नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
रमा:"अरे जात-पात मानते हें याँ नहीं.आप् ठहरे ऊंची जाति केँ औऱ हम् नीची जाति केँ.!"
मे: "यहसभी कोरी बकवास हैं.मे तुमको अपने बराबर कां मानता हूं.!" औऱ बोलकर चुस्की लगाते हुए उसके कंधे औऱ गले केँ बीच एक् हथेली रखतेहुए कप वापस उसके होंठो पर्र लगाया.वोँ एक् अजीब असमंजस मे मेरी आँखों मे देखरही थि.मैने मुस्कुराते हुए आंखों सें इशारा किया"कप कॉफ़ी तुम्हारे संग हि पीनी हैं मुझे.!"
रमा नें भि चुस्की लगाई.औऱ हम् दोनों नें मिलकर वोँ कप समाप्त कि.
बड़ी मीठी सें शांति थि.दोनों एक् दूसरे कि आंखों मे देखते रहे.इसके आगेकुछ बढ़ने कां दिल नहीं किया.क्योकि उसकेलिए दिल मे एक् कृतज्ञता सि थि.औऱयह कुछऐसा थां जौ मेरे जैसे अखण्ड चोदू केँ स्वभाव केँ विपरीत थां.! मे बस उसके कंधे कों एक् हाथ सें पकड़ेरहा औऱ दूसरे हाथ सें उसके कंधे औऱ गले केँ बीचपकड़ केँ उसकीकान केँ नीचे अंगूठा घुमाता रहा.!यह अनैच्छिक हि थां उस वक़्त.
रमाकुछ टाइम पश्चात कुछ असहज सि हौ गयीँ,.वोँ उठी औऱ बिनाकुछ कहेचली गयीँ,.!
एपसोड #16
रमा केँ इस अजीब व्यवहार केँ बाद सारादिन सोचता रहा मे। औऱ फिनसाम हुईँ। चूंकि मे अपने स्वास्थ कों लेकर सदैव हि बहुत जागरूक रहा करता थां तोँ विटामिन टेबलेट्स औऱ कुछ आयुर्वेदिक औषधियां लेता रहता थां। मेरा स्टॉक थोड़ाकम हुआदेख करबगल वाली मेडिकल शॉप पर्र पंहुचा.वहां दुकानदार एक् कस्टमर कां बिल बनाते हुए उसको एक् विचित्र सि मुस्कान देरहा थां.
मैंने एक् झलक देखा तोँ वोँ उसकेलिए 'Sildenafil Citrate' कि गोलियां पैककर रहा थां.मैंने एक् टेढ़ीनज़र मे देखा तौ मेरे उम्र कां लड़का खड़ा थां हाथ मे दारू कि बोतल कां पैकेट लेकर.उससे गांजे कि बड़ी तीव्र गंध आँ रही थि.!
उसने दुकानदार सें बोला "भैया वोँ वालीदवा भि आई क्याँ स्टॉक मे.?"
दुकानदार : "भैया कल आँ जायेगी.पऱ आप् पहले अपनी वोँ आदत छोड़िये तबकुछ काम करेगी वोँ.औऱ वैसे भि.आपको क्याँ ज़रूरत.आप् तोँ बस हवाई-फायर करते हें नाँ.??"
लड़का: मेरी उपस्थिति भांपते हुए "भैया बाद मे डिसकस करते हें.!" औऱ पैसे देकर निकल गय़ा.
उसके निकलने केँ पश्चात मैंने दुकानदार शैलेश जी सें मुस्कुरा कर अपनी विटामिन कि गोलियों औऱ आयुर्वेदिक औषधियों कां फ़र्रा दिया.जब वोँ बिलिंग कररहे थें तौ मैनेपूछ हि लिया "शैलेश भइया.यह हवाई-फायर वाला क्याँ सीन हैं.??
शैलेश भि जिम केँ शौकीन थें औऱ मेरे हि जिम मे आते थें.वोँ मुझसे वर्कआउट टिप्स लेते रहते थें.वोँ बोले"अरे आप् हि कि सोसाइटी मे रहता हैं यह.औऱ (धीरे-धीरे सें इधरउधर देखकर) इसका इसकी भाभी सें चक्कर हैं.पऱ अंदर डिस्चार्ज नहीं करता.!"
एंटीना खड़ा होँ गय़ा अपुन कां."क्याँ नाम हैं.?"
शैलेश भइया: "पूरानाम तौ पता नहीं.मुझसे हि पूछ-पूछ अपनी दवाएं लेता हैं.इसलिये खुलकर बताता गय़ा मुझे एक् दिननशे मे कों.'गुप्ता' लिखता हैं नाम केँ आगे."
ईस्की मां कां साकीनाका.गुप्ताइन केँ देवर जी हैं यह झींगुर.!!!
मे: "औऱ वोँ कौन सि दवा कां पूछरहा थां.??"
शैलेश भइया:"अरे भैया.गंजेड़ी हैं यह साला.वीर्य-शून्य होँ गय़ा हैं इसका.मैंने हि टेस्ट करवाया थां इसका.औऱ उसी गांजे कि वजह सें इसकाअब खड़ा भि नहीं होता मैनफोर्स कि डबलडोज़ केँ बिना.!
तोँ ई मामला हैं बहनचोद.गुप्ताइन कों पता हैं कि देवरु नल्ला हैं.तभी बेख़ौफ़ उसके फुससी-लौड़े पे उछल-उछल करमज़े लेँ रही हैं.वो रे हरामन.!
मे: "ईस्के भइया कि क्याँ स्टोरी हैं.?"
