Doctor मां – New Episode
कथा केँ इस धमाकेदार मोड कि उम्मीद नहि थि
जबरदस्त, नर कि जलन कों बखूबी बयां किया हैं
अभि तक रोमान्च सें निकल नहि पारहा
बधाई होँ अनोखे अंदाज केँ लिए
साधुवाद
Doctor मां – New Episode
रात कि खामोशी मे अंजलि कि सांसों कि आवाज़ औऱ आर्यन केँ पुरुष अहंकार कि तपन मिलकर कमरे केँ तापमान कों बढ़ारही थि। अंजलि जानती थि कि आज आर्यन कों केवलबदन नहि चाहिए, उसे अपनी 'सत्ता' कि वापसी चाहिए। वो आर्यन कि जलन कों शांत करने केँ लिए स्वयं कों पूरीतरह एक् 'शिकार' कि तरहपेश करने कां फैसला करती हैं।
अंजलि धीरे-धीरे सें बैड पऱ घुटनों केँ बलखड़ी हुईँ औऱ फिनआगे झुकते हुए अपनी हथेलियों कों गद्दे पर्र टिका दिया। उसने अपनीकमर कों नीचे कि ओर झुकाया औऱ अपने भारी कूल्हों कों हवा मे आर्यन कि ओर उभार दिया। ये 'डॉगगी स्टाइल' कि वो चरम मुद्रा थि जहाँ एक् स्त्री स्वयं कों पूरीतरह असुरक्षित औऱ समर्पित कर देती हैं।
आर्यन केँ सामने इस टाइम दुनिया कां सबसे कामुक नज़ारा थां। अंजलि कि नीली पैंटी उसके चौड़े औऱ मांसल कूलों केँ बीच फंसी हुई थि। ऊपर नीली ब्रा केँ स्ट्रैप्स उसकी गोरीपीठ पऱ कसरहे थें।
जब उसने अंजलि कों इस जानवर जैसी मुद्रा मे देखा, तौ उसका'मेल ईगो' तृप्त होनेलगा। उसेलगा कि कलरात भले हि कंचन नें उसकी मम्मी पर्र कब्ज़ा किया होँ, मगरआज वो अपनी मम्मी कों एक् जानवर कि तरह हांकने वाला हैं।
आर्यन नें बिनादेर किए घुटनों केँ बल उसके पीछेआकर अपनी स्थान बनाई। उसने अपनी दोनों हथेलियों सें अंजलि केँ भारी कूलों कों जकड़ लिया औऱ अपने 7 इंच केँ धधकते मूसल कों उसकी जांघों केँ बीच रगड़ना शुरुआत किया। "मां। आज मे कंचन कां हर निशान मिटा दूँगा, " उसने दहाड़ते हुएकहा।
अंजलि इस वक़्त अपनी हथेलियों पर्र जिस्म कां भार टिकाए हाँफरही थि। जबउसे पीछे सें आर्यन केँ उस७इंच केँ लोहे कां गरम स्पर्श अपने मांसल हिस्से पर्र महसूस हुआ, तौ उसकेबदन मे बिजली दौड़ गई।
कलरात कंचन कां वो 'बनावटी अंग' सख्त तोँ थां, मगर उसमें ये'जान' औऱ 'धड़कन' नहि थि। आर्यन कां अंगउसे एक् सजीव ज्वालामुखी कि तरहलग रहा थां।
उसे अच्छा लगरहा थां कि उसका बेटा आजउस पर्र हुक्म चलारहा हैं। उसने अपना चेहरा तकिए मे धंसा लिया औऱ अपनीकमर कों औऱ भि नीचे लचकाया ताकि आर्यन कों प्रवेश करने कां सहीकोण मिलसके। "आर्यन। फाड़दे मुझे.बता दे कि यहबदन मात्र तेरा हैं, " उसने सिसकते हुए उकसाया।
आर्यन नें एक् हाथ सें अंजलि केँ बालों कों पीछे सें मुट्ठी मे भरा औऱ उसकासिर पीछे कि ओर घसीटकर उसकी गर्दन कों उजागर कर दिया। दूसरे हाथ सें उसने अपनी पतलून केँ अंदर सें उस उफनते हुए फौलाद कों बाहर् निकाला औऱ अंजलि केँ गीले दरवाज़ा पऱ सेट किया।
एक् ज़ोरदार झटके केँ संग आर्यन नें अपना पूरा वजूद अंजलि केँ अंदर उतार दिया। "आह्ह्ह्ह। मम्मी!" आर्यन केँ मुँह सें एक् चीख निकली, जबकि अंजलि कां पूराबदन उस झटके सें आगे कि ओरलचक गय़ा।
डोग्गी स्टाइल मे हर धक्का अंजलि कि कोख कि गहराई तक टकरारहा थां। थप-थप कि आवाज़ कमरे केँ सन्नाटे कों चीररही थि। आर्यन कि जांघें जब अंजलि केँ कूलों सें टकरातीं, तौ एक् मादक हंगामा पैदा होता।
हर प्रहार केँ संग आर्यन कों लगरहा थां कि वो कंचन मासी केँ उस 'बनावटी सच' कों अंजलि केँ जिस्म सें बाहर् धकेलरहा हैं। वो अंजलि कां मालिक थां, औऱ ये मुद्रा उसेउस मालिकाना हक कां चरम अहसास करारही थि।
अंजलि केँ मुँह सें निकलने वाली सिसकारियां अबतेज़ चीखों मे बदलरही थीं। वो अपनी आँखें बंदकिए उस 'असली मर्द' केँ वजन औऱ ताकत कों महसूस कररही थि, जौ उसे कंचन केँ उस डरावने अनुभव सें दूर लेँ जारहा थां।
कमरे मे थप-थप कि आवाज़ें औऱ आर्यन कि भारी सांसें एक् युद्ध कां म्यूज़िक रचरही थीं। अंजलि कां बदन आर्यन केँ हर प्रहार पर्र आगे-पीछे झूलरहा थां। तभी, चरम सुख कि दहलीज पऱ खड़ी अंजलि नें अपना पसीने सें तरबतर चेहरा तकिए सें उठाया औऱ पीछे मुड़कर अपनी मदहोश आँखों सें आर्यन कों देखा।
अंजलि नें सिसकते हुए आर्यन केँ हाथ कों, जोँ उसकीकमर पऱ कसा थां, औऱ ज़ोर सें दबाया औऱ हाँफते हुए बोलि:
"आर्यन। अहह। रुकना मत। तुम कोपता हैं कलरात जाते-जाते कंचन नें मेरेकान मे क्याँ फुसफुसाया थां? उसनेकहा थां— 'जीजी, आपका बेटा दिखने मे तौ शेर हैं, पर्र क्याँ इसमें इतनी मर्दानगी हैं कि यह मेरेइस नए अवतार कों झेलसके? अगलीबार जब मे आऊँगी, तब देखूँगी कि असली फौलाद किसके पास हैं.'!"
