बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
कामया लेटी हुई अपने अतीत औऱ वर्तमान कि घटनाओं मे डूब गई थि कहां सें कहां आँ गई थि वोँ उसघऱ सें बाहर् निकलते हि वोँ एक् सेक्स कि देवीबन गई थि लाखा, भीमा औऱ भोलाहाँ औऱ ऋषि भि औऱ अब गुरुजी औऱ पता नहि क्याँ-क्याँ चुनाहुआ हैं उसकी भाग्य मे पर्र कामेश कहां हैं उसे उसकी चिंता नहि हैं एक् बार भि उसने कॉंटक्ट नहि किया औऱ नहि उसकीकोई खबर हि हैं कामेश भि रुपया कमाने कि जुगत मे लगा हैं औऱ पिताजी जी भि नाँ कोई उसकी चिंता औऱ नाँ हि कोईखबर पऱ कामया कि चिंता वोँ लोग क्यूं करेभला वोँ तौ गुरुजी कि संपत्ति कि मालकिन होँ गई हैं औऱ उसे संभालने केँ लिए कामेश औऱ पिताजी जी कों तोँ मेहनत करनी हि पड़ेगी नहि तौ कामया क्याँ संभाल पाएगी कामया कों तोँ अपनी स्थान
पक्की करना हैं बस औऱ गुरुजी केँ सिखाए हुए तरीके सें चलना हैं औऱ क्याँ बस इतना सां तोँ काम हैं पूरेमजे औऱ वैभवभरी जीवन हैं उसकीउसे तौ कोईकाम करने कि जरूरत हि नहि हैं बस हुकुम देना हैं औऱ औऱ हाँ…उसे गुरुजी जैसा भि बनना हैं अपने आप् पर्र काबू रखना हैं अपनेमन औऱ तन कों काबू मे रखना हैं बस पऱ ये होगा केसे वोँ तौ स्वयं पऱ काबू नहि रख पातीउसे तोँ सेक्स कि भूखअब तोँ औऱ ज़्यादा लगनेलगी हैं इस वैभवभरी जीवन कि उसेआदत लग गई हैं औऱ हर कहींउसे सेक्स कि ख़्वाहिश होती थि हर कहीं तौ वोँ महिलाए उसे नहलाते हुएतेल कि मालिश करतेहुए उबटान लगाते हुए औऱ कपड़े तक पहनते हुएउसे उत्तेजित हि करती हि रहती थि अभि खना खाकरजब वोँ कमरे मे आई थि तौ उन मे सें दो महिलाओं नें उसे इत्र सें औऱ पाउड़र सें अच्छे सें मालिश किया थां फिन वोँ पेय पीलाकर चली गई थि पऱ उसे नींद नहि आँ रही थि उसे तोँ रूपसा औऱ मंदिरा कि हरकत केँ बारे मे याद आँ रही थि उस स्त्री केँ बारे मे सोचकर हि वोँ उत्तेजित सि हौ उठी थि उसे क्याँ करना चाहिए पता नहि पर्र उत्तेजना बदतीजा रही थि नाँ चाहते हुए भि वोँ अपनी हाथों कों अपनी जाँघो केँ बीच मे लेँ गई थि औऱ आरामसे अपनी योनि कों छेड़ने लगी थि होंठों सें एक् अहह निकल गई थि इतने मे कमरे कां दरवाजा खुला औऱ एक् दासी जल्द सें उसकेपास आँ गई थि
दासी- क्याँ हुआ रानी साहिबा कुछ चाहिए
कामया- नहि बसऐसे हि क्यूं … …
दासी-जी वोँ आवाज़ आई थि नां इसलिये
कामया एक् बार सोचने लगीजरा सि आवाज़ कमरे केँ बाहर् केसेचली गई थि क्याँ उसने बहोत जोर सें चिल्ला दिया थां नहि नहि अपने हाथों कों जल्द सें निकाल कर वोँ सोनेलगी थि दासी थोड़ी देर खड़ीरही औऱ मूडकर जानेलगी थि कि कामया नें उसे आवाज़ दि
कामया- सुनो
दासी-जी
कामया- वोँ रूपसा औऱ मंदिरा कहां हैं
दासी-जी वोँ नीचे कमरे मे होंगी बुलाऊ … …
कामया नहि- सभीसो गये हैं क्याँ …
दासी- नहि गुरुजी जागरहे हैं बाकी सोने वाले होंगे पता नहि इसमाल मे आप् औऱ गुरुजी हि हैं नीचे कां पता नहि
कामया- गुरुजी क्याँ कररहे हैं …
दासीजी पता नहि रानीजी हमें जाने कि अग्या नहि हैं कहे तोँ आपको उनकेपास लेँ चले …
कामया- नहि नहि तुम् जाओ
कुछ सोचती हुइ कामया एक् बारउठी औऱ दासी कि ओर देखते हुए बोलीं
कामया- गुरुजी कहां हैं मुझेकुछ काम हैं
कहती हुईँ वोँ जल्द सें बेड सें उतरगई थि औऱ ढीले ढाले कपड़े कों किसीतरह सें व्यवस्थित करतेहुए दासी केँ पीछे चलनेलगी थि दासी भि कामया कि ओर एक् बार देखकर चुप हौ गई थि वोँ कपड़ा उसके अंगो कों छुपाकम रहा थां बल्कि दिखा ज़्यादा रहा थां सिर केँ ऊपर सें एक् बड़ा सां गोलाकार काटकर बसऊपर सें ढाल दिया थां नाँ कमर मे कुछ बँधा थां औऱ नहि कुछ सृंगार थां
