छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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“अब कहां वोँ बात…” उन्होंने एक् लम्बी सांस लेतेहुए कहा औऱ मेरी कमीज उतारकर मेरी कालेरंग कि ब्रा मे कैद मेरे कबूतरों कों आजादकर दिया। मेरे फडफाड़ते हुए कबूतरों कों देखकर वोँ बोले- “क्याँ मस्तमाल हैं तेरेपास…” औऱ इतना कहकर वोँ मेरे अनारों कों मसलने लगे। कुछ देर मसलने केँ बाद उन्होंने मेरे चूचुक कों अपने मुँह मे भर लिया औऱ चूस-चूसकर मेरे चूचुक खड़ेकर दिए।
“हाय रे फूफाजी जी… मारोगे क्याँ? बड़ा मस्त चूसते हौ आप्…”
“चलअब मेरा लौड़ा हिला औऱ चूस इसको…”
“स्वयं पासआकर चुसवा लो नं…”
उन्होंने स्वयं अपना लौड़ा पकड़कर मेरे मुँह मे डाल दिया औऱ मे चूमने लगी उनके मस्त लौड़े कों।
“हायरे रे गुड़िया रानी, क्याँ चूसती हौ…” फिनकुछ देर चूसवाने केँ बाद बोले- “साली मुँह मे झड़वा देगी क्याँ?” इतना कहतेहुए उन्होंने मेरी टाँगें फैला दि।
मैंने भि अधिक नाटक नां करतेहुए मार्ग साफकर दिया। उन्होंने अपने लौड़े कों पकड़कर निशाने पऱ टिकाकर एक् करार झटकालगा दिया। उनका लौड़ा मस्ती मे मेरी बुर मे झूलने लगा थां।
“मज़ाआया रानी…” उन्होंने अपने धक्कों कों संयमित करतेहुए पूछा।
“हाँ फूफाजी… औऱ तेज रगड़ा लगाओ नाँ…”
“कुतिया क्याँ हाल हैं तेरा? साली सुहागरात पर्र पकड़ी जायेगी। कुछ छोड़दे उसकेलिए भि। तेरी उम्र मे तोँ तेरी फूफी मेरा लौड़ा अपनी बुर मे लेकर कराहने लगती थि, मगर तुँ तौ बड़ी कमीनी हैं रे। औऱ जोर सें धक्के लगाने कों कहरही हैं…”
“हाय फूफाजी रगड़दो। रगड़दो मुझे। औऱ… औऱ तेज चोदो मुझे…” मेरे मुँह सें आवाजें निकलरही थि औऱ फूफाजी मुझे तेजी सें चोदने लगे थें।
लगभगआधे घंटे केँ कोहराम केँ बाद हम् दोनों फारिग हुए औऱ एक् दूसरे केँ जिश्म कों जकड़कर एक् ओर लुढ़क गए।
फूफाजी बोले- “साली मैंने तौ सोचा थां कि तुँ मोटरघऱ मे कालू सें चुदकर ठंडी होँ गई होगी। मगर तूँ तौ पक्की हरामन हैं रे…”
“भतीजी किसकी हूं। सच बताना मे अपनी चाची सें भि अधिक मस्त हूं न्…” मैंने उन्हें छेड़ा।
“क्याँ मतलब हैं तेरा?” वोँ गुर्राए।
“वही जोँ पूछा हैं?”
“किसने कहा तुझसे येसभी?”