जैसे हि आर्यन नें कंचन मासी कां वो 'चैलेंज' सुना, उसकाखून खौलउठा। मासी नें उसकी मर्दानगी कों ललकारा थां? उसनेउसे एक् 'बनावटी औज़ार' केँ सामने कमतर आँका थां?
जलन औऱ गुस्से कि एक् लहर आर्यन केँ दिमाग़ मे बिजली बनकर दौड़ी। उसका 7 इंच कां अंगअब पत्थर सें भि ज्यादा सख्त हौ चुका थां।
उसने अंजलि केँ बालों कों औऱ भि बेदर्दी सें मुट्ठी मे भींचा औऱ उसकेसिर कों पीछे घसीटकर उसकी गर्दन पर्र अपने दांत गड़ादिए। अब उसके धक्के 'डॉगगी स्टाइल' मे औऱ भि गहरे, तेज़ औऱ हिंसक हौ गए थें। "उसनेऐसा कहा मम्मी? उसकी इतनी हिम्मत? अगलीबार उसेआने दो। मे उसे दिखाऊँगा कि कुदरत कि दि हुइ ताकत क्याँ होती हैं!"
अंजलि कों पता थां कि आर्यन कों येबात बताकर वो आग मे घीडाल रही हैं। उसे आर्यन केँ इस हिंसक रूप मे एक् अलग हि सुरक्षा महसूस हौ रही थि।
जब आर्यन नें उस 'चैलेंज' केँ गुस्से मे अपनी पूरी ताकत झोंक दि, तौ अंजलि कों लगा जैसे उसका जिस्म फट जाएगा। हर धक्का उसकीकोख कि अंतिम दीवार कों छूरहा थां।
वो अपनी आँखें चढ़ाकर मात्र सिसकारियाँ भरपारही थि। आर्यन कां क्रोध उसे वो सुखदे रहा थां जौ कंचन कि बनावटी मर्दानगी कभी नहि दे सकती थि। "हाँ आर्यन। मार मुझे.सोच कि तुँ कंचन कों कुचलरहा हैं। आह्ह्ह! तुँ हि मेरा इकलौता मर्द हैं!"
कमरे मे सन्नाटा अब समाप्त हौ चुका थां, केवल जिस्मों केँ टकराने कि आवाज़ थि। आर्यन कि आँखों केँ सामने कंचन मासी कां वोँ चुनौती भरा चेहरा थां औऱ हाथ मे अंजलि कां ये कांपता हुआ शरीर।
उसने अंजलि केँ कूलों कों इतनी ज़ोर सें भींचा कि उसकी उंगलियों केँ निशान गोरे मांस पर्र उभरआए। अपनी पूरी ताकत कों एक् अंतिम झटके मे समेटकर आर्यन नें अंजलि केँ अंदर गहरा गोता लगाया औऱ अपना सारा गर्म लावा किसी ज्वालामुखी कि तरह उसकी गहराई मे खालीकर दिया।
अंजलि एक् लंबीचीख केँ संगबैड पर्र ढह गई, औऱ आर्यन हाँफते हुए उसकेऊपर हि गिरपड़ा। पसीने सें लथपथ दोनों जिस्म एक्-दूसरे मे गुंथे हुए थें।
पलंग पर्र पसीने सें लथपथ लेटेहुए, आर्यन कि सांसें अब आहिस्ता सामान्य होँ रहीथीं। अंजलि कां जिस्म अभि भि उन मीठी लहरों सें कांपरहा थां जोँ आर्यन केँ प्रचंड वेग नें उसके अंदर छोड़ी थीं। कमरे मे छाई शांति मे एक् अजीब सां चैन थां—एक् ऐसी 'असीम शांति' जिसका अनुभव आर्यन नें आज सें पहलेकभी नहि किया थां।
उसने करवटली औऱ अंजलि कों अपनी बाहों मे समेट लिया। उसकासिर अंजलि कि नग्न औऱ रसीले छाती पऱ थां।
आर्यन नें एक् लंबी औऱ गहरी सांसली औऱ अपनी मम्मी कि आँखों मे देखते हुए अपनेमन कि बात साझा करना शुरुआत किया।
"मम्मी। आज मुझे जोँ महसूस हुआ हैं, उसे शब्दों मे बयान करना मुश्किल हैं। मैंने सोचा थां कि कंचन मासी कां वोँ राज सुनकर मे टूट जाऊँगा याँ हम् दोनों केँ बीच दूरियां आँ जाएंगी। मगरआज। आज मुझे एक् अजीब सि शांति मिली हैं। "
आर्यन नें अंजलि कि कमर पर्र अपनी उंगलियां फिराते हुएकहा, "आज मुझेसमझ आया कि 'रियल फैंटेसी' क्याँ होती हैं। जब हम् दोनों अकेले होते थें, तोँ सभीकुछ बहोत प्यारा थां। मगरआज जब हमारे बीचउस 'तीसरे' कां ज़िक्र हुआ, जब उसकी चुनौती कि बातआई, तोँ मेरे अंदर कां मर्द एक् अलग हि स्तर पऱ जाग गय़ा। उसकी मौजूदगी नें, भले हि वो यहा नहि थि, हमारे मिलन मे एक् ऐसीआग भर दि जोँ पहलेकभी नहि थि। "
"वोँ जलन, वोँ क्रोध कि कोई औऱ आपकोछू सकता हैं। औऱ फिनउस गुस्से कों आपके अंदर उतार देना। मम्मी, ये अनुभव रूहानी हैं। मुझेलग रहा हैं जैसे मे अब केवल एक् बेटा याँ प्रेमी नहि रहा, बल्कि एक् ऐसा योद्धा बन गय़ा हूं जिसे अपनी सल्तनत किसी भि कीमत पऱ बचाना हैं। "
