छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 Stories Complete (2015)
nangi family desi kamuk kahaniyan
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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सुषमा चुदवाते हुए बोलीं- आज तौ तेरी पत्नि किस-किससे चुदवाकर आएगी?
मैंने कहा- वैसे तौ बताया नहि उसने मुझे, मगर मे समझता हूं कि वो दो लोगों सें जरूर चुदवाकर आएगी। उसे चुदवाने कां बड़ा जबरदस्त शौक हैं। अच्छा तेरा हसबैंड क्याँ कर होगा अभि?
वो बोलीं- “वो भोसड़ी कां अपनी बड़ी बेहन कों चोदरहा होगा? उसकेबाद उसके चाचा कि बहू चुदवाने आएगी उससे। मे भि तुमसे चुदवाने केँ बाद मनीष अग्रवाल जी सें चुदवाकर घऱ वापस जाऊँगी…”
मयंक बड़ी हैरतभरी निगाहों सें हम् दोनों कों देखने लगा। उसकीसमझ मे नहि आँ रहा थां कि येसभी क्याँ होँ रहा हैं?
मैंने कहा- दोस्त, तुम् चिंता न् करो, मे तुम्हें सभी समझा दूँगा पहले तुम् इस सुषमा कि जैन चूत चोदो, तुमने पहलेकभी जैन चूत चोदी हैं? जैन बुरें अधिक हि गोरी, चिकनी औऱ चुदक्कड़ होती हें।
मयंक सुषमा भाभी कों चोदने मे जुट गय़ा।
भाभी बोलि- दोस्त मयंक, अब तुम् पीछे सें मेरी गाण्ड मे पेलो लण्ड, मे आगे सें मनोज कां लण्ड चूसते हुए गाण्ड मरवाऊँगी।
मे पहलीबार भाभी कों गाण्ड मराते हुएदेख रहा थां। थोड़ी देर मे भाभी नें मयंक कों नीचे लिटा दिया औऱ उसकेऊपर उसकीतरफ मुँह करकेलेट गई, लण्ड उसकी बुर मे घुस गय़ा।
फिन वो अपनी गाण्ड उठाकर बोलि- “मनोज, अब तुम् मारो मेरी गाण्ड…”
थोड़ी देर गाण्ड मरवाने केँ बाद वो बोलि- दोस्त मनोज, तुमने इसतरह कां प्रोग्राम बनाकर कई बीवियों केँ मन कि ख़्वाहिश पूरीकर दि। वरना बिचारी एक् हि लण्ड पे पूरी ज़िन्दगी निकाल देती हें औऱ तरह-तरह केँ लण्ड केँ लिए हमेशा तरसा करती हें।
तब तक मैंने कहा- भाभी, अब मे खलास होने वाला हूं।
वो बोलि- “दोस्त, मेरे मुँह मे झड़ना, मे तेरा लण्ड पियूंगी…” वो वास्तव मे मेरा झड़ता हुआ लण्ड पीनेलगी औऱ उसकेबाद उसने मयंक कां भि झड़ता हुआ लण्ड पिया।
साम कों लगभग 7:00 बजे मेरी पत्नि चुदवाकर कर वापस आँ गई। उसका चेहरा चमकरहा थां औऱ इधर मेरा भि चेहरा चमकरहा थां।
वो भि सजधजकर होँ गई औऱ मे भि।
हम् दोनों लोग बैठे बातें कररहे थें, इतने मे मयंक अपनी पत्नि गौरी केँ संग आँ गय़ा। मे उसकी पत्नि सें पहलेकई बारमिल चुका थां, मीनाक्षी कि भि दोस्ती हैं उससे।
हम् चारों लोग दारू पीनेबैठ गये।
मयंक बोला- दोस्त, तुमने वो बात नहि बताई अभि तक?
मैंने कहा- दोस्त देखो, मेरी विवाह केँ दोसाल बाद मेरी पत्नि एक् दिन बोलीं- “क्याँ तुमको दोसाल सें एक् हि चूत बार-बार चोदने मे मजाआता हैं? मुझे तौ एक् हि लण्ड सें बार-बार चुदवाना अच्छा नहि लगता?
मैंने कहा-मगर फिन किया क्याँ जाये?
उसनेकहा- तुम् मेरी सहेली कि चूत चोदोगे? कहो, मे उसेमना लेती हूं।
मैंने कहा-हाँ क्यूं नहि चोदूँगा?
बस उसने कविता सें बात कि तोँ वो जल्दी सजधजकर हौ गई। उसीरात कविता हमारे बेड पऱ आँ गई औऱ रात मे जब मे बैड पऱ गय़ा तोँ मेरी पत्नि नें मेरा लण्डउसे पकड़ा दिया। उस दिन मैंने पहलीबार किसी औऱ कि पत्नि कों अपनी पत्नि केँ सामने चोदा।
फिन कविता नें मुझसे कहा- दोस्त मनोज… क्याँ तेरी पत्नि मेरे हसबैंड सें चुदवा लेँ?