शैलेश भइया: "खानदानी अमीर हैं भइया.पड़ा रहता हैं शराब केँ नशे मे वोँ अपनी रखैल केँ घऱ.एक् कंटीली टेलर नें फंसाया हुआ हैं इसको.मनीषा नाम हैं उसका.एक् अलग फ्लैट लें रखा हैं गुप्ता जे नें अय्याशी केँ लिए.! वोँ मनीषा कां पति गांजा सप्लाई करता हैं.उसी नें गुप्ता केँ छोटे भइया कों गांजे कि लत लगवाई हैं.!
"मनीषा.कंही रमा कि मनीषा-दि तोँ नहीं.??"
ईनसभी घटनाक्रम नें अपनीरात कों एक् मस्त ख्वाब केँ लिए सजधजकर कर दिया थां.! रात केँ ख्वाब मे देखा वोँ गंजेड़ी गुप्ता अपनी भाभी कों कुतिया बनाकर चोदरहा थां अपनेडबल डोज़ कि गोली खाकर.!
सुभह थोड़ी जल्दनीड खुली दरवाज़े कि घण्टी सें.आंख मलतेहुए गय़ा, औऱ दरवाज़े केँ खुलते हि सुभह कां मौसमबन गय़ा.वोँ डीप ब्लाउज़.वोँ लम्बे बाल.वोँ कजरारी आंखे.वोँ मदमस्त जिस्म.वोँ मुस्कान औऱ थोड़ा पसीना.
अगला दृश्य:
मे आंखेबंद कर केँ मस्ती भरी सिसकिया लें रहा थां सोफे पऱ बैठ कर.औऱ लुंगी कि आड़ मे बाबूराव मस्तगरम मुंह कि चुसाई कां परमानंद लेँ रहा थां.! मेरे एक् हाथ मे एक् बड़ी गदराई चुंची औऱ दूसरे मे घने बैलों कां जूड़ा.!!हचक कर लंड कों मुंह मे खिंचकर पटकने कां आनन्द लें रहा थां.!
हर झटके सें वोँ मंगलसूत्र झटक केँ गुररहा थां उन मदमस्त पसीने सें लथपत मोटी चुंचियों पर्र.! किसी औऱ कि 'लाइसेंसी माल' कां खूबसूरती पीने कां मज़ाकुछ अलग हि हैं मादरचोद.तभी इस उत्कृष्ट गाली 'मादरचोद' कां ईजादहुआ होगा.!उन परायी शादीशुदा चुंचियों कों कस केँ मींजने पर्र जोँ 'आन्ह' निकली उसने लंड कों मुंह केँ अंदर झटके देने शुरुआत करदिए.!!!
थोड़ा ज्यादा तेज़ी सें जीभ पर्र रगड़ सें हल्का सां कराह उठा.आखिर ज़ख्म पूरा भरने मे थोड़ारह जौ गय़ा थां.!
मे: "अहह मादरचोद.जलना भि थां तौ पूरे जिस्म मे बसयह लौड़ा हि.पर्र कोई नहीं.बहोत हुआयह चन्दन.अब तोँ बाकी कां यह मुंह कि गर्मी हि पूरा करेगी.!!"
मेरे दाहिने पांव केँ अंगूठे सें, जौ साड़ी केँ नीचे सें बुर मे फंसा थां, बुर केँ अंदर-बाहर् करना शुरुआत किया.औऱ थोड़ी हि देर मे लौड़े केँ चूसे जाने कि 'सडप-सडप' नें बुर कि फिंगरिंग कि फच-फच सें मिलकर एक् मधुर म्यूज़िक कों जन्मदे दिया.! लंड बस फटने कों थां.3 दिनों सें उसे रिलीस नहीं मिला थां.अपुन नें बालो केँ जूड़े कों औऱ कस केँ जकड़ केँ लंड कों गले कि गहराई मे उतारना चालूकर दिया.!
उस सांस कि घूँटने कि "गू-गू' नें कानो मे शहद सें घोलरखा थां.औऱ तभीउस गुप्ताइन केँ मुख पऱ फैले उसकेउस नल्ले देवर जी केँ शुक्राणु-हीन माल कां सोचते हुए अपुन नें लौड़े कों निकाल कर एक् तेज़ धारदार फेशियल कर डाला.एक्-दो-तीन-औऱ चौथेधार कों मुंह केँ अंदरडाल कर स्खलित होँ गय़ा.!!
तभी.दरवाज़े कि घण्टी नें गांड मे एक् विस्फोट सें कर दिया.!
मे: "तुम् रसोई मे जाओ.मे देखता हूं."
लुंगी नीचे करके गय़ा दरवाज़ा खोलने.औऱ दरवाज़ा खोलते हि गोटेगले तक आँ गए.!
रमा अपने वक्त सें आधे घण्टे पहलेआकर खड़ी मुस्कुरा रही थि.!
मेरी 'बत्ती-डाउन' हौ चुकी थि.गला सूखरहा थां.रमा नें भड़ सें बाकी कां दरवाजा खोला औऱ मुस्कुराते हुए अंदर आँ कर चप्पल उतारी.!
मे: "क.क। क्याँ हुआआज इतनी जल्द.??
रमा: "क्यो.मे जल्द नहीं आँ सकती क्याँ.??"
मे: "न्.नं.नहीं.मेरा मतलब.वोँ.वोँ."
रमा कां एंटीना 'एक्टिव' हुआ.औऱ ढले हि लम्हा उसने नीचे देखा तोँ लुंगी मे बने धब्बे कों देखकर मुस्कुराई.