साइड सें उसकेहर अंग कां उतार चढ़ाव भि दिखरहा थां सामने सें औऱ पीछे सें थोडा बहोत ढँकाहुआ थां कमरे सें बाहर् आते हि सन्नाटे नें उसेघेर लिया थां बसकुछ दूरी पऱ एक् दासी औऱ खड़ी थि दीवाल सें चिपककर शायदवही रूम थां गुरुजी कां औऱ पूरा फ्लोर खाली थां बिना झिज़्के कामया नें अपनेकदम गुरुजी केँ कमरे कि ओर बढ़ालिए थें दासीकुछ दूरी पऱ रुक गई थि औऱ दूसरी दासी नें भि उसेझुक कर सलाम किया थां औऱ डोर केँ सामने सें हट गई थि कामया जबडोर केँ सामने पहुँचि थि तोँ पलटकर एक् बारउन दोनों दासी कि ओर देखा थां वोँ दूर जाती हुई देखरही थि यानी कि पूरे फ्लोर मे सिर्फ़ येदो दासिया हि हैं हिम्मत करके उसने बड़े सें डोर कों धक्का दिया औऱ खुलते हि वोँ अंदर दाखिल होँ गई थि
गुरुजी डोर सें दूर पर्दो केँ बीचोबीच मे एक् बड़े सें बिस्तर पऱ अधलेटे सें दिखाई दिएडोर खुलते हि उनकीनजर भि डोर कि ओरउठी थि औऱ जैसे हि कामया कों अंदर दाखिल होते देखा तोँ एक् मधुर सि मुश्कान उनके होंठों पर्र दौड़ गई थि
कामया नें घुसते हि डोर कों धीरे-धीरे सें बंदकर दिया थां औऱ अंदर सें लॉक भि लगा दिया थां गुरुजी उसकी हरकतों कों बड़े ध्यान सें देखरहे थें दरवाजा बंद करने केँ बाद कामया नें एक् नजर गुरुजी कि ओर देखा जोँ कि अब उठकरबेड पर्र बैठगये थें औऱ जौ कुछपढ़ रहे थें वोँ भि हटा दिया थां
कामया थोडा सां झिझकी थि पर्र अपने आपको ववस्थित करतेहुए अपनेकदम आगे गुरुजी केँ बेड कि ओर बढ़ादिए थें कामया थोडा सां डरी हुईँ थि थोडा सां घबराई हुईँ भि पर्र अपनेतन केँ हाथों मजबूर कामया अपने जिस्म कि आग कों ठंडा करने गुरुजी केँ पासआई थि
गुरुजी- क्याँ बात हैं सखी … …
कामया- जी वोँ नींद नहि आँ रही थि इसलिये
गुरुजी- कोईबात नहि सखीआओ मे सुलादूं
कहतेहुए गुरुजी नें अपनेहाथ कामया कि ओर बढ़ादिए थें कामया तब तक उनकेबेड केँ पास पहुँच गई थि औऱ जैसे हि गुरुजी कि हाथों कों अपनीओर देखाझट सें उसने अपनेहाथ उसपररख दिए थें अबउसे कोईडर नहि थां
गुरुजी- आओ बैठो
औऱ अपनेपास उसे बैठने कां इशारा किया गुरुजी ऊपर सें नंगे थें औऱ नीचे सिर्फ़ एक् लूँगी टाइप कां छोटा सां कपड़ा बँधा थां पूरा जिस्म साफदिख रहा थां कामया उन्हें देखते हि उत्तेजना सें भर गई थि पर्र एक् झिझक थि जोँ उसे रोकेहुए थि शायद वोँ झीजक हि खतम करनेआई थि वोँ
गुरुजी केँ पास बैठते हि
गुरुजी- ठीक सें बैठोसखी येसभी तुम्हारा हि हैं यहांइस आश्रम कां हरचीज तुम्हारा हैं मे भि तुम्हारा हूं तुम् इस अश्राम कि मालकिन होँ जिससे तुम् जौ कहोगी वोँ उसे करना हैं इतनाजान लो इसलिये झीजक औऱ शरमइस अश्राम केँ अंदरमत करना वोँ सभी बाहरी दुनियां केँ लिए हैं
कामया ठीक सें बैठ गई थि उसके जिस्म मे जोँ कपड़ा थां वोँ बैठते हि सरककर उसकी जाँघो केँ बहोत ऊपरसरक गय़ा थां औऱ साइड सें बिल्कुल खुलकर सामने कि ओरलटक गय़ा थां साइड सें देखने मे कामया कां जिस्म एक् अद्भुत नजारा देरहा थां कमर सें उठ-तेहुए उसकेबदन कां औऱ हसीन औऱ सुडौल जाँघो केँ नीचे उसकी टांगों कां उउफ्फ… क्याँ लगरही थि नज़रें झुकाए बैठी कामया गुरुजी केँ आगे बढ़ने कां प्रतीक्षा करतीरही पर्र गुरुजी कुछ नहि किए सिर्फ़ उसेनजर भरकर देखते रहे कामया नें एक् नजर उठाकर उसे देखा थां गुरुजी सें आखें टकराई थि औऱ गुरुजी केँ होंठों पर्र फिन सें वही मुश्कान दौड़ गई थि
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