अंजलि नें आर्यन केँ बालों मे अपनी उंगलियां फंसाईं औऱ उसे अपने औऱ लगभग खींच लिया। वो समझरही थि कि आर्यन किस मनोवैज्ञानिक बदलाव सें गुजररहा हैं।
"मे समझरही हूं बेटा, " अंजलि नें बहोत हि कोमलता सें कहा। "इसे हि Triangle कां आकर्षण कहते हें। जबदो लोगों केँ बीचकोई तीसरा आता हैं—चाहे वोँ दुश्मन बनकरआए याँ चुनौती बनकर—तौ वोँ उन दोनों कों एक्-दूसरे केँ औऱ लगभगला देता हैं। कंचन केँ उसराज नें तुम्हें आज केवल मेरा बेटा नहि, मेरा 'रक्षक' बना दिया हैं। "
आर्यन अब पूरीतरह सें बदल चुका थां। कंचन मासी कां डरअब उसकेलिए एक् 'नशा'बन गय़ा थां। वो उसदिन कां इंतजार करनेलगा थां जब वो 'बनावटी मर्दानगी' उसके सामने होगी औऱ वो उसेधूल चटाएगा।
आर्यन कि आँखों मे अबडर कां नामो-न् निशान नहि थां। उसकी स्थान एक् शातिराना चमक औऱ गजब कां आत्मविश्वास आँ चुका थां। उसने अंजलि कि गर्दन पऱ एक् हल्का सां दाँत गड़ाया औऱ मुस्कुराते हुए अपनी योजना साफ़कर दि।
आर्यन नें अंजलि केँ चेहरे कों अपने हाथों केँ बीच लिया औऱ पूरे अधिकार केँ संग बोला:
"मम्मी, अबकोई लुका-छिपी नहि। आप् अगलीबार जब मासी सें बात करें, तौ उन्हें साफ़कह देना कि आर्यन 'रेडी' हैं। उन्हें बता देना कि उनकायह भतीजा अबउस 'बनावटी' औऱ 'कुदरती' मर्दानगी केँ अंतर कों लगभग सें देख्ना चाहता हैं। "
"अब मुझे भि इसखेल मे मज़ाआने लगा हैं। वो जोँ 'तीसरे' कि बात थि नं, उसने मेरे दिमाग़ केँ बंद दरवाजे खोलदिए हें। हम् तीनों एक् संग। एक् हि पलंग पऱ। आप्, मे औऱ वोँ अपनीआधी महिला-आधा मर्द वाली पहचान केँ संग। सोचिए मम्मी, वोँ नज़ारा कितना पागलकर देने वाला होगाजब हम् तीनों एक्-दूसरे कि प्यास बुझाएंगे। "
"अब हम् उनके खिलाफ नहि, उनके'संग' खेलेंगे। मे देख्ना चाहता हूं कि वोँ अपनीउस नई शक्ति सें आपको केसे रिझाती हें, औऱ मे केसे आप् दोनों कों एक् संग संभालता हूं। "
अंजलि पहले तोँ आर्यन कि इस हिम्मत कों देखकर दंगरह गई, मगरफिन उसके अंदर कि 'खिलाड़ी' स्त्री भि जाग गई। उसेलगा कि अगर वो कंचन कों दुश्मन बनाएगी, तोँ राज खुलने कां डर रहेगा, मगरअगर वे तीनों एक् Threesome बन जाएँ, तोँ ये उसकी ज़िंदगी कि सबसे बड़ी औऱ सबसे गंदी फैंटेसी बन सकती हैं।
अंजलि नें आर्यन केँ होंठों कों चूम लिया। "तुँ तौ बहोत आगे निकल गय़ा आर्यन। मुझेलगा थां तूँ डर जाएगा, पऱ तूने तोँ इसे हि अपना हथियार बना लिया। ठीक हैं, मे उसेबोल दूँगी कि मैदान सज चुका हैं। "
"सोच बेटा, जब वोँ आएगी औऱ हम् तीनों एक् संग होंगे। तुँ उसे अपनेवश मे करना औऱ मे। मे तुम् दोनों केँ बीचउस आग कों औऱ भड़काऊँगी। "
अगली सुभहजब सूरज कि पहली किरण कमरे मे आई, तोँ माहौल पूरीतरह बदल चुका थां। अबकोई बोझ नहि थां, कोई ग्लानी नहि थि। अंजलि औऱ आर्यन अब एक् 'मिशन' पऱ थें। कंचन मासी कां आनांअब किसी आपदा कि तरह नहि, बल्कि एक् 'त्योहार' कि तरह इंतजार किया जाने वाला थां।
आर्यन नें कॉलेज जाने सें पहले आईने मे स्वयं कों देखा। उसने अपनी बाजू कि मांसपेशियों कों कड़ा किया औऱ अपने नेकर केँ अंदरहाथ डालकर उस 7 इंच केँ लोहे कों सहलाया।
दोपहर केँ 2:30 बजरहे थें। कॉलेज कि कैंटीन मे बैठे आर्यन केँ मोबाइल पर्र अंजलि कां मैसेज फ्लैश हुआ:
"बेटा, आज दोपहर घऱ जल्द आँ जानां। तुम्हारे लिए एक् बहोत बड़ा सरप्राइज इंतजार कररहा हैं। मिसमत करना!"
