नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
निराली जी कि आंखेफट केँ बाहर् आने कों हौ गई,.औऱ मे दांत भींचकर लंड पूरा टोपे तक निकाल कर बिजली कि तेजी सें उनकेहलक तक बेरहमी सें चाँपने लगा.निराली भाभी"गूँ गूँगूँ." करतेहुए आंखेफाड़ तड़पने लगीं औऱ मुझसे छूटने केँ भरसक प्रयास करने लगीं.! पर्र दूसरे हाथ सें मैंने उनकागला पकड़ लिया थां औऱ गालियों केँ संग उनकेमुख कां भीषणरूप सें चोदन करनेलगा.!
"मादरचोद.तेरी मां कां भोंसड़ा मारू.तेरी बुर कि तड़प कां बैदा मारू मादरचोद.तेरी बेटी कों मे हि चोदकर उसके भोसड़े सें अपना बच्चा पैदा करूँगा मादरचोद.!!!"
निराली जी कि सांस उखड़ने लगी थि.रमा कुछसहम सि गई,."स्स्स धीरे-धीरे.धीरे-धीरे.थोड़ा रहम करिये.मर जाएगी यह ऐसे.अब बस करिये.अब छोड़ दीजिए.!"
मे: "इस मादरचोद कि मम्मी भि चोदूंगा.इसकी बेटी कों जब इसके सामने छितरा केँ चोदूंगा तब इसको समझेगा.बिना पानी निकले आज तौ नहीं छोडूंगा.यह लें मां कि लौड़ी.!"घच। घच.घचाक.
रमासमझ गयीँ, थि कि मुझेइस वक़्त रोकना असम्भव हैं.वोँ ये भि जानती थि कि मेरा दूसरी बार पानी निकलेगा तौ उसमें देर लगेगी.उतने मे तौ निराली भाभी केँ प्राण हिरन हौ जाएंगे.! कुछ सोचने लगी वोँ.औऱ तभीकुछ विचार आते हि वोँ हटकर निराली भाभी केँ पीछेजा खड़ी हुईँ.
रमा:"इधर देखिये." कहतेहुए उसने अपने ब्लाउज़ केँ सारेहुक खोल दिये.बिना ब्लाउज़ कि हाहाकारी चूँचिया भलभला केँ बाहर् मेरी आँखों केँ सामने साक्षात प्रकट हौ गये.!
जैसे एक् विस्फोट सें हुआउसी लम्हा मेरे बाबूराव नें औऱ भरभरा केँ मेरे लौड़े सें गढ़ी मलाई कां विस्फोट हौ चला.कुछ निराली जी केँ हलक केँ अंदर सीधे रवेशकर गयीँ,.औऱ मस्ती मे मैनेजब उनके बालो केँ जूड़े कों छोड़ा तौ निराली भाभीजान बचाने केँ मार्मिक प्रयास मे पीछे छिटक गई,.बाबूराव बाहर् आँ चुका थां औऱ AK-47 सि बौछार जाकररमा कि चुंचियों पर्र गिरी.
रमा कां मुंह इतनाढेर सारा वीर्य देखकर आश्चर्य सें खुली.बाबूराव नें वीर्य-वर्षा बन्द सि करी.मे मंत्रमुग्ध सां रमा कि वीर्य सें सनीठोस उन्नत चुंचियों केँ आलौकिक दर्शन पाकर रोमांचित होँ गय़ा थां.औऱ उसी रोमांच मे एक् बड़ी-मोटी आखरीधार एक् आश्चर्यजनक वेग सें निकली औऱ सीधेरमा केँ श्रीमुख मे प्रवेश कर लिया.!
निराली भाभी फर्श पऱ पड़ेदमे केँ मरीज कि तरह हांफरही थि.रमा केँ चेहरे पर्र पहले तोँ आश्चर्य केँ औऱ तरन्त बाद हि घोर-गुस्स केँ भाव आँ चुके थें.उस मेरी दगाबाज़ गांड कि डर केँ मारे फटफटी निकल चुकी थि.फटफट फटफट फटाककक.!!!
भाग #19
रमाभाग कर बाथरूम मे घुस गई.औऱ अंदर सें उसकीदिल दहला देने वाली खांसी कि आवाज़आने लगी.!"खों खों खों.आक थू.खों खों."
निराली भाभीआंख बंद कियेपड़े हुईँ कुतिया कि भांति हांफरही थि.! मे गंडफटी मे यहतय नहींकर पारहा थां कि किस खूबसूरत औरत पऱ ध्यान दूँ.! एक् तीर सें दो निशान तौ सुना थां.इधर एक् धार सें 2 बीमार.!
सोचा आँ कर देखता हूं निराली जी कों.पहले रमा कों देखता हूं.!!! तभीरमा बाथरूम सें दहाड़ी "यह मुयाँ पानी क्योचला गय़ा इसी टाइम.खों खों.!!! कितने बार बोला हैं उस मुएँ बहादुर कों केँ वक्त पऱ पम्पचला दियाकर बिल्डिंग कां खोंखों। पर्र उस चीलर कों गुप्ताइन कि खिड़की मे झांकने सें फुरसत मिलेतब नां.!! पानी लेँ कर आईये इधर.खों खों खों.आक थू.!!!!"
अपन हड़बड़ी मे पानी ढूंढते हुए सोचे"यह सारा सोसाइटी केँ मर्द गुप्ताइन केँ भोसड़े मे घुस जाएं.साली केँ चक्कर मे हमारा पानीकट गय़ा.उसकी बुर मे तोँ मे पानी डालूंगा.अब पानी किधर सें लेँ जाऊँ.??"
तभी यादआया कि फ्रिज मे सारी बोतले भरीपड़ी हैं.फ्रिज खोलने पर्र मम्मी कां लौड़ा दरवाज़ा खुले नहीं.तोँ देखा निराली जी कां एक् टांग फ्रिज केँ दरवाजे पऱ अड़ाहुआ थां.उसको मोड़कर ऊपर किया औऱ झम सें फ्रिज सें 2 बोतले निकाल कर जैसे हि अपुन मुडे तोँ वोँ सीनदेख कर मुरझा केँ सिकुड़ चुके बाबूराव केँ मुख सें सीटीबज पड़ी.!!
निराली भाभी कि दाईं टांगऊपर होने सें उनकी साड़ीऊपर हौ चुकी थि.औऱ अपने फिलिप्स केँ 12 वाट कि LED कां सारा फोकस निराली जी केँ भोसड़े पऱ थां जोँ कि उनकीहर उखड़ती हुईँ सांस केँ संग संकुचित होँ रहा थां.! उन पसीने सें भरी भूरी झांटो मे सें झांकती उनकी गुलाबी मछली नें मुझ पऱ एक् सम्मोहन पाश सें जैसे फेंक दिया हौ.!!
