छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
.
दसलाख कां प्रश्न_Das Lakh kaa Sawaal
लेखक - अज्ञात
सुभह सें हि बास कां मूड बिगड़ा हुआ थां। वजह मालूम नहि पड़रही थि। मे वर्षा पाटिल, मुम्बई मे एक् कम्पनी मे सेक्रेटरी कां काम करती हूं। मेरेबास, राहुल अरोड़ा, एक् पन्जाबी परिवार सें हें जिनका काम गवनर्मेन्ट केँ ठेके लेना हैं। टेन्डर केँ द्वारा सरकार परचेज़ करती हैं औऱ मेरेबास आफिसरों कों पैसे खिला पिलाकर अपनाकाम निकलवाते हें। उनका दिल्ली बेस होना उनकेकाम मे बड़ीमदद करता हैं। अधिकतर कान्ट्रैक्ट दिल्ली सें पास होते हें औऱ दिल्ली मे हि आफिसरों कों खुश करने केँ लिये शराब, कबाब औऱ शबाब कां मजा लूटने देते हें।
“सर, क्याँ बात हैं आज आप् बड़े परेशान दिखाई पड़रहे हें?” मैंने केबिन मे घुसते हि पूछ लिया।
“हां वर्षा, आजकुछ अधिक हि परेशान हूं…” बास नें बड़े गम्भीर होतेहुए कहा- “किसी नें हमारी कम्पनी कि शिकायत दिल्ली मे कर दि हैं…”
“किस चीज़ कि शिकयात, बास?” मैंने चेयर पऱ बैठते हुएकहा।
“एक् ठेके केँ बारे मे, वर्षा। औऱ उसी सिलसिले मे एक् बड़ा सरकारी आफिसर मालचेक करने आँ रहा हैं…” बास तकलीफ़ कि हालत मे बोलरहे थें- “अबअगर हमारा माल रिजेक्ट कर दिया तोँ बड़ा नुकसान होगा कम्पनी कों…”
“हां…मगर आफिसर कों पटा क्यूं नहि लेते हें सर। आप् तोँ उन लोगों कों पटाने मे माहिर भि हैं…” मैंने हँसते हुएकहा।
“नहि वर्षा। यह आफिसर बड़ा रंगीन मिज़ाज़ हैं। औऱ लोगों कों तौ बज़ार कि रेडीमेड चीज़ों सें पटा लेता हूं। मगरयह आफिसर… मालूम नहि… क्यूं घरेलू चीज़ें हि पसन्द करता हैं…” बास तकलीफ़ कि हालत मे बोले।
“घरेलू चीज़ें? मतलब?” मुझेकुछ समझ मे नहि आया।
“घरेलू यानी घरेलू… अरे बड़ा रंगीन मिज़ाज़ हैं। उसे बज़ार कि औरतें नहि बल्कि घरेलू औरतें चाहिये। अबयेसभी कहां सें लाऊँ मे…” बास नें समझाते हुएकहा।
अबसमझ मे आया। बाज़ार कि औरतें नहि… यानि वेश्या नहि। घऱ कि औरतें चाहिये हम्-पलंग होने केँ लिये। यानि पूरा रंगीन मिज़ाज़ थां आफिसर। यूं तौ बासऐसी बातें मुझसे नहि करता थां मगरआज तकलीफ़ मे वो खुलकर बोल पड़ा। फिन हम् दोनों सोच मे डूबगये इस समस्या कों सुलझाने केँ लिये।
मुझे अपनी सहेली कि याद आँ गयीँ,। रोहिणी, एक् हसीनएयर होस्टेस हैं। हम् दोनों एक् साल पहले तक संग-संग रहते थें। वो इन चीज़ों मे माहिर थि। उसका कहना थां कि ज़िन्दगी बड़ी छोटी हैं। अपनी खूबसुरती कां इस्तमाल करो औऱ रूपया बनाओ। वोँ अपने जिश्म कां फायदा उठाकर बड़े-बड़े लोगों सें मिलती औऱ एक्-दो महिने मे लाखों कमाकर दूसरे कों ढुँढ़ने लगती। उसका कहना थां कि इन 7-8 सालों मे इतनाकमा लो कि बाकी ज़िन्दगी बगैरकोई कामकरे गुज़ार सको। वोँ हमेशा मुझे भि यही सलाह देती थि। मुझे हमेशा कहती थि- “वर्षा तुँ तोँ मुझसे भि सुंदर हैं। कहां सेक्रेटरी कि जॉब मे पड़ी हैं। मेरी लाईन पर्र चल, लाखों कमायेगी। फिन 7-8 सालबाद हम् दोनों किसी छोटेशहर मे एक् छोटे सें घर-मकान मे अपनी बाकी कि ज़िन्दगी ऐश सें गुजारेंगे…”
