छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 Stories Complete (2015)
nangi family desi kamuk kahaniyan
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete desi kamuk kahaniyan Garma hot desi kamuk kahaniyan, jismein nangi family ke saath chudai, gang bang, aur suhaag raat ki kahaniyan hain. Mehsoos karein desi ladkiyon ke saath hot hot chudai ki kahaniyan, jismein unke badan ki tadi, chiknaai, aur chudai ki bhavnaon ko darshaya gaya hai.
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
.
नीरा बड़ी उतावली होकर अगलेदिन कां इंतजार करनेलगी, खासकरके उस क्लास कां जिसमें नितेश चौहान थां औऱ वोह क्लास साम कि अंतिम क्लास थि। नीरा नें देख केँ उस लड़के कों सीट पे बैठे देखा जौ कि नीरा कि शंका सें बिल्कुल बेखबर थां। उस क्लास केँ दौरान नीरा कि कामुक छेड़छाड़ नितेश कि तरफ हि लक्षित थि। नितेश कों उसकी कुर्सी पे कसमसाते देखकर नीरा कों बहुत खुशी हुई। नितेश कों बार-बार अपनी पुस्तक अपनीगोद मे रखनीपड़ रही थि। नीरा कों उसके खड़े लण्ड कां उभारदिख रहा थां औऱ नीराउसे अपनी कामुक हरकतों सें औऱ अधिक भड़का कर वहीं पैंट मे स्खलित होते देख्ना चाहती थि पऱ नीरा नें स्वयं कों रोकेरखा। दिन कि वोह अंतिम क्लास जबखतम हुईँ औऱ सभी उठकर बाहर् जानेलगे।
तोँ नीरा नें नितेश कों पुकारा- “नितेश चौहान, तुम् ज़रा रुकोगे कुछदेर यहा?” नितेश घबड़ाकर चौंकते हुए धीरे-धीरे सें पलटा औऱ डरतेहुए अपनी टीचर कि तरफ अपनेकदम बढ़ाये।
“बैठो ज़रायहा…” नीरा सबसेआगे कि पंक्ति कि कुर्सी कि तरफ इशारा करतेहुए बोलि।
नितेश डेस्क केँ पीछे कुर्सी पे बैठ गय़ा औऱ सोचने लगा कि उसनेऐसा क्याँ किया हैं जौ टीचर नें उसे क्लास केँ बाद रूकने कों बोला। उसने अपने दिमाग़ पे बहोत जोर डाला पर्र पर्र उसेकोई कारण नहि सूझा। वोह गहरीसोच मे डूबा थां जबउसे अपनी टीचर कि आवाज़ सुनायी दि। उसने नज़रें ऊपर उठायीं तौ देखा कि बाकीसभी क्लास सें बाहर् जा चुके हें।
“मे तुमसे बात करनाचाह रही थि…” नीरा नें केहना शुरुआत किया-“कई दिन हौ गयेइस बात कों पर्र मुझे मौका हि नहि मिला। तुम्हें नहि लगता कि किसी कि अनुमति केँ बिनाउसे छूनागलत हैं?”
नितेश केँ चेहरे केँ भावों सें नीरा कों विश्वास होँ गय़ा कि नितेश हि वोह लड़का हैं जिसने उसकी गाण्ड सहलायी थि। नितेश कों बहोत सोचना पड़ा कि वोह क्याँ जवाबदे औऱ फिनवोह बोला- “आप् बिल्कुल ठीककह रही हें। ढिल्लो मैडम…”
“तौ फिन तुमने ऐसा क्यूं किया?”
“मैंने? मे… उह… मे ऐसा नहि करूँगा। आपसे किसने कहा कि मैंने कभीऐसा किया?”
“नितेश चौहान… तुम्हें क्याँ लगता हैं कि मे अँधी हूं? याँ मे बेवकूफ हूं? मैंने उसदिन तुम्हें क्लास केँ अंत मे मुझे छूतेहुए देख लिया थां। तुम् क्याँ सोचते हौ कि तुम् ऐसी हरकत करकेबच जाओगे। औऱ मुझेपता नहि चलेगा? याँ मैंने नहि देखा कि मेरे चूतड़ किसने सहलाये?”
