नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
तभी अचानक.दिमाग़ मे एक् बिजली सि कौंधी.!!!
मे: "एक् मिनट.आपने बोला कि पारेख साहब कों खूँटा गाड़ने मे 4 महीने लगे.औऱ जेसल पहले हि महीने मे पेट मे आई थि.इसका मतलब 'जेसल केँ पिताजी' औऱ 'सेजल केँ पिताजी' एक् नहीं होँ सकते.!!!!
मिसेज़ पारेख कां गांड मे फटफटी सि चल निकली.चेहरा पीला सें पड़ गय़ा.औऱ लज्जा एंवख़ौफ़ केँ मिले जिले मिश्रित भाव कों चेहरे मे लिए एक् हाथ उनके मुंह पऱ आँ गय़ा.!!!!
बाबूराव नें ठुंकि लगाई औऱ बुर केँ 2-3 इंच अंदरसरक लिए.
Update #11
SP: व्व वोँ व्व.ममम.मे मे वोँ। क्याँ तुम् भि.कुछ नहीं.बात कि खालमत निकालो.तुम् भि न् बोहुत खराब होँ.मेरे बारे मे कुछ भि सोचरहे होँ.अब उठो भि.घऱभर कां कामपड़ा हैं.औऱ वोँ मंदिर मे भीड़ भि मुई इतनीबढ़ जाती हैं केँ पूछोमत.!
केहकर वोँ मुझे अपनेऊपर सें हटाने लगीं.मे दोनों हाथ उनकेबगल केँ नीचे सें लें कर उनकोकस लिया औऱ झुककर उनकेकान केँ नीचेगले मे जीभ चलाते हुए बोला "भाभी.अब छुपाओगी चीज़े अपने दोस्त सें.बताओ नं.क्याँ कल्पेश जीजा पहलीबार मे हि गाभिन करदिए आपको.?"
गुजरातन सिहर उठी.अपना यह प्राचीन आजमाया हुया पैंतरा वीक-पॉइंट साबित हुआ एक् बार फिन.इसी कसमसाहट मे मे बाबूराव केँ सुपाड़े कों भाभी कि सड़के सें गीली संस्कारी बुर मे आहिस्ता मन्थते हुए उनके दाने पर्र घिसने लगा.! (सड़का - लंड कां रस)
SP: "ओह.सिई ई.अरे नहीं जी.दूसरी बार मे." येबोल वोँ बड़बोली थोड़ी सम्भल गई,."ओह राम.चलो हटो। तुम्हे क्योबता रहींहु.!!!"
मे: "अरे बताओ नं भाभी.आपको पारेख जी कि शपथ.!"बोल कर मे उनकेगले स्व उतरते हुए उनके गुलाबी निपल मुँह मे लेँ कर लपलप चूसने लगा.
SP: "हायरे ठाकुरजी.कैसी परीक्षा लेँ रहे होँ आप्.हाय.ममम.आपके इलावा औऱ कोई नहीं जानता इसराज़ कों.औऱ यह पापी मेरे पतिदेव कि शपथ खिलाये पड़ा हैं.!"
मे एक् हाथ नीचे लेँ जाकर उनकी मुनिया केँ दाने कों कुरेदते हुए उनकी चुंची कों पूरी तन्मयता सें चूसने लगा.!
मे: "अरेकहो नं जानेमन.किसके सड़के नें दूजीबार मे सींच दिया आपकीकोख कों.??"
SP: "किसने सें क्याँ मतलब हैं तुम्हारा.क्याँ समझरखा हैं मुझको तुमने.शरीफ घऱ कि स्त्री सें केसे बदतमीज़ी सें बातकर रहे होँ तुम्.!!" गुस्से सें लाल होँ गयीँ, मिसेज़ पारेख.
इनकी जमाई-चोद मां कि बुर मे फोड़े.इस शरीफघऱ कि संस्कारी व्यभिचारी कां क्रोध तौ देखो.इनको तोँ चोद-चोद कर गाभिन करूँगा एक् दिन.!