मगर मे अपने बाय-र्फैंड केँ संगखुश थि औऱ थोड़ी बहोत फ्लर्टिंग अपनेबास केँ संग भि कर लेती थि। जिससे बास भि थोडा बहोत मुझसे खुलाहुआ थां। ये सोचते-सोचते मैंने अपनेबास सें कहा-“अगर कोई लड़की मिले भि तोँ वोँ कोई मामूली नहि बल्कि कोई एक् सुंदर हि नहि बल्कि बला कि सुंदर चाहिये। उसे क्याँ मिलेगा जोँ यहकाम करे…”
बास नें समझाते हुएकहा- “वर्षा, ये कान्ट्रैक्ट जोँ कि 10 करोड़ कां हैं। अगर कैन्सल होँ जायेगा तोँ कम्पनी कों 2-3 करोड़ कां नुकसान जरूर होँ जायेगा। मे तौ इससे बचने केँ लिये 10 करोड़ कां 1% कमिशन 10 लाख तक देने कों रेडी हूं…”
“10 लाख रुपये…” मेरा मुँहयह कहतेहुए खुला हि रह गय़ा। येरकम कोई छोटी नहि होती किसी भि लड़की केँ लिये। कोई भि सजधजकर हौ जाये। तभी मेरेमन मे औऱ एक् विचार आनेलगा। औऱ येरकम मुझेमिल जाये तौ… फिन मैंने बास सें कहा-“सर, मे एक् लड़की कों जानती हूं…”
बास नें उत्सुकता सें कहा-“कौन हैं वोँ… कोई चालू लड़की नहि चहिये…”
मैंने कहा- “वोँ एक् एयर-होस्टेस हैं…”
बास नें फिन पूछा- “क्याँ वोँ रेडी हौ जायेगी?”
“कोशिश करती हूं…” मैंने जवाब दिया।
“सोच लो वर्षा। अगर अभि रेडी होँ गई, औऱ टाईम पर्र नां बोल दि तौ कहीं लेने केँ देने न् पड़ जायें। फिन तुम् जानती हौ कि एक् बार कान्ट्रैक्ट कैन्सल हुआ तोँ कितना बड़ा नुकसान हौ जायेगा…” बास नें जोर देतेहुए कहा।
फिन न् जाने मेरे मुँह सें केसे निकल गय़ा- “सर, आप् परेशान नहि होयें। मे मैंनेज कर लूँगी…”
बास मुझे देखते हि रहगये।
मैंने अपनेघऱ पहुंच कर अपनी फ्रेंन्ड, रोहिणी, केँ मोबाईल पऱ मोबाइल किया- “क्याँ हाल हैं रोहिणी? मुम्बई मे होँ याँ कहीं औऱ…” मैंने फोने लगाते हि पूछा।
“वर्षा। व्हाट ए ग्रेट सर्प्राइज़… मुम्बई सें हि बोलरही हूं दोस्त। बता क्याँ हाल-चाल हैं…” रोहिणी नें पूछा।
“बस कुछ नहि… तुँ आजकल किसके संग गुलछर्रे उड़ारही हैं?” मैंने हँसते हुएकहा।
“कहां दोस्त… अभि तौ कोई मुर्गा हि ढुँढ़ रही हूं? तुँ भि क्याँ अभि सेक्रेटरी बनी हुई हैं याँ मेरे जैसीबन गई, …” रोहिणी बोलि।
“तेरीतरह बन जाऊँ?चल जाहट…मगर तेरे लिये जरूर एक् काम हैं… खूब पैसे मिलेंगे…”
“कोई मुर्गा मिला हैं क्याँ?” रोहिणी नें पूछा।
तब मैंने उसे सारीबात बतायी। औऱ उसेसंग देने केँ लिये 50-50 कां आफर किया। जिसे वोँ मान गयीँ,। शुक्रवार कि दोपहर आफिसर, मिस्टर लोहाणे, दिल्ली सें आया। एक् होटल मे एक् सुईट कि व्यवस्था कर दि गई, उसके लिये। आफिस मे आकरमाल कों देखा। तमामतरह केँ सवाल करनेलगा। मेराबास परेशान हौ गय़ा। उसने मेरीतरफ उम्मीद कि नज़रों सें देखा। मैंने अब अपनी पोजीशन सम्भाल ली। अपने हसीन जिश्म कां फायदा उठाने लगी। आफिसर केँ नज़दीक आकर उसकेहर बात कां जवाब देनेलगी। लो-कट ड्रेस मे सें मेरे झलकते हुश्न नें उसके प्रश्नों कों कमकर दिया। उसकी दिलचस्पी अब सवालों मे नहि बल्कि मेरे नज़दीक आने मे होनेलगी। मे भि एक् घरेलू टाईप कि लड़की कां रोलअदा करतेहुए उससेदूर रहने कि कोशिश करती औऱ फिन थोड़ी देर मे अनजान बनती हुई उसके एकदम लगभग आँ जाती।
.