अपुन दीन-दुनिया सें बेखबर उस गीली फड़कती बुर कि ओर खींचते चले गए.औऱ हौले-हौले फॉर्म मे आते बाबूराव कि धुंधली सें आवाज़ कानों मे गूंजती हुईँ आयी."चूस लेँ.चूस लेँ.!"
अबअपन चुद-आंध अवस्था मे सीधे निराली भाभी कि जांघो मे सें होतेहुए उनकीकैब बुर पर्र मुंहमार कर चूसने लगे."सड़प सड़पसड़प सड़प".!! निराली जी कि उखड़ती हुई सांसे अचानक धौंकनी सि चलने लगीं.! उनका एक् हाथआकर मेरेसर पर्र फिरने लगा.मेरे दोनों हाथऊपर सरककर उनकी खुलीपड़ी चुंचियों कों मींजने लगे.!!
पीछे सें एक् आकाशवाणी सि आती हुई सुनाई दि "पानी.खों खोंखों.!" मे मन हि मन उसको आदेशमान कर"हाँ हाँ। पानी निकाल कर हि उठूंगा निराली जी कां.सड़प सड़प सड़प.कुछ ज़्यादा हि कठोर होँ गय़ा थां मे इन पऱ.सड़प सड़प सड़प.ग़लती इनकीकम औऱ उस हरामी केँ फोड़े पारेख जी औऱ कल्पेश जीजा कि हैं.सड़प सड़प.कल्पेश जीजा तुम्हारी गाँड़ मे चरस नहींबो दिए नं.सड़प सड़प सड़प.तोँ बबूलबो लूंगा अपनी गाँड़ मे.सड़प सड़पसड़प.!"
निराली जी कां जिस्म ऐंठने लगा थां.उखड़ती सांसो केँ संग उनका पिछवाड़ा उचकउचक कर जैसे मुझे अपने भोसड़े मे घुस जाने कां आमंत्रण देनेलगा थां.सड़प सड़प सड़प.केँ तभी.
अरे पानी लाने कां बोला थां.खों खोंखों.!!!!!
बाथरूम सें आतीउस गर्जना नें मेरी झुकी हुई गाँड़ मे जैसे बेलनपेल दिया.!!! अपुनउस सम्मोहन पाश सें एक् झटके सें मुक्त हुए औऱ एक् झटके सें उठकर पानी कां बोतले लेँ कर मे दौड़ाउस खांसती बला कि ओर.!!!
बाथरूम मे घुसते हि एक् आवाज़आयी 'टन्न टन्न टन्न.' औऱ बाबूराव सेकंड केँ हज़ारहवे हिस्से मे खड़ा हौ चुका थां.!!! रमा नें आनन-फानन मे ब्लाउज़ उतार फेंकी थि औऱ बेसिन पर्र शीशे केँ सामने खड़ी अपने मुंह मे उंगली करतेहुए खांसरही थि खोंखों खोंखों.! उस हलचल मे उसकी जमीन पऱ पड़ी साड़ी उसके पैरों केँ नीचेफंस कर करीब-करीब खुल वहुली थि औऱ पेटीकोट मे बंदरमा कि वोँ हाहाकारी गुदाज गाँड़ मे थिरकन सि होँ रही थि.!
मे : "रमा.प.प.प.प.पानी."
रमा नें मुंहऊपर किया औऱ इशारे सें मुंह मे डालने कों बोला.! मे उसकेठीक पीछेखड़ा होकर अपने बाएंहाथ मे पकड़ी बोतल सें उसके मुंह मे पानी डालने लगा.रमा एक् केँ बाद एक् कई कुल्ले करतेहुए वोँ बोतल खाली करती गई,.मेरी आँखें तोँ बसफ़टी फ़टीउन पसीने सें भरीदूध कि टँकीयों कों देखती रही शीशे मे.इतने ठोस भलभलाती चूँचियों कों हिलते हुए देखते हुए नीचे बाबूराव लोहे कि रॉड कि भांति टनटनाते सीधेछत कि ओर मुंह कियेहुए प्रार्थना कररहा थां बस एक् आशियाने कि.बस एक् आवाज़ कि आनेलगी !
"चूस लें.चूस लेँ.!"
!
रमा नें उस बोतल कि आखरीधार अपने हाथों मे लेँ कर मुंह पर्र छिड़का.औऱ आंखेबंद कियेहुए हि बोलीं यहां डालिये अब पानी.!!
देखा वोँ अपनी चूँचियों कि ओर इशारा करके धोने कों सजधजकर खड़ी थि.! मे बस दूसरी बोतल सें पानी डालने हि वाला थां कि रमा"अरे रुकिए.यह मुई साड़ी पूरीभीग जाएगी." कहकर उनसेझट सें बची हुई अपनी लटकती साड़ीखोल कर एक् ओरकर दि.!"
उस गदराई बम कों पेटीकोट मे खड़ादेख कर मेरागला सूखने लगा.अपुन नें उसकीनरम पहाड़ जैसी गाँड़ सें टंटनाते बाबूराव कि दूरी बनाएहुए दाएंहाथ मे पकड़ी बोतल सें एक् घूंट पानी पीने केँ बाद बोला "र.र.रमा.व.व.वोँ पेटोकोट भि भीग जाएगा.उ.उ.उतार लो.?"
रमा: गुर्राते हुए"छी। नंगी न् हौ जाऊं.वोँ निराली भाभीसमझ रखा हैं क्याँ जोँ हर मूसल पर्र झूल जाऊं.??"
मे "ठ.ठीक हैं.मुझे क्याँ.बाद मे नं बोल्ना केँ भिगो दिया.लो डालरहा हु.जब देखोतब नियत पऱ शक हि रहता हैं तुमको.आज तक कभी छेड़ा हैं क्याँ तुमको.!!"
रमा ग़ुस्से मे कुछसोच कर "अच्छा आंखेबंद करिये.!"
अपन नें बिल्ली कि तरह आंखे मिंजली "लो बन्दकर लिया.थोड़ी हलचल केँ बादरमा "अब डालिये पानी.!"
अपून नें जैसे हि पानी उड़ेला रमा कि चुंचियों पर्र.बहनचोद दो धमाके एक् संगहुए.!
पहला:
वोँ चिल्लाई "ओह दइया। बर्फडाल कर लाये हैं क्याँ.!!!" असल मे पहली बोतल फ्रिज मे थोड़ेदेर पहले डाली हुईँ थि.औऱयह दूसरी वाली 3 दिन सें अंदर गाँड़मरा रही थि.!!