मे: "अरे नहीं भाभी.मेरा वोँ मतलब नहीं थां.चलिए अब क्रोध थुकिये औऱ बताईये भि.!" बोलकर मैंने एक् लंबी गीली स्मूच ली उनके होंठो पर्र औऱ बुर केँ दाने सें उंगलियों कि हरकत कों बढ़ा दिया.औऱ थोड़ी हि देर मे मेरी चुद्दो-रानी कां घुसा उनकी गांड मे घुस गय़ा.दमे कि मरीज़ कि तरह हांफ-हांफ कर सिसियाने लगी बेहन कि लौड़ी.!
SP: "आन्ह। आन्ह.सि सि सि.वोँ क्याँ थां कि विवाह केँ दौरान दिदी औऱ कमलेश जीजा मे कहा-सुनी हौ गई, थि.बेचारे दिदी केँ संग हमारे घऱआये हुए थें.बड़े दुखी थें.इनके संग हमारे कमरे मे पीरहे थें.यह तोँ थोड़ीदेर मे लुढ़क गए.औऱ कल्पेश जीजा बेचारे अपनादुख मुझसे बताते हुए मुझसे लिपटकर रोने लगे.मुझे अपनी जीजी पर्र बोहुत क्रोध आँ रहा थां कि देखो केसे इतनेभले व्यक्ति कों सताती हें.! बसउसी मे हौ गय़ा एक् बार फिन.उसमे हम् दोनों कि कोई गलती नहीं थि ठाकुर जी साक्षी हें.!"
हाँ हाँ.अपने 'भले व्यक्ति' जीजा सें तुम् चुद्ववाओ औऱ साक्षी हौ ठाकुर जी.यही काम बाकीरह गय़ा हें जैसे उनको.ईश्वर कों तौ छोड़ हवसी महिला.!!
मे: "ओह ऐसा.पर्र पारेख जी भि इसीखाट पऱ थें.उनको हलचलसमझ मे नहींआई.??"
SP: "अरेयह तौ नशे मे धुत्त थें.औऱ कल्पेश जीजा नें पहलीबार केँ दौरान इन्हें लातमार केँ नीचे गिरा दिया थां" येबोल थोड़ा खिलखिला केँ हंसने लगीं मिसेज़ पारेख
मे: "ओह.यह बात.पहली बार मे.मतलब दूसरी चक्कर भि हलचला उसरात आपकी बुर मे.!"
SP: शर्मा कर."धत.तुम् भि न्.बड़े तेज़ हौ.वोँ क्याँ हैं नाँ.बीच रात जीजाफिन सें भावुक होँ उठे.फिन रोने लगे.तौ दूसरी बार हौ गय़ा.!!"
ये मादरचोद रो-रोकर बुर लेने कां नयाशॉट हैं.बुर हैं याँ टॉफी जोँ दे-देकर चुप करवारही थि बेहन कि लौड़ी.! मिलना पड़ेगा इस कल्पेश जीजा सें.पति केँ खाट पर्र उसकी मौजूदगी मे अगले कि पत्नि चोद गय़ा साला.!
मे: "अच्छा यह बताईये.पारेख जी कों सन्देह नहींहुआ सुभह.जब नीचे नींद खुली उनकी.??"
SP: हंसते हुए"अरे वी जीजा भि नं बड़े नटखट हें.जाते हुए इनका पजामा खोलकर अपना वीर्य उनके वहांलगा गए थें, औऱ पलंग मे टमाटर कां सॉस लगाकर गए थें.! यहजब सुभह उठके मुझे देखे तौ मे सिकुड़ कर शर्मा रही थि.उन्होंने जबलाल धब्बा देखा तोँ वोँ सीनातान कर बाहर् जीजा केँ संगगरम चाय पीनेबैठ गए.!"
