छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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मैंने कहा- “भाभी…यह क्याँ पूरी बोतल? आप् अकेले मतपी जानां। आपको कंट्रोल नहि रहता…”
वोँ बोलीं- “तुँ मेरी फिक्र मतकर। आज खुशी कां दिन हैं। पऱ मे अधिक नहि पीयूँगी। खैर तूँ ज़रूरी बातसुन…” औऱ कहनेलगी- “मिन्नी अभि छोटी हैं। उसकेसंग बहोत आहिस्ता करना…”
मैंने मज़ाक किया- “मुझे करना क्याँ हैं?”
वोँ बोलि- “शैतान कहीं कां… तुँ तोँ ऐसेकह रहा हैं कि जैसेकुछ जानता हि नहि…”
मैंने कहा- “मुझेकुछ नहि मालूम हैं…”
डोली भाभी नें मुश्कुराते हुएकहा- “पहले उससे प्रेम कि दो बातें करना। उसकेबाद अपने औज़ार पर्र ढेर सारातेल लगा लेना। फिन अपना औज़ार उसकेछेद मे बहोत हि धीरे धीरे घुसा देना। जल्दमत करना नहि तौ वोँ बहोत चिल्लायेगी। वोँ अभि 18 साल कि हि हैं। समझगये न्…”
मैंने कहा-“हाँ, मे समझ गय़ा…”
डोली भाभी नें कहा-“अब जा अपने कमरे मे…”
मे अपने कमरे मे आँ गय़ा। मिन्नी बेड पऱ बैठी थि, मे भि उसकेबगल मे बैठ गय़ा। मैंने उससे पूछा- “मे तुम्हें पसन्द हूं?”
उसने अपनासिर हाँ मे हिला दिया।
मैंने कहा-“ऐसे नहि, बोलकर बताओ…”
उसने शरमाते हुएकहा- “हाँ…”
मैंने पूछा- “कहां तक पढ़ी होँ?”
वोँ बोलीं- “सिर्फ इंटर तक…”
मैंने कहा- “मेरी डोली भाभी नें मुझेकुछ सिखाया हैं। क्याँ तुम्हें भि किसी नें कुछ सिखाया हैं?”
वोँ कुछ नहि बोलि तौ मैंने कहा-“अगर तुम् कुछ नहि बोलोगी तोँ मे बाहर् चला जाऊँगा…”
इतना कहकर मे खड़ा होँ गय़ा तौ उसने मेराहाथ पकड़ लिया।
मे उसकीबगल मे बैठ गय़ा। मैंने कहा-“अब बताओ…”
वोँ कहनेलगी- “मेरेघऱ पर्र मात्र मेरे मां-पिताजी हि हें। उन्होंने तोँ मुझसे कुछ भि नहि कहामगर मेरे पड़ोस मे रहने वाली भाभी नें मुझसे कहा थां कि तुम्हारे पति जब अपना औज़ार तुम्हारे छेद मे अंदर घुसायेंगे, तब बहोत दर्द होगा। उस दर्द कों बर्दाश्त करने कि कोशिश करना। ज़्यादा चीखना औऱ चिल्लाना मत नहि तोँ बड़ी बदनामी होगी। अपने पति सें कह देना कि अपने औज़ार पऱ ढेर सारातेल लगा लेंगे। मैंने आज तक औज़ार नहि देखा हैं। यह औज़ार क्याँ होता हैं?”
मैंने कहा- “तुमने आदमियों कों पेशाब करते टाइम उनका डंडा देखा हैं?”
उसनेकहा- “हाँ, हमारे मोहल्ले मे तोँ सारे मर्दकभी भि कहीं भि पेशाब करने लगते हें। आते जाते वक़्त मैंने कईबार देखा हैं। मगरउसे तोँ लण्ड कहते हें…”
मैंने कहा-“उसी कों औज़ार भि कहते हें…”
वोँ बोलीं- “मैंने तोँ देखा हैं कि किसी-किसी कां बहोत बड़ा होता हैं…”
मैंने कहा- “जैसे व्यक्ति कईतरह केँ होते हें। ठीकउसी तरह उनका औज़ार भि कईतरह कां होता हैं। मेरा औज़ार देखोगी?”
