छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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डोली भाभी नें पूछा-“अब कैसालग रहा हैं?”
वोँ बोलीं- “अब कुछ-कुछ मजा आँ रहा हैं मगर दर्द अभि भि हैं…”
डोली भाभी नें कहा-“अब इस दर्द कों जाने मे वक़्त लगेगा। उसकेबाद बिल्कुल भि दर्द नहि होगा…”
मिन्नी बोलि- “वक़्त क्यूं लगेगा?”
डोली भाभी नें कहा-“जब यह तुम्हें तीन-चार बारचोद देगा, तब तम्हारी बुर इसके लण्ड केँ साइज़ कि हौ जायेगी। उसकेबाद यह दर्द अपने आप् चला जायेगा…”
मैंने औऱ ज़्यादा जोर-शोर केँ धक्के लगाने शुरुआत कर दिये थें औऱ उसे तेजी केँ संगचोद रहा थां। मिन्नी नें भि अब आरामसे अपने चूतड़ उठाने शुरुआत कर दिये थें। वोँ भि अब मस्ती मे आँ रही थि। पाँच मिनट मे हि वोँ फिन सें झड़ गई,। उसने मेरे होंठों कों चूम लिया औऱ कहा-“अब मुझे बहोत अच्छा लगरहा हैं…”
मैंने उसकी चुदाई जारीरखी।
दो मिनट भि नहि गुजरे थें कि डोली भाभी नें कहा- “मिन्नी अब तुम् इसका लण्ड अपने दूसरे छेद मे लें लो…”
वोँ बोलि- “फिन सें दर्द होगा…”
डोली भाभी नें कहा-“अब ज़्यादा दर्द नहि होगा क्योंकी तुम् इसका लण्ड पहले हि अंदर लें चुकी होँ…”
वोँ बोलि- “फिन इनसेकह दो कि धीरे धीरे करेंगे…”
डोली भाभी नें कहा-“यह धीरे धीरे हि करेगा। मे हूं न् यहा पर्र। अगरयह बदमाशी करेगा तोँ मे इसे बहोत मारूँगी…”
वोँ बोलीं- “ठीक हैं…”
मैंने अपना लण्ड मिन्नी कि बुर सें बाहर् निकाला औऱ उसकी गाण्ड मे घुसाने लगा। मेरे लण्ड पऱ मिन्नी कि बुर कां ढेर सारा पानीलगा हुआ थां। आहिस्ता मेरा लण्डसात इंच तक उसकी गाण्ड मे घुस गय़ा। उसकेबाद जब मैंने औऱ अधिक घुसाने कि कोशिश कि तोँ उसेफिन सें दर्द होनेलगा औऱ वोँ चीखने लगी।
मगर इसबार उसने मुझे रोका नहि। वोँ बोलि- “अब रहनेदो, दर्द हौ रहा हैं…”
डोली भाभी नें कहा-“बस थोडा सां हि तोँ बाकी हैं। उसे भि अंदर लें लो…” मिन्नी कुछ नहि बोलीं।
डोली भाभी नें मुझेआँख मारी तौ मैंने जोर कां धक्का लगा दिया। मेरा बाकी कां लण्ड भि उसकी गाण्ड मे समा गय़ा। वोँ जोर सें चीखी तोँ डोली भाभी नें कहा-“बस हौ गय़ा…”
उसकेबाद मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरुआत कर दि। थोड़ी देर चीखने केँ बाद वोँ शाँत होँ गई,। अबउसे गाण्ड मरवाने मे भि मजाआने लगा थां। करीब पाँच मिनट तक मैंने उसकी गाण्ड मारी।
तौ डोली भाभी नें कहा-“अब रहनेदो…”
मैंने कहा- “अभि तौ मेरे लण्ड कां पानी हि नहि नकला हैं…”
वोँ बोलि- “मे मना थोड़े हि कररही हूं। अब तुम् इसकी बुर मे अपना लण्ड डालकर इसे चोदो…”
मैंने अपना लण्ड मिन्नी कि गाण्ड सें निकालकर उसकी बुर मे डाल दिया। उसकेबाद मैंने पूरी ताकत केँ संग ज़ोर-ज़ोर सें उसकी चुदाई शुरुआत कर दि। पाँच मिनट मे हि मिन्नी फिन सें झड़ गयीँ,। मे इसके पहलेदो बार मिन्नी कि गाण्ड मार चुका थां औऱ दोबार डोली भाभी कों चोद चुका थां। इसलिये मेरे लण्ड कां पानी निकलने कां नाम हि नहि लेँ रहा थां। मे तेज़-तेज़ केँ धक्के लगाते हुए मिन्नी कों चोदरहा थां।
वोँ भि अपने चूतड़ उठाने लगी थि। थोड़ी देरबाद वोँ बोलि- “दिदी, अब मुझे बहोत अच्छा लगरहा हैं। इनसेकह दो कि थोडा औऱ तेज़-तेज़ सें धक्का लगायें…”
डोली भाभी नें मुझसे कहा- “तुमने सुनायह क्याँ कहरही हैं?”
