छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 Stories Complete (2015)
nangi family desi kamuk kahaniyan
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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नीरा नें विक्रम कि पैंट खोलकर नीची गिरने केँ लिए छोड़ दि। पैंटजब विक्रम कि माँसल जाँघों मे फँसने लगी तोँ विक्रम नें अपनी टाँगें झटकाकर पैंट अपने पैरों तक गिरा दि। नीरा नें विक्रम केँ अंडरवीयर मे हाथ डालकर उसका लण्ड पकड़ लिया औऱ विक्रम भि नीरा कि पैंटी मे हाथ डालकर उसके नंगे चूतड़ मसलने लगा। तब कहीं जाकर उन्होंने चूमना बँद किया।
“मे कुछसमझ नहि पारहा हूं…” विक्रम हाँफता हुआ बोला।
“इसमें समझने कां क्याँ हैं? पिछली बार मे बेवकूफ थि जौ ऐसा मौका छोड़कर भाग गई, औऱ आज मे अपनीभूल सुधारना चाहती हूं…” नीरा अपने घुटनों केँ बल नीचेबैठ गयीँ, औऱ विक्रम कां अंडरवीयर झटक केँ उसकी जाँघों तक घसीटकर उसका लण्ड अपने मुँह मे भर लिया।
विक्रम अपने मेज़बान केँ लान मे अँधेरे मे खड़ा थां औऱ एक् विवाह-शुदा स्त्री उसका लण्डचूस रही थि। विक्रम कों दूर सें लोगों कि आवाजें सुनायी देरही थीं पऱ उसका ध्यान अपना लौड़ा चूसती नीरा केँ मुँह सें निकलरही सुड़कने कि आवाजों पर्र थां। नीरा नें अपने मुँह सें लण्ड निकाला औऱ इस अजनबी विक्रम कों जिसे उसने पिछली बार दुत्कार दिया थां, उसकी आँखों मे ऊपर देखती हुई अपनी मुट्ठी उसके भीगेहुए लण्ड पे ऊपर-नीचे चलाने लगी। विक्रम विश्मित सां नीरा कों ताकरहा थां जोँ अपने चेहरे पे लण्ड रगड़ते औऱ लण्ड कों नीचे सें छोर तक चाटरही थि। जब नीरा कों अपनी हथेली मे लण्ड कि चिकनाहट कम होती महसूस होती तोँ वोहफिन अपने मुँह मे डालकर चूसने लगती।
विक्रम केँ तनेहुए सख्त लण्ड कों रात कि ठंडीहवा मे धड़कता हुआ छोड़कर नीरा अचानक बोलीं- “अब मे तुमसे चुदवाना चाहती हूं। अब चोदो मुझे अपने लौड़े सें…”
विक्रम झुकते हुएउसे धक्का देकर वहीं लिटाने वाला थां.
विक्रम ये सुनकर हक्का-बक्का रह गय़ा। उसका लण्ड इतना सख्त होकर फुफकार रहा थां औऱ इस महिला कों अपने कपड़े गंदे होँ जाने कि फिक्र होँ रही थि। नीरा नें खड़ी होकर विक्रम कां हाथ पकड़ा औऱ घर-मकान केँ साईड कि तरफ चलनेलगी। विक्रम नें जल्द सें अपनी पैंट घुटनों केँ ऊपर खींची औऱ अनिश्चित सां अपनी पैंट पकड़े हुए नीरा केँ पीछेचल पड़ा।
जबवोह दोनों उस घर-मकान केँ पीछे नीरा कि मनपसंद केँ जगह पर्र पहुँचे तौ नीरा नें अपनी ड्रेस ठीक सें उतारकर तह करके एक् तरफरख दि। चाँदनी रात मे अब नीरा मात्र पैंटी औऱ हाईहील केँ सैंडल पहने किसी संगमरमर कि मूर्ती लगरही थि। नीरा नें फिन अपनी पैंटी नीचे खींची औऱ लात मारकर उसेघास पे फेंक दिया। विक्रम कों फिन अपने नज़दीक घसीटकर नीरा नें कूदते हुए अपने टागें विक्रम कि कमर पे औऱ अपनी बाँहें उसकी गर्दन मे लपेटदीं।