“बस बताने वाले नें बता दिया फूफाजी…”
“बहोत तेज हैं रे तुँ छोरी। चल एक् औऱ दौर हौ जाए…” इतना कहकर वोँ मेरी गाण्ड पर्र हाथ फेरने लगे औऱ कहा- “तेरी बुर मारते समय देखा थां, तेरी गाण्ड बड़ी चिकनी हैं, बोल मरवाएगी?” ये कहकर वोँ अपनेहाथ सें मेरी गोलाइयों कां जायजा लेतेहुए मेरी गाण्ड सहलाने लगे।
मैंने उन्हें समझाया- “फूफाजी… अभि सभीआने वाले हें। सो स्वयं कि गाण्ड मत फड़वा लेना फूफी सें…”
मगर वोँ कहां मानने वालों मे सें थें। उन्होंने जबरदस्ती अपना मुरझाया हुआ लण्ड मेरे गाण्ड पर्र सटा दिया औऱ अन्दर डालने कि कोशिश करनेलगे। मगर उनका इतनी जल्द खड़ा नहि होँ पारहा थां। आखिरहार मानकर वोँ मुझे अपने कपड़े पहनने कों बोलकर अपने कपड़े ठीक करनेलगे।
“अब तोँ तुँ मेरी हि हैं गुड़िया, आज नहि तौ फिनकभी सही, अब मे तुम को नहि छोड़ने वाला…”
थोड़ी देर मे कालूघऱ पर्र गरमचाय लेनेआया। उसने मुझसे सुभह वाले किस्से केँ बारे मे पूछा-“कर लिया अपने फूफाजी कों अपने गुनाहों मे शामिल…”
मे शरमा गई औऱ शरमाकर उससे बोलि- “चलहट कुत्ता, जागरम चाय लेकर, मे आती हूं खेतों पर्र…”
“क्यूं अभि भि बुर कि आग शांत नहि हुईँ क्याँ जोँ दोबारा वहा आएगी…” उसने मुझे छेड़ा- “फाड़ डालेंगे तेरी बुर कों। आज तोँ शंकर केँ अलावा कामा भि हैं वहा…”
मे थक चुकी थि औऱ 3 लौड़ों कों एक् संग सँभालने कि ताकत अभि नहि थि मेरी। इसलिये मैंने गरमचाय बनाकर उसे पकड़ाकर उसे रुखसत किया। इस किस्से केँ बाद तौ मे हर किसी सें चुदवाने लगी औऱ खुले मे गफ्फे लगाने लगी। औऱ इसतरह मे गुड़िया सें चुदक्कड़ मुनिया बन गई।
इसकेबाद तोँ बस मे हरतरह सें सेक्स कां आनंद लेनेलगी औऱ जब मे शहरआई तोँ मैंने हदपार कर दि थि।
खैर वोँ सभी अगले स्टोरी मे।
तोँ दोस्तों इसतरह सें मे एक् चुदक्कड़ मुनिया बन गई।
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***** THE END ख़त्म *****
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ekdum hot h bhay
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मेरेयार कि पत्नि
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लेख़क - नवीन सिंह
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दोस्तों, मे जोँ स्टोरी बताने जारहा हूं इसको पढ़कर शायद आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी क्यूंकि शायदऐसा अनुभव आपने पहलेकभी नहि सुना होगा।
क्याँ कोई पति अपनी पत्नि कों किसी औऱ सें चुदते हुआ देख्ना चाहेगा?
नहि नाँ… पर्र ऐसा होता हैं…
मे आज आपकोऐसी हि एक् स्टोरी बताने जारहा हूं।
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मेरानाम नवीन हैं, मे 29 साल कां विवाहित पुरुष हूं मेरी बीबी कि उम्र 27 साल हैं। मे राजस्थान मे एक् छोटे कस्बे झोटवाड मे रहता हूं। मेरी विवाह कों चारसाल हौ गए हें, मेरा वैवाहिक जिंदगी बहोत मस्तचल रहा हैं, मेरी पत्नि सुजाता मुझसे बहोत खुश हैं औऱ मे उसकेसंग बहोत खुश हूं।
