बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
रूपसा औऱ मंदिरा एक् संग गुरुजी केँ पास खड़ी हौ गई थि औऱ गुरुजी केँ हाथों कों अपनी जाँघो पऱ महसूस करनेलगी थि। रूपसा औऱ मंदिरा एक् संग कामया कि ओर पलटी थि कामया वही किसी माडेल कि तरह खड़ी थि अब तक जैसेउसे किसी नें स्टॅच्यू कर दिया थां पर्र नजर गुरुजी कि हथेलियों कि ओर हि थि रूपसा औऱ मंदिरा कि गोरी गोरी जाँघो कों गुरुजी बहोत हि प्रेम सें सहलाते हुए अपनी दोनों बाहों कों उनकीरूम पऱ कस लिया थां औऱ अपनेगाल कों उसकेपेट पऱ रखकर घिसने लगे थें कामया खड़ी-खड़ी गुरुजी कों देखती रही उसके अंदर एक् ईर्ष्या जागउठी थि उसके सामने हि गुरुजी जिस प्रकार दोनों कों प्रेम कररहे थें औऱ उसेनजर अंदाज कररहे थें वोँ उसे अच्छा नहि लगा थां वोँ तोँ ये सोचकर आई थि कि गुरुजी उसकेसंग कुछ करेंगे पर्र यहां तौ बात हि उल्टी निकली थि कामया खड़े-खड़े थक गई थि औऱ जिसतरह वोँ खड़ी थि उसेआदत नहि थि औऱ अपने सामने जिसतरह कां खेल गुरुजी औऱ वोँ दोनों महिलाए खेलरही थि वोँ भि उसे अच्छा नहि लगरहा थां इतने मे गुरुजी नें कहा -
गुरुजी- बैठोसखी खड़ी क्यूं हौ
कामया नें एक् बार आस-पास देखा पर्र वहा सिवाए गुरुजी केँ आसान केँ अलावा कुछ नहि थां औऱ वहां तोँ येखेल चलरहा थां वोँ खड़ी-खड़ी सोच हि रही थि कि
गुरुजी- बैठोसखी यहां बैठो हमारे पास तुम् अब निखररही होँ बस थोडा सां औऱ जरूरत हैं रूपसा औऱ मंदिरा बहोत अच्छी औऱ कर्तव्यनिष्ठ शिष्या हैं
कहतेहुए गुरुजी नें अपने एक् हाथ सें उसकी कलाई पर्र कस लिया थां गर्म-गर्म हाथों केँ स्पर्श सें एक् बार तौ कामया उत्तेजित हौ उठी पर्र हल्के सें मुस्कुराती हुइ गुरुजी केँ पास हि बैठ गई थि उसके सामने मंदिरा थि औऱ साइड मे गुरुजी गुरुजी केँ दूसरे साइड मे रूपसा थि आरामसे दोनों केँ ड्रेस खुलने लगे थें एक्-एक् अंग निखारा हुआ थां दोनों कां रंग केँ संग-संग मादकता टपकरहा थां उनके जिस्म पर्र गुरुजी कां हाथ जैसे-जैसे उनके जिस्म पऱ घूमरहा थां वोँ दोनों एक् संग गुरुजी सें औऱ ज़्यादा छिपकने कि कोशिश करतीजा रही थि कामया अपने सामने होतेइस खेल कों बहोत नजदीक सें नां सिर्फ़ देखरही थि औऱ अपने अंदर कि उत्तेजना कों किसीतरह सें दबाएहुए थि कामया केँ देखते-देखते वोँ खेलआगे बढ़ने लगा थां
गुरुजी भि जिसतरह सें उन महिलाओं कों छेड़रहे थें उससे कामया केँ जिस्म मे आग भड़करही थि रूपसा उसके बिल्कुल सामने खड़ी थि औऱ गुरुजी केँ हाथ उसके सामने रूपसा केँ नितंबों कों छूतेहुए ऊपर कि ओरउठरही थि रूपसा हल्की चीख भरती हुई गुरुजी कि ओरमूड गई थि कामया बहोत नजदीक सें रूपसा केँ बदन कों देखरही थि सफ़ेद रंग औऱ बेदाग बदन कि मालकिन थि वोँ बालों सें भरेहुए हाथ गुरुजी केँ उसके जिस्म केँ रोमो कों छूतेहुए ऊपर उसकी चुचियों कि ओरबढ़ चले थें उसकी चूचियां भि आगे कि ओरतनी हुईँ थि औऱ उसकी सांसों केँ संग-संग ऊपर-नीचे हौ रही थि कामया अपनी सांसों कों किसीतरह सें कंट्रोल किएहुए नाँ चाहते हुए भि उसकाहाथ उठकर रूपसा केँ जिस्म कों स्पर्श कर हि गय़ा थां उसकीकमर पऱ बहोत हि हल्के औऱ नाजुक तरीके सें जैसेउसे डर थां कि कहीउसे पता नां चलजाए पर्र उसकेहाथ जैसे हि रूपसा कि कमर पऱ टकराए थें गुरुजी केँ संगसंग रूपसा नें भि एक् बार कामया कि देखा औऱ फिनवही उत्तेजना भरीआह लेती हुइ रूपसा अपने आप् मे घूम होँ गई थि पऱ गुरुजी.
गुरुजी- अपने आपको सम्भालो सखीइस खेल मे आपने आपको जितना तुम् कंट्रोल करोगी उतना हि तुम् एश्वर्य कों प्राप्त करोगी औऱ तुम् उतना हि कामुक औऱ दर्शनीय बनोगी
कामया- …
कामया कुछ नाँ कहपाई थि पऱ अपने हाथों कों वापस खींच लिया थां औऱ बैठी बैठी रूपसा कों औऱ पास मे मंदिरा कों भि देखती रही अपनेमन कों किसीतरह सें मनाने कि कोशिश करतीरही पर्र मन केँ संग-संग जिस्म भि अब जबाब देनेलगा थां वोँ अपने आपको संभालती क्याँ वोँ तोँ उसखेल कां हिस्सा बनने कों सजधजकर थि बस एक् शरम औऱ झीजक केँ रहते वोँ रुकी हुईँ थि एक् नजर गुरुजी कि ओर डालते हि उसकाहाथ वापस रूपसा पऱ चला गय़ा थां उसकीकमर पऱ औऱ धीरे-धीरे धीरे-धीरे उसे सहलाती हुइ दूसरे हाथ कों गुरुजी केँ कंधों पर्र भि रख दिया थां औऱ गुरुजी सें सट्ने कि कोशिश करनेलगी थि गुरुजी कि नजर एक् बार कामया कि ओरउठी थि औऱ हल्के सें मुस्कुराते हुए अपनेखेल मे लगेरहे रूपसा कों तोँ जैसेफरक हि नहि पड़ा थां वोँ खड़ी हुइ सिर कों ऊँचाकिए हुए गुरु केँ हाथों कां मज़ा लेतीरही औऱ आगेबढ़ कर अपने जिस्म केँ निचले हिस्से कों गुरुजी केँ कंधों पर्र औऱ सीने पर्र रगड़ने लगी थि मंदिरा कां भि यहीहाल थां दोनों उत्तेजना सें भरी हुईँ थि औऱ सांसो केँ संग-संग अब तौ उनकेमुख सें अलगअलग आवाजें भि निकलने लगी थि
रूपसा- औऱ करो गुरुजी आज तौ आपके स्पर्श मे कोई चमत्कार होँ गय़ा हैं
मंदिरा - बस गुरुजी अब औऱ नहि रहा जाताअब तोँ कृपाकर दो
