छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 Stories Complete (2015)
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छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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गुड़िया सें बन गई चुदक्कड़ मुनिया
लेख़िका: गुड़िया
सबसे पहलेसब पाठकों कों मेरा प्यार भरा प्रणाम। मेरानाम गुड़िया हैं औऱ मे पंजाब कि रहने वाली हूं। जिला मे नहि बता सकती, केवल इतनाजान लीजिये कि मे ‘मस्त पंजाबन’ हूं। मेरे गाँव केँ लड़कों नें मेरानाम ट्रैक्टर कि ट्राली रख दिया हैं। वे कहते हें कि मे उनमें सें हूं जिसेकोई भि, कभी भि अपने ट्रैक्टर केँ पीछे डालकर लेँ जा सकता हैं।
मुझे उनकेऐसे कटाक्ष हमेशा हि रोमांचित करते रहते हें।
मेरी ख़ूबसूरती देखते हि बनती हैं। अपने मुँह सें स्वयं कि तारीफ तौ नहि करनी चाहिए, मगर मुझेऐसा हि जिश्म मिला हैं। रंग मेरा गोरा नहि बल्कि सांवला हैं, मगरऊपर वाले नें जोँ जिश्म मुझे दिया हैं, जिस सांचे मे मुझे बनाया हैं, उसपरहर गबरू जवान मरता हैं। पतली सि मटकती कमर हैं मेरी। दिलों कों हिला केँ रख देने वाले मस्त गोल-गोल उभरेहुए चूतड़। जीहाँ पूरे गोल-गोल, मानो किसी नें दो खरबूजे रखकर उसपर पैंटी डाल दि होँ। मगर इन्हें कौन समझाए कि मेरेपास तोँ ये कुदरत कि देन हैं। मेरे मम्मे देखकर अगर किसी जवान कां हथियार खड़ा नाँ हौ तौ मेरानाम गुड़िया नहि।
हर मर्द, हर लड़का, यहा तक कि बुजुर्ग भि मेरी मारना चाहतें हें। मैंने भि शुरुआत सें हि जवानी केँ मजे दोनों हाथ खोलकर चखवाए हें औऱ मजेलिए हें। बातउन दिनों कि हैं जब हम् गाँव मे रहते थें। आप् सब तौ जानते हि हें कि गाँव मे रहकर जवानी दबाये नहि दबती। पिताजी औऱ चाचा जब सें जर्मनी गए थें, तब सें हि मैंने घऱ मे कईऐसे दृश्य देखे जिन्हें एक् लड़की कों अपनी विवाह केँ बाद देखने चाहिए। मां औऱ चाची दोनों कि तौ भट्टी हि गर्म रहती थां, बाकी तोँ आप् समझ हि गए होंगे।
हम् तीन बहनें औऱ दो भइया हें। मेरा एक् भइया मुझसे डेढ़साल बड़ा हैं औऱ एक् भइया हम् भइया बहनों मे सबसे छोटा हैं। बड़ा भइया डलहौजी हास्टल मे थां औऱ छोटा भइया एक् अच्छे विद्यालय मे पढ़ता थां। मगर हम् लड़कियों कों सरकारी विद्यालय मे डाला गय़ा थां।
मेरी चाचाजी कि भि दो लड़कियां औऱ एक् लड़का हैं जोँ कि डलहौजी हास्टल मे पढता थां। हमारी गाँव मे पुश्तैनी ज्यादाद हैं औऱ बहुत अच्छा काम धंधा हैं। हम् बहनों कों घऱ केँ कामों मे हाथ बंटाना पड़ता थां। हम् सब केँ काम बाँधदिए गए थें। जैसे कि खेतों मे कामकर रहे लोगों केँ लिए खानां बनाना वगरमचाय बनाना आदि।
वैसे तौ सारे मजदूर खानां लेने स्वयं हि आते थें मगर कभी-कभी खेतों मे जाकरगरम चाय पानी पहुँचाना भि पड़ता थां। इसलिये हम् बहनें बारी-बारी सें खेतों मे जाकरगरम चाय पानी पहुँचा आते थें। एक् दोबार जब मे खेतों पऱ गई तौ मैंने गौर किया कि सबकी नज़र मेरी छाती पऱ हि रहती थि, जोँ इतनीकम उम्र मे विकसत हौ रही थें। उनकी तिरछी नज़र सें मेरे जिश्म मे अजीब सि सिहरन उठने लगती थि। अब तौ खेतों मे कामकर रहेलोग मुझ पऱ कटाक्ष भि कसनेलगे थें।