उस युवा स्टूडेंट कों अब पसीना आँ गय़ा। नितेश नें एक् बार अपनी टीचर सें नज़रें मिलायीं औऱ फिन झुकालीं। उसे किसी कोने मे घिरेहुए जानवर जैसा महसूस होँ रहा थां औऱ उसेकुछ समझ मे नहि आँ रहा थां कि वोह क्याँ करे। नितेश कों लगा थां कि किसी कों पता नहि चलेगा पऱ अबवोह पकड़ा गय़ा थां औऱ उसे विश्वास थां कि अबउसे जरूर कालेज सें निकाल दिया जायेगा। वोहसोच रहा थां कि किसी दूसरे कालेज मे भि उसे दाखिला मिलेगा याँ नहि जब नीरा नें आगे बोल्ना शुरुआत किया।
“तोँ नितेश चौहान… तुम्हें अपनी सफाई मे क्याँ कहना हैं?”
“ढिल्लो मैडम, आई एम सारी… मेरावोह मतलब नहि थां…”
“तुम्हारा मतलब हैं कि तुम्हारे हाथ नें संयोग सें चूतड़ पकड़ लिये?” नीरा नें व्यंग सें ताना मारा।
“नहि… मैंने आपको छूना चाहा थां पर्र ऐसासहज हि हौ गय़ा। मुझे नहि पता कि मेरेमन मे अचानक ऐसा करने कां ख्याल केसे आँ गय़ा थां। मुझे नहि पता कि मैंने ऐसा क्यूं किया। प्लीज़ मुझेमाफ कर दीजिए। मे वादा करता हूं कि ऐसी गुस्ताखी फिन नहि होगी…” बेचारा नितेश करीब-करीब रोने वाला थां। वोँ स्वभाव सें थोडा दब्बू थां।
“नहि… ये बहुत नहि हैं…” नीरा कठोरता सें बोलि।
“पर्र मैडम…अब मे क्याँ करूँ? मे फिन सें ऐसा नां करने कां वादा करता हूं…” नितेश कि आँखों मे आँसू आँ गये।
“तुम् कहरहे होँ कि फिनऐसा नहि करोगे…” नीरा बोलि।
“हाँ मैडम… मे वादा करता हूं कि फिनऐसा नहि होगा…”
“मगरयही तौ मे सुनना नहि चाहती…” नितेश नज़रें ऊपर उठाकर अपनी टीचर कि बात समझने कि कोशिश करनेलगा। वोह बहुत परेशान औऱ चकराया हुआ थां।
“मे ठीक सें समझाती हूं, नितेश…” नीरा नें बोलते हुएरुक कर नितेश कां सफेद पड़ाहुआ चेहरा देखा। नीरा नें एक्-एक् शब्द पे जोर देती हुई आगे बोलि- “मे नहि चाहती… कि तुम् मुझसे ऐसा वादा…करो…”
.
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
.
नितेश ये सुनकर औऱ भि दुविधा मे पड़ गय़ा।
“तुम्हें क्याँ लगता हैं कि मुझे तुम्हारा छूना अच्छा नहि लगा?”
“पऱ मे समझा नहि। मैडम…”
“आज क्लास मे मेरी पैंटी देख्ना तुम्हें अच्छा लगा?”
“ये क्याँ कहरही हें, मैडम। आप्?”
“आज मेरी पैंटी कौन सें रंग कि हैं? अबये ढोंगमत करना कि तुमने कुछ देखा नहि…”
“हरी… मेरा ख्याल हैं कि वोहहरे रंग कि हैं…” नितेश बोला। उसकासिर झुकाहुआ थां औऱ वोह अपनी टीचर सें नज़रें नहि मिलापा रहा थां।
“क्यूं? मेरे ऊँचे कुरते मे सें मेरी टाँगों केँ बीच मे झाँकना अच्छा लगा?”
“मैडम…वोह ऐसा थां कि…”
“क्याँ? कैसा थां? यही नां कि मेरी टांगें फैली हुई थीं? तुम्हें क्याँ लगता हैं कि मेरी टाँगें क्यूं फैली हुईँ थि?”