सॉस कां बिग बॉस.मैग्गी हॉट-एंड-स्वीट टोमेटो चिल्ली सॉस.इट्स डिफरेंट.!
बाबुराव नें पूरी अंगड़ाई लें ली थि औऱ मास्टर जी सें सजापाए छात्र कि तरहतन करखड़ा होँ गय़ा.अपुन नें आंव देखा नं तांव.औऱ उस गदराई गुजरातन कों कस केँ जकड़ केँ पूरीदम लगाकर पूरा लौड़ा चाँप दिया उनकी गीली होँ चुकी पतिव्रता बुर मे.!
SP: "आन्ह.अरे ठाकुर जी.बचाओ इस बेरहम सें.! हाहा हा.तुम्हारा लंड हैं कि खूंटा.फिन खड़ा होँ गय़ा.! हायरे। मर गयीँ,.! बस करो.मन नहींभरा अभि भि तुम्हारा.कितना चोदोगे.ऊई मां। सेजल केँ पिताजी.कहां होँ.!!"
फ़ट। फट.फट.फचाक फचाक.मे चोदते हुए उनकेगले मे किस करनेलगा औऱ थोड़ी हि देर मे मिसेज़ पारेख कि चीखें आंहो मे बदल गई,.! मुझेजकड़ लिया औऱ आंखेबंद करके पागलो कि तरह बड़बड़ाने लगीं."अहह अहह.अहह.!! करतेरहो ज़ालिम.रुकना मत.फ्री कि बुर मिली हैं तोँ चोदते जाओ.! अहह.वोँ गुप्ताइन अपने देवरु कि 5-6 मिनट कि चुदाई केँ सुना सुनाकर कितना जलाती थि.जबउसे पता चलेगा कि यह गबरू सांड मुझे घण्टो सें बार-बार लेँ रहा हैं तौ कैसी जलेगी उसकी.अहह अहह.अहह.अरे निराली भाभी.देख तेरे सारे दोस्त मेरेइस एक् केँ सामने फेल हें.!!"
मे: कचकचा केँ चोदते हुए "अच्छा यह बताईये.कल्पेश जीजा औऱ मेरे मे किसका लौड़ा पसंदआया.??"
SP: "अरे उनका तौ शरीफो जैसा हें.ठीक-ठाक लम्बा औऱ मोटा.तुम्हारे जैसा जानवरो वाला मूसल नहीं हैं.!"
लो मादरचोद.अब वोँ जीजा हैं तोँ उसका लंड भि शरीफ़। औऱ मेरा बाबूराव बदचलन.!
गुजरातन कांपने लगी.औऱ थोड़ी हि देर मे उनकी बुर नें भलभला कर पानीछोड़ दिया.औऱ भाभीजी मुझे पागलों कि भांति चूमने लगीं.! मेरे बाबूराव नें भि बाढ़आने कां सिग्नल दे दिया.मैने पूछा "भाभी.मलाई बुर मे लेंगी याँ मुंह मे.??"
SP: मुस्कुराते हुए "जहां तुम्हारी मर्ज़ी मेरे राजा.!"
मे बुर सें पकक कि आवाज़ सें लौड़ाबाद खींचकर उनके मुंह केँ सामने कर दिया औऱ मिसेज़ पारेख जन्म-जन्मांतर कि प्यासी कि भांति उसे चूसने लगीं.मे आंखेबंद कर अपने पुरखों केँ पुण्य-कर्मों कां शुक्रिया करतेहुए उस पराई नारी केँ श्री-मुख मे झड़ने लगा.दो-तीन धार गटकने केँ बाद भाभीजी नें लौड़ा मुंह सें बाहर् निकाला औऱ मुंह मे सड़काभर कर शैतानी भावला कर मेरेआंड कों दबाने लगीं.एक् बची हुईँ धार निकली औऱ उनके माथे सें होतेहुए उनकी सिंदूरी-मांग कों सफेदकर दिया.!