मुझेये सभी बड़ा अच्छा लगता थां। मैंने एक् बार एक् जवान मजदूर केँ संग चाची कों गन्ने केँ खेतों मे औऱ मोटर वाले कमरे मे घुसते भि देखा थां औऱ अबउसी जवान मजदूर कि नजरें मां औऱ चाची कि जवान हौ रही बेटियों पर्र जानेलगी थीं। मेरी बड़ी बेहन केँ तौ कुछ लड़कों केँ संग चक्कर चल पड़े थें। येसभी देख-देखकर मेरा भि मन मचलने लगा थां औऱ मेरामन गन्दा होँ चुका थां।
अक्सर जब हम् बहनें अकेली होतीं तोँ आपस मे लिपट -लिपटकर अपने मम्मे दबवाने औऱ दबाने केँ मजे लेतीं थीं। मेरी बड़ी बेहन औऱ मेरे चाचा जी कि बड़ी लड़की कों तौ मैंने कईबार एक् दूसरे कि बुर पर्र हाथ फेरते भि देखा थां, वे दोनों एक् दूसरे केँ दानों कों चुटकी मे लेकर मस्ती केँ संग रगड़ने लगती थि औऱ ये करते वक्त उनकी आँखें मुंद जाती थि। येसभी देखकर मेरे भीतर भि वासना कि हल्की चिंगारी लग चुकी थि। एक् दिन मे खेतों मे मोटर पऱ कामकर रहे मजदूर कों गरमचाय औऱ खानां पकड़ाने गई।
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यार आपकी चाय्स हमेशा बहोत हि उम्दा होती हैं
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वोँ उसदिन अकेला थां औऱ भैंसों केँ लिए चाराकाट रहा थां। मुझे देखकर उसने मशीनबंद कर दि औऱ मेरीतरफ खानां लेनेआया। मगरये क्याँ उसने तोँ खानां पकड़ने केँ बहाने मेरी कलाई हि पकड़ली।
मैंने कहा-“ये क्याँ कररहे हौ?”
वोँ बड़े हि अल्ल्हड़पन केँ संग बोला- “तेरी कलाई पकड़कर देखरहा हूं कि जवानी वाली चमड़ी आई भि हैं याँ नहि…” मे छटपटा कर उससे अपनाहाथ छुड़ाने कि कोशिश करनेलगी मगर उसने खाने कां डिब्बा किनारे रखकर मुझे अपनीतरफ खींचा।
वोँ बोला-“चली जानां, आज तेरेघऱ पऱ कोई भि तौ नहि हैं। सभी तौ विवाह मे गएहुए हें। तुँ अकेली वहा क्याँ करेगी?” औऱ इतना कहतेहुए उसने मेरे उभरते हुए अनारों कों ऊपर सें रगड़ा औऱ मुझे बाँहों मे जकड़ लिया औऱ मेरे होंठ चूमने लगा। मे इस अकस्मात हमले कों झेल नहि पाई। हालाँकि मुझेइन सभी चीजों कां ज्ञान थां मगर सम्भोग केँ बारे मे मेरा ज्ञान अभि पूरा नहि थां।
वोँ मेरे उभारों कों दबाते हुए बड़बड़ाया- “चुपकर साली। वोँ कौन सि दूध कि धुली हें। तेरी मम्मी औऱ चाची दोनों कों ठोंक चुका हूं औऱ वोँ भि उनकीपहल पर्र…” फिन उसने मेरी कमीज केँ बटन खोलते हुएकहा- “अभि कुछ नहि करूँगा बसऊपर सें हि एक् बारमजे लेनेदे। मैंने इतनी कच्ची उम्र कि कली कों कभी नंगा नहि देखा हैं। देर नां कर औऱ मुझेऊपर सें हि हलके-फुल्के मजे लेनेदे…” इतना कहतेहुए उसने मेरी कमीज उतारनी शुरुआत कर दि औऱ फिन एक् हि लम्हा मे उसने मेरी कमीज कों मेरेबदन सें अलगकर दिया।
