छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 Stories Complete (2015)
nangi family desi kamuk kahaniyan
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा- “इसका औज़ार तोँ सच मे बहोत बड़ा हैं। तुम्हें दर्द कों बर्दाश्त करना हि पड़ेगा नहि तोँ बड़ी बदनामी होगी…” डोली भाभी नें मिन्नी कों बहोत समझाया तोँ वोँ मान गई,।
डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा-“अब तुम् अपने कमरे मे जाओ। मे इसे समझा बुझाकर तुम्हारे पासभेज देती हूं…”
मिन्नी कमरे मे चली गयीँ,। रात केँ दोबजरहे थें। डोली भाभी नें फिन अपने ग्लास मे शराब लें ली औऱ दो घूँट पीकर मुश्कुराते हुए मुझसे कहनेलगी- “देवरु जी, तुम्हारा औज़ार तोँ वाकयी बहोत हि बड़ा हैं औऱ शनदार भि। मैंने आज तक अपनी ज़िंदगी मे ऐसा औज़ार कभी नहि देखा थां। मेरामन इसेहाथ मे पकड़कर देखने कों कहरहा हैं, देखलूँ?” उनकी आवाज़ नशे मे काँपरही थि।
मैंने कहा- “भाभी, आप् क्याँ कहरही हौ? आज आपने बहोत अधिकपी ली हैं औऱ आप् नशे मे हौ…”
वोँ बोलीं- “तुम्हारे भैया कों गुजरे हुए एक् साल होँ गय़ा। आखिर मे भि तौ महिला हूं औऱ जवान भि। मेरामन भि कभी-कभी इधर-उधर होने लगाता हैं। तुम् तौ मेरे देवरु हौ। हर महिला अच्छे औज़ार कों मनपसंद करती हैं। मुझे भि तुम्हारा औज़ार बहोत हि अच्छा लगरहा हैं। अगर मे तुमसे लग जाती हूं तोँ मेरी भि ख़्वाहिश पूरी हौ जायेगी औऱ किसी कों कुछपता भि नहि चलेगा…” इतना कहकर उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ लिया औऱ सहलाने लगी।
मे भि आखिर मर्द हि थां। मुझे डोली भाभी कां लण्ड सहलाना बहोत अच्छा लगनेलगा इसलिये मे कुछ नहि बोला।
थोड़ी देर तक मेरा लण्ड सहलाने केँ बाद वोँ बोलि- “तुमने अभि तक सुहागरात कां मजा भि नहि लिया हैं औऱ मे समझती हूं कि तुम् भि एकदम भूखे होगे। मेरी ख़्वाहिश पूरी करोगे?”
मैंने कहा-“अगर तुम् कहती हौ भला मे केसे इनकार कर सकता हूं। आखिर मे भि तोँ मर्द हूं औऱ तुम्हारे सिवा मेराइस दुनिया मे औऱ कौन हैं…”
मैंने देखा कि वोँ बहुतनशे मे थीं औऱ उनकेकदम लड़खड़ा रहे थें। ऊँची एंड़ी केँ सैंडलों मे उन्हें डगमगाते देखकर मेरे लण्ड मे एक् लहर सि दौड़ गयीँ,। उन्होंने मिन्नी सें कहा-“अब तुम् सोजाओ। रात बहोत हौ चुकी हैं। मे राज़ कों सभीकुछ समझा दूँगी। उसकेबाद मे उसे सुभह तुम्हारे पासभेज दूँगी। मे बाहर् सें दरवाजा बंदकर देती हूं…”
मिन्नी बोलीं- “ठीक हैं, दिदी…”
डोली भाभी मिन्नी केँ कमरे सें बाहर् आँ गयीँ, औऱ उन्होंने मिन्नी केँ कमरे कां दरवाजा बाहर् सें बंदकर लिया। उसकेबाद वोँ मुझे अपने कमरे मे लेँ गई,। मेरे जिस्म पर्र कुछ भि नहि थां। लूँगी तोँ मैंने पहले हि उतार दि थि। कमरे मे पहुँचते हि डोली भाभी नें कहा- “देवर जीजी, तुमने अपना औज़ार इतने दिनों तक कहां छिपारखा थां। बड़ा हि प्यारा औज़ार हैं तुम्हारा…”
मे उनके नज़दीक चला गय़ा औऱ बोला “भाभी… आपको मैंने इतनी ज़्यादा शराब पीतेहुए पहले नहि देखा। मुझे भि एक् पैगदो नाँ…”
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***** ***** too be contd।.