जेसल कि मां हड़बड़ा उठी.औऱ तुरन्त मेरी मलाईगटक कर गन्दा सें मुंह बनाते हुए बोलीं."कितने गन्दे हौ तुम्.जब मुंह मे लेँ रही थि तोँ बाहर् पिचकारी मारने कि क्याँ ज़रूरत थि.!" यहबोल कर वोँ अपनेबगल मे पड़ी साड़ी सें मुंह पोंछने लगीं.मे स्वर्गागिक-आनन्द मे लीन उनकोदेख रहा थां.केँ थि उनकेघऱ कि घण्टी नें हम् दोनों केँ कान मे मूत दिया.!
गांड फटने कि यदि आवाज़आती होती तोँ बोफोर्स केँ तोपों सि आती हम् दोनों कि गांड सें.!
आनन-फानन मे दोनों कपड़ेपहन कर दोनों भागकर दरवाजे पऱ पंहुचे.घण्टी बजाने वाले घण्टी मां चोदने मे लगाहुआ थां.मुझे लगा कि यह पारेख जी तोँ नहीं आँ फ़टे.ताज़ी-चुदी पत्नि सूंघ लेगा मादरचोद.सोसाइटी सें निकलवा देगा.औऱ ला ठाकुर-जी कों अपनी अय्याशी कि गवाही मे बेहन कि लौड़ी.!
भाभी नें घबड़ाते हुए दरवाज़े सें बाहर् झांका.औऱ थोड़ी राहत कि सांस लें कर मुझे चिंता नं करने कां इशारा करतेहुए दरवाज़ा खोला.!
तभी गांड मे मेरी एक् औऱ धमाका हुआ.रमा धड़धड़ाते हुए अंदरआयी "क्याँ भाभी.कबसे घण्टी बजारही हूं.कहां थि आप्.मे तौ समझी कंहीसो तोँ नहीं." बोलते हुए मुझे अंदरपा कररुक गई, औऱ मुझेदेख करकुछ हल्के आश्चर्य भाव सें देखने लगी.! मे बदमाशी करतेहुए पकड़ेगए बच्चे कि भांति इधर-उधर ताकने लगा.!
SP: "अरेव्व वोँ व्वव्व मे योगाकर रही थि.यह करवारहे थें.तौ उसलिए सुन नहींपाई.! यह हमारे पड़ोस मे हि रहते हें.इनका नाम."
रमा: "पता हैं.इनके यहां भि मे हि काम करती हूं."
थोड़ा सामान्य स्थिति देखते हुए मे बोला केँ बाबाकट लियाजाय अब.तभी रमा अपने आँचल सें पसीना पोंछने लगी औऱ मेरे सामने उसकी ग़लवान घाटी आँ गयीँ,.जिसकी गहराई मे मे कुछखो सां गय़ा.सुंदरता कां पसीना.बाबूराव नें अंगड़ाई ली.तभी रमाबोल पड़ी"अरे भाभी.यह आपकी मांग मे सफेद-सफेद क्याँ लगाहुआ हैं.??"
मे घूम केँ देखा तोँ तोतेउड़ गए.बाबूराव कि उल्टी चमकरही थि भाभी कि मांग मे.! इसकी मां कि बुर। ढंग सें साफ नहींकर सकती बेहन कि लौड़ी.!! बाबूराव डरी हुईँ कुतिया कि पूंछ कि भांति लटककर गांड केँ नीचेसटक लिए.!!