दूसरा:
मे औऱ रमा दोनों "हायरे। ओह.!!!"रमा ठंडक केँ मारे पीछे झटकी.औऱ मुस्तैद खड़े बाबूराव नें रमा कि पेंटी सें होतेहुए उसकी गहरी गाँड़ कि खाई मे अपना आशियाना ढूंढ लिया थां.औऱ हम् दोनों कि आंखेखुल करफ़टी रह गई,.!
रमा गुस्से मे पलट गई.औऱ मुझे अपने पीछे नंगा अपना औज़ार लहराते हुएहुए देखकर उसका मुंह गुस्से सें लाल हौ गय़ा.!
छि.बदचलन.बड़े हरामी हें आप्.अभि अभि निराली भाभी सें लौड़ा चुसवाया आपका.औऱ हम्। दोनों कों गंदाकर केँ भि जी नहींभरा आपका.रुकिए देखिये आज मे क्याँ हाल करती हूं आपका औऱ ईस मुंये डंडे कां.!!!
फटफटफट फट फटाककक.! अपनेकान गरम हौ गए.बहनचोद कुछ नं समझआये क्याँ करूँ इसका.पऱ गुस्से सें थरथर कांपती रमा केँ भीगेठोस उन्नत चुंचियों नें जैसे एक् शक्ति-संचार सें किया मेरे अंदर औऱ यहसोच कर केँ पहलेइस खौराई बिल्ली कों चुप कियाजाए इससे पहलेयह पंजामार दे.औऱडर केँ आगेजीत हैं वाला लाइनयाद करतेहुए अपनआगे बढ़े औऱ पहलेहाथ मे पकड़ा बोतल साइड मे बेसिन पऱ रखा.रमा गुर्राते हुए बड़बड़ाते हुए मुझेदेख कर"आज सारी गर्मी निकल जायेगी आपकी."
मे: "रमा सुनो."
लण्डचुप होना थां उसको."केसे हिम्मत केसे हुई आपकी.मुझे बदचलन समझा हैं क्याँ.आज मै.ममम म." मैंने आंव-तांव नं देखते हुए दोनों हाथों सें उसके मुंह कों पकड़कर उसके लबों कों अपने होंठो केँ बीच लें लिया थां.!
रमा अचंभित सि होँ कररह गयीँ, औऱ उसकी आंखें बिना पलके झपकाए मेरी आँखों मे आश्चर्य सें देखती रही.!
बड़ा मीठा एहसास थां इसकी मां कां शपथ सें.! नीचे सें खड़ेहुए मेरे अजगर नें पैंटी केँ ऊपर सें अपनी गुफा पर्र एक् ठुंकि सि मार दि। पऱ अपुन बाबूराव ठरकपन मे नहींआते हुए धीरे-धीरे सें तोड़ाउस मधुर चुम्बन कों औऱ रमा कि आंखों मे देखते हुए उसके कन्धों कों हल्के सें थामते हुए"बस यही तरीका समझआया तुमको चुप करवाने कां.!"
रमा कों जैसे सांप सूंघ गय़ा थां.वोँ बिनापलक झपके देखती रही."देखो.सारा दोष तुम्हारे इनका हैं.(उसकी चुंचियों कि ओर इशारा करते हुए).तुम्हारे बारे मे जान-बूझ करग़लत नहीं सोचता मे। पऱ जबआजजब इस इतने खूबसूरत अम्रत-कलशों कों सामने सें खुला देखा.तोँ रहा नहीं गय़ा.औऱ तुमको तोँ पता हैं नाँ.मेरा अपने आप् खड़ा हौ जाता हैं इन्हें कपड़े केँ उपर सें देखते हि.औऱ तुमने स्वयं देखा अभि.जौ काम निराली भाभी लंड मुंह मे लें कर भि ठीक सें नहींकर पारही थि, वोँ काम एक् इनकी खुलीझलक नें कर दिया.!! इनकी सुंदरता नें मात्र अपनीझलक सें मेरा पानी निकाल दिया थां.(रमा केँ चेहरे कां क्रोध कुछकम होतादिख रहा थां)
"अब सोचो.तुम्हारे जैसी हसीन महिला जब खुली हालत मे मेरे इतनेपास होगी.तोँ क्याँ हालत होगीइस बाबूराव कि.??" मैने थोड़ा मुस्कुराते हुए.
रमा केँ चेहरे पर्र एक् हल्की कि शर्मीली मुस्कान आँ गयीँ,
तारीफ़ों कि मां चोदचोद कर कितनो नें कितनो कों छोड़ दिया थां.यहा पर्र तोँ मात्र रमा केँ गुस्से कि मम्मी चोदनी थि अपुन कों.औऱ वोँ चुद गई,.!!
हम् दोनों कुछ लम्हा एक् दूसरे कि आंखों मे देखकर मुस्कुराते रहे.कि तभी एक् जादू सां हुआ.शावर केँ ठीक नीचेखड़े हम् दोनों पर्र एक् मोटी झरने कि धार आँ गिरी.रमा नें नलखोल कर पानीचेक किया थां जब नहीं आँ रहा थां.नल खुलारह गय़ा थां.औऱ उस मुएँ बहादुर कों गुप्ताइन कि खिड़की मे झांकने सें फुर्सत मिल गयीँ, थि.!
हम् दोनों चौक उठे.औऱ अचानक रमा खिलखिला करहंस दि.! वोँ हंसेजा रही थि.औऱ मे मंत्रमुग्ध उस लम्हा मे खोयाहुआ थां.पानी हम् दोनों केँ शरीर सें बहकर हमारी फिसलन बढ़ारहा थां.!
मे: "रमा."
रमा नें मेरीओर देखते हुए इशारे सें पूछा.
मैंने कुछ नं कहतेहुए रमा कों कन्धों सें पकड़कर धीरे-धीरे सें अपनीओर खींचा औऱ बहते पानी केँ नीचे उसको स्मूच कर लिया.रमा जड़वत सि रह गयीँ,.मैंने एक् हाथ उसकीपीठ पऱ लें जाकर उसकी भीगी चुंचियों कों अपने सीने मे दबा लिया औऱ दूसरे हाथ कों उसकेगाल केँ नीचेलगा कर उसकेनरम होंठो पर्र चूमना जारीरखा.!