मैंने अपने अनारों पर्र अभि ब्रा डालनी शुरुआत नहि किया थां, इसलिये कमीज केँ नीचेकुछ भि नहि थां।
मेरे उभरते हुए अनारों कों देखते हि उसका मुँह खुला कां खुलारह गय़ा औऱ उसनेकहा- “हाय कितनी मस्त हैं तेरी जवानी…”
जब उसने मेरेदाल केँ दाने जैसे चूचुकों कों चुटकी मे लेकर मसला तोँ मानो मुझे स्वर्ग कां आनंदमिल गय़ा। उसने अपनासर झुकाकर अपने होंठों सें मेरे चूचुक चूसने शुरुआत करदिए। मेरेतीस इन्ची अनार उसके मुँह मे पूरे आँ रहे थें। वोँ कमालकर रहा थां। मुझे बहोत-बहोत-बहोत हि अधिक मज़ा आँ रहा थां। जीहाँ दोस्तों, इतना मज़ा तोँ मुझेआज भि नहि आता जितना मज़ा मुझेउस पहलीबार मे आया थां।
मे उसके बालों मे हाथफेर रही थि औऱ वोँ मेरे चूचुक चूसरहा थां। मेरेलिए ये एक् नया अनुभव थां। उसने चूचुक चूसते हुए सलवार कां नाड़ा खींच दिया औऱ मेरी सलवार नीचेसरक गई। मैंने आज सलवार केँ नीचे भि कुछ नहि पहना थां। हल्के भूरे बालों सें भरी मेरी गुलाबी होंठों वाली बुर देखकर उसका बुराहाल होँ गय़ा। औऱ जब उसने मेरी बुर केँ होंठ कों अलग करके उसपरहाथ फेरा तौ…
क्या बात है… मे क्याँ बताऊँ, मे सिसकने लगी। मे अपनेहोश खोनेलगी थि औऱ मैंने कहे- “काले, छोड़दे मुझे। कुछ कुछ होता हैं…”
“मे तेरी नहि लूँगा, ये वादारहा मेरा। बस तूँ अपनी मर्जी सें मुझेमजे लेनेदे। वरना मे जबरदस्ती लें हि लूँगा…”
वैसे मुझे बहोत मज़ा आँ रहा थां। उसने मुझे बोरियों सें बने तख़्त पऱ लिटाया औऱ मेरे टांगो केँ बीच मे स्वयं बैठ गय़ा। उसने अपनीदो उँगलियों सें मेरे बुर केँ होंठ फैलाए औऱ अपनीजीभ उसपररख दि। मे तौ पागल सि होँ रही थि। वोँ अपनीजीभ सें मेरी बुर कों चाटरहा थां, उसकी खुरदरी जीभ मेरी कोमल बुर पर्र रगड़खा रही थि औऱ मेरी बुर अजीब सि अकड़न केँ संग फुदकरही थि।
उसनेकहा- “कितनी साफ सुथरी कुँवारी बुर हैं। पहलीबार एक् कच्ची लड़की कि बुर देखरहा हूं…” औऱ वोँ मजे लें-लेकर मेरी बुर कों चूसने लगा। इसी बीच उसने अपना पजामा उतार दिया औऱ फिन अपना कच्छा भि उतार दिया।
हाय राम…जब मैंने उसका कालानाग जौ पहले किसी चमड़ी केँ हिस्से कि तरहलटक रहा थां, उसे अपनासर उठाते हुए देखा, मेरी तौ जान हि निकल गई। फिन उसका वोँ कालानाग देखते हि देखते एक् लोहे कां डण्डा जैसा होँ गय़ा। उसने मेराहाथ पकड़ा औऱ अपना लौड़ा पकड़ाकर बोला- “लें मेरीजान… इसे पकड़कर इसकेसंग खेल। एक् नां एक् दिन तौ तेरी इसको अपनी बुर मे डलवाना हि पड़ेगा। अगर मे नहि डालूँगा तौ कोई औऱ डाल देगा। विवाह केँ बाद तौ तेराखसम रहम नहि खायेगा। इसको तोँ फटना हि होगाआज नहि तौ कल। चलचूम लेँ इसे औऱ मजे लेतेहुए मजेदे…”
मैंने उसके लौड़े कों सहलाकर देखा औऱ फिन मुँह मे लेने कि कोशिश कि। मगर वोँ लौड़ा थां कि मेरे मुँह मे समां नहि रहा थां।
मे बड़ी असमंजस मे थि। मुझेसमझ मे नहि आँ रहा थां कि कालाकौन सें पानी कां बातकर रहा हैं। इसी उधेड़बुन मे मैंने उसे पूछा- “पानी… कैसा पानी निकालना हैं?”
