नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
रमा नें गुस्से सें मुझे देखते हुए लंड कों छोड़ा.औऱ बड़बड़ाते हुए गुसलखाने मे घुस गई "यह आजकल केँ लड़के.किसी कों नहीं छोड़ते.कितनी अच्छी मेरी शेफाली भाभी कों खराबकर दिया.औऱ इसके चक्कर मे मे भि गन्दी होँ गई,.!"
आंड सिकुड़ केँ गले तक आँ गए बहनचोद.डर केँ मारेआंख केँ आगे अंधेरा छाने लगा.मे बूतबना लंड सहलाता हुआवही खड़ारहा.
ईहोयगवा बवाल मादरचोद.रायता फैलगवा.!!!!
एपसोड #13
मे बुत जैसाखड़ा सोचरहा थां केँ अब क्याँ कियाजाए.! कुछ भि करकेयह मैटर सुलझाना पड़ेगा वरना मेरी तोँ वाट लगेगी हि, बेचारी शेफाली भाभी कि गांडअलग सें लग जायेगी.! रोज़ सुभह जोँ रमाआकर प्यारी गरम चाय/कप कॉफ़ी बना केँ पिलाती थि अब तौ शायद वोँ लौड़ा नहीं मिलेगा.
तभी TV पऱ नेसकैफ़े कां विज्ञापन आया औऱ मन मे कौंधा कप कॉफ़ी.! अपना कमीना मन चलने लगा.ध्यान मे आया कि रमा बदहवास सि आयी.गुस्से मे हैं.सुभह खालीपेट आती हैं, शेफाली भाभी केँ यहांकुछ खाया भि नहीं होगा.! अपुन सरपट दौड़ा रसोई मे औऱ बढ़िया सि कप कॉफ़ी गैस पऱ चढ़ा दि.औऱ आमलेट बनाने लगा.!
ऑमलेट रेडी होँ हि रही थि तौ अपने मास्टरमाइंड मे कुछआया औऱ मे दौड़कर कमरे सें अपना तौलिया लें आकर बाथरूम केँ बाहर् चुपचाप खड़ा होँ गय़ा.तभी बाथरूम सें रमा केँ चिल्लाने आवाज़आयी "तौलिया दीजिये".
ठंडे पानी नें भि इसका क्रोध शांत नहीं किया हैं बाबा.!
अपुन नें जल्दी अगले हि क्षण खटखटाया औऱ कहा"यह लो.!" धीरे-धीरे सें थोड़ा दरवाज़ा खुला औऱ रमा कां भीगाहुआ बायां हाथ बाहर् आया। मे तौलिया उसके हाथों मे देकर मुड़ने हि वाला थां कि अपुन कि नज़र दरवाज़े कि ओट सें अंदर गयीँ, औऱ सामने लगे शीशे मे अंदर कां नज़ारा देखते हि मेरे कानों मे सीटी बजनेलगी.!
रमा पूरी जन्मजात नंगी, भीगीखड़ी थि.उसके गोल उन्नत चुंचिया पानी मे भीगीचमक रहीथीं.! उसकारंग सोने केँ जैसादमक रहा थां.रमा कां दायां हाथ नीचेकुछ हरकतकर रहा थां तौ मेरी कुत्ते कि नज़र तुरन्त नीचे 'अपनी हड्डी' कि तलाश मे गई,.रमा जांघो केँ बीच अपनी भीगी हुइ रेशमी झांटो मे सेव पानीझडक रहीरही.!!
बाबाजी केँ भुट्टे.! अपने बाबूराव कों एक् 440वोल्ट कां झटका लगा.उसकी गीली गुलाबी बुर झांटो केँ बीच सें अपनी लालिमा बिखेरती हुईँ दिखी.! सेकंड केँ हजारवें हिस्से मे बाबूराव शिकार सूंघकर झटके सें खड़ा हौ गय़ा.! यहसभी 1-2 सेकंड कि स्टोरी हैं जितने मे रमा कां हाथ तौलिया लेँ कर अंदरसरक रहा थां। तभी मेरीनज़र ऊपर गयीँ, औऱ देखा कि भीगी हुईँ अप्सरा कां चेहरा अभि भि गुस्से सें तमतमा रहा थां.उसने झटके सें दरवाज़ा पटक दिया.जिसकी आवाज़ नें फिन मेरीफ़टी हुई गांड मे उंगली कर दि.!
मे सरककर निक हि रहा थां कि रमा कि आवाज़आयी "तौलिया बड़ी जल्द लेँ आये?"
मे वापस दरवाज़े पऱ वापस पोहुँच कर भोली आवाज़ मे बोला"हाँ। वोँ तुम् बिना तौलिया लिए गई, थि नां.तौ मे लें करखड़ा थां."
तभी.बाथरूम कां सिंटेक्स कां दरवाजा हल्के सें अंदर कि तरफखुल गय़ा.रमा नें लोक नहीं किया थां जल्द मे औऱ अपुनउस हल्का-फुल्का वाटरप्रूफ दरवाज़ा ईजाद करने वाले कि सात पुश्तों कि मंगलकामना करतेहुए नं चाहते भि अंदर झांका.! (जिनके घऱ केँ बाथरूम मे ऐसा दरवाज़ा होगा उन्हें पता होगा कि यहबड़े हलके होते हें हैं औऱ थोड़ी momentum सें खुल जाते हें.!)
अंदर शीशे मे रमा केँ चेहरे मे मैंने भावकुछ बदलते हुए देखा आपने जवाब केँ बाद.वोँ अबकुछ हल्के सें मुस्कुराई। औऱ तौलिये सें अपनी खरबूजे जैसी चुंचिया रगड़ते हुएकुछ सोचते हुए थोड़ीदेर मे बोलि.
रमा : "आपनेसही नहीं किया.आपसे कुछ नहीं तौ 12-15 सालबड़ी होंगी भाभी.औऱ कितनी अच्छी हैं.आपने उनको फुसला करबड़ा पाप किया हैं.!" मे मन हि मन बोला"हाँ वोँ बेहन कि लौड़ी 5 साल कि बच्ची हैं जिसे मैने मेलोडी दिखाकर फुसलाया हैं.!" रमा केँ बोलते हुए तौलिया जिस्म सें रगड़ते हुए उसकी जांघो कि जोड़ पऱ पोहच गय़ा.!
इस मनमोहन दृश्य कों देखते हि अपनी दीवाली मन गयीँ,.औऱ मे लंड बाहर् निकाल कर मसलते हुएरमा केँ हिलते हुए स्तनों कां चक्षुपान करतेहुए अनजाने मे मदहोशी मे बोला "हम्म.वोँ तौ हैं.!"
अंदररमा बुर पोंछने केँ पश्चात दोनों हाथ मे तौलिया कों पीछे रगड़ते हुए बोलि "इनको देखो.पता हैं पाप किये हैं औऱ कितनी सहजता सें बोलरहे हें.!" उसके चेहरे पऱ क्रोध वापसआने लगा थां.
मे तुरन्त अपने भोले स्वरूप मे आतेहुए "हाँ रमा.ग़लती तौ हुइ हैं.मे शर्मिंदा भि हु.पर्र तुम् तौ ऐसेबोल रही हौ जैसे केँ मैंने उनकी ख़्वाहिश केँ विरुद्ध उनसे जबरजस्ती कि हौ.!!" गीली झांटों केँ बीचरमा कि चमकती बुर कि फांको कों देखते हुए अपुन बाबूराव कों औऱ तीव्र गति सें रगड़ने लगे.! उफ्फ.दिल कररहा थां कि अंदरघुस करइस गीली जलपरी केँ चूत कां भोसड़ा बनादूं.!!!