रमा: "इसीलिए जल्दआई। क्योके पता हैं मुझको केँ आजकल केँ जवान मुयों कां हल थोड़ा सुभह हि सजधजकर हौ जाता हैं.सोचा कि आपके सजधजकर होने सें पहले आँ करलेप लगा दु.पऱयह आपका मुयाँ बदचलन बाबुराव तोँ पहले हि उल्टी किये बैठा हें.! चलिए हटिये अब."
वओ अंदर जाने लगी.औऱ मे बकरे कि तरह मिमियाते हुए बोला."नं.न्.नहीं रमा.व.व.वोँ.थोड़ा बाद मे आओगी क्याँ.कसरत करनी हैं.उसके बाद तुम् आँ जाओ.??"
रमा थोड़ी ठिठकी.फिन कुछसोच कर मेरीतरफ देखकर एक् टेढ़ी मुस्कान देती हुईँ अंदर कि ओरबढ़ गयीँ,."यह शेफाली भाभी भि नां.सब्र नहीं होता इनसे भि.!"
दीवाली केँ 21 फायरा वाले पटाखों कि गूंज मेरी गांड सें आनां शुरुआत होँ गय़ा थां.!!!!!!
फटफट फट.फटाक.!!!!
बिल्कुल आपकेनाम केँ भांति चुंची-दाबक अपडेट्स डाले हैं.आशा हैं पढा होगा आपने
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मे: "क.क। क्याँ हुआआज इतनी जल्द.??
रमा: "क्यो.मे जल्द नहीं आँ सकती क्याँ.??"
मे: "नं.न्.नहीं.मेरा मतलब.वोँ.वोँ."
रमा कां एंटीना 'एक्टिव' हुआ.औऱ ढले हि लम्हा उसने नीचे देखा तोँ लुंगी मे बने धब्बे कों देखकर मुस्कुराई.
रमा: "इसीलिए जल्दआई। क्योके पता हैं मुझको केँ आजकल केँ जवान मुयों कां हल थोड़ा सुभह हि सजधजकर होँ जाता हैं.सोचा कि आपके रेडी होने सें पहले आँ करलेप लगा दु.पर्र यह आपका मुयाँ बदचलन बाबुराव तौ पहले हि उल्टी किये बैठा हें.! चलिए हटिये अब."
वओ अंदर जाने लगी.औऱ मे बकरे कि तरह मिमियाते हुए बोला."न्.न्.नहीं रमा.व.व.वोँ.थोड़ा बाद मे आओगी क्याँ.कसरत करनी हैं.उसके बाद तुम् आँ जाओ.??"
रमा थोड़ी ठिठकी.फिन कुछसोच कर मेरीतरफ देखकर एक् टेढ़ी मुस्कान देती हुईँ अंदर कि ओरबढ़ गई,."यह शेफाली भाभी भि नां.सब्र नहीं होता इनसे भि.!"
दीवाली केँ 21 फायरा वाले पटाखों कि गूंज मेरी गांड सें आनां शुरुआत हौ गय़ा थां.!!!!!!
फटफट फट.फटाक.!!!!
भाग #17
मे बदहवास सें रमा केँ पीछे भागा.रसोई तक पंहुचते हि मुरझाये लंड कां पैरालिसिस पैरों मे भि होँ गय़ा.रमा मुंह खोलेउस स्त्री कों देखरही थि जोँ सड़के सें सने चेहरे कों लिए हाथो मे फ्रिज सें निकाली हुइ मिल्क-बादाम कि बोतल कां पहला घूंटलिए खड़ीरमा कों आंखे फाड़ेदेख रही थि.!
मुंह तोँ पोंछ लेती बेहन कि लौड़ी.लंड केँ दूध-मलाई कों चखकर मिल्क-बादाम कि याद आँ गई, इसको.!!
रमा आश्चर्य केँ उसभाव कों लेँ कर मेरीओर घूमी.औऱ पता नहीं क्यो.मेरा एक् अनजाने डर केँ मारेपाद निकलने लगा मादरचोद.!!
मे: "अरे.य.य.(पों).यह मेरे दफ़्तर मे (पों) हैं.द.द.दो दिन नहीं गय़ा नं.तौ मिलने आई थीं.इनका नाम हैं (पों).
रमा: "निराली.पता हैं मुझे." उसकेयह बोलते हि मेरी चौथीपाद रुक गई, औऱ मेरे मुंह सें एक् 'डकार' केँ रूप मे निकलआयी.!!
ईसबार आश्चर्य सें मुंह खुलने कि मेरी बारी थि.जीभ तालू सें चिपक गयीँ,.औऱ मेरी बेवफा गाड़ मे फटफटफट फटाक कि संकुचन केँ संग बाकी कि सारीबची पाद एक् संग'पट पटपटपट पटाक' करतेहुए एक् संग निकल गई,.!!
रमा: निराली भाभी कि ओर प्रश्नवाचक चक्षुयों कों केंद्रित करतेहुए "हाँ तौ निराली भाभी.इधर केसे आनांहुआ.?"
मिसेज़ निराली पटेल (NP): "व.व.वोँ रमा.हम् सहकर्मी हें.इनकी तबियत खराब थि.तौ देखने चलीआयी थि.औऱकुछ नहीं.!" एक् हाथ सें अपने अधखुले बालों केँ जुड़े कों सम्भालती हुईँ.
रमा: "देखने आए थि तौ यह चेहरे पर्र क्याँ 'फेयरएंड लवली'पोत कररही हैं.हम्म.??"