विक्रम अचानक चौंक गय़ा औऱ यन्त्रवत उसने नीरा कि गाण्ड पकड़कर ऊपरऊठा लिया औऱ दोनों कों गिरने सें बचाया। विक्रम कि पैंट एक् बारफिन उसके पैरों केँ इर्द-गिर्द गिर गयीँ, औऱ उसकातना हुआ लौड़ा लचककर नीरा कि बुर केँ खुलेछेद सें सट गय़ा। विक्रम कोई मुर्ख तौ थां नहि। उसने अपनेहाथ सें अपना लौड़ा पकड़कर नीरा कि गीली बुर मे ढकेल दिया।
“हाँ… उम्म्म…” विक्रम केँ लौड़े पे नीचे धँसती हुईँ नीरा सिसकी, मुझेये पहले हि कर लेना चाहिए थां।
“तौ फिन किया क्यूं नहि?” नीरा कों अपने लण्ड पे ऊपर-नीचे उछलने मे सहायता करतेहुए विक्रम नें पूछा।
“मे बहोत बड़ी बेवकूफ थि। शायद… पर्र अब मुझेअकल आँ गई, हैं…” नीरा अपनी बुर कों उसके लण्ड पर्र सिकोड़ कर हँसते हुए बोलीं।
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उसकेबाद दोनों नें कोईबात नहि कि। नीरा नें उसके लण्ड कों अपनी बुर मे चोदने केँ लिए जितना होँ सका उतनीजोर सें विक्रम कों कस केँ जकड़ लिया। इस तरह चुदवाना सुविधाजनक नहि थां पऱ ये तरीका कुछअलग थां औऱ दूर सें लोगों केँ हँसने औऱ बोलने कि आवाजें नीरा कों औऱ भि उत्तेजित कररही थीं। विक्रम भि नीरा कि गाण्ड पकड़े हुए जितना हौ सकता थां उतनीजोर सें अपना लण्ड नीरा कि बुर मे ऊपरपेल रहा थां। इसीतरह दोनों चुदाई करतेरहे।
औऱ फिन नीरा नें थरथराते हुए अपनी बुर कां रस छोड़कर विक्रम केँ लण्ड कों भिगो दिया। विक्रम नीरा केँ सम्भल जाने तक थोडा रूका औऱ फिन नीरा कि कमर पीछे दीवार पे टिकाकर जोर-शोर सें अपना लण्ड नीरा कि बुर मे अंदर-बाहर् ठेलने लगा औऱ जल्द हि अपने लण्ड कां रस नीरा कि बुर-रस मे मिला दिया। दोनों हाँफते हुए एक् दूसरे कों जकड़े हुएउसी तरह पाँच मिनट तक रूकेरहे।
जब विक्रम कां लण्ड ढीला पड़ने लगा औऱ उसकी उत्तेजना कम हौ गयीँ, तौ नीरा भि उसे भारी प्रतीत होनेलगी। नीरा कि बुर मे सें अपना लण्ड बाहर् निकालते हुए विक्रम नें नीरा कों धीरे-धीरे सें नीचे उतारा। जब नीरा केँ पेरघास पर्र पड़े तौ नीरा नें अपनी पकड़ छोड़ दि औऱ दोनों अलग हौ गये। नीरा नें अपनी पैंटी ढूँढ़कर पहनी औऱ फिन अपना गाऊन सीधा करके पहना। अँधेरे मे भि उसेकुछ सलवटें दिखरही थीं पऱ उसनेकुछ फिक्र नहि कि। नीरा विक्रम केँ होंठों पे एक् चुम्मा देकर जल्द सें घऱ केँ अंदर वापसचली गयीँ, औऱ अँधेरे मे अकेला खड़ा विक्रम अचिम्भत सां उसे देखता रहा।
नीरा सीधी बाथरूम मे गयीँ,। फिन सें अपनी पैंटी उतारकर उसने अपने गाऊन कां अगलाछोर ऊठाकर अपने ठोड़ी केँ नीचे दबाया औऱ एक् तौलिया गिला करके अपनी वीर्य सें भरी बुर औऱ टाँगें साफकीं औऱ फिनवोह तौलिया मैले कपड़ों कि टोकरी मे डाल दिया। नीरा कों ये सोचकर हँसी आँ गयीँ, कि जबवोह कपड़े धुलेंगे तोँ किसी कों इसबात कां पता नहि होगा कि उसकी दूसरे मर्द केँ संग चुदाई कां सबूत भि धुलरहा हैं। जब नीरा कों लगा कि अबवोह जश्न मे जाने योग्य दिखरही हैं तोँ वोह बाहर् निकली।