मैंने कहा-“हाँ…”
वोँ बोलीं- “तौ फिन तुम् इसकाकहा मानो औऱ अपनी ताकत दिखादो इसे…”
मैंने पूरी ताकत लगाते हुए बहोत हि ज़ोर-ज़ोर केँ धक्के लगाने शुरुआत कर दिये।
डोली भाभी नें मिन्नी सें पूछा-“अब ठीक हैं?”
वोँ बोलीं- “हाँ…अब मुझे ज़्यादा मजा आँ रहा हैं…” मिन्नी अब चूतड़ उठा-उठाकर मेरासंग देरही थि।
मेरा लण्ड उसकी बुर मे पूरा कां पूरा सटासट अंदर-बाहर् हौ रहा थां। दस मिनट कि चुदाई केँ बाद मिन्नी फिन सें झड़ गई,। मैंने अपना लण्ड उसकी बुर सें बाहर् निकाल लिया तौ उसने मेरे लण्ड कों जल्दी पकड़ लिया औऱ कहनेलगी- “बाहर् क्यूं निकाल रहे होँ। अभि मुझे औऱ मजा लेना हैं…”
मैंने कहा- “मे तुम्हें अभि औऱ मजा दूँगा। अब तुम् घोड़ी कि तरह हौ जाओ…”
वोँ डागी स्टाइल मे होँ गयीँ, तौ मे उसके पीछे आँ गय़ा। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड मे घुसा दिया औऱ उसकी गाण्ड मारने लगा। वोँ जोश केँ मारे सिसकारियां भरनेलगी। पाँच मिनट तक उसकी गाण्ड मारने केँ बाद मे अपना लण्ड उसकी गाण्ड सें निकालकर उसकी बुर मे डाल दिया औऱ उसकी चुदाई करनेलगा। मे उसकीकमर कों पकड़कर उसे बहोत हि बुरीतरह सें चोदरहा थां। वोँ भि अपने चूतड़ आगे पीछे करतेहुए मेरासंग देनेलगी थि। दस मिनट उसकी चुदाई करने केँ बाद मे झड़ गय़ा। मेरेसंग हि संग मिन्नी भि फिन सें झड़ गई,।
मैंने अपना लण्ड बाहर् निकाला तोँ डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा-“अब तुम् इसके लण्ड कों चाटलो…”
वोँ बोलि- “मे इनके लण्ड कों नहि चाटूँगी। इनका लण्ड गंदा हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “गंदा कहां हैं? इसके लण्ड पर्र तुम्हारी बुर कां औऱ इसके लण्ड कां पानी हि तोँ लगा हैं। इसे चाटने सें प्रेम बढ़ता हैं। चाटलो इसे…”
वोँ बोलि- “मे नहि चाटूँगी। मुझे घिन्न आती हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “मे हि चाट लेती हूं। फिनआगे सें तुम को हि चाटना पड़ेगा…”
वोँ बोलीं- “ठीक हैं। पहले तुम् चाटकर दिखाओ, बाद मे मे चाट लूँगी…”
डोली भाभी मेरे लण्ड कों चाटने लगी। मिन्नी देखरही थि। मेरे लण्ड पर्र लगाहुआ थोडा सां पानी डोली भाभी नें चाट लियाफिन मिन्नी सें बोलीं- “अब बाकी कां तुम् चाटलो…”
मिन्नी नें शरमाते हुए मेरे लण्ड कों चाटना शुरुआत कर दिया। उसने मेरे लण्ड पर्र लगेहुए बाकी केँ पानी कों चाट-चाटकर साफकर दिया।
डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा-“अब तुम्हें जबयहफिन सें चोदेगा तोँ चिल्लाओगी तौ नहि?”