all post are superb and mind blowing
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
.
आफिसर एकदम बेचैन हौ उठा। फिन मेरेबास सें कहा- “राहुल… माल तौ तुम्हारा ठीक हैं मगर तीन-चार फोरमैलिटीज़ करनी पड़ेगी…”
यानीतीर एकदम निशाने पऱ बैठा। अब उसे पिघलने मे ज़्यादा देर नहि थि।
मेरेबास नें कहा-“सर, आपकीहर जरूरत पूरी कि जायेगी। आप् 1-2 फोरमैलिटीज़ अभि पूरीकर लिजिये बाकीसाम केँ वक़्त मे होटलआकर पूरीकर देता हूं…”
“ठीक हैं… वैसे तुम्हरी सेक्रेटरी बड़ी इंटेलिजेंट हैं। तुम्हारा बिज़नेस बहोत हि ग्रो करेगा…” आफिसर मेरे जिश्म कों घूरता हुआ बोला। अब बास केँ लिये समस्या खड़ी होँ गई,। आफिसर मिस्टर लोहाणे कां इरादा समझ मे आँ रहा थां।
बास राहुल नें मुझसे कहा-“अब क्याँ करें?”
मैंने हँसते हुए जवाब दिया-“नो प्राब्लम बास, मे सभी सम्भाल लूंगी…” आखिर 10 लाख कां प्रश्न थां।
साम केँ बजायआठ बज़े हम् लोग यानी मे औऱ मेराबास राहुल होटल मे पहुंचे। उसके पहले मैंने रोहिणी सें बातकर ली थि। वोँ रात केँ करीबन 10:00 बज़े वहां पहुँचने वाली थि। उससाम केँ लिये मैंने भरपूर तैयारी करली। अपने शरीर कों अच्छी तरह सें वैक्सिंग करके औऱ भरपूर मेकअप करके अपनेऊपर तीन-चार ड्रेस कि रीहर्सल करने केँ बाद शार्ट स्कर्ट औऱ हाईहील सैंडल्स केँ ऊपर बस्टीयर औऱ खुली-जैकेट डालकर मे एकदम रेडी थि, 10 लाख कमाने केँ लिये, जिसमें 5 लाख मेरे लिये होंगे।
औऱ मेराबास स्काच कि 3-4 वैराइटी लिये सजधजकर थां। जैसे हि हम् सुइट केँ अन्दर घुसे आफिसर मिस्टर लोहाणे मुझे देखते हि पंक्चर होँ गय़ा। उसकी आंखें मेरे जिश्म सें चिपक गई,। मेरी गोरी-गोरी चिकनी जांघें, लम्बी टांगें उसके शरीर मे तूफान लारही थीं। टाईट स्कर्ट सें चिपके हुए मेरे चूतड़ों सें उसकी नज़रें चिपकी हुईँ थि। खुली-जैकेट सें झलकते हुए मेरे बस्टीयर मे दबे मेरे मम्मे दबोचने केँ लियेउसे आमन्त्रण देरहे थें। फेशियल सें तरोताज़ा मेरेगाल औऱ हल्के रोज़रंग कि लिपिस्टक सें रंगेहुए मेरे नाज़ुक होंठउसे गुलाब कि पंखुड़ियां लगरही थीं। वो मेराये रूप देखकर अपने सूखेहुए होंठों कों गीला करतेहुए बोला- “मिस्टर राहुल क्याँ यही सेक्रेटरी दोपहर मे तुम्हारी आफिस मे थि?”
