छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 Stories Complete (2015)
nangi family desi kamuk kahaniyan
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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आनन्द भरा सुहाना सफर
मिताली औऱ उनके पति पंकज सहारनपुर मे रहते थें, पंकज सरकारी बैंक मे जॉब करते थें, मगर उनका ताबदला पटियाला होँ गय़ा थां तोँ वे अपनाकुछ सामान पटियाला लेकरजा रहे थें, वैसे तौ बहुत सामान उन्होंने छोटे ट्रक सें भेज दिया थां पर्र कांच कि कुछ चीज़ें, क्राकरी आदि अपनी गाड़ी सें लेकरजा रहे थें।
हर्षित नाम कां एक् युवक उनके पड़ोस मे हि रहता थां। सामान कुछ ज्यादा थां इसलिये पंकज नें हर्षित कों भि संग चलने कों कहा ताकिवहा जाकर सामान कार सें उतारकर रखवाने मे ज्यादा दिक्कत नाँ हौ। रविवार कां दिन होने केँ कारण हर्षित केँ कालेज कि छुट्टी थि औऱ वैसे भि हर्षित मिताली भाभी कां कहाहुआ कभी नहि टालता थां। उनकाबात करने कां तरीका हि इतना लुभावना थां कि जब भि वोँ प्रेम सें कोई भि काम कहती, हर्षित मना नां कर पाता थां।
सितम्बर कां महीना थां। हर्षित कि पूरी सुभह मिताली भाभी औऱ उनके पति पंकज कां सामान उनकी वाहन मे रखवाने मे निकल गई थि। पंकज औऱ मिताली कि विवाह कों अभि ढाईसाल हि हुए थें, अभि तक उनकेकोई बच्चा नहि हुआ हैं।
मिताली भाभी पंजाबी परिवार सें हें औऱ बला कि हसीन हें, उनका सफ़ेद रंग, नीली आँखें, गदराया शरीर औऱ गुलाबी होंठ किसी भि उम्र केँ मर्द कों पागलकर दें, औऱ फिन हर्षित तोँ एकदम युवा हैं, सिर्फ़ उन्नीस साल कां, उसपर मिताली भाभी कां चमत्कार चलना लाज़मी थां। वोँ हर्षित केँ पड़ोस मे दो सालों सें रहरही थीं, इतने वक्त मे हर्षित औऱ मिताली भाभी बहुत घुलमिल गए थें।
हर्षित तोँ पहलेदिन सें हि मिताली भाभी केँ हुश्न कां दीवाना थां। उसदिन सुभह सें हि हर्षित, मिताली भाभी औऱ उनके पति व्हीकल मे सामान रखते-रखते पशीने सें लथपथ होँ चुके थें। कार सामान सें करीब-करीब भर हि चुकी थि। ऐसालग रहा थां जैसे सारा सामान रखने केँ बाद किसी औऱ केँ बैठने कि स्थान हि नहि बचेगी। तभी पंकजघऱ केँ अन्दर गए ताकि अंतिम बचाहुआ सामान ला सकें।
हर्षित औऱ मिताली भाभी नें जैसे हि उन्हें घऱ सें बाहर् आने कि आहट सुनी तौ मुड़कर देखा तौ दोनों हैरान रहगये। पंकज अपना 42 इंच कां टेलीविज़न उठाए आँ रहे थें।
उनके चेहरे सें लगरहा थां जैसे वोँ गहन चिंतन मे डूबेहुए हें औऱ कोई न् कोई मार्ग निकालने कि कोशिश कररहे हें। उन्होंने टेलीविज़न आगे वालीसीट कों लेटाकर इसतरह सें रखा कि आधा टेलीविज़न आगे ड्राईवर केँ संग वालीसीट पर्र औऱ आधा ड्राईवर केँ ठीक पीछे वालीसीट पऱ आँ गय़ा। फिन हर्षित सें पीछे वालीसीट पऱ बैठने कों कहा। हर्षित केँ बैठते हि उन्होंने मिताली भाभी कों भि हर्षित केँ संग बैठने कों कहा औऱ व्हीकल कां द्वार (दरवाज़ा) बन्द करने कि कोशिश करनेलगे, पर्र बहुत कोशिश करने केँ बाद भि द्वार (दरवाज़ा) बन्द नहि हुआ।