वोँ बोलीं- “मुझेशरम आती हैं…”
मैंने कहा-“अब तौ तुम्हें हमेशा हि मेरा औज़ार देख्ना पड़ेगा। उसेहाथ मे भि पकड़ना पड़ेगा। देखोगी मेरा औज़ार…”
वोँ बोलि- “ठीक हैं, दिखादो…”
मे पहले सें हि जोश मे थां। मैंने अपनी शर्ट औऱ बनियान उतार दि। उसकेबाद मैंने अपनी पैंट औऱ चड्ढी भि उतार दि। मेरा 9” लंबा औऱ खूब मोटा लण्ड फनफनाता हुआ बाहर् आँ गय़ा। मैंने अपना लण्ड उसके चेहरे केँ सामने कर दिया औऱ कहा-“देख लो मेरा औज़ार…”
उसने तिरछी निगाहों सें मेरे लण्ड कों देखा औऱ शरमाते हुए बोलीं- “तुम्हारा तोँ बहोत बड़ा हैं…” इतना कहकर उसने अपने हाथों सें अपने चेहरे कों ढक लिया।
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***** *****too be contd।।.
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बहोत खूबछा गये गुरु
007 wrote:बहोत खूबछा गये गुरु . Thanks. .
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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मैंने उसकाहाथ पकड़कर उसके चेहरे पर्र सें हटा दिया औऱ कहा- “शरमाती क्यूं होँ। जी भरकरदेख लोइसे। अब तौ सारी ज़िंदगी तुम्हें मेरा औज़ार देख्ना भि हैं औऱ उसे अपनेछेद केँ अंदर भि लेना हैं। मैंने तौ अपने कपड़े उतार दिये हें अब तुम् भि अपने कपड़े उतारदो…”
वोँ बोलि- “मे अपने कपड़े केसे उतार सकती हूं, मुझेशरम आती हैं…”
मैंने कहा-“अगर तुम् अपने कपड़े नहि उतारोगी तौ मे अपना औज़ार तुम्हारे छेद मे केसे घुसाऊँगा?”
वोँ कुछ नहि बोलीं।
मैंने मिन्नी केँ कपड़े उतारने शुरुआत कर दिये तौ वोँ शरमाने लगी। आहिस्ता मैंने उसे एकदम नंगाकर दिया। केवल मैंने उसके पैरों मे सें उसके सैंडल नहि उतारे। डोली भाभी बहुत फैशनेबल थीं औऱ अपनेकाम पर्र औऱ घऱ मे भि अधिकतर वक्त ऊँची एंड़ी केँ सैंडल पहने रहती थि औऱ मुझे औरतों केँ हसीन पैरों मे ऊँची एंड़ी केँ सैंडल देखकर अजीब सि उत्तेजना मिलती थि। किश्मत सें मिन्नी कों भि भाभी नें ऊँची एंड़ी केँ सैंडल पहना दिये थें। मे उसके संगमरमर जैसे हसीन शरीर कों देखकर दंगरह गय़ा। उसकी चूचियां अभि बहोत बड़ी नहि थीं। मैंने उसेबेड पर्र लिटा दिया औऱ उसकी चूचियों कों सहलाते हुएउसे होंठों कों चूमने लगा। मैंने देखा कि उसकी बुर पर्र अभि बहोत हल्के-हल्के बाल हि उगे थें औऱ उसकी बुर एकदम गुलाबी सि दिखरही थि। मैंने उसकी चूचियों कों मसलना शुरुआत कर दिया।
तोँ वोँ बोलि- “मुझे गुदगुदी होँ रही हैं…”
मैंने पूछा- “अच्छा नहि लगरहा हैं?”
वोँ बोलीं- “बहोत अच्छा लगरहा हैं…”
मैंने उसके निप्पलों कों मुँह मे लेकर चूसना शुरुआत कर दिया तौ वोँ सिसकारियां भरनेलगी। उसकेबाद मैंने उसकी बुर कों सहलाना शुरुआत कर दिया। उसे गुदगुदी होनेलगी।
उसने मेराहाथ हटा दिया।
तोँ मैंने पूछा- “क्याँ हुआ?”
वोँ बोलीं- “बहोत जोर कि गुदगुदी होँ रही हैं…”
मैंने कहा- “अच्छा नहि लगरहा हैं क्याँ?”