NP: "अरे व.व.वोँ तौ यह मिल्क बादाम कि मलाई हैं.पीते हुएइस बोतल सें छलक गयीँ,.!!"
रमा:"हाँ। वोँ तोँ पता हैं.इस मुई करमजली बोतल सें अक्सर ऐसे हि छलक जाती हैं मलाई.!"ये बोलकर मेरीओर एक् 'कोल्ड-व्यू' ऐसा दिया कि मे बिल्कुल जड़वत हौ गय़ा.बिल्कुल वैसे हि जैसेउस दिन अपने कमरे मे पलंग पऱ नंगीलेट कर सुस्ताती मिसेज़ मालवीया हौ गयींथीं जब अपने पापा द्वारा कि गई कमरतोड़ चुदाई कों देखकर, उनके जाने केँ पश्चात, मे पर्दे केँ पीछे सें अपना मोटा हलब्बी लौड़ा हिलाते हुए निकलआया थां.!!!
रमा: उनकीओर वापस घूमते हुए "तोँ क्याँ अपनेहर बीमार सहकर्मी कों मिलते आते टाइम आप् इसीतरह अपनेथन ब्लाउज़ सें निकाल कर उनका उपचार करती हें.??"
मिसेज़ निराली कां ध्यान अपनी खुली झूलती हुईँ चुंचियों पर्र गय़ा तौ वोँ हड़बड़ाहट मे अपने ब्लाउज़ केँ हक लगाने लगीं.!
यह बेहन कि लौड़ी पक्का मक्सी मे बगैर ब्रा केँ घूमती होगीघऱ मे.तभी इसको अपनी झूलती टंकियों कां एहसास नहींहुआ होगा.NP कों अपनी भलभलाती चुंचियों कों उसतंग ब्लाउज़ मे समेटते देख बाबुराह नें कुछ ठुंकि सि खाई.अपुन नें थोड़ा बीच-बचाव करने कि सोची.आखिर मिसेज़ पटेल कों उतना वक्त तोँ देना बनता थां जितने मे वोँ अपने पति कि बेशकीमती धरोहर कों अपनेउस पारदर्शी ब्लाउज़ मे समेट सकें.!
मे: "र.र.रमा.तुम् पहचानती होँ निराली जी कों.??"
रमा: एक् विचित्र मुस्कान लातेहुए "पहचानती.?? जानती हौ बड़े अच्छे सें इनको.यह शेफ़." बोलते हुएकुछ रुक सि गयीँ,.औऱ फिनकुछ सोचकर "आपकी सोसाइटी मे रहती हें शेफाली भाभी.आप् नहीं जानते उनको.उनके कमलेश जीजा केँ बड़े भइया कि धर्मपत्नी हें.शेफाली भाभी केँ यहांकाम करतीहु मे.!"
अरे मादरचोद.!!! ऊपर वाले केँ घऱ मे नाँ तौ देर हें नाँ अंधेर.यह कमलेश हरामी जीजा कों दि गई, दिल सें गालियों केँ परिणामस्वरूप उसकी मम्मी नहीं तोँ मम्मी-समान-भाभी कों मेरे लंड पर्र आँ पटक दिया.11 रुपये कां प्रसाद चढ़ाया जाएगा कामदेव कों कल केँ कल.इसके संग हि उन वाक्यों कि स्मृति नें कानों मे शहदघोल दिया.:
SP: "धत्त.औऱ लड़कियों कि तरहसमझ लिया हैं क्याँ मुझे.मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं थां विवाह सें पहले.शरीफ खानदान सें हूं समझे.वोँ तौ बस ग़लती सें होँ गय़ा थां.कई लड़के आगे-पीछे घूमते थें मेरेपता हैं, पऱ मजाल हैं कि मैंने कभी किसी कों भाव दिया हौ कभी.वरना आजकल तौ लड़कियां सुहाग-रात मे फूल कि बजाय पूरा गुलदस्ता बन केँ जातीं हैं.वोँ अपनी निराली भाभी कों हि लें लो.विवाह सें पहले अपनी पड़ोस केँ बचेलर-फ्लैट केँ 5-5 लड़कों सें खूँटा गड़वाये फिरती थि औऱ अभि एक् बेटी कि विवाह करवाने केँ बाद भि वोँ मुये यादव दूधवाले केँ लड़के कों पावभर एक्स्ट्रा दूध केँ बदले अपने घाघरे मे घुसवा लेती हैं.!!! "
(भाग 10 एवं 11 पढ़े)
दुनिया बड़ी छोटी हैं शपथ सें मादरचोद.! खासकर यह गुज्जु महिलाओं कि.किन्ही दो चूतों मे रिश्ते निकलने लगते हें.!
रमा :" इनकोशौक हें कुंवारे भंवरो कों अपना रसपान करवाने कां.विवाह केँ पहले अपनेबगल केँ लड़कों केँ हॉस्टल सें चोरी-छुपे देररात मे निकलती थि यह.वंही पारेख जी सें इनकी."
अपनीपोल कुछ खुलते देख निराली जी अचानक मेमने सें शेरनी बनतेहुए दहाड़ी। "अरे तूँ दो कौड़ी कि नॉकरानी.ज़बान सम्भाल वरना तेरा मुंहतोड़ दूंगी."
