छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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वोँ बोलि- “नां बाबा नां, ऐसामत करना। जब तेल लगाने केँ बाद भि इतना दर्द होता हैं तौ बिनातेल लगाये जब तुम् अपना औज़ार अंदर घुसाओगे तोँ मे तौ मर हि जाऊँगी। मे तुम्हारे औज़ार पऱ तेललगा देती हूं…” इतना कहकर वोँ उठी। उसनेतेल कि शीशी सें तेल निकालकर मेरे लण्ड पऱ लगा दिया। उसकेतेल लगाने सें मेरा लण्ड एकदम टाइट हौ गय़ा। उसकेबाद मैंने एक् ग्लास मे थोड़ी सि शराब डालकर उसके होंठों सें ग्लास लगा दिया। उसने थोड़ी आनाकनी कि पऱ फिन मेरे समझाने पऱ वोँ बुरा सां मुँह बनाकर एक् हि साँस मे पूरागटक गई,।
“ऊँ… मेरासिर घूमरहा हैं…” वोँ बोलीं औऱ वोँ मेरेकुछ कहे बिना हि पेट केँ बललेट गयीँ, औऱ बोलीं- “धीरे धीरे घुसाना…”
मे उसकेऊपर आँ गय़ा। मैंने अपने लण्ड कां सुपाड़ा उसकी गाण्ड केँ छेद पऱ रख दिया औऱ फिन उसकीकमर केँ नीचे सें हाथ डालकर उसकीकमर कों जोर सें पकड़ लिया। मैंने थोडा सां जोर लगाया तौ उसके मुँह सें अहह निकल गई,। मैंने थोडा जोर औऱ लगाया तौ उसके मुँह हल्की सि चीख निकल गयीँ,। मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे तीनइंच तक घुस चुका थां। मैंने थोडा सां जोर औऱ लगाया तौ वोँ फिन सें चिल्लाने लगी औऱ मेरा लण्डचार इंच तक घुस गय़ा। मैंने उसकीचीख पऱ जरा सां भि ध्यान नहि दिया।
मैंने जोर कां धक्का मारा तौ वोँ तड़पने लगी औऱ ज़ोर-ज़ोर सें चीखने लगी- “दिदी, बचालो मुझे, मर जाऊँगी मे…”
अगले धक्के केँ संग मेरा लण्ड पाँचइंच तक घुस गय़ा। मैंने फिन सें बहोत हि जोर कां एक् धक्का औऱ मारा तोँ वोँ अपने हाथों कों ज़ोर-ज़ोर सें बेड पर्र पटकने लगी। उसने अपनेसिर केँ बाल नोचने शुरुआत कर दिये औऱ बहोत हि ज़ोर-ज़ोर सें चिल्लाने लगी। अब तक मेरा लण्ड मिन्नी कि गाण्ड मे छःइंच तक घुस चुका थां।
मैंने पूरी ताकत केँ संगफिन सें जोर कां धक्का मारा तौ वोँ बहोत तेज़-तेज़ सें रोनेलगी। लगरहा थां कि जैसे वोँ मर जायेगी। मे रुक गय़ा औऱ फिन अगले धक्के केँ संग मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे सातइंच घुस चुका थां। मैंने अपना लण्ड एक् झटके सें बाहर् खींच लिया। पक कि आवाज़ केँ संग मेरा लण्ड बाहर् आँ गय़ा। मैंने देखा कि उसकी गाण्ड कां मुँह खुलाहुआ थां औऱ ढेर साराखून मेरे लण्ड पऱ औऱ उसकी गाण्ड पर्र लगाहुआ थां। मैंने तेल कि शीशी उठायी औऱ उसकी गाण्ड केँ छेद मे ढेर सारातेल डाल दिया। उसकेबाद मैंने फिन सें अपना लण्ड धीरे धीरे उसकी गाण्ड मे घुसा दिया। जब मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे सातइंच तक घुस गय़ा तोँ मैंने पूरी ताकत केँ संगदो बहोत हि जोरदार धक्के लगा दिये।
वोँ ज़ोर-ज़ोर सें चिल्लाने लगी- “दिदी, तुमने मुझे कहां फँसा दिया। मे मरीजा रही हूं औऱ तुम् सुन हि नहि रही होँ, बचालो मुझे, नहि तौ यह मुझेमर डालेंगे…”
मैंने कहा-“अब चुप हौ जाओ। मेरा पूरा लण्डअब घुस चुका हैं…”
वोँ कुछ नहि बोलीं, सिर्फ सिसक-सिसक कर रोतीरही। मे अपना लण्ड उसकी गाण्ड मे हि डालेहुए थोड़ी देर तक रुकारहा। आरामसे वोँ कुछहद तक शाँत हौ गयीँ,।
तभी कमरे केँ बाहर् सें हि डोली भाभी नें पूछा-“काम होँ गय़ा?”