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मे उनके नज़दीक चला गय़ा औऱ बोला “भाभी… आपको मैंने इतनी ज़्यादा शराब पीतेहुए पहले नहि देखा। मुझे भि एक् पैगदो नां…”
उन्होंने मेरा लण्ड पकड़ लिया औऱ सहलाते हुए बोलीं- “देवर जीजी। आज तोँ बहोत हि खासदिन हैं। मे बस मदहोश हौ जानां चाहती हूं पर्र तुम्हे नहि दूँगी। मुझेपता हैं तुँ पहले सें पीकरआया थां। औऱ तूँ मर्द हैं। थोड़ी सि भि ज़्यादा हौ गई, तोँ तेरायह बेहतरीन औज़ार ठंडापड़ जायेगा…” फिन वोँ कहनेलगी- “मैंने आज तक ऐसा औज़ार कभी नहि देखा थां। हर महिला अच्छा औज़ार मनपसंद करती हैं। मुझे तोँ तुम्हारा औज़ार बहोत मनपसंद आँ गय़ा हैं। आज मे तुमसे लग जाती हूं। तुमसे चुदवाने मे मुझे बहोत मजा आयेगा। मगर जैसे तुमने मिन्नी केँ संग किया थां उसतरह मेरेसंग मत करना नहि तोँ मुझे भि बहोत तकलीफ होगी औऱ मेरे मुँह सें भि चीख निकल जायेगी। मिन्नी पास केँ हि कमरे मे हैं, इसका ख्याल रखना…”
मैंने कहा- “अच्छा…”
थोड़ी देर तक डोली भाभी मेरा लण्ड सहलाती रही औऱ शराब पीतीरही। उसकेबाद उन्होंने भि अपने कपड़े उतार दिये औऱ एकदम नंगी होँ गई,। डोली भाभी भि बहोत हि हसीन थि। वोँ अपने सैंडल उतारने लगी तोँ मैंने उन्हें रोका।
वोँ मुश्कुराते हुए बोलि- “तोँ तूँ भि अपने भैया कि तरह औरतों केँ ऊँची एंड़ी केँ सैंडल देखकर उत्तेजित होता हैं?”
मैंने कहा- “क्याँ भाभी, आपने तौ भैया सें बहोत बार चुदवाया हैं, आप् मुझसे तेल लगाने कों कहरही हें। बिनातेल केँ अधिकमजा आयेगा…”
वोँ बोलि- “फिनदेर किसबात कि। आँ जाओ…”
मे डोली भाभी केँ पैरों केँ बीच आँ गय़ा।
डोली भाभी नें कहा- “आहिस्ता घुसाना, जल्दमत करना। जब मे रोकूँगी तोँ रुक जानां…”
मैंने कहा-“ठीक हैं…”
वोँ बोलि- “चलोअब आरामसे अंदर घुसाओ…”
मैंने अपने लण्ड कां सुपाड़ा डोली भाभी कि बुर केँ मुँह पर्र रख दिया औऱ आहिस्ता अपना लण्ड डोली भाभी कि बुर मे घुसाने लगा। जैसे हि मेरे लण्ड कां सुपाड़ा डोली भाभी कि बुर मे घुसा तौ उनके मुँह सें अहह निकल गयीँ,। उनकी बुर मुझे अधिक टाइटलग रही थि। मेरा लण्ड आसानी सें घुस नहि पारहा थां। मे जोर लगाकर आरामसे अपना लण्ड डोली भाभी कि बुर मे घुसाने लगा। डोली भाभी आहें भरतीरही। जब मेरा लण्ड पाँचइंच तक घुस गय़ा तौ दर्द केँ मारे उनका बुराहाल होनेलगा मगर उन्होंने मुझे रोका नहि। उन्होंने अपने होंठों कों जोर सें जकड़ लिया थां। मे जोर लगाता रहा।
जब मेरा लण्ड डोली भाभी कि बुर मे छःइंच तक घुस गय़ा तौ वोँ बोलि- “अबरुक जाओ…”
मे रुक गय़ा तोँ वोँ बोलि- “बहोत दर्द होँ रहा हैं। अब बर्दाश्त करना मुश्किल हैं। कितना बाकी हैं अभि?”
