चुदक्कड गर्ल्स - लेस्बियन – New Episode
चुद्दक्कड गर्ल्स
भाग -4
उसरात नवीन नें उसकीबार दो बुर औऱ एक् बार गाण्ड मारी औऱ सुभह पाँचबजे सें पहले हि घऱ सें भेज दिया।
उस दिन रिंकी-पिंकी भि विद्यालय नहि गई, सोचने लगी कि देखकर काम नहि चलेगा।
दोनों नें ठान लिया कि किसी कों पटाया जाये औऱ उससेमजे लिए जाएँ। पर्र सोचने कि बातये थि कि पटाया किस कों जाये। भइया सें करें तौ नाता ख़राब हौ जायेगा। इसलिये भइया केँ मित्र सूरज कां ख्याल आया, छह इंच कां काला लम्बा लण्ड उनकी आँखों केँ सामने छा गय़ा।
उन्होंने सूरज कां नंबर खोजा औऱ नंबर मिलाया, कहा- जल्द सें घऱ आँ जाओ, कुछ बात करनी हैं।
वोँ जल्दी घऱ आँ गय़ा। सूरज केँ आते हि उन्होंने उसे बैठाया।
सूरज नें पूछा- महेश तोँ हैं नहि, फिन क्यूं बुलाया?
रिंकी नें कहा- जौ उसदिन तुम् कररहे थें उसके बारे मे बताने केँ लिए।
सूरज घबरा गय़ा, कहनेलगा- क्याँ तुम् दोनों नें वोँ सभी देखा थां?
पिंकी नें कहा-हाँ। कि केसे महेश नें तुम्हारी औऱ तुमने महेश कि…
इतना हि कहा थां कि सूरजबोल पड़ा- प्लीज किसी कों बताना मत।
रिंकी नें कहा-अरे, ये तौ इतनी गन्दी बात हैं कि किसी कों बताई नहि जा सकती, पऱ बतानी पड़ेगी, अपनी बड़ी बेहन केँ बारे मे ऐसा सोचते हौ औऱ हमारे बारे मे भि? सूरज कहनेलगा- नहि तुम् जोँ मांगो, मे दे दूंगा पऱ किसी सें कहनामत।
तौ रिंकी नें कहा-चल तुझेही हम् येसजा देती हें कि हमारे संग भि वहीकर जौ तूँ करने कि कहरहा थां पर्र हमारे भइया कों याँ किसी कों पता नहि चलना चाहिए।
सूरज कि तौ बल्ले बल्ले हौ गई। एक् संगदो नएमाल, जहाँउसे एक् भि नसीब होने केँ फ़ाके थें, वहादो मिलगए।
सूरज नें कहा-चलो ठीक हैं, मे किसी कों नहि बताऊँगा।
पिंकी नें कहा- पहलेचलो, तीनो नहाते हें फिन करेंगे।
सूरज नें कहा- मे कपड़े क्याँ पहनूँगा?
तोँ पिंकी नें कहा-अबे, कपड़ेपहन करकौन नहारहा हैं, तीनो नंगे नहायेंगे। तीनो नंगे बाथरूम मे नहाये खूब रगड़ रगड़ केँ एक् दूसरे कों नहलाया। फिन तीनो बेडरूम मे आये औऱ दोनों बहनों नें सूरज कों लिटा दिया। कपड़े उतारने कि तौ जरुरत थि नहि, पहले सें हि उतरेपड़े थें। रिंकी उसका लण्डचूस रही थि औऱ पिंकी उसकेहोठ चूमरही थि। फिन दोनों केँ स्थान बदलली। रिंकी उसके होंठचूस रही थि औऱ पिंकी सूरज कां लण्डचूस रही थि।
फिन दोनों लेट गई औऱ सूरज नें बारी बारी सें दोनों केँ मम्मे दबाये, चूसे औऱ बुर चाटी।
अब दोनों कों सब्र नहि हौ रहा थां, रिंकी नें कहा- मे बड़ी हूं, पहले मुझेचोद।