भइया आप् हर साइट पर्र कहानी अधूरी छोड़ देते होँ . यहा तोँ पूरीकर दो. जल्द एपसोड दो
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क्याँ लाजबाव शब्दों कि बाजीगरी करते हौ शाम भइया ! आउटस्टैंडिंग। कामेडी कों जोडते हुएजिस तरह सें सेक्सुअल एक्टिविटीज कों लिखा हैं वो निःसंदेह आउटस्टैंडिंग थां।
आपकी लेखनी सच मे अद्भुत हैं।
इस किस्सा कों पुरा कीजिए औऱ इसके पहले नायक केँ संग पास्ट मे क्याँ हुआ थां, वो भि लिखने कि कोशिश कीजिएगा।
अमेजिंग एपसोड।
लिखने केँ मस्त तरीक़े नें कथा कों औऱ भि बढ़िया बना दिया हैं। अब किस्सा मे आगे मस्ती मज़ाक़ केँ संगसंग थोडा गर्मी औऱ लाओ
Wakai mai bhay story or likhne kaa tarike dono hi mast h or isi wajah say mann krta h kee roj update aye isi intjaar mai sarch kia krta ho
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SP: "अरेव्व वोँ व्वव्व मे योगाकर रही थि.यह करवारहे थें.तोँ उसलिए सुन नहींपाई.! यह हमारे पड़ोस मे हि रहते हें.इनका नाम."
रमा: "पता हैं.इनके यहां भि मे हि काम करती हूं."
थोड़ा सामान्य स्थिति देखते हुए मे बोला केँ बाबाकट लियाजाय अब.तभी रमा अपने आँचल सें पसीना पोंछने लगी औऱ मेरे सामने उसकी ग़लवान घाटी आँ गयीँ,.जिसकी गहराई मे मे कुछखो सां गय़ा.सुंदरता कां पसीना.बाबूराव नें अंगड़ाई ली.तभी रमाबोल पड़ी"अरे भाभी.यह आपकी मांग मे सफेद-सफेद क्याँ लगाहुआ हैं.??"
मे घूम केँ देखा तौ तोतेउड़ गए.बाबूराव कि उल्टी चमकरही थि भाभी कि मांग मे.! इसकी मां कि बुर। ढंग सें साफ नहींकर सकती बेहन कि लौड़ी.!! बाबूराव डरी हुइ कुतिया कि पूंछ कि भांति लटककर गांड केँ नीचेसटक लिए.!!
Update #12
मिसेज़ पारेख नें जल्दी अपनेसर पर्र हाथ फिराया औऱ अपनी उंगलियों पऱ लगेगढ़े सफेद सड़के कों देखते हि ख़ौफ़ केँ मारे उनकी आंखे औऱ मुंह चौड़ी हौ करगोल हौ गई, जैसे कि कालेनाग कां लंड देख लिया हौ उन्होंने.!!
SP: "व.व.वोँ.यह यह."
रमा:"अरे यह तोँ." मेरीतरफ देखते हुए.
लग गए लौड़े.इज़्ज़त कि माँ कां भोसड़ा होगाआज तोँ.पारेख साहेब गांड मे छाताडाल करखोल देंगे.!!
मे: तपाक सें रमा कों बीच मे काटते हुए "म.म.मलाई छलकी हैं"
SP: "अरेहाँ। वोँ मलाई.मे मलाईचख रही थि मन्थनी सें.यह सैम भि नां.इनकी वजह सें वोँ मन्थनी मुंह केँ बाहर् आते हि छलक गयीँ,.!! यह मुयाँ कोई कपड़ा भि नहींदिख रहा जिससे पोछु.!"
रमा: "ओह अच्छा.रुको भाभी.पोछो मत." तपाक सें ऐसाबोल कर उसने उसने भाभी कि मांग सें मेरा सड़का लिया औऱ हमारे कुछ समझने सें पहले अपनी आंखों मे सुरमे कि तरहलग लिया.! "मलाई आंखों केँ लिए बोहुत अच्छी होती हें.पिता जीवैध थें मेरे.कइयों कि आंखों कि तकलीफ केँ लिए वोँ मलाई लगाने केँ लिए बोलते थें.!" रमा मुस्कुराई.!
ईस्की मम्मी कि आंख.! लंड कि मलाई एक् संगदो हसीनो केँ मुख पर्र लगते तौ केवल फिल्मों मे देखा थां आज तक.!