बासखुश होतेहुए बोला- “पहले आफिस टाईम थां अभि यह रिलैक्स टाईम हैं। चेन्ज तौ होना हि हैं मिस्टर लोहाणे…”
लोहाणे नें मुझे अपने हाथों सें घसीटकर एक् चेयर पऱ मुझे बैठाया औऱ सामने वाली चेयर पर्र स्वयं बैठ गय़ा। मेरेबास कों अपनी चेयर स्वयं हि घसीटकर बैठना पड़ा। मेरी हुस्न कां चमत्कार चल चुका थां। तभीबास नें बात कि शुरूआत कि- “तौ मिस्टर लोहाणे, हमारा माल कैसालगा?” बास कां मतलब आफिस केँ माल सें थां।
मगर लोहाणे इसे मेरे बारे मे समझा। उसनेकहा- “मिस्टर राहुल… बहोत हि हसीन… मानो स्वर्ग सें एक् अपसरा अभि-अभि उतरी हैं…”
मैंने शरमाकर अपनी नज़रें झुकाली।
लोहाणे कां मतलब समझते हुएबास नें कहा- “मेरा मतलब कान्ट्रैक्ट केँ माल सें थां, मिस्टर लोहाणे…”
लोहाणे नें मेरे जिश्म सें अपनी नज़र कों न् हटाते हुएकहा- “छोड़ो उसमाल कों दोस्त, बात अभि कि करो। वोँ वाला भि परफेक्ट औऱ यह वाला भि…”
यह सुनकर बासझूम उठा।
मैंने भि खड़े होतेहुए कहा- “रियली… तब तौ हमेंइस बात कि बर्थडे पार्टी रातभर मनानी चाहिये…”
यह सुनकर बास नें एक् मोबाइल होटल रिसेप्शन पर्र मिलाया औऱ सोडा औऱ कुछ स्नैक्स कां आडर्र दे दिया। हम् लोग बातें करनेलगे। थोड़ी देर मे हि वेटर नें आकर आडर्र वालीसभी चीज़ें लाकर टेबल पऱ रखदीं। मैंने रूम मे रखे फ्रिज़ मे सें आईस निकालकर तीन ग्लास मे स्काच, सोडा औऱ आईस डालकर जश्न केँ शुरुआत होने कां एलानकर दिया। चीयर्स करतेहुए बास बोला-“आज केँ इस कान्टैर्क्ट कि सफलता केँ लिये चीयर्स…”
लोहाणे नें कहा-“मिस वर्षा केँ इस बेपनाह हुश्न केँ लिये चीयर्स…”
औऱ मैंने कहा-“आज कि इस खुबसूरत जश्न केँ लिये चीयर्स…”
औऱ हम् सभी अपनी ग्लासों कों टकरा केँ पीनेलगे। आधे घन्टे तक हम् अपनीसीट पर्र बैठेजाम सें जाम टकराते रहे। लोहाणे मेरे सामने बैठा मेरे जिश्म कां स्वाद अपनी नज़रों सें लें रहा थां। मेरे शार्ट-स्कर्ट सें झांकती मेरी मांसल जांघों कों जी भरकेदेख रहा थां। मैंने भि गौर किया कि लोहाणे केँ पैंट मे एक् उभार पैदा होँ रहा थां। उसकी पैंट सुकून केँ पास सें टाईट हौ रही थि। अपने मचलते हुए खिलौने कों लोहाणे बीच-बीच मे एडजस्ट भि कररहा थां। मगर उसकी कोशिश असफल हौ रही थि। जितना एडजस्ट करता उतना हि उसका खिलौना औऱ मचलरहा थां।
मे एक् पेग केँ बादजब दूसरा आधापेग लेँ रही थि तब तक बास औऱ लोहाणे 3-3 पेगपी चुके थें। मे इन्तज़ार कररही थि अपनी फ्रेंन्ड रोहिणी कां। वो आये औऱ हमारा काम हौ जाये। मैंने कभी भि एक् पेग सें अधिक नहि पिया थां। इसलिये स्काच कां नशा पूरा चढ़ाहुआ थां। जबकीबास औऱ लोहाणे स्काच केँ नशे मे अब बहकने लगे। उनकीआपस मे कहीजा रही बातों मे तीन-चार गालियां संग-संग आँ रहीथीं। मे उनके ग्लास कों खाली होते देखकर दूसरी बोतल सें उनके ग्लास रिफिल करनेलगी।
