मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 42
आज उनकेदिल मे मेरेलिए भरोसे कि जौ इमारत बननी शुरुआत हुईँ थि, मे अपने हाथों सें उसकी एक्-एक् ईंट जोड़कर उसे दुनिया मे सबसे मजबूत बनाना चाहता थां। हमारे इस रिश्ते कों इतना महफूज़ औऱ गहरा बनाना अब मेरी ज़िम्मेदारी थि। मम्मी नें अपनीतरफ सें सभीकुछ किया, अब मेरी बारी थि इस रिश्ते कि हिफाज़त करने कि।
मेरामन बुरीतरह मचलरहा थां कि बस एक् बार अपनी मां अपनी पत्नि कों उसी भीगेहुए रूप मे देखलूँ, पऱ मैंने अपनी भावनाओं पर्र काबू पाया औऱ हॉल वाले बाथरूम कि तरफबढ़ गय़ा। बाज़ार सें लौटते समय हि मुझे ज़ोरों कि 'सुसू' आँ रही थि, तोँ मैंने पहले स्वयं कों हल्का किया। मैंने अपने लौड़े कों अपने एक् हाथ सें पकड़रखा थां औऱ उस वक्त मेरा लौड़ाआग कि तरहतप रहा थां।
पिछले कुछ दिनों सें मे महसूस कररहा थां कि मेरा लौड़ा अक्सर गरम रहनेलगा हैं, मगरआज साम सें तौ वोँ जैसे सुलगरहा थां अपने लण्ड कों देखते हुए मेरी आँखों केँ सामने बार-बार वही मंजर आँ रहा थां—
मां कां भीगाहुआ चेहरा, गालों पर्र लटकी भीगी जुल्फें, उनके गोरे कंधों पर्र चमकती पानी कि वोँ बूंदें औऱ सीने पऱ कसकर लिपटे टॉवल मे दबे उनके बूब्स। ये सोचते हि मेरा लौड़ा मेरेहाथ मे किसीकैद परिंदे कि तरह तेज़ी सें फड़फड़ाने लगा।
मैंने स्वयं कों समझाया कि बसकुछ देर कां इंतज़ार औऱ हैं। जैसे हि मे बाथरूम सें बाहर् निकला, बेडरूम सें मेरे मोबाइल कि रिंगटोन सुनाई दि। मे परदे केँ पास गय़ा, पऱ सीधा अंदर घुसने केँ बजाय मैंने पूछा—
"मेराफोन रिंग हौ रहा हैं."
अंदर सें मम्मी कि मखमली आवाज़आई, "आकरउठा लीजिए। "
जैसे हि मे अंदर दाखिल हुआ, मेरीनज़र मम्मी पऱ पड़ी। वोँ ड्रेसिंग टेबल केँ आईने केँ सामने खड़ी अपने उलझेहुए बालों कों कंघीकर रही थि।
मां केँ बाल न् केवलघने थें, बल्कि इतने लंबे थें कि जब वोँ उन्हें सामने कि तरफ लाकर कंघीकर रही थि, तोँ वोँ रेशमी लहरों कि तरहदिख रहे थें। ड्रेसिंग टेबल केँ आईने (Mirror) केँ ज़रिए हमारी नज़रें मिलीं; उन्होने मुझे एक् प्यारी सि मुस्कुराहट दि औऱ फिन शरमाकर नज़रें झुकाते हुए बालों मे डूबीरही।
उन्होने लालरंग कां ब्लाउज औऱ मैरून-गोल्डन शेड कि साड़ी पहनी थि। गहरे रंगों कि साड़ी मे औऱ नहाने केँ बाद केँ उस फ्रेश चेहरे केँ संग वोँ बिल्कुल किसी नई-नवेली दुल्हन जैसीलग रही थि। उन्हे देखकर यकीन हि नहि हौ रहा थां कि यहवही मेरी मां हैं जिसे मे बचपन सें देखता आँ रहा हूं। गले मे चमकता मंगलसूत्र औऱ उनकेमन कि वोँ भीतरी खुशी उनके पूरे शरीर कों एक् अलग हि नूरदे रही थि।
मैंने मुस्कुराते हुए अपनाफोन उठाया। स्क्रीन पऱ घर-मकान मालिक कां नाम देखकर मे थोड़ा हैरान हुआ। इस बुड्ढे नें आज तक कभी स्वयं मोबाइल नहि किया थां। रेंट भि मे हि ऑनलाइन ट्रांसफर करके उन्हें इन्फॉर्म करता थां।
"हेलो, " मैंने मोबाइल रिसीव किया।
उधर सें आवाज़आई, "बेटा, तुम् आँ गए?"
