भरोसे की कसौटी - Chachi Ki Chudai – New Episode
*फ्लैशबैक*
उसरात चाची कों वैसी स्थिति मे देखकर मे आतंक सें भर गय़ा थां पऱ चूँकि चाची सें मेरा बहोत लगाव भि थां इसलिये खून भि खोल चुका थां मेरा | मन हि मनठान लिया थां कि, ‘अबबस, बहोत होँ गय़ा। अबइन लोगों कों सबक सिखाना हि होगा.|’ गुस्से सें दांत भींचते हुए मे आहिस्ते सें दीवार सें उतरा औऱ गलीपार करघऱ घुसा | लगभगदस मिनट तक डोरबेल बजने केँ बाद चाची नें द्वार (दरवाज़ा) खोला थां | भयानक हश्र थां उनका | बाल बिखरे हुए। होंठों केँ साइड मे हल्की लालिमा। शायदखून हौ। कंधे पऱ केँ ब्लाउज बॉर्डर थोडा फटाहुआ। कुछेक नाखूनों केँ निशान.गले, कंधे औऱ सीने केँ ऊपरी हिस्से पऱ | किसीतरह साड़ी लपेटी हुई थि। आँख नहि मिलारही थि। पऱ देखी मुझे तीरछि नज़रों सें | मे बिना उनकी नज़रों मे आये उनके जिस्म कां हाल सामने सें देखकर सीधेऊपर अपने कमरे मे चला गय़ा | दुःख औऱ प्रचंड गुस्से सें भरा थां मे। मेरी रानी जैसी चाची कों कोईऐसे कररहा हैं औऱ मे चुप हूं?? मुझे चाची बहोत अच्छी लगती थि औऱ बहोत पसन्द भि थि | उनकी जैसी शारीरिक गठन औऱ रूप वाली बहोत कम हि पाए जाते हें | जब भि उनकी क्लीवेज नज़र आँ जाए तौ दोनों चूचियों केँ बीच मुँह घुसा देने कां मनकरे औऱ अगर गांड पऱ नज़रजाए तौ दो-तीन अच्छे सें थप्पड़ मारकर मसल देने कां मनकरे। कमर केँ आसपास भि उपयुक्त मात्रा मे वसा होने केँ कारण उनकीकमर भि अद्भुत सेक्सी लगती थि | जी करता थां कि घंटों उनके नाभि कों चूमता हुआकमर पे सिर डाले सोया रहूँ | पीठ कि बात करना तौ दूर, सोचने भर सें लन्ड बाबाजी अपनासर उठाने लगते हें। साफ़.बेदाग़। मांसल.गदराया पीठ कों तौ जैसे घंटों चूमने, चाटने औऱ दबोचने कां मन होता थां.
अगले पूरेदिन नां तोँ चाची कों कोई फ़ोनआया औऱ नां हि किसी भि माध्यम सें कोई सन्देश। चाची कां भि उनकी तरफ़ सें ये पुरज़ोर कोशिश रही कि मुझे याँ उनके पति कों किसी भि तरह कां कोई संदेह नं होँ। मे किसी भि तरह बहाने करकर चाची केँ आसपास हि बना रहता। पर्र ऐसे कि चाची कों भि मुझ पर्र संदेह नाँ हौ | मात्र एक् दिन हि नहि। बल्कि तीन-चार दिनबीत गएऐसे हि। इतने दिनों मे चाची एक् बार केँ लिए भि घऱ सें बाहर् कदम नहि रखी | थोड़ी सहमी सहमी सि अवश्य होती पऱ हमेशा एक् मोहक सि मुस्कान लिए बातें कि | पूरी एक् घरेलू स्त्री कि तरह नज़रआई। पति परायण एवं कर्तव्य निष्ठ। पर्र मेरा जासूस मनकहरहा थां कि येसभी आने वाले किसी बड़ी सि चौंकाने वाले घटना केँ पहले कि शांति हैं। तैयारी हैं.|