नीरा नें उसके होंठों पे किस करतेहुए बताया कि वोह औऱ लोगों केँ संग घुलमिल रही थि औऱ उसके पति कों बिल्कुल शक नहि हुआ। अपनी पति कों चूमते हुए नीरा कों हँसी-जनक लगा क्योंकी नीरा केँ यही होंठ थोड़ी देर पहली किसी दूसरे मर्द केँ लण्ड पे लिपटे हुए थें। पर्र जौ बात उसके पति कों नहि मालूम, वोहबात उसेचोट नहि पहुंचा सकती। कम सें कम नीरा नें तौ स्वयं कों यही दलील दि।
उसे अपने पति केँ अलवा औरों सें चुदाई कां आनन्द मिलरहा थां औऱ आगे भि गैर-मर्दों सें चुदवाते रहने कां नीरा कां इरादा थां। अगर उसका पति उसकी बुर कि दहकती आग नहि बुझा सकता तौ दूसरे बुझायेंगे। औऱ अब तक उसे अपना एक् स्टूडेंट मिल गय़ा थां जोँ खुशी सें नीरा कि सभी शारिरिक जरूरतें पूरीकर रहा थां औऱ अबउसे एक् औऱ अजनबी मिल गय़ा थां।
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***** दूसरा भाग ख़त्म End of part-2
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***** ***** तीसरे औऱ आखिरी भाग केँ लियेसंग मे बने रहिये।
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सेक्सी विद्यालय टीचर - तीसरा औऱ आखिरी भाग
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नीरा ढिल्लो कि ज़िंदगी मे फिन सें बहारें थीं। फिर भी उसके पति मे कुछ भि सुधार नहि हुआ थां औऱ चुदाई केँ प्रती वोँ पहले जैसा हि उदासीन थां पऱ नीरा कों अब दूसरों सें चुदाई कां मजामिल रहा थां। नीरा कां स्टूडेंट, रोहित, उसकी बुर कि आग बुझाने मे पूरीतरह सें समर्थ थां औऱ नीरा कों चोदने केँ लिए हमेशा तत्पर रहता थां। संग हि, बर्थडे पार्टी मे विक्रम सें चुदवाने केँ बाद नीरा नें विक्रम कां पता औऱ मोबाइल नंबर भि खोज निकाला थां। जश्न केँ बाद सें दोनों अनेकबार मिले थें। बर्थडे पार्टी मे मेजबान केँ घऱ केँ पिछवाड़े मे चुदाई फिरभी उत्तेजक थि पऱ पकड़े जाने केँ डर केँ बिना खुलकर पूरीतरह नंगे होकर पूरेजोश मे चुदवाने मे कहीं ज़्यादा मजा थां। नीरा हफ्ते मे कई-कईबार अपने पति कों धोखा देकर रोहित औऱ विक्रम सें चुदवाने लगी औऱ चुदाई कि आवृति कों कम करने कां नीरा कां कोई इरादा नहि थां।
एक् दिन नीरा औऱ रोहित होटल केँ कमरे मे जोरदार चुदाई केँ दौर केँ बाद बिल्कुल नंगे लेटेहुए थें। उन दोनों कि चुदाई हमेशा वासना औऱ हवस सें भरपूर होती थि। उसमें प्यार कां कोईजगह नहि थां। दोनों इसबात कों समझते थें औऱ इसी मे खुश भि थें। नीरा नें उठकर व्हिस्की कां पैग बनाते हुए पूछा- “रोहित, उसदिन क्लास मे पीछे सें मेरी गाण्ड पकड़कर दबोचने केँ लिए तूने इतनी हिम्मत केसे जुटायी थि?”