आर्यन कां दिल धड़कने लगा। उसे अंदाज़ा तौ थां कि कुछ होने वाला हैं, पऱ उसेये नहि पता थां कि अंजलि नें कंचन मासी सें इतनी जल्द'डील' फाइनल करली हैं। अंजलि चाहती थि कि आर्यन औऱ कंचन केँ बीच कि वोँ पहली झिझक ख़त्म होँ जाए, इसलिये उसने स्वयं कों सीन सें हटाकर उन दोनों केँ लिए मैदान साफकर दिया थां।
आर्यन नें अपनी बाइक तेज़ी सें दौड़ाई औऱ घऱ केँ सामने आकर रुका। घऱ कां मुख्य द्वार (दरवाज़ा) बंद थां, मगर कुंडी नहि लगी थि। वो दबे पाँव अंदर घुसा। पूरेघऱ मे वही पुरानी अगरबत्ती कि खुशबू औऱ सन्नाटा थां, मगरहवा मे एक् अजीब सि उत्तेजना महसूस होँ रही थि।
जैसे हि वो ड्राइंग रूम कों पार करके अंदर केँ हॉल मे पहुंचा, वो हक्का-बक्का रह गय़ा।
सामने सोफे पर्र कंचन मासी बैठीथीं, मगरये वो मासी नहि थीं जोँ मंदिर जातीथीं। उन्होंने एक् पारदर्शी काली शिफॉन कि साड़ी पहनी थि, जिसके नीचे उनकी सफेद त्वचा औऱ सुडौल शरीरसाफ़ झलकरहा थां। उनकेबाल खुले थें औऱ आँखों मे वोँ ममता नहि, बल्कि एक् शिकारी कि 'भूख' थि।
वो सोफे पऱ पेर पऱ पांव चढ़ाकर बिल्कुल एक् मर्द केँ अंदाज़ मे बैठीथीं। उनकेहाथ मे एक् गिलास थां औऱ उनके चेहरे पऱ एक् ऐसी मुस्कान थि जौ आर्यन कों चुनौती देरही थि। साड़ी केँ पल्लू सें उनके उभार तोँ दिखरहे थें, मगर उनकी बैठने कि मुद्रा उनकेउस 'गुप्त राज' कि मौजूदगी कां अहसास करारही थि।
अंजलि कहीं नज़र नहि आँ रही थि। पूराघऱ खाली थां। कंचन नें धीरे-धीरे सें अपना गिलास मेज़ पर्र रखा औऱ खड़ी हौ गईं। उनकी लंबाई औऱ उनकी बॉडी लैंग्वेज आज बिल्कुल बदली हुइ थि।
कंचन मासी धीरे धीरे आर्यन कि ओर बढ़ीं। उनके चलने केँ अंदाज़ मे एक् मर्दाना भारीपन थां, जौ उनकी रेशमी साड़ी केँ संग बहोत हि अजीब औऱ कामुक विरोधाभास पैदाकर रहा थां।
"तेरी मम्मी नें कहा थां कि तूँ 'रेडी' हैं, " कंचन नें आर्यन केँ बिल्कुल पासआकर उसकी आँखों मे देखते हुएकहा। उनकी आवाज़ मे एक् नई गहराई थि। "पर्र मुझेलगा नहि थां कि तूँ इतनी जल्द आँ जाएगा। देख.आज यहाकोई नहि हैं। न् तेरी मां, न् समाज कि कोई दीवार। "
आर्यन सन्न खड़ा थां। उसके सामने वही महिला थि जिसे वो 'मासी' कहता थां, पऱ आजउस साड़ी केँ नीचे छिपे 'मर्दाना सच' कां खौफ औऱ आकर्षण उसे सुन्न कररहा थां। उसका 7 इंच कां फौलाद नेकर केँ अंदर अपने आप् अपनी स्थान बनाने लगा थां।
कंचन नें अपनाहाथ बढ़ाया औऱ बहोत हि बेबाकी सें आर्यन कि ठुड्डी कों ऊपर उठाया। "क्याँ हुआ? अपनी मासी कां रूप देखकर बोलती बंद हौ गई? याँ यहसोच रहा हैं कि आज मुकाबला बराबरी कां होगा याँ नहि?"