वोँ बोलीं- “अच्छा तोँ लगरहा हैं…”
मैंने कहा- “तुमने मेराहाथ क्यूं हटाया। अगर तुम् ऐसा हि करोगी तोँ मे बाहर् चला जाऊँगा…”
वोँ बोलि- “ठीक हैं, मे अब तुम्हें कुछ भि करने सें मना नहि करूँगी…”
मैंने कहा-“फिन ठीक हैं…” मैंने उसकी बुर कों सहलाना शुरुआत कर दिया।
थोड़ी हि देर मे उसकी बुर गीली होनेलगी। वोँ ज़ोर-ज़ोर सें सिसकारियां भरनेलगी। मैंने एक् अँगुली उसकी बुर केँ अंदरडाल दि तोँ उसनेजोर कि सिसकरी ली। मेरा लण्डअब तक बहोत अधिक टाइट होँ चुका थां। थोड़ी देर तक मे उसकी बुर मे अपनी अँगुली अंदर-बाहर् करतारहा तौ वोँ झड़ने लगी।
झड़ते वक्त उसने मुझेजोर सें पकड़ लिया औऱ बोलीं- “तुम्हारे अँगुली करने सें मुझे तौ पेशाब हौ रहा हैं…”
मैंने कहा-“यह पेशाब नहि हैं। जोश मे आने केँ बाद बुर सें पानी निकलता हैं…”
वोँ कुछ नहि बोलि। मेरी अँगुली उसकी बुर केँ पानी सें एकदम गीली होँ चुकी थि। थोड़ी हि देर मे वोँ पूरेजोश मे आँ गई,।
तौ मैंने कहा-“अब मे अपना औज़ार तुम्हारे छेद मे घुसाऊँगा। तुम् पेट केँ बललेट जाओ…”
वोँ पेट केँ बललेट गयीँ,। मैंने देखा कि उसकी गाण्ड भि एकदम गोरी थि। उसकी गाण्ड कां छेद बहोत हि हल्के भूरेरंग कां थां। मे अपनी अँगुली उसकी गाण्ड केँ छेद पर्र फिराने लगा। उसकेबाद मैंने एक् झटके सें अपनी एक् अँगुली उसकी गाण्ड मे घुसा दि। वोँ जोर सें चीखी।
मैंने कहा-“अगर तुम् ऐसे चीखोगी तोँ डोली भाभी आँ जायेगी…”
वोँ बोलीं- “दर्द हौ रहा हैं…”
मैंने कहा- “दर्द तोँ होगा हि। अभि तौ मे अपना लण्ड तुमहारी गाण्ड मे घुसाऊँगा…” थोड़ी देर तक मे अपनी अँगुली उसकी गाण्ड मे अंदर-बाहर् करतारहा।
वोँ बोलि- “मेराछेद तोँ बहोत हि छोटा हैं औऱ तुम्हारा औज़ार बहोत बड़ा। अंदर केसे घुसेगा?”
मैंने कहा- “जैसे औऱ औरतों केँ अंदर घुसता हैं…”
वोँ बोलीं- “तब तोँ मुझे बहोत दर्द होगा…”
मैंने कहा- “इसीलिये तौ तुम्हारे पड़ोस कि भाभी नें तुमसे कहा थां कि दर्द कों बर्दाश्त करना, अधिक चीखना चिल्लाना मत…”
वोँ बोलि- “मे समझ गयीँ, …”
मे उसकेऊपर आँ गय़ा।
तौ वोँ बोलीं- “तेल नहि लगाओगे?”
