छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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नाड़ा खोलते हि मिताली नें हर्षित कां हाथ अपनी सलवार केँ अंदर कि ओरकर दिया जिससे हर्षित कां हाथ भाभी कि बुरीतरह भीग चुकी पैंटी पऱ आँ गय़ा। हर्षित नें भाभी कि बुर कों गीली पैंटी केँ ऊपर सें रगड़ना शुरुआत किया। वो अब भाभी कि बुर कि फ़ाँकों कों अच्छे सें महसूस कर सकता थां। मिताली नें थोड़ी देर तक तौ उसीतरह हर्षित केँ हाथ कां मजा लिया, फिन उसे पकड़कर अपनी पैंटी कि इलास्टिक कि तरफ लेजाकर उसके अन्दर कि ओर धकेल दिया। भाभी कि पैंटी हर्षित औऱ भाभी दोनों केँ हाथों केँ लिए बहोत छोटी थि, इसलिये मिताली नें अपनाहाथ बाहर् हि रखा औऱ सिर्फ़ हर्षित केँ हाथ कों हि आगे बढ़ने दिया।
हर्षित नें भाभी कि बुर केँ होंठों कों पहलीबार छुआ तोँ उसके पूरेबदन मे गर्मी सि आती हुईँ महसूस हुईँ। हर्षित नें भाभी कि बुर कि दोनों फ़ाँकों केँ ठीकबीच मे अपनी उंगलियों सें सहलाना शुरुआत किया तोँ मिताली केँ मुख सें जोर कि कराह निकल गई पर्र व्हीकल केँ हंगामा मे औऱ गानों कि आवाज़ मे मिताली कि आवाज़ दबकररह गई।
मिताली कि बुर एकदमगरम होकरतप रही थि औऱ पूरीतरह सें भीगकर चिकनी होँ चुकी थि। तभी मिताली नें अपने चूतड़ ऊपर कि ओर उठाए औऱ अपनी पैंटी कि इलास्टिक केँ दोनों ओर अपने दोनों हाथों केँ अँगूठे फ़ंसाकर उसे नीचे कि ओर खिसका दिया जिससे उनकी पैंटी औऱ संग हि उनकी सलवार उनके घुटनों तक नीचे खिसक गई।
मिताली केँ ऐसा करते हि हर्षित नें एक् बार भाभी केँ चूतड़ सहलाए औऱ फिन अपने दूसरे हाथ कि उंगली भाभी कि बुर मे घुसा दि औऱ उसे आहिस्ता अन्दर-बाहर् करनेलगा, पऱ पैंटी केँ कारण मिताली कि टाँगें ज्यादा खुल नहि पारही थि इसलिये मिताली अपनी पैंटी पूरीतरह उतारने केँ लिए थोडा नीचे झुकने हि लगी थि कि हर्षित नें अपने दूसरे हाथ सें उनकी पैंटी कों पकड़कर नीचे कि ओर खींच दिया जिससे वोँ भाभी केँ टखनों तक आँ गई।
तभी मिताली नें अपने पाँवऊपर उठाए ताकि हर्षित उन्हें पूरीतरह निकाल दे। हर्षित नें भाभी कि पैंटी केँ संग-संग उनकी सलवार भि घसीटकर नीचे उतार दि। अब मिताली नें धीरे-धीरे अपनी टाँगें पूरीखोल लीथीं, जितना वोँ खोल सकतीं थीं।
हर्षित कों तौ जैसेइसी मौके कां इंतजार थां, उसने तुरन्त अपनीदो उंगलियां भाभी कि बुर मे घुसादीं।
मिताली केँ मुँह सें हल्की सि “अहह…” निकल गई।
“तुम् ठीक तोँ होँ नां?” अचानक पंकज नें पूछा। वोँ मिताली केँ चेहरे कों हि देखरहे थें।
मिताली मुश्कुराई औऱ बोलि- मे तोँ एकदमठीक हूं। मुझेलगा थां हर्षित कि गोद मे बैठने सें दिक्कत होगी, पऱ ऐसाकुछ भि नहि हैं। मुझे लगता हैं येसफर बहुत अच्छा जाने वाला हैं। मिताली अपने पति सें बड़े धीरे-धीरे बातकर रही थि औऱ हर्षित कि उंगलियां भाभी कि बुर कों चोदरही थि।
“औऱ कितनी देर चलने केँ बाद विराम लेना हैं?” पंकज नें पूछा।
“मे अभि रुकना नहि चाहती, थोडा औऱ आगे बढ़ना चाहती हूं…” मिताली नें जवाब दिया- तुम्हारा क्याँ विचार हैं हर्षित? उन्होंने हर्षित सें पूछा।
“हाँ भाभी, मेरा भि अभि औऱ आगे चलते रहने कां मन हैं…” हर्षित नें कहा।
“अच्छा हैं, जितना आगे तक चलें, उतना हि बेहतर हैं…” मिताली मुश्कुराते हुए बोलीं।
“ठीक हैं नां?” मिताली नें अपने पति सें पूछा।
“हाँ मुझे भि लगता हैं बिना रुके जितना आगे पहुँच जायें, उतना हि बेहतर हैं…” उन्होंने जवाब दिया।
मिताली पीछे कि ओर मुड़ी औऱ हर्षित कि ओर देखते हुए बोलीं- “मुझे भि… मे नहि चाहती कि तुम्हें रुकना पड़े…” मिताली नें धीमी आवाज़ मे कहा।
“हर्षित?” पंकज बोले- तुम्हें कोई दिक्कत तोँ नहि नाँ तुम्हारी भाभी केँ गोद मे बैठने सें?