उन्होंने धीरे-धीरे सें आर्यन केँ कान केँ पास झुककर फुसफुसाया, "तेरी मम्मी नें मुझेसभी बता दिया हैं कि तुँ कितना 'बड़ा' हौ गय़ा हैं। पऱ आज मे तुम्हे बताऊँगी कि विज्ञान औऱ कुदरत जब मिलते हें, तोँ कैसा धमाका होता हैं। "
आर्यन कि स्थिति उस टाइमऐसी थि जैसेकोई शिकारी स्वयं शिकार केँ पिंजरे मे घुस गय़ा हौ। मन मे फैंटेसी औऱ जोश तोँ बहोत थां, मगरजब वो हकीकत मे कंचन मासी केँ उस बदलेहुए औऱ प्रभावी व्यक्तित्व केँ सामने खड़ाहुआ, तोँ उसकेकदम डगमगा गए। वो चाहकर भि वो पहलाकदम नहि उठापा रहा थां जोँ एक् 'मर्द' कों उठाना चाहिए।
वो थोड़ा हिचकिचाते हुए पीछेहटा औऱ अपनी नज़रें झुकालीं। उसकेलिए येसभी बहोत नया थां—एक् ऐसी महिला कों अपनी 'प्रेमिका' याँ 'दोस्त' केँ रूप मे देख्ना जौ आधी स्त्री औऱ आधा मर्दबन चुकी थि।
कंचन मासी, जौ अब एक् अनुभवी खिलाड़ी कि तरह बर्ताव कररही थीं, आर्यन कि इस बेचैनी कों जल्दी भांपगईं। उन्हें पता थां कि आर्यन कों 'सहज' करना ज़रूरी हैं, वरनाये खेल शुरुआत होने सें पहले हि ठंडापड़ जाएगा।
कंचन नें एक् मंद मुस्कान दि औऱ बहोत हि कोमलता सें आर्यन कि ओरकदम बढ़ाए। उन्होंने कोई जल्दबाज़ी नहि कि। "आर्यन। तूँ डररहा हैं? याँ यहसोच रहा हैं कि तेरीयह मासीअब बदल गई हैं?" उनकी आवाज़ मे अबवही पुरानी सौम्यता लौटआई थि, जिसने आर्यन केँ डर कों थोड़ाकम किया।
कंचन नें आगे बढ़कर अपने दोनों हाथ आर्यन केँ कंधों पऱ रखे औऱ उसे धीरे-धीरे सें अपनीओर खींच लिया। उन्होंने आर्यन कों एक् गहरा औऱ चैन देने वालागले लगाया। येमहज़ एक् आलिंगन नहि थां; ये आर्यन केँ मन कों शांत करने कि एक् सोची-समझी कोशिश थि।
जैसे हि आर्यन कां सीना कंचन मासी कि रेशमी काली साड़ी औऱ उनकेनरम शरीर सें टकराया, उसकी धड़कनें औऱ तेज़ होँ गईं।
आर्यन कों अपनी छाती पऱ कंचन केँ भारी औऱ रसीले उरोजों कां दबाव महसूस हुआ। उनकी खुशबू—वही मोगरे कां इत्र औऱ पसीने कि हल्की सि मादक गंध—आर्यन केँ नथुनों मे भर गई। उसेलगा कि वो अपनीवही पुरानी मासी कि बाहों मे हैं।
मगर जैसे हि कंचन नें उसे थोड़ा औऱ कसकर भींचा, आर्यन कों अपनी जांघों केँ पासउस 'बदलेहुए सच' कां हल्का सां स्पर्श महसूस हुआ। वो स्पर्श किसी स्त्री जैसा नहि थां; वो सख्त औऱ भारी थां। इस विरोधाभास नें आर्यन केँ बदन मे एक् करंट सां दौड़ा दिया।
कंचन नें आर्यन केँ कान केँ पास अपना चेहरा टिकाया औऱ बहोत हि धीमे सें कहा, "डर मत बेटा। मे वही कंचन हूं जिसने तुझेही बचपन मे गोद मे खिलाया हैं। बसअब मे थोड़ी 'ज़्यादा' काबिल हौ गई हूं। तूँ बस रिलैक्स कर.आज हम् कोई मुकाबला नहि कररहे, आज हम् बस एक्-दूसरे कों जानरहे हें। "
उन्होंने आर्यन कि पीठ कों सहलाया, जिससे आर्यन कि मांसपेशियों कां तनाव आहिस्ता कम होनेलगा। उसका 7 इंच कां फौलाद जोँ डर केँ मारे सुस्त होँ रहा थां, अबउस आलिंगन कि गर्मी पाकरफिन सें सिर उठाने लगा थां।
आर्यन नें भि धीरे-धीरे सें अपनेहाथ कंचन कि कमर पऱ रखे। रेशमी साड़ी केँ नीचे उनकी त्वचा गर्म औऱ मखमली थि। उसेलगा कि हाँ, अब वो इसखेल केँ लिए सजधजकर होँ रहा हैं।
हिचकिचाहट कि बर्फअब पिघलने लगी थि। कंचन मासी नें बड़ी नजाकत सें आर्यन कां हाथ अपनेहाथ मे लिया। उनके स्पर्श मे एक् अजीब सां आत्मविश्वास थां। आर्यन, जोँ अब तक थोडा डराहुआ थां, उनकी आंखों मे छुपीउस 'महिला-सुलभ' कोमलता कों देखकर सहज महसूस करनेलगा। उसेलगा कि भले हि उनकेपास एक् 'मर्दाना राज' हैं, मगर उनकादिल औऱ उनकी अदाएं अब भि वही सुकोमल कंचन मासी वाली हें।