जवाब सुनते हि रमाकुछ सोच मे पड़ गई,.ब्रा पहनते हुए बोलीं "आपकीबात भि सही हैं.बेचारी भाभी कि भि क्याँ गलती हैं इसमें.जिसकी जवानी मे पति कां पोटाश ख़त्म पऱ हौ.वोँ तौ इधर-उधर झाँकेगी हि.औऱ आप् ठहरे छुट्टे सांड.मौका मिले तौ छोड़ेंगे केसे.?" ब्लाउज़ पहहेने केँ बाद पेटीकोट लेने मुड़ी औऱ उसकी बेदाग चिकनी गांड नें मेरे पोटाश मे औऱ आग झोंक दि.!
मे : "हाँवही तोँ.अब तुम् हि कहो.खरबूजा चाकू पर्र गिरेगा तौ क्याँ सारी ग़लती चाकू केँ सर मंढोगी.??"
रमाइस बात पऱ खिलखिला उठी.औऱ अपने गीले बालों कों सहेजने लगी.उस दोनों हाथऊपर किये अवस्था मे रमा औऱ भि मादक लगनेलगी औऱ इधर मेरे लंड सें धुआं सें निकलने लगा.!!
धुआं.! अपनेपास धुआं देखते हुए पहले तोँ अपुन कों लंड कुछसूझ नहीं.पर्र अगले हि क्षण सोचने कां काम अपुन केँ दिमाग़ नें लंड सें छीना औऱ पूरेघऱ मे धुआं देखते हुए गांडफिन सें फट गई.औऱ मेरीचीख निकल गयीँ,.!!
आग.आग.आग.!
मे रसोई मे भागा औऱ देखा आमलेट कि मम्मी चुद चुकी थि.! रमा भि मेरे पीछे दौड़ती हुइ आयी.औऱ धुएं सें भरे रसोई कि खिड़की खोलते हुए एग्जॉस्ट चला दि.!
रमा: (चीखते हुए) "क्याँ कररहे हौ आप्.घऱ मे आग लगाओगे.??"
मेरीहवा संट होँ चुकी थि.मुंह सें कुछ निकल नहींरहा थां.बस मुंह खोलेरमा कों ताकरहा थां.यह हालत आमलेट मे लगीआग कि वजह सें नहीं थि.बाबूराव मे लगीआग कि वजह सें थि.! रमा हड़बड़ाहट मे ब्लाउज़-पेटीकोट मे बाहर् चलीआयी थि.औऱ घबराहट मे उसके खुले गीले बालों सें गीले हुई ब्लाउज़, गीली गहरी नाभि.हवस कां मारा मे हकलाने लगा"व्व व्व वोँ। ममम.मे मे मे आमलेट."
रमा: "मे मरगयो थि क्याँ.रोज़ तोँ बनाती हु.इतनी जल्द क्याँ थि.!" गुस्से केँ मारे तमतमा रही थि वोँ.!
मे: "वोँ। मेरेलिए नहीं थां.तुम्हारे लिए थां.सोचा कि तुम् भूखी होगी तोँ."
ईन शब्दों नें जैसेकोई मन्त्र सें फूंक दिया.रमा केँ चेहरे पर्र आश्चर्य केँ भाव आँ गए.औऱ वोँ कृतज्ञता सें मंत्रमुग्ध मेरीओर देखती रहीकुछ देर.
रमा: "इसकी क्याँ ज़रूरत थि.आप् कितने अच्छे हें.मे भि नाँ.क्याँ क्याँ बोल गई, आपको.!" उसकी नज़रे नीची हौ गयीँ,.!
अपुनसोच हि रहे थें केँ बाबा मैदान मार लिया.मना लिया इसको.केँ तभीरमा फिन चीखी"हाय रेराम.!" मे सकपकाया सें उसकीओर देखा तौ पाया कि उसने पतलून टाकीज़ मे लटकता ख़ंजरदेख लिया थां.!
रमा: (मेरीओर गुस्से सें घूरते हुए चीखी) शेफाली भाभी कों खाकर भि नहींभरा क्याँ मन.!
मे थोड़ा सकपकाते हुए " अरे वोँ वोँ। जानबुझ कर नहीं.वोँ तुम्हे ऐसी हालत मे देख लिया नं.तौ बस.मेरी ग़लती नहीं.!"
रमा कों पहलीबार अपनी स्थिति कां अंदाज़ा हुया.औऱ वोँ स्वयं कों देखते हुए लज्जा केँ मारेपलट गई.!
रमा: (गुस्से मे) "छि। आप् बड़े गन्दे हौ.क्याँ क्याँ सोचते हौ आप् भि."
मैंने अपनी फटती हुई गांड कों समझाया केँ बाबाबात बात पर्र नहींफटा करते ऐसे.औऱ स्थिति कों संभालते हुए चापलूस बनतेहुए बोला
मे: "देखो रमा.मुझे ग़लतमत समझो.तुम् कितने दिनों सें जानती हौ मुझे.मैंने तुमको कभीग़लत नज़र सें नहीं देखा.वोँ क्याँ हैं कि उम्र हि ऐसी हैं कि किसी खूबसूरत औरत कों ऐसी हालत मे देखकर स्वयं हि खड़ा.मतलब ऐसा हौ जाता हैं.! प्लीज़ ग़लतमत समझो.!"
रमाचुप खड़ी दोनों हाथों सें अपनी चुंचियों कों ढके सांसे लें रही थि.मैंने अगला दांव खेला.
मे: "कप कॉफ़ी भि बनाई हैं तुम्हारे लिए.तुम् साड़ीपहन लो मे छानता हुतब तक.!" बोलकर मे कप कॉफ़ी वाला बर्नर बन्द किया। बहनचोद आधा लीटरदूध अब तक सूखकर 250 ml रह गय़ा थां.रमा चुपचाप वहां सें जानेलगी औऱ मे रमा केँ लम्बे गीले बालों सें भीगेहुए पेटीकोट केँ हिलते हुए गांड केँ हिस्से कों निहारते हुएकप मे कप कॉफ़ी डालने लगा.! तबाही हैं भई तबाही.क्याँ क़िस्मत पाई हैं इसके झुरण्ड पति नें भि शपथ सें.रोज़ मारता होगा इसकी.क्याँ जबरमाल हैं ममम.!!!
तभी.रसोई केँ खिड़की केँ ऊपर सें जाता हुया एक् मोटा मादरचोद चूहा आँ गिरा सामने.औऱ हड़बड़ाहट मे अपनेहाथ सें पतीला छलक गय़ा.औऱ आधे घण्टे सें खौलती हुई कप कॉफ़ी मेरे पर्र आँ गिरी औऱ बदन सें आत्मा नें करीब निकलते हुए चिंघाड़ा.
"आँ.अहह.मर गय़ा.जल गय़ा.इस चूहे कि मम्मी कि बुर। हायरे मादरचोद.!!!"
रमा दौड़ती हुइ वापसआयी औऱ मेरे हाथों कि लाल होँ चुकी चमड़ी देखते हि घबरा गई.तुरन्त पकड़कर सिंक मे पानी केँ नीचेकर दिया.मे गलाफाड़ करचीख रहा थां.
रमा:"बस बस.क्याँ करते हें.किधर ध्यान रहता हैं आपका.कप कॉफ़ी भि मग मे नहीं डाली जाती आपसे.क्याँ एक् चूहे सें डर गए.अबबस भि करिये चिल्लाना.थोड़ा सां छलका हैं.बच्चो कि तरहचीख रहे हें.!"
मे: "अहह.अहह.मर गय़ा.लंड.लंड.लंड जल गय़ा.!"