मैंने कहा- “अभि तोँ मैंने मात्र अपना औज़ार हि पूरा अंदर घुसाया हैं…”
वोँ बोलीं- “ठीक हैं, अब जल्द सें अपना पानी भि निकाल दो औऱ बाहर् आँ जाओ…”
मैंने आरामसे धक्के लगाने शुरुआत कर दिये तौ मिन्नी फिन सें चीखने लगी। टाइम गुजरता गय़ा औऱ वोँ धीरे धीरे शाँत होती गई,। दस मिनट मे वोँ एकदम शाँत हौ गई, तौ मैंने अपनी स्पीड बढ़ानी शुरुआत कर दि। अब उसके मुँह सें मात्र हल्की-हल्की सि अहह हि निकलरही थि। मैंने अपनी स्पीड औऱ तेजकर दि। तेललगा होने कि वजह सें मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे सटासट अंदर-बाहर् हौ रहा थां। मुझेखूब मजा आँ रहा थां। मिन्नी कों भि अब कुछ-कुछ मजाआने लगा थां।
मे भि पूरेजोश मे आँ चुका थां औऱ तेजी केँ संग उसकी गाण्ड माररहा थां। दस मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी औऱ फिनझड़ गय़ा। लण्ड कां सारा पानी उसकी गाण्ड मे निकाल देने केँ बाद भि मैंने उसकी गाण्ड मे हि अपना लण्ड डालेरखा औऱ उसकेऊपर लेट गय़ा।
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***** ***** too be Contd।.
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अजी श्रीमान जी हम् भि आपके फ़ैनऐसे हि नहीं हें हमेंपता हैं आपके तरकस मे बहोत सें मस्ती भरेतीर हें जोँ अपना जलवा दिखाते रहेंगे . आप् तोँ तीर चलाते रहो हम् तोँ मस्ती केँ सागर मे डूबने कों रेडी हें हेहेहे हेहेहे हेहेहे हेहेहे
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मैंने मिन्नी सें पूछा-“कुछ मजाआया?”
वोँ बोलि- “बहोत दर्द होँ रहा हैं औऱ तुम् पूछरहे हौ कि मजाआया…”
मैंने कहा- “मेरीशपथ हैं तुम्हें, सच-सच बताओ। क्याँ तुम्हें जरा सां भि मजा नहि आया?”
उसने शरमाते हुएकहा- “पहले तोँ बहोत दर्द होँ रहा थां मगरबाद मे मुझे थोडा थोडा सां मजाआने लगा थां कि तुम् रुकगये…”
मैंने कहा- “अभि थोड़ी देर मे मेरा लण्डफिन सें खड़ा होँ जायेगा। उसकेबाद मे फिन सें तुम्हारी गाण्ड मारूँगा…”
वोँ बोलीं- “नहि, अभि रहनेदो…”
तभी डोली भाभी नें पूछा- “क्यूं राज़, काम हौ गय़ा?”
मैंने कहा-“हाँ, मैंने अपना पानी इसकेछेद मे निकाल दिया हैं। अभि थोड़ी हि देर मे मे फिन सें अपना पानी निकालने वाला हूं…”
डोली भाभी नें कहा-“ठीक हैं, जब दोबारा पानी निकाल देना तोँ बाहर् आँ जानां…”
मैंने कहा-“ठीक हैं…”
मैंने अपना लण्ड मिन्नी कि गाण्ड मे हि रखा औऱ उसकी चूचियों कों मसलता रहा। 15 मिनट मे हि मेरा लण्डफिन सें खड़ा होँ गय़ा तौ मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरुआत कर दि। अब उसके मुँह सें सिर्फ हल्की हल्की सि अहह हि निकलरही थि। थोड़ी हि देर मे उसेमजा आनेलगा तौ वोँ सिसकारियां लेनेलगी।
मैंने पूछा-“अब कैसालग रहा हैं?”
