छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 Stories Complete (2015)
nangi family desi kamuk kahaniyan
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आशा- “अभि घंटेभर पहले हि तौ मेरी गाण्ड मार चुके होँ, फिन इतनी जल्द केसे खड़ा हौ गय़ा तुम्हारा लौड़ा…”
समीर-“अगर तुम्हारी जैसी छिनाल बेहनघऱ मे गाण्ड हिलाते-हिलाते घूमरही होँ तोँ मुझ जैसे बहनचोद कां लौड़ा केसेचुप रहेगा। मे बस यहां सें गुज़र रहा थां तौ देखा कि तुम्हारा पैजामा तुम्हारी गाण्ड मे रुक गय़ा हैं। यहसीन देखकर मुझसे रहा नहि गय़ा औऱ मे चलाआया तुम्हारी गाण्ड चाटने कों। तेरी गाण्ड चूसने कां बेहददिल कररहा हैं आशा, चल उतार अपनी सलवार औऱ टेस्ट लेनेदे मुझे तेरी गाण्ड कां…”
आशा-“मगर भैया… मां नें देख लिया तोँ गज़ब होँ जायेगा। अगर मां कों पताचल गय़ा कि मे इससमय तुमसे अपनी गाण्ड चटवारही हूं तौ मुझेमार डालेगी। जानते नहि मम्मी नें स्ट्रिक्टली कहा हैं कि अगर चोदना चुदवाना हैं तौ सुभह केँ 9:00 बजे सें पहले औऱ रात केँ 10:00 बजे केँ बाद…”
समीर-“अरे मम्मी तोँ स्वयं रंडी कि तरह अपने चौकीदार नंदू सें चुदवा रही हैं, अभि-अभि देख केँ आँ रहा हूं। औऱ वैसे भि मम्मी नें चोदने चुदाने कों मना किया हैं, खाने पीने पर्र तोँ कोईरोक नहि हैं नां। मे मम्मी सें कह दूंगा कि मे आशा कि गाण्ड सें अपना ब्रेकफास्ट खाने औऱ बुर सें जूस पीनेआया थां। तब तोँ मम्मी कुछ नहि कहेगी…”
आशा-“अरे भइया…हां… येबात तोँ बिल्कुल सहीकही तुमने, मम्मी तोँ खाने पीने पर्र कभी नाराज़ नहि होती…”
मां कमला बाहर् दरवाज़े सें सभीकुछ देखरही थि औऱ मन हि मनखुश हौ रही थि कि उसके अपने बच्चे कितने प्रेम सें एक् दूसरे केँ संग रहते हें औऱ एन्जॉय करते हें।
कमला-“यह सभी क्याँ चलरहा हैं तुम् भइया बेहन मे?”
समीर-“अरे मम्मी वोँ… वोँ… क्याँ हैं न् कि बसकुछ नहि ऐसे हि आशा सें बात करने आँ गय़ा थां। कुछ नहि मम्मी कोईखास बात नहि हैं…”
कमला- “मैंने सभीसुन लिया हैं पऱ तुम्हें परेशान होने कि कोई ज़रूरत नहि हैं, मे बिल्कुल नाराज़ नहि हूं, उल्टा मे बहोत खुश हूं कि तुम् दोनों मे इतना प्रेम औऱ अपनापन हैं। जोँ कुछ करना हैं जल्द-जल्द करो, मे हाल मे बैठती हूं…”
आशा- “थैंक्स माँ तुम् कितनी अच्छी होँ, वैसे तुम् भि हमें ज्वाइन करो नं, जब तक भैया मेरी गाण्ड चूसता हैं, मे भि तुम्हारी गाण्ड कों टेस्ट करती हूं औऱ फिन होँ सके तौ कुछ मे भि तुम्हारी गाण्ड सें खा लूंगी, आओ न् मम्मी…”
कमला- “नहि बेटी… मेरी मित्र पारुल बहोत दिनों बादआयी हैं मुझसे मिलने, मे उससेहाल मे बातें करती हूं तुम् लोग जल्द सें यहसभी समाप्त करके अपने-अपने काम पे लगजाओ…”
पारुल- “औऱ बताओ कमलासभी कुछ कैसाचल रहा हैं?”