पर्र मे किसी घटना याँ फिनयूँ कहे कि दुर्घटना कि इंतजार किये बैठे नहि रह सकता.कुछ तोँ करना थां। इसलिये वक़्त मिलते हि स्कूटी लिएउस मोहल्ले कि तरफ़ निकल जाता थां जहां चाची कों पहलीबार देखा थां। उसी टेलर केँ दुकान मे। | उसीगरम चाय दुकान मे कई घंटे निकाल देता थां गरमचाय सिगरेट लेते लेते | गरमचाय वाले नें कईबार पूछा भि कि, किसी सें कोईकाम हैं क्याँ। पहलेकभी यहाआते नहि देखा.वगेरह वगेरह। | किसी कों कोईशक नं हौ इसलिये कुछेक बार अपने किसीयार कों संगलिए चलता। शायदगरम चाय वाले नें भि मुझेउस टेलर दुकान कि तरफ़कई बार घूरते देखा थां। पऱ कहाकुछ नहि |
मुझे भि कुछखास चहलपहल नहि दिखरही थि कुछ दिनों सें। जेंट्स औऱ लेडीज आती। कपड़ों केँ नाप देने। कपड़े देने.लेने। इसके अलावा औऱ कुछ होता नहि दिखा | कुछेक कस्टमर सें पूछा भि थां कि टेलर कैसा हैं। बदले मे अलगअलग जवाब सुनने कों मिले थें। कोई कहता ‘अच्छा हैं’। तौ कोई कहता‘ठीक हि हैं’। तौ कोई कहता। ‘अजी, काम चल जाता हैं |’
काम (जासूसी) तौ मेरा भि अच्छा चलरहा थां पर्र कहते हें कि जासूसी मे अधिकउछल कूदबाद मे बहोत भारीपड़ जाता हैं | औऱ यहीहुआ भि |
एक् दिन अचानक चाची कों एक् बर्थडे पार्टी मे जानां थां | ‘वीमेन’स ग्रुप’ नें ऑर्गनाइज़ किया थां | शहर केँ कुछ बड़ेलोग भि आने वाले थें | साम सें हि चाची रेडी होनेलगी थि। मे औऱ चाचा भि जाने वाले थें | चाची नें कहा थां कि हमें लेने ग्रुप कि तरफ़ सें हि व्हीकल भेजी जाएगी। औऱ ठीकसात बजेकार आई भि | मर्सीडिज़ थि | चाचा कि तोँ आँखें हि चौड़ी होँ गयीँ, थि औऱ चाची कों यकीं हि नहि होँ रहा थां | आँखें तौ मेरी भि चौड़ी हौ गई थि पऱ व्हीकल नहि। चाची कों देखकर। क्याँ लगरही थि ! जब कमरे सें सजकर निकली तभी सें मेरी आँखें मात्र चाची पर्र हि थि। इतना ताड़े जारहा थां कि चाची कों पता तौ लगा हि। संग हि शर्मा केँ लाल होँ गई थि |
पारदर्शी साड़ी, स्लीवेलेस – बैकलेस डीपनेक ब्लाउज। जिसमे सें आधे सें अधिक चूचियां बाहर् कि तरफ़ निकली आँ रही थि। औऱ उसपे भि वो अत्यंत चुंबकीय आकर्षण जैसा, सुन्दर, सफ़ेद, छहइंच लम्बा क्लीवेज केँ दर्शन होते रहना। गोरी बाहों मे। हाथों मे चूड़ियों कि छनछनखन खन.आहा। शायद हम् जैसो केँ लिएयही स्वर्ग हैं | चाचा केँ लिए एक् तोँ येसभी कॉमन हौ चूका थां औऱ दूसरा वोँ माइंड नहि करते थें |
जश्न मे जबरदस्त फनहुआ। डांसहुआ। हंसी मजाकहुआ। खानां पीनाचला। चाची केँ डांस नें तौ सभी कों बरबस उनका दीवाना बना दिया थां। उनके हरेक थिरकन पर्र छलककर बाहर् आते उभार कि गोलाईयां सबको होंठों पऱ जीभ चलाने केँ लिए मजबूर कर देते थें |
ड्रिंक कां दौरचल रहा थां। जश्न अपने पूरे शवाब पऱ थि। चाचा भि कुछ लोगों केँ संग मिलकर एक् कोने मे ड्रिंक करने मे मशरूफ हौ गए थें | चाची अपनी सहेलियों साथमजे कररही थि। मे भि ड्रिंक कररहा थां पऱ आँखें मेरी चाची पऱ हि थि। ऐसी अप्सरा कों कौनभला अपने आँखों केँ आगे सें ओझल होने देता हैं ?! अभि मे उनकेरूप लावण्य कों आँखों सें चख हि रहा थां कि तभी देखा कि दोलोग चाची कि तरफ़बढे। उनको देखते हि चाची कि चेहरे पऱ हवाईयाँ उड़ने लगीं | रंग सफ़ेद सां पड़ गय़ा | शायद वोँ उन लोगों कों जानती थि औऱ उनकेयहा होने कि कल्पना नहि कि थि | उन दोनों नें चाची कों कुछकहा औऱ चाची उनकेसंग एक् तरफ़चली गई |