गुरुजी- बोलोसखी कुछ कहना हैं
कामया नें सिर्फ़ सिर हिला दिया थां क्याँ कहती वोँ जौ कुछ चाहिए थां वोँ देदोबस औऱ क्याँ कामया थोडा सां सरककर गुरुजी कि औऱ हौ गई थि गुरुजी नें अपने हाथों केँ सहारे उसे अपने सें सटा लिया थां उसका जिस्म कपड़े सें बाहर् झकरहा थां लेफ्ट चूचियां तौ पूरा हि बाहर् थां औऱ सिर्फ़ निपल्स पर्र कपड़ा अटका थां वोँ भि गुरुजी नें उतरकर अलगकर दिया
गुरुजी केँ हाथों केँ सहारे कामया अपने जिस्म कों उनके सुपुर्द करतेहुए उनके सहारे लेट गई थि उनके बहोत पास पऱ गुरुजी नें उसे औऱ अपनेपास खींचा औऱ
गुरुजी- आओ मे तुम्हें सुलादूं इतना उत्तेजित क्यूं होँ क्याँ कमी हैं तुम्हें
कामया- (अपने सांसों कों कंट्रोल करतेहुए ) बहोत मन करता हैं गुरुजी इसलिये रोक नहि पाई
गुरुजी- कोईबात नहि सखी हमसे कैसीशरम
कामया- इसलिये तौ आँ गई गुरुजी प्लीज मुझे शांतकरो
गुरुजी- हाँ… शांत मे करूँगा पर्र ऐसे नहि आज तुम्हें भि दिखाना होगा कि तुम् क्याँ होँ औऱ कितना चाहती होँ सेक्स कों ताकि हम् दोनों इसखेल कां मजा लेँ सके
कामया नें अपनी बाँहे गुरुजी केँ गले मे पहना दि थि औऱ उनके गालों कों सहलती हुई आहिस्ता अपने होंठों कों उनकेपास लें गई थि
कामया- जी गुरुजी जोँ आप् कहेंगे मे वही करूँगी
गुरुजी नें अपने होंठ कामया केँ होंठो सें जोड़कर आरामसे उसके होंठों कां रस्सपान करतेरहे किसी कों कोई जल्द नहि थि नां कामया औऱ नां हि गुरुजी कों पता थां कि कोई रुकावट नहि हैं कामया एक् उत्तेजित औऱ कामुक औरत थि औऱ गुरुजी कों भि उसके जिस्म कों चाह थि औऱ अश्रांम कां हर व्यक्ति महिला उनके गुलाम थें
बड़े हि अपनेपन सें दोनों नें येखेल शुरुआत किया थां कामया तौ उत्तेजित थि हि अपना पूरा ध्यान गुरुजी कों उत्तेजित करने मे लगारही थि कामया लेटी हुईँ अपने होंठों कों गुरुजी सें जोड़े हुए अपने हाथों कों उनकीपीठ औऱ उनके सीने पर्र घुमाती हुई नीचे कि ओर लेँ जारही थि उसके हाथों मे जब गुरुजी कि कमर पऱ बँधा कपड़ा अटका तोँ थोड़ी सि नजर खोलकर गुरुजी कि ओर देखा थां उसने गुरुजी कि नजर भि खुली थि औऱ एक् मूक समर्थन दिया थां उन्होंने कामया केँ हाथों नें उस कपड़े कों खोलने मे कोई देरी नहि कि औऱ गुरुजी भि उसकीतरह सें पूर्णता नग्न थें अब दोनों केँ बदन एक् दूसरे सें जुड़े थें औऱ एक् दूसरे केँ बदन कां एहसास कररहे थें कामया मूडकर गुरुजी कि बाहों मे समाती चली गई थि औऱ गुरुजी भि उसे अपनी बाहों मे कसतेचले गये थें
गुरुजी केँ संग-संग कामया कि सांसें बहोत तेजचल रही थि औऱ दोनों एक् दूसरे केँ होंठों कों अच्छे सें औऱ पूरेजी जान सें चूमने मे औऱ चाटने मे लगे थें ऐसालग रहा थां कि कोई भि एक् दूसरे कों छोड़ने कों रेडी नहि थां गुरुजी केँ हाथअब धीरे-धीरे सें कामया कि चूचियां पऱ आकेटिक गये थें कामया भि अपने हाथों कों जोड़कर उन्हें उत्साहित करनेलगी थि कामया अपने सीने कों औऱ आग बढ़ाकर उन्हें अपनी चुचियों पर्र पूराजोर लगाने कों कहरही थि औऱ गुरुजी भि अपनी ताकत दिखाने मे लगगये थें गुरुजी कां रूप अभि थोडा सां अलग थां जैसा पहले कामया नें देखा थां उससेअलग थोड़ी सि उत्सुकता थि उनमें औऱ उत्तेजना भि क्योंकी जिसतरह सें वोँ कामया कों प्रेम कररहे थें वोँ एक् मर्द कि तरह हि थां नकीकोई महात्मा याँ फिन वोँ गुरुजी जौ उसने देखा थां
कामया खुश थि कि उसने गुरुजी कों उत्तेजित करनासीख लिया थां औऱ गुरुजी कों उसकेतन कि ख़्वाहिश भि हैं जिसतरह सें अपनाजोर लगाकर उसेचूम रहे थें याँ फिन उसकी चूचियां मसलरहे थें वोँ अलग थां