वोँ बोलीं- “अब क्यूं चिल्लाऊँगी? अब तौ मुझे बहोत मजाआने लगा हैं…”
डोली भाभी नें कहा-“फिन ठीक हैं, तुम् आरामकर लो। जब तुम्हारा मन करेगा तोँ इसे बुला लेना। मे इसकेसंग अपने कमरे मे जारही हूं। मुझे इससेकुछ बात करनी हैं…”
वोँ बोलि, ठीक हैं- “बुला लूँगी…”
डोली भाभी बोलीं- “मे भि इसकेसंग आऊँगी तुम्हारे पास औऱ अपने सामने हि तुम्हारी चुदाई करा दूँगी…” डोली भाभी नंगी हि अपनी सैंडल फर्श पर्र खट-खट करती हुइ बाहर् चली गई, तोँ मे भि उनके पीछे-पीछे नंगा हि बाहर् चलाआया।
मैंने डोली भाभी सें कहा- “तुमने मुझसे मिन्नी एक् सामने हि चुदवा लिया। वोँ क्याँ सोचेगी…”
डोली भाभी नें कहा-“उसे कुछ भि नहि मालूम हैं। अगरउसे कुछ मालूम होता तौ भला वोँ मुझे चुदवाने कों क्यूं कहती। चलो अच्छा हि हुआ कि अब मुझे औऱ मिन्नी कों एक् दूसरे केँ सामने तुमसे चुदवाने मे कोई दिक्कत नहि होगी। हमारा मार्ग पूरीतरह सें साफ होँ गय़ा। मे मिन्नी सें भि इस बारे मे बातकर लूँगी…”
मैंने भाभी सें पूछा- “गाण्ड कब मरवाओगी?”
वोँ मुश्कुराते हुए बोलि- “क्याँ मेरी गाण्ड भि फाड़नी हैं?”
मैंने कहा-“हाँ…”
वोँ बोलीं- “कल फाड़ लेना…”
मैंने कहा- “थोडा सां आज अंदर लेँ लो बाकी कां कल अंदर लेँ लेना…”
वोँ बोलीं- “जौ तेराजी कहेकर लेँ। अब तौ मे तेरी पत्नि बन गयीँ, हूं…”
मे डोली भाभी केँ बगल मे लेटाहुआ उनसे बातें करतारहा औऱ उनकी बुर कों सहलाता रहा। वोँ मुझे तरह-तरह केँ स्टाइल मे चोदना सिखारही थि औऱ मेरे लण्ड कों सहलारही थि। करीब एक् घंटे केँ बाद मेरा लण्डफिन सें खड़ा होनेलगा। मैंने डोली भाभी सें कहा- “मिन्नी नें अभि तक मुझे बुलाया हि नहि। मे अब तुम्हारी गाण्ड मे हि लण्ड घुसाने कि कोशिश करता हूं…”
डोली भाभी औऱ हम् दोनों अभि तक नंगे हि थें। मैंने डोली भाभी सें घोड़ी बन जाने कों कहा तोँ वोँ घोड़ी बन गई,। मैंने अपने लण्ड कां सुपाड़ा उनकी गाण्ड केँ छेद पऱ रखा तौ वोँ बोलीं- “तेल तौ लगा लें…”
मैंने कहा- “नहि। ऐसे हि…”
वोँ बोलि- “फिन तौ बहोत दर्द होगा…”
मैंने कहा- “होनेदो। तुम् कोई सत्रह-अटारह साल कि थोड़े हि हौ…”
वोँ बोलीं- “ठीक हैं, जैसी तेरी मरज़ी…”
मैंने अपना लण्ड उनकी बुर मे डाल दिया औऱ उनकी चुदाई शुरुआत कर दि। पाँच मिनट मे हि डोली भाभीझड़ गई, तोँ मेरा लण्ड गीला हौ गय़ा। अबतेल लगने कि जरूरत नहि थि। मैंने अपने लण्ड कां सुपाड़ा उनकी गाण्ड केँ छेद पर्र रखा औऱ थोडा सां जोर लगाया। डोली भाभी केँ मुँह सें जोर कि अहह निकली औऱ मेरे लण्ड कां सुपाड़ा उनकी गाण्ड मे घुस गय़ा।
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मैंने थोडा जोर औऱ लगाया तौ वोँ उतावलापन उठी औऱ बोलि- “जरा धीरे-धीरे सें…”
मैंने फिन सें जोर लगाया तौ उनके मुँह सें चीख निकल गयीँ,। मेरा लण्ड डोली भाभी कि गाण्ड मे अब तक चारइंच घुस चुका थां। मैंने औऱ ज़्यादा अंदर घुसाने कि कोशिश नहि कि। मैंने आरामसे धक्के लगाने शुरुआत कर दिये।
दो मिनट मे हि डोली भाभी कां दर्द जातारहा तौ वोँ बोलि- “थोडा औऱ अंदरकर दे…”
मैंने फिन सें थोडा जोर लगाया तोँ वोँ फिन सें चीखी औऱ मेरा लण्ड उनकी गाण्ड मे पाँचइंच तक घुस गय़ा। तभी मिन्नी आँ गयीँ,। उसने कपड़े नहि पहने थें। वोँ पहले जैसी हि केवल अपनी हाई-हील कि सैंडल पहनेहुए एकदम नंगी थि।
उसने हम् दोनों कों देखा तौ बोलीं- “दिदी, तुम् भि मजा लेँ रही हौ?”