मेरा एक् यार रचित भि मेरी हि उम्र कां हैं। वो मेरापरम साथी हैं। रचित हमेशा सेक्स कि बात केँ लिए उतारू रहता हैं। हमारे जिंदगी कि कोईबात एक् दूसरे सें छुपी हुई नहि हैं, हमनेरात कों क्याँ-क्याँ किया, एक् दूसरे कों बताते हें, तोँ जाहिर सि बात हैं कि सेक्स कि बात भि खुलकर हि होती हैं। उसको मेरी पत्नि कि बदनाकृति पता हैं, मुझे उसकी पत्नि बबीता कि कि उसके कहां तिल हैं औऱ मेरे बीबी केँ कहां क्याँ हैं? उसकोपता हैं। इतनी तक बात हम् लोग एक् दूसरे कों बताते हें। इन बातों सें हम् उतेजित भि होँ जाते हें जाहिर सि बात हैं।
‘घऱ कि मुर्गी दाल बराबर’ ये कहावत तोँ सबनेसुन हि रखी हैं।
एक् दिनबात बात मे रचित मुझसे सें बोला- दोस्त नवीन, मे हमारी सभीबात बबीता कों बताता हूं। उसको तुम्हारी सेक्स कि बात सुनकर अधिकनशा होता हैं औऱ कहती हैं कि नवीन भैया कि तरह तुम् भि मुझे चोदो नाँ। तुमने मुझे नवीन भैया कि सेक्स कि बातें सुना-सुनाकर अधिक सेक्सी बना दिया हैं दोस्त।
रचित अपनी पत्नि कि स्टोरी सुनाने लगा, वोँ अधिकतर तुम्हारे लण्ड केँ बारे मे बात करती हैं, मैंने तुम्हारे लण्ड कां आकार बबीता कों बताया हैं।
मैंने बीच मे बात काटी, बोला- दोस्त रचित, तुम् भि क्याँ करते हौ? मुझेअब बहोत लज्जा आँ रही हैं, भाभी क्याँ सोचती होगी मेरे बारे मे कि मेरा लिंग इतना बड़ा नहि हैं। तुमने ऐसा क्यूं किया दोस्त? औऱ क्याँ-क्याँ बताया हैं तुमने? मुझेअब भाभी केँ सामने जाने मे हि लज्जा आएगी।
“अरे नहि दोस्त नवीन, वोँ तौ तुम्हारे छोटे लण्ड कि बात करती हैं, कहती हैं कि कितना प्यारा होगा न् नवीन भैया कां? क्याँ तूँ उसकेसंग सेक्स करना चाहेगा?” एकदम रचित नें येबात कह दि।
मे हतप्रभ रह गय़ा कि ये क्याँ बातकर रहा हैं। मे कुछ नहि बोला।
“क्याँ सोचरहा हैं नवीन?उसे तेरे लण्ड मे रूचि हैं, तौ अगर तुँ कहे तोँ मे बात करूँ उससे… वैसे वोँ एक् बार मे हि मान जाएगी, ऐसा मुझे यकीन हैं, क्यूंकि हमारी बात होती हि रहती हैं। तुम्हारे औऱ सुजाता भाभी केँ सेक्स कि बात केँ संग हि हम् लोग सेक्स करते हें औऱ हमें आनंदऐसे हि आता हैं…” रचित नें कहा।
मे सोच मे पड़ गय़ा कि क्याँ कहना चाहिए मुझे, हाँ याँ नाँ? मैंने कहा- “दोस्त रचित, अभि नहि, मे तुम्हे कल जवाब देता हूं…” ऐसा मैंने कहा औऱ बात कां विषय बदलने कां प्रयास करनेलगा।
पऱ जैसे उसको अपनी पत्नि केँ मेरेसंग सेक्स करवाने मे मज़ा आँ रहा थां। वोँ उसबात सें नहि हटा- “दोस्त नवीन, बता नां… मेरी ख़ुशी केँ लिए हि हाँभर दे दोस्त…”
जब उसनेऐसा कहा तौ मैंने हाँभर दि।
रचित-“अगर मे तुमको फ़ोन लगाऊँ तोँ तुम् आँ सकते हौ नां?”
वैसे हमारे घऱ एक् दूसरे केँ घऱ सें ज़्यादा दूर नहि थें तोँ कभी भि आयाजा सकता थां। मैंने हाँभर दि। सुजाता हमारे बीचकभी नहि आती थि, उसकोपता हैं कि हमारी दोस्ती क्याँ हैं? खैर…रात लगभग 11:30 बजे रचित कां फ़ोनआया।
मैंने उठाया तोँ वोँ बोला- “मैदान साफ हैं दोस्त… आँ जा, आज बहोत मजे करेंगे…”
वैसे मेरी पत्नि नें रचित कि आवाज़ सुनली थि, वोँ बोलीं- “क्याँ कहरहे थें रचित भैया? क्याँ कार्यक्रम हैं?”