रमा नें नीचे देखा तोँ बरमुड़े पऱ छलकी हुइ कप कॉफ़ी देखकर उसकी आंखें डर आँ गय़ा.! मेरेहाथ उसकेहाथ मे थें सिंक मे औऱ मे उछलरहा थां दर्द केँ मारे.! मैंने झटके सें हाथ छुड़वा कर बरमुड़ा पकड़कर अलग करना चाहा तौ बरमुड़े कि इलास्टिक बहनचोद हाथों केँ जख्म पऱ घिस गई,.मैंने दर्द सें बिलबिलाते हुए इलास्टिक छोड़ी औऱ वापसगरम कप कॉफ़ी सें भीगा बरमुड़ा वापससट सें लंड सें जा चिपका.!
"इसकीमा कि.! मर गय़ा.!"
रमा घबराहट मे हड़बड़ा गयीँ,.औऱ आनन-फानन मे घुटने केँ बलबैठ कर मेरा बरमुड़ा नीचे खींच दिया.औऱ तुरन्त बाबूराव विकराल रूप धारण किये स्प्रिंग कि भांति रमा केँ चेहरे पर्र एक् हंटर कि भांति सटाक सें उसके होंठो सें टकराये.!
रमा हड़बड़ाहट मे बदमुड़े कों मेरे पैसों केँ नीचेछोड़ कर दोनों हाथों सें लंड कों पकड़ लेती हैं औऱ चेहरे कों थोड़ा पीछे खींचकर आश्चर्य सें गोल होँ चुकी आंखों सें एक्-टक देखने लगती हैं.!!
रमा केँ हाथों कां कोमल स्पर्श पाकर एक् लम्हा कों बाबूराव नें ठुंकि मारी.औऱ इसी सें उसपर घर्षण हुईँ.औऱ मे दर्द सें बिलबिलाता हुआरमा केँ कंधों कों ज़ोर सें थाम लिया.रमा कि पकड़ लंड पर्र कुछ कसतीचली गई,.
भला होँ उस मादरचोद चूहे कां.!
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"इसकीमा कि.! मर गय़ा.!"
रमा घबराहट मे हड़बड़ा गयीँ,.औऱ आनन-फानन मे घुटने केँ बलबैठ कर मेरा बरमुड़ा नीचे खींच दिया.औऱ तुरन्त बाबूराव विकराल रूप धारण किये स्प्रिंग कि भांति रमा केँ चेहरे पर्र एक् हंटर कि भांति सटाक सें उसके होंठो सें टकराये.!
रमा हड़बड़ाहट मे बदमुड़े कों मेरे पैसों केँ नीचेछोड़ कर दोनों हाथों सें लंड कों पकड़ लेती हैं औऱ चेहरे कों थोड़ा पीछे खींचकर आश्चर्य सें गोल होँ चुकी आंखों सें एक्-टक देखने लगती हैं.!!
रमा केँ हाथों कां कोमल स्पर्श पाकर एक् समय कों बाबूराव नें ठुंकि मारी.औऱ इसी सें उसपर घर्षण हुई.औऱ मे दर्द सें बिलबिलाता हुआरमा केँ कंधों कों ज़ोर सें थाम लिया.रमा कि पकड़ लंड पऱ कुछ कसतीचली गई,.
भला होँ उस मादरचोद चूहे कां.!
एपसोड #14
लंड केँ कसाव नें दोहरा असरडाल रखा थां.झुलसे जाने कि वजह सें गर्मी, औऱ रमा केँ हाथों कि नरमी.अपुन आंखबंद करके कराहे जारहा थां."कुछ करो रमा.जान निकली जारही हैं.अहह.!!"
आंखखोल कर देखारमा अभि भि आश्चर्य सें लौड़े कों घूरिजा रही थि.उसके दोनों हाथों नें लंड कों आगे-पीछे करकेजड़ सें लम्बाई मे पकड़रखा थां, उसकेबाद भि लगभग 1.5 इंच कां सुपाड़ा आगे बाहर् थां.रमा केँ डीप ब्लाउज़ सें उसकी गहरी घाटी केँ बेहतरीन दर्शन होँ रहे थें.जी मे आया कि उसके खुले बालो कों मुट्ठी मे पकड़कर ठेलदू उसके अधखुले मुंह मे लंड.पर्र मन नें बोला केँ बाबा अभि अभि मानी हैं.कंही वापस गांड मे केला नं ठूसदे गुस्से मे.!
मैंने उसके कंधो कों थामे अपने हाथों केँ अंगूठो कों हल्के-हल्के गोल घुमाते हुए कराहना चालू रखा.कुछ देर मे महसूस हुआ केँ रमा कि उंगलियां भि आरामसे हरकत मे आनेलगी.! रमा कां चेहरा मुश्किल सें 7-8 इंचदूर थां लौड़े सें.उसकी गरम साँसों कों मे अब भली-भांति महसूस कररहा थां लंड पर्र.उसकी आँखों मे एक् हल्का गुलाबीपन सें आँ चुका थां.इतनी औरतों कों रगड़ने कां तजुर्बा बोलरहा थां केँ बाबाआज इसकी रेशमी बालो वाली बुर मे अपनाहल चलनातय हैं.! रमा कों गोद मे उठाकर उसकी बुर मे अपना पिस्टन रपारप चलाते हुए उसकीनरम गोल चुंचियों कों चूसने कां सोचते हुए मेरी दर्द कि कराहें मस्ती कि आंहो मे बदलने लगी.!
मे: "रमा.कुछ करो अब.रहा नहींजा रहा.!"
रमाये सुनते हि जैसे एक् खुमार सें बाहर् आई.औऱ मेरे चेहरे कि तरफ मुंह घुमाकर बोलीं "बोहुत जलरहा हैं.?"
मे: "नहीं.इतनी गरमकप कॉफ़ी जिसको 10 मिनट फुंककर पीयो वोँ गिरी हैं लंड पऱ.आनन्द आँ रहा हैं.!! कुछकरो अब.!"
रमा तुरन्त सिंक मे सें पानीहाथ मे लेँ कर लंड पर्र मलने लगी.अब उसके मलने कां तरीका मुट्ठ मारने जैसा होने लगा.बदन कां साराखून लंड मे जानेलगा औऱ बाबूराव मस्ती मे औऱ फूलकर कुप्पा हौ गय़ा.औऱ दर्द अचानक सें बढ़ गय़ा.!!
"अहह.मर गय़ा.औऱ जलरहा हैं.!"
रमा नें कुछदेर लंड कों घूरा औऱ फिन उसके चेहरे पऱ थोड़ा क्रोध आँ गय़ा.
रमा:"इधर झुलस गय़ा हैं पर्र नहीं.इनकी ठरक हि कम नहीं होँ रही.औऱ कड़ा हौ गय़ा यह मुयाँ.जली चमड़ी खिंचेगी तौ दर्द बढ़ेगा हि न्.बैठाओ इसको जल्द.!"
लंड नं हुआ बहनचोद क्लास प्रेप कां बच्चा हुआ जिसको जबकहो तबबैठ लेँ.!
मे: "अहह.ऐसे नहीं बैठेगा रमा.असल मे तुम्हारे हाथ बोहुत नरम हें.समझा करो.अब जब तक पानी निहि निकलेगा तब तक नहीं बैठेगा.अहह.!"
रमाकुछ उलझन मे दिखने लगी.उसने लंड छोड़ दिया.औऱ फुंक मारने लगी लौड़े पऱ.! पर्र इस बेचारी कों कौन बताए कि आग मे फूंक मारने सें अक्सर आगबढ़ जाती हैं.बाबूराव अपनी पूरी औकात मे आकर पेंडुलम कि भांति उसके चेहरे केँ सामने ऊपर-नीचे झूलने लगा.!