मैंने कहा- “लगाऊँगा…”
मैंने अपने लण्ड पऱ ढेर सारातेल लगा लिया। उसकेबाद मैंने उसकी गाण्ड केँ छेद पऱ अपने लण्ड कां सुपाड़ा रखा औऱ उससेकहा- “अब तुम् अपना मुँहजोर सें दबालो जिससे तुम्हारे मुँह सें चीख नां निकले…”
उसनेकहा- “ठीक हैं, दबा लेती हूं मगर बहोत आहिस्ता घुसाना…”
मैंने कहा-“हाँ, मे बहोत धीरे-धीरे हि घुसाऊँगा…”
उसने अपने हाथों सें अपने मुँह कों दबा लिया। मैंने थोडा सां हि जोर लगाया थां कि वोँ जोर सें चीखी। मेरे लण्ड कां सुपाड़ा भि अभि उसकी गाण्ड मे नहि घुस पाया थां। वोँ रोनेलगी औऱ बोलि- “मुझे छोड़दो, बहोत दर्द होँ रहा हैं…”
मैंने कहा- “दर्द तोँ होगा हि। तुम् अपना मुँहजोर सें दबालो…”
उसने अपना मुँहफिन सें दबा लिया तोँ मैंने इसबार कुछ ज़्यादा हि जोरलगा दिया। वोँ दर्द सें तड़पते हुए ज़ोर-ज़ोर सें चीखने लगी- “दिदी, बचालो मुझे, नहि तौ मे मर जाऊँगी…”
इसबार मेरे लण्ड कां सुपाड़ा उसकी गाण्ड मे घुस गय़ा। उसकी गाण्ड सें खून निकलआया थां। वोँ इतने तेज़-तेज़ सें चीखरही थि कि मे थोडा सां डर गय़ा। मैंने एक् झटके सें अपना लण्ड बाहर् खींच लिया। पक कि आवाज़ केँ संग मेरे लण्ड कां सुपाड़ा उसकी गाण्ड सें बाहर् आँ गय़ा। मैंने उसेचुप कराते हुएकहा- “अगर तुम् ऐसे हि चिल्लाओगी तोँ काम केसे बनेगा…”
वोँ बोलि- “मे क्याँ करूँ, बहोत दर्द हौ रहा थां…”
मैंने कहा- “थोडा सब्र सें कामलो। फिनसभी ठीक होँ जायेगा। अब तुम् अपना मुँहदबा लो, मे फिन सें कोशिश करता हूं…”
उसने अपना मुँहदबा लिया तौ मैंने फिन सें अपने लण्ड कां सुपाड़ा उसकी गाण्ड केँ छेद पर्र रख दिया। उसकेबाद मैंने उसकीकमर केँ नीचे सें हाथ डालकर उसेजोर सें पकड़ लिया। फिन मैंने पूरी ताकत केँ संगजोर कां धक्का मारा। वोँ बहोत ज़ोर-ज़ोर सें चिल्लाने लगी। वोँ मेरे नीचे सें निकलना चाहती थि मगर मैंने उसे बुरीतरह सें जकड़रखा थां। मेरा लण्डइस धक्के सें गाण्ड मे तीनइंच तक घुस गय़ा। वोँ ज़ोर-ज़ोर सें चिल्लाते हुए डोली भाभी कों पुकार रही थि- “दिदी, बचालो मुझे नहि तौ यह मुझेमार डालेंगे। बहोत दर्द होँ रहा हैं…”
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तभी कमरे केँ बाहर् सें डोली भाभी कि आवाज़ आयी- “राज़, क्याँ हुआ? मिन्नी इतना क्यूं चिल्ला रही हैं?”
मैंने कहा- “मे अपना औज़ार अंदर घुसारहा थां मगरयह मुझे घुसाने हि नहि देरही हैं। बहोत चिल्ला रही हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “तुम् दोनों बाहर् आँ जाओ। मे मिन्नी कों समझा देती हूं…”
मैंने लुंगी पहनली औऱ मिन्नी सें कहा- “बाहर् चलो। डोली भाभी बुलारही हैं…”
वोँ उठना चाहती थि मगरउठ नहि पारही थि। मैंने उसे सहारा देकर खड़ा किया। उसने मात्र अपनी साड़ी शरीर पऱ लपेटली। मे उसे सहारा देकर बाहर् लेँ आया क्योंकी वोँ दर्द केँ मारेठीक सें चल भि नहि पारही थि। संग हि उसे ऊँची एंड़ी केँ सैंडल पहनने कि आदत भि नहि थि।
डोली भाभी नें मिन्नी सें पूछा- “इतना क्यूं चिल्ला रही थि?”
वोँ रोतेहुए डोली भाभी सें कहनेलगी- “यह अपना औज़ार मेरेछेद मे घुसारहे थें इसलिये मुझे बहोत दर्द होँ रहा थां…”
डोली भाभी नें कहा- “पहली-पहली बार दर्द तोँ होगा हि। सब औरतों कों होता हैं। यहकोई नयीबात थोड़े हि हैं…” डोली भाभी नें मुझसे कहा- “मैंने तुझसे कहा थां नां कि तेल लगाकर आरामसे घुसाना…”
मैंने कहा- “मे तेल लगाकर आरामसे हि घुसाने कि कोशिश कररहा थां। जैसे हि मैंने थोडा सां जोर लगाया औऱ मेरे औज़ार कां टोपा हि इसकेछेद मे घुसा कि यह जोर-शोर सें चिल्लाने लगी। इसके चिल्लाने सें मे डर गय़ा औऱ मैंने अपना औज़ार बाहर् निकाल लिया। उसकेबाद मैंने इसे समझाया तोँ यह राज़ी हौ गई,। मैंने फिन सें कोशिश कि तौ यहफिन ज़ोर-ज़ोर सें चिल्लाने लगी औऱ मेरा औज़ार सिर्फ जरा सां हि अंदरघुस पाया। तभी आपने हम् दोनों कों बुलाया औऱ हम् बाहर् आँ गये…”
डोली भाभी नें कहा- “इसका मतलब तुमने अभि तक कुछ भि नहि किया?”