वोँ बोलीं- “अब अच्छा लगरहा हैं…”
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दि तौ थोड़ी हि देर मे वोँ जोर कि सिसकारियां भरनेलगी। मुझे भि उसकी गाण्ड मारने मे खूबमजा आँ रहा थां। बीस मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी औऱ फिनझड़ गय़ा। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड सें बाहर् निकाला औऱ उसकेबगल मे लेट गय़ा।
मैंने उसके होंठों कों चूमते हुए पूछा- “कैसालगा?”
वोँ बोलीं- “इसबार कुछ अधिक हि मजाआया। अच्छा हुआ तुमने मुझे शराब पिला दि। कड़वी तौ थि पऱ अब बहुत अच्छा लगरहा हैं…”
मैंने कहा- “आहिस्ता तुम्हें अधिकमजा आने लगेगा। चाहो तौ जब भि मे तुम्हारे छेद मे अपना औज़ार डालूँ, तुम् थोड़ी शराबपी लिया करना। तुम्हें अधिकमजा आयेगा…” मे मिन्नी केँ पास सें उठकर बाहर् चलाआया।
डोली भाभी बाहर् बैठी थि। नशे औऱ पूरीरात नाँ सोने केँ कारण उनकी आँखें लाल औऱ बुझी हुई सि थीं। उन्होंने मुझसे पूछा-“काम होँ गय़ा?”
मैंने कहा-“हाँ…”
वोँ बोलीं- “मे गर्म पानी सें उसकी बुर कि सिकायी कर देती हूं। इससे उसका दर्दकम हौ जायेगा…”
मे चुपरह गय़ा क्योंकी मैंने तौ मिन्नी कि बुर कों अभि तक छुआ हि नहि थां। मैंने तौ उसकी गाण्ड मारी थि। मे मिन्नी केँ पासचला गय़ा।
डोली भाभी पानी गर्म करके लेँ आयीं। वोँ बोलीं- “मे पानी गर्म करके लायी हूं, अंदर आँ जाऊँ…”
मैंने कहा- “आँ जाओ…”
मिन्नी बोलि- “मे एकदम नंगी हूं औऱ तुम् दिदी कों यहा बुलारहे हौ। क्याँ सोचेंगी वोँ… मे नंगी औऱ बैड पे सैंडल पहनेहुए…”
मैंने कहा- “तोँ क्याँ हुआ?”
वोँ कुछ नहि बोलि। डोली भाभी अंदर आँ गयीँ,। उन्होंने मिन्नी सें कहा-“लाओ मे तुम्हारे छेद कि सिकायी करदूँ। इससे तुम्हारा दर्दकम हौ जायेगा…”
मिन्नी नें करवटबदल ली तोँ डोली भाभी नें कहा- “तुमने करवट क्यूं बदलली। अब मे केसे तुम्हारे छेद कि सिकायी करूँगी?”
उसने अपनी गाण्ड केँ छेद कि तरफ इशारा करतेहुए कहा-“इसी मे तौ इन्होंने अपना औज़ार घुसाया थां…”
डोली भाभी केँ मुँह सें निकला- “क्याँ?”
डोली भाभी कि नज़र मिन्नी कि गाण्ड पर्र पड़ी। उसकी गाण्ड खून सें लथपथ थि। मैंने अभि तक अपना लण्डसाफ नहि किया थां। मेरा लण्ड भि खून सें भीगाहुआ थां। डोली भाभी आँखें फाड़े कभी मेरे लण्ड कों औऱ कभी मिन्नी कि गाण्ड कों औऱ कभी मेरे चेहरे कों देखने लगी। डोली भाभी नें गर्म पानी सें मिन्नी केँ गाण्ड कि सिकायी कि। उसकेबाद उन्होंने मुश्कुराते हुए मिन्नी सें कहा- “मिन्नी तुमने एक् मैदन तौ मार लिया हैं। अब दूसरा मैदन मारना औऱ बाकी हैं…”
वोँ बोलीं- “दिदी, मे समझी नहि…”
डोली भाभी नें मिन्नी कि बुर पर्र हाथ लगाते हुएकहा- “अभि तौ तुम्हें इसछेद मे भि इसका औज़ार अंदर लेना हैं…”