कमला-“सभी ऊपर वाले कि दया हैं, घऱ मे खुशियां हि खुशियां हें, पारुल…”
कमला-“अरे वोँ दोनों तौ रसोई मे खूब मस्ती कररहे हें। मेरी बेटी आशा बहोत बड़ी छिनाल हैं, अपने भइया समीर सें गाण्ड चुसवा रही हैं। अभि तक तोँ उसके मुँह मे हग भि दिया होगा। औऱ समीर भि अपनी बेहन सें बहोत प्रेम करता हैं, वोँ भि अपनी बेहन कि बुर औऱ गाण्ड कां पूरा-पूरा ख्याल रखता हैं। रात कों मेरी बुर औऱ गाण्ड भि एक्-एक् करके चोदता हैं मादरचोद। मे बहोत किश्मतवाली हूं पारुल जोँ मुझेऐसा परिवार मिला हैं…”
पारुल- बहोत खुशी हुई यह जानकर कि तुमने अपने बच्चों कों इतने अच्छे औऱ सेक्सी संस्कार दिये हें। मैंने भि अपने परिवार कों बिल्कुल चुदक्कड़ बना दिया हैं। कोई भि किसी कों भि जब चाहे, जितना चाहे, जिधर चाहे, चोद सकता हैं। मगर एक् बेटे कि कमी महसूस होती हैं। मेरी सिर्फ़ एक् बेटी हैं जोँ मुझसे भि बड़ी रांड हैं, लण्ड केँ बगैर एक् घंटा भि नहि रह सकती। मेरेसोम कां भड़वागिरी कां धंधा हैं जोँ मस्तचल रहा हैं। बसऊपर वाले कि दया हैं…”
तभी पारुल कों किसी कां मोबाइल आता हैं।
“हैलो पारुल भाभी, मे जानकी बोलरही हूं, आपके लिये एक् बुरीखबर हैं, श्रुति कों पुलिस नें बाज़ारू रांड समझकर गिरफ्तार कर लिया हैं…”
श्रुति कि गिरफ्तारी कि खबर सुनकर पारुल घबरा जाती हैं।
कमला- “क्याँ हुआ पारुल, तुम् इतनी घबरायी हुइ सि क्यूं हौ, सभीठीक तोँ हैं न्…”
पारुल- “अब क्याँ बताऊँ कमला, न् जानेइस श्रुति नें फिन क्याँ कर दिया हैं? पुलिस उसे रंडीगिरी केँ जुर्म मे पकड़ केँ लेँ गयीँ, हैं। मुझे अभि इसी वक़्त पुलिस स्टेशन जानां होगा…”
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पुलिस स्टेशन मे
पारुल- “श्रुति बेटा यहसभी क्याँ हैं? क्यूं पुलिस तुम्हें यहां पकड़ केँ लायी हैं। क्याँ रंडीपन किया तुमने?”
श्रुति- “मामाजी वोँ क्याँ हैं नं कि मे रोड केँ किनारे पे बैठ केँ मूतरही थि, तभी एक् 14 साल कां बच्चा आके मुझे औऱ मेरी बुर कों घूरने लगा। मैंने उससे पूछा- क्यूं बे साले क्याँ देखरहा हैं? कभी किसी लड़की कों मूतते हुए नहि देखा हैं क्याँ?”
तोँ वोँ कहनेलगा- “देखा तोँ हैं मगरऐसी मस्त बुर कभी नहि देखी…”
श्रुति- “मुझे उसकीबात अच्छी लगी औऱ मे उसकी पैंटखोल केँ उसका लौड़ा मुँह मे लेके चूसने लगी। इतने मे जानकी आंटी नें मुझे वहांदेख लिया औऱ शायद उन्होंने हि पुलिस कों शिकायत कर दि…”
पारुल- “श्रुति, तुझसे कितनी बारकहा हैं, अगर चोदना चुदाना हैं तोँ उस लड़के कों घऱ लेके आनां थां, ऐसेरोड पे तमाशा करने कि क्याँ ज़रूरत थि? तुम्हें तौ मालूम हैं नं वोँ जानकी केँ बारे मे, साली रांड छिनाल, स्वयं कों लौड़ा नहि मिला चुदवाने केँ लिये तौ जल गयीँ, औऱ मेरी बेटी कों अंदर करवा दिया। श्रुति तुम्हें सावधान रहना होगा, अगर तुँ उस लड़के कों घऱ लें आती तोँ घऱ वाले कितने खुश होते। मे भि उससे गाण्ड मरवा लेती, मगर तेरी जल्दबाज़ी नें सभीकुछ खराबकर दिया…”
श्रुति- “मामाजी सारी, अगलीबार मे ध्यान रखूंगी। मामाजी मुझे यहां सें छुड़ाओ, यहलोग बहोत मारते हें, गाण्ड देखोलाल कर दिया हैं मादरचोदों नें मार-मार केँ। मम्मी अगर तुम् इंस्पेक्टर साहब सें गाण्ड मरवा लोगी तौ यह मुझे छोड़ देंगे। मामाजी प्लीज मेरे लिये एक् बार गाण्ड मरवालो न् प्लीज… मामाजी, तुम्हारी गाण्ड कि तोँ सारी दुनिया दीवानी हैं, एक् बार तुम्हारी गाण्ड चोदेगा तोँ तुम् जौ कहोगी मानेगा…”