रमा: "अब पानी केसे निकालूँ इस मुये मूसल सें.आप् हिलाकर निकाल लो जल्द!"
मैंने सोचा केँ बाबा इसके सामने सड़का मारता हु.माल थोड़ा जल्दफंस जाएगा.पर्र जैसे हि हाथ सें लंड पकड़कर हिलाना चाहा तोँ हथेली कि जली चमड़ी नें फ़टी गांड मे मिर्च डाल दि.!
मे: "अहह.नहीं होगा.हाथ भि जल चुका हैं.प्लीज़ तुम् हिलादो.!"
रमा नें थोड़ा झिझकते हुए लौड़ा पकड़ा.औऱ धीरे-धीरे सें हिलाने लगी.मे मस्ती मे आतेहुए आहे भरने लगा."हाँ रमा.औऱ हिलाओ.निकाल दो पानी.!"रमा हिलाती गई,.हिलाती गयीँ,.हिलाती गयीँ,.पर्र जिस लंड कों टाइट रसीली चूतों मे झड़ने मे 20-25 लगते हौ वोँ मजाल हैं केँ जल्दहार मान लें.!
रमा:"अरे राम.इतनी देर मे तौ मेरे इनका 2 बारझड़ जाए.यह मुयाँ पता नहींकब उल्टी करेगा.! शेफाली भाभी नें केसे निकाला होगाराम जाने.पूछू क्याँ उनसे.!"
मे: "अरे नहीं.वोँ.वोँ असल मे बहुतदेर उनके अंदर थां.बहुत देरबाद जब पानी निकलने कों हुआतब वोँ चूसने लगी थि अपने नीचे सें इसको निकाल कर.!"
रमा: "क्याँ.छि। कैसी-कैसी गन्दी हरकत करते हें लोग.बुर सें सीधे मुंह मे.!! मे तोँ इनकोभगा देती हूं जब मुंह मे लेने कों बोलते हें
.!! वोँ मुयाँ गुप्ताइन कां देवरु भि सुना हैं सावधानी बरतने कि लिए अपनी भाभी केँ मुंह केँ अंदर हि झड़ता हैं.छी.!!"
रमा केँ मुंह सें 'बुर' शब्द नें मेरे कानों मे शहदघोल दिया.! गुप्ताइन.तुमको तौ नहलाऊंगा एक् दिन सड़के सें मादरचोद.!
रमा: (गुस्से मे) "जब भाभी बुर मे लेँ हि रही थि, तब क्याँ ज़रूरत थि उन बेचारी केँ छोटे सें मुंह मे अपनायह मूसल लंड डालने कि.?? एक् गन्दगी कम थि जौ ये.!! "
अहह.मूसल लंड.पका इसके पति कां मेरे सें छोटा हैं.!
मे: "अरे नहीं.उन्होंने स्वयं हि बोला थां केँ मुंह मे लंड डालो.मैंने जबरजस्ती नहीं करी.शपथ सें!"
रमा बुदबुदाई."हाय रे राम.अब अपने पति कि लुल्ली केँ सामने ऐसा लम्बा-मोटा समानदेख कर बेचारी भाभी ललचा गई,.!"
रमा:कुछ सोचते हुए औऱ लंड हिलाते हुए "अच्छा जब उन्होंने मुंह मे लेँ रखा थां तब उनकी मांग केसेभरी.??"
मे: "अरे वोँ असल मे पूरा लौड़ा बाहर् लें कर वापस अंदर लेँ रही थि मुंह मे.मस्ती मे झटके सें लंड बाहर् निकलआया औऱ बस.मन गई, होली.!"
रमा सुनते हि खिलखिला करहंस दि."हि हि हि.इस हरामी मुए केँ मस्ती केँ झटकों कों तोँ देख हि रही हूं.!" औऱ तभीकुछ सोचते हुए हिलाना बन्दकर दिया.औऱ बोलीं "नहि। मे नहींकर सकती ऐसा.मुझे भि गन्दा कर दोगे औऱ फिन सें नहाना पड़ेगा.नाँ बाबा.छि सोचकर हि उल्टी आँ रही हैं .!!"
मे: "अरे ज़ुल्म मत करो.अब निकाल भि दो.जान निकली जारही हैं.!"
दिलकुछ पसीज गय़ा उसका.
रमा: "पऱ केसे.मुझे निहि गन्दा होना बाबा.!!"
मे: थोड़ा झिझकने कि मुद्रा मे "एक् कामकरो प्लीज़.म.म.मुंह मे लेँ करचूस लो.जल्द हौ जाएगा.मे शपथ सें सड़का निकलते वक़्त दूसरी ओरघूम जाऊंगा.!"
रमा गुस्से सें तमतमा करखड़ी हौ गयीँ, औऱ लंड कों ज़ोर सें उमेठ दिया। "क्याँ कहा.मुझे क्याँ बदचलन समझरखा हैं.ऐसा सोचा भि तौ उखाड़ केँ रख दूंगी समझ लेना.!!"
मेेरे तोँ जैसे प्राण निकलगए.! "ऊई मां। मर गय़ा.मार डालोगी क्याँ.जल रखा हैं वरना थोड़े बोलता तुमसे.कक शपथ सें तुम्हारे बारे मे कुछगलत निहि सोचता.कितनी अच्छी हौ तुम्.ककक कितना ख्याल रखती होँ मेरा.प्लीज़ कुछकरो.!"
रमाकुछ शांत हुईँ."पिता जीवैध थें मेरे.एक् बारजब वोँ रामु काकाजी गे कों गाभिन करने केँ बाद भि उस सांड कां निहि बैठा थां तौ उन्होंने गीला कपड़ा लपेटकर उस पऱ पानीडाल थां.आइए चलिए.!"
मे: "अरेव्व सांड थां सांड.मे व्यक्ति हु.मेरा ऐसे निहि होगा.!"
रमा: "आपकाये कम हैं क्याँ किसी सांड सें.अब चलिए.!"
बोल कररमा रण्डपकड़ कर मुझे खिंचती हैं मे उसके पीछेचल देता हूं.!
बाथरूम मे जाकररमा नें नल खोला औऱ मेरे लंड कों पानी केँ नीचेपकड़ करइधर उधरकोई कपड़ा ढूंढने लगी.तभी उसकीनज़र कोने मे पड़े पोंछे वाले कपड़े पर्र पड़ी.उसकी मंशा भांपते हि मे चीखपड़ा "अरे वोँ गन्दा हैं.इन्फेक्शन हौ जाएगा.!!" रमाहंस पड़ीसुन कर.
रमा: "आप् रुकिए मे कुछसाफ लेँ करआती हु!
मे उसकी बांहों कों थाम लिया औऱ बोला "नहीं। प्लीज़ छोड़कर मतजाओ.!" बिना ग्लिसरीन केँ ऐसा आंसू निकाल लिया केँ बिगबॉस कि हिनाखान फेल हैं उसके सामने.!
रमा वापस लंड पकड़कर असमंजस मे आँ गयीँ,."बिना लपेटे तौ न् होगा कुछ.क्याँ किया जाय.यह मुयाँ तौ अबफट पड़ेगा किसी भि वक्त.!"
तभी उसकेमन मे कुछ कौंधा.औऱ उसने एक् अजीब सि मुस्कुराहट कों दबाते हुए एक् हाथ सें अपने लंबे गीलेबाल आगेलाई। औऱ लपेट दिया लौड़े पर्र.! उडांनझल्ले कि शपथ.अपने पुरखों नें भि कभीऐसा नहीं अनुभव नहि लिया होगा.!!!