मिन्नी कों बहोत दर्द होँ रहा थां। डोली भाभी कि बात सुनकर वोँ गुस्से मे आँ गयीँ,। उसने अपनी बुर कि तरफ इशारा करतेहुए कहा- “एक् छेद केँ अंदर इनका औज़ार लेने मे हि मेरा इतना बुराहाल होँ गय़ा औऱ आप् कहरही हौ कि अभि इसछेद मे भि अंदर लेना हैं। मे अब किसीछेद मे इनका औज़ार अंदर नहि लूँगी। मुझे बहोत दर्द होता हैं। आप् स्वयं हि इनका औज़ार अपनेछेद मे लेँ लो…”
डोली भाभी नें मुश्कुराते हुएकहा- “मेरे अंदर लेने सें क्याँ होगा। आखिर तुम्हें भि तोँ इसका औज़ार अपनेइस छेद मे अंदर लेना हि पड़ेगा। जैसे एक् बार तुमने दर्द कों बर्दाश्त कर लिया हैं उसीतरह सें एक् बार औऱ दर्द कों बर्दाश्त कर लेना…”
मिन्नी नें डोली भाभी कि बुर कि तरफ इशारा करतेहुए कहा- “पहले तुम् इनका औज़ार अपनेइस छेद मे अंदर लेकर दिखाओ। उसकेबाद हि मे इनका औज़ार अपनेइस छेद मे अंदर लूँगी…”
डोली भाभी मुझे देखने लगी औऱ मे उनको।
मिन्नी बोलि- “क्यूं अब क्याँ हुआ? आप् मुझे फँसारही थि मगर मैंने आपको हि फँसा दिया। दिखाओ इनका औज़ार अपनेछेद केँ अंदर लेकर…”
डोली भाभी नें कहा- “अच्छा बाबा, अभि दिखा देती हूं मगर उसकेबाद तौ तुम् मना नहि करोगी?”
वोँ बोलीं- “पहले आप् दिखाओ। उसकेबाद मे इनका औज़ार अंदर लेँ लूँगी भले हि मुझे कितनी भि तकलीफ क्यूं नां होँ…”
डोली भाभी नें मुझसे कहा- “देवरु जी… मिन्नी ऐसे नहि मानेगी। अब तुम् अपना औज़ार मेरे अंदरडाल हि दो…”
मैंने कहा- “मिन्नी केँ सामने?”
डोली भाभी बोलि- “तौ क्याँ हुआ?जब यह मुझे तुम्हारा औज़ार अंदर लेतेहुए देखेगी तब हि तोँ यह तुम्हारा औज़ार अंदर लेगी…” डोली भाभी नें अपने कपड़े उतार दिये औऱ मिन्नी केँ बगल मे लेट गई,। मे डोली भाभी केँ पैरों केँ बीच आँ गय़ा तोँ डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा-“अब तुम् बैठजाओ औऱ देखो कि केसे मे इसका औज़ार पूरा कां पूरा अंदर लेती हूं…”
मिन्नी डोली भाभी केँ बगल मे बैठ गई,। मैंने डोली भाभी कि बुर मे अपना लण्ड घुसाना शुरुआत कर दिया। आहिस्ता मेरा पूरा कां पूरा लण्ड डोली भाभी कि बुर मे समा गय़ा। मिन्नी आँखें फाड़े देखती रही। उसकेबाद मैंने डोली भाभी कि चुदाई शुरुआत कर दि। मिन्नी मेरे लण्ड कों डोली भाभी कि बुर मे सटासट अंदर-बाहर् होतेहुए देखती रही। पाँच मिनट कि चुदाई एक् बाद डोली भाभीझड़ गयीँ, तोँ मिन्नी नें कहा- “दिदी, तुम्हारे छेद मे सें क्याँ निकलरहा हैं?”
डोली भाभी नें कहा-“यह मेरी बुर कां पानी हैं। अभि यहकईबार निकलेगा। जबयह तुम्हारी बुर मे भि अपना लण्ड घुसाकर तेजी सें अंदर-बाहर् करेगा तब तुम्हारी बुर मे सें भि ऐसा हि पानी निकलेगा। बुर सें पानी निकलने पर्र बहोत मजाआता हैं। तुम् स्वयं हि देखलो कि मुझे कितना मजा आँ रहा हैं…”
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मैंने डोली भाभी कों करीब-करीब 25 मिनट तक खूब जमकर चोदा। मिन्नी आँखें फाड़े देखती रही। लण्ड कां सारा पानी डोली भाभी कि बुर मे निकाल देने केँ बाद मैंने अपना लण्ड बाहर् निकाल लिया।
तोँ मिन्नी बोलीं- “तुम्हारे लण्ड पऱ तोँ जरा सां भि खून नहि लगा हैं?”