बर्थडे पार्टी वाले स्थान सें निकलकर वे तीनो बाहर् लॉन मे गए। वहां जहां थोडा अँधेरा थां | मे उनके पीछे हि लगा थां | वे दोनो चाची कों जैसेकुछ समझारहे थें। चाची परेशां, चिंतित औऱ भय मिश्रित चेहरा लिए उनके हरेकबात पऱ सर हिलाकर हाँ मे जवाबदे रही थि | थोड़ी देरबात होने केँ बाद उनमें सें एक् नें इशारा कर केँ चाची कों मार्ग केँ दूसरी तरफ़ खड़े केँ बड़ी सि कार कि ओर दिखाया। फिनकार कि ओर इशारा किया। वाहन कां पीछे कां शीशा नीचेहुआ। देखा एक् कोई शेख़ सां व्यक्ति बैठा आँखों पर्र काले चश्मे लगाएउन लोगों कि ओरदेख रहा हैं। औऱ स्माइल भि हैं उसके होंठों पऱ। कुटिल मुस्कान। चाची देखकर सहम गई। फ़ौरन उन दोनों कि ओरपलट करकुछ मना किया। पर्र दोनों नहि माने। थोड़ी देरकुछ औऱ कहने केँ बाद एक् लिफाफा पकड़ाया चाची केँ हाथों औऱ वहां सें चलेगए। उनके जाने केँ बाद चाची नें लिफ़ाफ़ा बिना देखे हि अपने हैण्डबैग नुमा पर्स मे डाला औऱ फिन बर्थडे पार्टी वाले स्थान कि ओरचली दि। जाते वक्त एक् बार उन्होंने अपने आँखों पऱ उँगलियाँ चलाईथीं |
मे भि पलटकर जैसे हि जानेलगा, ऐसालगा मानोकोई मेरे पीछे खड़े मुझेदेख रहा हैं औऱ फ़ौरन वहां सें हट गय़ा। मे दौड़कर उस स्थान पहुंचा पर्र दूरदूर तक कोई नहि थां। भययुक्त आशंकाओं सें घिरेमन कों सँभालते हुए मे वापस जश्न वाले स्थान पहुँच गय़ा.|
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भरोसे की कसौटी - Chachi Ki Chudai – New Episode
इस घटना केँ लगभग सप्ताह भरबाद.
सुभह कां वक्त। चाचा दफ़्तर जाने कि तैयारी कररहे हें। चाची किचेन मे हैं। मे पेपरपढ़ रहा थां। तभीडोर बेलबजी। मैंने उठकर द्वार (दरवाज़ा) खोला। देखा एक् लड़का हैं। पोस्टमैन वाले यूनिफार्म मे। हमारा रोज़ कां पोस्टमैन नहि थां यह। शायदयह लड़कानया ज्वाइन किया हैं। मुझे एक् लिफ़ाफ़ा हाथ मे दिया औऱ सलाम करतेहुए चला गय़ा। आश्चर्य। साइन वगेरह कुछलिए बिना हि चला गय़ा!। लिफ़ाफे पर्र लिखा देखा। ‘केवल तुम्हारे लिए’.
अपनेरूम आँ कर मैंने लिफ़ाफ़ा खोला। एक् कागज़ कां टुकड़ा मिला। मुड़ा हुआ। खोलकर पढनेलगा.
“यह ख़ास तुम्हारे लिए हैं। बहोत उतावले लगते होँ। बहोत सि चीज़ों कों जल्द हि जान लेना चाहते होँ। इतनी जल्दबाजी अच्छी बात नहि। उम्मीद हैं.जोँ भेजा हैं उसेदेख कर फड़फ़ड़ाना बंदकर दोगे। | औऱ अगर नहि किये। तोँ अगलीबार इससे भि अधिक बहोत कुछमिल सकता हैं तुम्हे.| आगे तुम्हारी मर्ज़ी.|’
मे कौतुहलवश जल्द सें लिफ़ाफ़े मे रखे एक् औऱ कागज़ केँ टुकड़े कों निकाला। मुड़ा हुआ थां यह भि। पर्र शायद इसमें कुछ थां | कागज़ कों खोला। देखातीन फ़ोटो रखे हें अंदर.