कामया कां जिस्म तौ जल हि रहा थां अब गुरुजी भि अपने आपसे बाहर् होतीजा रहे थें उनकी उत्तेजना भि नजरआने लगी थि वोँ भि लगातारर कामया कि चूचियां दबाते हुए धीरे-धीरे सें उसकेगले तक पहुँच गये थें कामया तोँ आधी टेडी लेटी हुईँ गुरुजी केँ मुँह मे अपनी चूचियां लाने कि जद्दो जहद मे थि हि औऱ गुरुजी भि आतुर थें झट सें कामया कि चुचि कों अपने होंठों केँ अंदर लेँ लिया थां उन्होंने
कामया- आआआह्ह औऱ जोर सें गुरुजी बहोत अच्छा लगरहा हैं बस चूस्ते जाओ औऱ जोर-शोर सें
गुरुजी अपने आपकामया केँ इशारे पऱ चले नें लगे थें निपल्स मुँह मे आते हि उनकीजिब औऱ होंठों नें अपनाकाम शुरुआत कर दिया थां औऱ कसकर कामया केँ निपल्स कों चूसते जारहे थें कामया निरंतर गुरुजी कों उकसाने मे लगी थि औऱ बहोत जोर सें गुरुजी कों अपनी बाहों मे लेकर कस्ती जारही थि उसके हाथों मे गुरुजी कां सिर थां जिसे वोँ अपनी चुचियों केँ अंदर घुसाने कि कोशिश मे लगी थि वोँ कामया कि उत्तेजना कों देखकर लगता थां कि अबउसे किसीबात कि चिंता नहि थि औऱ नहि हि कोईशरम बिंदास गुरुजी कों उत्साहित करती वोँ इसखेल कां पूरा आनंद लेने मे जुटी थि कामया कि आवाज़ उस कमरे मे गूंजने लगी थि
कामया- उूुउउफफफ्फ़ गुरुजी बहोत अच्छा लगरहा हैं औऱ जोर सें दबयो औऱ जोर सें चुसू प्लीज गुरुजी प्लीज ईईईईई
गुरुजी अपनेमन सें उसे पूरा संतुष्ट करने कि कोशिश मे लगे थें पर्र कामया इसतरह सें मचलरही थि कि उसे संभालना गुरुजी केँ लिए थोडा सां मुश्किल पड़रहा थां गुरुजी नें अपने हाथों कों कसतेहुए उसे अच्छे सें जकड़ लिया औऱ अपने होंठों कों कस्सकर उसकी चुचियों पऱ टिकाए रखा थां अपनी हथेलियों कों उसके नितंबों पऱ घुमाकर उसकी गोलाई कां नाप भि लेतेजा रहे थें औऱ उसकी जाँघो कि कोमलता कों भि अपने अंदर समेट-ते जारहे थें कामया गुरुजी केँ हाथों केँ संग-संग अपनेबदन कों मोड़कर औऱ खोलकर उनका पूरा सहयोग कररही थि कोई भि स्थान उनसेबच नां जाएये सोचकर गुरुजी केँ हाथ उसके जाँघो सें होकर एक् बारफिन सें उसकी चुचियों पर्र आकेरुक गये थें औऱ कामया कों धीरे-धीरे सें अलग करतेहुए उन्होने उसकी आँखों मे झाँका थां कामया इसतरह सें गुरुजी केँ अलग होने सें थोडा सां मचल गई थि पऱ एकटक गुरुजी कों अपनीओर देखते हुए पाया तोँ पूछ बैठी
कामया-क्याँ हुआ गुरुजी-
गुरुजी- कुछ नहि तुम्हें देखरहा हूं बहोत उत्साहित हौ उत्तेजित होँ तुम् कुछ नहि करोगी अपने गुरुजी केँ लिए
कामया- जी गुरुजी बहोत कुछ करूँगी अब मेरी बारी हैं आप् लेटो
गुरुजी- ( मुस्कुराते हुए)हाँ… दिखाओ तुम् कितना प्रेम करती हौ हम् सें
कामया एकदम सें उठकरबैठ गई थि एकटक गुरुजी कि ओर देखते हुए अपनी आखों कों बड़ा बड़ा करके गुरुजी कि ओर एकटक देखती रही उसकी आखों मे एक् नशा थां एक् चाहत थि एक् खुमारी थि जौ कि गुरुजी कों साफनजर आँ रहा थां उसकी आखों मे बहूत बातें थि जौ कि गुरुजी पहलीबार इतनापास सें देखरहे थें कामया देखते हि देखते अपने जिस्म कों एक् अंगड़ाई दि औऱ उठकर घुटनों केँ बल थोडा सां आगे बढ़ी औऱ गुरुजी केँ सामने अपनी चुचियों कों लेजाकर थोडा सां हिलाया औऱ उनके चहरे पर्र घिसते हुए
कामया- देखो गुरुजी इन्हें देखो औऱ खूब जोर-शोर सें चुसू इन्हें आपने होंठों कि जरूरत हैं प्लीज ईई
गुरुजी अपने होंठों कों खोलकर उसके आमंत्रण कों ग्रहण किया औऱ उसके चूचियां कों चूसने लगे थें फिन सें उनके अंदर एक् अजीब तरीके कां उत्साह देखने कों मिला थां कामया जिसतरह सें वोँ उसकी चूचियां चूसरहे थें उनके दाँत भि उसके निपल्स कों लगरहे थें