तौ सूरज नें अपना लण्ड उसकी बुर पऱ रखा औऱ एक् धक्का दिया। अभि सुपारा हि अन्दर गय़ा थां कि रिंकी दर्द केँ मारे चीखने लगी।
सूरज नें कहा- रिंकी, पहलीबार ऐसा होता हैं। थोड़ा दर्दसहो, बाद मे आनंद आएगा।
फिन एक् औऱ धक्का दिया तोँ आधा लण्ड अंदरचला गय़ा औऱ रिंकी कि बुर सें खून निकालने लगा। औऱ तीसरे धक्के मे पूरा लण्ड अंदरचला गय़ा। रिंकी कि आँखों सें आंसू निकलरहे थें। पिंकी उसकेपास लेट गई औऱ उसे प्रेम करनेलगी, उसकी मम्मों सहलाने लगी औऱ फिन चूसने लगी।
जब रिंकी कां दर्दकम हुआ तोँ सूरज नें धक्के देने चालू किये। पन्द्रह मिनट केँ बाद रिंकी औऱ सूरज दोनों नें अपना पानी निकाल दिया। सूरज नें रिंकी कि बुर सें अपना लण्ड निकाला औऱ बगल मे लेटकर आराम करनेलगा। रिंकी भि चुपचाप सांस लें रही थि, पूरे कमरे मे दोनों कि साँसों कि आवाज़ हि आँ रही थि।
तभी पिंकी नें कहा- क्यूं सूरज, अभि थकगए? अभि तौ मे बाकी हूं। औऱ रिंकी भि शायद औऱ करेगी।
तौ रिंकी नें कहा- नहि, अब मे नहि करुँगी औऱ किसीदिन कर लूँगी। अभि तुँ कर लेँ, तेरी बारी हैं।
तोँ पिंकी नें उसका लण्डसाफ़ किया औऱ चूसने लगी। पाँच मिनट मे उसका लण्डफिन खड़ा हौ गय़ा। औऱ फिन पिंकी कि बुर पर्र लण्डरख कर एक् धक्का दिया औऱ आधा लण्डचला गय़ा औऱ उसकीसील टूट गई। उसकी बुर सें भि खून निकाल रहा थां, वोँ रोनेलगी थि।
रिंकी उसकेपास आई औऱ उसके होंठ चूसने लगी। तभी सूरज नें एक् औऱ धक्का दिया औऱ पूरा लण्ड उसकी बुर मे उतार दिया।
पिंकी कि तोँ जैसे साँसरुक गई हौ कुछ वक़्त केँ लिए।
सूरज नें उसके चूचे सहलाये औऱ रिंकी उसके होंठचूम रही थि औऱ उसकी मम्मों दबारही थि।
दस मिनटबाद थोड़ा आराम मिला तौ वोँ अपने आप् गाण्ड उठाउठा कर चुदने लगी औऱ सूरज नें भि धक्के चालूकिए। सूरज पिंकी कों तेजतेज चोदरहा थां। बीस मिनट हौ गए थें, रिंकी झर चुकी थि अबउसे दर्द होनेलगा थां, कहनेलगी- दर्द होँ रहा हैं, निकाल लो।
तोँ सूरज नें कहा- अभि मेरा नहि हुआ, केसे निकाल लूँ।
तौ रिंकी पीछेआई औऱ सूरज कि गाण्ड मे उंगली डाल दि। सूरज चिहुंका।
रिंकी अपनी उंगली आगे-पीछे कररही थि। सूरज कों उत्तेजना अधिक हुइ औऱ वोँ कुछ हि देर नें पिंकी कि बुर मे झर गय़ा औऱ निढाल होकरपड़ गय़ा।
तीनो नंगेपड़े थें। पूराखाट खून सें लाल हौ गय़ा थां।
सूरजउठा औऱ कपड़े पहने औऱ चला गय़ा। दोनों बहनें भि उठी, कपड़े पहने, पलंग धोया, साफ़ किया औऱ बाते करनेलगी- साले कों एक् दिन मे हि दो कच्ची सील तोड़ने कां मौकामिल गय़ा !