वे दोनों आहिस्ता बेडरूम कि ओर बढ़े। कमरे मे दोपहर कि मद्धम रोशनी खिड़की केँ पर्दों सें छनकर आँ रही थि, जिससे वहां एक् मादक धुंधलका छायाहुआ थां। जैसे हि वे कमरे केँ अंदर पहुंचे, कंचन नें आर्यन कों अपनीओर घुमाया।
आर्यन नें महसूस किया कि अबपहल करने कि बारी मासी कि हैं। कंचन नें अपनी उंगलियां आर्यन केँ बालों मे फंसाईं औऱ धीरे-धीरे सें उसे अपनीओर खींचा।
कंचन नें अपनी पलकें झुकाईं औऱ अपने गुलाब कि पंखुड़ी जैसे होंठ आर्यन केँ होंठों पर्र रखदिए। आर्यन कों लगा थां कि शायदये कुछअलग होगा, मगर जैसे हि उनके होंठआपस मे मिले, उसे एक् सुखद झटकालगा। ये बिल्कुल लड़कियों जैसा स्वाभाविक औऱ कोमल चुंबन थां।
कंचन केँ होंठों सें वही मोगरे औऱ पान कि हल्की सि खुशबू आँ रही थि। शुरुआत बहोत धीमी थि, जैसेवे आर्यन कि अनुमति मांगरही हों। मगर जब आर्यन नें भि Respond देना शुरुआत किया, तोँ चुंबन गहरा होता गय़ा। कंचन कि ज़ुबान नें धीरे-धीरे सें आर्यन केँ होंठों कों सहलाया औऱ फिन उसके मुँह केँ अंदर प्रवेश किया।
ये एक् 'डीप स्मूच' थां। आर्यन कों महसूस हुआ कि कंचन कि चूमने कि तकनीक बहोत हि परिपक्व थि। उनकीलार कां स्वाद औऱ उनकी सांसों कि गरमाहट आर्यन केँ रगों मे दौड़ने लगी। इस चुंबन मे कहीं भि वो मर्दाना खुरदरापन नहि थां जिसका आर्यन कों डर थां; ये पूरीतरह सें एक् प्यासी महिला कां अपने प्रेमी केँ लिए समर्पण थां।
चुंबन केँ दौरान आर्यन कि आँखें बंदथीं। उसे महसूस हौ रहा थां कि उसकी मासी कां ऊपरी शरीर—उनके नरम उरोज जौ उसके सीने सें दबे थें औऱ उनके रेशमी बाल—सभी कुछ एक् मुकम्मल स्त्री कां थां। इस चुंबन नें आर्यन केँ मन सें उस 'मर्दाना राज' केँ खौफ कों पूरीतरह मिटा दिया। उसे लगा कि वो अपनी सबसे हसीन औऱ अनुभवी मासी केँ संग प्रेम केँ समुद्र मे डूबरहा हैं।
कंचन नें चुंबन तोड़ते हुए थोडा पीछे हटकर आर्यन कि आँखों मे देखा। उनके होंठ गीले थें औऱ गालों पऱ सुर्खी छा गई थि। "कैसालगा आर्यन? क्याँ अब भि मे तुझेही कोई डरावनी चीज़लग रही हूं?" उन्होंने शरारत भरी मुस्कान केँ संग पूछा।
आर्यन कि सांसें अब तेज़ हौ चुकीथीं। उस चुंबन नें उसके अंदर केँ 7 इंच केँ फौलाद कों पूरीतरह सें जागृत कर दिया थां। उसने कंचन कि पतलीकमर कों अपने हाथों मे भर लिया। अब वो केवल'सहज' नहि थां, बल्कि वो कंचन कों पूरीतरह सें उघाड़ने केँ लिए बेताब थां।
कंचन नें धीरे-धीरे सें अपनी साड़ी कां पल्लू अपने कंधे सें सरका दिया। "अभि तोँ केवल शुरुआत हैं बेटा। असली सरप्राइज तोँ इस रेशम केँ नीचे छिपा हैं। "
चुंबन कि गहराई नें आर्यन केँ मन सें साराडर निकाल फेंका थां। अब उसकी आँखों मे मात्र औऱ मात्र हवस औऱ जिज्ञासा थि। जैसे हि कंचन मासी केँ कंधे सें काली शिफॉन कि साड़ी कां पल्लू नीचे गिरा, आर्यन कि नज़रें उनके ब्लाउज केँ अंदरकैद उन उभारों पऱ टिकगईं जोँ किसी चुनौती कि तरह तनकर बाहर् आने कों बेताब थें।
आर्यन नें धीरे-धीरे सें कंचन केँ ब्लाउज केँ हुक एक्-एक् करके खोले। जैसे हि अंतिम हुक खुला, ब्लाउज केँ संग-संग ब्रा कि कैद सें भि वे गोरे औऱ मांसल अंग आजाद होँ गए। आर्यन उन्हें देखकर दंगरह गय़ा।
आर्यन नें अपनी मां अंजली केँ स्तनों कों कईबार महसूस किया थां; वे बड़े, भारी औऱ थोड़े ढीले थें, जिनमें एक् मातृत्व वाली कोमलता थि। मगर कंचन मासी केँ बूब्ज़ बिल्कुल अलग थें। वे साइज मे बड़े होने केँ बावजूद पत्थर कि तरह कठोर औऱ सुडौल थें। शायदजिम, योग याँ उनकीउस विशेष सर्जरी केँ हार्मोनल बदलावों नें उनके वजूद केँ इस हिस्से कों एक् 20 साल कि जवान लड़की जैसी सख्ती दे दि थि।
