अपने मायके चली गई। अब वो केवल दोनों बहनें औऱ उनके पिताजी नवीनघऱ मे थें। रात कों दोनों कों नींद नहि आँ रही थि क्योंकि मर्द केँ हाथ लगवाने कि आदतलग चुकी थि, भइया तोँ थां नहि।
पिंकी उठी, बाहर् गई उसके बापू केँ कमरेली लाइटजल रही थि उसकी दरवाजे कि छेद सें देखा औऱ फिन रिंकी कों बुलाकर लाई। उसके बापू अपने झांट केँ बालकाट रहे थें। सफ़ेद लण्डलाल सुपारा, दोनों देख केँ सिहर गई सातइंच कां लण्डदेख कर। बाल काटने केँ बाद वोँ तेल लाये औऱ लण्ड पर्र मलनेलगे औऱ मलने केँ बादमुठ मारने लगे, बोलने लगे-आज रात शांत हौ जाबस ! कल तेरेलिए नई बुर कां इंतजाम करता हूं।
औऱ कुछदेर मे ढेर सारा वीर्य जमीन पर्र गिरा दिया।
रात बीती, अगलादिन भि बीत गय़ा, फ़िररात हुईँ। रात केँ गयारह बजे होंगे कि रिंकी-पिंकी कों उनके बापू कि आवाज़ सुनाई दि। रिंकी नें धीरे-धीरे सें दरवाजा खोलकर देखा तोँ कमरे मे नवीन केँ संग एक् जवान लड़की थि औऱ लाइटजल रही थि। रिंकी नें पिंकी कों इशारा करके बुला लिया। दोनों दरवाजे केँ छेद सें देखरही थि कि कोईबीस साल सें भि कम उम्र कि लड़की उनके बापू कां लण्डचूस रही हैं औऱ वोँ उसकी मम्मों मसलरहे हें। दोनों बिलकुल नंगे थें।
दस मिनटबाद लड़की नें कहा-अब मेरा मुँह दर्दकर रहा हैं।
तोँ नवीन नें कहा- अभि औऱ चूस मेरीजान ! चार घंटे नं मे सोऊँगा औऱ नं तुँ। बसये डंडा तेरे तीनो छेदों मे अंदर-बाहर् होता रहेगा।
औऱ उसकासर पकड़ केँ आगे-पीछे करनेलगे। फिन लण्ड निकाला औऱ चूचियाँ जोरजोर सें मसलने लगे औऱ चूसने लगे। आधे घंटे तक चूसचूस केँ लालकर दिया। फिन बुर चूसने लगे औऱ दाने कों मसलने लगे। वोँ लड़की इतनीदेर मे कईबार झर चुकी थि।
अब उन्होंने अपना लण्ड बुर कि छेद पऱ रखा औऱ एक् धक्का दियाफिन बिना रुके दूसरा। औऱ लण्ड पूरा अन्दर चला गय़ा।
उसकी तौ चीख निकल गई तौ नवीन नें उसके मुँह पर्र हाथरखा औऱ कहा-अबे, मेरी बेटियाँ जाग जाएँगी।
तौ उसने गाली देकरकहा- बेटीचोद, अपनी बेटी कि उम्र कि लड़की कि इतनी बेरहमी सें माररहा हैं ! थोड़ा आहिस्ता कर।
नवीन नें कहा- क्याँ करूँजान, तुम्हारी जैसीनई बुर कई दिनों बाद मिली हैं। इसलिये सब्र नहि हौ रहा।
औऱ लण्डआगे पीछे करनेलगे। आधे घंटे चोदने केँ बाद नवीन नें पूछा-बता कहां झरूँ?
तोँ उसनेकहा- पहले मेरी बुर मे हि ! बाद मे मुँह मे।
औऱ फिन नवीन नें ढेर सारा वीर्य उसकी बुर मे भर दिया।
उस रात नवीन नें उसकीबार दो बुर औऱ एक् बार गाण्ड मारी औऱ सुभह पाँचबजे सें पहले हि घऱ सें भेज दिया।
उस दिन रिंकी-पिंकी भि विद्यालय नहि गई, सोचने लगी कि देखकर काम नहि चलेगा।
दोनों नें ठान लिया कि किसी कों पटाया जाये औऱ उससेमजे लिए जाएँ। पऱ सोचने कि बातये थि कि पटाया किस कों जाये।
किस्सा जारी रहेगी।
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