औऱ कहतेहुए मंदिरा झट सें नीचेबैठ गई थि औऱ गुरुजी कि धोती कों खींचती हुई अलग करनेलगी थि गुरुजी केँ होंठों पर्र वही मधुर मुश्कान थि औऱ अपनेपास बैठी कामया कि ओर देखते हुए अपने होंठों कों उसकीओर बढ़ा दिया थां कामया एक् टक मंदिरा कि देखरही थि रूपसा भि अबबैठ गई थि पर्र अचानक उसने गुरुजी कों अपनीओर हुए देखते हुए देखा तोँ वोँ थोडा सां सिहर गई थि उत्तेजित तोँ वोँ थि हि पर्र गुरुजी कि ओर देखते हि उसे गुरुजी कि ओर सें जौ निमंत्रण मिला थां वोँ उसे ठुकरा नहि सकीझट सें अपने होंठों कों उनके होंठों पऱ रख दिया थां औऱ धीरे धीरे उनके होंठो कों अपने होंठों सें दबाएहुए चूसती रही अपनीजीब सें उनके होंठों कों चूसती रही उसकी पकड़ गुरुजी केँ कंधों पऱ कस्ती रही औऱ पास बैठी रूपसा केँ सिर पऱ भि उसकी गिरफ़्त कस गई थि रुपसा औऱ मंदिरा अपनेकाम मे लग गई थि गुरुजी केँ लिंग कों पकड़कर बारी- बारी सें चूसते हुए अपने चुचों कों गुरुजी केँ पैरों पर्र घिसते हुए अपने हाथों कों उनके सीने तक घुमाने लगी थि
कामया अपने पूरेमन सें गुरुजी केँ होंठों कां रसपान करने मे जुटी हुई थि उसे किसीबात कि चिंता नहि थि औऱ नहि कोईडर थां वोँ एक् बिंदास लड़की कि तरह अपनेकाम कों अंजाम देरही थि पास बैठी हुई रूपसा औऱ मंदिरा क्याँ कररही हैं उसेपता नहि थां पर्र उसे तोँ सिर्फ़ गुरुजी सें हि मतलब थां वोँ चाहती थि कि गुरुजी जिसतरह सें रूपसा औऱ मंदिरा कों छूरहे हैं उसे भि छुए पर्र गुरुजी केँ हाथअब भि उनकेसिर पऱ औऱ कंधों पऱ घूमरहे थें कि अचानक हि उसकाहाथ गुरुजी हाथों सें टकराया थां रूपसा केँ सिर पर्र एक् हि झटके मे कामया नें उनके हाथों कों अपनी हाथों मे दबा लियाया थां औऱ खींचती हुई अपनी जाँघो पऱ लाकररख दिया थां गुरजी नें भि कोई आपत्ति नहि किया थां औऱ आहिस्ता कामया कि जाँघो कों सहलाने लगे थें
कमी अत्ोड़ा सां आतुर हौ उठी थि वोँ अपने दूसरे हाथों कों रूपसा केँ सिर पर्र सें हटतेहुए गुरु केँ साइन पर्र रखती हुइ उन्हें अपनी औऱ खींचने लगी थि औऱ आरामसे गुरुजी केँ दूसरे हाथ कि औ र्बाद रही थि पऱ वोँ थोडा सां दूर थां मंदिरा केँ जिस्म कां अवलोकन करतेहुए पर्र वोँ हरी नहि गुरुजी केँ साइन कों बड़े हि प्रेम सें सहलाती हुईँ अपने होंठों कों उसके होंठों सें जोड़े हुए गुरुजी केँ साइन पर्र धीरे-धीरे सें अपने नाखून कों गड़ा दिया थां अचानक हि हुएइस तरीके केँ हमले कों गुरुजी नहि समझपाए थें औऱ वोँ हाथ जोँ कि मंदिरा केँ ऊपर थां उससे उन्होंने कामया केँ हाथों पऱ रख दिया थां बस कामया यही तौ चाहती थि झट सें उसहाथ पऱ भि कब्जा कर लिया थां उसने औऱ खींचकर अपनी चुचियों पऱ लेँ आई थि अब उसके चुंबन कां तरीका भि बदल गय़ा थां बहुत उत्तेजक औऱ अग्रेसिव होँ गई थि वोँ नीचे बैठी हुई रूपसा औऱ मंदिरा भि येसभी देखरही थि औऱ एक् विजयी मुश्कान थि उनके चेहरे पऱ कामया नें येसभी नहि देखा थां
कामया अपने हाथों केँ दबाब सें गुरुजी केँ हाथों कों अपनी चुचियों सें हटाने नहि देरही थि औऱ एक् हाथ सें गुरु कों खींचकर अपने होंठों सें जोड़े रखा थां कि उसे गुरुजी कि आवाज़ अपनेमुख केँ अंदर सुनाई दि थि
गुरुजी- रूकोसखी रूको इतना आतुर नाँ होँ अभि बहोत कुछ देख्ना औऱ जानना हैं आपको देखो रूपसा औऱ मंदिरा भि तौ हैं हम् तौ सबके हैं औऱ सभी हमारे हैं आओ तुम्हें कुछ दिखाना हैं कहतेहुए गुरुजी नें एक् बारउन दोनों कि ओर देखा औऱ इशारा किया
गुरुजी- आओ रूपसा मंदिरा हमारी सखी कों दिखाओ कि तुम् क्याँ कर सकती हौ जाओ औऱ वोँ खेल खेलो
रूपसा औऱ मंदिरा एक् झटके सें उठी औऱ अपने कपड़ों कों उठाकर गुरुजी कि ओर देखने लगी थि कामया अपने हाथों केँ बीच मे गुरुजी कों पकड़े हुए दोनों कि ओर देखती हि रह गई थि कि गुरुजी नें भि अपनी धोती बाँधली थि औऱ कामया कों उठने कों कहा
गुरुजी- आओसखी तुम्हें कुछ दिखाना हैं
कामया वैसी हि उठ गई थि उत्तेजना सें भरी हुई थि वोँ उसे बड़ा हि अजीबलग रहा थां कि गुरुजी आज क्याँ करने वाले हैं रूपसा औऱ मंदिरा जौ कि अभि इतनी उत्तेजित लगरही थि इतना नार्मल केसे हौ गई थि वैसे हि बिना कपड़ों केँ खड़ी थि कोईशरम याँ हया नहि थि उनमें खड़ी-खड़ी कामया कि ओर मुस्कुराती हुईँ देखरही थि कामया भि उठकर उनकेसंग चल दि थि
गुरजी केँ दोनों ओर रूपसा औऱ मंदिरा थि औऱ कामया पीछे थि घुमावदार गोलगोल नितंब उसके सामने बलखाते हुएचल रहे थें कितना हसीन औऱ कामुक सीन थां वोँ औऱ गुरुजी उसके दोनों कंधों पऱ अपनी बाँहे रखेउसे कमरे सें लगे दूसरे कमरे कि ओरचलदिए थें वहां अंधेरा थां पऱ दिखरहा थां बिल्कुल साफ सुथरा औऱ कोई आवाज़ नहि थि एक् आसान भि थां वोँ शायद गुरु जीके बैठने कि स्थान थि वोँ कमरे मे आते हि रूपसा आगे बढ़ी औऱ एक् स्विच कों ओनकर दिया थां औऱ एक् परदा कों घसीटकर एक् दीवाल सें हटा दिया थां पर्दे केँ हट-ते हि कामया कि आखेंफटी कि फटीरह गई थीदूसरे कमरे कां हिस्सा दिखरहा थां