मैंने कुछ सोचते हुएझट सें अपनी टीशर्ट उतार दि औऱ पूरा नंगाखड़ा होकर घुटने केँ बल बैठीउस संगदिल खूबसूरत औरत कां कंधे कों एक् हाथ सें थाम लिया.!रमा नें एक् हाथ सें बाल लपेटरखे थें लंड पर्र, दूसरा हाथ उसने मेरेहाथ पऱ रख दिया.पानी औऱ उसके रेशमी लम्बे घनेबाल मेरे लौड़े पर्र बिजली सि गिरारहे थें.क्याँ खाक बैठेगा लंड इससे.पर्र अपुन कों क्याँ.!
रमा मेरे चेहरे कि ओर देखते हुए बोलीं "अबबस थोड़ी देर.बैठ जाएगा.!" मे मस्ती मे कांपते हुए."ओह.क्या बात है रमा.!"ऐसा बोलते हुए मैने दूसरे हाथ सें उसकी गर्दन केँ पीछे कां हिस्सा पकड़ लिया औऱ अंगूठे सें उसकेकान केँ नीचे हलचल करने लगा.औऱ उस सुंदरता कों पसीना आनेलगा.!
जबकुछ 5 मिनटबाद भि कुछ नहींहुआ तबरमा गुस्से सें बोलि "कुछ गन्दा सोचरहे हें पक्का.तभी नहींबैठ रहा हैं.!!"
अब मादरचोद कौन गांडू ऐसे माहौल मे सात्विक विचार लाये.!
मे: "रमा.झूठ नहीं बोलूंगा तुमसे.आज जिंदगी मे पहलीबार कोई इतनी हसीनऔरत इस अवस्था मे मेरेसंग हैं.नं चाहते हुए भि तुम्हारी मनमोहक गहरी घाटीदिख जाएरही हैं तुम्हारे ब्लाउज़ सें.तुम्हारे नरम हाथ.ऊपर सें तुम्हारे रेशमी बाल.उफ्फ.ईमान डगमगा रहा हैं.पऱ अपने आप् सभी हौ रहा हैं.!"
रमा थोड़ी जैसे मुस्कुराई फिन उसने तुरन्त अपनी क्लीवेज कि ओर झांका.
रमा:"हाय राम.कहा फंस गई.औऱयह मनीषा दि भि नं.कैसा ब्लाउज़ सील दि हैं केँ सभी जैसे बाहर् हि आँ जायेगा.! स्वयं केँ भि ऐसी हि सिलती हैं.तभी तोँ वोँ मुयाँ दूधवाला उसदिन उस बेचारी केँ सीने मे हाथडाल बैठा थां जब जेठ जी अचानक आँ गए थें औऱ पकड़ केँ थूर दिया थां उस हवसी मुये कों.एक् मिनट.!!!
ये बोलकर रमा केँ चेहरे मे एक् कुटिल मुस्कान आँ गई,.औऱ वोँ बोलि "आप् एक् काम करो.ऐसा करो केँ सोचो आप् शेफाली भाभी केँ संगकर रहे होँ औऱ."
मे बीच मे काटकर बोला "क्याँ कररहा हु.??"
रमा: "वही जौ करते होँ आप् दोनों.चुदाई."
चुदाई शब्दरमा केँ मुख सें सुनते हि जैसे करंटदौड़ गय़ा बदन मे। औऱ मैंने उसकी गर्दन पऱ अपनीपकड़ थोड़े कसतेहुए लौड़े कों उसकी बालो केँ गुच्छे मे अंदर बाहर् करना शुरुआत कर दिया.!रमा कि आंखों मे बड़ी तीव्रता सें घूरने लगा मे। रमा कि भि आंखे थोड़ी सुर्ख सि होनेलगी.
मे: "हाँ.चोद रहाहु मिसेज़ पारेख कि बुर.चोद-चोद कर गाभिन कर दूंगा अब उनको.!!" बिना किसी हिचक केँ रमा केँ सामने बेधड़क बोलरहा थां मे.अबडर किसका.उसने हि तोँ बोला कि सोचू शेफाली भाभी कों चोदरहा हु.!
बालों केँ गुच्छे मे सटासट आगे-पीछे हौ रहा थां लंड.औऱ अब लगनेलगा कि सड़का निकलेगा कुछदेर मे.आज तौ इस गदराई रमा केँ बालों मे अपना कंडीशनर निकालना हैं बाबा.!!तभी रमा नें मेरी आँखों मे झांकते हुए बोला"अब सोचिए कि पारेख साहब अचानक आँ गए कमरे मे.औऱ डंडा हैं उनकेहाथ मे.!!
ईस्की मम्मी कि आंख.सही मे गांडफट गई उसी वक़्त.औऱ बाबूराव कि सारी गर्मी गांड मे घुस गई.लंड झटसे सें सिकुड़ गय़ा.! खड़े लंड ओर धोखा मादरचोद.
रमा खिलखिला करहंस दि.औऱ हंसीरुक हि नहींरह रही थि उसकी.! मे खीजता हुआइधर उधर ताकने लगा.!रमा नें बालो कों लुल्ली होँ चुकी लंड सें खोला औऱ झाड़कर एक् जुड़े मे बांध लिया।
रमा: "आईये अब.मरहम लगा देती हूं.जाकर सोफे पऱ बैठिए" बोलकर बाहर् निकल गई, औऱ मे नंगा हि उसके पीछेचल दिया!रमा रसोई मे गई, औऱ मे जाकर सोफे पऱ नंगाबैठ गय़ा.! रमा रसोई सें हल्दी चन्दन कां पेस्ट लेँ कर आई.उसने इतनीदेर मे साड़ी लपेटली थि.अंदर आते हि बोलि "लज्जा करो आप् थोड़ी.ऊपर कुछ पेहेन तौ लो.!"
मे: खीजकर "अब तुम्हारे सामने पूरी इज़्ज़त उतर हि चुकी हैं.ऊपर पेहेन कर क्याँ द्वख लूंगा.! "
रमा मुस्कुराई.औऱ आकर उसने मेरी हथेलियों पर्र लेप लगाया.फिन कुछसोच कर बोलीं "नीचे लगाने सें नहीं चलेगा.कुछ पहनते हि सारालेप निकल जायेगा.नंगे रह लोगे आप्.??" बोलकर खिलखिला करहंस दि.!!
मुझे क्रोध आनेलगा केँ एक् तौ लौड़ेलग गए हें इधर औऱ इसको मज़ाकसूझ रहा हैं.! मैंने मुंह दूसरी ओर घुमा लिया औऱ कुछ नहीं बोला.
रमा समझगईं केँ मुझे बुरालगा हैं.वोँ चुपचाप रसोई मे गयीँ, औऱ थोड़ीदेर मे एक् कटोरे मे कुछ लेँ कर आई.वोँ आँ कर मेरे सामने बैठ गई, औऱ मेरे दोनों घुटनों कों फैला दिया.मे अब भि नहींदेख रहा थां उसकी ओर.अभि अचानक कुछ ठंडक कि लगी लुल्ली पर्र औऱ मैंने देखा कि रमा चुपचाप बर्फ सें सिकाई कररही थि लंड पर्र.!
उसकेइस कृत्य नें मेरे गुस्से कों शांतकर दिया औऱ मे बड़ी कृतज्ञता सें उसकोओर एकटक देखने लगा.इस वक़्त मेरेमन मे उसकेलिए आभार थां.कोई हवस नहीं.! 3-4 मिनटकुछ बात नहीं हुइ हमारे बीच.फिन रमा बोलि "ज़्यादा नहींजला हैं इधर.हथेली पऱ सीधे गिरीकप कॉफ़ी इसलिये उधर ज़्यादा झुलसा हैं.इधर बस हल्का सां हैं.दो दिन छुट्टी लेँ लीजिए.औऱ ऐसी सिंकाई करते रहिए.ठीक होँ जाएगा.!"