पिंकी नें कहा-चलो, एक् बात तौ हैं ! घऱ कि बातघऱ मे रही, कहीं बाहर् जाने कि जरुरत नहि पड़ी औऱ आनंद भि मिल गय़ा।
रिंकी नें कहा-हाँ, वोँ तौ हैं।
तब सें दोनों नें ठान लिया कि जहाँ मौका मिलेवहा आनंद लेँ लेंगी।
रिंकी केँ बारहवीं होने तक दोनों नें सूरज केँ लण्ड सें मौज कि औऱ किसी कों पता भि नहि चला। बारहवीं केँ बाद रिंकी अपने मामाजी केँ घऱचली गई, वहा कॉलेज मे दाखिला लें लिया। वहा उसके मामाजी-मामीजी औऱ उनका एक् बेटा विवेक जिसकी उम्र 22 साल थि। यहा पिंकी अकेली रह गई औऱ बारहवीं कि पढ़ाई करनेलगी। सूरज भि औऱ कहींचला गय़ा थां।
पिंकी रात कों बस उंगली करती औऱ सो जाती। कभी कभारपेन याँ मोमबत्ती सें काम चलाती।
किस्सा जारी रहेगी।
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चुद्दक्कड गर्ल्स
भाग - 5
सूरजउठा औऱ कपड़े पहने औऱ चला गय़ा। दोनों बहनें भि उठी, कपड़े पहने, पलंग धोया, साफ़ किया औऱ बाते करनेलगी- साले कों एक् दिन मे हि दो कच्ची सील तोड़ने कां मौकामिल गय़ा !
पिंकी नें कहा-चलो, एक् बात तौ हैं ! घऱ कि बातघऱ मे रही, कहीं बाहर् जाने कि जरुरत नहि पड़ी औऱ आनंद भि मिल गय़ा।
रिंकी नें कहा-हाँ, वोँ तौ हैं।
तब सें दोनों नें ठान लिया कि जहाँ मौका मिलेवहा आनंद लेँ लेंगी।
रिंकी केँ बारहवीं होने तक दोनों नें सूरज केँ लण्ड सें मौज कि औऱ किसी कों पता भि नहि चला। बारहवीं केँ बाद रिंकी अपने मामाजी केँ घऱचली गई, वहा कॉलेज मे दाखिला लेँ लिया। वहा उसके मामाजी-मामीजी औऱ उनका एक् बेटा विवेक जिसकी उम्र 22 साल थि। यहा पिंकी अकेली रह गई औऱ बारहवीं कि पढ़ाई करनेलगी। सूरज भि औऱ कहींचला गय़ा थां।
तोँ बातआती हैं पहले पिंकी कि। रात कों बस उंगली करती औऱ सो जाती। कभी कभारपेन याँ मोमबत्ती सें काम चलाती।
एक् दिन पिंकी पानी पीने केँ उठी तोँ देखा उसका भइया महेश अपने मां पिताजी केँ कमरे केँ आगेखड़ा अपना लण्ड सहलारहा हैं।
पिंकी अच्छा मौकादेख कर बाहर् गई औऱ महेश सें पूछा- क्याँ कररहे होँ?
वोँ घबरा सां गय़ा औऱ लण्ड कच्छे मे डाल लिया।
पिंकी नें भि देखा तौ उसके पिताजी उसकी अम्मी कि गाण्ड मे लण्डडाल कर आगे-पीछे कररहे हैं। येदेख पिंकी कों भि मज़ाआने लगा। महेश उसके पीछे हि खड़ा थां। पिंकी नें कच्छे केँ ऊपर सें हि उसका लण्डपकड़ लिया औऱ दबाने लगी।
महेशबस पिंकी कों देखता रह गय़ा, महेश नें भि पिंकी केँ मम्मे उसकेटॉप केँ ऊपर सें पकड़लिए औऱ दबाने लगा। पिंकी सिसकारियाँ लेनेलगी तौ महेशउसे उठाकर अपने कमरे मे लेँ गय़ा औऱ दरवाज़ा बंद करके सीधा उसके होंठ चूसने लगा औऱ मम्मे दबाने लगा। पिंकी भि उसका पूरासंग देरही थि।
महेश नें उसकाटॉप उतार दिया औऱ उसके नंगे बूब्ज़ कों चूसने लगा।
पिंकी सिसकारियाँ लेँ रही थि औऱ कहरही थि- चूस औऱ चूस ! काट लेँ मेरे मम्मे।
फ़िर महेश नें पिंकी कि पैंटी उतार दि औऱ बुर चाटने लगा। पिंकी कि बुर पानी छोड़ने लगी। वोँ उठी औऱ महेश कां लण्ड कच्छे सें निकाल लिया औऱ चूसने लगी, वोँ कभी लण्ड तौ कभी गोलियाँ भि चूसरही थि।
तब पिंकी सें रहा नहि जारहा थां तोँ महेश सें उसनेकहा- अब औऱ नहि सहा जाता, चोद दो मुझे !
उसने अपना लण्ड उसकी बुर पर्र रखा औऱ एक् धक्का दिया तौ एक् हि धक्के मे पूरा लण्ड अन्दर चला गय़ा।
महेश हैरान थां कि इसकी बुर कि सील टूटी केसे?