पता नहीं क्यो.बिजली केँ झटके सें आगेआते हुए मिसेज़ निराली केँ बालों कों एक् हाथ कि मुट्ठी मे भींचकर खींचते हुए उनके एक् चुंचे कों बेरहमी सें अपनी दूसरी मुट्ठी मे भींचकर उनकी आश्चर्य सें चौड़ी हौ चुकी आंखों मे अपनी गुस्से सें लाल आंखें डालकर मे गुर्राया "माफी मांगरमा सें कुतिया.वरनाचोद चोदकर नंगा चौराहे पऱ फेंक आऊंगा.!!" एक् अनजाने पऱ भयानक गुस्से नें मेरेसर पर्र घऱकर लिया.
रमा भौचक्की सि कुछदेर देखी.फिन आगे आँ कर मेरे कंधे पर्र हाथरख कर आंखों सें शांत होने कां इशारा करती हें.
मिसेज़ निराली बिल्कुल घबराई सि मेरीतरफ आंखें पहाड़े देखरही थि.फिन उसकीनज़र गुस्से सें रमा कि तरफ होँ गयीँ,.
रमा: "आप् ऐसे नहीं हें.मत क्रोध करिये.!"
मैंने रमा कि तरफ देखा.उसकी आँखों मे एक् अजीब सि कृतज्ञता थि.मेरे चेहरे कि ओरबड़ी प्रेम सें देखते हुए मेरे कंधे कों प्रेम सें सहलाते हुए बोलीं "छोड़ दीजिए उसे.!"
उसके बोलते हि मैंने उसकीओर देखते हुए उसकीबात मानी औऱ बालों केँ जूड़े कों छोड़ दिया."ऐसी लंड-पिपासु औरतों कों केसे डराया जाता हें वोँ मे आपको दिखाती हूं."
रमा नें बोलते हुए मोबाइल निकाला औऱ एक् नम्बर डायल करके स्पीकर नं करतेहुए "हेलो.!"
उस ओर कि आवाज़आते हि मिसेज़ निराली कि भौकुछ तन सि गयीँ,.!
"हेलो.अरे रमा.तूँ आयी नहीं अभि तक.देख एक्सक्यूज़ मत मारना। आज मेहमान आये हें घऱ पऱ.पता हैं यह तोँ कल्पेश जीजा औऱ उनके भाईसाहब केँ संग पीनेबैठ गए हें.सारा घऱ कां काम मेरेसर हैं.सेजल सोईपड़ी हैं औऱ यह जेसल दोस्तो केँ संग गन्ना खाने गई, हैं.औऱ यह निराली भाभी भि नहीं आई.पता नहीं ठाकुर जी क्याँ करूँ.कितना कामपड़ा हैं.!!!"
मोबाइल पऱ शेफाली भाभी कि आवाज़ सुनते हि जहां मेरे चेहरे पऱ एक् स्माइल आँ गयीँ,.वंही मिसेज़ निराली केँ चेहरे पर्र जैसे बिल्ली नें मूत दिया हौ.!!
रमा:"अरे भाभी.मुझे निराली भाभी यहां एक् दुकान पर्र मलाई चाटते हुए दिखी."फिन मोबाइल कां माइक ढकतेहुए निराली जी कि ओर गुस्से सें भरी आंखो सें इशारा किया औऱ गुर्रा सें बोलि "चाट लंड कि मलाई कुतिया.!"
मिसेज़ निराली पटेल केँ चेहरा पर्र एक् डर सां दिखने लगा.उन्होंने अपने चेहरे पऱ बिखरे मेरे सफेद गाढ़े सड़के कों उंगलियों सें समेटकर चाटना शुरुआत किया.ये देखकर बाबुराव ठुंकि लगाते हुएखड़े होना शुरुआत किए.!!
रमा: "अरे भाभी.यह निराली भाभीबोल रही हैं कि गन्ना चूसने जानां हें उनको.जाने दूँ याँ संग लेँ कर आँ जाऊ.??"
SP: "हि हि.अरे चूस लेनेदे उनको गन्ना। पऱ तुसंग हि लेँ कर आनां उनको.क्योके पता नहीं उसकेबाद भाभी कां कोई भरोसा नहीं.यहां भाईसाहब कों छोड़कर कंही पिछली बार कि तरह बच्चो कि तरह लॉलीपॉप कि खोज मे नं निकलपड़े.!!"
रमा:"हाँ भाभी.चिंता मत करो.मे गन्ना चुस्व केँ संग लेँ करआती हु.!"येबोल कर वापस एक् बार मिसेज़ निराली पटेल कि तरफ गुस्से सें देखकर देखकर बोलि "गन्ना चूसअब.!"
निराली जी कों कुछसमझ मे नं आया.उन्होंने कुछ प्रश्नात्मक तरीके सें देखा.
रमा नें एक् कुटिल मुस्कान सि दि। औऱ मेरीतरफ देखकर इशारा किया.मे घण्टा कुछ न् समझा.औऱ बोला "क्याँ.??"
रमा नें एक् कुटिल मुस्कान देतेहुए अपनी नज़रें नीचे करी.औऱ एक् झटके सें मेरी लुंगी कि गांठ कों कों कमर सें खोलते हुए मेरे पैरों केँ इर्द-गिर्द गिरा दि.!!!
बाबुराव एक् झटके मे खुशी सें झूमते हुए इधर-उधर झूलने लगें.!ये देख मिसेज़ पटेल कि आंखें आश्चर्य सें फैल गयीँ,.मे भि भौचक्का रह गय़ा.एक् बार मिसेज़ पटेल कि तरफदेख कर वापसरमा कि ओर घुमा.
मे: "र.र.रमा."