उन पऱ गुलाबी रंग कि बड़ी-बड़ी निप्पलें किसी मुकुट कि तरहसजी थीं। उनकी कठोरता देख आर्यन कां 7 इंच कां फौलाद नेकर कों फाड़कर बाहर् आने केँ लिए मचलने लगा। उसे यकीन नहि होँ रहा थां कि एक् उम्रदराज स्त्री केँ बूब्ज़ इतने टाइट औऱ 'अपराइट' केसे हौ सकते हें।
आर्यन अब स्वयं पर्र काबू नहि रखसका। उसने अपनी हथेलियों मे उन दोनों गोलों कों भरा। उनका स्पर्श इतनागरम औऱ सख्त थां कि आर्यन केँ मुँह सें एक् अहह निकल गई। उसने कंचन कों अपनीओर थोडा औऱ खींचा औऱ अपना पूरा मुँह खोलकर एक् तरफ केँ बूब्ज़ कों अंदरभर लिया।
आर्यन नें जब अपनी ज़ुबान सें उस सख्त निप्पल कों सहलाया, तोँ कंचन केँ बदन मे एक् करंट दौड़ गय़ा। उसने अपनीजीभ कों गोल-गोल घुमाते हुएउस कठोर मांस कों चूसना शुरुआत किया। जैसेकोई प्यासा बच्चा अपनी मां कां दूधपी रहा हौ, मगर इसमें ममता नहि, बल्कि एक् कामुक भूख थि।
"आह्ह्ह। आर्यन। धीरे-धीरे बेटा। तूँ तोँ बहोत भूखा निकला, " कंचन नें सिसकते हुएकहा। उन्होंने अपने दोनों हाथ आर्यन केँ सिर पऱ रखदिए औऱ उसके चेहरे कों अपने स्तनों मे औऱ भि गहराई सें धंसा दिया। उन्हें अच्छा लगरहा थां कि उनकाये 'बदलाहुआ' बदन आर्यन कों इतना पागलकर रहा हैं।
आर्यन अब बारी-बारी सें दोनों तरफ हमलाकर रहा थां। वो कभी उन्हें अपने हाथों सें दबाता, तोँ कभी अपने दांतों सें हल्की सि काट भरता। हर बारजब वो ज़ोर सें वैक्यूम बनाकर चूसता, तौ कंचन कि कमरऊपर कि ओरलचक जाती।
आर्यन कों महसूस होँ रहा थां कि कंचन कां ऊपरी जिस्म पूरीतरह सें एक् महारानी जैसा हैं। उनकी त्वचा मखमली थि, पऱ अंदर कां मांस फौलाद जैसा सख्त। वो जितना उन्हें चूसरहा थां, उसकी उत्तेजना उतनी हि बढ़ती जारही थि। उसेअब औऱ इंतजार नहि होँ रहा थां कि वो नीचे केँ उस रहस्य तक पहुँचे जिसने उनकी पूरी पहचान बदल दि थि।
कमरे कि गर्मी अबचरम पऱ थि। आर्यन कंचन केँ उन संगमरमर जैसे कठोर औऱ सुडौल स्तनों केँ मोहपाश मे ऐसा फँसा कि उसे वक़्त औऱ जगह कां होश हि नहि रहा। वो किसी मदहोश भँवरे कि तरहकभी दाएँ तौ कभी बाएँ मम्मों पऱ अपनी ज़ुबान कां चमत्कार चलारहा थां।
आर्यन केँ हाथों कि फुर्ती औऱ उसके मुँह कि भूख नें देखते हि देखते कंचन कों ऊपर सें पूरीतरह नग्नकर दिया। साड़ी औऱ ब्लाउज अब फर्श पऱ बेतरतीब पड़े थें।
कंचनअब सिर्फ नीचे एक् विशेष प्रकार कि कालेरंग कि सिल्क पैंटी मे थीं। ये कोई साधारण पैंटी नहि थि; इसेखास तौर पऱ उनके 'बदलेहुए बदन' केँ लिए डिज़ाइन किया गय़ा थां। येआगे सें थोड़ी उभरी हुइ औऱ खिंचावदार थि, ताकि उनका वो 'नया मर्दाना अंग' उसमें सुरक्षित औऱ छिपारहे, पऱ उसकी बनावट साफ़तौर पऱ एक् उभार केँ रूप मे अपनी मौजूदगी दर्जकरा रही थि।
कंचन नें भि देरी नहि कि। उन्होंने अपनी मखमली उंगलियों सें आर्यन कि टी-शर्ट औऱ फिन उसकी जींस कों उतार फेंका। अब आर्यन भि मात्र अपने सफेद अंडरवियर मे थां। उसके नेकर केँ अंदर उसका 7 इंच कां फौलाद किसी ज़िद्दी सिपाही कि तरहतन चुका थां, जौ साफ़तौर पर्र अपनी पूरी लंबाई औऱ मोटाई दिखारहा थां।
दोनों अबबैड केँ बीचों-बीच थें। कंचनचित लेटीथीं औऱ आर्यन उनकेऊपर झुककर अभि भि उनके स्तनों कां रसपान कररहा थां।
आर्यन इस टाइम एक् अलग हि दुनिया मे थां। उसकेमन मे एक् तरफ उसकी मम्मी अंजलि कां वो कोमल चेहरा थां औऱ दूसरी तरफ कंचन मासी कां ये 'हाइब्रिड' औऱ शक्तिशाली जिस्म। वो सोचरहा थां कि कुदरत नें क्याँ खेलरचा हैं—ऊपर सें इतनी कोमल औऱ रसीली महिला, जिसके मम्मों छूने पऱ बिजली कां करंट देते हें, औऱ नीचे वो राज जिसे छूने केँ लिए उसकाहाथ अब उतावलापन रहा थां।