“जरूर इत्तेफाक सें ऐसाहुआ होगा…”
“नहि… येकोई इत्तेफाक नहि थां…”
ये सुनकर नितेश कां झुकासिर एकदमऊपर उठ गय़ा। उसके चेहरे पर्र दुविधा औऱ हैरानी थि औऱ उसका मुँह खुलाहुआ थां।
“हाँ मे सहीकह रही हूं। मैंने तुम्हारे लिए हि अपनी टाँगें फैलायी थीं। तुम्हें अपनी पारदर्शी महीन सलवार मे सें अपनीहरी पैंटी कि झलक दिखाने केँ लिए…”
“मगर क्यूं?” नितेश नें हैरानी सें पूछा।
“तुम्हारे लण्ड कों खड़ा करने केँ लिए। हाँ मैंने तुम्हारे लण्ड कों सख्त होते देखा थां। तौ अब तुम् समझ सकते हौ कि मुझे तुम्हारा फिन सें नां छूने कां वादा क्यूं स्वीकार नहि हैं…”
नितेश नें अविश्वास सें अपनी टीचर कि तरफ देखा।
नितेश नें उसकीबात तोँ सुनी पर्र उसके कानों कों विश्वास नहि हुआ। ऐसा तौ मुमकिन हि नहि थां। तब तक नहि जब तक नीरा अपनी डेस्क सें उतरकर नितेश कि तरफ जानेलगी। नीरा नें अपनी एक् टाँग उठाकर नितेश कि डेस्क केँ ऊपर सें झुलायी औऱ उस लकड़ी केँ डेस्क पऱ बैठ गई,। फिन अपनी जाँघें फैलाते हुए नीरा नें अपने पांव उठाकर नितेश केँ एक्-एक् कँधे पऱ टिकादिए। नितेश नें जब नीरा कि फैली टाँगों केँ बीच मे उसकी झीनी सलवार मे सें उसकीहरी पैंटी देखी तौ वोह सन्नरह गय़ा। नीरा नें नितेश कां ध्यान आकर्षित करने केँ लिए उसके सीने केँ ऊपर अपने सैंडलों कि ऊँची नोकीली हील गड़ा दि।
“हुम्म्म्म… तोँ तुम् उसे उतारकर मुझे क्यूं नहि दिखाते…”
नितेश कों देखकर ऐसालग रहा थां कि उसकी साँसें रुकने वाली हें औऱ उसेदिल कां दौरा पड़ने वाला हैं। मगर उसके काँपते हाथ नीरा कि जाँघों कों छूतेहुए नीरा कि कमर तक पहुँच गये। उसने नीरा कि सलवार कां नाड़ा खोला औऱ पैंटी कां इलास्टिक पकड़कर दोनों कों एक् संग नीचे खींचा। नीरा नें उसकी सहायता करने केँ लिए अपनी गाण्ड उचकायी तौ उसके सैंडलों कि ऊँचीहील औऱ भि ज़्यादा नितेश केँ सीने मे गड़ गयीं। पऱ नितेश कों इस टाइम किसी पीड़ा कि परवाह नहि थि। नितेश नें सलवार औऱ पैंटी अपनी टीचर केँ घुटनों तक खींच दि। फिन नीरा नें बारी-बारी सें अपन पांव उसके कँधों सें हटाये औऱ नितेश नें सलवार औऱ पैंटी उसके पैरों सि झटककर खींच दि। नीरा कि चमचमाती नंगी बुर अब बिल्कुल नितेश कि आँखों केँ सामने थि।
नीरा नें जब देखा कि उसका स्टूडेंट उसकी गर्म पैंटी अपने चेहरे पर्र पकड़े हुए हैं तोँ वोह बोलि- “अच्छी लगी खुशबू? सीधे खुशबू केँ श्रोत सें हि क्यूं नहि सूँघते?”