रमा नें एक् हल्की मुस्कुराहट सें देखा.औऱ धीरे-धीरे सें फुसफुसाई "चंदन कां काम समाप्त.अब इस निगोड़ी सें इलाज पोइर होगा आपका.!"ये बोलते हि मिसेज़ निराली कि ओरमुड़ कर शेरनी कि तरह गुर्रा कर बोलि: "गन्ना चूस हरामन.देख क्याँ रही हैं.तेरे बाकी केँ गन्नों सें लंबा औऱ मोटा हैं.चूस.!!"
मइसेज़ निराली डांटकहा कर तुरन्त घुटनो पऱ बैठ गई, औऱ डरतेहुए मेरे लौड़े कों मुंह मे लेँ कर चूसने लगीं.!!
रमा नें माइक चोदते हुए मुस्कुरा कर बोला"ठीक हैं भाभी.गन्ना चुस्वने केँ बाद लें करआती हु.!"
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
रमा नें एक् कुटिल मुस्कान देतेहुए अपनी नज़रें नीचे करी.औऱ एक् झटके सें मेरी लुंगी कि गांठ कों कों कमर सें खोलते हुए मेरे पैरों केँ इर्द-गिर्द गिरा दि.!!!
बाबुराव एक् झटके मे खुशी सें झूमते हुए इधर-उधर झूलने लगें.!ये देख मिसेज़ पटेल कि आंखें आश्चर्य सें फैल गयीँ,.मे भि भौचक्का रह गय़ा.एक् बार मिसेज़ पटेल कि तरफदेख कर वापसरमा कि ओर घुमा.
मे: "र.र.रमा."
रमा नें एक् हल्की मुस्कुराहट सें देखा.औऱ धीरे-धीरे सें फुसफुसाई "चंदन कां काम समाप्त.अब इस निगोड़ी सें इलाज पोइर होगा आपका.!"ये बोलते हि मिसेज़ निराली कि ओरमुड़ कर शेरनी कि तरह गुर्रा कर बोलि: "गन्ना चूस हरामन.देख क्याँ रही हैं.तेरे बाकी केँ गन्नों सें लंबा औऱ मोटा हैं.चूस.!!"
मइसेज़ निराली डांटकहा कर तुरन्त घुटनो पर्र बैठ गई, औऱ डरतेहुए मेरे लौड़े कों मुंह मे लें कर चूसने लगीं.!!
रमा नें माइक चोदते हुए मुस्कुरा कर बोला"ठीक हैं भाभी.गन्ना चुस्वने केँ बाद लें करआती हु.!"
एपसोड #18
निराली जी घुटनों पे बैठ मेरा सुपाड़ा होंठो मे फंसाकर चूसरही थि औऱ रमा केँ मुख पऱ एक् अजीब सि स्माइल थि जिसमे क्रोध भराहुआ थां.निराली भाभीकुछ असमंझ मे लगरही थि.!
मुझे भि रमा केँ सामने ऐसा होतेहुए कुछ अजीब सां लगरहा थां.तोँ वोँ 'जोश' कंही मेरी गांड मे घुस गय़ा थां.बाबूराव खड़े थें पर्र उसके अंदर वोँ हरामी-हड्डी वाला कड़ापन नहीं थां.!
रमा : "आपकोयह निराली मैडम कि किस्सा बताती हु.इनकी विवाह सें पहले इनकेबगल वाले बैचलर फ्लैट पर्र आपके पारेख साहब केँ साथी रहते थें."
"रमा.!!" निराली जी नें लंड केँ टोपे कों अपनेमुख सें निकलते हुए गुर्राया.!!
रमा कि आंखों मे क्रोध थां."कुतिया। वापस लें लंड मुंह मे वरना तेरे पति कों बुलाती हु यहां.!"
निराली जी स्वाभिमानी attitude बिल्कुल छोटे गांवो कि बिजली व्यवस्था जैसा साबित हुआ जोँ 5 घण्टे कि कटौती केँ पश्चात 2 मिनट केँ लिएआकर वापसगधे कि गांड मे चला जाता हैं.! मिमियाते हुए उन्होंने वापस टोपे कों होंठो मे लें कर बेमन सें चूसना चालू किया.!
रमा : गुस्से मे मेरीतरफ "औऱ आपकेइस मुंये करमजले कों क्याँ हौ गय़ा हैं.मेरी पसीने सें लथपथ ब्लाउज़ सें झांकती छातीदेख कर तोँ बड़ा बम्बू बना फिरता हैं.अभि इतना सहमा सें क्योखड़ा हैं.ठीक सें खड़ा करके डालिये इस कलमुंही केँ मुंह केँ अंदर पूरा.!!
मे: "र.र.रमा.व.वव.वोँ अंदर सें फील नहीं आँ रही हैं.एक् तौ तुम्हारे आने सें ठीक पहले हि झडा हूं औऱ ऊपर सें त.तुँ.तुम्.तुम्हारे सामने पता नहीं क्यो फटने लगती हैं मेरी.!
सुनकर रमा खिलखिला करहंस पड़ती हैं.फिन कुछसोच कर उसकेमुख पऱ एक् कुटिल मुस्कान आँ गयीँ,."मुझे पता हैं कि केसे आपकेइस हरामी बाबूराव सें काम निकलवाना हैं.!" येबोल कर उसने अपने पल्लू कों ब्लाउज़ केँ सामने सें ढलका दिया औऱ उसकी भलभलाती चूँचिया उस क्लीवेज सें बाहर् झांकने लगीं.!!
टनाक.बाबूराव सेकंड केँ हज़ारहवे हिस्से मे टनटना केँ खड़ा होँ गय़ा.! मेरी आँखें रमा कि चुंचियों मे गढ़ गई, औऱ मैने उन्हें मंत्रमुग्ध सें देखते हुए निराली जी केँ बालों केँ जूड़े कों थामते हुए अपना सुलेमानी मूसल मुंख केँ अंदर तक ठूस दिया.!