कमरे मे हल्की सि रोशनी थि औऱ बहोत सें मर्द औऱ महिला बिल्कुल रूपसा औऱ मंदिरा जैसी हालत मे हि थें पऱ सिर पर्र मास्क चढ़ाहुआ थां बस होंठों कि स्थान औऱ नाक कि स्थान खाली थि औऱ शायद आँखों पऱ भि कुछ थोडा बहोत ढकाहुआ थां क्योंकी उनको देखकर लगता थां कि उन्हें साफ नहि दिखरहा होगा पऱ लगे थें एक् हि काम मे बस जौ भि हाथों मे आयाउसे हि चूमचाट रहे थें एक् सें एक् तरीके कि महिलाए औऱ पुरुष थें वहां पर्र हसीन सुडोल औऱ बेढांगी भि वैसे हि मर्द भि मोटे औऱ थुलथुले औऱ कसेहुए बदन केँ मलिक भि थें पऱ थें सब बेख़ौफ़ औऱ सेक्स मे डूबेहुए एक् दूसरे सें गुथेहुए वही नीचे गद्दे पऱ औऱ कोईबेड पऱ तोँ कोई खड़ेहुए बस एक् रोमन औरगी कां सीन थां वोँ पूरा कां पूरा रूपसा औऱ मंदिरा नें घूमकर एक् बार कामया कि ओर देखा औऱ फिन गुरुजी कों घसीटकर उसके गालों औऱ होंठों कों चूमते हुए दोनों उनके सामने सें चली गई थि कामया बेसूध सि खड़ी हुईँ कमरे केँ उस हिस्से कों देखरही थि कि गुरुजी कि आवाज़ उसके कानों सें टकराई थि
गुरुजी- ऐसे क्याँ देखरही होँ सखी वोँ एक् ऐसाखेल हैं जौ इस संसार मे र्रोज औऱ हरकही होता हैं कोईबंद कमरे मे करता हैं तोँ कोई खुले मे कोई ख़्वाहिश सें करता हैं तोँ कोई अनिक्षा सें तौ कोईइस खेल मे इतना डूबाहुआ हैं कि उसे किसी कि चिंता नहि हैं याँ इसखेल कि इतनीआदत लग चुकी होती हैं कि वोँ भूल जाता हैं कि उसके हाथों मे जोँ कोई भि आया हैं वोँ कौन हैं शायद यहां पर्र कोई अपनी हि घऱ वाली केँ संग हि वोँ खेलखेल रहा हैं याँ अपनी हि किसी रिश्तेदार केँ संग याँ जोँ भि होँ पऱ हर किसी कों अपनेबदन कि आग कों शांत करना होता हैं पर्र एक् बात जोँ देखने लायक हैं वोँ हैं कि किसी कां भि अपनेबदन पर्र नियंत्रण नहि हैं तुम् देखो वोँ थुलथुलसा व्यक्ति देखो
औऱ घसीटकर कामया कों अपने नजदीक खड़ाकर लिया थां उसके कंधों पर्र अपनी बाँहे रखेहुए वोँ कमरे केँ एक् हिस्से मे अध्लेटे सें एक् आधेड़ व्यक्ति कि ओर इशारा कररहे थें
गुरुजी- देखोउसे कितना थक गय़ा हैं पर्र फिन भि कमरे सें बाहर् नहि आनां चाहता हैं अब भि उसे इक्षा हैं संभोग कि कि औऱ करे पर्र उसका जिस्म उसकासंग नहि देरहा हैं
इतने मे उसने कमरे मे रूपसा औऱ मंदिरा कों आते देखा थां कमरे मे आतेही जैसेजान आँ गई हौ एक् ऊँची सि आवाज़ उस कमरे मे गूँज गई थि औऱ रूपसा मंदिरा कां स्वागत जैसेसब लोग उठकर करना चाहते हौ उन दोनों केँ पीछे-पीछे कुछ पुरुष भि उस कमरे मे दाखिल हुए थें बलिष्ठ औऱ पहलवान टाइप केँ चेहरा कसाहुआ औऱ सिर्फ़ एक् लंबा सां कपड़ा कमर केँ चारोओर बँधाहुआ थां रूपसा औऱ मंदिरा तोँ बिना कपड़ों केँ हि उस कमरे मे दाखिल हुइ थि औऱ जिसतरह सें दोनों नें घूमकर एक् चक्कर लगाया थां उस कमरे मे जैसे उनकोआदत थि इसतरह कां करने कि पीछे-पीछे उन पुरषो नें भि एक् बार घूमकर उसकमरे मे बैठी हुईँ औऱ लेटी हुई महिलाओं कि ओर देखते हुए कमरे केँ बीचोबीच मे आकेकर खड़े हौ गये थें
सब एक् संग उनकीओर भागे थें जैसे कि होड़लगी होँ कि कौन पहले पहुँचता हैं पुरुष तौ आगे थें पर्र महिलाए कुछ पीछे थि पऱ थें सब जल्द मे पुरषो नें रूपसा औऱ मंदिरा कों घेर लिया थां औऱ जल्द बाजी मे कुछलोग उनको उठाकर अपने हिस्से मे लेँ लेना चाहते थें औऱ महिलाए एक् केँ बाद एक् करकेउन पुरषो केँ पीछेपड़ गई थि छीना झपटी कां वोँ खेल उन्मुखता केँ शिखर पऱ केसे औऱ कब पहुँच गय़ा थां देखते हि देखते पता हि नहि चला पर्र हरकोई किसीतरह सें अपने आपको संतुष्ट करने कि होड़ मे थां पऱ एक् बात जौ बिल्कुल अलग थि वोँ थि कि कमरे मे आएहुए रूपसा मंदिरा औऱ उनकेसंग आएउनचार पुरुषों कि पता नहि क्याँ बात थि उनमें जौ हर पुरुष जोँ कि मंदिरा औऱ रूपसा केँ पीछे पड़े थें एक्-एक् कर शांत होतेचले गये पर्र रूपसा औऱ मंदिरा केँ चहरे पर्र कोई शिकन तक नहि थि वोँ अब भि अपनी आदाए बिखेरती हुइ बिल्कुल पहले जैसी हि खड़ी थि औऱ लेटी हुईँ थि पऱ उत्तेजना कि लहर सिर्फ़ चेहरे केँ सिवा औऱ कही नहि दिखरहा थां रूपसा औऱ मंदिरा कों उठाकर चार पाँच पुरषो नें एक् बड़े सें गद्दे पऱ लिटा लिया थां औऱ जिसे जहांकिस करतेबन रहा थां औऱ जिसे जोँ करतेबन रहा थां कररहे थें औऱ रूपसा औऱ मंदिरा खिलखिलाते हुए हँसते हुए अपनेबदन कां हरअंग उनके सुपुर्द करतीजा रही थि,
कोई भि स्थान नहि बची थि जहांउन पुरषो नें किस नहि किया थां याँ फिन अपनीजीब सें चाटकर उसका स्वाद नां चखा होँ मंदिरा औऱ रूपसा एक् केँ बाद एक् पुरषो कों अपने हाथों सें अपने होंठों सें औऱ अपनी योनि केँ अंदर होने सें नहि रोकरही थि वोँ तोँ यहांआई हि इसलिये थि कि एक्-एक् करकेहर पुरष कों शांतकर सके औऱ उनकी तमन्नाओं कों जगाकर उनकोपरम सुख कि अनुभूति दिलासके औऱ वोँ दोनों इसकाम मे निपुण थि उनका चहकने कां ढंगइस तरह थां कि सोयाहुआ सन्यासी भि शायदजाग जाए किसी भि योगी केँ तप कों हिला सकती थि ये दोनों अंगो कों मोड़कर याँ दिखाकर जिसतरह सें वोँ इसखेल मे उलझी थि वोँ देखने लायक थां कामया इसतरफ खड़ी हुई उन दोनों कों औऱ उन पुरषो कों देखती हुइ गुरुजी सें चिपककर खड़ी थि उसेपता भि नहि चला थां कि कब गुरुजी कां हाथ उसकेगोल गोल औऱ नरमकसे हुए उभारों पर्र आँ गये थें जौ बड़े हि आहिस्ता उन्हें सहलाते हुए कामया सें कुछकह रहे थें
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