तब लोहाणे नें खड़े होकर मुझे अपनी एक् बांह सें पकड़ लिया औऱ कहा- “जानेमन तुम् तौ कुछ भि नहि लें रही होँ। लोयहपीस खाओ… बड़ा हि टेस्टी हैं…” औऱ ये कहकर मेरे मुँह मे स्नैक्स कां एक् पीस ठूँसने लगा। फिन स्काच केँ नशे मे वापस बोला-“अरे केचप लगाना तौ भूल हि गय़ा। इसे केचप केँ संगखाओ…” ये कहकर मेरे मुँह मे ठूँसे हुए स्नैक्स केँ ऊपर सीधे केचप कि बोतल सें केचप लगाने लगा। औऱ वो केचप सारा कां सारा मेरी जैकेट औऱ बस्टीयर पऱ जा गिरा।
लोहाणे लज्जा सें झेंप पड़ा औऱ कहनेलगा- “ओह, आईएम वेरी सारी… वेरी सारी…” औऱ अपनी रुमाल निकालकर साफ करने कि कोशिश करनेलगा- “प्लीज़… प्लीज़ मुझेसाफ करने दिजिये…”
मैंने कहा-“ओह… कोईबात नहि। मे स्वयं साफकर लूंगी…”
एक् हसीन लड़की केँ कपड़ों पर्र ऐसा होँ जाये तोँ स्वाभाविक हैं कि कोई भि व्यक्ति परेशान हौ हि जाता हैं। मे टेबल पर्र पड़े पेपर नैपकिन्स सें केचप कों साफ करनेलगी। मगर वोँ कहां सें साफ होता। मे थोडा अपसेट होँ गयीँ,। औऱ मेराबास भि थोडा अपसेट हौ चुका थां।
.
Great work
. dosto, Today's kahani iss "दसलाख कां प्रश्न" Enjoy it. . .
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
.
मगर लोहाणे अपनी सूटकेस खोलने लगा। एक् पार्सल कों निकालते हुएकहा- “मे अपनी फ्रेंन्ड केँ लियेकुछ कपड़े लाया थां। शायद आपकेकाम आँ जाये। प्लीज़ देख लीजिये…”
मैंने भि कोई औऱ चारा नहि देखकर उससे वो पैकेट लेँ लिया औऱ बाथरूम मे घुस गई,। वाशबेसिन मे अपने कपड़े साफ किये औऱ पैकेट कों खोलकर कपड़े देखने लगी। यह कपड़े कहां थें? यह तोँ नाईटीज़ थीं… वो भि मिनी नाईटीज़। अब मे अपने कपड़े साफ करने केँ चक्कर मे काफ़ी गिलीकर चुकी थि। औऱ कोई चारा नहि थां मेरेपास। तीन नाईटीज़ मे सें मैंने एक् नाईटी चूज़ कि। बाकी दोनों नाईटीज़ पहने याँ नहि कोई मतलब हि नहि थां। सिर्फ पहनना थां छुपाने केँ लियेकुछ भि नहि थां। ये वाली नाईटी टाज़र्न स्टाईल कि क्रोस स्टाइल कां टाप औऱ स्कर्ट थां जिसे पहनने केँ बादटाप कों मुझे वापस खोलना पड़ा।
क्योंकी मेरी ब्रा केँ स्ट्रैप्स अलग सें दिखाई देरहे थें। जब मैंने अपनी ब्रा उतारकर वो टाप पहना तोँ मेरे निपल्स उसटाप सें झलकने लगे। मेरे मम्मे तौ साफ-साफ दिखाई पड़ हि रहे थें। मगरकोई उपाय नहि बचा थां औऱ स्काच केँ नशे नें मेरी हिम्मत भि बढ़ा दि। फिन मेरी फ्रेंन्ड भि थोड़ी देर मे आनेवली थि।
मे जैसे हि बाथरूम सें बाहर् आयी तोँ लोहाणे औऱ बास कां मुँह खुला कां खुलारह गय़ा। दोनों कि नज़रें मेरी नाईटी कों चीरती हुइ मेरे दिखाई पड़रहे जादुई जिश्म कों ताड़रही थि। उनके मुँह सें आहहह… एक् संग निकल पड़ी। लोहाणे कां एक् हाथ अपनी पैंट पऱ जल्दी जा पड़ा, अपने हाथियार कों एडजस्ट करने केँ लिये। मे आगे बढ़ी मेरी नज़रें झुकी हुई थि। दोनों मेरे डगमगाते हुए एक्-एक् कदम पर्र अपनी आहेंभर रहे थें। मेराबास तोँ अब एकदम धम्म सें अपनी चेयर पऱ बैठ गय़ा।