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भाभी कहने कों मोटी तोँ नहि थि पर्र स्थान हि इतनीकम थि कि किसी भि हालत मे दोजने वहा नहि बैठ सकते थें। भाभी नें अपने पति कों समझाने कि कोशिश कि- एक् काम करते हें, आज टेलीविज़न यहीं छोड़ दीजिये। आप् जब अगलीबार जायेंगे तौ लेँ जानां।
“बिल्कुल भि नहि… कल सें क्रिकेट केँ मैच शुरुआत हौ रहे हें, मेराकाम नहि चलने वाला टेलीविज़न केँ बिना…” वोँ बिल्कुल भि मानने कों सजधजकर नहि थें।
भाभी पहले हि गर्मी सें परेशान थीं, उनके चेहरे पऱ क्रोध साफ दिखाई देनेलगा थां, उन्होंने झल्ला करकहा- देखिये, फटाफट फैसला कीजिए, इतनीकम स्थान मे दोलोग नहि आँ सकते।
याँ तौ आप् अपना टेलीविज़न छोड़ दीजिये, याँ फिन हर्षित कों मेरीगोद मे बैठना पड़ेगा औऱ मुझे नहि लगता कि मे हर्षित कां वज़नझेल पाऊँगी।
इतना सुनते हि उनके पति नें झट सें कहा-अरे हाँ। ये तोँ मैंने सोचा हि नहि थां। एक् कामकरो, तुम् हर्षित कि गोद मे बैठजाओ। वैसे भि तुम् हल्की सि हि तौ होँ, हर्षित कों ज्यादा दिक्कत नहि होगी। मार्ग भि इतना लम्बा नहि हैं, बसकुछ घण्टों कि तौ बात हैं।
पंकज हर्षित कों बच्चा हि समझते थें, इसलिये उन्हें इसबात सें कोई दिक्कत नहि थि कि उनकी पत्नि हर्षित कि गोद मे बैठे।
“आपका दिमाग़ तोँ ठीक हैं? इतनी गर्मी मे ये परेशान होँ जायेगा…” भाभी नें अपने पति कों गुस्से सें घूरते हुएकहा।
“कोई दिक्कत नहि हैं भाभी। वैसे भि मार्ग इतना लम्बा नहि हैं औऱ ऊपर सें दूसरा कोई तरीका नहि हैं…” हर्षित नें कहा।
तभी पंकज भि बोले-सही बात हैं मिताली, मानजाओ नां?
मिताली भाभी केँ पास पंकज कि बातमान लेने केँ सिवाकोई चारा नहि थां, उन्होंने कहा-चलो ठीक हैं। अगर हर्षित कों दिक्कत नहि हैं तोँ ऐसे हि कर लेते हें। मगरअगर रास्ते मे हर्षित कों दिक्कत हुई तौ थोड़ी देरकार रोक लेंगे।
भाभी नें हर्षित कि ओर देखा तोँ उसने“हाँ…” मे सिर हिला दिया।
भाभी नें कहा- तौ ठीक हैं। चलोसभी नहा लेते हें, गर्मी बहोत हैं। फिन चलेंगे।
हर्षित अपनेघऱ गय़ा औऱ फटाफट नहा-धोकर वापिस आँ गय़ा। मार्ग साढ़े तीन सें चार घण्टे कां थां औऱ बहुत गर्मी होने वाली थि इसलिये हर्षित नें थोड़े आरामदायक कपड़े पहनने कां फैसला किया औऱ अपनी टी-शर्ट औऱ निकर हि पहनली।
मिताली औऱ पंकज भि थोड़ी देर मे रेडी होकर आँ गए।
भाभी नें भि गर्मी कों ध्यान मे रखतेहुए एक् पतला सां कुर्ता औऱ सलवार हि पहनी थि। पंकज ड्राईवर सीट पऱ बैठगए औऱ हर्षित पीछे कि सीट पर्र बैठ गय़ा। भाभी भि पीछे वालीसीट पऱ हर्षित कि गोद मे बैठ गई औऱ कार कां द्वार (दरवाज़ा) बन्दकर दिया।