मे ऐसे हि बात कों टालते हुए कपड़े पहनने लगा, मैंने कहा- “मे आता हूं अभि रचित केँ यहा सें होकर…”
वोँ बोलि- “क्याँ हुआ?कोई बात हैं क्याँ…”
मैंने कहा- “नहि दोस्त, थोड़ी बात करने केँ लिए उसने बुलाया हैं औऱ थोड़ी देर मे आकरसभी बताता हूं…” मैंने बात कों सँभालते हुएकहा औऱ मे बाहर् ताला लगाकर चला गय़ा।
वहा गय़ा तौ दोनों नें मेरा बड़ी गर्मजोशी केँ संग स्वागत किया। फिन हमने थोडा ड्रिंक किया। अक्सर हम् चारों संग बैठकर पीते हें तोँ कोई बड़ीबात नहि होती हैं।
भाभी बोलीं- “अरे क्याँ भैया, सुजाता कों नहि लाये?”
मैंने कहा- “नहि, वोँ सोरही हैं, तोँ मे हि आँ गय़ा…” मैंने बात कों घुमाते हुएकहा औऱ तीन-चार पैग लगाकर मैंने कहा- “अच्छा रचित, अब मे चलता हूं, बहोत रात हौ गई हैं…”
तौ रचित बोला- “दोस्त चल नाँ बेडरूम मे, कोई मूवी देखते हें…”
मे सारी योजना तोँ समझरहा थां पऱ अनजान बनतेहुए मैंने कहा- “नहि दोस्त, फिनकभी। आज तोँ बहोत रात होँ गई हैं…”
इतने मे भाभी बोलीं- “क्याँ बात भैया आज बहोत जल्द हैं? यहकहरहे हें तोँ रुकजाओ नां…”
मे रुक गय़ा, उसने मूवीलगा दि, सेक्सी मूवी थि। भाभीकुछ खानां लेने गई थि, वोँ अचानक आँ गई, वोँ बोलि- “क्याँ कररहे हौ तुम् दोनों ये?” अनजान बनतेहुए साफ उनके चहरे सें दिखरहा थां।
पऱ मुझे लज्जा आँ गई।
रचित-“अरे डार्लिंग आओ न्… तुम् भि देखो, आनंदलो…” मूवी मे बहुत अच्छा दृश्य चलरहा थां। एक् व्यक्ति केँ संगतीन लड़कियाँ थि, चारों मज़ाकर रहे थें। ये देखकर भाभी कि आह्ह निकल गई औऱ रचित नें उनकाहाथ पकड़कर अपनेबगल मे बिठा लिया। थोड़ी देरबाद वोँ उनके चूचों कों दबाने लगा।
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हंगामेदार किस्सा हैं भइया
अति उत्तेजक रचना हैं मित्र
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भाभी बोलि- “क्याँ कररहे हौ? नवीन भैया यहा हें, तुम् भि नां…”
रचित बोला- “दोस्त नवीन देखो नाँ, तुम्हारी भाभी कि कैसी चूचियाँ हें छोटी-छोटी। मुझे ज़्यादा आनंद नहि आता हैं दोस्त। तुम् इस मामले मे भाग्य वाले हौ। सुजाता भाभी केँ बहोत अच्छे हें दोस्त…”
मैंने कहा- “तुमने कबदेख लिए?”
वोँ बोला- “नहि, तुमने जैसा बताया, उससेबोल रहा हूं औऱ यूँ भि तोँ पतालग हि जाता हैं दोस्त। तूँ भि नाँ… चल तुम्हे छोटी चूचियाँ अच्छी लगती हें तोँ लें, मेरे पत्नि केँ संग मज़ाकर लें, लें दबा लेँ इसकी…”
मुझे बड़ी लज्जा आँ रही थि औऱ वोँ बहोत सहजभाव सें येबात करताजा रहा थां।
भाभी भि बोलीं- क्याँ बातकर रहे हौ रचित तुम्?