वोँ मुझे समझाते हुए औऱ मेरे मम्मे दबाते हुए बोला-“अरे मेरीजान… इसके अंदर सें पानी निकलता हैं, जिससे बच्चा होता हैं। अगरकल कों तेराखसम अपना पानी तेरी बुर केँ अंदर निकालेगा, तब जाकर तूँ मां बनेगी। चलचाट लेँ इसे…” काला अपना लण्डहाथ मे लेकर मेरे चेहरे केँ लगभग बैठकर मुठ मारने लगा। वोँ मेरे होठों सें अपने लण्ड कों रगड़-रगड़कर मुठमार रहा थां।
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अचानक हि वोँ उठा औऱ नीचे जाकर मेरी बुर पऱ अपना लण्ड सटाकर घिसने लगा। मे उसकीइस क्रिया सें मचलउठी। मुझे अजीब सां मज़ाआने लगा। वोँ मेरी हालतसमझ रहा थां औऱ इतने मे हि उसने मुझसे पूछा- “थोडा घुसा केँ दिखाऊँ?”
मे कुछ नहि बोलपाई। उसनेइसे मेरी रजामंदी मानकर मेरी बुर केँ होंठ फैलाकर हल्के सें अपने लण्ड कां टोपा मेरी बुर पऱ रख दिया औऱ एक् हाथ सें मेरे चूचे दबाने लगा औऱ दूसरे हाथ सें बुर केँ ऊपर उभरे दाने कों रगड़ने लगा। उसने अपने लौड़े पऱ औऱ मेरे बुर पर्र थोडा थूक लगाया औऱ लौड़े कों झटका दिया।
दर्द केँ मारे मेरी तौ जान हि निकल गई थि। आखिर एक् कुंवारी कन्या कि सीलबंद बुर जौ थि।
उसने मुझे दिलासा देतेहुए कहा-“डर मत… घुसेगा नहि…” वोँ मेरी बुर पर्र अपना लण्ड रगड़कर मुठ मारने लगा औऱ फिन एक् बारजोर सें झटकालगा दिया। उसका टोपा मेरी बुर मे फँस गय़ा। दर्द केँ मारे मे रोनेलगी। उसनेआगे डालने कि कोशिश नहि कि, वहींरुक गय़ा औऱ आगे-पीछे करनेलगा औऱ संग हि मेरे दाने कों बराबर रगड़ने लगा।
पूरा खिलाड़ी थां वोँ।
मैंने सर उठाकर देखा कि मेरी गोरी बुर पर्र उसका मोटा काला लौड़ा अटकाहुआ थां। उसने एक् हाथ मेरे मुँह पऱ रख दिया औऱ एक् औऱ झटका मारकर थोडा औऱ आगे सरकाया। मुझेऐसा लगरहा थां जैसेआज तौ मैंने मर हि जानां हैं। वो बड़ा हि माहिर थां। उसी अवस्था मे वोँ आगे-पीछे करनेलगा तौ मुझे राहत मिली। उसनेपास हि पड़े अपने कच्छे सें मेरी बुर कों पोंछा औऱ कहा-“देख, तेरी झिल्ली फट गई जान…”
मैंने उसेयाद दिलाया कि उसने वादा किया थां कि वोँ कुछ नहि करेगा।
वोँ बोला-“बस होँ गय़ा जान…अब बस मेरामाल निकाल दूंगा औऱ आगे नहि करूँगा…” इतना कहकर उसनेढेर साराथूक लगाया औऱ लौड़ा औऱ अंदर घुसा दिया। अब उसने एक् औऱ झटका मारा तोँ उसका लण्ड मेरी बुर मे आधाघुस पाया। औऱ उसी अवस्था मे उसने मुझे चोदा। थोड़ी देर अपनीकमर चलाने केँ बाद उसने अपने लौड़े कों मेरी बुर केँ अन्दर सें निकाला औऱ अपनेहाथ मे थामकर तेजी सें हाथ चलनेलगा। अचानक हि तेजधार केँ रूप मे कुछ निकला, गरम-गरम सां पानी। उसने वोँ सारा पानी मेरी बुर केँ ऊपर निकाल दिया औऱ मुझे चूमता हुआ मेरेऊपर लुढ़क गय़ा।
कुछदेर बाद उसनेकहा- “रुक… तुम्हारी तरफ तोँ मज़ा दिया हि नहि। मज़ा दूंगा तभी तौ आगे स्वयं हि मरवाने आएगी…” इतना कहकर उसने अपनी जबान सें दाना रगड़ना चालू किया।
थोड़ी-थोड़ी देर मे ऊँगली भि कर लेता थां वोँ। मे तोँ हवा मे उड़ने लगी। एकदम सें मुझेऐसा लगा जैसे मे आसमान मे उड़रही हूं। औऱ फिन एक् सैलाब सां आया औऱ मे आसमान सें नीचेगिर पड़ी। मुझे इतनामजा आया जिसे मे बयान नहि कर सकती शब्दों मे।