“कब?जब हमने क्लास मे पहलीबार चुदाई कि थि?” रोहित नें पूछा।
“नहि। … उससे पहले… मेरा ख्याल हैं कि जिसदिन हमने पहलीबार चुदाई कि थि, उससे एक् दिन पहले क्लास मे सें बाहर् निकलते हुए तूनेये हरकत कि थि…”
रोहित मन पे जोर डालकर याद करने कि कोशिश करनेलगा- “मुझे तोँ याद नहि पड़ता कि मैंने ऐसाकभी किया थां…”
अब चौंकने कि बारी नीरा कि थि। नीरा कों उसदिन कि घटनायाद आनेलगी। जबसभी क्षात्र क्लास सें बाहर् निकलरहे थें तौ किसी नें नीरा कि गाण्ड पे हाथ रखकर दबोच दिया थां औऱ उसी क्षण नीराजब घूमकर पीछे पल्टी थि तोँ उसे बहोत सारे लड़के क्लास सें बाहर् निकलते हुए दिखायी पड़े थें। अगलेदिन दोषी लड़के कों पकड़ने केँ लिए नीरा नें बहोत निलर्ज्ज होकर अपना अंग-प्रदर्शन करतेहुए बहोत हि कामुक हरकतें कि थीं औऱ उसकेबाद रोहित नें नीरा कां करीब बलात्कार हि कर डाला थां। नीराये सभीयाद करके मुश्कुराने लगी। रोहित उसदिन बहुतजोश औऱ जिद्द मे थां औऱ फिन नीरा भि जल्द हि स्वेछा सें चुदाई मे शामिल हौ गयीँ, थि। उस पहली चुदाई कि घटना केँ बाद नीरा नें मान लिया थां कि रोहित वोह लड़का थां जिसने उसकी गाण्ड दबोची थि।
“रोहित… क्याँ औऱ लड़के भि मेरे बारे मे बातें करते हें?” नीरा नें अपना ड्रिंक पीतेहुए धीमे सें पूछा।
“हाँ… बहोत बातें होती हें। आखिर तुम् सबसे गर्म औऱ सेक्सी टीचर होँ कालेज मे औऱ फिन हमेशा क्लास मे अपनी कामुक हरकतों सें औऱ कुछ नां कुछ दिखाकर लड़कों कों तड़पाती रहती होँ…”
“कुछ नां कुछ दिखाने सें तेरा क्याँ मतलब हैं?”
“तुम् जानती हौ… टाँगें, चूचियां, पैंटी वगैरह…”
ये सुनकर नीरा केँ मुखड़े पऱ लाली आँ गई,। येसभी हरकतें करना एक् बात थि पऱ अपने स्टूडेंट सें अपनी हरकतों कां इतना स्पष्ट वर्णन सुनना एक् अलगबात थि।
“तौ क्याँ बातें करते हें लड़के मेरे बारे मे?” नीरा नें आगे पूछा।
“तुम्हारे नाम कि, हररोज पता हैं कितनी मुठ मारी जाती हैं। सभी तुम्हें चोदने कां सपना देखते हें…”
“क्याँ वोहसच मे ऐसा कहते हें?”
“औऱ नहि तोँ क्याँ? बहोत सें लड़के बोलते हें…”
“तूने किसी कों हमारे बारे मे बताया तौ नहि नां?” नीरा थोड़ी सि चिंतित होँ गई,।
“क्याँ बात करती हौ मैडम… इतना तोँ मे भि समझता हूं…”
नीरा नें आगेझुक कर बड़े प्रेम सें रोहित केँ होंठ चूमे, “थैंक्स” नीरा बोलीं- “मुझेबता… क्याँ कोई विशेष लड़का हैं जौ खासतौर सें ऐसा प्रतीत होत हौ कि… उम्म… केसे कहूँ?”
“जौ कि तुम्हारी बुर मे अपना लण्ड पेलने कों उतावला हौ?” रोहित बोलकर धीरे-धीरे सें हँसा-“खैर, ऐसे लड़कों कि कमी नहि हैं जोँ तुम्हें चोदने केँ लिए उतावले हें। हाँ… अभि-अभि मुझे ख्याल आया। नितेश चौहान नें एक् बार तुम्हारी गाण्ड सहलाने कि डींग हाँकी थि पर्र किसी नें भि उसकीबात पऱ विश्वास नहि किया थां। हौ सकता हैं वही होँ…”
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan - Aage kya hua? Next part padhiye
औऱ aage badhyo kahani ko,बहोत kamuk hain,new style कि hain
Jagdish
dosto, New kahani iss poste. Now, its your turn. . .
Vineeta
bhay aisi padhaai sab स्थान hu jaaye too maze hu jayen
Sonaal
ऐसी पढ़ाई तोँ होती रहनी चाहिए भइया एक् औऱ हॉटकथा आपकीपढ़ करमजा आँ गय़ा
Poonam
rangila wrote:ekdum hot h bhay komaalrani wrote:Bahoot hi Badhiyaa h ...Mast ... Thanks dosto, Enjoy the new kahani "मेरे मित्र कि पत्नि" . .
Susmita
supar story h mitr
Shaleenee
हंगामेदार किस्सा हैं भइया
Virendra
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
Deeksha
Rohit Kapoor wrote:supar story h mitr jay wrote:हंगामेदार कथा हैं भइया rajsharma wrote:अति उत्तेजक रचना हैं साथी . शुक्रिया दोस्तों, संग मे बने रहने केँ लिये। अगली स्टोरी प्रस्तुत हैं। . .