गुरुजी- देखोसखी वोँ लोगो कां नियन्त्रण कुछ नहि हैं अपने जिस्म पऱ केसे एक् केँ बाद एक् ढेर होतेजा रहे हैं उनके जिस्म मे इतनी भि ताकत नहि बची हैं कि दोबारा कुछकर सके क्याँ तुम् इन जैसी बनना चाहती हौ नहि सखी मे तुम्हें यहां इसलिये नहि लाया हूं मे चाहता हूं कि तुम् इसखेल मे इतना निपुण हौ जाओ कि हर मर्दहर स्त्री तुम्हें पाने कि ख़्वाहिश रखे पर्र तुम् अपनी मर्ज़ी कि मालिक रहो इनकी मर्ज़ी कि नहि हाँ…सही सुना तुमने मे चाहता हूं कि तुम् अपनी मर्ज़ी कि मालिक रहो अपनेबदन कों इतना अच्छा बनाओ कि मर्द देखकर हि तुम्हें पाने कि ख़्वाहिश करे तुम्हारे हाथ लगाने भर सें हि वोँ झड़जाए तुम्हें देखकर हि वोँ झड़जाए नाकि तुम् उनको देखकर उत्तेजित होओ तुममे वोँ बात हैं मे जानता हूं पर्र तुम्हें बहोत कुछ सीखना हैं सखीकहो मेरासंग दोगी नां … …
औऱ गुरुजी नें उसकी चुचियों कों धीरे-धीरे सें दबाकर उसके कंधों कों पकड़कर अपनी औऱ मोड़ लिया थां कामया उत्तेजना केँ शिखर पर्र थि उसे एक् मर्द कि जरूरत थि औऱ अभि अभि जौ वोँ देखरही थि औऱ गुरुजी केँ हाथों केँ स्पर्श नें जोँ उसकेसंग किया थां वोँ एक् अलग सां अनुभव थां उत्तेजना मे उसकेगले सें आवाज़ नहि निकलरही थि गला सूखाहुआ थां औऱ एकटक गुरुजी कि ओर देखती हुई कामया अपने गालों पर्र गुरुजी केँ कोमल हाथों कां स्पर्श पाते हि सिर्फ़ आखेंबंद किएहुए सिर कों हिलाकर अपना समर्थन भरदेपाई थि
गुरुजी- ठीक हैं सखीआज सें तुम् हमेशा मेरेसंग हि रहोगी तुम्हें जोँ चाहिए मुझे बताना कोई झिझक नहि करना मे तुम्हारा हूं इस संसार कां हूं पऱ पहले तुम्हारा फिनबाद मे किसी औऱ कां ठीक हैं
औऱ कहतेहुए अपने होंठों कों उसके होंठों सें जोड़ लिया थां
कामया अभि आतूरता मे थि हि झट सें गुरूरजी केँ होंठों कों अपने होंठों केँ सुपुर्द करके उसके बाहों मे झूल गई थि
कामया कोशिश मे थि कि जितना होँ सके गुरुजी सें सटकर खड़ी हौ जाए उसकारोम रोमजल रहा थां दीवाल केँ दूसरे तरफ जौ खेलचल रहा थां वोँ एक् अनौखा खेल थां अपनी जीवन मे उसनेइस तरह कां खेल नहि देखा थां उसकाबदन उसखेल मे इन्वॉल्व होने कों दिलकर रहा थां उसे एक् संग अपने जिंदगी मे आएहर मर्द केँ बारे मे याद दिलारहा थां
यादेकुछ नां करे पऱ बदन औऱ मन कों झंझोर कररख देती हैं कामया कां भि यहीहाल थां हर वोँ समय जौ उसने भीमा लाखा औऱ भोला केँ संग बिताए थें एक्-एक् समयउसे यादआते जारहे थें औऱ गुरुजी केँ संग चिपकते हुए वोँ सिर्फ़ एक् हि ख़्वाहिश रखती थि कि गुरुजी उसकेसंग भि वहीखेल खेले पर्र गुरुजी कां अंदाज कुछअलग थां अब भि कोई जल्द बाजी नहि थि औऱ नां हि मर्दाना भाव हि थां उनमें सिर्फ़ हल्के हाथों सें उसे सिर्फ़ सहारा दिएहुए थें
कामया- गुरुजी प्लीज कुछ कीजिए नाँ बहोत पागलपन सां लगरहा हैं
गुरुजी- नहि सखी तुम् सिर्फ़ इसखेल केँ लिए नहि हौ तुम्हें बहोत कुछ सीखना हैं यहां बैठो
औऱ कहतेहुए कामया कों संगलिए हुए वहांरखे हुएआसन पर्र बैठगये थें कामया उनसे चिपककर बैठ गई थि उसकाहाथ गुरुजी केँ सीने पर्र घूमरहे थें औऱ रह रहकर उसकाहाथ जानभुज कर उसके लिंग तक पहुंचा रही थि कामया बहोत उत्तेजित थि औऱ गुरुजी सिर्फ़ उसे सहारा दिएहुए सामने दीवाल कि ओरदेख रहे थें कामया एकटक गुरुजी कि ओर देखती रही औऱ अपनेकाम केँ अंजाम केँ प्रतीक्षा मे थि कि गुरुजी बोले
गुरुजी- देखरही होँ इन महिलाओं औऱ मर्दो कों सिर्फ़ एक् बार याँ दोबार मे हि कितना थकगये हैं शायदअब उठाकर इन्हें मार भि डालो तोँ पता नहि चलेगा औऱ नहि कुछ सख्ती बाजी हैं कि कुछकर भि सके पऱ हमारी शिष्या औऱ शिष्यों कों देखो कितने जोरदार तरीके सें अब भि इसखेल कां पूरामजा लेँ रहे हैं हैं नाँ
कामया कि नजर एक् बारफिन दीवाल कि ओरउठी थि वहां कां खेलअब अलग थां जितने भि मर्द औऱ स्त्री बाहर् केँ थें सभी नीचे पड़ेहुए थकान सें चूर थें औऱ गहरी सांसें भरतेहुए अपने आपको व्यवस्थित कररहे थें पऱ रूपसा मंदिरा औऱ चार मर्द जौ कमरे मे आए थें वोँ अब भि खड़ेहुए थें औऱ उन लोगों कि ओर देखते हुएउस कमरे मे घूमरहे थें मर्द सिर्फ़ औरतों कों छूकरदेख रहे थें औऱ रूपसा औऱ मंदिरा मर्दो कों छूकरदेख रही थि पऱ कोई भि हिलने कि हालत मे नहि थां
पऱ फिन भि कुछ लोगों मे इतनी हिम्मत तोँ थि कि पासआने वालों कां मुस्कुरा कर स्वागत तोँ कर हि रहे थें महिलाओं सें अधिकथके हुए मर्द थें नाँ कोईहिल रहा थां औऱ नहि कोई मुस्कुरा रहा थां महिलाए तौ चलो थोडा बहोत मुस्कुरा कर एक् बार उनकोदेख भि लेती थि इतने मे कामया नें देखा कि एक् स्त्री शायदकोई 30 35 साल कि होगी बहोत खूबसूरत जिस्म नहि थां पर्र थि साँचे मे ढली हुई मास ज़्यादा थां हरकही ऊपर केँ संग उसका जिस्म भि कुछ वैसा हि हौ गय़ा होगा उठकरउन चार मर्दो मे सें एक् कों अपनीओर खींचा थां उस मर्द नें भि बिनाकोई आपत्ति केँ धीरे-धीरे