रमा कि आंखेबंद होँ चुकी थि.वोँ कंहीउस लम्हा मे खो सि गई,.उसकी बांहे मुझे सहसा अपनीपीठ पर्र रेंगती सि महसूस हुईँ.! आज तक इतनी औरतों कों चोदने केँ बाद भि ऐसी फीलिंग आज तक नं हुई थि.! उसकेगाल केँ नीचे मेरे हथेली नें हौले सें सरकते हुएउन ठोस चुंचियों कों अपनी नाज़ुक गिरफ्त मे लें लिया औऱ मे रमा केँ होंठ चूसते हुए उसकी चुंचियों पर्र गिरते पानी कों मलनेलगा.! रमा कों शायद इसका एह्साह अपनी नवीन उत्तेजना केँ चलते नहीं हौ रहा थां.उसके निपल अंगूर केँ दानों सें तनकर मेरी उंगलियों केँ बीचघिस रहे थें.औऱ इसी उत्तेजना मे भला अपना बाबूराव कहा पीछे रहता.???
रमा कि गीली पैंटी मे सें आतीउस चुम्बकीय शक्ति नें बाबूराव कों अपनीओर खींचा.औऱ बाबूराव स्वयं कां अनदेखा औऱ नं झेलते हुएजा भिड़े अपनी साथिन केँ मुख पऱ.! पैंटी केँ ऊपर सें बुर कि दरार मे हल्का घिसाव सें करतेहुए बाबूराव नें छेंद कि सही स्थिति भांपते हुए एक् हल्का झटका सें पैंटी कि गीली पतली झिल्ली समेत अपने सुपाड़े कल एक् चौथाई मुंह बुर कि फांको केँ बीच घुसा दिया.!!
रमा तरन्त चिहुँक पड़ी औऱ किस तोड़ते हुएअलग होतेहुए गुस्से सें बोलीं "ओह.हाय राम क्याँ कररहे हें.आँ गए नं अपनी औकात पर्र.!!!"
मे :बिना डरतेहुए उसकी आँखों मे देखते हुए "वोँ सडका गिरा थां नां तुम्हारी चुंचियों पर्र.वही साफकर रहा थां.!" देख्ना थां कि रमा सें खुलकर बात कां क्याँ असर होता हैं उस पऱ.
रमा: "हम्म.औऱ नीचे क्याँ होँ रहा थां.??"
मे: दांत निपोर कर "वोँ क्याँ हैं नां.इतनी खूबसूरत महिला जब सामने करीब नंगीखड़ी होँ इतने पास.तौ अपने आप् हि होँ गय़ा शपथ सें.!"
रमाकुछ देर हल्के गुस्से मे देखती रही.फिन अपनी तारीफ सुनकर शर्मा कर चुंचियों कों ढकतेहुए बोलीं "चलिए हटिये अब.बाहर् जाईये.बेशर्म कंही केँ." उसे शायद अपनी नग्नता कां एहसास होँ चला थां.!
मे: "साफ तोँ करदु इन्हें."
रमा: "मेरे स्वयं केँ हें.मे कर लुंगी.बड़े आयेसाफ करने.पिचकारी उड़ाते टाइम नहींयाद रहता कि सफाई भि होनी हैं.गन्दे कंही केँ.बाहर् जाइये अब.!"
मे: "रमा.इसका क्याँ करूँ.??" नीचे झूलते बाबूराव कों दिखाते हुए.
रमा: "छत मे जाकरगाड़ आईयेइस मुंये कों.कपड़े सूखने डालूंगी इस पर्र.अब जाईये बाहर् औऱ देखिए निराली भाभी कैसी हें.पानी-वानी पिलाइये उनको थोड़ा.
आरे हाँ। पानी.!!!
ये सोचते हुए अपुन तरन्त बाहर् लपक किये दांत निपोरते हुए.!!!
This nuisance iss due too mods adding many advertisements on the website. This has worsened the user experience lekin also exposed all users too virus and malware attacks. We understand their need for money so all users should find a suitable solution too this issue
बहोत हि शानदार औऱ कामुक भाषा कां प्रयोग.संग हि हास्य रस भि भरपूर. साधुवाद. लगेरहो.
Ek dam jhakkas update he bhay Nirali ne too sabki pol patti khol di. halanki uski bi choot k dhage khol diye. Mast ekdum.Gazab Waiting for the next part
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
रमा तरन्त चिहुँक पड़ी औऱ किस तोड़ते हुएअलग होतेहुए गुस्से सें बोलि "ओह.अरे क्याँ कररहे हें.आँ गए न् अपनी औकात पऱ.!!!"
मे :बिना डरतेहुए उसकी आँखों मे देखते हुए "वोँ सडका गिरा थां नाँ तुम्हारी चुंचियों पर्र.वही साफकर रहा थां.!" देख्ना थां कि रमा सें खुलकर बात कां क्याँ असर होता हैं उस पर्र.
रमा: "हम्म.औऱ नीचे क्याँ होँ रहा थां.??"
मे: दांत निपोर कर "वोँ क्याँ हैं नाँ.इतनी खूबसूरत स्त्री जब सामने करीब नंगीखड़ी होँ इतने पास.तौ अपने आप् हि होँ गय़ा शपथ सें.!"
रमाकुछ देर हल्के गुस्से मे देखती रही.फिन अपनी तारीफ सुनकर शर्मा कर चुंचियों कों ढकतेहुए बोलि "चलिए हटिये अब.बाहर् जाईये.बेशर्म कंही केँ." उसे शायद अपनी नग्नता कां एहसास हौ चला थां.!
मे: "साफ तौ करदु इन्हें."
रमा: "मेरे स्वयं केँ हें.मे कर लुंगी.बड़े आयेसाफ करने.पिचकारी उड़ाते वक्त नहींयाद रहता कि सफाई भि होनी हैं.गन्दे कंही केँ.बाहर् जाइये अब.!"
मे: "रमा.इसका क्याँ करूँ.??" नीचे झूलते बाबूराव कों दिखाते हुए.
रमा: "छत मे जाकरगाड़ आईयेइस मुंये कों.कपड़े सूखने डालूंगी इस पऱ.अब जाईये बाहर् औऱ देखिए निराली भाभी कैसी हें.पानी-वानी पिलाइये उनको थोड़ा.
आरे हाँ। पानी.!!!
ये सोचते हुए अपुन तरन्त बाहर् लपक किये दांत निपोरते हुए.!!!
भाग #20
रसोई मे निराली बेन अभि भि अपनी बुर-चटाई केँ खुमार मे आंखेबंद कियेपड़ी अपने भग्नासे कों कुरेदते हुए सिसिया रही थि.! उनकी गोल-गुम्बज चूँचिया उनकीहर गहरी सांस केँ संगऊपर नीचे धौंकनी कि भांति चलरही थि औऱ उनकी चूत केँ छेंद मे लगातार संकुचन होँ रहा थां.!