“बिल्कुल नहि। भाभी थोड़ी-थोड़ी देर मे उठकर अपनाजगह बदल लेती हें जिससे एक् हि स्थान अधिकदेर भार नहि रहता औऱ मुझे भि आसानी रहती हैं…” हर्षित पंकज सें बातकर रहा थां औऱ भाभी कि चूत मे अपनी उंगलियां औऱ भि गहराई मे उतारे जारहा थां।
हर्षित नें फिन सें अपनी उंगलियां भाभी कि योनि मे तेज़ी सें अन्दर-बाहर् करनी शुरुआत कर दि थि।
मिताली कों अपनी सिसकारियां रोके रखने केँ लिए अपने होंठों कों कसकर दबाए रखनापड़ रहा थां। मिताली नें कसकर हर्षित कि कलाई पकड़ली थि। ऐसा करके मिताली हर्षित कों ये एहसास दिलाना चाहरही थि कि उन्हें कितना आनन्द आँ रहा हैं औऱ वे चाहती हें कि हर्षित अपनी उंगलियां औऱ अन्दर तक घुसाता रहे।
हर्षित भाभी कां इशारा समझकर अपनी उंगलियों कों भाभी कि बुर मे जितनी अन्दर तक घुसा सकता थां, घुसाने लगा।
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जौनपुर भइयाकुछ रहमइस सूत्र पर्र भि करोअब तौ काफ़ी समय होँ गय़ा हैं कोईनई स्टोरी पोस्ट हुए
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मिताली नें हर्षित कि उंगलियों केँ संग-संग आरामसे अपने कूल्हे भि हिलाने शुरुआत कर दिये। उन्होंने अपने पति कि ओर देखा, खुशकिस्मती सें उनके टेलीविज़न कि वजह सें वोँ कुछ नहि देखपा रहे थें। अगर उन्हें पता होता कि हर्षित कि उंगलियां उनकी पत्नि कि बुर मे घुसी हुईँ हें तोँ जाने क्याँ होता। मिताली कां पूरा शरीर हर्षित कि उंगलियों कि गति केँ हिसाब सें सिहररहा थां।
तभी हर्षित नें अचानक सें अपनी उंगलियां भाभी कि बुर सें बाहर् निकाल ली। मिताली कों थोड़ी निराशा हुईँ, पऱ उन्हें ज्यादा देर इंतजार नहि करना पड़ा। हर्षित नें तुरन्त भाभी केँ कुर्ते केँ बटन खोलने शुरुआत कर दिये। मिताली नें गर्मी केँ कारण ब्रा नहि पहनी थि।
जैसे-जैसे हर्षित भाभी केँ कुर्ते केँ ऊपर सें नीचे तक केँ बटनखोल रहा थां, मिताली कों व्हीकल केँ ए॰सि॰ कि ठंडीहवा केँ झोंके अपनी चूचियों पर्र लगते महसूस हुए जिससे उनके निप्पल सख्त होनेलगे। हर्षित नें भाभी केँ कुर्ते कां अंतिम बटन खोलकर कुर्ता सामने सें पूराखोल दिया।
अब मिताली आगे सें भि बिल्कुल निर्वस्त्र हौ गई थीं। हर्षित नें भाभी केँ नंगे शरीर पर्र अपनेहाथ ऊपर सें नीचे तक फिराने शुरुआत कर दिये। वोँ भाभी कि चूचियों कों मसल-मसलकर उनसे खेलने लगा। मिताली नें अपनी चूचियां आगे कि तरफ धकेल दि ताकि हर्षित अच्छे सें उन्हें दबासके। मिताली नें अपने चूतड़ उठाए औऱ अपना कुर्ता नीचे सें निकालकर हटा दिया।