निराली भाभीकुछ अचम्भे औऱ जलन केँ भाव केँ संग हम् दोनों कों देखने लगीं.जलन होना स्वभाविक भि थां.आखिर अपने कों नूरजहां समझने वाली निराली भाभी केँ मुंह सें जौ काम नं हुआ वोँ रमा कि चुंचियों कि झलक नें एक् झटके मे जोँ कर दिया थां.!
रमा:कुछ गर्वान्वित होतेहुए "हाँ। तौ आपके पारेख जीउस फ्लैट केँ लड़कों केँ संग दारू पीने जाते थें.तौ उधर एक् दिन एक् कमरे सें 3 लड़के पसीने सें भरे बाहर् आँ कर पारेख जी औऱ बाकी केँ 2 लड़कों सें संग उनकी पीने कि महफ़िल मे शामिल हुए.बातों बातों मे पताचला केँ अंदर एक् माल नंगीपड़ी हैं जिसे पहले 2 नें भोगा औऱ उसकेबाद बाकी केँ 3 भोगकर आँ रहे हें.! पारेख जी नें रंडीसमझ करजबरेट पूछा तौ उन्होंने बताया केँ पड़ोस कि एक् इज़्ज़तदार घऱ कि गुज्जु महिला सें उनमें सें एक् कां चक्कर थां, तौ बाकियों नें उस स्त्री कि बेटी कों फांस लिया जोँ अब पांचो सें चुदती हैं.!
पारेख केँ नसीब मे इससे अच्छा मौका नहींआता अपना कुंवारापन खोने कां.अब कौनउस बेढंगे मोटे कों अपनादिल देती.! पारेख साहब नें उन पांचो सें मिन्नतें करीउस नाली मे डुबकी लगाने कि.वोँ सारे भि थें दर कमीने.पारेख जी सें खूब रुपया शराब पर्र खर्च करवाने केँ बाद बहुत दिनों बादइस शर्त पऱ माने कि परखजी अपनी गांड देंगे उन पांचो कों.! तौ लाखों रूपय औऱ अपनी थुलथुली गांड कां सौदा करके पारेख जी नें निराली मैडम सें सम्बंध स्थापित किया.!"
मेरा मुंह कौतूहल सें खुल गय़ा.औऱ निराली भाभी कां आश्चर्य सें.कि रमा कों इतनासभी केसेपता.!
रमा:"अब पारेख जी निराली भाभी कों होटलो मे लेँ जाने लगे.औऱ अपनी किस्सा अपने दोस्त कल्पेश सें बताते रहते.! कल्पेश शादीशुदा थां पर्र एक् नम्बर कां ठरकी.उसने ज़िदकरी निराली भाभी कि बुर केँ लिए.!अब आपकेउन गांडू-पारेख जी कों कल्पेश कि विवाह मे उसकी साली शेफाली पसंद आँ गई, थि.कल्पेश नें मौकादेख कर शर्तरख दि कि अगर वोँ निराली सेट कराए तोँ वोँ शेफाली सें विवाह करवाएगा पारेख जी कि.! पारेख जी कि बाँचे खिल गयीँ,.उसने निराली कां मामला बससेट हि कर दिया थां उसकेसंग कि तभीपता चला कि उसके घरवालों नें उसकी हरकतों कां पता लगने केँ बाद उसकी विवाह कंहीतय कर दि.औऱ इनकाघऱ नें निकलना बंद करवा दिया.! कल्पेश इसमुई बदचलन केँ खूबसूरती कां इसतरह बावला हौ गय़ा थां कि इन दोनों नें मिलकर कल्पेश केँ बड़े भइया, जौ शायद इनके खानदान कां एकमात्र शरीफ लड़का थां, उसकेसंग इसकी विवाह कां चक्कर चलवाया.! पारेख जी नें एक् बारफिन सें अपनी गांड कां सौदा कियाउस लड़के सें जिससे निराली जी कि पूजनीय माता जी चुदती थि.औऱ उसके सहारे निराली जी कां नाता कल्पेश केँ बड़े भइया मितेश जी केँ संगतय हुआ.!
मितेश जी बेचारे दिल केँ भोलेइस चांडालन केँ खूबसूरती औऱ भोलेपन पऱ फिदा थें.उनके पीछे वोँ कलमुंहा कल्पेश अपनी भाभी कों ठोक-ठोक कर उनकोपेट सें कर दिया.जिससे निराली जी कि पुत्री कां जन्महुआ.!!"
ईस्की मम्मी कां घाघरा.यह बेहन् कां लौड़ा कल्पेश जीजा व्यक्ति हैं याँ किसान.हर खेत मे इसी कां बीज बोयाहुआ हैं.!!!
रमा: "इतनासभी कुछ मुझे केसेपता चला वोँ बताती हूं अब आपको.! वोँ बोला थां नं आपसे केँ वोँ करमजली चमेली हैं नाँ.जौ इनके यहांकाम पऱ थि.उसको औऱ यह निराली भाभी कों यह कल्पेश जीजाजब एक् बार पारेख जी केँ संग दारू केँ नशे मे धुत्त मिलकर चोदरहे थें.तब नशे मे तीनो नें पूरी किस्सा एक् दूसरे केँ संग बांटी.! उनकोलगा चमेली नशे मे धुत्त हैं तोँ उसको न् पता चलेगा.पर्र उनको न् पता थां कि वोँ मुई तौ टैंकर हैं.सभी निगल गई,.फिन जब शेफाली भाभी नें इसकी चोरी पकड़ते हुएकाम सें निकाला तौ उसने झल्लाहट मे सभी मेरे सामने उगल दिया.!!मन तौ कियासभी बतादूं शेफाली भाभी कों.पऱ हिम्मत नहीं हुइ बेचारी ओरइसदुख केँ सैलाब कों उमड़ने कि.!"