मैंने कहा-“खून तोँ मात्र पहली पहलीबार घुसाने मे हि निकलता हैं…”
वोँ कुछ नहि बोलि।
डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा-“अब तोँ रेडी हौ इसका लण्ड अपनी बुर मे लेने केँ लिये?”
वोँ बोलि- “हाँ, मगर दिदी, बहोत दर्द होगा…”
डोली भाभी नें कहा- “पगली, सिर्फ एक् हि बार तौ दर्द होगा। उसकेबाद तौ तुँ स्वयं हि इससे बार-बार कहेगी कि अपना लण्ड मेरी बुर मे डालदो…”
वोँ बोलीं- “भला मे ऐसा क्यूं कहूँगी?”
डोली भाभी नें कहा- “क्योंकी तुम्हें इसमें मजा जौ आयेगा…”
मे डोली भाभी केँ बगल मे लेट गय़ा। मिन्नी मेरे लण्ड कों देखती रही। थोड़ी देरबाद वोँ बोलि- “इनका लण्डअब खड़ा क्यूं नहि हौ रहा हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “अभि इसने मुझे चोदा हैं नाँ। इसलिये। तूँ इसके लण्ड कों सहलाना शुरुआत करदे। थोड़ी हि देर मे यहफिन सें खड़ा होँ जायेगा…”
डोली भाभी कि चुदाई देखकर मिन्नी कों भि थोडा जोश आँ गय़ा थां। उसने अपनाहाथ धीरे-धीरे सें मेरे लण्ड पऱ रख दिया। थोड़ी देर तक वोँ मेरे लण्ड कों देखती रही। उसकेबाद उसने मेरे लण्ड कों सहलाना शुरुआत कर दिया। 15-20 मिनट केँ बाद मेरा लण्डफिन सें खड़ा होनेलगा। मैंने देखा कि उसकी आँखें कुछ गुलाबी सि होनेलगी थीं। लण्ड खड़ा होतेदेख मिन्नी जोश मे आँ गई, औऱ डोली भाभी सें बोलि- “दिदी, अब तौ इनका लण्ड खड़ा होँ गय़ा…”
डोली भाभी बोलीं- “अब तुँ लेटजा…”
इतना कहकर डोली भाभी उठकरबैठ गई, औऱ मिन्नी लेट गयीँ,। डोली भाभी नें मुझसे कहा- “तुँ मेरेसंग जरा बाहर् आँ…” मैंने डोली भाभी केँ संग बाहर् आँ गय़ा। डोली भाभी नें कहा-“इस बार मिन्नी केँ ऊपरजरा सां भि रहममत करना। पूरी ताकत केँ संग धक्का लगाते हुए पूरा कां पूरा लण्ड अंदर घुसा देना। ज़्यादा देर भि मत करना। उसकेबाद उसकी किसी दुश्मन कि तरहखूब जमकर चुदाई करना। समझ गये?”
मैंने कहा, ठीक हैं- “मे ऐसा हि करूँगा…”
डोली भाभी नें कहा- “मैंने कभी तेरे भैया सें गाण्ड नहि मरवाती थि। मेरी गाण्ड कब मारेगा?”
मैंने कहा-“जब तुम् बोलो…”
वोँ बोलि- “ठीक हैं, मे तुझेही बता दूँगी। अबचल मेरेसंग कमरे मे…”
मे डोली भाभी केँ संग कमरे मे आँ गय़ा। मिन्नी बेड पर्र लेटी हुईँ थि। डोली भाभी नें मुझसे कहा-“अब तुँ अपने लण्ड पऱ तेललगा लें औऱ मिन्नी कि चुदाई शुरुआत कर। मे इसकेपास हि बैठ जाती हूं…”
डोली भाभी मिन्नी केँ बगल मे बैठ गई,। मैंने अपने लण्ड पऱ ढेर सारातेल लगा लिया औऱ मिन्नी केँ पैरों केँ बीच आँ गय़ा। जैसे हि मैंने अपना लण्ड मिन्नी कि बुर पऱ रखा।
तोँ डोली भाभी नें कहा-“ऐसे नहि। मे बताती हूं…”
मैंने कहा- “बताओ…”
डोली भाभी नें कहा- “तूँ अपनाहाथ इसकी टाँगों केँ नीचे सें डालकर इसके कंधे कों जोर सें पकड़ लें। उसकेबाद अंदर घुसा…” मैंने मिन्नी कि टाँगों केँ नीचे सें हाथ डालकर मिन्नी केँ कंधों कों जोर सें पकड़ लिया। डोली भाभी नें कहा-“अब जैसा मैंने तुम्हारी तरफ समझाया थां। ठीकउसी तरह अंदर घुसादे…”