[हरामी मोड - ऑन]
अपुन नें अपनेखड़े लंड कों मसलते हुएये सोचा"कुछ भि कहो, यह मादरचोद गदराई गुजरातन हैं तौ करारा माल.औऱ ऐसी गरमा-गरम चुदासी स्त्री अगर बिना चुदेइस घऱ सें गयीँ, तौ फिन धिक्कार हैं इसघऱ केँ लौड़ो पर्र.! इसको तौ अभि हचक केँ बजाता हु.यहरमा कि लगाईआग मे जलेगी आज बेहन कि लौड़ी.!!"
अपुनलपक केँ उस गोरी गदराई पराई नारी केँ जांघो केँ बीच लंड सहलाते हुए घुटने टिकाते बैठगए औऱ उनकी मलमली चूत कि फांको कों उंगली सें सहलाने लगे.!! इतने वक़्त पश्चात बुर-भोग लगने वालादेख बाबूराव नें भि उत्तेजना केँ मारे खुशी केँ एक् आंसू कि बूंद निकाल दि.!
निराली जी केँ मुख पऱ एक् एक् सुखद मुस्कान तैर गयीँ,.शायद येसोच कर कि "आँ गय़ा चूत-चट्टा अधूरा काम पूरा करने.!!" पर्र इस चूत-चट्टे कों इसबार अलग हि गाँड़-मस्ती सूझी हुइ थि औऱ वोँ एक् बुर-भक्षक कां रूप धारणकर चुका थां.! अपुन नें लंड केँ टोपे कों उनकी बुर कि फांको पऱ घिसना शुरुआत कर दिया.
उस ठरकी महिला केँ मुंह सें 'सि सि' कि सिसियहट आने लगी.औऱ इधर नीचे उनकी मस्तानी चूत पनियने लगी थि औऱ रगड़ केँ संग आवाज़े आने लगींफच फचफचफच.!
मस्ती केँ गोतो केँ बीचउस गुजरातन कां ट्यूब-लाइट अचानक जलउठा यहसोच कर"य.यह जीभ तोँ नहीं.आलू जैसा क्याँ रगड़रहा हैं नीचे.??"उस उन्होंने जब तरन्त आंखे खोली तोँ मुझे पिताजी-रंजीत जैसे मुस्कियाते अपना औज़ारसेट करतेदेख एक् अनजाने डर सें सिहरउठी.!
N: कुछ कांपती आवाज़ मे "न् नं नन्ही प्लीज़ देखोअहह फचफचफच फच.अंदर मत डालना.चाट लो जितना चाटना हैं उधर.प्लीज़.!!"
मे : "आज तौ बिना चोदे नहीं जाने दूंगा आपको मेरी गुलबदन.चोद-चोद कर तबियत हरीकर दूंगा आपकी.! म्म्म फचफचफच फच.क्याँ मलाईदार बुर हैं आपकी मेरीजान.!"
N: थोड़ा डरतेहुए "नं नं नहीं प्लीज़.देखो तुमको तौ पता हैं नां.गुड़िया कि विवाह न् होँ जाने तक पराये मर्द सें परहेज़ कि शपथखाई हुईँ हैं मैने.आज पूरा एक् साल हौ गय़ा.अहह फचफचफच फच.प्लीज़.!!"
"तोँ क्याँ वोँ पारेख जी औऱ कल्पेश नें नहीं चोदा आपको एक् साल सें.झूठी कंही कि.!"
N: "अहह.नहीं शपथ सें.ठाकुर जी साक्षी हैं.मैंने बुर नहीं दि उन दोनों कों एक् साल सें.जब ज़्यादा गरम होते हें तोँ चूस केँ मालझाड़ देती हूं उनका.!!
यह सारी गुजरातन औरतें हरबात पर्र ठाकुर जी कों क्यो घसीट लाती हैं.क्याँ कीड़ा हैं इनकी गाँड़ मे.!!
N: "उफ़्फ़.फच फचफच फच.देखो आपको दूसरी औरतें दिलवा दूंगी.प्लीज़ मुझे बक्श दो.एक् बार मेरी गुड़िया घऱ सें विदा होँ जायेफिन जितना मन होँ उतना चोदना तुम्.तब सारादिन तुम्हारे घऱ मे नंगीपड़ी रहूंगी.हाय फचफचफच फच.!
यहलो यह तौ दल्ली निकली मादरचोद.!!
मे: थोड़ा गुस्से मे "मुझे बाजारू रंडी चोदने वालासमझ रखा हैं क्याँ तुमने.???" बोलकर लंड केँ सुपाड़े कों आधाठूस दिया उनकी चूत कि फांको केँ बीच.
N: "आह रुको.अहह.बाज़ारू नहीं.घरेलू शादीशुदा शरीफघऱ कि औरतें.तुम्हारे हि कॉलोनी कि.!!"
यह तोँ काम कि बात हैं गुरु.देखे ज़रा क्याँ क्याँ हगती हैं यह गुजरातन.! "इस कॉलोनी कि.केसे.??"
N: "अरे वोँ इस कॉलोनी मे हि तोँ पहले रहती थि नं मे। कौन अपने घाघरे मे किस किसको घुसवाती हैं सभीपता हैं.कुछ कि सेटिंग तौ मैंने हि करवाई हैं.अब वोँ आपके सामने वाली सुष्मिता जी कों हि लेँ लो.उनको उनका भोला देवर जी पटाने मे मैंने हि सहायता करी उनकी.अहह फचफचफच.!
सामने केँ सुनते हि राडार खड़ा हौ गय़ा अपुन कां "कौन सुष्मिता जी.??"
N: "अरे वोँ आपके सामने वाली बिल्डिंग कि सुष्मिता गुप्ता बड़ेबड़े चुंचे वाली.जिनकी गाँड़ थिरकती रहती हैं चलते टाइम."
ईस्की बेटी कां भोंसड़ा मारू। तौ गुप्ताइन कां चुदापा इन्होंने हि चालू करवाया.फच फचफचफच.!
"अच्छा.औऱ.?" टोपे कों गोलगोल मंथते हुए.
N: "आन्ह.फच फचफच.व वोँ चौथे माले वाली मराठीन हें नां ललिता जी.वोँ बड़ी पसंद थि हमारे दूधवाले कल्लू भैया कों.तोँ उनको भि चुदवा दिया मैंने हि कल्लू भैया सें.!
मे : आश्चर्य सें "कौन वोँ लम्बे बालों वाली पटाखा जौ एक्टिवा सें चलतीं हें.जिनके पति बीमा कम्पनी मे हें.???"
N : गर्व सें "हाँहाँ वही.कल्लू तोँ मेरे पांवधो करपी गय़ा उनकोठोक कर.! "
ईतनी खूबसूरत माल कों कोई दूधवाले सें चुदवाता हैं भला.टैलेंट इसइस गुजरातन मे.थोड़ी तौ इज्जत करनी बनती हैं जौ इतने कंटीले माल कों उस नाटे-मोटे कल्लू सें ठुकवाने कों राजीकर लिया.!