"जीहाँ अंकल, बस आज हि पहुंचा हूं, " मैंने जवाब दिया।
"बहू भि संगआई हैं नं?" उन्होंने उत्साह सें पूछा।
अब मुझेसमझ आया कि यह मोबाइल कॉलआई क्यूं थां। उन्हें पता थां कि मे विवाह करके अपनी पत्नि कों संग लेकर आँ रहा हूं। मैंने मुस्कुराते हुएकहा, "जीहाँ, वोँ भि संग हि हैं। "
"अरेवाउ! बहोत बढ़िया। तुम् दोनों कों मेरीतरफ सें बहोत-बहोत शुभकामनाएँ बेटा। कुछ भि ज़रूरत होँ तौ बेझिझक बताना। औऱ पटेल साहब (नाना) केसे हें?"
अंकल तोँ जैसे उनकेफैन हि बनगए थें। मैंने कहा, "थैंकयू अंकल। नाना बिल्कुल ठीक हें। "
"अच्छा-अच्छा। वोँ जब भि यहाआएं, तौ मुझसे मिलने केँ लिए ज़रूर कहना। चलो बेटा, खुशरहो। रखता हूं। "
"जी अंकल, " कहकर मैंने मोबाइल कटकर दिया।
मां कंघी करते-करते आईने केँ ज़रिए मुझे मोबाइल पऱ बात करतेहुए देखरही थि। मोबाइल रखते हि उन्होने अपनी आँखों केँ इशारे सें पूछा कि कौन थां।
मैंने फोनमेज़ पऱ रखतेहुए कहा, "लैंडलॉर्ड थें। "
मां कि आँखों मे एक् मासूम सां प्रश्न उभरा, "उन्हें मालूम हैं?"
मैंने उनकीतरफ बढ़तेहुए कहा, "हाँ, घऱ कां कुछकाम करवाते टाइम मैंने उन्हें बता दिया थां कि अब मेरी पत्नि संग रहने आँ रही हैं। "
मम्मी नें अपने होंठों कि मुस्कुराहट दबाते हुए नज़रें घुमालीं औऱ फिन सें आईने मे स्वयं कों संवारने लगी। मे उन्हे एक् औऱ सरप्राइज़ देने केँ लिए धीरे-धीरे सें अलमारी केँ पास गय़ा। लॉकर खोलकर मैंने उनकेलिए खरीदा हुआ नेकलेस निकाला औऱ अलमारी बंदकर दि। मां इससमय जिस पोजीशन मे खड़ी थि, वोँ नं तोँ मुझे डायरेक्टली देख सकती थि औऱ नं हि मिरर केँ ज़रिए।
मैंने उस नेकलेस केँ बॉक्स कों अपनीपीठ केँ पीछे छिपाया औऱ उनकीतरफ मुड़ा। मम्मी उससमय ड्रेसिंग टेबल सें कुछ उठाने केँ लिए थोड़ा झुकी हुई थि। मे दबे पाँव उनके लगभग जानेलगा। आईने मे देखते हुए वोँ अपनी माँग मे मेरेनाम कां सिंदूर भररही थि।
तभी, आईने केँ ज़रिए उन्होने अपने कंधों केँ पीछे सें मुझे अपनीतरफ आते देखा। उन्होने मिरर मे मेरी आँखों मे आँखें डालकर मुस्कुराते हुए वोँ सिंदूर लगाया। उस लम्हा उनकी आँखों मे एक् ऐसी रूहानी चमक औऱ इमोशन थां, जैसे वोँ बिनाकुछ कहे ईश्वर सें हमारी खुशहाल शादीशुदा ज़िंदगी कि दुआ माँगरही हौ। उन्हे देखकर मेरामन भि एक् अनकही प्रतिज्ञा सें भर गय़ा—कि मे इसे ताउम्र दुनिया कि हर खुशी दूँगा।