मैंने मिन्नी केँ बुर केँ मुँह पर्र अपने लण्ड कां सुपाड़ा रख दिया। जैसे हि मैंने धक्का लगाया तौ डोली भाभी नें मिन्नी केँ मुँह कों जोर सें दबाकर पकड़ लिया। मिन्नी केँ मुँह सें गूँ-गूँ कि आवाज़ हि निकल पायी।
डोली भाभी मुझसे बोलीं- “घुसादे जल्द सें पूरा कां पूरा…”
मे तौ ताकतवर थां हि। मैंने अपनी सारी ताकत लगाते हुएफिन सें एक् धक्का मारा। मिन्नी कि बुर सें खून कि धार निकलने लगी। मेरा लण्डखून सें नहा गय़ा। वोँ अपने हाथों कों जोर-शोर सें बेड पर्र पटकने लगी। उसकी सारी कि सारी चूड़ियां टूट गयीं औऱ उसकाहाथ लहू लुहान होँ गय़ा। मुँहदबा होने कि वजह सें उसके मुँह सें सिर्फ गूँगूँ कि आवाज़ हि निकलपा रही थि। मैंने फिन सें एक् धक्का लगाया। इस धक्के केँ संग हि मेरा लण्ड मिन्नी कि बुर मे सटइंच तक घुस गय़ा। मिन्नी बेचैनी रही थि। उसकी आँखों सें आँसूबह रहे थें। बेड कि चादर पर्र भि ढेर साराखून लग गय़ा थां।
भाभी बोलीं- “जल्दकर…”
मैंने एक् धक्का औऱ मारा तोँ मेरा लण्डआठ इंचघुस गय़ा। मैंने गहरी साँस लेतेहुए फिन सें जोर कां धक्का लगाया। इस धक्के केँ संग हि मेरा पूरा कां पूरा लण्ड मिन्नी कि बुर मे समा गय़ा।
डोली भाभी बोलि- “अपना पूरा लण्ड बाहर् निकालकर एक् हि झटके मे फिन सें अंदरकर दे…”
मैंने वैसा हि किया।
डोली भाभी नें कहा- “शाबाश… ठीकइसी तरह सें चार-पाँच बार औऱ कर…”
मैंने चार-पाँच बारफिन सें वैसा हि किया। मिन्नी उतावलापन रही थि। उसका सारा जिस्म पसीने सें नहा गय़ा थां। उसकी साँसें बहोत तेजचल रही थि औऱ सारा जिस्म थर-थर काँपरहा थां। मैंने मिन्नी कि चुदाई शुरुआत कर दि। डोली भाभी अभि भि उसका मुँह दबाये हुए थि। उसके मुँह सें गूँ-गूँ कि आवाज़ निकलरही थि। उसकी बुर नें मेरे लण्ड कों बुरीतरह सें जकड़रखा थां। मेरा लण्ड आसानी सें उसकी बुर मे अंदर-बाहर् नहि होँ पारहा थां। पूरी ताकत केँ संग मे करीबदस मिनट तक उसकी चुदाई करतारहा। मिन्नी अबकुछ हद तक शाँत होँ चुकी थि। डोली भाभी नें अपनाहाथ उसके मुँह पऱ सें हटा लिया।
तौ मिन्नी सिसक-सिसक कर रोतेहुए कहनेलगी- “दिदी, आप् दोनों नें मिलकर मुझेमार हि डाला। बहोत दर्द होँ रहा हैं…”
डोली भाभी नें कहा-“अब तौ पहले जैसा दर्द नहि हैं न्?”
वोँ बोलि- “नहि, अब पहले सें बहोत कम हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “थोडा सब्रकर, अभि बाकी कां दर्द भि चला जायेगा…”
मे तेजी केँ संग उसकी चुदाई कररहा थां। अब वोँ चीख नहि रही थि, सिर्फ आहेंभर रही थि। मैंने उसे पाँच मिनट तक औऱ चोदा तौ मिन्नी झड़ गयीँ,। उसकी बुर औऱ मेरा लण्ड एकदम गीला होँ गय़ा। अब मेरा लण्ड थोडा आसानी सें उसकी बुर मे अंदर-बाहर् होनेलगा थां। मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दि। मिन्नी नें धीरे धीरे सिसकारियां भरनी शुरुआत कर दि।
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Rohit Kapoor wrote:Great work Thanks dear, . .
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