मैंने कहा-“तीन इंच…”
वोँ बोलीं- “अब औऱ ज़्यादा अंदरमत घुसाना। आरामसे चुदाई करना शुरुआत करदो…”
मैंने धीरे धीरे डोली भाभी कि चुदाई शुरुआत कर दि। उनकी बुर नें मेरे लण्ड कों बुरीतरह सें जकड़रखा थां। वोँ आहें भरतीरही। मुझे भि खूबमजा आँ रहा थां। आज मे किसी स्त्री कों पहलीबार चोदरहा थां। पाँच मिनट कि चुदाई केँ बाद डोली भाभीझड़ गयीँ,। उन्होंने बहोत दिनों सें चुदवाया नहि थां इसलिये उनकी बुर सें ढेर साराजूस निकला। उनकी बुर औऱ मेरा लण्ड एकदम गीले होँ गये तौ उन्होंने कहा-“अब आरामसे बाकी कां भि घुसादो…”
मैंने इसबार थोडा ज़्यादा हि जोरलगा दिया तौ वोँ अपने आपकोरोक नहि पायी। उनके मुँह सें चीख निकल हि गई, मगर उन्होंने जल्दी हि स्वयं कों संभाल लिया। मैंने इसबार एक् धक्का लगा दिया तोँ वोँ दर्द केँ मारे तड़पने लगी औऱ बोलि- “अब कितना बाकी हैं?”
मैंने डोली भाभी कि चुदाई शुरुआत कर दि। मुझेखूब मजा आँ रहा थां। डोली भाभी दर्द केँ मारे आहेंभर रही थि। जैसे-जैसे वक़्त गुजरता गय़ा वोँ शाँत होती गयीँ,। अब उन्हें भि मजाआने लगा थां। तभी मैंने एक् धक्का लगाकर बाकी कां लण्ड भि उनकी बुर मे घुसा दिया।
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मैंने डोली भाभी कि चुदाई शुरुआत कर दि। मुझेखूब मजा आँ रहा थां। डोली भाभी दर्द केँ मारे आहेंभर रही थि। जैसे-जैसे टाइम गुजरता गय़ा वोँ शाँत होती गई,। अब उन्हें भि मजाआने लगा थां। तभी मैंने एक् धक्का लगाकर बाकी कां लण्ड भि उनकी बुर मे घुसा दिया।
वोँ चीखउठी औऱ बोलीं- “पूराघुस गय़ा?”
मैंने कहा-“हाँ…”
वोँ बोलि- “अब ज़ोर-ज़ोर सें चोदो। तुम् तोँ गाँव मे कुश्ती लड़ा करते थें न्?”
मैंने कहा-“अगर फाड़ दूँगा तोँ बाद मे मजा केसे आयेगा?”
वोँ बोलीं- “तुम् इसका मतलब नहि समझे। मे सचमुच फाड़ने कों थोड़े हि कहरही हूं…”
मैंने बहोत हि तेज़-तेज़ केँ धक्के लगाते हुए डोली भाभी कों चोदना शुरुआत कर दिया। डोली भाभी तोँ बहोत हि सेक्सी निकलीं। वोँ हर धक्के केँ संग अपने चूतड़ उछाल-उछालकर मुझसे चुदवा रही थि। पूराबेड ज़ोर-ज़ोर सें हिलरहा थां। कमरे मे धपधप कि आवाज़ होँ रही थि। उनकी बुर सें सें भि चप-चप कि आवाज़ निकलरही थि। मे भि पूरेजोश मे थां औऱ वोँ भि। पाँच मिनट कि चुदाई केँ बाद वोँ फिन सें झड़ गयीँ, मगर मे रुका नहि। मे खूब तेज़-तेज़ केँ धक्के लगाते हुए उनकी चुदाई कररहा थां। वोँ पूरीतरह सें मस्त हौ चुकी थि औऱ अपनी चूचियों कों अपने हाथों सें मसलरही थि। थोड़ी देर कि चुदाई केँ बाद मे झड़ गय़ा। डोली भाभी भि मेरेसंग हि संगफिन सें झड़ गयीँ,।
मैंने अपना लण्ड उनकी बुर सें बाहर् निकाला तौ मेरे लण्ड पऱ खून भि लगाहुआ थां।
डोली भाभी नें कहा-“देख लिया तुमने अपने लण्ड कि करतूत। इसनेमुझ जैसी चुदी चुदाई स्त्री कि बुर सें भि खून निकाल दिया…” उन्होंने मेरे लण्ड कों कपड़े सें साफकर दिया।
उसकेबाद मे उनकेबगल मे लेट गय़ा। वोँ मेरे होंठों कों चूमने लगी औऱ बोलि- “देवर जीजी, आज तौ तुमने मुझेऐसा मजा दिया हैं कि मे क्याँ बताऊँ। ऐसामजा तोँ मुझेआज तक कभी नहि मिला…”
वोँ बोलीं- “मैंने तुम्हारे भैया सें इतने सालों तक चुदवाया थां। फिन भि मुझे तुम्हारा लण्ड अपनी बुर केँ अंदर लेने मे बहोत तकलीफ हुइ। मिन्नी अभि बहोत छोटी हैं। जरा सोचो कि उसे कितनी तकलीफ होती होगी…”
मैंने कहा-“तब तुम् हि बताओ मे क्याँ करूँ। क्याँ मे मिन्नी कों छोड़कर मात्र तुमहारी चुदाई करूँ?”