मे धीरे-धीरे सें उनकेठीक पीछे जाकरखड़ा होँ गय़ा। मां मिरर केँ थ्रू मुझेदेख रही थि औऱ हल्का-हल्का ब्लशकर रही थि। मे भि बस प्रेम सें उन्हे निहारे जारहा थां। सच तोँ यह हैं कि हम् बातें बहोत कमकररहे थें। हम् एक्-दूसरे कों मेरे बचपन सें जानते हें, हमारे बीचकुछ भि नया नहि थां, सिवाय इसनए रिश्ते केँ। शायद इसीलिए हम् बातें कम औऱ इसनए अहसास कों महसूस ज़्यादा कररहे थें। हम् बस एक्-दूसरे केँ भीतरदबे बेशुमार प्रेम कों 'Discover' कररहे थें जौ हमें औऱ भि लगभगला रहा थां।
मैंने मम्मी कों देखते हुए धीरे-धीरे सें अपनाहाथ पीछे सें आगे बढ़ाया औऱ वोँ बॉक्स उनके सामने कर दिया। मां नें जब मेरेहाथ मे वोँ बॉक्स देखा, तोँ वोँ थोड़ी सरप्राइज़ हुईँ। उनकी आँखों मे एक् प्रश्न थां, इसलिये उन्होने आईने केँ ज़रिए हि मेरी आँखों मे देखते हुए पूछा।
मैंने बस मुस्कुराकर धीमी आवाज़ मे कहा, "तुम्हारे लिए। "
मम्मी समझ गई कि इसमें कोई ज्वेलरी हैं। उन्होने एक् मीठी मुस्कान केँ संग अपनाहाथ बढ़ाया औऱ बॉक्स कों थाम लिया। फिन एक् बार प्रेम सें मुझेदेख उन्होने बॉक्स कों खोला। अंदर एक् बेहद हसीन डायमंड नेकलेस औऱ इयरिंग्स थें—बहोत भारी नहि, बल्कि फिट औऱ स्टाइलिश। उस पऱ कई छोटे डायमंड्स औऱ रंगीन पत्थर जड़ेहुए थें।
बॉक्स खुलते हि मां कां चेहरा विस्मय (Awe) सें भर गय़ा औऱ उनका मुँह हल्का सां खुलारह गय़ा।
मे बॉक्स थामे उनके पीछेखड़ा थां। मेरीगरम सांसें उनकी गर्दन कों छूकर गुज़ररही थीं। मां नें अपने दाएंहाथ कि मुट्ठी कों अपने होंठों केँ पासरखा औऱ कुछ लम्हा तक बसउस नेकलेस कों एकटक देखती रही। उनकेमन मे यादों औऱ जज्बातों कां एक् तूफ़ान चलरहा होगा, औऱ मे। मे बस उन्हे हि देखेजा रहा थां।
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Maaf krna friends।
mein Update regularly नहीं de paa raha
mein janta hun ap mujhse naraz honge और apko hnaa bi चाहिए
pr yaqeen kijiye मेरे life mai abi bahut jyada emotionaly और economically bura time chl raha h jis wajah से mein busy hun
phir bi mein जब bi time mil raha h update dene की poori koshish krr raha hun
hu sake तो muze maaf krr dijiye
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
Update 43
मम्मी कुछ पलों तक बस मुझे किसी अचरज मे डूबी हुईँ नज़रों सें देखती रही। उनकी आँखों मे वोँ सभीकुछ लिखा थां जौ उनकेदिल मे चलरहा थां। फिन भि मैंने मुस्कुराते हुए उनसे पूछा, "क्याँ?"
उन्होंने कुछ नहि कहा, बस अपनी पलकें धीरे-धीरे सें झपकाईं जैसेकह रही हौ—'कुछ नहि'। मैंने फिन छेड़ते हुए पूछा, "पसन्द नहि आया क्याँ?"
मां कि खामोश नज़रे मुझेऐसे देखरही थि जैसे मुझेकह रही हौ—'पागल! मुझेयह पसन्द हि नहि बल्कि बहोत मनपसंद आया हैं'। पर्र ज़ुबान सें वोँ मात्र इतना हि बोलपाई, "बहोत."