डोली भाभी नें कहा-“यह तेरा बड़ीदेर सें इंतजार कररहा थां मगर तूनेइसे बुलाया हि नहि। इसेजोश आँ गय़ा औऱ इसने मेरी गाण्ड मे अपना लण्ड घुसाना शुरुआत कर दिया। मे इसेमना नहि कर पायी…”
वोँ बोलीं- “मुझे भि फिन सें चुदवाना हैं…”
डोली भाभी नें कहा- “तोँ आँ जा…”
मिन्नी नें कहा-“मगर यह तोँ आपको चोदने जारहे हें?”
डोली भाभी नें कहा- “मेरा क्याँ हैं, मे तोँ कभी भि चुदवा लूँगी। पहले तूँ चुदवा लें। तेरा चुदवाना अधिक जरूरी हैं। मे तोँ बहोत मजा लेँ चुकी हूं…”
मिन्नी डोली भाभी केँ बगल मे हि घोड़ी कि तरहबन गयीँ,। मैंने अपना लण्ड डोली भाभी कि गाण्ड सें बाहर् निकालकर मिन्नी कि गाण्ड मे घुसाना शुरुआत कर दिया। वोँ दर्द केँ मारे आहें भरनेलगी। आहिस्ता मेरा पूरा कां पूरा लण्ड मिन्नी कि गाण्ड मे घुस गय़ा तोँ मैंने उसकी गाण्ड मारनी शुरुआत कर दि।
वोँ बोलि- “आगे केँ छेद मे घुसाकर चोदो। मुझे उसमें अधिकमजा आता हैं…”
मैंने कहा- “थोड़ी देर पीछे केँ छेद कि चुदाई करलूँ फिनआगे केँ छेद मे भि चोदूँगा…”
वोँ बोलीं- “ठीक हैं, जैसी तुम्हारी मरज़ी…”
मे मिन्नी कि गाण्ड मारता रहा। डोली भाभी मिन्नी सें कहनेलगी- “तूँ तौ जानती हैं कि राज़ केँ भैया कां स्वर्गवास हुए बहोत दिन होँ चुके हें। मैंने बहोत दिनों सें चुदवाया नहि थां औऱ मेरी ख़्वाहिश भि मर चुकी थि। मगरआज मैंने तेरी खुशी केँ लिये तेरे कहने पर्र इससे चुदवा लिया। इससे चुदवाने केँ बाद मेरी बुर औऱ गाण्ड कि आगफिन सें भड़क गई, हैं। मे जानती हूं कि यह बहोत हि गलतबात हैं मगर मे अब इससे चुदवाये बिना नहि रह सकती। अगर किसी कों यहपता चल गय़ा तौ मेरी बड़ी बदनामी होगी। अब तूँ हि बता कि मे क्याँ करूँ? मे तोँ अबमर जानां चाहती हूं…”
मिन्नी बोलीं- “दिदी, तुम् ऐसा क्यूं कहरही हौ? तुम् इनसेजी भरकर चुदवाओ औऱ खूबमजा लो। मुझेकोई ऐतराज़ नहि हैं। अगर मे तुम्हें कभीमना करूँ तौ तुम् मुझे हि मार डालना। यहबात किसी कों नहि पता चलेगी…”
डोली भाभी नें कहा-“फिन तूँ मेरीशपथ खाकरकह दे कि तुँ कभी भि किसी सें नहि कहेगी…”
मिन्नी नें अपनाहाथ पीछे करके मेरा लण्ड पकड़ लिया औऱ बोलीं- “मे तुम्हारी शपथ क्यूं खाऊँ? मे अपने पति कां लण्ड पकड़कर शपथ खाती हूं कि मे कभी भि किसी सें कुछ भि नहि कहूँगी। अब तोँ आपको मेरीबात पर्र विश्वास हौ गय़ा…”
डोली भाभी नें कहा- “मुझेतुझ पऱ पूरा विश्वास हैं…”
वोँ बोलीं- “अब इनसेकह दो कि मेरी बुर मे अपना लण्ड डालकर मेरी चुदाई करें। मुझे गाण्ड मरवाने मे ज़्यादा मजा नहि आता हैं…”
डोली भाभी नें मुझसे कहा-“सुन रहा हैं नां तूँ कि मिन्नी क्याँ कहरही हैं। अब इसकी ख़्वाहिश पूरीकर…”
मैंने अपना लण्ड मिन्नी कि बुर मे घुसा दिया औऱ उसकी चुदाई करनेलगा। दो मिनट मे हि वोँ एकदम मस्त होँ गई,। उसने पूरी मस्ती केँ संग मुझसे चुदवाना शुरुआत कर दिया। वोँ तेजी केँ संग अपने चूतड़ आगे पीछे करतेहुए मेरासंग देरही थि। मे भि पूरेजोश औऱ ताकत केँ संगउसे चोदता रहा। मिन्नी कि चुदाई करतेहुए मुझे करीबतीस मिनट गुजर चुके थें। वोँ अब तक तीनबार झड़ चुकी थि मगर मे झड़ने कां नाम हि नहि लें रहा थां।
मिन्नी बोलीं- “दिदी, मे थक गई, हूं…”
डोली भाभी नें कहा- “क्यूं, मजा नहि आँ रहा हैं क्याँ?”