उसनेपूछ हि लिया तोँ पिंकी नें कहा-बस उंगली सें याँ मोमबत्ती सें करती थि।
तोँ महेश नें कहा- रिंकी नें तौ नहि तोड़ दि जब तुम् दोनों एक् संग करती थि?
तौ पिंकी नें कहा- तुम् हमें देखते थें?
तौ महेश नें कहा-हाँ, देखता थां।
पिंकी कहनेलगी- तभीरात कों कमरे मे आकर हमारे संग वोँ सभी करते थें।
महेश भि हैरान- तौ क्याँ तुम् जागरही होती थि उससमय?
तौ पिंकी नें कहा-हाँ भइया, हम् जागरही होती थि औऱ मजे लेँ रही होती थि।
औऱ महेश कां जोश औऱ बढ़ गय़ा औऱ वोँ तेजतेज धक्के लगाने लगा। पन्द्रह मिनट चोदने केँ बाद दोनों लुढ़क करलेट गए। कुछ देर आराम करने केँ बाद महेश पिंकी कि मम्मों चूसने लगा औऱ कहा- पिंकी, गाण्ड भि मारने दे।
तौ पिंकी नें कहा-जब बुर नहि छोड़ी तोँ गाण्ड भि मारलो।
पिंकी महेश कां लण्डखड़ा करनेलगी औऱ फिन महेश नें पिंकी कि गाण्ड पर्र थोड़ाथूक लगाया औऱ थोड़ा अपने लण्ड पऱ औऱ एक् धक्का दिया औऱ दो धक्कों मे हि उसकी गाण्ड मे महेश कां लण्डउतर गय़ा।
अब महेश नें आगे-पीछे करना शुरुआत किया।
पिंकी नें थोड़ीदेर बादकहा- अब तुम् लेटजाओ, मे ऊपरचढ़ कर गाण्ड मे लूँगी।
तौ महेश नीचेलेट गय़ा औऱ पिंकी ऊपर सें उसका लण्ड गाण्ड मे लेँ लिया औऱ ऊपर-नीचे होनेलगी। कुछदेर बाद पिंकी औऱ महेश दोनों झरगए औऱ आहिस्ता लेटगए।
महेश नें कहा- क्यूं पिंकी, मज़ाआया नं?
पिंकी नें कहा- भइया, तुमने अपनी बेहन कों चोद दिया।
तौ महेश नें कहा-अरे दोस्त, थोड़ीदेर केँ भूलजा कि हम् भइया-बेहन हें बस तुँ एक् लड़की हैं औऱ मे एक् लड़का ! औऱ फिन क्याँ तूँ ये नहि चाहती थि? तेरी आनंद नहि आया?
तोँ पिंकी शरमा गई औऱ महेश केँ गले सें लग गई। फिन दोनों रात कों रोज चुदाई कां खेल खेलने लगे। महेश नें पिंकी कों कईबार अपनेयार सें चुदवाया औऱ कभी कभार दोनों एक् संग चोदते थें।
तौ ये तौ हौ गई पिंकी कि दास्तान !
औऱ अगली स्टोरी मे रिंकी नें अपने मामाजी केँ घऱ क्याँ करती थि औऱ केसे करती थि।
स्टोरी जारी रहेगी।
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चुद्दक्कड गर्ल्स
भाग-6
महेश नीचेलेट गय़ा औऱ पिंकी ऊपर सें उसका लण्ड गाण्ड मे लेँ लिया औऱ ऊपर-नीचे होनेलगी। कुछदेर बाद पिंकी औऱ महेश दोनों झरगए औऱ आहिस्ता लेटगए।
महेश नें कहा- क्यूं पिंकी, आनंदआया न्?
पिंकी नें कहा- भइया, तुमने अपनी बेहन कों चोद दिया।
तोँ महेश नें कहा-अरे दोस्त, थोड़ीदेर केँ भूलजा कि हम् भइया-बेहन हें बस तूँ एक् लड़की हैं औऱ मे एक् लड़का ! औऱ फिन क्याँ तूँ ये नहि चाहती थि? तुम्हें आनंद नहि आया?
तोँ पिंकी शरमा गई औऱ महेश केँ गले सें लग गई। फिन दोनों रात कों रोज चुदाई कां खेल खेलने लगे। महेश नें पिंकी कों कईबार अपनेयार सें चुदवाया औऱ कभी कभार दोनों एक् संग चोदते थें।
तौ ये तोँ हौ गई पिंकी कि दास्तान !