“जी भाभी, आप् चिन्ता मतकरो। मुझेकोई दिक्कत नहि हैं। आप् तोँ एकदम हल्की सि हें…” हर्षित नें जवाब दिया तोँ भाभी मुश्कुराए बिना नं रहसकी।
तभी उन्होंने अपने पति कों चलने कों कहा। उनके पति कों सिर्फ़ उनकासिर हि दिखाई देरहा थां क्योंकी सारी स्थान उनके टेलीविज़न नें घेररखी थि।
“तुम् ठीक सें बैठी होँ नां?” उनके पति नें पूछा।
भाभी अपनी स्थान पऱ थोडा हिली औऱ बोलि- हाँ। एकदमठीक हूं।
व्हीकल चल पड़ी औऱ चलते हि पंकज नें गानेचला दिये। सफर लम्बा थां। लगभग एक् घण्टा बीत गय़ा थां औऱ कार अपनी पूरी रफ़्तार सें चलीजा रही थि।
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मिताली धीरे-धीरे बैठी गानेसुन रही थि कि तभी उन्हें अपने नीचेकुछ चुभता हुआ महसूस हुआ। उन्होंने स्वयं कों थोडा हिलाकर ठीक करने कि कोशिश कि पर्र अभि भि उन्हें कुछचुभ रहा थां। वोँ थोडा ऊपरउठी औऱ फिनठीक सें बैठ गई, पर्र अभि भि मिताली कों अपने नीचेकुछ महसूस हौ रहा थां।
हर्षित साँस रोके चुपचाप बैठा थां कि अब तोँ भाभी कों पतालग हि जायेगा कि क्याँ हौ रहा हैं।
“मे जब बैठी थि तब तौ यहाऐसा कुछ नहि थां तोँ अब कहां सें…” मिताली स्वयं सें बातें कररही थि औऱ तभी अचानक सें उन्हें अंदाज़ा हुआ कि वो चुभने वाली चीज़ क्याँ हैं।
मिताली केँ गोद मे बैठने केँ कारण हर्षित केँ लण्ड मे तनाव आँ रहा थां औऱ वही मिताली कि गाण्ड कि दरार मे चुभरहा थां।
“हे ईश्वर। हर्षित कां लण्ड मेरे बैठने केँ कारण खड़ा होँ गय़ा हैं…” मिताली नें मन हि मन सोचा- “मुझे उम्मीद नहि थि कि आज भि मेरीवजह सें किसी जवान लड़के कां लण्ड खड़ा होँ सकता हैं। कितना बड़ा होगा हर्षित कां लण्ड? क्याँ सोचरहा होगा वो मेरे बारे मे मन हि मन? क्याँ उसे भि मेरे चूतड़ों केँ बीच कि खाईं महसूस होँ रही हैं?” मिताली कां मनऐसे रोमांचक सवालों सें प्रफुल्लित हौ उठा थां।
मिताली नें नीचे कि ओर देखा तोँ उनका कुर्ता भि खिसककर ऊपरउठ गय़ा थां औऱ उनकी नाभिसाफ दिखाई देरही थि। एक् बार तोँ मिताली नें सोचा कि कुर्ता नीचेकर लिया जाये, पर्र फिन मिताली नें हर्षित कों थोडा तंग करने केँ इरादे सें उसे वैसा हि रहने दिया। मिताली कों ये विचार बड़ा रोमांचित कररहा थां कि उनकीवजह सें हर्षित उत्तेजित हौ रहा हैं।
हर्षित केँ हाथ उनके दोनों तरफसीट पर्र टिकेहुए थें। चलते-चलते एक् घण्टे सें ज्यादा हौ चुका थां, पर्र अभि भि कम सें कमदोढाई घण्टे कां सफर बाकी थां।