ये दृश्य देखते हि मिसेज़ शेफाली पारेख कां मुख आश्चर्य सें फिनखुल गय़ा.इससे पहले वोँ कुछबोल पाती, रमा नें लपककर बाकी कि मलाई उनकी मांग सें बटोरकर अपने हथेलियों मे मलकर अपनी बांहों मे लगाली!
रमा: "चमड़ी मे चमक आँ जाती हैं भाभी मलाई सें.आप् भि लगाया करो.!"
अपना बाबूराव लोवर केँ अंदर मिर्गी केँ मरीज केँ भांति कांपने लगा.! अंदर कां माहौल बनतेहुए औऱ बाहर् कां बिगड़ते हुए अपुन नें सोचा कि इससे पहलेयह मां कि लौड़ी चखने केँ लिए भि मलाई मांगे, बाबा निकललो.!
मे: "अच्छा भाभी.अब चलता हूं.आपको भि मंदिर निकलना हैं.!"
SP: घबराहट मे "हाँहाँ। वोँ तोँ भूल हि गई, थि.चलो अबअब तुम् निकलो.चल रमा दरवाज़ा बन्द करके आँ.जल्द काम निपटाना हें!"
मे तुरन्त दरवाज़ा खोलकर पोलोदाब लिया.फिन घऱ पोहोच करबैड पर्र पड़ेपड़े आज केँ दिन कि घटनाएं सोचकर मुस्कुराते हुए नींद कि आगोश मे खो गय़ा.!
उधर.कुछ हि देर मे दो कदमें जल्दबाज़ी मे मेरेघऱ कि तरफ आँ रही थि.!
गहरी नींद मे मे रमा कों अपने लौड़े सें चाट-चाट कर सड़का पीतेदेख रहा थां.मे रमा केँ मोटे जूड़े कों पकड़कर उसकेमुख मे लंड पिस्टन कि भांति अंदर बाहर् कररहा थां.सारा वीर्य पीकर भि रमा बदहवास लंड चूसेजा रही थि.उसके पूरा शरीर पसीने सें तर हौ चुका थां.झीनी ब्लाउज़ कां कपड़ा उसके जिस्म सें चिपककर उसके निपल दिखारहा थां.सुंदरता कां पसीना.इसकी मम्मी कां मुश्किल करदु जीना.! बाबूराव फिन सें टाइट होने लगा.केँ तभी.
ट्रिंग-ट्रिंग.ट्रिंग-ट्रिंग.ट्रिंग-ट्रिंग.ट्रिंग-ट्रिंग.मे हड़बड़ा कर उठा.औऱ झिल्लाते हुए दरवाज़ा खोलने पंहुंचा। औऱ खोलते हि देखारमा पसीने आए लथपथ बदहवास अपना पल्लू सें अपना मुंहपोछ रही थि.!
डीप ब्लाउज़.झीना कपड़ा.अंदर दिखती पसीने भरी चुंची कि चमड़ी.साला अपुन तौ अन्तर्यामी निकले.सपना सच होने वाला हैं लगता हैं.! मनीषा दि.आपको शतशत प्रणाम केँ आपनेऐसा ब्लाउज़ सिला.!!!
तभी.रमा केँ मुंह सें साड़ी हटी.औऱ उसका गुस्से सें तमतमाया लाल चेहरा देखकर अपुन कि हवासंट हौ ली.रमा नें नीचे देखा औऱ तुरन्त "छि। बदतमीज़ कंही केँ.अभि भि.!!"
आईसा गुर्राते हुए उसने मुझे दरवाज़े आएऐसा धक्का दिया केँ अपुन पीछेलगी चेयर मे जाकर लैंडहुए औऱ वोँ भनभनाते हुए अंदरघुस आए औऱ धड़ाम सें दरवाज़ा पटककर बन्दकर दिया.मे भौचक्का उसको देखते हुए सोचा कि कंही इसपे देवी तोँ नहींचढ़ गई.!!