मैंने उसकीतरफ प्रेम सें देखा औऱ नज़रो केँ इशारे सें अपना आभार व्यक्त किया!रमा मुस्कुराई.! मैंने माहौल कों थोड़ा हल्का करने केँ लिए पूछा "अच्छा बुरा न् मानो तौ एक् बात पूछू.??"
रमा: "अब आपकायह हाथ मे लेँ कर बैठी हु.इससे ज़्यादा क्याँ बुरा होगा.??"बोल कर खिलखिला दि.!
मे: "तुम् बतारही थि कि गुप्ताइन मुंह मे लेती हैं सड़का अपने देवरु कां.तुमको केसेपता.?"
रमा: थोड़ा शर्माते हुए"अरे वोँ बिल्डिंग 2 केँ 5 नम्बर वाली सरला भाभी केँ यहांकाम करती हूं नां.वोँ बड़ा मानती हैं मुझको.मुझसे सभी साझा करती हें.! गुप्ताइन बड़ी पक्की सहेली हें सरला भाभी कि.वही बताती रहती हें कि देवरु कि मलाई चाटने मे बड़ा आनंदआता हैं उनको.!"
यह सालाकुछ औरतें भि.क्याँ-क्याँ बताती हें अपनी सहेलियों कों बेहन कि लौडियां.!
मे: "ओह अच्छा.औऱ व्व जौ तुम् बोलि थि कि पारेख साहब कां पोटाश समाप्त हैं.क्याँ तुमने कहीं स्वयं परखा हैं याँ शेफाली भाभी नें कहा तुमसे.!" बोलकर मैंने एक् कुटिल मुस्कान दि.
रमा: "धत्त। आप् भि न्.मेरी जुटी भि नं जायेउस मोटे केँ पास.वोँ मेरे सें पहले चमेली काम करती थि उनके यहां न्.बड़ी चालू हैं वोँ.जितने घरों मे काम करती हैं सबके मर्द-लड़कों सें करवा लेती हैं मुई.वोँ बताती थि कि जितने बार उसनेउस मोटे कां हाथ मे लिया वोँ 5 सेकंड मे झड़लिए.! कईबार तोँ मेरेघऱ मे रहते शेफाली भाभी नें उन्हें झगड़ते हुए सुनाया हैं कि 'किसीकाम केँ नहीं होँ आप्.1 मिनट केँ महंगे होँ पलंग पऱ.!'.तभी तोँ वोँ कभी ऊंचा नहीं बोलते भाभी केँ सामने कभी.नीच कंही केँ.अच्छा हुआ कि भाभी नें बाहर् मुंह मारा.!"
असलियत जानकर मुझे मिसेज़ पारेख पर्र बड़ीदया आयी.वरना अब तक बस एक् रंडी कि तरह चोदता थां उनको मे रगड़ केँ.! सहानुभूति सि होनेलगी मुझे उनसे.
मे : "अच्छा.यह बताओ.केँ तुम्हारे पति कां कितने देर मे निकलता हैं.?"
रमा थोड़ी असहज सि होँ गई, औऱ उठने लगी.मैंने उसके कंधे कों पकड़कर वापस बैठाया औऱ बोला "देखो.मेरे बारे मे सभीकुछ जान गई होँ तुम्.मेरी साथी होँ.तुम्हारे जिंदगी केँ बारे मे नहीं बताओगी मुझे.?? मे तुम्हारी सरला भाभी कि तरह नहि हूं जोँ किसी औऱ सें बताऊंगा तुम्हारा राज़.!"बोल कर मैंने वापस बर्फ उसकेहाथ मे दि औऱ अपने लंड पर्र रख दिया.
रमा: थोड़ा झल्लाते हुए"अब क्याँ बताऊँ आपको.नशा समाप्त कर दिया हैं उनको.एक् तोँ पूराखड़ा नहीं होता.औऱ कभीमूड बन भि गय़ा मुश्किल सें तौ 1-2 मिनट मे हि टाएं हौ जाते हें." बोलकर चुप हौ गयीँ, औऱ नीचे देखने लगी.
मे: "अच्छा जब तन्दरुस्त थें, तब कितना देर टिकते थें तुम्हारे अंदर.?"
रमा: "तब तोँ ठीकठाक कर लेते थें.5-7 मिनट। पऱ आपके जैसा नहीं केँ निकल हि नहींरहा हौ.! अच्छा शेफाली भाभी केँ संग कितने देर थें आप्.?? शर्माते हुए उसने पूछा.
मे: नासमझ बनतेहुए "कितनी देरसंग थां मतलब.??"
रमा: खीजते हुए"अरे मतलब उनके अंदर.?"
मे: "ओह अच्छा उनकी बुर मे.मैंने एक् बार मे करीब 20-25 मिनट चोदा उनको.!"
रमा:"हाय दैया। व्यक्ति हैं याँ जानवर.एक् तोँ ऐसा मूसल औऱ ऊपर सें 20-25 मिनट.!!!सच मे सांड हि आप्.बेचारी भाभी.! औऱ एक् बार मे कां क्याँ मतलब.???"
मे: "अरे वोँ दोबार चुदाई करी उनकी.!"बोल कर एक् टेढ़ी मुस्कान दि.
रमा: "धत्त.कितना गन्दा बोलते हैं आप्.थोड़ा तौ लज्जा करिये.आप् सें बड़ीहु मे.!"
मे: "अब जिसके हाथ मे लंड होँ.उससे क्याँ शर्माना.?? हाहाहा."
रमा झेंप गई,.!
मे: " अच्छा मूसल सें याद आया.मेरा सच मे बड़ा हैं क्याँ.?"
रमा: "बड़ा.गधे केँ जैसा हैं आपका.स्त्री कि जान निकाल देबस.! जितना अभि मुरझाए हालत मे हैं उतना तोँ कइयों कां खड़ा होने पऱ भि न् होता होगा.!"बोल कर खिलखिला दि.
बाबूराव नें अपनी तारीफ़ सुंट हि रमा केँ हाथों मे एक् ठुंकि लगा दि.!
मे: "अच्छा.सच्ची.तौ तुम्हारे पति कां कितना बड़ा हैं.??"
ईस प्रश्न सें रमा केँ भावबदल गए.लंड छोड़उठ खड़ी हुई "मे चलती हु.देर हौ रही हैं.ख्याल रखियेगा.औऱ हाँ.कुछ दिन इसको मात्र मूतने केँ काम हि लाइएगा.!" बोलकर हंस दि.
मे: " अरेकहा चली.कुछ देर सेंक औऱ देदो.!!"
रमा: "नहि। यह हरामी वापस ठुंके लगारहा हैं.कंही फिन औकात मे आँ गय़ा तौ मुझे नहि भवानी अपनी मांग सफेद पानी सें.वोँ शेफाली भाभी कों हि मुबारक़.!" बोलकर दरवाज़े तक गयीँ, औऱ उसके खोलते हुए मे बोला "सुनो.बताती तौ जाओ। कितना बड़ा हैं तुम्हारे पति कां.??"
रमा बाहर् निकलते हुए दरवाज़े सें अंदर झांकी औऱ बोलीं "आपसेआधा.!" औऱ निकल केँ चली गयीँ,.
अपुनबैड पऱ जाकर नंगेलेट गए औऱ सोचने लगे कि रमा केँ संग बिताये आज केँ लम्हा कितनी हि चुदाईयों सें बेहतर थि.!