"ग़ज़ब हैं.पऱ उनकोदेख कर लगता तोँ नहीं हैं कि वोँ उस साढ़ेचार फुट केँ कल्लू कों घास डालेंगी.! ऊपर सें कालेज जाने वाला जवान लड़का हैं उनको.पर्र इस उम्र मे भि उनकोदेख कॉलोनी केँ लौंडों कां टनटना जाता हैं.केसे मनाया उनको.!!!!"
N: "सचकहा तुमने.घास नहीं डालती वोँ.अपनी सुंदरता कां बोहुत घमण्ड थां कमीनी कों.वोँ तोँ एक् बार चुड़ैल कि चोटी मेरेहाथ लग गई, तब सें जब मर्ज़ी तब टांगे खुलवा लेती हूं उसकीउस ठिगने कल्लू केँ सामने.!!"
"चुड़ैल कि चोटी.क्याँ मतलब.??"
N: इतराते हुए"अरे वोँ एक् बार किटी बर्थडे पार्टी मे उनके मोबाइल पर्र कुछ उनकी नंगी सेल्फी औऱ पति कि पतली नुंनी चूसते हुए फोटोज़ मुझेदिख गए ग़लती सें.वोँ मैंने चुपके सें स्वयं कों भेज लिए.उसके बाद एक् नए jio नम्बर सें उसकोभेज कर अपनी मनमानी करवाती हुँ साली सें.औऱ वोँ कल्लू रोज़ केँ आधे लीटर कि स्थान पूरा पौना लीटर देता हैं मुझको.!!"
ओह मादरचोद.इतनी सन्दर घरेलू स्त्री कों ब्लैकमेल करती हैं यह बेहन कि लौड़ी.वोँ भि 250ml दूध केँ लिए.!!!कुछ तोँ इलाज करना पड़ेगा इसका।
"अच्छा अगर कल्लू कों पुलिस मे पकड़ा देती वोँ तौ.आप् भि तौ फंस जाती.?"
N: "अरे नहीं.बड़ी भोली औऱ शरीफ हैं ललिता जी.औऱ उनके पति भि बेचारे सीधे साधे नीरस शख्स.उनको यहसभी पुलिस कां झमेले सें बहोत डर लगता हैं.औऱ समाज मे इज्ज्ज़त जाने कां डर उनकोजान जाने सें ज़्यादा हैं.! औऱ उनकोपता हैं कि ब्लैकमेलर कल्लू नहींकोई औऱ हैं जोँ कभी भि इनकोनेट ओर नंगाकर सकता हैं.कल्लू कि तोँ मैंने उनको नंगी फोटो भेजी थि यहबोल कर केँ इससे चुदना हैं आपको.तोँ बेचारी मनमार केँ कल्लू कां लंड चूसती हें.!"
"दिखाना ज़रा वोँ तस्वीरे.बड़ा करारमाल हैं ललिता जी.!"
निराली भाभी नें बगल मे पड़े अपने मोबाइल पऱ एक् फोल्डर खोलकर ऐसे इतराते हुए मुझे दिया जैसे UPSC पास होने कां मार्कशीट होँ.!.उफ्फ बहनचोद.शपथ उड़ान झल्ले कि.क्याँ जिस्म थां ललिता जी कां। 45 कि होंगी पर्र 30 कि औरतें फेल उनके आगे.क्याँ पपीते जैसी चूँचिया औऱ तरबूजे जैसे गाँड़.सफेद मलाई बिल्कुल.बोले तोँ बिल्कुल रात कों डालो सुभह निकालो टाइप्स गदराई तबाही.
!!!
उन्ही पिक्स केँ बाद उनको उनके पति कां मरियल नुंनी खुशी खुशी चूसते देख उनके क़िस्मत पर्र थोड़ा अफसोस भि हुआ.ऐसी माल केँ नसीब मे ऐसा मरियल चूहे जैसा लंड.काश.
अगले हि पिक्स नें तोँ जैसे झांट सुलगा दि अपुन कि.वोँ साढ़ेचार फुट कां मोटा कल्लू अपने गुटखे वाले दांत दिखाए नंगाखड़ा थां.औऱ उसका लुलु उसकेघड़े जैसे तोंद केँ नीचे छुपाखड़ा थां.! इस हरामी कि ऐसी भाग्य.इसके तोँ पुरखों केँ गाँड़ मे चरस न् बो दिया तोँ अपुन कां नाम "गांडू-स्वामी" रख लूंगा शपथ सें.!!!
चुपके सें मैंने वोँ सारी पिक्स स्वयं कों भेजकर उस मोबाइल सें डिलीट करदीं। औऱ फोल्डर सें निकलकर मोबाइल वापसकर दिया "औऱ कंहीरखा हैं क्याँ ललिता जी कि तस्वीरों कों.?? सावधान रहना किसी औऱ नें देख लिया तौ फंस जाओगी.!"
N: "अरे पागल समझा हैं क्याँ.बस इसी मोबाइल मे मेरे सारेराज़ रहते हैं.!!"
"हम्म.अच्छा औऱ कौनमाल हैं वोँ बताओ.??"
N: "लगता हैं पूरी कॉलोनी कि औरतों कों भोगना हैं इसको.हि हि हि.औऱ होँ भि क्यो नं.ऐसा धारदार औज़ार हौ जिसका उसका तौ बनता हैं.देखू औऱ कौन.ह्म्म्म.चलो तुम् भि क्याँ याद करोगे.ऐसी माल फँसवाऊंगी जोँ आज तक केवल अपने देवरु सें हि सेट करवाई हैं मैंने.!"
"अच्छा.कौन.??"
N: ईतरते हुए.अरे अपने देवर जी कल्पेश कि साली शेफाली.वोँ पारेख जी कि पत्नि.!
"क्याँ.!!! शेफाली जी.आपने सेट करवाई मतलब.???"
N: "अरे कल्पेश कों मैंने हि प्लान बताया.मैंने हि विवाह केँ एक् दिन पहलेजूस मे पेनकिलर औऱ हल्के नशे कि गोली मिलाकर पिलाई थि शेफाली कों.जिससे ज़्यादा चीखे नहीं चुदते टाइम.औऱ नाच केँ बादजब वोँ सुस्ताने अपने कमरेजा रही थि तब मैंने झट सें उसके कमरें मे घुसकर कुंडी लगा ली.वोँ बेचारी अपनी जीजी केँ कमरे मे जा लेटी.लाइट बल्ब मैंने पहले हि निकाल रखीं थि.बस मेरा कमीना देवरु इशारा पाते हि चढ़ केँ रगड़ दिया उसको.!"