सें उस स्त्री कों अपनी बाहों मे भर लिया थां औऱ उसकेसंग सेक्स केँ खेल मे लिप्त होताचला गय़ा थां आरामसे उन चारो मर्दो मे सें बचेहुए तीन मर्दो नें भि उसेघेर लिया थां हर किसी केँ हाथ उसकेबदन पर्र घूमते चलेगये थें हर एक् मर्दउस औरत केँ अंगो कों तराष्ते हुएफिन हल्के सें उन्हें दबाते हुए अपने होंठों केँ सुपुर्द करतेजा रहे थें वोँ औरतउन चारो मर्दो केँ बीच मे घिरी हुइ अपने आपको किसी सेक्स कि देवी सें कम नहि समझरही थि बहोत हि मजे सें हर एक् कों सहलाती हुईँ उनकासंग देरही थि हर चुंबन कां औऱ हर एक् कों उनके मसलने कां औऱ हर एक् कों उनके आकर्षण कां जबाब देतीजा रही थि उसकेमुख सें कराह निकलती रही औऱ वोँ चारो उससे रौंद-ते रहे
कामया बैठी हुई हर एक् हरकत कों देखती जारही थि औऱ पास बैठेहुए गुरुजी कों सहलाते हुए उनसेसटी जारही थि गुरुजी सिर्फ़ उसकेपीठ कों सहलाते हुएउसे उत्तेजित करतेहुए उसे अपने सें सटाकर कुछ कहतेजा रहे थें
गुरुजी- देखोइस स्त्री कों अपनी प्यास बुझाने कों कितनी आतुर हैं घऱ मे इसका पति उसे वोँ नहि दे पाता हैं पऱ यहां सबकुछ उसेमिल रहा हैं यहांऐसे लोगों कों भीड़ हैं सखी उन्हें येसभी चाहिए जोँ उन्हें बाहर् केँ समाज मे नहि मिलता यहांहर कोईकुछ नाँ कुछ माँगने आता हैं औऱ मे उनकी ख़्वाहिश औऱ अभिलाषा कों पूरा करता हूं तुम्हें भि यही करना होगा अपनेहर शिष्यो कि सहायता करनी होगी
कामया- … >>>
गुरुजी- हाँ…हर शिष्य कि चाहे वोँ कोई भि हौ तुम्हें पता हैं विद्या भि यहांआई थि ईश्वार भि सब यहांआए हैं धरमपाल भि उसकी पत्नि भि औऱ उसकी बेटियाँ भि
कामया … …
तोड़ा सां चौंकी थि कामया
गुरुजी- चौकोमत सखीतभी तौ मुझे इतना मानते हैं मुझे भि नहि पता कि तुम्हारा पति किसका बेटा हैं तुम्हारे ससुरजी कां कि इनमे सें कोई पऱ मे नहि हूं याँ पता नहि शायद मे भि हूं पर्र इससे क्याँ फरक पड़ता हैं मे तौ इस पूरे आश्रम कां मलिक हूं तुम्हारे औऱ इस आश्रम मे रहने वालेहर एक् पऱ मेराहक हैं तुम् पऱ तोँ अधिक हि देखरही होँ उसऔरत केँ संगये सभी क्याँ कररहे हैं
औऱ दीवाल कि ओर अपनी उंगलियों कों उठा दिया थां कामया जोँ कि उसबात पऱ थोडा सां ठिठक गई थि औऱ अपने आपको भूलकर उसबात पऱ ध्यान देदिया थां पऱ जब उसकीनजर दीवाल पर्र गई थि तौ वोँ चौंक गई थि उन चारो नें उस स्त्री कों इसतरह सें घेर लिया थां कि वोँ कुछ भि नहि कर सख्ती थि कर सख्ती थि …
नहि कहना चाहिए कि बड़ेमजे लें रही थि वोँ एक् नें उसकी योनि केँ अंदर अपने लिंग कों उतार दिया थां औऱ वोँ नीचे लेटाहुआ थां पीछे सें दूसरे नें उसके गुदा दरवाज़ा पऱ अपने लिंग कों घुसा दिया थां औऱ बाकी केँ बचेहुए दोनों अपने लिंग कों उसके हाथों मे पकड़ा कर बारी बारी सें उसकेमुख केँ अंदर अपने लिंग कों करतेजा रहे थें यह देखकर कामया कि आखेंफटी कि फटीरह गई थि पऱ गुरुजी उसीतरह सें शांत बैठेहुए उसकीपीठ कों सहलाते हुएउसे बड़े प्रेम सें समझारहे थें
गुरुजी- देखा तुमने उस महिला कों कोई दिक्कत नहि होँ रही हैं बल्कि उसे मज़ा आँ रहा हैं देखो उसके चेहरे कों देखो कितना सुखमिल रहा हैं उसे
कामया नें देखा थां हाँ…सही हैं उसके चेहरे कों देखकर कोई भि कह सकता थां कि उसे जोँ चाहिए थां उसेमिल रहा थां वोँ बड़ेमजे सें उनके लिंग कों चूसती जारही थि अपनी योनि कों औऱ गुदाद्वार केँ अंदर तक हर एक् धक्के कों बर्दास्त भि करतीजा रही थि औऱ अपने अंदर केँ उफ्फान कों शांत करतीजा रही थि वोँ चारों पुरुष मिलकर एक् केँ बाद एक् अपनी पोजीशन भि चेंज करतेजा रहे थें औऱ वोँ महिला भि उसकासंग देरही थि उसको देखकर हि लगता थां कि आज जौ सुख वोँ भोगरही थि वोँ उसे अच्छे सें औऱ बड़े हि तरीके सें भोगकर जानां चाहती हैं
उसे भि कोई जल्द नहि हैं हर किसी कों वोँ अपने अंदर तक समा लेना चाहती हैं कामया देखरही थि पर्र अपने हाथों पऱ काबू नहि रखपारही थि औऱ पास बैठे गुरुजी केँ सीने कों अपने हाथों सें रगड़ती हुईँ उनसेसट कर बैठी थि गुरुजी भि उसे अपने सें सटाकर आहिस्ता उसके चुचों कि ओर अपनेहाथ लेँ जारहे थें कामया नें जैसे हि देखा कि गुरुजी उसके चुचों कि ओर अपनीहाथ लेँ जारहे थें उसने स्वयं हि अपने कंधों सें अपने ड्रेस कों उतार दिया औऱ गुरुजी कों एक् खुला निमंत्रण दे डाला
गुरुजी हँसते हुए कामया कि ओर देखे औऱ धीरे-धीरे सें उसके होंठों कों अपने होंठों केँ अंदर लेकर आरामसे चुबलने लगे थें
कामया कि आखेंबंद होँ रही थि वोँ सेक्स केँ सागर मे डूबने लगी थि औऱ देखते हि देखते वोँ स्वयं गुरुजी कि गोद मे बैठने लगी थि गुरुजी नें भि कोई आपत्ति नहि कि औऱ अपने होंठों कों उसके होंठों सें जोड़े हुए धीरे-धीरे सें उसके होंठों कों अपने होंठों सें दबाएहुए उसकेगोल गोल चुचों कों बहोत हि धीरे धीरे मसलने लगे थें गुरुजी बिल्कुल उत्तावाले नहि थें उतावली तोँ कामया थि चाहकर भि वोँ अपने आप् पऱ नियंत्रण नहि रखपारही थि आधी गुरुजी कि गोद मे औऱ आधी लेटी हुइ कामया अपने होंठों कों उठाकर गुरुजी कों न्योता देरही थि गुरुजी भि धीरे-धीरे सें अपने होंठों कों उसके होंठों सें जोड़कर फिन सें उसके होंठों कों चुबलने लगे थें कामया आखेंबंद किएहुए गुरुजी केँ हाथों कां खुशी लेती हुइ अपनीजीब कों धीरे-धीरे सें गुरुजी कि जीब सें मिलाने कि कोशिश मे लगी थि
Rohit Kapoor wrote:Guru ji कि too nikal padi ........nice update mitr dekhte rahiye