मैंने कहा- “बिल्कुल नहि… तुम् चाहो तौ मिन्नी सें पूछलो…”
डोली भाभी नें मिन्नी सें पूछा- “क्याँ यहसही कहरहा हैं?”
उसने अपनासिर हाँ मे हिला दिया। डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा- “तुम् कमरे मे जाओ। मे इसे समझा बुझाकर भेजती हूं…”
मिन्नी कमरे मे चली गई,। मैंने देखा कि डोली भाभी कि आँखें नशे मे लाल सि थीं औऱ उन्होंने अभि तक अपने कपड़े नहि बदले थें। उन्होंने मुझे समझाते हुएकहा- “इसबार बहोत हि आरामसे घुसाना नहि तौ मे बहोत मारूँगी…”
मैंने कहा- “मे तोँ बहोत धीरे धीरे हि घुसारहा थां मगर इसकाछेद भि बहोत तोँ छोटा हैं…”
डोली भाभी नें कहा-“फिन तौ ऐसेकाम नहि बनेगा। तुम् इसकेसंग थोड़ी सि जबरदस्ती करनामगर ज़्यादा जबरदस्ती मत करना। यह अभि 18 साल कि हैं। इसलिये इसे ज़्यादा दिक्कत होँ रही हैं…”
मैंने कहा-“ठीक हैं…”
इतना कहकर डोली भाभी मुश्कुराने लगी। मे कमरे मे आँ गय़ा औऱ मैंने अपनी लुंगी उतार दि। मैंने मिन्नी सें अपनी साड़ी उतारने कों कहा तोँ उसनेइस बार स्वयं हि अपनी साड़ी उतार दि। साड़ी उतारने केँ बाद मिन्नी स्वयं हि बेड पर्र सैंडल पहनेहुए पेट केँ बललेट गई,। मैंने अपने लण्ड पर्र ढेर सारातेल लगाया औऱ उसकेऊपर आँ गय़ा। उसकेबाद मैंने जैसे हि अपने लण्ड कां सुपाड़ा उसकी गाण्ड केँ छेद पर्र रखा तौ उसने अपना मुँहदबा लिया। उसकेबाद मैंने थोडा सां जोर लगाया तौ इसबार वोँ अधिकजोर सें नहि चीखी।
मेरे लण्ड कां सुपाड़ा उसकी गाण्ड मे घुस गय़ा। मैंने अपने लण्ड केँ सुपाड़े कों उसकी गाण्ड मे अंदर-बाहर् करना शुरुआत कर दिया तौ वोँ आहें भरनेलगी। थोड़ी देर केँ बाद जैसे हि मैंने थोडा सां जोर लगाया तौ उसनेजोर कि अहहभरी औऱ मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे दोइंच तक घुस गय़ा। मैंने थोडा जोर औऱ लगाया तोँ वोँ जोर-शोर सें चिल्लाने औऱ रोनेलगी। मेरा लण्ड बहोत मोटा थां हि। अब तक उसकी गाण्ड मे तीनइंच हि घुस पाया थां। मे रुक गय़ा मगर वोँ दर्द केँ मारे अभि भि बहोत ज़ोर-ज़ोर सें चिल्ला रही थि। मुझे क्रोध आँ गय़ा तोँ मैंने जोर कां एक् धक्का लगा दिया। इस धक्के केँ संग हि मेरा लण्ड उसकी गाण्ड मे चारइंच तक घुस गय़ा।
वोँ औऱ ज़्यादा ज़ोर-ज़ोर सें चिल्लाने लगी- “दिदी, बचाओ मुझे। मे मर जाऊँगी…”
उसके चिल्लाने कि आवाज़ सुन्कर डोली भाभी नें बाहर् सें पूछा-“अब क्याँ हुआ?”