कामया जानती थि कि गुरुजी कि उत्तेजेना बढ़रही हैं एक् केँ बाद दूसरी चूंची कों उसने गुरुजी केँ मुख मे ठूंस दिया थां औऱ उनकेसिर कों कसकर जकड़कर पकड़रखा थां अपने हथेलियों कों आहिस्ता उनकेपीठ पर्र भि घुमाने लगी थि झुकी हुइ कामया अपने जिस्म कां हर हिस्सा गुरुजी सें छुआने मे लगी थि अपने घुटनों कों खोलकर उसने गुरुजी केँ दोनों ओरकर लिया थां उसकी योनि मे ज्वार आयाहुआ थां औऱ गुरुजी केँ लिंग कां हि सिर्फ़ प्रतीक्षा थां एक् झटके मे गुरुजी कों बेड पर्र धकेलकर कामया उसकेपेट सें लेकर उनके लिंग तक एक् बार मे हि पहुँच गई थि उसके लिंग कां आकार थोडा सां बड़ा थां औरो केँ लिंग कि तरह नहि थां पऱ थां अभि भि टेन्शन मुक्त वोँ झुकी औऱ गुरुजी केँ लिंग कों अपनेजीब सें चाट्ती हुईँ अपनेमुख केँ अंदर तक उसे लें गई थि औऱ धीरे-धीरे सें गीलाकरते हुए बाहर् कि ओर लेँ आई थि एक् नजर गुरुजी केँ ऊपर ढलती हुई फिन सें अपनेकाम मे लग गई थि उनके लिंग कों कभी अपनेमुख केँ अंदर तोँ कभी बाहर् करतेहुए कामया उसे
अपने हाथों सें भि कसकर पकड़ती थि औऱ अपने होंठों केँ सुपुर्द कर देती थि बहोत देर तक करते रहने केँ बादउसे लगा थां कि गुरुजी अब रेडी होँ गये हैं वोँ गुरुजी केँ लेटे मे हि उनकेऊपर चढ़ गई थि औऱ स्वयं हि उनके लिंग कों अड्जस्ट करतेहुए अपनी योनि केँ अंदर लेँ गई थि उसके बैठ-ते हि गुरुजी कि कमर भि एक् बार हिली औऱ उन्होंने भि एक् हल्का सां धक्का लगाकर अपने लिंग कों कामया केँ अंदर पहुँचने मे सहायता कि
कामया- आआआआअह्ह उूुुुउउम्म्म्मममममम
झूम गई थि कामया जिसका प्रतीक्षा थां वोँ उसकेपास औऱ इतनापास थां कि वोँ झूमउठी थि अपने जिस्म कों उठाकर एक् बारफिन सें औऱ नीचेकर लिया थां ताकि गुरुजी कां लिंग पूरीतरह सें अंदरसमा जाए
कामया- उूुुउउफफफ्फ़ आआह्ह उूउउम्म्म्म
करती हुई खुशी सें निढाल होँ गई थि औऱ थोड़ी थोड़ी देर मे हि अपनीकमर कों थोडा सां ऊपर करके धम्म सें उनके लिंग मे बैठ जाती गुरुजी भि एकटकउसे देखते हुए अपने लिंग कों हरबार उसके अंदर तक उतार चुके थें अब वोँ भि थोडा बहोत उत्तेजित सें नजरआते थें औऱ नीचे सें अपनीकमर कों थोडा सां ऊपर करते थें कामया केँ अंदर लिंग केँ प्रवेश करते हि वोँ गुरुजी केँ ऊपरगिर गई थि औऱ उसके संग-संग हिलते हुए अपनी योनि केँ ज्वार कों शांत करने मे जुट गई थि गुरुजी कि बाँहे भि अब कामया कों सहारा देने केँ लिएउठ गई थि औऱ उसे कस्सकर पकड़ते हुए
गुरुजी- अपनारस पान कराओसखी
कामया नें झट सें सिर घुमाकर अपने होंठ गुरुजी कि औऱ करदिए औऱ वोँ भि गुरुजी कां रसपान करनेलगे थि दोनों कि जीब एक् दूसरे सें लड़ते हुए योनि औऱ लिंग कां खेल खेलते रहे औऱ उस कमरे मे आएहुए तूफान कों देखते रहे
कामया- उउउम्म्म्म औऱ जोर-शोर सें गुरुजी निचोड़ दो मुझेमार डालो प्लीज
गुरुजी- नहि सखी मारूँगा क्यूं तुम् तोँ मेरी आत्मा होँ मेरीसखी हौ तुम्हारे जिश्म कि खुशबू तौ सारे संसार केँ लिए हैं मे तौ पहला हूं औऱ हमेश हि रहूँगा तुम् तोँ मेरी हौ
जाने क्याँ-क्याँ उत्तेजना मे कहतेजा रहे थें गुरुजी