औऱ अगलीकथा मे रिंकी नें अपने मामाजी केँ घऱ क्याँ करती थि औऱ केसे करती थि।
तौ महेश नीचेलेट गय़ा औऱ पिंकी ऊपर सें उसका लण्ड गाण्ड मे लेँ लिए औऱ ऊपर नीचे होनेलगी २५ मिनटबाद पिंकी औऱ महेश दोनों झरगए औऱ आहिस्ता लेटगए। महेश नें कहा- क्यूं पिंकी मज़ाआया नं। पिंकी नें कहा- भइया तुमने अपनी बेहन कों चोद दिया। तोँ महेश नें कहा-अरे दोस्त थोड़ीदेर केँ भूलजा कि हम् भइया बेहन हैं बस तूँ एक् लड़की हैं औऱ मे एक् लड़का औऱ फिन क्याँ तूँ यह नहि चाहती थि। तुम्हारी तरफ मज़ा नहि आया। तौ पिंकी शर्मा गई औऱ महेश लेँ लगे सें लग गई। फिन दोनों रात कों रोज चुदाई कां खेल खेलते थें। महेश नें पिंकी कों कईबार अपने द्सोत सें चुदवाया औऱ कभी कभार दोनों एक् संग चोदते थें।
तोँ यह तोँ होँ गई पिंकी कां अकेलेपन कि दास्ताँ औऱ आगेकथा मे पिंकी कि वोँ वहां क्याँ करती थि। औऱ केसे करती थि।
रिंकी अपने मामाजी केँ यहा कॉलेज मे पढ़ाईकर रही थि। उसके मामाजी कां लड़का किसी औऱ शहर मे जॉबकर रहा थां। वहा मात्र उसके मामाजी वरुण औऱ मामीजी गीता थि। वोँ दोनों भि ठरकी किस्म केँ थें। दोनों रात कों चुदाई करते तोँ रिंकी कों उनकी आवाजें सुनाई देती थि।
एक् दिन रिंकी सें रहा नहि गय़ा तौ वोँ अपने कमरे सें अपने मामाजी केँ कमरे कि तरफबढ़ी तोँ देखा कि गेट खुलाहुआ हैं औऱ उसकी मामीजी गीता औऱ मामाजी वरुण चुदाई कररहे थें बिल्कुल नंगे।
गीता वरुण केँ ऊपर थि औऱ एक् औऱ उसके मामाजी कि उम्र कां व्यक्ति भि थां वहा पऱ। वोँ भि नंगा थां औऱ वोँ मामीजी कि मम्मों चूसरहा थां।
कुछदेर बाद मामीजी नें कहा- सिर्फ़ मम्मों कों हि प्रेम दोगे? मेरी गाण्ड कां छेद अभि खुलाहुआ हैं, इसमें डालदो।
तौ वोँ व्यक्ति पीछेआया औऱ मामीजी कि गाण्ड मे अपना लण्डडाल दिया। मामीजी खूबमजे सें चुदवा रही थि। 15 मिनट तक चोदने केँ बाद मामाजी नें अपना पानी निकाल लिया औऱ कहा-अब आप् हि करो, मे थक गय़ा हूं। आजकाम बहोत किया।
औऱ उस व्यक्ति नें गाण्ड सें लण्ड निकाल कर बुर मे डाल दिया। फिन वोँ भि थोड़ो देरचोद कर कपड़ेपहन करचला गय़ा।
रिंकी भि जाकरसो गई पर्र उसेरात कों नींद नहि आई। इतने दिनों बाद लण्डदेख केँ उसकामन भि ललचा गय़ा। जैसे तैसे रिंकी सो गई, अब रिंकी अगलीरात कां इन्तजार करनेलगी।
रात हौ गई। उसके मामाजी-मामीजी कि चुदाई फिन शुरुआत होँ गई। उसके मामाजी उसकी मामीजी कों चोदरहे थें औऱ कहरहे थें- दोस्त, रिंकी भि अब बड़ी होँ गई हैं।
गीता नें कहा- मतलब?
वरुण नें उसका जवाब देतेहुए कहा- मतलब क्याँ? कभी देखा हैं उसको? उसकी गाण्ड कि तरफ? उसकी चूचियाँ मस्त लगती हें।
गीता-हाँ, लगती तौ हें ! तौ?