वोँ बोलीं- “मजा तोँ बहोत आँ रहा हैं मगर अभि मेरी चुदवाने कि आदत नहि हैं नाँ…”
डोली भाभी बोलीं- “फिन मे क्याँ करूँ। जब राज़झड़ जायेगा तब हि तोँ तुमहारी चुदाई बंद करेगा…”
वोँ बोलि- “मुझे थोडा सां आरामकर लेनेदो। मे बाद मे चुदवा लूँगी…”
डोली भाभी नें कहा-“जब लण्ड खड़ा हौ तौ चुदाई नहि बंद कि जाती। इससे व्यक्ति केँ सेहत पर्र बुराअसर पड़ता हैं…”
मिन्नी बोलि- “इनसेकह दो कि अब रहनेदें। बाद मे चोद लेंगे। तब तक तुम् हि इनसे चुदवा लो…”
डोली भाभी नें कहा- “अच्छा बाबा… मे हि चुदवा लेती हूं…”
मैंने अपना लण्ड मिन्नी कि बुर सें निकालकर डोली भाभी कि गाण्ड मे घुसाना शुरुआत कर दिया। मेरा लण्ड मिन्नी कि बुर केँ पानी सें पहले सें हि भीगाहुआ थां। आरामसे मेरा लण्ड डोली भाभी कि गाण्ड मे पाँचइंच तक घुस गय़ा। मैंने धक्के लगाने शुरुआत कर दिये। थोड़ी देरबाद जब मैंने देखा कि डोली भाभी मस्ती मे आँ गयीँ, हें तोँ मैंने जोर कां धक्का लगा दिया। इस धक्के केँ संग हि मेरा लण्ड भाभी कि गाण्ड कों चीरता हुआसात इंच तक अंदर घुसा गय़ा। डोली भाभी केँ मुँह सें जोर कि चीख निकली।
तोँ मिन्नी नें कहा- “दिदी, तुम् क्यूं चीखरही होँ। तुम् तोँ चुदवाने कि आदी हौ…”
डोली भाभी नें कहा- “मैंने आज तक अपनी गाण्ड नहि मरवायी थि। तुम् तोँ जानती हि होँ कि इसका लण्ड बहोत लंबा औऱ मोटा हैं। इसलिये मुझे भि दर्द होँ रहा हैं औऱ मे चीखरही हूं। बस अभि थोड़ी हि देर मे मेरा दर्दकम होँ जायेगा। फिन मुझे भि तेरीतरह खूबमजा आने लगेगा…”
धीरे धीरे डोली भाभीफिन सें मस्ती मे आँ गयीँ,। मैंने पूरी ताकत केँ संगफिन सें जोर कां धक्का मारा। वोँ फिन सें चीखी औऱ मेरा लण्डआठ इंच तक घुस गय़ा। मैंने फिन एक् धक्का मारा तोँ वोँ बुरीतरह सें चीखने लगी औऱ मेरा पूरा कां पूरा लण्ड डोली भाभी कि गाण्ड मे समा गय़ा। मैंने तेजी केँ संग धक्के लगाने शुरुआत कर दिये। थोड़ी हि देर मे डोली भाभी शाँत होँ गयीँ, औऱ उन्हें मजाआने लगा।
तभी मिन्नी बोलि- “दिदी, अब मे रेडी हूं। इनसेकह दो कि अब मुझेचोद दें…”
डोली भाभी नें कहा- “बार-बार मुझसे क्यूं कहती हैं। तूँ स्वयं हि इससेकह दे। अब मे इससेकुछ नहि कहूँगी…”
मिन्नी नें मेरा लण्ड पकड़ लिया औऱ बोलि- “अब तुम् मुझेचोद दो…”
मे खुश हौ गय़ा। मैंने अपना लण्ड डोली भाभी कि गाण्ड सें निकालकर मिन्नी कि बुर मे डाल दिया औऱ उसकी चुदाई शुरुआत कर दि। उसने भि मेरासंग देना शुरुआत कर दिया। पंद्रह मिनट कि चुदाई केँ बाद मे झड़ गय़ा। मिन्नी भि मेरेसंग हि संगझड़ गयीँ,। जैसे हि मैंने अपना लण्ड उसकी बुर सें बाहर् निकाला तोँ उसने मेरा लण्ड चाटना शुरुआत कर दिया। मे बहोत खुश होँ गय़ा।
डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा-“अब घिन्न नहि आँ रही हैं?”