कामया अपने आप् मे खुश थि उसने गुरुजी कों जीत लिया थां गुरुजी अब उसकेसंग मे थें वोँ औऱ जोर सें अपनीकमर कों हिलाकर उसके लिंग कों अपनी जाँघो कों कों जोड़कर निचोड़ने लगी थि गुरुजी भि आवेश मे आँ गई थें एक् झटके मे कामया कों नीचे करतेहुए वोँ स्वयं अब उसकेऊपर आँ गये थें औऱ उसके योनि कों लगातार कई झटके देने केँ बादरुक गये थें एक् नजर उसकी औऱ डालते हुएजोर सें उसके होंठों कों चूम लिया औऱ धक्के पर्र धक्के मारते रहे उनकीगति इतनीतेज थि कि हर धक्का उसकी योनि केँ अंतिम दरवाज़ा पऱ लगता थां औऱ पकड़ भि इतनी मजबूत थि कि कामया सें औऱ नहि रहा गय़ा कस्सकर गुरुजी कों पकड़कर वोँ उनसे लिपट गई थि
कामया- हाँ… गुरुजी बस करते रहिए रुकिये नई आआअह्ह उउ उूुुुुुुुउउम्म्म्मममममम करतेहुए वोँ शांत होँ गई थि पर्र गुरुजी अब भि शांत नहि हुए थें कमी आपने आपकोरोक नहि पाई थि शायद उत्तेजना उनसे ज़्यादा थि
गुरुजी- बस होँ गय़ा सखी इतना हि प्रेम हैं हमसे अभि तोँ हम् बहोत बाकी हैं
हान्फते हुए गुरुजी केँ मुँह सें निकला थां
कामया- नहि गुरुजी मे संग हूं अब रोको नहि करतेरहे मे पूरासंग देरही हूं
औऱ कहतेहुए कामया नें गुरुजी कों कसकर पकड़ते हुए उन्हें चूमने लगी थि अपने आपको उनकासंग देतेहुए वोँ ये दिखाना चाहती थि कि वोँ अब भि उत्तेजित हैं पऱ गुरुजी तोँ जानगये थें वोँ सिर्फ़ उनको दिखने केँ लिए हि उनकासंग देरही थि ‘कामया अपनीकमर कों बहोत तेजी सें उचकाकर गुरुजी सें रिदम मिलाने कि कोशिश मे थि कि गुरुजी नें अपने लिंग कों उसके योनि सें निकाल लिया औऱ कामया कों घुमा लिया थां अब कामया उनके नीचे थि औऱ सोचरही थि कि अब क्याँ
गुरुजी नें अपने हाथों कों जोड़कर कामया कि कमर कों घसीटकर ऊपर उठाया औऱ अपने लिंग कों उसके गुदा दरवाज़ा पर्र रख दिया थां कामया एक् बार तौ सिहरउठी थि उसने अभि-अभि देखा थां औऱ सिर्फ़ एक् बार भीमा केँ संग वहां किया थां पर्र, गुरुजी कि उत्तेजना केँ सामने वोँ कुछ नहि बोलसकी बस वैसे हि कमर उठाएहुए गुरुजी कों अपनाकाम करने देने कि छूटदे दि थि औऱ गुरुजी तौ आवेश मे थें हि एक् धक्के मे हि उनका लिंगआधा फस गय़ा थां कामया कि गुदा मे
कामया--------- आआआआआआआआयययययययययीीईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई हमम्म्ममममममममममममममममममम द्द्द्द्द्द्दद्धीईईरर्र्र्रररीईईईईईईई
कामया कि चीखउस कमरे मे गूँज गई थि,, पऱ गुरुजी कहां रुकने वाले थें थोडा सां रुककर एक् जोरदार धक्का फिनलगा दिया थां
कामया- आआआआआआईयईईईईईईईईईईईईईईईईई उूुुउउमम्मूँमुमूमूमूंम्म्मममममम
करतेहुए रोनेलगी थि दर्द केँ मारे वोँ नहि रुक सकती थि बहोत दर्द होनेलगा थां उसे गुरुजी थोडा सां रुके औऱ अपने लिंग कों बाहर् खींच लिया कामया थोडा सां बहाल हुइ थि पर्र फिन सें झटके सें जैसे चाकू किसी मक्कन कि स्लाइस पऱ घुसता थां वैसे उसके गुदा दरवाज़ा पऱ घुसता चला गय़ा थां गुरुजी कि हैवानियत अब उसके सामने थि बिना रुके कामया केँ अंदर तक उतरकर हि दम लिया गुरुजी नें
कामया रोतेहुए उनसे रुकने कि मिन्नत करतीरही पर्र गुरुजी नहि रुके लगातार धक्के केँ संग हि अपने लिंग कों पूरा कां पूरा उसके अंदर उतारने केँ बाद हि रुके वोँ रुककर एक् बार कामया कों जीभरकर चूमा थां उन्होंने कामया अटकी हुई औऱ दर्द सें बहालगिर पड़ी थि बेड पर्र औऱ रुकरुक कर उसके कहराने कि आवाज़ उसकेगले सें निकलरही थि
गुरुजी- क्याँ हुआसखी थक गई
कामया- प्लीज गुरुजी मर जाऊँगी प्लेआस्ीई उूउउम्म्म्मममम
रोतेहुए कामया केँ मुख सें निकाला
गुरुजी- क्यूं अभि तोँ कहरही थि कि मार डालोअब क्याँ हुआबस थोडा सां औऱ फिन देख्ना कितना मजआता हैं
औऱ यह कहतेहुए गुरुजी नें कामया कों एक् बार उठाकर फिन सें अपने लिंग कों उसके गुदा दरवाज़ा सें थोडा सां बाहर् र्निकाला औऱ फिन धक्के केँ संग अंदर पिरो दिया थां