वरुण- क्याँ? तौ एक् बार दिलवा दो।
गीता- नहि तोँ तुम्हारी भांजी हैं, उसको चोदोगे?
वरुण- तौ क्याँ हौ गय़ा? तुम्हारे कहने पर्र मैंने भि तोँ नेताजी सें तुमको चुदवाया हैं।
गीता- तौ उसकेलिए तुम् पैसे लेते थें। पहले 15000 औऱ अब 5000/-
वरुण- औऱ मेरेबॉस केँ बेटे केँ संग भि चुदवाने केँ मन थां तुम्हारा, मैंने चुदवाया नाँ?
गीता- उसके कारण तुम्हारा प्रोमोशन भि हुआ थां।
वरुण- औऱ वोँ मजदूरों सें? उनसे तौ कोई फायदा नहि हुआ मेरा।
गीता-हाँ दोस्त ! आनंद आँ गय़ा थां उन लम्बे औऱ काले लण्डों सें ! चलो, तुम्हे रिंकी कि बुर मारनी हैं नां?
वरुण- नहि दोस्त, बुर औऱ गाण्ड दोनों।
गीता- अच्छा ठीक हैं, कुछ जुगाड़ कर दूँगी, तब तक मेरी तोँ प्यास बुझाओ।
वरुण-अगर मान गई तोँ नेताजी सें चुदवा दूंगा। उसके तोँ 25000 लूँगा।
गीता-चलो ठीक हैं ! अब स्पीड बढ़ाओ।
उनकीयह बातें रिंकी सुनरही थि औऱ सुन केँ हैरान रह गई कि उसके मामाजी उसको चोदना चाहते हें औऱ किसी औऱ सें चुदवा कर पैसे भि लेंगे।
उसे अपने मामाजी पऱ क्रोध आँ रहा थां पऱ आनंद भि आने वाला थां कि एक् संगकई दिनों बाद लण्ड मिलने वाले हें।
वोँ अपने कमरे मे गई औऱ सारे कपड़े उतारकर उंगली करकेसो गई।
सुभहउठी औऱ अच्छे सें नहाई औऱ अपनी झांटें साफ़ कि।
उसेपता थां कि अब वोँ जल्द हि चुदने वाली हैं। उसदिन उसके कॉलेज कि छुट्टी थि। इसलिये उसने अपनी पैंटी नहि पहनी औऱ नाँ हि ब्रा। एक् ढीलाटॉप औऱ जांघों तक स्कर्ट पहना थां।
उसके मामाजी वरुण अभि सोकरउठे थें तोँ वोँ लुंगी औऱ बनियान मे थें। रिंकी उनके सामने आकरबैठ गई।
उसकी मामीजी किचन मे थि। रिंकी औऱ उसके मामाजी दोनों बैठकर गरमचाय पीरहे थें। तभी रिंकी नें अपनी टांगें फैलाली औऱ उसके मामाजी कि नजर सीधा उसकी बुर पर्र गई जोँ बिल्कुल गुलाबी दिखरही थि।
देखते हि वरुण कां लण्डखड़ा होँ गय़ा। रिंकी कि नजर सीधाउसी पर्र गई औऱ वोँ धीरे-धीरे सें मुस्कुरा दि।
रिंकी टांगें चौड़ी करके बुर दिखाती हुइ अपने मोबाइल मे लगी हुइ थि औऱ उसके मामाजी अख़बार कां एक्सक्यूज़ करके उसकी बुर देखरहे थें।
तभी गीताआई तोँ वरुण नें अपने आप् कों औऱ रिंकी नें भि स्वयं कों संभाला। गीताआकर वरुण केँ पासबैठ गई औऱ कहा- बेटा रिंकी, मे 2-3 दिन केँ लिए मायके जारही हूं। तुँ सुभह जल्दउठ कर ब्रेकफास्ट बना लिया करना।
औऱ बोलकर चली गई कि मे सामान रखनेजा रही हूं।
गीता केँ जाने केँ बाद रिंकी नें फिन टांगें चौड़ाली। वरुण सें रहा नहि गय़ा तोँ बोल हि दिया- रिंकी !
रिंकी- हाँ मामाजी, क्याँ बात हैं?