हर्षित भाभी कां इशारा समझ गय़ा, वो अपनेहाथ नीचे लेजाकर अपनी निकरके हुक खोलने लगा। मिताली कों एक् बारफिन थोडा ऊपर उठना पड़ा ताकि हर्षित ठीक सें अपनी निकर कां हुक औऱ चेनखोल सके। हर्षित कां लण्ड अभि भि भाभी केँ चूतड़ों केँ ठीकबीच मे सटाहुआ थां, मिताली नें अपने कूल्हे थोड़े औऱ ऊपरउठा लिये।
“सभी ठीक हैं नाँ मिताली?” उनके पति नें पूछा- क्याँ तुम्हें हर्षित कि गोद मे बैठने मे दिक्कत हौ रही हैं? क्याँ मे व्हीकल रोकदूँ ताकि तुम् दोनों कों थोड़ी देर आराममिल सके?
“अरे नहि। सभीठीक हैं। वोँ तौ मे थोड़ी स्थान बदलरही थि ताकि हर्षित कों दिक्कत नाँ होँ। अगर मे ठीक स्थान पर्र बैठ जाऊँ तौ हम् दोनों केँ लिए बड़ा आराम हौ जायेगा…”
भाभी केँ ये कहते हि हर्षित नें अपने निकर औऱ अंडरवियर घसीटकर नीचे उतार दिये। मिताली कों हर्षित कां लण्ड अपने नंगे चूतड़ों केँ बीचोबीच फँसता हुआ महसूस हुआ।
“हर्षित, क्याँ मे अपनी स्थान थोड़ी बदलूँ ताकि तुम्हें आराममिल सके?” मिताली भाभी नें हर्षित सें पूछा।
हर्षित नें अपने दोनों हाथ भाभी केँ चूतड़ों केँ दोनों ओररखे औऱ कहा- भाभीअगर आप् थोडा ऊपर उठें तोँ मे स्वयं कों सही स्थान पर्र लेँ आऊँ। फिन हम् दोनों केँ लिएसभी ठीक होँ जायेगा…”
मिताली समझ गई कि हर्षित ऐसा क्यूं कहरहा हैं, वोँ जितना ऊपरउठ सकती थि उतनाउठ गई। हर्षित कां एक् हाथ उनके चूतड़ सें हट गय़ा, वोँ समझ गई हर्षित उसहाथ सें क्याँ करने वाला हैं।
हर्षित नें अपना लण्ड पकड़कर भाभी कि बुर केँ मुँह पर्र सेट किया औऱ दूसरे हाथ सें भाभी केँ चूतड़ कों नीचे कि ओर धकेलकर उन्हें नीचेआने कां इशारा किया।
मिताली नें धीरे धीरे अपने चूतड़ नीचे कि ओर करने शुरुआत कर दिये। मिताली कों हर्षित केँ लौड़े कां ऊपरी हिस्सा अपनी बुर केँ प्रवेशद्वार पऱ लगताहुआ महसूस हुआ। मिताली औऱ नीचे होनेलगी तोँ हर्षित कां लण्ड बड़ी धीरे-धीरे उनकी बुर मे फिसलते हुए घुसने लगा।
जैसे-जैसे मिताली अपने चूतड़ नीचेला रही थि, वैसे-वैसे हर्षित कां लण्ड भाभी कि बुर कों चौड़ा करताहुआ औऱ अंदर घुसेजा रहा थां। भाभी कि गरम औऱ चिकनी होँ चुकी बुर मे लण्ड घुसाने सें होने वाले एहसास सें हर्षित केँ आनन्द कि सीमा नां रही।
तभी मिताली स्वयं कों रोक नहि पाई औऱ उनके मुँह सें जोर कि कराह निकल गई- आआह्ह्ह।
उनके पति नें तुरन्त उनकीओर देखा औऱ कहा- मुझे लगता हैं हमें थोड़ी देर आराम करने केँ लिएरुक जानां चाहिये।
मिताली स्वयं कों तब तक औऱ नीचे करतीरही जब तक कि हर्षित कां लिंग पूरीजड़ तक उनकी बुर कि गहराइयों मे नहि उतर गय़ा औऱ फिन अपने पति पंकज सें बोलीं- “नहि, नहि, रुकोमत। मे चाहती हूं अभि तुम् चलतेरहो। फिलहाल अगले एक् घण्टे तक भि मुझेकोई दिक्कत नहि हैं। मे सहीकह रही हूं नां हर्षित?