वोँ बोलीं- “बिल्कुल नहि, अब तोँ मुझे भि खूबमजा आनेलगा हैं…”
हम् सभी नंगे हि सोगये। रात केँ 7:00 बजे मिन्नी मेरा लण्ड सहलाने लगी। मे जाग गय़ा तोँ वोँ बोलीं- “एक् बारफिन सें चोददो…”
मैंने कहा- “क्यूं श्रीमती जी, अब चुदवाने मे मजाआने लगा हैं?”
वोँ बोलि- “हाँ…अब तौ मे चाहती हूं कि तुम् मुझे सारादिन चोदते रहो…” उसने औऱ कुछकहे बिना हि मेरा लण्ड मुँह मे लेँ लिया औऱ चूसने लगी।
तभी डोली भाभी भि उठ गई,। डोली भाभी नें मुश्कुराते हुएकहा- “मिन्नी, तूँ इसका लण्ड क्यूं चूसरही हैं?”
वोँ बोलि- “मुझे चुदवाना हैं…”
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वोँ बोलि- “मुझे चुदवाना हैं…”
डोली भाभी नें मिन्नी सें मज़ाक किया- “पहले तौ बहोत चिल्ला रही थि अब क्याँ हुआ?”
वोँ बोलि- “पहले मुझे मलूम नहि थां कि इसमें इतनामजा आता हैं…”
थोड़ी हि देर मे मेरा लण्ड खड़ा होँ गय़ा। मैंने मिन्नी कि चुदाई शुरुआत कर दि। उसने पूरी मस्ती केँ संग चुदवाया। मैंने भि उसे पूरेजोश केँ संग करीब-करीब पैंतालिस मिनट तक चोदा। वोँ इसबार कि चुदाई केँ दौरान चारबार झड़ चुकी थि। उसकेबाद डोली भाभी औऱ मिन्नी खानां बनाने चले गई,। मे टेलीविज़न देखने लगा। करीब-करीब डेढ़ घंटे गुजरगये तौ मिन्नी रसोई सें बाहर् आयी। उसने मुझसे कुछकहे बिना हि मेरा लण्ड मुँह मे लें लिया औऱ चूसने लगी।
मैंने पूछा-“अब क्याँ हुआ?”
वोँ बोलीं- “चुदवाना हैं…”
मैंने कहा- “पहले मुझे खानां खाकर थोडा आरामकर लेनेदो। बहोत थक गय़ा हूं…”
वोँ बोलीं- “बाद मे खा लेना, पहले तुम् मुझे एक् बार औऱ चोददो। मुझसे बर्दाश्त नहि हौ रहा हैं…”
तभी डोली भाभी आँ गयीँ,। उन्होंने मिन्नी सें कहा- “सुभह सें हि यह हम् दोनों कों कईबार चोद चुका हैं। इसे खानां खाकर थोडा आरामकर लेनेदे, फिन सारीरात खूब जमकर चुदवाना…”
वोँ बोलीं- “दिदी… मुझसे रहा नहि जारहा हैं। मेरामन अजीब सां हौ रहा हैं…”
डोली भाभी नें मज़ाक करतेहुए कहा-“अगर तुँ इतना हि तड़परही हैं तौ चल मेरेसंग रसोई मे। मे तेरी बुर मे बेलन घुसेड़ देती हूं…”
मिन्नी बोलि- “फिन घुसेड़ दो नां। मे आपकोकुछ भि नहि कहूँगी। विवाह केँ पहले मे अच्छी भली थि। विवाह केँ बाद इन्होंने मेरी चुदाई करके मेरी बुर औऱ गाण्ड मे आग सि भर दि हैं। अब आप् हि बताओ कि मे क्याँ करूँ?”