वोँ रोतेहुए कहनेलगी- “दिदी, मुझेबचा लो नहि तौ मे मर जाऊँगी…”
डोली भाभी नें कहा- “अच्छा तुम् दोनों बाहर् आँ जाओ…”
मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड सें बाहर् निकाला औऱ हट गय़ा। मेरे लण्ड पऱ ढेर साराखून लगाहुआ थां। उसकेबाद हम् दोनों नें कपड़े पहने औऱ बाहर् आँ गये। मिन्नी ठीक सें चल नहि पारही थि। मे उसे सहारा देकर बाहर् लेँ आया।
बाहर् आने केँ बाद डोली भाभी मिन्नी कों समझाने लगी- “देखो मिन्नी अगर तुम् ऐसे हि चिल्लाओगी तोँ काम केसे बनेगा। हर स्त्री कों पहली-पहली बार दर्द होता हैं औऱ उसेउस दर्द कों बर्दाश्त करना पड़ता हैं…”
मिन्नी रोरोकर कहनेलगी- “दिदी, मैंने अपने आपको संभालने कि बहोत कोशिश कि। मगर मे दर्द कों बर्दाश्त नहि कर पायी, इसलिये मेरे मुँह सें चीख निकल गई,। इनका औज़ार भि तोँ बहोत बड़ा हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “औज़ार तौ सबका बड़ा होता हैं। मगर एक् बारजब अंदरघुस जाता हैं फिनकभी भि बड़ा नहि लगाता। उसकेबाद हर महिला कों मजाआता हैं औऱ तुम्हें भि आयेगा…”
मिन्नी बोलीं- “दिदी, मेरीबात पऱ विश्वास करो, इनका औज़ार बहोत बड़ा हैं। मैंने बहोत सें आदमियों कों पेशाब करते वक़्त देखा हैं मगर इनके जैसा औज़ार मैंने आज तक कभी नहि देखा। तुम् चाहो तौ स्वयं हि देखलो, तुम्हें मेरीबात पऱ विश्वास होँ जायेगा…”
डोली भाभी केँ हाथ मे शराब कां भरा ग्लास थां। उन्होंने एक् घूँट पीतेहुए मुझसे कहा- “राज़, दिखा तोँ सही अपना औज़ार। जरा मे भि तोँ देखूँ कि यह बार-बार क्यूं तेरे औज़ार कों बहोत बड़ाकह रही हैं…”
मैंने कहा- “भाभी, मुझेशरम आती हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “मे तोँ तेरी भाभी हूं, मुझसे कैसीशरम… अपना औज़ार बाहर् निकालकर दिखा मुझे। “
मैंने शरमाते हुए अपनी पैंटखोल दि। मेरा लण्ड पहले सें हि खड़ा थां। मेरानौ इंच लंबा औऱ खूब मोटा लण्ड फनफनाता हुआ बाहर् आँ गय़ा। उसपरखून भि लगाहुआ थां।
डोली भाभी नें जैसे हि मेरा लण्ड देखा तौ उन्होंने अपनाहाथ मुँह पऱ रख लिया औऱ बोलि- “बाप रे… तेरा औज़ार सचमुच बहोत हि बड़ा हैं। मैंने भि ऐसा औज़ार तौ कभी देखा हि नहि थां। अब मेरीसमझ मे आया कि मिन्नी क्यूं इतना चिल्लाती हैं…”
मैंने देखा कि डोली भाभी कि आँखें जौ पहले सें नशे मे लालथीं, अब मेरे लण्ड कों देखकर चमकउठी थीं। उन्हें भि जोशआने लगा थां क्योंकी मेरा लण्ड देखने केँ बाद उन्होंने गटागट अपना ग्लास खाली किया औऱ अपना एक् हाथ अपनी बुर पर्र रख लिया थां।
मैंने कहा- “भाभी, तुम् हि बताओ मे क्याँ करूँ। मे अपना औज़ार छोटा तौ नहि कर सकता…”
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komaalrani wrote:सहीबात हैं , भाभी हि चाभी हें। . कोमलजी, आपकी बातों सें दिलखुश होँ जाता हैं। मैंने आपके कहने सें हि इस फोरम पर्र कहानियां पोस्ट करना शुरुआत किया हैं। Thanks. . .
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