मैंने हाँकर दि। उसकेबाद कविता कां घऱ मैंने उसेफिन चोदा औऱ उसके मियां नें मेरी पत्नि चोदी।
कविता बोलीं- दोस्त मनोज, हम् लोग क्यूं नं एक् ऐसा प्रोग्राम बनाएँ जिसमें हम् एक् दूसरे कि बीवियां चोदते रहें औऱ बीवियां पराये मर्दों सें चुदवाती रहें? कविता फिन बोलि- औऱ फिन मैंने सोचा एक् नया तरीका? एक् इतवार कों मे सबकी बीवियां दूसरों केँ घऱ चुदवाने केँ लिए भेजूंगी। यानि मर्दसभी अपने-अपने घऱ मे रहेंगे औऱ बीवियां जा जाकर चुदवायेंगी? जैसेआज मनोज कि पत्नि आज चुदवाकर करआई हैं। दूसरे इतवार कों बीवियां घऱ पऱ रहेंगी औऱ मे मर्दों कों भेजूंगी जहाँवे जाकर पराई बीवियां चोदेंगे? कौन किसको चोदेगा औऱ कौन किससे चुदवायेगी ये मे तय करूंगी। इसतरह हर पत्नि दो मर्दों सें चुदायेगी औऱ हर मर्ददो बीवियां चोदेगा।
मैंने कहा-बस इसीतरह लोग जुड़ते गये औऱ हम् लोग चुदाई कां मजा उठाते गये।
मयंक बोला- दोस्त, आज तुम् मेरी पत्नि चोदो।
मैंने उसकी पत्नि गौरी कि तरफ देखा।
वो मुश्कुरा रही थि।
मैंने कहा- दोस्त अपनी पत्नि गौरी भाभी सें तोँ पूछलो?
गौरी भाभी बोलीं- “अच्छा, आजजब तुमने मेरे मियां सें सुषमा कि चूत चुदवाई तौ तुमने मुझसे पूछा थां, भोसड़ी केँ मनोज? मे कोई ऐतराज़ नहि जतारही हूं। मे स्वयं कहरही हूं कि तुम् मुझे चोदो। सीधी सि बात हैं जब मेरा मियां किसी कों चोदेगा तोँ मे भि किसी सें चुदवाऊँगी। अब खोलो न् लौड़ा अपना…”ऐसा कहकर गौरी नें मेरे लण्ड पऱ हाथ मारा।
फिन जब उसने अपना पेटीकोट खोला तौ गजब हौ गय़ा। उसकी गद्देदार मस्त चिकनी बुर देखकर तोँ मे पागल होँ गय़ा। मैंने जब अपनी नज़र घुमाई तोँ देखा कि मयंक मेरी पत्नि कि बुर चाटने मे जुटा हैं।
आखिरकार गौरी नें मेरा खड़ा लौड़ा पकड़ लिया, वो बोलीं- “बाप रे बाप… इतना बड़ा लौड़ा लेकर घूमते हौ तुम्? इसे मेरी चूत मे छोड़कर जायाकरो?” गौरी भाभी मेरा लण्ड पीनेलगी।
औऱ मेरी पत्नि मयंक कां लण्ड पीनेलगी।
दूसरों कि बीवियों सें लण्ड चुसवाने कां मेरा चस्का बढ़ता गय़ा। जब किसी कि पत्नि मेरा लौड़ा चूसती हैं तौ मुझे अपार आनन्द आता हैं।
मैंने येबात जब गौरी भाभी सें कहा तोँ वो बोलि- “औऱ मे भि जब किसी पराये मर्द कां लौड़ा चूसती हूं तौ मुझे अपार आनन्द आता हैं। अबआज सें मे भि तुम्हारे ग्रुप मे शामिल होँ गई हूं, अपनी चूत चोदी कविता सें बतादो प्लीज? वो भि हर हफ्ते मुझे भि लण्ड भेजाकरे? औऱ मेरे पति केँ पास चूत भिजवाया करे…”ऐसा कहकर गौरी भाभी मेरा लण्ड अपनी चूत मे घुसाकर चुदवाने लगी।
उधर मेरी पत्नि भि मयंक सें चुदवाने मे जुट गई, वो बोलीं- ओह मयंक, आज वैसे मे दो-दो मर्दों सें चुदवाकर आई हूं मगर तेरा लौड़ा बड़ा अनोखा मजादे रहा हैं मुझे। सुषमा भोसड़ी वाली नें बड़ामजा किया होगा?