मेरा पाराचढ़ रहा थां.गुस्से केँ मारे मुंहलाल औऱ कान सें धुआं निकने लगा.लडकिया औऱ औरतें मैंने भि बहोत चोदी थि पर्र धोके सें आज तक नहीं.!!इस कल्पेश कि मां चोदनी हैं अब तोँ.!
थोड़े गुस्से सें "आप् औऱ आपका देवर जी दोनों बड़े मादरचोद किस्म केँ हौ.!!"
N: खिलखिलाते हुए "हि हि हि.देखो तोँ केसेठरक केँ मारे मुंहलाल हौ गय़ा हैं तुम्हारा.!! वैसे वोँ कमबख्त शेफाली हैं भि ऐसी कि किसी कां भि कड़ाकर दे.हाहा हा.औऱ मादरचोद सें याद आया.कल्पेश नें तोँ सच मे शेफाली कि मां हि चोद दि.अगले दिन शेफाली कि मां कों भि बिल्कुल ऐसे हि तरीके सें फांस केँ रगड़ दिया कमीने नें.!!"
"आपको शेफाली जी औऱ उनकी मम्मी केँ संगऐसा नहीं करना चाहिए थां."
N: "अरे तुम् क्यो क्रोध हौ रहे होँ.तुमको भि दिलवा दूंगी शेफाली कि.वैसे भि बड़े नखरे थें महारानी केँ विवाह सें पहले.देखो केसे एक् छोटी लुल्ली वाले सें विवाह करवा दि उसकी औऱ उसे स्वयं केँ ठोकू जीजा सें चुदवा दिया.!! हि हि हि हि.हाय रे ठाकुर जी.मर गई मे। बचाओ.!!!
निराली भाभी कां पीड़ायुक्त क्रंदन गूंजउठा पूरे रसोई मे.मे दांत भींचे उस गुजरातन कि कमरकस केँ थामेहचक केँ चाँप दिया थां अपने पूरे हलब्बी लौड़े कों उनकी बुर मे जड़ तक "मे धोखे सें नहीं चोदता हु समझी मादरचोद रंडी.जब चोदता हु तौ सामने सें ऐसे.!!!
Kitta mast likhte hu sir."fatfati phir say chl padi" bi aapne hi likhi thi kya jisme ldka apni chachi ko chodta hain? Writing vesi hi lag rhi hain
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
"क्याँ.!!! शेफाली जी.आपने सेट करवाई मतलब.???"
N: "अरे कल्पेश कों मैंने हि प्लान बताया.मैंने हि विवाह केँ एक् दिन पहलेजूस मे पेनकिलर औऱ हल्के नशे कि गोली मिलाकर पिलाई थि शेफाली कों.जिससे ज़्यादा चीखे नहीं चुदते टाइम.औऱ नाच केँ बादजब वोँ सुस्ताने अपने कमरेजा रही थि तब मैंने झट सें उसके कमरें मे घुसकर कुंडी लगा ली.वोँ बेचारी अपनी जीजी केँ कमरे मे जा लेटी.लाइट बल्ब मैंने पहले हि निकाल रखीं थि.बस मेरा कमीना देवरु इशारा पाते हि चढ़ केँ रगड़ दिया उसको.!"
मेरा पाराचढ़ रहा थां.गुस्से केँ मारे मुंहलाल औऱ कान सें धुआं निकने लगा.लडकिया औऱ औरतें मैंने भि बहोत चोदी थि पर्र धोके सें आज तक नहीं.!!इस कल्पेश कि मम्मी चोदनी हैं अब तोँ.!
थोड़े गुस्से सें "आप् औऱ आपका देवरु दोनों बड़े मादरचोद किस्म केँ हौ.!!"
N: खिलखिलाते हुए "हि हि हि.देखो तोँ केसेठरक केँ मारे मुंहलाल होँ गय़ा हैं तुम्हारा.!! वैसे वोँ कमबख्त शेफाली हैं भि ऐसी कि किसी कां भि कड़ाकर दे.हाहा हा.औऱ मादरचोद सें याद आया.कल्पेश नें तोँ सच मे शेफाली कि मां हि चोद दि.अगले दिन शेफाली कि मां कों भि बिल्कुल ऐसे हि तरीके सें फांस केँ रगड़ दिया कमीने नें.!!"
"आपको शेफाली जी औऱ उनकी मम्मी केँ संगऐसा नहीं करना चाहिए थां."
N: "अरे तुम् क्यो क्रोध होँ रहे होँ.तुमको भि दिलवा दूंगी शेफाली कि.वैसे भि बड़े नखरे थें महारानी केँ विवाह सें पहले.देखो केसे एक् छोटी लुल्ली वाले सें विवाह करवा दि उसकी औऱ उसे स्वयं केँ ठोकू जीजा सें चुदवा दिया.!! हि हि हि हि.ओह ठाकुर जी.मर गई मे। बचाओ.!!!
निराली भाभी कां पीड़ायुक्त क्रंदन गूंजउठा पूरे रसोई मे.मे दांत भींचे उस गुजरातन कि कमरकस केँ थामेहचक केँ चाँप दिया थां अपने पूरे हलब्बी लौड़े कों उनकी बुर मे जड़ तक "मे धोखे सें नहीं चोदता हु समझी मादरचोद रंडी.जब चोदता हु तौ सामने सें ऐसे.!!!
एपसोड #21
श्रीमती निराली पटेलजी बेहन कि लौड़ीऐसे चीखीं केँ जैसे बच्चेदानी फेफड़ों केँ बीचजा घुसी हौ.!
"આ નિર્દય છોકરાએ મને મારી નાખ્યો.મારી યોનિ ફાટી ગઈ છે.બહાર કાઢો.હું મરી ગયો। !!હવે હું મારા ઠાકુરજીને કયો ચહેરો બતાવું
મારી ચૂતનો નાશ કર્યો પાપી.!"
मे : गुस्से मे "गुजराती मे गरिया रही हैं हैं मादरचोद.यह लें. " ठापठाप ठाप ठपाक.!
दोनों घुटने मोड़कर बेदर्दी सें उस गदराई गुजरातन कि कांपती बुर कां चबूतरा बनाने लगा अपुनठाप ठापठाप ठपाक.!
" हायराम माँ.उफ्फ.ग्ग्गाली नहीं दि शपथ सें.मे बोलि कि फट गई मेरी.निकाल लो.क्याँ मुंह दिखाउंगी अपने ठाकुर जी कों.
ठापठाप ठाप ठपाक.मर गई, मे अरे.!!