भला होँ उस चूहे कां.mortein Rat-Kill कैंसिल.!!
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई – New Episode
मे: "अच्छा.सच्ची.तोँ तुम्हारे पति कां कितना बड़ा हैं.??"
ईस प्रश्न सें रमा केँ भावबदल गए.लंड छोड़उठ खड़ी हुई "मे चलती हु.देर हौ रही हैं.ख्याल रखियेगा.औऱ हाँ.कुछ दिन इसको केवल मूतने केँ काम हि लाइएगा.!" बोलकर हंस दि.
मे: " अरेकहा चली.कुछ देर सेंक औऱ देदो.!!"
रमा: "नहि। यह हरामी वापस ठुंके लगारहा हैं.कंही फिन औकात मे आँ गय़ा तौ मुझे नहि भवानी अपनी मांग सफेद पानी सें.वोँ शेफाली भाभी कों हि मुबारक़.!" बोलकर दरवाज़े तक गयीँ, औऱ उसके खोलते हुए मे बोला "सुनो.बताती तोँ जाओ। कितना बड़ा हैं तुम्हारे पति कां.??"
रमा बाहर् निकलते हुए दरवाज़े सें अंदर झांकी औऱ बोलि "आपसेआधा.!" औऱ निकल केँ चली गई,.
अपुनखाट पर्र जाकर नंगेलेट गए औऱ सोचने लगे कि रमा केँ संग बिताये आज केँ लम्हा कितनी हि चुदाईयों सें बेहतर थि.!
भला हौ उस चूहे कां.mortein Rat-Kill कैंसिल.!!
एपसोड #15
दफ़्तर मे फोन करके अपुन नें अपने चाचा केँ मरने कां बोलकर 2 दिन कि छुट्टी लें ली। यह मेरेवही बकचोद सुदीप चाचा हें जिन्होंने मुझे हमारे घऱ कि छत पऱ हमारी पड़ोसन मिसेज़ मालवीया कों चोदते हुएदेख लिया थां औऱ बाद मे मुझे ब्लैकमेल करतेहुए स्वयं कि सेटिंग उस भोली गदराई पड़ोसन केँ संग करवाने कों बोले थें.उस दिनमन तोँ एकबार किया कि बोलदु अपनेउस झुरण्ड चाचा सें कि जिस प्यारे नीरज कों वोँ अपने 'जिगर कां टुकड़ा' मानकर छाती चौड़ा करते हें वोँ दरअसल मेरे हि लौड़े केँ बीज कां फल हैं जिसे उनकी पतिव्रता कामुक पत्नि, मेरी गदराई दीपानिता चाची, नें अपनीकोख मे हमारी उसीछत मे कि गई अनगिनत चुदाईयों केँ पश्चात पालकर जना हैं.!! परन्तु बक्श दिया अपुन नें सुदीप चाचा कों औऱ अपना एहसान मनवाते हुए उनको दिलवा दि मिसेज़ मालवीया कि बुर एक् बार.औऱ 2 मिनेट मे झड़ जाने केँ पश्चात भगा दिया उनको उनको अपनी गुस्साई पड़ोसन नें यहबोल कर कि "पहले अपने भतीजे जैसे पोटाश लें आओ अपने अंदरफिन आनां मेरेपास.!" सुदीप चाचा मरे चूहे केँ लंड जैसा मुंह लेकर वापसआकर मुझसे पूछे केँ मेरी performance कां राज़ क्याँ हैं.?? मैहंस दियायह सोचकर कि 'लवड़े तेरी पत्नि भि यही पूछी थि मुझसे अपनी पलंगतोड़ चुदाई केँ पश्चात जब मैंने उनको अपने मोहल्ले केँ ठाकुर सें चुंची दबवाते हुए रंगेहाथ पकड़ने केँ बाद ब्लैकमेल करके पेला थां उसजून कि गंडफाड़ू धूप मे इसीछत पऱ.!'
ब्लैकमेल केँ बदले ब्लैकमेल.हिसाब बराबर.चाचा कि 'परमानेंट' माल कां भोंसड़ा ठोककर गाभिन करने केँ सामने उनका मेरी 'टेम्पररी' माल कि बुर मे शर्मिंदगी भरा शीघ्रपत्तन। सौदा बुरा नहींलगा मुझे! उसकेबाद सें आज तक मेरा झुरण्ड चाचा बड़ी तमीज़ सें पेशआता रहा हैं मुझसे.!
वापसआज कि स्तिथि मे.इनदो दिनों मे एक् ढीली लुंगी मे अपने बाबूराव कों वापसी कां मौका देतेहुए मे मिसेज़ पारेख कि फोन कां वेट करतारहा पर्र उनकाकोई फोन लंड नहींआया.! फोनआया तौ बस वोँ अपने दफ़्तर मे नई जॉइन हुइ मिसेज़ निराली पटेल कां.!
निराली जी नें अपने पति कों कभी धोखा नं देने कि शपथ खायी हुईँ थि.इसलिये उस गदराई-तबाही नें पिछले 1 महीने मे कभी भि बाबूराव कों अपने 'श्रीमुख' केँ अलावा कही आश्रय नहीं दिया थां.! पूछने पर्र बताती थि कि अपनी पुत्री केँ लिए 'एक् अच्छे वर' कि लालसा मे उन्होंने प्रण लिया थां कि अब तक केँ 9 पराये लंड लीलने केँ बाद वोँ 10वा पराया लंड तभी लेंगी अपनी बुर मे जब बेटी कां शादी पूर्ण होँ जाये.!
'लंड-जलन' केँ दूसरे दिन निराली जी नें यह खुशखबरी दि कि उनको एक् अच्छा दामाद मिल गय़ा हैं औऱ शादी अगले सप्ताह हैं.! मोबाइल पऱ अपनी कामुक आंहे सुना सुनाकर बाबूराव कि जलनबढ़ा हि देती थि बेहन कि लौड़ी अक्सर.पऱ 'डंडालिए खड़े पारेख साहब' कां सोचकर लंड बैठा लेँ रहा थां.! दिल मे थां केँ इस 48 साल कि 'कैब-बुर' केँ पहले अपुन कों शेफाली भाभी कि जवान 'कम-चुदी' चूत कां ठीक सें भोंसड़ा बनाना थां.!
पर्र, इसबीच कि गंडफाड़ू टाइम मे बेचारी शेफाली भाभी कि स्थिति केँ बारे मे अंदाज़ा लगाते हुए उनके बारे मे धैर्य रखरहा थां.! मेरी भांति उनकी भि गांडफटी होगीरमा केँ सामने.इसीलिए बेचारी फोन नहींकर रही.!!
रमा.इस हादसे केँ दूसरे दिन आयी.मे मुंह औऱ लंड लटकाए लुंगी पेहेन कर TV मे रूस औऱ यूक्रेन केँ झगड़े कों देखकर यहसोच रहा थां कि इसबार तोँ गोआ ट्रिप मे रुस्सियन मिलने सें रही.!आंख लग गई,.तभी बाबूराव पऱ मिली ठंडक नें आंखखोल दि.रमा काम समाप्त करके किसी अच्छे नर्स कि भांति लंड पर्र चंदन कां लेपलगा रही थि.!!
कुछदेर तौ उसकोबस देखता रह गय़ा.उससे आंखे मिली तौ उसने एक् हल्की सि स्माइल देकर बोला"कुछ मिलेगा नहींइस मुये कों अगले 2 दिन.तोँ खबरदार जोँ इसकोखड़ा किया.!"
हम् दोनों हंस दिए.तभी
रमा : "वोँ.कप कॉफ़ी."
मे: "हाँवही तौ.नं होती साली वोँ कप कॉफ़ी.नं मे यू तुमसे लंड पर्र चन्दन घिसवा करपड़ा रहता.!"