तब तक गौरी बोलीं- हाँ मीनाक्षी भाभी, तेरे मियां कां लौड़ा तौ लाखों मे एक् हैं। आज मुझेलग रहा हैं कि वाकई पराये मर्दों केँ लण्ड बड़े शानदार होते हें। आज मुझेमिल रहा हैं जवानी कां असलीमजा, क्या बात है मेरे राजा मनोज औऱ चोदो मुझे…खूब कस-कस केँ चोदो मुझे। मे तेरी रखैल हूं, मे तेरी दूसरी पत्नि हूं, मे तेरी रंडी हूं। मे तेरी कुतिया हूं, मे छिनाल हूं, मे चुदक्कड़ हूं दोस्त मुझे चोदो। अपने दोस्तों केँ भि लण्ड पेलो मेरी चूत मे, मेरे राजा मेरी गाण्ड मारो, मेरी मम्मों चोदो? तेरा मादरचोद लण्ड बड़ामजा देरहा हैं मुझे। इसकी मां कां भोसड़ा मे इसेहर रोज़ पेलूँगी अपनी बुर मे?
मैंने महसूस किया कि गौरी भाभी कों वाकई बड़ामजा आँ रहा हैं, उसे बहोत दिनों केँ बादकोई पराया व्यक्ति चोदने वाला मिला हैं। मुझे सबसे ज़्यादा मजातब आयाजब गौरी भाभी नें मेरा झड़ता हुआ लण्ड चाटा। उसी दिन सें गौरी-मयंक मेरे ग्रुप मे शामिल हौ गए।
तोँ दोस्तों, इसीतरह हमारी मौज़ मस्ती हर इतवार कों होती रहती हैं।
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कथाघऱ घऱ कि
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पारुल- “श्रुति, कहां हैं तूँ? सुभह सें ढूँढ़ रही हूं तुम को, कहां चली गयीँ, थि तूँ?”
श्रुति- “मामाजी, मे वोह अंदर, कमल चाचू सें गाण्ड मरवारही थि, बताइये क्याँ काम थां मुझसे?”
पारुल- “क्याँ कहा? तूँ चाचू सें गाण्ड मरवारही थि, शरम नहि आयी तुम्हारी तरफ। वहां तेरे बापूहाथ मे लण्ड लिये तेरी बुर औऱ गाण्ड मारने कां इंतजार कररहे हें औऱ तुँ यहां चुदवा रही हैं। तुम्हारी तरफपता नहि कि हर सुभह आफिस जाने सें पहले पिताजी कों तेरी ज़रुरत होती हैं, वोँ तेरी बुर औऱ गाण्ड चोदे बिना कहीं नहि जाते…”
श्रुति- “पता हैं मामाजी… मगर मे क्याँ करूं?कमल चाचू मुझे ज़बरदस्ती कमरे मे लेँ गये। औऱ तुम् तौ जानती हौ मर्द कां लौड़ा देखते हि केसे मेरी बुर औऱ गाण्ड रस छोड़ने लगती हैं, इसलिये मे न् नहि कर पायी औऱ चाचू सें चुद गई, …”
पारुल- “कमल…आज जोँ कुछ भि हुआ अच्छा नहि हुआ। तुम् जानते हौ कि सोम कों आफिस जाने केँ लिये कितनी देरी हौ रही हैं, मगर वोँ श्रुति कों चोदे बिना कहीं नहि जायेंगे। फिन तूने श्रुति कों क्यूं चोदा? पूरादिन पड़ा थां उसे चोदने केँ लिये, तूँ बाद मे भि तौ उसेचोद सकता थां…”
कमल- “वोँ भाभी, क्याँ हुआ न्… मे आंगन मे सुभह-सुभह टहलरहा थां तोँ देखा श्रुति वहां सलवार उतार केँ संडास कररही हैं। वोँ नाज़ारा देखते हि मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ मैंने श्रुति कों अपने कमरे मे लें जाके उसकी गाण्ड चाटी औऱ फिन उसकी गाण्ड मारी। सारी भाभी, फिन कभीऐसा नहि होगा, मे सोम भैया केँ आफिस जाने केँ बादचोद लूँगा…”
पारुल- “हांठीक हैं कमल… तुमने श्रुति कों संडास करतेहुए देखा औऱ तुम्हारा लण्ड खड़ा होँ गय़ा, पर्र तुम् श्रुति कों क्यूं अपने कमरे मे लें गये? मुझसे कहा होता तोँ मे तुमको अपनी गाण्ड मारने दे देती। कम सें कमसोम कों तकलीफ तौ नहि होती। क्यूं क्याँ तुम्हें अपनी भाभी कि गाण्ड चोदने मे मजा नहि आता?”