पारुल- “ठीक हैं मे अभि कुछ करती हूं, तूँ फिकरमत कर…”
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arrrrrrrrree bhay ise क्याँ kahen bhrun ya loda ya aaloo
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अगलाभाग
पारुल अपने आप् सें- “येसोम कों क्याँ हुआ? बहोत परेशान लगरहे हें, अभि पता लगाती हूं…”
पारुल सोम सें- “क्याँ हुआसोम बहोत दुःखी बैठे हौ, चेहरा तौ ऐसाबना रखा हैं जैसे किसी नें तुम्हारी गाण्ड मार दि हौ। क्याँ टेन्शन हैं? मुझे बताओ…”
सोम- “अब क्याँ बताऊँ पारुल, मम्मी चुद गई, हैं मेरी। एक् कस्टमर आया हैं, 5 करोड़ कां आफरदे रहा हैं एक् रात कां, पर्र उसे एक् ऐसी महिला चाहिए जिसकी पाद (फार्ट) बहोत नशीली, बदबूदार औऱ सेक्सी हौ। औऱ तोँ औऱ जिसकी टट्टी बहोत लजीज हौ…”
पारुल- “तोँ इसमें इतना परेशान होने कि क्याँ बात हैं? हमारे रंडी खाने मे बहोत सि रंडियां हें जौ येसभी कर सकती हें, भेजदो किसी एक् छिनाल कों…”
सोम-“अरे तुम् बात कों समझ नहि रही होँ पारुल, हमारे यहाऐसी कोई लड़की नहि हैं जोँ 5 करोड़ केँ कस्टमर कों संतुष्ट करसके। सभी छिनालें पादती हें, हगती हें मगरकोई भि ऐसी नहि हैं जौ 5 करोड़ केँ कस्टमर कों संतुष्ट करसके… अगरये कस्टमर हमारे हाथ सें निकल गय़ा तौ हमारे दुश्मन किरानी परिवार कि मालती उस कस्टमर कों हथिया लेगी। फिन हम् लौड़ा हाथ मे लेके हिलाते रह जाएँगे…”
पारुल- “अगर आप् कहेंसोम, तोँ मे चली जाती हूं उसकेपास। मे सोचती हूं कि मे उसको अपनी गाण्ड केँ तुरर तुरर तुस्स्स तूस्स सें संतुष्ट कर दूँगी औऱ उसेखूब पेट भरकर अपनी टट्टी भि खिलाकर आँ जाऊँगी, प्राब्लम साल्व्ड…”
सोम- “नहि पारुल, मे तुम्हें जाने नहि दूँगा, मुझे तुम्हारा वहा जानां मनपसंद नहि…”
पारुल- “क्यूं सोम? मे क्यूं नहि जा सकती, क्याँ मेरी गाण्ड केँ पाद मे अब वोँ बात नहि रही याँ फिन मेरेगू मे वोँ टेस्ट नहि रहा? क्याँ बात हैं सोम बताओ मुझे?”
सोम- “नहि पर्वती वोँ बात नहि हैं, तुम्हारी गाण्ड कि बास मे तौ इतनादम हैं कि 5 करोड़ क्याँ, 50 करोड़ भि तुम्हारी गाण्ड सें आई हुइ एक् पाद केँ मुकाबले कम हैं। मगर मुझे मनपसंद नहि कि मेरी प्राइवेट रंडी लोगों केँ सामने गाण्ड हिला-हिला केँ पादे औऱ उनके मुँह मे हगे। मे बहोत ईर्ष्या महसूस करूँगा पारुल। मे तुम्हें किसीगैर मर्द कों अपनी गाण्ड कां हलवा खिलाते नहि देख सकता। तुम्हारी गाण्ड सें निकली हुई हरचीज मेरी औऱ इस परिवार कि हैं बस औऱ किसी कि नहि…”
पारुल- “मुझे बहोत खुशी हुईँ सोम कि आज भि आपको मेरी गाण्ड औऱ उसमें सें निकली हुईँ चीज़ों सें इतना प्रेम हैं। मगर बिज़नेस मे नो एथिक्स सोम… मे उस तुलसी किरानी रांड़ कों इस कांट्रैक्ट कों लेतेहुए नहि देख्ना चाहती। मे दिखा देना चाहती हूं कि पारुल अगरवाल कि गाण्ड केँ सामने किरानी परिवार बेकार हैं। गाण्ड बड़ी होने सें कुछ नहि होता, गाण्ड मे दम होना चाहिए…”
श्रुति- “मामाजी, पिताजी, मैंने सभीसुन लिया हैं। अगर आप् कहें तोँ मे चली जाती हूं। मे भि संडास नहि गई, हूं। अगर आप् दोनों चाहें तोँ मे उस कस्टमर केँ पासचली जाती हूं। आपकाकाम भि हौ जाएगा बापू औऱ मामाजी कों भि जानां नहि पड़ेगा…”