वोँ बोलीं- “मे ऐसा थोड़े हि कहरही हूं। अबकीबार जब तुम् मिन्नी कि चुदाई करना तोँ उसकेऊपर जरा सां भि रहममत करना। वोँ चाहे कितनी भि चीखे याँ चिल्लाये। अपना पूरा कां पूरा लण्ड अंदर घुसा देना। उसकीचीख मुझे सुनायी पड़ेगी। तुम् इसकी परवाह मत करना…”
मैंने कहा-“ठीक हैं, मे ऐसा हि करूँगा…”
वोँ बोलीं- “थोड़ी देर आरामकर लो। उसकेबाद मिन्नी केँ पासजाओ। अबकीबार हार नहि मानना। पूरा कां पूरा घुसा देनाभले हि वोँ कितना भि चीखे याँ चिल्लाये। होँ सके तोँ उसे भि थोड़ी सि शराब पिलादो। उसे तकलीफ कुछकम होगी औऱ बाद मे मजा भि ज़्यादा आयेगा…”
मैंने कहा- “मे ऐसा हि करूँगा…”
सुभह केँ पाँच बजने वाले थें। थोड़ी देर आराम करने केँ बाद मे मिन्नी केँ पासचला गय़ा। मिन्नी सोरही थि। मैंने उसे जगाया तौ वोँ उठ गई,। मैंने उससेकहा- “जाकरतेल कि शीशीउठा लाओ औऱ मेरे लण्ड पर्र ढेर सारातेल लगादो…”
वोँ बोलीं- “मुझेशरम आती हैं…”
मैंने कहा-“अगर तुम् मेरे लण्ड पर्र तेल नहि लगाओगी तोँ मे ऐसे हि अपना लण्ड तुम्हारे छेद मे घुसा दूँगा…”
वोँ बोलीं- “नां बाबा नां, ऐसामत करना। जब तेल लगाने केँ बाद भि इतना दर्द होता हैं तोँ बिनातेल लगाये जब तुम् अपना औज़ार अंदर घुसाओगे तोँ मे तोँ मर हि जाऊँगी। मे तुम्हारे औज़ार पऱ तेललगा देती हूं…” इतना कहकर वोँ उठी। उसनेतेल कि शीशी सें तेल निकालकर मेरे लण्ड पर्र लगा दिया। उसकेतेल लगाने सें मेरा लण्ड एकदम टाइट होँ गय़ा। उसकेबाद मैंने एक् ग्लास मे थोड़ी सि शराब डालकर उसके होंठों सें ग्लास लगा दिया। उसने थोड़ी आनाकनी कि पऱ फिन मेरे समझाने पऱ वोँ बुरा सां मुँह बनाकर एक् हि साँस मे पूरागटक गई,।
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan - Aage kya hua? Next part padhiye
औऱ aage badhyo kahani ko,बहोत kamuk hain,new style कि hain
Jagdish
dosto, New kahani iss poste. Now, its your turn. . .
Vineeta
bhay aisi padhaai sab स्थान hu jaaye too maze hu jayen
Sonaal
ऐसी पढ़ाई तोँ होती रहनी चाहिए भइया एक् औऱ हॉटकथा आपकीपढ़ करमजा आँ गय़ा
Poonam
rangila wrote:ekdum hot h bhay komaalrani wrote:Bahoot hi Badhiyaa h ...Mast ... Thanks dosto, Enjoy the new kahani "मेरे मित्र कि पत्नि" . .
Susmita
supar story h mitr
Shaleenee
हंगामेदार किस्सा हैं भइया
Virendra
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
Deeksha
Rohit Kapoor wrote:supar story h mitr jay wrote:हंगामेदार कथा हैं भइया rajsharma wrote:अति उत्तेजक रचना हैं साथी . शुक्रिया दोस्तों, संग मे बने रहने केँ लिये। अगली स्टोरी प्रस्तुत हैं। . .