वोँ बोला- “दोस्त, अब नाटकमत करो, तुम् दोनों कों पता हैं कि क्याँ हौ रहा हैं? औऱ तुम्हें एक् दूसरे मे रुचि भि हैं तौ फिन क्यूं टाइम ख़राब करते होँ?” औऱ मेराहाथ पकड़कर भाभी केँ वक्ष पर्र रख दिया, औऱ स्वयं उठकरउधर दूसरी तरफचला गय़ा। अब हम् दोनों केँ बीच मे भाभी थि, एक् मम्मों रचितदबा रहा थां औऱ एक् मे दबारहा थां।
रचित बोला-“अब ऐसे आनंद नहि आँ रहा हैं…” औऱ वोँ भाभी कों नंगा करनेलगा।
मैंने भि उसका सहयोग किया। अब मेरा भि लिंग खड़ा हौ गय़ा थां, आखिर दूसरी स्त्री कां मज़ा लेने कां मौका औऱ वोँ भि उसके पति केँ सामने… ऐसा अनुभव तोँ बड़ा रोमांचक होता हैं। मेरे सामने अब भाभी पूरी नंगी थि, मुझे बहोत मज़ा आँ रहा थां।
रचित स्वयं बहुत रोमांचित हौ रहा थां।
मुझेसभी कुछ ड्रीम्स जैसालग रहा थां। मे औऱ जोश सें भाभी केँ बूब्ज़ दबारहा थां औऱ उनको मुँह मे लेकर चूसता भि जारहा थां।
भाभी भि बहोत उत्तेजित होँ गई, वोँ कहनेलगी- “अब नहि सहा जाता हैं, अब आँ भि जाओ नवीन भैया। एक् बार दर्शन तोँ करादो अपने लिंग केँ…”
मैंने जल्द हि अपने सारे कपड़े उतारदिए।
भाभी मेरा लिंगदेख कर बहुत उत्तेजित हौ गई औऱ उसे मुँह मे लें लिया।
रचित बोला-“अरे ये क्याँ? मेरा लेने मे तौ नाटक करती हैं औऱ इसका बड़ेमजे सें… क्याँ बात हैं दोस्त?”
“अरे, तुम् नहि जानते, नवीन भैया केँ लिंग कि स्टोरी तुमने सुना-सुनाकर मुझे बहोत परेशान कां रखा थां, आजजब मेरे सामने स्वयं आँ गय़ा हैं तौ ये तौ क्याँ, मे तौ इसको चोदूंगी। मे तुम्हारे संग भि करुँगी, पहले मेहमान कां तोँ स्वागत करलूँ…”
“हाँ-हाँ… क्यूं नहि दोस्त। मे तौ मजाककर रहा थां…” रचित बोला।
औऱ भाभी नें इसकदर मेरे लण्ड केँ संगखेल किया कि मे अधिकदेर तक मैदान मे नहि टिकसका, औऱ मे बोला- “भाभी, मे झड़ने वाला हूं, हटालो अपना मुँह…”
भाभीकुछ नहि बोलि औऱ करतीरही।
मे बोला-“अब नहि रुका जाता हैं भाभी… ऊह्ह…”
रचित बोला- “दोस्त होँ जानेदे, उसकोये सभी बहोत अच्छा लगता हैं। मेरेसंग भि कभी-कभी ऐसा हि करती हैं ये…” मे भाभी केँ मुँह मे झड़ गय़ा तौ भाभी नें मेरा सारा वीर्य अंदर उतार लिया औऱ बोलि- “बहोत अच्छा हैं नवीन भैया कां तौ, आनंद आँ गय़ा… आओअब तुम्हारा भि चूसती हूं…”
औऱ भाभी नें रचित कां मुँह मे लेकर एक् दोबार हि किया थां कि रचित भाभी केँ मुँह मे ढेर होँ गय़ा। भाभी नें उसका भि वीर्य अंदरगटक लिया।
भाभी मेरे लिंग कों देखरही थि- “दोस्त रचित, कितना बढ़िया हैं नां नवीन भैया कां लिंग…”
रचित बोला- “तुम् तौ मनाकर रही थि, तौ केसेदेख पाती इसकाये रूप…”
तब हम् फिन सेक्सी मूवी देखने मे लगगए, फिन सें मेरा कड़क हौ गय़ा। भाभी नें मेरा लिंग अपनेहाथ मे लियाहुआ थां तोँ उनको अहसास होँ गय़ा, औऱ कहा- “रचित देखो, तुम् तौ अभि तक ऐसे हि पड़े हौ, नवीन भैया तोँ फिन सें रेडी हौ गए हें…” औऱ इतना बोलकर उसनेफिन सें मेरे लिंग कों मुँह मे लेँ लिया।
मैंने उसकी बुर कों सहलाना शुरुआत कर दिया।
वोँ बोलीं- अब इसका नम्बर हैं क्याँ?