मे अपनी मुस्कुराहट नहि रोक पाया औऱ हल्की आवाज़ मे बोला, "तोँ फिन पहनोइसे। "
वोँ मुस्कुराई, एक् बार मेरी आँखों मे आँखें डालीं औऱ फिन अपनी नज़रें झुकाकर फुसफुसाते हुए बोलीं, "आप् पहना दीजिए। "
मेरे चेहरे पर्र एक् चौड़ी मुस्कान आँ गई। मैंने बॉक्स सें वोँ चमकता हुआ नेकलेस निकाला औऱ उनके पीछेखड़े होकर, बड़ी नज़ाकत सें उनकेगले मे पहना दिया।
मां नें अपनी नज़रें उठाईं औऱ आईने मे पहले मुझसे नज़रें मिलाईं, फिनउस नेकलेस कों देख ब्लश करनेलगी। उन्होंने अपनाहाथ उठाकर अपना पल्लू साइड किया औऱ नेकलेस कों सेट किया औऱ जिसके कारण उनकी क्लीवेज दिखने लगी औऱ उस नेकलेस कों अपनी गोरि औऱ मखमली छाती केँ बीच, उनकी 'Cleavage line' पऱ प्रेम सें रखा।
मे उन्हे आईने मे निहार रहा थां। मैंने अपनी ठुड्डी (Chin) उनके कंधे पर्र टिकाई औऱ उनकेकान केँ पास धीरे-धीरे सें बोला, "बहोत खूबसूरत दिखरही होँ। औऱ."
इतना बोलकर मे रुक गय़ा। मम्मी खिलखिलाकर हँसपड़ी औऱ अपनी आँखों मे ढेर सारा प्रेम भरकर बोलि, "औऱ क्याँ?"
मैंने उनकेकान केँ पास अपनी आवाज़ कों औऱ भि गहरा औऱ हल्का करतेहुए फुसफुसाकर कहा, "औऱ बहोत सेक्सी."
मम्मी बुरीतरह ब्लशकर गई औऱ अपनी नज़रें झुकाकर एक् प्यारी सि अदा मे बोलि, "धत्!"
मे हँसने लगा औऱ अपनी गर्दन उनके कंधे केँ ऊपर सें थोड़ा औऱ आगे बढ़ाकर, अपना चेहरा उनके चेहरे केँ लगभग लें गय़ा। जैसे हि मे उन्हे किस करने केँ लिएबढ़ा, मां अचानक कातिलाना अदा औऱ अपनीउस मीठी आवाज़ मे बोलि—
"उऊंम्मम्। पसीना हैं, जाइए जाकर नहाइए पहले!"
मम्मी कि यहबात सुनते हि मेरामन जैसेहवा मे उछलपड़ा।
हाँ, मेरा पूरा शरीर पसीने सें तर-बतर थां। एक् तौ सुभह सें नहाने कां मौका नहि मिला थां औऱ ऊपर सें इस चिलचिलाती गर्मी मे बाज़ार कि भाग-दौड़। मम्मी कां "पहलेनहा लीजिए" कहना मुझे बुरा नहि लगा, बल्कि मे तोँ अंदर हि अंदरझूम उठा। उनकेइस कहने केँ अंदाज़ मे एक् इशारा थां—कि उन्हे अब मेरे लगभगआने मे कोई झिझक नहि हैं, औऱ वोँ आज स्वयं कों मुझे सौंपने केँ लिए पूरीतरह रेडी हैं।
मे बस मम्मी कों, मेरी पत्नि कों, मेरी मंजु कों निहारता रहा।
"जाइए न्, नहा लीजिए." उन्होंने फिन सें टोकते हुएकहा।
मेरे होंठों पर्र एक् शरारती मुस्कान फैल गई। मैंने झुककर मज़ाक मे कहा, "जौ हुक्म सरकार!" औऱ बाथरूम कि तरफमुड़ गय़ा।
"रुकिए!"