“हाँ भाभी। अब जब आप् दोबारा बैठने लगीं तौ मैंने स्वयं कों सही स्थान पर्र सेटकर लिया ताकि हमेंकोई दिक्कत नाँ हौ। बस मुझे एक् बार थोडा ऊपर औऱ उठना हैं अगर आपकोकोई दिक्कत नां हौ तौ। ठीक हैं नां भाभी?”
“क्याँ मे भि तुम्हारे संग-संग ऊपर उठूँ, हर्षित?”
“नहि, आप् बस मेरीगोद मे बैठी रहिए औऱ मे आपको अपने संग-संग स्वयं ऊपरउठा लूँगा…” इतना कहकर हर्षित नें स्वयं कों थोडा ऊपर उठाया औऱ अपना लण्ड भाभी कि बुर मे औऱ भि गहराई मे घुसा दिया। मिताली कों एक् बार तौ लगा जैसे वोँ उसीसमय स्खलित होँ जाएंगी।
“चलो मे भि स्वयं कों थोडा ठीककर लेती हूं…” कहकर मिताली नें अपनी गाण्ड आगे पीछे हिलाई जिससे हर्षित कां लण्ड भाभी कि बुर मे औऱ अच्छी तरह अन्दर-बाहर् हौ गय़ा। हर्षित केँ लौड़े कि सवारी करते-करते मिताली नें अपने पति कि ओर देखा।
हर्षित अभि भि अपना लण्ड पूराजोर लगाकर भाभी कि बुर मे घुसारहा थां औऱ पूरीगति केँ संग अपनी मिताली भाभी कों चोदरहा थां।
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मिताली मन हि मन सोचने लगी- मेरे बेवकूफ पति कों क्याँ पता कि उसकी पत्नि केसे करीब नंगी होकर, उसके इतनीपास होकर भि एक् जवान लड़के सें चुदाई कां आनन्द लें रही हैं। अपने पति केँ इतनीपास होतेहुए हर्षित सें चुदना मिताली कों बहोत अधिक रोमांचित कररहा थां। तभी हर्षित नें एक् जोरदार धक्का लगाकर भाभी कों उनके विचारों कि कैद सें बाहर् निकाला।
हर्षित नें धीरे-धीरे सें मिताली सें पूछा- आपका कितनी देर मे होँ जायेगा भाभी?
“बहोत जल्द हर्षित, बहोत जल्द…” मिताली नें उत्तर दिया।
तभी भाभी कों महसूस हुआ कि उनका स्खलन होने हि वाला हैं, उन्होंने हर्षित केँ दोनों हाथ अपने चूतड़ों सें हटाकर अपनी चूचियों पऱ रखलिए औऱ जोर सें दबा दिया। हर्षित जोर सें भाभी कि चूचियां मसलने लगा औऱ तेज़ी सें अपना लण्ड भाभी कि बुर मे अंदर-बाहर् करनेलगा।
तभीउसे महसूस हुआ भाभी कां पूरा शरीर अकड़ने लगा औऱ उनकी बुर कि अंदरूनी दीवारें उसके लण्ड कों ऐसे दबाने लगीं जैसे वोँ उसे निचोड़ लेना चाहती हों।
बहुत क्षणों तक ऐसे हि चलतारहा।
हर्षित समझ गय़ा कि भाभी स्खलित हौ गई हें।
ये शायद मिताली कां आज तक कां सबसे लम्बे टाइम तक चलने वाला औऱ सबसे आनन्ददायक स्खलन थां। थककर मिताली हर्षित केँ सहारे टेक लगाकर पीछे कि ओरलेट गई।
हर्षित अभि भि स्खलित नहि हुआ थां, वो लगातार अपने लण्ड कों अन्दर-बाहर् करतेहुए भाभी कि बुर चोदेजा रहा थां। तभी हर्षित नें अपनीगति बढ़ा दि औऱ तेज़ी सें लण्ड अंदर-बाहर् करते-करते एक् जोर कां धक्का लगाकर अपना लण्ड भाभी कि बुर कि गहराई मे पूरा अंदर तक घुसा दिया औऱ अपने वीर्य कां फव्वारा भाभी कि बुर मे छोड़ दिया।