मिताली जानती थि कि पंकज कों उनकेसिर केँ अलावा कुछ भि दिखाई नहि देरहा थां कि नीचे क्याँ होँ रहा हैं। उनके टेलीविज़न केँ आड़ मे सभीकुछ छुपाहुआ थां। तभी मिताली नें महसूस किया कि हर्षित थोडा उठकर अपने आपको व्यवस्थित करने कि कोशिश कररहा थां। जैसे हि हर्षित दोबारा बैठा तोँ उसका लण्डठीक भाभी केँ चूतड़ों केँ बीच मे आँ गय़ा। मिताली कां मनइस एहसास सें औऱ भि रोमांचित होँ उठा औऱ वोँ मन हि मन कामना करनेलगी कि हर्षित कुछ नां कुछ औऱ करे।
“तुम् ठीक सें बैठे होँ नाँ हर्षित?” मिताली नें पूछा।
“हाँ भाभी। मे तोँ एकदमठीक हूं। आपको तौ कोई दिक्कत नहि हौ रही नाँ?” हर्षित नें इस उम्मीद मे पूछा कि अगर भाभी कों उसके लण्ड कि वजह सें कोई दिक्कत होगी तोँ वोँ इशारों मे कुछ कहेंगी।
मगर मिताली नें कहा- “बिल्कुल नहि। बल्कि मुझे तौ अच्छा हि महसूस हौ रहा हैं ऐसे बैठकर। तुम्हारे दोनों हाथ एक् हि स्थान रखे-रखे थक तोँ नहि गए नाँ?”
हर्षित कों भरोसा नहि होँ रहा थां कि भाभी नें सच मे वोँ सभीकहा हैं, उसने जवाब दिया-हाँ भाभी, थोडा सां।
“एक् कामकरो, तुम् अपने दोनों हाथयहा रखलो…” कहकर मिताली नें हर्षित केँ दोनों हाथ अपनी दोनों जांघों पऱ रखवा लिये। औऱ पूछा-“अब ठीक हैं?”
“हाँ, अब तौ पहले सें बहोत बेहतर हैं…” हर्षित नें खुश होकरकहा।
मिताली नें नीचे कि ओर देखा तौ पाया कि हर्षित नें अपनी दोनों हथेलियां उनकी दोनों जांघों पर्र रखली थि औऱ उसके दोनों अँगूठे मिताली कि बुर केँ बहोत पास थें। मिताली मन मे सोचने लगी केँ अगर हर्षित थोडा सां भि अपने अँगूठों कों अन्दर कि ओर बढ़ाए तोँ उनकी बुर कों सलवार केँ ऊपर सें छू सकता हैं, पर्र मिताली जानती थि कि हर्षित इतनी आसानी सें इतनी हिम्मत नहि करने वाला।
हर्षित कि छुअन सें मिताली कि बुर सें रस निकलने लगा थां औऱ उनकी पैंटी भीगने लगी थि, उन्हें लगरहा थां कि थोड़ी हि देर मे ये गीलापन उनकी सलवार तक पहुँच जायेगा औऱ तबअगर हर्षित नें उसेछू लिया तोँ वो समझ जायेगा भाभी केँ मन मे क्याँ चलरहा हैं औऱ वोँ कितनी गरम होँ चुकी हें। मिताली नें स्वयं हि हिम्मत करकेबात आगे बढ़ाने कि सोची औऱ अपने दोनों हाथ हर्षित केँ हाथों पर्र रख लिये।
देखने मे भाभी कि ये हरकत बड़ी हि स्वाभाविक सि लगरही थि। फिन उन्होंने हर्षित केँ हाथों कों ऊपर सें धीरे धीरे मसलना शुरुआत किया। मिताली नें एक् बारसिर उठाकर अपने पति कि ओर देखा। अपने पति केँ इतनीपास होतेहुए हर्षित केँ संगऐसी हरकतें करना उन्हें बड़ा हि रोमांचित कररहा थां। मिताली नें हर्षित केँ हाथों कों मसलते-मसलते उन्हें आरामसे ऊपर कि ओर खिसकाने कि कोशिश कि ताकि हर्षित केँ हाथों कों अपने बुर केँ ठीकऊपर लासके।
हर्षित भि अब तक समझ चुका थां कि भाभी क्याँ चाहरही हें, वो स्वयं भि वासना सें भरकर पागलहुआ जारहा थां।