एक् स्त्री केँ हें वोँ फ़ोटो.
१)एक् मे बैड पर्र लेटी हि हैं। बाएं करवट लेकर। साड़ी उसके घुटनों तक पहुँच गए हें | पेट औऱ कमर कां काफ़ी हिस्सा दिखरहा हैं। मम्मों कां भि कुछ हिस्सा पल्लू केँ नीचे सें दिखरहा हैं |
२)उसी स्त्री कां क्लीवेज। साड़ी पल्लू बाएं कंधे केँ एकदम बाएँ तरफ़ हैं। औऱ फलस्वरुप, उसऔरत केँ गोरे उन्नत स्तनयुगल पूरी मादकता केँ संगदिख रहे हें। अपनेसंग। अपने दोस्त ‘क्लीवेज’ कों संग लेकर.
३)औरत कां पीछे सें फ़ोटो लिया गय़ा हैं। डीपबैक कट सें झांकते उसकी गोरीपीठ औऱ गदरायी हुई। चौड़ी औऱ थोड़ी उठी हुईँ गांड.
**फ़्लैशबैक एंड्स**
औऱ अपने पलंग पर्र बैठा.जार जार आँसू बहाएजा रहा मे। फ़ोटो कों एकटक देखता हुआ। अपनी क़िस्मत कों कोसता। स्वयं कों गालीदे रहा थां | औऱ ऐसा करता भि क्यूं नाँ। आख़िर वोँ तीनों फ़ोटो मेरी ‘मम्मी’ कि थि.!.|
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भरोसे की कसौटी - Chachi Ki Chudai – New Episode
एक् कैब मे बैठाहुआ हूं मे। औऱ मेराकैब वाला अपने सामने केँ कैब कों फॉलोकर रहा हैं। बराबर दूरीबना कर। समानगति सें। स्वयं केँ पकड़े जाने कां डर नहि हैं। मेकअप कर केँ बैठा हूं। एक् साथी हैं मेरा। अच्छा काम करता हैं मेकअप कां। नकली दाढ़ी मूँछलगा कर। हेयर स्टाइल बदलकर। एक् लम्बा.फ्री स्टाइल ट्राउजर। पिंककलर कां शर्ट औऱ उसपे ट्राउजर सें मैच करता ग्रेकलर कां ब्लेज़र डालाहुआ हैं मैंने। दाएँहाथ कि तीन उँगलियों मे तीन बेशकीमती (पऱ नकली) रत्नलगे अंगूठियाँ। दाएँहाथ कि हि कलाई मे एक् सुकून वाली घड़ी। बाएँहाथ कि अँगुलियों ; तर्जनी औऱ मध्यमा केँ बीच एक् सुलगता सिगार। औऱ संग मे पेपर। आँखों पर्र काला चश्मा। गारंटी देकरकह सकता थां कि कोईमाई कां लाल मुझे नहि पहचान सकता थां |
लगभग पैंतालीस मिनट कां सफ़रतय करतेहुए आगे वालीकैब शहर केँ हि एक् महँगे होटल केँ सामने रुकी | मैंने भि अपनेकैब कों थोड़ी हि दूरी पर्र रुकवा दिया | आगे वालीकैब कां पीछे वाले दोनों दरवाज़े एक् संग खुले। दाएँ तरफ़ सें एक् लम्बा सां व्यक्ति निकला। पठानी सूट मे। तौ वहीं दूसरी तरफ़ सें बाहर् निकली थि कुछ वक़्त पहले तक आदर्श गृहिणी कां तमगा रखने वाली मेरी प्यारी चाची। आज चाची कों भि पहचानना मुश्किल थां। हल्का आसमानी रंग कि साड़ी औऱ ब्लाउज केँ नाम पर्र बिकिनी ब्लाउज। जिसमें दो अत्यंत छोटे ब्लाउज कप्स थें.जिनका काम थां चाची कि उन्नत, परिपुष्ट चूचियों मे सें थोड़े हिस्से कों कवर करना औऱ बाकि केँ हिस्से कों जबरदस्त प्रभाव केँ संगऊपर कि ओर उठाये रखना | बस। बाकिसभी पतली रस्सियों कि डोरी सि थि | औऱ मम्मी शपथ। कमाल कि पीसलग रही थि |