मे जबड़े भींचकर ताबड़तोड़ चाम्प्ता गय़ा उस कमीनी कि बुर। उसकी करान्हे कान मे जैसेशहद सि घोलरही थीं.!"अहह पापी.रुक जा.उफ़्फ़ मां.ठाप ठाप ठाप.नरक जाएगा औऱ मुझे भि भेजेगा.मेरी प्रतिज्ञा तुड़वा दि.! अबउस पंडित कों बुलवा कर शुद्धि करवानी पड़ेगी हाई। उफ्फ.!
मे: "नाटक क्योकर रही हौ.ठाप ठापठाप कितनों सें तौ ठुकवा चुकी हौ.ऐसे चिल्ला रही हैं जैसेनथ उतररही हौ इनकी.!"ठाप ठापठाप ठपाक.!
NP: "ओह.अरे वोँ सभी औऱ उनके वोँ इंसानों जैसे थें.तुम्हारा गधे जैसा हैं.ठाप ठाप ठाप..ओह अंदर तोँ जैसे औऱ फूल गय़ा हैं.क्या बात है कल्पेश। अब तेरी भाभी कि नलकीनहर बन गयीँ, रे.हहहह हह.!"
चुदी तौ बहुतों सें थि, परन्तु सब पुरुषों कि लुल्लियां औसतआकर कि थि.निराली भाभी दांत भींचकर दर्द सें दोहरी हुईँ जारही थि.तभी गुजरातन नें मुझे अपनेऊपर खींच लिया औऱ मेरीपीठ पऱ पूरेदम सें उंगलियों सें कुरेदने लगी.मे मन हि मन सोचा "Ohh.trying too enjoy when R*pe iss inevitable.सही हैं.ठाप ठापठाप.!
NP: बुदबुदाते हुए "क्या बात है.हाय.इन नाखूनों कों भि आज हि काटना थां.नकोट भि नहींपा रही हूं.!"
ओह इसकी भैंस कि गाँड़.नकोटेगी मादरचोद। रुक.!
एक् हाथ उसकी कांख केँ नीचे सें लेँ जाकर उनके बालों केँ ढीलेपड़े जूड़े कों दबोचकर कस केँ नीचे खींचा तोँ दर्द केँ बिलबिलाते हुए बेहन कि लौड़ी कां सीना धनिष कि भांति ऊपर कों आँ गय़ा औऱ अपुन उसकी एक् चूंची दूसरी हथेली मे पूरी ताकत सें मींजते हुए उनके निपल कों काटने लगे.!
ठापठाप ठाप
अब उस चुदाई मे दर्द कि स्थान मज़े नें लेनी शुरुआत कर दि थि क्योंकि निराली भाभी कि बुर नें गीलापन ला दिया थां औऱ ठाप कि आवाज़े अब'फचफच फच' मे परिवर्तित होने लगीं थि.! निराली जी आप् आंखेबंद कियेकुछ धीरे-धीरे धीरे-धीरे बुदबुदाने लगीं थि."હું આજે એક વાસ્તવિક માણસને મળ્યો છું.કેટલું મોટું કદ.!!!"
तभी अचानक मेरे कंधे पऱ एक् हाथआकर रुक.बगल मे देखा तौ देखता हि रह गय़ा.रमा रसोई सें चीख़ें सुनकर जल्दबाज़ी मे जिस्म पोंछकर सिफर साड़ी लपेटकर भागीचली आयी थि.वोँ हांफरही रहीसो उसकी चूँचिया साड़ी केँ अंदर सें ऊपर-नीचे हौ रही थि.वोँ गीले बाद.वोँ कजरारी आंखे.बिल्कुल पहले केँ ज़माने केँ किसी दिव्य ऋषि कि पतिव्रता पत्नि सें लगरही थि.जोँ गगरी सें पानी भरनेनदी किनारे पंहुची हुई हौ.!
उसकोउस अवस्था मे देखते हि बुर मे लंड कि चाल धीमे पड़तेहुए रुक सि गई,.अपुन तोँ जैसेउस पुरातन-मोड मे आँ गए औऱ स्वयं कों उस रँगमिजाज़ इंद्र कि भांति समझने लगा जौ मंत्रमुग्ध उस ऋषि-पत्नि कि सुंदरता मे लीन होँ चुका हौ.!
[हरामी मोडऑफ]
अपनेमजा मे आई रुकावट नें निराली भाभी कि मुख-मुद्रा मे परिवर्तन सें ला दिया.वोँ अपनी बन्द आंखे खोलती हुई देखी तौ रमा कों देखकर ठिठक गयीँ,.जैसे परीक्षा मे पर्ची पकड़े जाने औऱ हरामी विद्यार्थी होँ जाता हैं.!!
रमा:"यह क्याँ कररहे हें आप्.जब शपथली हैं भाभी नें तौ क्योशपथ तुड़वा रहे हें इनकी.चलिए निकालिये.!!"
मे मंत्रमुग्ध सें उस सुंदरी कि ओर देखते हुए उसके निर्देशानुसार अपने लिंग कों उस पराई योनि केँ आलिंगन सें मुक्त करतेहुए निष्कासित कर लिया.!"पकक."
NP: कुछ उलझन मे "रर रमा.रहने दो.कर लेनेदो इनको अपनेमन कि आज.पहली बार हैं.अब आगे सें नहीं करेंगे यह." औऱ मेरीओर देखते हुए "आप् डाल लीजिये.आपको अधूरा नहींछोड़ सकती.!!"
मेरेमन मे मधुर सितार कां वादन होँ उठा.औऱ मे हर्षोल्लास मे अपने लिंग कों पकड़कर निराली जी कि योनि मे वापस स्थापित कर दिया.परन्तु इससे पहले कि ग्रहप्रवेश पुनः हौ पाता.
रमा: "अरे अरे.क्याँ कररहे हें.बोला नं.हटिये लंड भाभी कि बुर सें.!!!
डिस्कवरी मे एक् कुत्ते केँ ट्रेनर कों देखा थां.जोँ भूखे कुत्ते केँ सामने बिस्कुट रखकरउसे नां खाने कां निर्देश देता.औऱ वोँ बेचारा कुत्ता "कुंई कुंई कुंई" करतेहुए लार टपकाते हुएबस बैठकर बिस्कुट कों टकटकी लगाए देखता रहता.
यहां वोँ ट्रेनर रमा थि.औऱ मे वोँ कुत्ता.मैंने अपने लिंग कों निराली जी कि योनि सें हटा लिया कुंई कुंई कुंई.
(इसकेआगे कां लिखा थां जौ इस बेहन कि लौड़ी वेबसाइट केँ रिफ्रेश होने सें गधे कि गाँड़ मे चला गय़ा.फिन सें वापसलिख करभाग करूँगा। तब तक पुराने एपिसोड पढ़कर हिलाइये.!)
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई - Kahani ab aur interesting hogi
Relavant source : click here