लोहाणे नें अपनी ग्लास सम्भाले मेरे ग्लास कों मेरे हाथों मे थमा दिया औऱ लम्बे-लम्बे घूँट भरनेलगा। तभी मेरेडोर कों नाक करने कि आवाज़ आयी। मेरीजान मे जान आँ गयीँ,। लोहाणे नें आगे बढ़कर द्वार (दरवाज़ा) खोला औऱ सामने पाया एक् औऱ बला कि हसीन लड़की कों। वो उसे देखकर कुछ हैरान होँ गय़ा। उसने अन्दर कि ओर देखा।
तभी मैंने कहा-“हाय रे रोहिणी वेलकम…”
रोहिणी नें भि कहा- “क्या बात है एवरीबडी…”
लोहाणे बोला- “अच्छा ये आपकी परिचित हैं…”
तब मैंने कहा-“हां, इस जश्न कों दिलखुश बनाने केँ लिये हि मैंने अपनी फ्रेंन्ड रोहिणी कों इनवाईट किया हैं…”
फिन रोहिणी सें सबका परिचय कराया- “रोहिणी, मीटहिम… अवर गेस्ट… मिस्टर लोहाणे औऱ आप् हें मेरेबास मिस्टर राहुल…”
रोहिणी नें दोनों सें हाथ मिलाया औऱ मैंने उसके लिये एक् पेग बनाया। उसके लिये हि क्यूं बल्कि हमारे तीनों केँ पेग वापसफिल करके चीयर्स किया। रोहिणी अपनेसंग म्युज़िक सिस्टम लायी थि। उसे साईड टेबल पर्र रखकरउसे साकेट मे लगाकर आन भि कर दिया। फिन अपना ओवरकोट उतारने लगी। पूरी तैयारी केँ संगआयी थि। ओवरकोट उतारने केँ संगरूम मे अब दो-दो बिज़लियां चमकने लगीं। एक् बिज़ली मेरेरूप मे चमक हि रही थि।
अब दूसरी बिज़ली दोनों नशे मे चूर मर्दों कों झटका देने केँ लिये सजधजकर थि। रोहिणी चोली नुमाटाप, लाँग स्कर्ट औऱ बहोत हि हाई हील्स केँ सैंडल्स पहनेहुए थि। उसका लाँग स्कर्ट एक् साईड सें कमर तक कटा थां जिससे उसका जिश्म एक् साईड सें पुरा नंगा दिखाई पड़रहा थां। सिर्फ डोरी सें हि वो ढकाहुआ थां। उसनेदेर नं करतेहुए म्युज़िक सिस्टम कां वाल्युम बढ़ा दिया औऱ रूम कि सिर्फ एक् लाईट कों चालू रहने दिया। संग हि वोँ डांस करनेलगी। लोहाणे बेड पर्र बैठ गय़ा औऱ बास नें बीच मे स्थान बनाने केँ लिये चेयर्स कों साईड मे कर दिया औऱ स्वयं एक् चेयर पऱ बैठ गय़ा। मेरे लियेकोई चेयर नहि होने पर्र मे बेड पऱ लोहाणे केँ पासबैठ गई,। अब हम् तीनों नशे मे चूर थें जबकी रोहिणी शायद पहले सें हि पीकरआयी थि। उसने अपनी ग्लास पूरीखतम करकेउसे बेड केँ नीचेठेल दिया।
रोहिणी कां डांस काबिले तारीफ थां। उसकीहर अदाउन दोनों मर्दों कि हि सांसें ऊपर-नीचे नहि कररही थि बल्कि मुझे भि मस्तकर रही थि। लोहाणे नें मुझे अपनी बाहों मे भींच लिया जिसका मैंने कोई विरोध नहि किया। लम्बा लेटकर वो रोहिणी केँ डांस कां मजा लेनेलगा। मे भि उसके पहलू मे आधी लेटी हुई डांस कां खुशीउठा रही थि। बास धीरे धीरे चुस्की लेतेहुए रोहिणी कि हर थिरकते कदम कां गर्दन नचाकर जवाबदे रहा थां।
.
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan - Next part miss mat karna
जौनपुर भइया आपके द्वारा एक् औऱ सुपरहिट किस्सा बहोत अच्छे
Relavant source : click here