कामया- (दाँत भिचते हुए ) उउउम्म्म्ममाआ उफ्फ करतीरही औऱ गुरुजी केँ हाथों कां खिलोना बनी हुइ अपने आपको दर्द केँ सहारे छोड़कर निढाल होकर घुटनों केँ बल औऱ कोहनी केँ बल बैठीरही गुरुजी कां लिंग जोँ कि अभि तक फँसकर जारहा थां अब आहिस्ता उसके गुदा केँ अंदर तक जारहा थां अबउसे थोडा कम तकलीफ होँ रही थि पऱ हर धक्का इतनातेज औऱ आक्रामक होता थां कि वोँ हरबार गिर जाती थि
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बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai – New Episode
पसीने सें लतपथ दोनों इसखेल मे मगन थें औऱ कामया अभि अबहर तरीके सें गुरुजी केँ संग थि गुरुजी कां हर धक्का उसके मुँह तक आता थां कामया भि कमर कों औऱ उचका करतीजा रही थि उसे अच्छा लगनेलगा थां उसेअब कोई तकलीफ नहि हौ रही थि उसे गुरुजी केँ लिंग कि गर्मी भि अच्छी लगरही थि घऱ पर्र भीमा केँ संग जौ कुछहुआ थां ये उससेअलग थां केसे नहि मालूम पऱ मजा आँ रहा थां औऱ शांति भि गुरुजी केँ झटके मारने कि गति बढ़ने लगी थि औऱ उनकी बाँहे उसके चारो औऱ कसनेलगी थि उसकी चूचियां मसलते हुए गुरुजी उससे चिपकगये थें औऱ निचोड़ते हुए
गुरुजी- ऊऊओह्ह… सखी बहोत मज़ा हैं इसमे तुम् तोँ लाजबाब हौ आनंद आँ गय़ा
कामया बस गुरुजी थक गई हूं जल्दकरे
गुरुजी- बस कामया थोडा सां औऱ ऊपरकर अपनीकमर कों अंदर तक पहुँचना हैं जाने वाला हूं मे भि
हाँफटे हुए गुरुजी नें कामया कों अपनी बाहों सें आजादकर दिया थां औऱ अपने लिंग कों जोर सें उसके अंदर जितना हौ सके सारी शक्ति लगाकर अंदर करतेजा रहे थें
औऱ झटके सें अपने लिंग कां ढेर सारा पानी कामया केँ अंदर छोड़कर कामया केँ ऊपरढेर होँ गये थें
कामया कों पीछे सें पकड़े हुए गुरुजी अपनी साँसे छोड़रहे थें औऱ अपने सांसों कों नियंत्रण मे लाने कि कोशिश कररहे थें कामया पसीने सें तरबतर होँ चुकी थि दर्द तौ नहि थां पर्र एक् अजीब सां एहसास उसके अंदर थां नितंबों केँ बीच मे गुरुजी कां लिंगअब भि फँसाहुआ थां औऱ
कामया कों याद दिलाता जारहा थां कि अभि-अभि जोँ कुछहुआ थां वोँ अब उसकेसंग होगा बहोत खुश तौ नहि थि पऱ हाँ… एक् अजीब सि गुदगुदी जरूर हौ रही थि उसे। उसके जिस्म कां हर हिस्सा केसे सेक्स केँ लालायित थां औऱ केसे उसने अपनीभूख कों शांत किया थां वोँ सच मे एक् अजीब सां लगरहा थां
अभि तक तौ ठीक थां जब वोँ भीमा औऱ लाखा केँ पास गई थि याँ भोला नें उसकेसंग किया थां पर्र आज तोँ अलग थां वोँ गुरुजी कों मजबूर कर दिया थां औऱ गुरुजी कां मर्दाना रूप भि उसनेदेख लिया थां हाँ वोँ हसीन थि औऱ उसकेबदन मे वोँ बात थि जोँ हर किसी मे नहि होती पर्र एक् बातउसे परेशान कररही थि वोँ थि गुरुजी अपने आप् पर्र इतना नियंत्रण केसेरख लेते हैं औऱ चाहते हैं कि वोँ भि करे पऱ ये केसे संभव हैं इतने मे गुरुजी केँ हाथ उसके चुचों पर्र थोडा सां हरकत करतेनजर आए औऱ हल्की आवाज़ मे गुरुजी नें कहा
गुरुजी- सो गई क्याँ सखी … …
कामया- नहि गुरुजी
गुरुजी कुछसोच रही होँ …
कामया- एक् बात पुच्छू आपसे …
गुरुजी- हाँ… क्यूं नहि तुम्हें सभी जानने कां हक हैं सखी पूछो …
कामया- जी वोँ अपनेकहा थां कि अपनेबदन पऱ काबूरखो नियंत्रण वालीबात पर्र मुझसे तौ नहि होता …
गुरुजी नें कामया कों अपनीओर घुमा लिया थां औऱ अपने आलिंगान मे बाँधते हुए अपने बहोत लगभग खींच लिया थां औऱ एकटक उसकी आखों मे देखते हुए
गुरुजी- हाँअब पूछो
कामया थोडा सां सकुचाती हुईँ