मां कि उस कोमल औऱ मखमली आवाज़ नें जैसे मेरे कदमों मे ज़ंजीरें डालदीं। ऐसालगा जैसे कानों मे किसी नें मिश्री घोल दि होँ। यहवही आवाज़ थि जोँ कभी मुझे लोरियाँ सुनाकर सुलाती थि, जोँ मुझे अच्छे-बुरे कां फर्क समझाती थि। औऱ आज, यह आवाज़ मेरी अपनी 'धरोहर' बन चुकी थि। अबयहहर समय मेरेपास रहेगी, हरसमय मुझेचैन देगी।
मैंने मुड़कर देखा, तोँ मेरी मम्मी मेरेलिए एक् नया 'Night Suit' निकाल रही थि। वोँ आहिस्ता चलतेहुए मेरेपास आई। उनके पैरों कि वोँ पायल। उनकी वोँ 'रुनझुन' मेरेबदन मे म्यूज़िक कि लहरें पैदाकर रही थि। मेरा पूरा ध्यान उनकी पायल कि उस आवाज़ मे खो गय़ा। वोँ आवाज़ जैसे मुझसे धीरे-धीरे सें कहरही थि— "ये म्यूज़िक केवल आपका इंतजार कररहा हैं। जल्द सें नहाकर आइए। "
मम्मी जैसे हि मेरे लगभगआई, उनके शरीर कि वोँ भीनी सि खुशबू फिन सें मेरी साँसों मे बस गई। उस नज़दीकी नें मेरेदिल कि धड़कनों कों इसकदर तेज़कर दिया कि मेरा लौड़ा जैसेअकड़ कर फटने कों थां औऱ मेरी पेन्ट कां उभर इतना थां कि मुझे यकीन थां कि मम्मी नें उसेदेख लिया होगा औऱ मेरी आँखों कि उसभूख कों ज़रूरपढ़ लिया होगा।
मां नें वोँ नाइटसूट मेरे हाथों मे थमाया। जैसे हि उनकी नाजूक उँगलियाँ मेरेहाथ सें छुईं, मेरे पूरेबदन मे एक् करंट सां दौड़ गय़ा। मुझेलगा शायद मां कां भि वहीहाल थां—उनके हाथ मे भि एक् हल्की सि कंपकंपी थि। मे हाथ मे सूट थामेबस उनकीउस 'मोहिनी' सूरत कों निहारे जारहा थां, मानो उन्हे अपनी आँखों मे कैदकर लेना चाहता हूं। लज्जा केँ मारे मम्मी नें अपनी नज़रें झुकालीं औऱ फिनवही मखमली आवाज़ मेरे कानों मे पड़ी—
"जाइए नं अब."
मे जैसे ख्यालों कि दुनिया सें हकीकत मे वापस लौटा। मुस्कुराते हुए मे बाथरूम कि तरफबढ़ा, पर्र मेरी नज़रें अब भि तिरछी होकर मम्मी पर्र हि टिकीथीं। उनके होंठों पऱ वोँ चंचल सि मुस्कान मुझे अपनीतरफ खींचरही थि। स्वयं कों किसीतरह संभालते हुए मे बाथरूम केँ अंदर घुसा, पर्र एक् शरारत केँ तहत मैंने दरवाज़ा खुला हि रहने दिया।
मम्मी मेरीइस हरकत कों जल्दी भाँप गई। उन्होंने आगे बढ़कर स्वयं हि दरवाज़ा बंद किया, औऱ मुझे यकीन हैं कि उनके होंठों नें गुनगुनाकर ज़रूरकहा होगा— "बहोत बेशर्म बनगए हें आप्!"
मे शावर केँ नीचेखड़ा मन हि मन मुस्कुरा करसोच रहा थां—बेशर्मी तोँ अभि दिखानी बाकी हैं। पानी कि ठंडी बूंदें शरीर पर्र गिररही थीं, पर्र अंदर कि आग ठंडी होने कां नाम नहि लें रही थि। मे आने वाले पलों केँ बारे मे सोचकर हि रोमांचित हौ उठा। जौ बेचैनी मुझे महसूस होँ रही थि, यकीनन मम्मी भि उसीदौर सें गुज़ररही होगी।
वोँ लम्हा अबबसकुछ हि दूर थां जब मम्मी मेरी बाँहों मे होगी। एक् पत्नि केँ रूप मे, एक् प्रेमिका केँ रूप मे। मे उन्हे हर स्थान छू सकूँगा, उन्हे जी भरकरचूम सकूँगा। यह वोँ अहसास थां जिसे शब्दों मे बयाँ करना नामुमकिन हैं। वोँ भि यहीसोच रही होगी कि आज कि यहरात हमारे प्रेम कों एक् ऐसी परवानगी पर्र लें जाएगी, जहाँ सें वापसी कां कोई मार्ग नहि होगा।
मम्मी औऱ बेटे नें घऱ बसाया(सच्ची घटनाओं पऱ आधारित) – New Episode
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