डोली भाभी नें कहा- “थोडा सब्र करनासीख। आखिरयह भि तौ व्यक्ति हैं। थक गय़ा हैं बेचारा…”
वोँ बोलि- “एक् बारयह मुझे औऱ चोददें। फिन मे कभी भि इनसे चुदवाने कि ज़िद्द नहि करूँगी। जब भि मुझेजोश आयेगा मे इनका लण्ड मुँह मे लेकर चूसूँगी। उसकेबाद यह मुझे चोदना चाहेंगे तोँ चोदेंगे…”
मैंने कहा-“ठीक हैं। आँ जाओ मेरेपास…” मे सोफे पर्र बैठा थां। मिन्नी केँ चूसने सें मेरा लण्ड खड़ा हौ हि चुका थां। मैंने उससेकहा- “अब तुम् स्वयं हि मेरे लण्ड कों अपनी बुर मे घुसेड़ लो औऱ धक्के लगाओ…”
वोँ जल्दी हि मेरी जाँघों पऱ बैठ गयीँ, औऱ मेरे लण्ड कों अपनी बुर केँ अंदर घुसेड़ लिया। उसकेबाद उसने धक्के लगाने शुरुआत कर दिये। पाँच मिनट मे हि वोँ हाँफने लगी औऱ बोलीं- “मुझेइस तरहमजा नहि आँ रहा हैं। जब तुम् खूब जोर-शोर केँ धक्के लगाते हुए मुझे चोदते होँ। तब हि मुझेमजा आता हैं। चोददो नाँ मुझे…”
मैंने कहा- “अच्छा बाबा, अब तुम् मेरे सामने घोड़ी बनजाओ…”
वोँ जल्दी हि मेरे सामने घोड़ी बन गयीँ,। उसकी बुर मेरीतरफ थि। मे थोडा गुस्से मे थां। मैंने अपना लण्ड उसकी बुर मे घुसा दिया औऱ उसकीकमर कों जोर सें पकड़ लिया। उसकेबाद मैंने बड़ी बेरहमी केँ संग उसकी चुदाई शुरुआत कर दि।
डोली भाभीकभी मुझे औऱ कभी मिन्नी कों देखरही थि। उन्हें विश्वास हि नहि होँ रहा थां कि मे मिन्नी कों इतनी बुरीतरह सें भि चोद सकता हूं। मिन्नी भि बहोत सेक्सी निकली। मे उसे बहोत हि बुरीतरह सें चोदरहा थां मगरउसे तोँ इस चुदाई मे औऱ अधिकमजा आँ रहा थां। वोँ अपने चूतड़ आगे पीछे करतेहुए पूरी मस्ती केँ संग चुदवा रही थि। मैंने उसे लग्भग पैंतालीस मिनट तक खूब जमकर चोदा। इस बार कि चुदाई केँ दौरान मिन्नी पाँचबार झड़ गई, थि। डोली भाभी औऱ मे उसे देखकर दंगरह गये। मिन्नी नें मेरे लण्ड कों चाटकर साफ किया औऱ फिन बाथरूम चली गई,।
डोली भाभी नें मुझसे कहा- “तुमने उसेउसे इतनी बुरीतरह सें चोदा। फिन भि उसेमजा आँ रहा थां। वोँ तोँ मुझसे भि ज़्यादा सेक्सी हैं…”
मैंने कहा- “अभि वोँ नयी हैं इसलिये औऱ उसे अधिकजोश आँ रहा हैं। अभि तौ उसने ज़्यादा बार चुदवाया हि कहां हैं। मात्र कुछदिन आप् मुझसे मत चुदवाओ। मुझे सिर्फ मिन्नी कि चुदाई करनेदो। मे उसे इतनी अधिकबार औऱ इतनी बुरीतरह सें चोदूँगा कि उसकी बुर औऱ गाण्ड कि आग ठंडी होँ जायेगी। वोँ मुझसे रो-रोकर कहेगी कि मुझेअब मत चोदो…”
डोली भाभी नें कहा-“ठीक हैं…”
तभी मिन्नी बथरूम सें वापस आँ गई, औऱ बोलीं- “देवरु-भाभी क्याँ बातें कररहे हौ?”
डोली भाभी नें मिन्नी सें कहा- “मे इसे समझारही थि कि यहकुछ दिनों तक मेरी चुदाई नाँ केरे। मात्र खूब जमकर तुमहारी चुदाई हि करे…”
मिन्नी बोलीं- “आपने तोँ मेरे मुँह कि बातछीन ली। मे भि यही चाहती थि…”
डोली भाभी नें कहा- “मे समझ सकती हूं क्योंकी अभि तुम् नयी-नयी होँ औऱ तुम्हारे अंदरजोश कां ज्वालामुखी फूटरहा हैं। यह तुम्हारे बुर केँ ज्वालामुखी कों अपने लण्ड केँ पानी सें बुझा देगा। उसकेबाद मे भि चुदवाना शुरुआत कर दूँगी…”
मिन्नी बोलीं- “दिदी, तुम् एकदमठीक कहरही हौ…”
अगलेचार दिनों तक भाभी तड़पती रही। उनका चेहरा एकदम दुःखी होँ गय़ा थां। मे मात्र मिन्नी कि हि चुदाई करतारहा। मिन्नी कों चुदवाने मे हि ज़्यादा मजाआता थां। मैंने मिन्नी कि खूब जमकर चुदाई कि। उसने भि पूरी मस्ती केँ संग मेरासंग दिया औऱ खूब जमकर चुदवाया। मैंने इनचार दिनों मे उसे करीब-करीब तीसबार बहोत हि बुरीतरह सें चोदा थां। उसकी बुर कां मुँह एकदम चौड़ा होँ चुका थां। अब उसकाजोश कुछ ठंडापड़ चुका थां। अब तोँ वोँ कभी-कभी चुदवाने सें इनकार भि करनेलगी थि। मिन्नी कि बिदायी भि होने वाली थि। उसे एक् महीने केँ लिये मायके जानां थां।
पाँचदिन गुजर जाने केँ बाद वोँ मायके चली गई,। मायके जाते टाइम वोँ मुझसे लिपटकर बहोत रोयी।
मैंने पूछा- “क्याँ हुआ?”