कामया- जी वोँ आपनेकहा थां कि नियंत्रण रखो वोँ तौ मुझसे नहि होता क्याँ करू …
गुरुजी- हाँ मुझेपता हैं सखी नहि होता मुझसे भि नहि होता थां जब मे तुम्हारी उमर कां थां पर्र अब होता हैं पता हैं क्यूं …
कामया- जी नहीं …
गुरुजी- मे तुम्हें अपने बारे मे कुछ बताता हूं मे एक् अस्ट्रॉलजर थां पऱ उससे मेरा जिंदगी नहि चलता थां बस 100 50 रुपीज रोज कां कमाता थां फिन एक् दिन अचानक हि मुझे एक् बार एक् बहोत बड़े धर्मात्मा कों देखकर ये आइडिया आया क्यूं नां मे भि येकाम शुरुआत करदूं औऱ मे इसकाम कों अंजाम देनेलगा थां मेरे जिंदगी मे बहोत सि औरतेआई औऱ गई मे एक् सें दूसरे कां भला करतारहा एक् कों दूसरे केँ लिए इस्तेमाल करतारहा औऱ मे यहां पहुँच गय़ा
इस अश्राम मे आने वालाहर इंसान यही सोचता हैं कि गुरुजी केँ आशीर्वाद सें मेराये कामहुआ पर्र बातये नहि हैं वोँ कुछ लोगों सें कहने सें हौ जाता थां मेरे यहांजॉब माँगने वाले भि आते हैं औऱ जॉब देने वाले भि बस एक् दूसरे सें जोड़ते हि काम होँ जाता हैं औऱ मे गुरुजी बन गय़ा
कामया एकटक उनकी बातें सुनरही थि गुरुजी कि नजर एक् बार उसकेऊपर गई औऱ सीधेलेट गये
गुरुजी- औऱ तुम् सोचरही थि कि मे ऐसा केसेबना ये हैं स्टोरी
कामया- पऱ गुरुजी आपने वोँ नहि बताया …
गुरुजी- (हल्का सां हँसे थें ) सखी मेरी उम्र क्याँ हैं 70 साल अभि भि मे क्याँ उतना जवान हूं जड़ी बूटी औऱ उनका सेवेन करके मे अभि तक जिंदा हूं औऱ जौ अभि भि मन केँ अंदर हैं उसे जीवित करने कि कोशिश करता हूं तुम् क्याँ सोचरही हौ बूढ़ा इंसान तौ यहां तक पहुँच हि नहि सकता मे तोँ फिन भि दिन मे एक् बार याँ दोबार किसी स्त्री केँ संग अंभोग कर भि लेता हूं पर्र बूढ़ा जिस्म कब तक संग देगा एक् उम्र भि तौ होती हैं इनसभी चीज़ों कि
कामया- पऱ आपने तौ मुझेकहा थां
गुरुजी- हाँकहा थां पऱ ये संभव नहि हैं हैं तौ सिर्फ़ उन लोगों केँ लिए जोँ वाकई साधु हैं याँ नर्वना कों प्राप्त कर चुके हैं मे तोँ एक् ढोंगी हूं मुझे नहि मालूम येसभी क्याँ होता हैं हाँ जहां तक कहने कि बात हैं वोँ तौ लोगों कों जोँ अच्छा लगे वोँ कहना पड़ता हैं इसलिये तुम्हें भि कहा
कामया एक् बार तोँ भौचक्की रह गई थि पऱ कुछ सोचकर बोलि
कामया- तौ गुरुजी मे क्याँ करू …
गुरुजी- वही जोँ तुम्हारा मनकरे इस जिंदगी कों जिओ औऱ खूबजिओ जैसा चाहो वैसाकरो ये अश्राम तुम्हारा हैं जिसे जैसा भोगना हैं भोगो औऱ अपनी ख़्वाहिश कों शांतकरो मे भि जब तुम्हारे उमर कां थां तोँ यहीसभी करता थां पऱ हाँ… अपने मतलब केँ लिए हि नहि तौ सिर्फ़ अपने सेक्स कि भूख केँ लिए इश्तेमाल करने सें बहोत कुछ नहि मिलता हाँ… उसके पीछेधन कां लालच हौ याँ, मतलब हौ तोँ बहोत कुछ जोड़ सकती हौ
औऱ गुरुजी नें एक् बारवही मदमस्त मुश्कान लिए कामया कि ओर देखा कामया समझ चुकी थि कि गुरुजी कां ढोंग औऱ उनका मतलबउसे क्याँ करना हैं वोँ भि उसेपता थां औऱ केसे वोँ तौ आता हि थां अपने जिस्म कों कहां औऱ केसे इश्तेमाल करना हैं बस वोँ देख्ना हैं थकि हुई कामया अपनी एक् हथेली सें गुरुजी केँ सीने कों स्पर्श करतीरही औऱ गुरुजी कबसोगये थें उसेपता नहि चला थां वोँ भि धीरे-धीरे सें उठी थि औऱ अपने कपड़े उठाकर अपने हाथों मे लिए वैसे हि डोर कि ओरबढ़ चली थि
एक् मदमस्त चाललिए अपने आपकोनये रूप मे औऱ नये सबेरे कि ओर
बड़े घर की बहू (कामया बहू से कामयानी देवी) completee - bahu ki chudai - Kahani ab aur interesting hogi
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