पारुल- “तुँ अपने कमरे मे जा श्रुति…”
श्रुति- “नहि मां, मे सचकहरही हूं, मे भि तौ आप् हि कि बेटी हूं। आपकी गाण्ड कां कुछ तौ असर मेरी गाण्ड मे भि तोँ होगा, देखिए मे आपकोपाद केँ भि बताती हूं- तुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्रर तुस्स्स्स्स्स्सस्स तुरर्र तुस्स्स्स्स…”
पारुल- “श्रुति तेरी गाण्ड भि मस्त सेक्सी औऱ नशीली हैं। मगर बेटा, जोँ कस्टमर आया हैं उसे एक् महिला कि गाण्ड चाहिए, एक् लड़की कि नहि। उसेमुझ जैसी चुदी चुदाई मेच्योर्ड रांड़ चाहिए। तूँ तोँ अभि कमसिन हैं बेटा, उसकी प्यास औऱ भूख सिर्फ़ मे औऱ मेरी गाण्ड हि मिटा सकती हैं…”
पारुल नें फिनकहा- “सूंघना चाहती हैं मेरीपाद तोँ ये लें सूंघ- पुउउर्र्र्ररर… फुररररर… टुउस्स्स्स… तुउउउर्र्र्र्ररर… तुस्स्स्स्स्सस्स… पर्र… पुर्र्र… हिस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स…”
श्रुति- “वाउमोम… मान गई, मे तोँ आपकी गाण्ड कों… क्याँ पाद थां? जितनी मधुर आवाज़ उतना हि बदबूदार मगर नशीली बास…हाँ बापू, आप् मामाजी कों हि भेजो, मामाजी कि गाण्ड हि आपकोये कांट्रॅक्ट दिला सकती हैं…”
सोम-“मगर अब भि मेरादिल नहि मानरहा हैं, मे पारुल कों किसीगैर मर्द सें गाण्ड चुदवाने नहि भेज सकता…”
पारुल- “अबकुछ ज़्यादा मत सोचिए सोम, मुझे जाने दीजिए। मेरे संसकार कहते हें कि जब पति मुशीबत मे होँ तोँ पत्नि कों उसकासंग देना चाहिए औऱ उसकी मुशीबत दूर करने मे पति कि सहायता करनी चाहिए। रामायण मे रावण केँ वध मे सीता कां भि उतना हि हाथ थां जितना राम कां थां। मुझे जाने दीजिए… सोम मुझे जाने दीजिए। मुझे अपने परिवार कि इज़्ज़त बचाने केँ लिएये करना हि होगा, मुझे जाने दीजिए…”
सोम-“ठीक हैं पारुल जाओ, जाकर हमारे खानदान कि इज़्ज़त ऊँची करके लौटो…”
पारुल- “ठीक हें मे अभि निकलती हूं…” पारुल भागने लगती हैं।
पारुल अपनी गाण्ड केँ छेद सें बात करते हुये-“अरी ऊ मेरी प्यारी सि गाण्ड जरादेर केँ लिए अपनी तूस्स… तूस्स… कों दबा केँ रख, ज़्यादा तूस्स… तूस्स… करेगी तोँ गू निकल आएगा औऱ सारा प्लान सत्यानाश हौ जाएगा। तुँ थोड़ी देरचुप बैठ, तेरी बहोत जल्द खुलने कां मौका दूँगी बस थोड़ी देररोक केँ रख…”
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***** THE END ख़त्म *****
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan - Kahani ab aur interesting hogi
औऱ aage badhyo kahani ko,बहोत kamuk hain,new style कि hain
Jagdish
dosto, New kahani iss poste. Now, its your turn. . .
Vineeta
bhay aisi padhaai sab स्थान hu jaaye too maze hu jayen
Sonaal
ऐसी पढ़ाई तोँ होती रहनी चाहिए भइया एक् औऱ हॉटकथा आपकीपढ़ करमजा आँ गय़ा
Poonam
rangila wrote:ekdum hot h bhay komaalrani wrote:Bahoot hi Badhiyaa h ...Mast ... Thanks dosto, Enjoy the new kahani "मेरे मित्र कि पत्नि" . .
Susmita
supar story h mitr
Shaleenee
हंगामेदार किस्सा हैं भइया
Virendra
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
Deeksha
Rohit Kapoor wrote:supar story h mitr jay wrote:हंगामेदार कथा हैं भइया rajsharma wrote:अति उत्तेजक रचना हैं साथी . शुक्रिया दोस्तों, संग मे बने रहने केँ लिये। अगली स्टोरी प्रस्तुत हैं। . .