पीले गोल्डन जैसे चमकते हील वाले सेंडल पहने इठलाती, बलखाती, आहिस्ते, शौख सें गांड हिलाती वोँ उस लम्बे सें व्यक्ति केँ संग अन्दर उस होटल मे दाखिल हुई। मैंने उसकैब वाले कों एक् पचास कां नोट थमाते हुए आँखों सें कुछ इशारा किया। वोँ मुस्कुरा करहाँ मे सर हिलाया औऱ मे इतने मे हि कैब सें उतरकर रोबीले अंदाज़ मे उस होटल कि ओरबढ़ चला.इधर मेरेकैब वाले नें चाची वालेकैब केँ संग अपनी वाहन पार्क कि औऱ उधरठीक उसी टाइम मे उस आलिशान होटल केँ सुन्दर नक्काशी वाले औऱ एक् दो स्थान कांचलगे दरवाज़े कों हल्का धक्का देतेहुए अन्दर घुसा |
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अन्दर घुसते हि देखा, वोँ व्यक्ति चाची केँ कमर मे हाथ डाले एक् टेबल कि ओर बढ़ाजा रहा हैं | यहऐसा होटल हैं, जिसके ऊपर वाले फ्लोर पर्र होटल कि सारी व्यवस्था हैं औऱ नीचे, जहां अभि मे हूं। वोँ किसी रेस्टोरेंट औऱ कैफेटेरिया कां कॉम्बो जैसा हैं | यहा पिज़्ज़ा, बर्गर, हॉट डॉग्स, नूडल्स सें लेकरहाई क्वालिटी कि गरमचाय, कॉफ़ी तक औऱ तौ औऱ बियर औऱ शराब तक अवेलेबल हैं | पूरी स्थान कि एक् सरसरी सि नज़र दौड़ा कर मुआयना किया। वोँ व्यक्ति चाची कों लेकर एक् टेबल सें लगीतीन कुर्सिओं मे सें एक् पऱ बैठ गय़ा औऱ चाची कों भि खिंचकर अपने सें लगरखी दूसरी कुर्सी पर्र बैठाया | मे जल्दी उनकेठीक बगल वाले टेबल पर्र जाकरबैठ गय़ा | बगल मे होतेहुए भि वोँ टेबल थोडा पीछे थां | वहांलोग बहोत नहि थें पर्र थें भि | अभि तक मैंने पहली वाली खत्मकर एक् औऱ सिगार सुलगा लिया थां | मेरे टेबल केँ लिए भि तीन कुर्सी थि जिनमें सें एक् पऱ मे बैठा थां ; बाकी दोनों खाली थें | मे पेपर कों सामने लिए पढने कां ढोंग करनेलगा | मेरे बैठने केँ कोईदो मिनट हि हुए होंगे कि लाल कपड़े पहने एक् वेटर आँ गय़ा औऱ बड़ी शालीनता सें आगे कि ओर थोडा झुककर सीधा होगया औऱ बहोत हि शांत लहजे मे पूछा,
“व्हाट वुडयू लाइक तौ हेवसर.?”
“वन कॉफ़ी प्लीज़.लेस शुगर। एंडअ टोस्ट.!” मैंने भि बड़े हि रोबीले अंदाज़ मे अपना ऑर्डर दिया.|
“ओके सर। एनीथिंग एल्ससर.|”
“म्मम्म। याँ। गेटअन ऑमलेट आल्सो.|” थोड़ी बेफिक्री सें कहा मैंने। |
वेटर एक् बारफिन वैसे हि झुककर सलामकर केँ चला गय़ा। पेपर पढ़ता हुआ मे बीचबीच मे चाची कि टेबल कि तरफ़देख लेता | काला चश्मा पहने होने केँ कारणउन दोनों कों पता नहि चलरहा थां कि मे उन्हें देख भि रहा हूं |
इसी दौरान मैंने देखा कि वोँ व्यक्ति अपने कुरते केँ पॉकेट सें एक् स्टील केस बाहर् निकाल करउसे खोला औऱ उसमें सें एक् सिगार निकाल कर सुलगा लिया। औऱ धुआं चाची केँ चेहरे पर्र छोड़ने लगा। | चाची कों तकलीफ़ हौ रही थि पऱ वोँ बिनाकुछ कहे, हाथों सें धुआं हटाते हुए थोडा खांसती, फिन अपने पल्लू कां एक् सिरा अपनेनाक पर्र रख लेती | चाची कि ये हालतदेख कर मेरी भि हंसी छूटने कों होँ रही थि |
भरोसे की कसौटी - Chachi Ki Chudai - Next part mein bada twist
मस्त किस्सा हैं यार अगले एपसोड कां इंतजार रहेगा
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