मिताली नें नीचे कि ओर देखा तोँ हर्षित अपने दोनों हाथ भाभी कि टाँगों केँ ठीकबीच मे लेँ आया थां औऱ अपने दोनों अँगूठों सें भाभी कि बुर कों उनकी सलवार केँ ऊपर सें हल्के-हल्के सहलाने लगा थां। मिताली नें हर्षित कां एक् हाथ पकड़कर अपनी बुर केँ बिल्कुल ऊपररख लिया औऱ अपनी टाँगों कों थोडा औऱ चौड़ा कर लिया जिससे हर्षित अच्छे सें भाभी कि बुर कों उनकी गीली हौ चुकी सलवार औऱ पैंटी केँ ऊपर सें सहलापा रहा थां।
मिताली नें हर्षित कां हाथ पकड़कर जोर सें अपनी बुर पऱ दबा दिया तौ हर्षित नें भि भाभी कि बुर कों थोडा औऱ जोर सें रगड़ना शुरुआत कर दिया। अब मिताली भि वासना कि आग मे बुरीतरह जलरही थि, उन्होंने अपनेहाथ हर्षित केँ हाथों केँ ऊपर सें हटालिए थें पऱ हर्षित नें अपनेहाथ वहींरखे औऱ भाभी कि बुर कों रगड़ना बन्दकर दिया।
मिताली बेसब्री सें इंतजार करनेलगी कि हर्षित कुछकरे, पऱ शायद हर्षित आगे बढ़ने मे अभि भि डररहा थां। मगर मिताली जानती थि कि उसकाडर केसेदूर करना हैं, मिताली नें हर्षित कां एक् हाथ पकड़ा औऱ उसे उठाकर अपनेपेट पर्र अपनी सलवार केँ नाड़े केँ ठीकऊपर रख दिया औऱ उसकेहाथ कों दबा दिया औऱ दूसरे हाथ सें अपना नाड़ा खोलने लगी।
नाड़ा खोलते हि मिताली नें हर्षित कां हाथ अपनी सलवार केँ अंदर कि ओरकर दिया जिससे हर्षित कां हाथ भाभी कि बुरीतरह भीग चुकी पैंटी पर्र आँ गय़ा। हर्षित नें भाभी कि बुर कों गीली पैंटी केँ ऊपर सें रगड़ना शुरुआत किया। वो अब भाभी कि बुर कि फ़ाँकों कों अच्छे सें महसूस कर सकता थां। मिताली नें थोड़ी देर तक तोँ उसीतरह हर्षित केँ हाथ कां मजा लिया, फिन उसे पकड़कर अपनी पैंटी कि इलास्टिक कि तरफ लेजाकर उसके अन्दर कि ओर धकेल दिया। भाभी कि पैंटी हर्षित औऱ भाभी दोनों केँ हाथों केँ लिए बहोत छोटी थि, इसलिये मिताली नें अपनाहाथ बाहर् हि रखा औऱ सिर्फ़ हर्षित केँ हाथ कों हि आगे बढ़ने दिया।
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***** too be contd।.
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan - Kahani ab aur interesting hogi
औऱ aage badhyo kahani ko,बहोत kamuk hain,new style कि hain
Jagdish
dosto, New kahani iss poste. Now, its your turn. . .
Vineeta
bhay aisi padhaai sab स्थान hu jaaye too maze hu jayen
Sonaal
ऐसी पढ़ाई तोँ होती रहनी चाहिए भइया एक् औऱ हॉटकथा आपकीपढ़ करमजा आँ गय़ा
Poonam
rangila wrote:ekdum hot h bhay komaalrani wrote:Bahoot hi Badhiyaa h ...Mast ... Thanks dosto, Enjoy the new kahani "मेरे मित्र कि पत्नि" . .
Susmita
supar story h mitr
Shaleenee
हंगामेदार किस्सा हैं भइया
Virendra
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
Deeksha
Rohit Kapoor wrote:supar story h mitr jay wrote:हंगामेदार कथा हैं भइया rajsharma wrote:अति उत्तेजक रचना हैं साथी . शुक्रिया दोस्तों, संग मे बने रहने केँ लिये। अगली स्टोरी प्रस्तुत हैं। . .