नितेश नें एक् बार अपनी टीचर केँ चेहरे कि तरफ देखा औऱ फिन उसकी टाँगों केँ बीच मे। वोह थोडा सां संकोच किया, औऱ फिन एक् बार नीरा केँ चेहरे पे नज़र डालकर आगे झुकने लगा।
“इतनी जल्द नहि… बुर कि खुशबू सें पहले ज़रा मेरे पैरों औऱ टाँगों कि खुशबू औऱ स्वाद तोँ लेँ लो…” नीरा नें अपना एक् पांव नितेश केँ कँधे सें हटाकर अपने सैंडल कां तला नितेश केँ चेहरे पऱ रख दिया।
नितेश अपनीजीभ नीरा केँ सैंडल केँ तले पर्र फिराने लगा औऱ फिन उसके सैंडल कि हील अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा।
“मम्म्म…” नीरा आनिन्दत होकर सिसकारने लगी औऱ फिन अपना दूसरा पेर भि नितेश केँ चेहरे केँ सामने कर दिया। नितेश कि जीभ पूरे उत्साह सें सैंडल केँ स्ट्रैपों औऱ नीरा केँ पैरों कि अँगुलियों केँ बीच मे नाचने लगी। नितेश कों सैंडलों कि मादकगंध औऱ नीरा केँ पैरों केँ पसीने कां तीक्ष्ण स्वाद बहोत अच्छा लगरहा थां। नीरा नें आरामसे अपने पांव नितेश केँ चेहरे सें हटाकर फिन सें नितेश केँ कँधों पर्र टिकादिए औऱ नितेश कि जीभअब नीरा कि टाँगों कों चूमते-चाटते आगे बढ़ने लगी। नितेश कि सहूलियत केँ लिए नीरा नें भि थोडा आगे कि औऱ उचककर अपनेपेर नितेश कि कुर्सी कि पीठ पे रखदिए। नीरा कि बुर पे अपना मुँह रखने केँ पहले सें हि नितेश कों अपनी टीचर कि बुर कि नशीली गंधआने लगी।
.
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
नितेश जोँ अभि तक थोडा हिचकरहा थां, उसनेआगे झुककर अपनेहाथ डेस्क पऱ सरकाकर अपनी टीचर कि नंगी गाण्ड पकड़ली। कुछदिन पहलेजब उसने नीरा कि गाण्ड कों उसकी सलवार केँ ऊपर सें कुछ क्षणों केँ लिए सहलाया थां तौ उसेलगा थां कि उसने कितना बड़ातीर मार लिया। मगर अब उसकी अँगुलियां अपनी टीचर केँ नंगे चूतड़ों मे धँसी हुई थि औऱ उसका मुँह अपनी टीचर कि बुर पे थां। उसनेकई बार नीरा कि कल्पना करकेमुठ मारी थि पऱ ये अनुभव उन कल्पनाओं सें कहीं ज़्यादा बेहतर थां।
जब नीरा नें नितेश कां सिर पकड़कर अपनी बुर पे उसका मुँह दबाया तोँ नितेश फटाफट नीरा कि क्लिट चाटने लगा। नीरा मस्ती मे जोर सें सिसकने लगी औऱ उसने अपना घुटना मोड़कर अपनी दाँयी टाँग अपने स्टूडेंट कि पीठ पऱ लपेटली। डेस्क पे मजबूती सें टिके अपने हाथों औऱ नितेश कि पीठ पऱ लिपटी अपनी टाँग केँ सहारे वोह अपने चूतड़ उचकाने लगी। नितेश अपनी टीचर कि लिसलिसाती लाल बुर कों चाटते हुए अपनीजीभ कों बुर मे गहराई तक घुसारहा थां।
“ओहहहह… नितेश… चाट मेरी बुर हरामजादे… मेरी बुर कों अपनीजीभ सें चोद…”हवस मे दिवानी होती नीरा नें कराहते हुएकहा। नीरा कि बुर मे जबरदस्त सैलाब उठरहा थां।
नितेश नें अपनी टीचर कि निर्लज्ज चीख सुनी तौ वोँ दुगुनी रफ्तार सें बुर चाटने लगा।
“हाँ…हाँ… चाटइसे… अपनी कुतिया टीचर कि बुर… मे… मे… आआआहहहह…” अपने स्टूडेंट केँ चेहरे पे अपनी बुर कों ज़ोर-ज़ोर सें उचकाती हुई नीरा कराहते हुए झड़ने लगी औऱ उसकी बुर नें नितेश केँ मुँह कों गरम मलाईदार रिसाव सें लबालब कर दिया।
शाँत होने केँ बाद नीरा नें अपनी दाँयी टाँग धीरे-धीरे सें नितेश कि पीठ औऱ कंधे सें उठायी औऱ उचककर डेस्क केँ दोनों किनारे अपनी टाँगें लटकाकर सीधीबैठ गयीँ,। फिनवोह डेस्क सें नीचे उतरी औऱ नितेश कि साईड पे घुटनों केँ बलबैठ गयीँ, औऱ नितेश कि कुर्सी कों हल्के सें अपनीतरफ घुमाया। वोह नितेश कि पैंट खोलने हि वाली थि कि नीरा कों उसके पैंट पे गहरेरंग कां गीला धब्बा दिखायी दिया।