मे: "कककक्क। क्याँ हुआरमा.??" भोली सूरतबना कर.
रमा: अपनी गदराई पसीने सें भरी बांहे सूंघते हुए "क्याँ हुआ.!! क्याँ हुआ.!!यह क्याँ थां.???"
जैसे बवासीर केँ रोगी कि हगने कां सोचकर हि मां चुदने लगती हें, वैसा हि अनजाना सें एक् डरबैठ गय़ा सीने मे.
मे: "वोँ मममम मलाई हैं नाँ."
रमा: चिल्ला कर"ऐसा हैं.वैध केँ घऱ सें हूं, घऱ मे 5-5 गाय-भैंस थि.औऱ बिटिया कों वरदान मे पाकर नहीं पैदा किया हैं कोख सें मैंने.! यह मलाईदूध कि नहींइस हरामी नासपीटे कि हैं.!" बोलकर लपककर आगेआई औऱ मेराखड़ा लंड लोवर केँ ऊपर सें कस केँ मुट्ठी मे भींच लिया.! "औऱ मन नहींभरा इस बदचलन कां जोँ अभि भि खड़ा हैं.वोँ भाभी सें तौ गंध आँ हि रही थि थोड़ी.पर्र जब बांह सें मुंह कां पसीना पौंछा तब जाकर यकीन हुआ.छी.!"
मे स्प्रिंग कि तरहउछल करखड़ा होँ गय़ा.! आश्चर्य औऱ एक् अनजाने डर सें गोटेजाम होँ लिए.!!!
मे: "ननन नहीं.शपथ सें मेरा नहीं थां.!!!"
गुस्से मे तमतमाई उस ज़ालिम नें मुट्ठी मे पकड़ा लौड़ा औऱ कस केँ पकड़ केँ उमेठ दिया.!!!
मे दर्द मे दोहरा होँ करउछल पड़ा.लगा कि यह कमीनी लंड उखाड़ लेगी आज.विवाह नहीं हौ पाएगी.बेरहम बाप जायदाद सें बेदखल करकेबगल वाली मिसेज़ मालवीया केँ चिंटू केँ नामकर देगा.आखिर इसीदिन केँ लिए तोँ नहींउस भोली पड़ोसन नें मुझे औऱ मेरे बाप दोनों सें चक्कर चलाया थां.???
रमा:"हाँ। तुम्हारा नहीं तौ किसका उस गुप्ताइन केँ देवर जी कां थां.??"
इसकी मां कि.यह गुप्ताइन औऱ उसके देवर जी कां चर्चा तोँ जैसे UPSC मे आने वाला सामान्य ज्ञान होँ गय़ा.!
स्थिति कि गम्भीरता कों देखते हुए रणछोड़ दसबन सरेंडर करना हि सबसेसही तरीका लगा.!!
मे: कराहते हुए मिमियाया "आई.ई ई.हाँहाँ मेरा हि थां.! प्लीज़ छोड़ दो.मर जाऊंगा.!!!!!"
रमा नें गुस्से सें मुझे देखते हुए लंड कों छोड़ा.औऱ बड़बड़ाते हुए गुसलखाने मे घुस गई "यह आजकल केँ लड़के.किसी कों नहीं छोड़ते.कितनी अच्छी मेरी शेफाली भाभी कों खराबकर दिया.औऱ इसके चक्कर मे मे भि गन्दी हौ गयीँ,.!"
आंड सिकुड़ केँ गले तक आँ गए बहनचोद.डर केँ मारेआंख केँ आगे अंधेरा छाने लगा.मे बूतबना लंड सहलाता हुआवही खड़ारहा.
ईहोयगवा बवाल मादरचोद.रायता फैलगवा.!!!!
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई - Kahani ab aur interesting hogi
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