kunal wrote: ↑28 May 2017 09:21Mast update shqriya mitr
शानदार एपसोड। जारीरखे, आगे कि इंतज़ार मे
nice update
Sexi munda bhay aapki story bi 1ooooo ( एक् lakh ) केँ club men shamil hu chuki h iske liye apko badhaai
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
गुरुजी भि अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे अपने आपको कामया केँ सुपुर्द करतेजा रहे थें एक् नजर अपने सामने वाली दीवाल पऱ डालेहुए अपनी बाहों मे कामया कों समेटने लगे थें कामया तोँ पूरीतरह सें गुरुजी केँ सुपुर्द थि औऱ बिनाकुछ सोचे अपनीकाम अग्नि कों शांत करने कि जुगत मे लगी थि कामया कां दिल तौ कररहा थां कि गुरुजी कों पटककर उनकेऊपर चढ़जाए पर्र एक् शरम औऱ झीजक केँ चलते वोँ अपने आपको रोके हुई थि
गुरुजी भि बहोत धीरे धीरेआगे बढ़रहे थें कोई जल्द नहि थि उन्हें अपने एक् हाथ केँ बाद दूसरे हाथ कों भि वोँ अब कामया कि चूचियां पऱ रखतेहुए उसकीओर देखते हुए मुस्कुराते हुएउसे पूरीतरह सें अपनीओर खींच लिया थां अब कामया बिल्कुल उनकीगोद मे बैठी हुइ थि उसकाऊपर कां कपड़ा खुलाहुआ थां औऱ कमर पर्र बँधेहुए सुकून कि वजह सें वोँ कपड़ा अटकाहुआ थां पऱ किसीकाम कां नहि थां नीचे सें सबकुछ उठाहुआ थां औऱ कोई भि अंग कपड़े सें ढँकाहुआ नहि थां पूरा जिस्म साफ-साफ दिखरहा थां औऱ हरअंग सेक्स कि आग मे डूबाहुआ गुरु सें आग्रह करतानजर आता थां कि शांतकरो औऱ अपनीभूख कों मिटाओ गुरुजी नें अपनीगोद मे लिए कामया कों एक् बार उसकी ठोडी पकड़कर दीवाल कि ओरनजर डालने कों कहा
कामया नें जबउसओर देखा तौ वोँ स्त्री एक् मर्द केँ ऊपर लेटी हुइ थि औऱ पीछे सें उसकी गुदा दरवाज़ा पऱ वोँ लन्ड घुसाए हुए थां ऊपर कां मर्द उसकी योनि केँ अंदर थां औऱ संग केँ दो मर्द उसकेआजू बाजू मे खड़ेहुए अपने लिंग कों उसके हाथों मे पकड़ाए हुए उसकी चुचियों पऱ घिसरहे थें औऱ मंदिरा औऱ रूपसा अपनी योनि कों एक्-एक् करके उसके होंठों पर्र घिसरही थि रूपसा औऱ मंदिरा पास खड़ेउन दो मर्दो कों भि छूरही थि औऱ उनके जिस्म सें भि खेलती थि औऱ वोँ स्त्री तौ बेसूध सि पूरेखेल कां खुशी लें रही थि क्याँ सेक्स कां तरीका थां उसका कितना सेक्सी औऱ काम कि उतावली थि वोँ देखते हि बनता थां उसे कामया भि उसे देखकर औऱ भि उत्तेजित हौ गई थि झट सें घूमकर एक् बारफिन सें गुरुजी कि ओर बड़े हि सेक्सी तरीके सें देखा थां औऱ
कामया- बस गुरुजी औऱ मत तड़पाओ मुझसे नहि रुकाजा रहा हैं मुझे शांत कीजिए प्लीज
गुरुजी- इसतरह सें कर पाओगी सखी तुम् हाँ…
औऱ उसकीओर देखते हुए धीरे-धीरे सें उसकी होंठों कों चूम लिया थां औऱ एकटक उसकीओर देखते रहे थें कामया कों समझ नहि आया थां कि क्याँ जबाबदे पऱ अपने हाथों कों गुरुजी केँ गालों पऱ घुमाकर सिर्फ़ देखती रही थि अर्ध नग्न आवस्था मे बैठी हुईँ वोँ नहि जानती थि क्याँ कहे
गुरुजी- अपने अंदर सेक्स कि ख़्वाहिश इतना जगाओ कि तुम् अपने आपकोइस खेल मे माहिर करलो औऱ हर मर्द तुम्हारे सामने हारजाए सखी तुम् हमेशा सें हि मेरी मनपसंद रही हौ विवाह केँ वक़्त तुम्हारा फोटो दिखाया थां मुझे परमेश्वर नें तभी मे जान गय़ा थां तुम् क्याँ हौ औऱ कहां तक तुम् जा सकती हौ तभीआज तुम् यहां हौ मेरेपास नहि तोँ उसीघऱ मे रहती औऱ तुम्हें यहां सिर्फ़ उस कमरे तक आने कि इजाजत होती बोलो जोँ मैंने सोचा हैं करोगी नां
कामया- जी … …
औऱ गुरुजी सें सटती हुई उनके होंठों पऱ फिन सें टूट पड़ी थि गुरुजी अब तक अपनी धोती सें आजाद नहि हुए थें पऱ कामया कि उंगलियां अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनकी धोती तक पहुँच रही थि औऱ कमर पर्र बँधी हुई धोती उसकी उंगलियों मे उलझरही थि अपने आपको उनकीगोद सें नां उठाते हुए कामया नें उनकी धोती कों खोल लिया थां किसीतरह औऱ अपनी जाँघो सें उनके लिंग कों दबाने लगी थि कामया कि योनि तौ जैसे झरने कों रेडी थि पानी कि हल्की सि धार उसमें सें बहतेहुए उसे पूरा गीलाकर चुकी थि
पर्र गुरुजी कां लिंगअब भि ढीला हि थां बहोत कुछ टेन्शन मे नहि दिखरहा थां कामया एक् बार गुरुजी कि ओर देखती हुईँ धीरे-धीरे सें अपनीकमर कों हिलाते हुए औऱ उनके लिंग कों अपनी जाँघो सें दबाते हुए धीरे-धीरे सें नीचे कि ओर होनेलगी थि उसेपता थां कि उसे क्याँ करना थां औऱ गुरुजी भि शायद जानते थें कि कामया अगला स्टेप क्याँ होगा वोँ वैसे हि मुस्कुराते हुए कामया कि पीठ कों सहलाते हुएउसे अपनी बाहों सें आजाद करतेरहे कामया नें आहिस्ता उनकी जाँघो केँ बीच मे बैठी हुईँ अपनी उंगलियों सें उनके लिंग कों उठाकर एक् बार देखा औऱ धीरे-धीरे सें अपनीजीब कों निकाल कर उसपर फेरा थां अपनी निगाहे उठाकर एक् बार गुरुजी कि ओर देखते हुए वोँ फिन सें अपनीजीब सें उनके लिंग कों धीरे धीरे चूसती हुईँ अपने होंठों केँ बीच मे लेँ गई थि उसकी आँखे गुरुजी पर्र हि टिकी हुईँ थि