अचानक थोड़ा गुस्से सें लंड सें सुपाड़े कों दबाते हुएरमा बोलि "यह क्याँ परायी महिला केँ सामने लंड-लंड बोलेजा रहे हें.गाली लगता हैं.ज़रा भि तमीज़ नहींयह आजकल केँ मुयों कों.यह मुये गुप्तइन केँ उस करमजले देवरु नें भि अपनी बेचारी भाभी कि बोलि खराबकर दि हैं.उस दिन केसे गुप्तइन अपनी रंगरेलियों केँ किस्से वोँ 5 नम्बर वाली भाभी कों बताते हुए बार-बार 'लंड-लंड' बोलरही थि.अंदर कमरे मे काम करतेहुए मुझेबड़ा क्रोध आया वोँ मुये उनके हरामी देवर जी पर्र.!
दर्द सें गोटेसरक केँ ऊपर कि ओर आँ लिए भइया.औऱ यह सारी गलती मादरचोद लंड कि औऱ बेचारे लंड-वाले कि। वोँ गुप्तइन तौ बेचारी शिष्टाचारी नारी हैं जोँ शायद अपने पति कि मंगलकामना हेतु अपने हरामी देवर जी सें संभोगरत होने केँ पश्चात उसका वीर्य-पान करती हैं.!
"स.स.सॉरी। पऱ हैं तोँ यह लंड हि.किस नाम सें बुलाऊ औऱ इसको.??"
रमा कां क्रोध फुर्र हौ गय़ा.बात उसकोसही लगी.कुछ सोच मे पड़ गयीँ,.
मे : "लुल्ली बोलू चलेगा.?"
रमा: "धत.लुल्ली तौ वोँ ठरकी पारेख जी कि हैं.आपका वाला तोँ लौड़ा हैं."
रमा केँ श्रीमुख सें 'लौड़ा' शब्द नें जैसे कानो मे शहदघोल दिया.लंड नें भि अपना पर्यायवाची सुनकर अपनामुख फुलाते हुए ठुंकि मार दि हौले सें.!
मे: थोड़ा डरतेहुए "त.त.तोँ क्याँ लौड़ा बोलूआज सें.??
रमा : "धत.वोँ भि गंदा लगता हैं.कुछ नाम देना चाहिए इसको.'बाबू' बुलाइये इसकोआज सें.याँ फिन 'बाबूराव'.औऱ शेफाली भाभी इसकी मस्तानी.!" यह बोलते हि खिलखिला उठी रमा.उसकी हंसी रुके नहींरुक रही थि.औऱ अपुनउस अलौकिक-संयोग पऱ मंत्रमुग्ध उसको देखते हि रहे.!
रमा: "वैसे वोँ कप कॉफ़ी.आपके बगल मे."
मे बदल वाली टेबल पऱ गरमकप कॉफ़ी कां कप देखा औऱ ट्रेन कि सीटी सि निकलने लगी गांड सें.रमा हंसते हुए बोलि "अरे एक् बारऊपर क्याँ गिर गई, तोँ क्याँ जिंदगी मे आगेकप कॉफ़ी नहीं पियेंगे.?? चलिएपी लीजिये"
मे डरतेहुए कप उठाया औऱ चुस्की मारी.मस्त कप कॉफ़ी बनाई थि रमा नें.सोफे पर्र बैठकर गर्मकप कॉफ़ी कि चुस्की केँ संग लंड पर्र एक् गदराई पराई नारी सें चन्दन लगवाते हुए अपुन कों नवाबो जैसी फीलिंग आयी.!
रमा: "कैसीबनी हैं.?"
कुछ शरारत सि आयी दिमाग़ मे.
मे: "चीनी शायदकुछ कम हैं क्याँ.?"
रमा:"अरे। कमरह गई, क्याँ.यह मुये मूसल पर्र चंदन लगाने कां सोचते हुएयह सभी गड़बड़ होँ गय़ा.मेरे तौ हाथ मे चन्दन हैं.आप् जाकर चीनीडाल आईये."
मे: "तुम् चख केँ देखो ज़रा.कंही मात्र मुझे हि तोँ कम नहि लगरही.!!" येबोल करझट सें कप उसके मुंह केँ आगेकर केँ उसके होंटो पऱ टिका दिया।
रमा केँ कुछसोच पाने सें पहले हि कप कॉफ़ी उसके होंटो पऱ लगी औऱ उसकेलब स्वयं हि खुलते चले गए.औऱकप कॉफ़ी नें अंदर प्रवेश किया.!
रमा: "ठीक तौ बनी हैं.पर्र झूटी करवा दि आपने अपनीकप कॉफ़ी.लाईये दूसरी बना लातीहु.!"
मैंने मुस्कुरा कर उसकी आँखों मे देखते हुएकप कॉफ़ी कां कपऊपर लातेहुए चुस्की मारी."अहह.अब अछिलग रही हैं.मिठास सें भर गई, अबयह तोँ.!" बोलकर एक् आंखमार दि रमा कों
रमा:कुछ शर्माते हुए "धत.कुछ भि.यह रोमान्स अपनीं पत्नि केँ संग करिये.उम्रदराज़ महिलाओ पऱ क्याँ डोरेडाल रहे हैं.पऱ यह मुये आजकल केँ लड़कों कों तोँ पकेआम हि भाँते हैं.! औऱ यह क्याँ किया आपने.मेरा झूठा क्योपी लिया.!!!"
मे: "क्यो.तुमने भि तौ पिया मेरा झूठा.क्याँ होँ गय़ा.?"
रमा:"अरे जात-पात मानते हें याँ नहीं.आप् ठहरे ऊंची जाति केँ औऱ हम् नीची जाति केँ.!"
मे: "यहसभी कोरी बकवास हैं.मे तुमको अपने बराबर कां मानता हूं.!" औऱ बोलकर चुस्की लगाते हुए उसके कंधे औऱ गले केँ बीच एक् हथेली रखतेहुए कप वापस उसके होंठो पर्र लगाया.वोँ एक् अजीब असमंजस मे मेरी आँखों मे देखरही थि.मैने मुस्कुराते हुए आंखों सें इशारा किया"कप कॉफ़ी तुम्हारे संग हि पीनी हैं मुझे.!"
रमा नें भि चुस्की लगाई.औऱ हम् दोनों नें मिलकर वोँ कप समाप्त कि.
बड़ी मीठी सें शांति थि.दोनों एक् दूसरे कि आंखों मे देखते रहे.इसके आगेकुछ बढ़ने कां दिल नहीं किया.क्योकि उसकेलिए दिल मे एक् कृतज्ञता सि थि.औऱयह कुछऐसा थां जौ मेरे जैसे अखण्ड चोदू केँ स्वभाव केँ विपरीत थां.! मे बस उसके कंधे कों एक् हाथ सें पकड़ेरहा औऱ दूसरे हाथ सें उसके कंधे औऱ गले केँ बीचपकड़ केँ उसकीकान केँ नीचे अंगूठा घुमाता रहा.!यह अनैच्छिक हि थां उस वक़्त.
रमाकुछ वक़्त पश्चात कुछ असहज सि होँ गयीँ,.वोँ उठी औऱ बिनाकुछ कहेचली गई,.!
नॉकरानी और मसाज-वसाज - नॉकरानी चुदाई - Aage kya hua? Next part padhiye
yeh kya haan Sam bhay?? Oct 30, 2021 ap ne yeh kaha thaa, or vaise ap yaha pe almost daily ya too hafteme kai baar aa hi jaate hu yeh puraani aadat chod dijiye or yeh kahani too complete kijiye please
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