उसने मुझसे कपड़े पहन लेने कों कहा औऱ बोला-“जा औऱ किसी सें मत कहनाकुछ…”
मेरीआधी बुर खुली थि अभि,
मे आधी कुंवारी थि। एक् तीखीटीस मेरी टांगों केँ बीचउठ रही थि। अब तौ वोँ जब भि घऱ खानां-वाना लेनेआता, मौकादेख मेरे मम्मे दबाने लगता औऱ चूचुक चुटकी सें मसलने लगता। उस बात कों महीना भर हौ गय़ा। मेरी छाती मे एकदम सें बदलाव आनेलगा। बहुत कसी-कसी सि रहनेलगी। महीने बीत जाने केँ बाद भि उसने मुझे पूराकभी नहि चोदा। मगर उसके हाथों सें मेरे मम्मे बड़े होँ गए, मुझे ब्रा डालना शुरुआत करना पड़ा। उधर मेरा शरीरभर गय़ा औऱ अब मेरे ख्यालों मे बदलाव आनेलगे। लौड़ा तोँ मे कब सें पकड़ती सहलाती आँ रही थि, चूस भि रही थि। मगर चुदवाने कां मौक़ा नहि मिल पाया थां अभि तक।
एक् दिन मे घऱ पर्र अकेली थि। कालू खानां लेनेआया। उसे नहि मालूम थां कि मे अंदर अकेली हूं। मगर मे तोँ उसका प्रतीक्षा कररही थि, जानबूझ कर मे खानां देने नहि गई थि क्योंकी मे चाहती थि कि वोँ अन्दर आये। जब कालू खानां लेनेआया तबउसे ये नहि मालूम थां कि मे अन्दर अकेली उसका उन्ताजार कररही हूं। मे चाहती थि कि वोँ आये औऱ आज मुझे महिला बनने कां सुखदे। मेरेमन मे आजकुछ अजीब सि उथल पुथलचल रही थि।
कालू जैसे हि घऱ केँ दरवाजे पऱ आया, उसने हमेशा कि तरह मेरी कलाई पकड़ली। मैंने अपने दूसरे हाथ सें उसकी बांह पकड़कर उसको अन्दर खींच लिया औऱ कहा- “आँ भि जा मेरे कालू। आज घऱ पर्र कोई नहि हैं। आज तौ मे अपने कालू कों अपने हाथों सें खानां खिलाऊँगी…” इतना कहकर मे उससे लिपट गई।
वोह मुझे चूमने लगा। पहले तोँ वोँ मेरे गालों पऱ चुम्मियां लेनेलगा औऱ फिन धीरे धीरे उसने अपने होंठ मेरे अधरों पर्र रखदिए। मे तौ पहले सें हि गरम थि। सो मे उसका कुरता उतारने लगी। फिन मैंने अपनी कमीज उतार दि। मेरी ब्रा मे कैद मेरे मम्मे देखकर कालू भि जान चुका थां कि पहले छूटी अधूरी किस्सा कों पूरा करने कां समय आँ गय़ा हैं।
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औऱ aage badhyo kahani ko,बहोत kamuk hain,new style कि hain
Jagdish
dosto, New kahani iss poste. Now, its your turn. . .
Vineeta
bhay aisi padhaai sab स्थान hu jaaye too maze hu jayen
Sonaal
ऐसी पढ़ाई तोँ होती रहनी चाहिए भइया एक् औऱ हॉटकथा आपकीपढ़ करमजा आँ गय़ा
Poonam
rangila wrote:ekdum hot h bhay komaalrani wrote:Bahoot hi Badhiyaa h ...Mast ... Thanks dosto, Enjoy the new kahani "मेरे मित्र कि पत्नि" . .
Susmita
supar story h mitr
Shaleenee
हंगामेदार किस्सा हैं भइया
Virendra
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
Deeksha
Rohit Kapoor wrote:supar story h mitr jay wrote:हंगामेदार कथा हैं भइया rajsharma wrote:अति उत्तेजक रचना हैं साथी . शुक्रिया दोस्तों, संग मे बने रहने केँ लिये। अगली स्टोरी प्रस्तुत हैं। . .