उसनेकहा- “एक् महीने तक मे बिना चुदवाये केसे रहूँगी?”
मैंने कहा- “तुम्हें इतना सब्र तौ करना हि पड़ेगा। सब औरतों कों विवाह केँ बाद मायके तौ जानां हि पड़ता हैं…”
वोँ मायके चली गयीँ,। उसके जाने केँ बाद डोली भाभी मुझसे लिपट गयीँ, औऱ फूट-फूट कर रोनेलगी।
मैंने पूछा- “क्याँ हुआ?”
तौ वोँ बोलि- “तुम्हारे भैया कां स्वर्गवास होँ जाने केँ बाद मेराजोश एकदम ठंडा होँ गय़ा थां। मे तुम्हारे संग अकेली हि रहनेलगी थि मगर मैंने कभी भि तुम्हें बुरी नज़र सें नहि देखा। मे आहिस्ता रहनेलगी थि। तुम्हारा लण्ड देखने केँ बाद मुझेजोश आँ गय़ा औऱ मैंने तुमसे चुदवा लिया। मिन्नी कों गाण्ड मरवाते हुये देखकर मैंने तुमसे गाण्ड भि मरवाली। उसमें भि मुझे बहोत मजाआया। तुमने मेरी चुदाई करके औऱ मेरी गाण्ड मारकर मेरे सारे जिस्म मे आगलगा दि हैं। पाँच दिनों सें तुमने मुझे चोदा नहि औऱ नाँ हि मेरी गाण्ड मारी। मैंने यह पाँचदिन केसे गुजारे हें। मे हि जानती हूं। मिन्नी तोँ अब एक् महीने केँ लिये मायके चली गई, हैं। अब तुम् मेरी बुर औऱ गाण्ड कि आग कों पूरीतरह सें बुझादो…”
मैंने कहा- “भाभी, मैंने तोँ इनकार नहि किया हैं…”
वोँ बोलि- “तुमने आफिस सें विवाह केँ लियेसात दिनों कि छुट्टी ली थि। तुम् सात दिनों कि छुट्टी औऱ लेँ लो। मे भि अपने आफिस सें छुट्टी लेँ लेती हूं। फिन मुझेसात दिनों तक खूब जमकर चोदो। मुझेउसी तरह सें चोदना जैसे कि उसदिन तुमने गुस्से मे मिन्नी कों चोदा थां…”
मैंने कहा- “तुम् जैसा कहोगी। मे तुम्हें वैसे हि चोदूँगा। मे तुम्हें पूरीतरह सें संतुष्ट कर दूँगा…”
डोली भाभी नें सारे कपड़े उतार दिये औऱ एकदम नंगी होँ गयीँ,। उन्होंने मेरा लण्ड चूसना शुरुआत कर दिया। दो मिनट मे हि मेर लण्ड खड़ा हौ गय़ा तौ मैंने ठीकउसी तरह सें डोली भाभी कों चोदना शुरुआत किया जैसे मैंने मिन्नी कों गुस्से मे चोदा थां। उसतरह कि चुदाई सें डोली भाभी एकदम मस्त हौ गयीँ,। सात दिनों तक हम् दोनों आफिस नहि गये।
मैंने इनसात दिनों मे सारादिन औऱ सारीरात डोली भाभी कि खूब जमकर चुदाई कि। उसकेबाद मिन्नी केँ आने तक मैंने उन्हें खूब चोदा। डोली भाभी कि बुर कि आग भि कुछहद तक बुझ चुकी थि। मिन्नी केँ वापस आँ जaने केँ बाद मे उन दोनों कि चुदाई करनेलगा। अब वोँ दोनों हि मुझसे चुदवाकर पूरीतरह सें खुश हें औऱ मे भि।
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***** THE END ख़त्म *****
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