मेरा तौ दिमाग़ सुन्न पड़ गय़ा थां येसभी सुन कर.शेफाली जी पर्र दया भि आँ रही थि.!
रमा : "बेचारी मेरी शेफाली भाभी.उस करंजले गांडू पारेख केँ चक्कर मे फंस गई.न् तौ तन कां सुख न् मन कां सुख.औऱ येसभी जानकर तौ मर हि जाएगी बेचारी.!"
रमा केँ इन पंक्तियों नें मेरे अंदर एक् ज्वालामुखी सें विस्फोट कर दिया.! आंखों मे खूनउतर आया.सभी इसी निराली भाभी केँ निराले रंडिपने कां नतीजा हैं.न् यह होती मादरचोद न् बेचारी शेफाली भाभी फंसती इस जंजाल मे.! मैंने उनके जूड़े कों औऱ कस केँ थामते हुए अपने गुस्से सें रॉडबन चुके बाबूराव कों पूरेदम सें जड़ तक उनकेहलक तक पेलकर चाँप दिया..!
निराली जी कि आंखेफट केँ बाहर् आने कों हौ गई,.औऱ मे दांत भींचकर लंड पूरा टोपे तक निकाल कर बिजली कि तेजी सें उनकेहलक तक बेरहमी सें चाँपने लगा.निराली भाभी"गूँ गूँगूँ." करतेहुए आंखेफाड़ तड़पने लगीं औऱ मुझसे छूटने केँ भरसक प्रयास करने लगीं.! पऱ दूसरे हाथ सें मैंने उनकागला पकड़ लिया थां औऱ गालियों केँ संग उनकेमुख कां भीषणरूप सें चोदन करनेलगा.!
"मादरचोद.तेरी मम्मी कां भोंसड़ा मारू.तेरी बुर कि तड़प कां बैदा मारू मादरचोद.तेरी बेटी कों मे हि चोदकर उसके भोसड़े सें अपना बच्चा पैदा करूँगा मादरचोद.!!!"
निराली जी कि सांस उखड़ने लगी थि.रमा कुछसहम सि गयीँ,."उफ़्फ़ धीरे-धीरे.धीरे-धीरे.थोड़ा रहम करिये.मर जाएगी यह ऐसे.अब बस करिये.अब छोड़ दीजिए.!"
मे: "इस मादरचोद कि मम्मी भि चोदूंगा.इसकी बेटी कों जब इसके सामने छितरा केँ चोदूंगा तब इसको समझेगा.बिना पानी निकले आज तौ नहीं छोडूंगा.यह लें मां कि लौड़ी.!"घच। घच.घचाक.
रमासमझ गयीँ, थि कि मुझेइस वक़्त रोकना असम्भव हैं.वोँ ये भि जानती थि कि मेरा दूसरी बार पानी निकलेगा तौ उसमें देर लगेगी.उतने मे तौ निराली भाभी केँ प्राण हिरन होँ जाएंगे.! कुछ सोचने लगी वोँ.औऱ तभीकुछ विचार आते हि वोँ हटकर निराली भाभी केँ पीछेजा खड़ी हुइ.
रमा:"इधर देखिये." कहतेहुए उसने अपने ब्लाउज़ केँ सारेहुक खोल दिये.बिना ब्लाउज़ कि हाहाकारी चूँचिया भलभला केँ बाहर् मेरी आँखों केँ सामने साक्षात प्रकट होँ गये.!
जैसे एक् विस्फोट सें हुआउसी लम्हा मेरे बाबूराव नें औऱ भरभरा केँ मेरे लौड़े सें गढ़ी मलाई कां विस्फोट होँ चला.कुछ निराली जी केँ हलक केँ अंदर सीधे रवेशकर गयीँ,.औऱ मस्ती मे मैनेजब उनके बालो केँ जूड़े कों छोड़ा तोँ निराली भाभीजान बचाने केँ मार्मिक प्रयास मे पीछे छिटक गई,.बाबूराव बाहर् आँ चुका थां औऱ AK-47 सि बौछार जाकररमा कि चुंचियों पर्र गिरी.
रमा कां मुंह इतनाढेर सारा वीर्य देखकर आश्चर्य सें खुली.बाबूराव नें वीर्य-वर्षा बन्द सि करी.मे मंत्रमुग्ध सां रमा कि वीर्य सें सनीठोस उन्नत चुंचियों केँ आलौकिक दर्शन पाकर रोमांचित हौ गय़ा थां.औऱ उसी रोमांच मे एक् बड़ी-मोटी आखरीधार एक् आश्चर्यजनक वेग सें निकली औऱ सीधेरमा केँ श्रीमुख मे प्रवेश कर लिया.!
निराली भाभी फर्श पऱ पड़ेदमे केँ मरीज कि तरह हांफरही थि.रमा केँ चेहरे पऱ पहले तौ आश्चर्य केँ औऱ तरन्त बाद हि घोर-गुस्सा केँ भाव आँ चुके थें.उस मेरी दगाबाज़ गांड कि डर केँ मारे फटफटी निकल चुकी थि.फटफट फटफट फटाककक.!!!
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई - Next part miss mat karna
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