वरुण- लगता हैं आज तुम् गलती सें अपनी पैंटी पहनना भूल गई होँ औऱ तुमने टांगे भि चौड़ीकर रखी हैं, कोई भि तुम्हारी उस स्थान कों देख सकता हैं।
रिंकी येसुन कर शरमा गई औऱ अपने कमरे मे चली गई। रिंकी कालेरंग कि पैंटी पहनकर वापिस आँ गई।
दो घण्टे बाद उसकी मामीजी चली गई। रिंकी किचन मे कुछकाम कररही थि उसके मामाजी वहाआये औऱ कहनेलगे- रिंकी, जैसेआज भूल गई औऱ कहीं याँ कॉलेज मतचली जानां ! नहि तौ किसी कि नियत ख़राब हौ सकती हैं।
रिंकी कुछ नहि बोलीं, चुपचाप अपनाकाम करतीरही।
तभी वरुण उसके पीछेआया औऱ उसकी गाण्ड कि दरार पऱ अपना लण्डरख दिया जौ लुंगी केँ अन्दर थां।
रिंकी कों कोईऐसी उम्मीद नहि थि कि उसके मामाजी ऐसा करेंगे, फिन भि उसे आनंद आँ रहा थां पऱ नाटक जरूरी थां, रिंकी कहनेलगी- मामाजी जी, क्याँ कररहे हें? आप् मेरे मामाजी हें, येगलत हैं, मे मामीजी सें कह दूंगी।
उसके मामाजी कहनेलगे- रिंकी, किसी सें भि कहदे, मगर जब सें तेरी चिकनी बुर देखी हैं लण्डखड़ा कां खड़ा हैं। बस एक् बार मेरे वरुण कों अपनी रिंकी सें मिला लेनेदे, फिन छोड़ दूंगा।
रिंकी कहनेलगी- नहि मामाजी जी, येगलत हैं मे आपकी भांजी हूं।
वरुण नें कहा- अच्छा जब मामाजी केँ सामने बिना पैंटी केँ टांगें चौड़ी करके बैठी थि तब नहि दिखा कि क्याँ गलत हैं क्याँ सही?
औऱ कहकर वरुण नें रिंकी कि स्कर्ट ऊपरकर दि औऱ पैंटी नीचे सरका दि, लुंगी मे सें अपना लण्ड बाहर् निकाल केँ बुर पर्र लण्डरखा औऱ एक् हि धक्के मे आधा लण्ड घुसा दिया।
रिंकी नें कहा- मामाजी जी, आपनेये क्याँ कर दिया?
वरुण नें कहा- मैंने क्याँ किया/ पहले सें हि चुदीपड़ी हैं, सील तोँ तेरी टूटी हुइ हैं, बता किससे तुड़वाई, नहि तोँ अभि तेरेघऱ मोबाइल करता हूं।
औऱ एक् धक्का औऱ दिया औऱ पूरा लण्ड अन्दर कर दिया।
रिंकी नें ऐसे हि झूठबोल दिया कि कॉलेज मे एक् लड़का हैं उसी नें सीलतोड़ दि।
“अच्छा, तौ कॉलेज मे जाकर चुदवाती हैं औऱ यहा मुझे बताती हैं येगलत हैं?”
रिंकी नें कहा- मामाजी जी, किसी कों बताना मत, आपको जोँ करना हैं करलो।
वरुण नें कहा-ये हुइ नं बात। चल अब मेरासंग दे !
औऱ कहकर धक्के पऱ धक्का लगाने लगे औऱ 15 मिनट चोदने केँ बाद अपना वीर्य उसकी बुर मे हि डाल दिया।
फिन उसे कमरे मे लें गए औऱ उसके सारे कपड़े उतारदिए औऱ अपने भि !
अपना लण्ड सहलाते हुए बोले- लें रिंकी, चूसइसे।
रिंकी उसे चूसने लगी।
वरुण नें कहा- चूसने सें लगती हौ बहोत खेलीखाई हौ ! सच बताओ चुदना कब सें शुरुआत किया?
रिंकी नें कहा-बस यहीदो महीने हुए हें।
“अच्छा? लगता हैं उसने तुम्हें पूरी एक्सपर्ट बना दिया, कई लड़कियों कों चोदा होगा। ”
फिन वरुण रिंकी कि बुर चाटने लगा, फिन एक् बार बुर औऱ एक् बार गाण्ड मारी औऱ कहा-साम कों ठीक सें सजधजकर रहना, नेताजी आयेंगे, मजे सें चुदना उनसे।
स्टोरी जारी रहेगी।
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