नितेश कां चेहरा शर्मिंदगी सें सुर्ख होँ गय़ा- “मैडम… आप् परेशान नां हों… मे जानता हूं कि क्याँ करना हैं…”
नीरा नें अपने स्टूडेंट कि पैंट खोलकर खींची औऱ नितेश नें थोडा सां ऊपर उठकर नीरा कों पैंट उतारने मे सहायता कि। कुछ हि क्षणों मे नितेश कि पैंट औऱ वीर्य सें भीगा अंडरवीयर उसके पैरों केँ पास थें। नीरा नें उसका लण्ड देखा जौ अभि भि बहुत कठोर थां पर्र उसके लिसलिसे वीर्य सें चुपड़ा हुआ थां। नीरा नें आगेझुक कर अपने होंठ उसके लण्ड केँ इर्द-गिर्द लपेटदिए। जब उसने अपनी टीचर कों वीर्य सें चुपड़ा लण्ड अपने मुँह मे डालते देखा तौ नितेश कि आँखें फैल गयीं।
नीरा कों नितेश कां वीर्य सें लिसलिसा लण्ड मुँह मे लेने मे कोई आपत्ति नहि थि औऱ उसे नितेश केँ वीर्य कां स्वाद पसन्द आया। नितेश कां इसतरह अपने पैंट मे स्खलित होँ जानां नीरा कों बहुत प्यारा लगा। नीरा कों एहसास हुआ कि उसकेसभी क्षात्र उम्र मे बहुत छोटे हें। जिन्होंने अभि-अभि जवानी कि दहलीज़ पर्र कदमरखा हैं। जब नितेश कां लण्ड नीरा केँ मुँह मे जाते हि बिल्कुल सख्त होँ गय़ा तोँ नीरा कों लण्ड मुँह मे लियेहुए हि हल्की सि हँसी आँ गई,। इन छोटी उम्र केँ युवकों मे यही एक् अच्छी बात थि कि झड़ने केँ बाद भि इनके लण्ड फटफटफिन सें खड़े होँ जाते हें।
नीरा उसके लण्ड कों चूसते हुए उसपर लिपटे वीर्य कों चाटकर साफ करने केँ लिए अपनीजीभ कां अधिक हि इस्तमाल कररही थि। नितेश कां लण्ड चूसते हुए नीरा बीच-बीच मे अपनी नज़रें उठाकर अपने स्टूडेंट केँ चेहरे कि तरफदेख लेती थि। अधिकतर तोँ उसे नितेश कि आँखें बँद हि मिलीं पर्र कईबार उसने देखा कि नितेश अपनी टीचर कों लण्ड चूसते देखने केँ लिए अपनी आँखें खोलने कों बाध्य होँ रहा थां। नीरा जानती थि कि ये नितेश केँ लिए विशेष रोमांच कि बात थि, विशेष करके इसलिये कि वोह दोनों क्लासरूम मे मौजूद थें औऱ वोह क्लास मे कुर्सी पे बैठा थां औऱ उसकी टीचर उसके सामने अपने घुटनों केँ बल बैठी उसका लण्डचूस रही थि।
.
*****too Be Contd।.
.
.
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan - Next part miss mat karna
औऱ aage badhyo kahani ko,बहोत kamuk hain,new style कि hain
Jagdish
dosto, New kahani iss poste. Now, its your turn. . .
Vineeta
bhay aisi padhaai sab स्थान hu jaaye too maze hu jayen
Sonaal
ऐसी पढ़ाई तोँ होती रहनी चाहिए भइया एक् औऱ हॉटकथा आपकीपढ़ करमजा आँ गय़ा
Poonam
rangila wrote:ekdum hot h bhay komaalrani wrote:Bahoot hi Badhiyaa h ...Mast ... Thanks dosto, Enjoy the new kahani "मेरे मित्र कि पत्नि" . .
Susmita
supar story h mitr
Shaleenee
हंगामेदार किस्सा हैं भइया
Virendra
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
Deeksha
Rohit Kapoor wrote:supar story h mitr jay wrote:हंगामेदार कथा हैं भइया rajsharma wrote:अति उत्तेजक रचना हैं साथी . शुक्रिया दोस्तों, संग मे बने रहने केँ लिये। अगली स्टोरी प्रस्तुत हैं। . .