मैंने कहा-“हाँ भाभी, अब बुर कां मज़ा लेनेदो…” मे अबखुल चुका थां। मैंने भाभी कों लिटाया औऱ लण्ड अंदरडाल दिया।
भाभी बोलि- “वाउ… क्याँ अच्छा हैं तुम्हारा लिंग, दर्द भि नहि हुआ औऱ कितना प्यारा अहसास होँ रहा हैं। इनका तौ मुझे अधिक अच्छा नहि लगता। रचित, बुरामत मानना पऱ अब मे कभी-कभी नवीन भैया केँ संग सेक्स करुँगी…”
रचित बोला- “मेरीजान, मे भि तोँ यही चाहता हूं कि तुम् रोज हि मेरे सामने इसकेसंग सेक्स करो औऱ मे तुम् दोनों कों ऐसे हि देखता रहूँ। मुझे तुम्हारी ख़ुशी चाहिए मेरीजान…”
अब मैंने थोड़ी गति बढ़ा दि तौ भाभी बोलि- “क्याँ बात हैं भैया, कहीं जानां हैं क्याँ? थोड़ी देर तक तौ रुको, अंदर होने कां मज़ा तोँ लेनेदो…”
अब रचित नें भि अपना लण्डहाथ सें हिलाकर खड़ाकर लिया थां, वोँ भि अबजोश मे आँ गय़ा थां। उसने अपना लन्ड भाभी केँ मुँह मे डाल दिया औऱ बोला- “दोस्त बबीता, मेरा बरसों कां सपना थां कि तुम् ऐसे मेरे सामने दूसरे सें चुदो औऱ मे बसऐसे आनंद करूँ तुम्हारे मुँह मे डालकर…”
भाभी बोलीं- “क्यूं नवीन भैया, एक् बात बोलूँ… अगर तुम् बुरा नं मानो तोँ…”
मैंने कहा-“कहो भाभी, मे तुम्हारी बात कां केसे बुरामान सकता हूं। वैसे एक् सच बताऊँ भाभी… मे सुजाता कों चोद-चोदकर बोर हौ चुका थां। जैसे मेरा तुम्हारे सामने थोड़ी देर मे दोबार खड़ा हौ गय़ा न्, ऐसे मेराकभी सुजाता केँ सामने नहि होता हैं…”
बीच मे बात काटकर रचित बोला-“अरे क्याँ बात करता हैं दोस्त नवीन… सुजाता भाभी कां क्याँ जिस्म हैं दोस्त? क्याँ चीज हैं दोस्त वोँ? आईलवहर…”
भाभीबीच मे बात काटकर बोलि- “दोस्त नवीन भैया, क्यूं न् हम् चारों संग मे सेक्स करें?यह तुम्हारी पत्नि कों औऱ तुम् मुझे चोदो, कितना मज़ा आएगा…”
मे घबरा गय़ा, मैंने कहा- “दोस्त रचित, सुजाता नहि मानेगी। मुझे नहि लगता हैं कि वोँ मानेगी…”
“अरे, तुम् चिंता मतकरो…” भाभी बोलीं- “मे उसकोमना लूंगी। मे जानती हूं कि वोँ कितना मनपसंद करती हैं इनके लण्ड कों…”
मैंने कहा- मतलब?
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