कमल- “अरे नहि भाभी, ऐसी बात नहि हैं, आपकी गाण्ड मारने केँ लिये तोँ अपनीजान भि दे सकता हूं। आपकी गाण्ड मे इतनी ताकत हैं कि सारी दुनिया इसे चोदेगी तोँ भि इसकी हुस्न कम नहि होगी, औऱ आपकी गाण्ड कां स्वाद तोँ ज़बरदस्त हैं। सारी भाभी गलती होँ गई, …”
श्रुति नें बापू केँ कमरे मे जाकर बापू सें कहा- “सारी पिताजी, आपको मेरे लिये इंतेजार करना पड़ा। वोँ क्याँ हैं नं… कमल चाचू नें मुझे सुभह-सुभह संडास करतेहुए देख लिया तोँ, उनकादिल बहक गय़ा औऱ उन्होंने मुझे अपने कमरे मे लेँ जाकेचोद डाला। वोँ भि बहोत शर्मिंदा हें आज केँ लिये। प्लीज… हमेंमाफ कर दीजिये पिताजी, अगलीबार ऐसा नहि होगा। आपसेजी भर केँ चुदवाने केँ बाद हि किसी औऱ सें चुदवाऊँगी…”
सोम- “नहि बेटी, मुझे तुमसे कोई शिकायत नहि हैं, बस तुम् तोँ जानती होँ कि सुभहजब घऱ सें निकलता हूं तौ तुम्हारी गाण्ड चाटके औऱ चोदके हि निकलता हूं। मेराऐसा मानना हैं कि ऐसा करने सें दिन अच्छा गुज़रेगा। तुम्हें तोँ पता हैं कि हमारा भड़वागिरी कां धंधा हैं, सभी कस्टमर पे डिपेंड करता हैं। अगर कस्टमर कों हमारे यहां कि लड़कियां पसन्द नहि आयीं तौ फिन मुझे तुम्हारी मम्मी पारुल कों उनकेपास भेजना पड़ता हैं जोँ मुझे पसन्द नहि हैं…”
श्रुति- “मुझेपता हैं बापू, चलिये अब अपनी बेटी कों खूब रगड़-रगड़ केँ चोदिये, मुझे भि आपका लौड़ा बहोत पसन्द हैं बापू, मुझेइसे चूसने मे औऱ अपनी बुर औऱ गाण्ड मे लेने मे बहोत मजाआता हैं। मेरी बुर आपकी हैं, मेरी गाण्ड भि आपकी हैं। खूब चोदिये पिताजी मुझे…”
सोम- “मुझे तुम् पे नाज़ हैं कि तुम् मेरी बेटी हौ। मे कितना किश्मतवाला हूं कि मुझे पारुल जैसी रांड पत्नि मिली हैं, औऱ तुम् जैसी छिनाल बेटी कों पैदा किया हैं। चलअब जल्द सें अपने कपड़े उतार, वैसे मैंने ब्रेकफास्ट भि नहि किया, अपनी बुर सें मूत पिला औऱ अपनी गाण्ड सें मुझे पीले-पीले केक्स खिला। अपनी गाण्ड मे कुछबचा केँ रखा हैं याँ साराहग दिया सुभह-सुभह?”
श्रुति- “नहि बापू अभि भि आपके नाश्ते केँ लियेकुछ बचा केँ रखा हैं, आइये आपको अपना गाण्ड मे पकाया ब्रेकफास्ट खिलाती हूं…”
पारुल- “बाप औऱ बेटी कां ऐसा प्रेम कितना अच्छा लगता हैं न् कमल। काश… मेरा भि कोई बाप होता तौ मे उससेखूब चुदवाती… तुर्रर्रर… थुस्सस्स… पुर्रर्र… तूउर्र…”
कमल- “भाभी, यह तुमहारी गाण्ड सें कैसी-कैसी आवाज़ें आँ रही हें, लगता हैं सोम भैया नें खूब मारी हैं रात कों तुम्हारी गाण्ड…”
औऱ aage badhyo kahani ko,बहोत kamuk hain,new style कि hain
Jagdish
dosto, New kahani iss poste. Now, its your turn. . .
Vineeta
bhay aisi padhaai sab स्थान hu jaaye too maze hu jayen
Sonaal
ऐसी पढ़ाई तोँ होती रहनी चाहिए भइया एक् औऱ हॉटकथा आपकीपढ़ करमजा आँ गय़ा
Poonam
rangila wrote:ekdum hot h bhay komaalrani wrote:Bahoot hi Badhiyaa h ...Mast ... Thanks dosto, Enjoy the new kahani "मेरे मित्र कि पत्नि" . .
Susmita
supar story h mitr
Shaleenee
हंगामेदार किस्सा हैं भइया
Virendra
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
Deeksha
Rohit Kapoor wrote:supar story h mitr jay wrote:हंगामेदार कथा हैं भइया rajsharma wrote:अति उत्तेजक रचना हैं साथी . शुक्रिया दोस्तों, संग मे बने रहने केँ लिये। अगली स्टोरी प्रस्तुत हैं। . .