उसकीनजर कों देखकर साफ लगता थां कि वोँ कितनी उत्तेजित थि औऱ अपनाहर प्रयास गुरुजी कों उत्तेजित करने मे लगाने वाली थि जौ कुछ भि रूपसा औऱ मंदिरा नें उसे सिखाया हुआ थां वोँ करने कों बेताब थि उस कमरे मे होने वालेखेल कों वोँ इस कमरे मे जीवित करना चाहती थि पर्र गुरुजी केँ चहरे पर्र कोई उत्तेजना उसे दिखाई नहि देरही थि पर्र बिनाथके वोँ अपनी आखें गुरुजी पर्र टिकाए हुए उनके लिंग कों आहिस्ता अपने होंठों औऱ जीब सें चूमते हुए उनकी जाँघो कों अपने हाथों सें औऱ अपनी चूचियां सें सहलाते जारही थि गुरुजी केँ पैरों केँ अंगूठे उसकी योनि कों छूरहे थें बैठी बैठी कामया आपनी योनि कों उनके उंगुठे पर्र घिसती रही औऱ अपने अंदर कि आग कों औऱ भड़काती रही थि गुरुजी कि नजर भि कामया पर्र टिकी हुइ थि औऱ आरामसे वोँ भि कामया होंठों केँ सामने झुकने लगे थें थोडा बहोत टेन्शन अब उनके लिंग मे आनेलगा थां अपने उंगुठे सें कामया कि योनि कों छेड़ने मे उन्हें बड़ामज आँ रहा थां
कामया अपने पूरेजतन सें गुरुजी केँ लिंग कों चूसेजा रही थि औऱ बीचबीच मे अपने दाँत भि हल्के सें गढ़ा देती थि गुरुजी हल्का सां झटका खाते थें तौ कामया कों बड़ा आनंदआता थां आखों मे मस्ती लिएहुए थोडा सां मुस्कुराते हुए गुरुजी केँ लिंग सें खेलती हुइ कामया अब गुरुजी केँ सीने कों भि हथेली सें सहलाते हुए धीरे-धीरे सें उठी औऱ उनके सीने कों चूमती रही अपनी चुचियों सें गुरुजी केँ लिंग कों स्पर्श करती हुई कामया उनके निपल्स कों अपने होंठों केँ बीच मे लिएहुए चूमती जारही थि जीब सें चुभलते हुए उनपर भि दाँत गढ़ा देती थि गुरुजी अब तैयारी मे थें पऱ कामया कां इसतरह सें उनकेसंग खेलना उन्हें भि अच्छा लगरहा थां अपनीसखी कों अपने घुटनों केँ पासइस तरह सें बैठे औऱ उनको चूमते हुए वोँ देखते रहे अपने हाथों कों धीरे-धीरे सें कामया कि चुचियों पर्र रखा थां उन्होंने फिन धीरे-धीरे सें मसलते हुए नीचे झुके थें औऱ कामया केँ होंठों कों अपने होंठो मे दबा लिया थां एक् हल्की सि सिसकी भरती हुईँ कामया उनकेगले मे लटक गई थि औऱ अपनीजीब कों उनकीजीब सें मिलाते हुए उनके सीने मे अपने आपको रगड़ती हुई जोर-शोर सें सांसें लें रही थि गुरुजी कि पकड़अब उसके चुचो पऱ थोडा सां कस गई थि औऱ कामया कों अपनेऊपर गर्व होँ रहा थां वोँ अपने सामने गुरुजी कों झुकाने मे सफल हौ गई थि कामया पूरेमन सें तन सें औऱ अपने सारे हुनर सें गुरुजी कों खुश करने मे लगी थि हर एक् कदम वोँ संभाल कर औऱ बड़े नजाकत सें रखती हुईँ गुरुजी केँ चुंबन कां जबाब देतीजा रही थि गुरुजी भि थोडा बहोत आवेश मे आँ गए थें औऱ धीरे-धीरे सें कामया कों पकड़कर वहीआसन मे अढ़लेटा सां करतेहुए उसके होंठों कों चूमरहे थें कामया कि जांघे खुलकर गुरजी केँ चारोओर कसतीजा रही थि औऱ उनके लिंग कां स्पर्श अब उसके योनि दरवाज़ा पऱ होनेलगा थां आम्या अपने अंदरउस लिंग कों जल्द सें लेँ जानां चाहती थि
गुरुजी- बहोत उत्तावाली हौ जाती होँ सखी तुम् इतना उत्तावाली होना अच्छा नहि हैं तुम्हें तौ शांत रहना चाहिए
कामया- बस गुरुजीी बहोत होँ गय़ा प्लीज अब अंदरकर दीजिए बहोत तड़प गई हूं प्लीज
औऱ कहतेहुए अपने होंठ वापस गुरुजी सें जोड़लिए थें गुरुजी भि उसे शांत करने मे लगगये थें औऱ धीरे-धीरे बहोत धीरे-धीरे सें अपने लिंग कों अंदर पहुचाने मे लगगये थें गुरुजी जिसतरह सें कामया कों सिड्यूस कररहे थें कामया सह नहि पारही थि अपनीकमर केँ एक् झटके सें हि उसने गुरुजी केँ लिंग कों आधे सें ज़्यादा अपने अंदर उतार लिया थां
कामया- आआआआअह्ह बसअब करते रहिए प्लीज जल्द-जल्द
गुरुजी उसे देखकर मुस्कुराए औऱ आधी जमीन पर्र औऱ आधीआसन पऱ पड़ी हुइ कामया कों एक् बार नीचे सें ऊपर तक देखा थां बिल्कुल गोरारंग औऱ सचे मे ढालाबदन अब उसके हाथों मे थां वोँ जैसा चाहेइसे भोग सकते हैं औऱ जब चाहेतब
गुरुजी- बस थोडा सां औऱ रूकोसखी वहां देखोउस स्त्री कों कितना खुशी लें रही हैं
कामया कि नजर एक् बारफिन सें दीवाल पऱ गई थि वोँ महिला अबझड़ चुकी थि औऱ वोँ चारो पुरुष उसे अभि रौंदरहे थें कोई उसकेमुख मे घुसारहा थां तौ कोई उसके हाथों केँ संगसंग उसके जिस्म मे अपना लिंगघिस रहा थां दोजने तोँ निरंतर उसके योनि औऱ गुदा दरवाज़ा पऱ हमलाकर हि रहे थें
एक् नजर देखकर कामया नें फिन सें अपनीकमर कों एक् झटके सें ऊपर उठाकर गुरुजी केँ लिंग कों पूरा कां पूरा अपने अंदरसमा लिया थां औऱ कसकर गुरुजी कों पकड़ लिया
कामया- बस करते रहिए गुरुजी नहि तौ मे पागल हौ जाऊँगी प्लीज गुरुजी प्लेआस्ीईईईईई
इतने मे गुरुजी नें भि उसे थोडा सां ठंडा किया औऱ एक् जोरदार झटका उसके अंदर तक कर हि दिया
गुरुजी- लोअब सम्भालो मुझे तुम् नहि मनोगी
कामया- नहि अब औऱ नहि प्लेआस्ीईई करते रहिए
गुरुजी- घबराओ नहि सखी तुम्हें ऐसे नहि छोड़ूँगा शांतकिए बिना नहि छोड़ूँगा