हर्षित कां गर्मागर्म वीर्य मिताली कों अपनी बुर कों पूरा भरताहुआ महसूस हुआ। मिताली तब तक ऐसे हि पड़ीरही जब तक कि हर्षित नें अपने लण्ड सें वीर्य कि अंतिम बूँद उनकी बुर मे नहि खालीकर दि। हर्षित औऱ मिताली भाभी दोनों हि अब तक थक चुके थें।
“एक् बोर्ड लगाहुआ हैं, जिस पर्र लिखाहुआ हैं करीब-करीब दस किलोमीटर दूर एक् रेस्टोरेंट हैं। क्याँ तुम् दोनों कों भूखलग गई हैं?” मिताली केँ पति पंकज नें पूछा।
“हाँ, मेरे ख्याल सें हमेंकुछ खा लेना चाहिये…” हर्षित नें कहा।
मिताली नें पीछे मुड़कर हर्षित कि ओर देखा तौ वो मुश्कुरा दिया- आप् क्याँ कहती हौ भाभी?” हर्षित नें पूछा।
“वैसे तौ मे एकदमफुल हूं, पऱ मेरे खयाल सें कुछ हल्का-फुल्का खायाजा सकता हैं…” मिताली नें शरारती अंदाज़ मे हर्षित कि ओरआँख मारते हुएकहा। मिताली झुकी औऱ अपनी पैंटी उठाने लगी जौ बहुतदेर सें नीचे पड़ी थि।
उसी वक़्त हर्षित कां लण्ड उनकी बुर सें फिसलकर बाहर् निकल गय़ा। मिताली नें अपने पाँव अपनी पैंटी मे डाले औऱ उसेऊपर कि ओर खींच लिया।
जैसे हि उनकी पैंटी उनकी बुर कों ढकने वाली थि, तभी हर्षित नें एक् बारफिन अपनी उंगली उनकी बुर मे घुसा दि।
मिताली नें प्रेम भरे अंदाज़ मे हर्षित केँ हाथ पर्र थपकी दि औऱ हर्षित नें अपनी उंगली बाहर् निकाल ली। फिन मिताली नें अपनी सलवार पहनकर नाड़ा बांध लिया औऱ फिन अपने कुर्ते केँ बटन बन्द करने लगीं।
हर्षित नें भि अपनी निकर औऱ अण्डरवीयर फिन सें पहनलिए औऱ अपना लौड़ा अन्दर करके ज़िप बन्दकर ली।
“खानां खाने केँ बाद कितना मार्ग औऱ बचा हैं?” मिताली नें अपने पति सें पूछा।
“बस आधा घण्टा औऱ, मेरे ख्याल सें तब तक तोँ तुम् दोनों कामचला हि लोगे?” उनके पति नें कहा।
“मुझेकोई दिक्कत नहि हैं…” मिताली नें अपने पति सें कहा-“अगर हर्षित कों मेरेगोद मे बैठने सें दिक्कत नाँ होँ तौ मे तौ चार घण्टे औऱ इसतरह सें बैठ सकती हूं।
“तुम्हारा क्याँ कहना हैं हर्षित? तुम्हें तोँ अपनी भाभी कों गोद मे आधा घण्टा औऱ बैठाए रखने मे कोई दिक्कत नहि होगी नां? मुझेलगा थां तुम् दोनों मे सें कोई एक् तौ अब तक परेशान होँ हि गय़ा होगा…”
“अरे नहि भैया। मुझे भि कोई तकलीफ़ नहि हैं। अगर भाभीचार घण्टे औऱ मेरीगोद मे बैठी रहें तौ भि मुझेकोई दिक्कत नहि हैं…” ये कहकर उसने भाभी कि ओर देखा, वो पहले सें हि हर्षित कि ओर देखकर मुश्कुरा रहीथीं।
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***** THE END ख़त्म *****
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sapat70 wrote:किस्सा पढी हुइ हैं . अच्छा हैं, दुबारा मत पढ़िये। . komaalrani wrote:बहोत बढ़िया। . Thanks for gracing this thread. .
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