औऱ गुरुजी नें आवेश मे आते हि कामया कों कसकर पकड़कर अपनी बाहों मे भर लिया थां औऱ अढ़लेटी सि कामया कि योनि पर्र प्रहार पऱ प्रहार करनेलगे थें कामया तोँ बसकुछ नाँ कहतेहुए अपनी जाँघो कों खोलकर गुरुजी केँ प्रसाद कां मज़ा लेनेलगी थि वोँ इतना कामुक थि औऱ उत्तेजित थि कि उसे अपने आपकोरोक पाना बिल्कुल मुश्किल होँ रहा थां गुरुजी केँ लिंग कां हर धक्का उसकी योनि केँ अंतिम छोर तक जाता थां औऱ उनकी पकड़ भि इतनी सख्त थि कि वोँ हिल भि नहि पारही थि पर्र आनंद बहोत आरहा थां गुरुजी कां वहशीपन अब उसके सामने थां वोँ कितना शांत औऱ सब बनते थें वोँ अब उसके सामने खुल गय़ा थां पऱ हाँ… उनके सेक्स कां तरीका सबसे जुदा थां वोँ जानते थें कि स्त्री कों केसेखुश किया जाता हैं उसेकिस तरह आवेश मे लाया जाता हैं औऱ किसतरह उसे तड़पाया जाता हैं
वोँ निरंतर हर धक्के मे गुरुजी केँ बाहों मे कस्ती जारही थि सांसें लेना भि दूभर हौ रहा थां सिर्फ़ अपने शारीर कों शांत करने कि ख़्वाहिश मे वोँ हरतरह कां कष्ट सहने कों सजधजकर थि औऱ गुरुजी उसका पूरा इश्तेमाल भि कररहे थें
गुरुजी कि पकड़ मे वोँ हिल भि नहि होँ पारही थि
कामया- हमम्म्मम प्लीज़ औऱ बस
गुरुजी- कहोसखी ये मज़ा औऱ कहीआया हैं तुम्हें
कामया- नहीं औऱ करो प्लीज ईईएआआओउुउउर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर हमम्म्ममम सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्शह
गुरुजी- कामेश सें भि नहि हाँ…
कामया-, नहीं
गुरुजी- औऱ किसी औऱ केँ संग
कामया- नहीं
गुरुजी- औऱ किसके संग किया हैं तुमने कहोहाँ… आआह्ह
कामया- …
गुरुजी- बोलो नहि तोँ रुक जाउन्गा
कामया- नहीं प्लीज रुकिये नहि प्लीज़्ज़ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज करते रहिए मेरा ईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
औऱ कामया नें कसकर गुरुजी कों अपनी जकड़ मे लें लिया थां औऱ अपने जिस्म कां हर हिस्सा गुरुजी सें मिलाने कि कोशिश करनेलगी थि
कामया तोँ शांत होँ गई थि पर्र गुरुजी अभि शांत नहि होँ रहे थें वोँ कामया केँ झड़ने केँ बाद तोँ जैसे औऱ आक्रामक होँ गये थें अपनी बाहों मे कामया केँ नाजुक औऱ ढीले पड़ेहुए बदन कों कस लिया थां औऱ लगातार झटके पे झटके देतेरहे निचोड़ कररख दिया थां उन्होंने कामया कों औऱ जबरदस्त तरीके सें उसे चूसते हुए बिल्कुल उसकी चिंता नहि करतेहुए अपने आपको शांत करने मे लगे थें कामया उनके नीचेदबी हुइ अब अपने आपको छुड़ाने कि कोशिश भि कररही थि पऱ उसकी हालतऐसी नहि थि आधी लेटी हुइ औऱ आधी नीचे कि ओर होने सें उसे बलेन्स नहि मिलरहा थां औऱ किसीतरह सें गुरुजी कि बाहों कां सहारा हि उसे लेनापड़ रहा थां औऱ इतने मे शायद गुरुजी भि अपने आखिरी पड़ाव कि ओर आँ गये थें कि अचानक हि उन्होंने अपने लिंग कों निकाल कर एक् हि झटके मे कामया कों नीचे गिरा लिया औऱ उसके होंठों केँ अंदर अपने लिंग कों जबर दस्ती घुसा दिया थां एक् रेप कि तरह थां वोँ कामया कुछ कहती याँ करती उससे पहले हि गुरुजी कां लिंग उसकेगले तक पहुँचजाता थां औऱ फिन थोडा सां बाहर् कि ओरआते हि फिन सें अंदर कि ओर हौ जाता थां कामया नीचे पड़ी हुइ गुरुजी कि ओर देखते हुएकुछ आखों सें मना करती पर्र गुरुजी अपनी आखेंबंद किएहुए तेज़-तेज़ सें उसकेसिर कों पकड़कर अपने लिंग मे आगेपछे कि ओर करतेरहे कि अचानक उनके लिंग सें ढेर सारा वीर्य उसकेगले मे उतर गय़ा कामया अपने आपको छुड़ाना चाहती थि पर्र गुरुजी कि पकड़ इतनी मजबूत थि कि उसे पूरा कां पूरा वीर्य निगलने केँ अलावा कोई चारा नहि थां गुरुजी अब उसकेसिर पऱ सें अपनी गिरफ़्त ढीली करके साइड मे बैठगये थें
कामया थककर नीचे हि लेटी हुईँ थि औऱ गुरुजी कि पीठ पऱ टिकी हुइ थि गुरुजी भि नीचे हि बैठे थें सांसों कों कंट्रोल करतेहुए कामया केँ कानों मे गुरुजी कि आवाज़ टकराई थि
गुरुजी- इस सेक्स कों जितना गंदे औऱ आक्रामकता सें खेलोगी इसमें उतना हि मज़ाआता हैं अपने अंदर केँ गुस्से कों औऱ हवस कों शांत करने कां यही तरीका हैं सखी
कामया कों ये आवाज़ बहोत दूर सें आती सुनाई दि थि पर्र सच थां येउसे अच्छा लगा थां आज गुरुजी केँ संग बहोत तड़पाया थां उन्होंने पऱ शांत करने कां तरीका भि जुदा थां लेटी हुई कामया कों कुछ पैरों केँ जोड़े दिखाई दिए थें पास मे आकेरुक गये थें औऱ पहले गुरुजी कों सहारा देकर उठाया थां फिन कामया कों वही चेयर मे बिठाकर दूसरे कमरे कि ओर लें चले थें
कामया जोँ देखपा रही थि वोँ थां कुछ महिलाए औऱ बड़े-बड़े कमरो केँ बीच सें होकर निकलना कामया बेसूध टाइप कि थि अपने आपकोअब तक संभाल नहि आई थि पऱ अचानक हि उसे अपने नहाने वाले कमरे मे लेँ जातेहुए देखकर वोँ थोडा सां निसचिंत हौ गई थि थोड़ी देरबाद वोँ उस कुंड मे थि औऱ सब महिलाए उसेफिन सें नहलाने मे जुटी हुइ थि रूपसा औऱ मंदिरा भि वहां आँ गई थि हाथों मे एक् ग्लास लिएहुए उसमें वहीपेय थां जोँ वोँ लगातार यहांआने केँ बाद सें पीतेचली आई थि
नहाने केँ बाद औऱ वोँ पेय पदार्थ पीने केँ बाद कामया फिन सें तरोताजा हौ उठी थि एकदम फ्रेश अपने अंगो कों औऱ अपनेबदन कों ढँकते वक्त उसने देखा थां कि वोँ अब भि बहोत हसीन हैं औऱ हरअंग एक् नई ताज़गी लिएहुए थां कमरे मे उसे खानां भि सर्व किया गय़ा औऱ पेय पीने केँ बादउसे आराम करने कों कहा गय़ा थां
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai - Continue reading next part
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