जैसे-जैसे आर्यन चूसरहा थां, उसकी जांघें कंचन कि जांघों सें रगड़खा रहीथीं। उसे बार-बार कंचन कि उस विशेष पैंटी केँ सख्त उभार कां स्पर्श अपनी त्वचा पऱ महसूस होँ रहा थां। ये अहसास उसेडरा नहि रहा थां, बल्कि उसकी उत्तेजना कों कई गुना बढ़ारहा थां। उसेलग रहा थां कि वो किसी 'सुपरह्यूमन' केँ संगबैड साझाकर रहा हैं।
कंचन नें अपनी टांगें आर्यन कि कमर केँ गिर्द लपेटलीं। "आह्ह्ह। आर्यन। तुँ तौ मेरीजान निकाल लेगा। "
आर्यन नें एक् अंतिम ज़ोरदार चूसनली औऱ अपना चेहरा कंचन केँ स्तनों केँ बीच सें ऊपर उठाया। उसकी आँखों मे हवस कां लालरंग थां औऱ होंठ कंचन कि निप्पलों कि लाली सें रंगे थें।
उसने अपना एक् हाथ नीचे कि ओर बढ़ाया औऱ कंचन कि उस काली सिल्क कि पैंटी केँ सख्त उभार पर्र रख दिया। जैसे हि उसकी हथेली उस 'चीज़' सें टकराई, आर्यन केँ पूरेबदन मे एक् झनझनाहट हुईँ। वो चीज़ पत्थर कि तरह सख्त थि औऱ साफ़तौर पऱ धड़करही थि।
कंचन नें आर्यन कि आँखों मे झाँका। "यही हैं वोँ राज़ आर्यन। जोँ अब तेरा होने वाला हैं। क्याँ मे इसेखोल दूँ?"
Doctor मां – New Episode
आर्यन कि मानसिक स्थिति इससमय एक् ऐसे दोराहे पर्र थि जहाँ एक् तरफ असीम जिज्ञासा थि औऱ दूसरी तरफ वर्षों सें चली आँ रही सामाजिक औऱ प्राकृतिक समझ कां डर। जैसे हि उसने उत्तेजना मे अपनाहाथ नीचे बढ़ाया औऱ उस 'सख्त उभार' कों छुआ, उसे वो अहसास हुआ जिसकी उसने कल्पना नहि कि थि। वो स्पर्श किसी कोमल महिला-अंग कां नहि, बल्कि एक् ठोस औऱ अप्राकृतिक मर्दानगी कां थां।
जैसे हि आर्यन कि उंगलियों नें उस विशेष पैंटी केँ नीचेदबे उस 'औज़ार' कों महसूस किया, उसकेबदन मे बिजली केँ झटके जैसी सिहरन दौड़ गई। उसकेमन नें जल्दी एक् 'अलार्म' बजाया।
आर्यन अचानक असहज हौ गय़ा। उसेलगा जैसे उसने किसीऐसी चीज़ कों छू लिया हैं जिसे छूने कि उसे अनुमति नहि थि, याँ जोँ 'नॉर्मल' नहि थि। उसका Male Ego औऱ उसकी वर्षों कि कंडीशनिंग उसे पीछे धकेलने लगी। वो थोडा पीछेहटा, उसके चेहरे पर्र एक् अजीब सि झेंप औऱ घबराहट थि। उसेलगा कि शायद वो येसभी नहि कर पाएगा। वो पलंग पर्र थोडा दूर होनेलगा, उसकी आँखों मे भ्रमसाफ़ दिखरहा थां।
कंचन मासी एक् परिपक्व खिलाड़ी थीं। वे जानती थीं कि अगरइस टाइम आर्यन कों अकेले छोड़ दिया गय़ा, तोँ वो अपनेखोल मे वापसचला जाएगा। उन्होंने जल्दी स्थिति कों संभाला। इससे पहले कि आर्यन पूरीतरह दूर हौ पाता, कंचन नें उसे झटके सें अपनीओर खींचा औऱ उसके होंठों पर्र एक् गहरा औऱ आक्रामक चुंबन जड़ दिया।
चुंबन केँ दौरान हि कंचन नें वो कदम उठाया जिसने आर्यन कि सोचने-समझने कि शक्ति कों शून्य कर दिया। उन्होंने अपनाहाथ नीचे बढ़ाया औऱ सीधे आर्यन केँ सफेद अंडरवियर केँ अंदरडाल दिया।
कंचन कि गरम औऱ अनुभवी हथेली नें जैसे हि आर्यन केँ 7 इंच केँ धधकते हुएअंग कों जड़ सें पकड़ा, आर्यन कां पूरा जिस्म अकड़ गय़ा। वो अंग जोँ अभि डर केँ मारे सुस्त पड़ सकता थां, कंचन कि जादुई पकड़ मे आते हि औऱ भि ज्यादा पत्थर जैसा होँ गय़ा। कंचन नें उसे मुट्ठी मे भींचकर आहिस्ता सहलाना शुरुआत किया।
अब आर्यन केँ पास पीछे हटने कां कोई मार्ग नहि थां। वो 'मना' करना चाहता थां, उसकामन कहरहा थां कि येगलत हैं, मगर उसकाबदन कंचन केँ उस स्पर्श कां गुलाम बन चुका थां। जब कंचन कि उंगलियों नें उसकेअंग कि सुपारी कों सहलाया, तोँ आर्यन केँ मुँह सें एक् मदहोश कर देने वाली हल्की चीख निकली।
कंचन नें चुंबन तोड़कर आर्यन कि आँखों मे आँखें डालकर देखा। उनकी आँखों मे एक् चुनौती थि। "कहां जारहा हैं मेरेशेर? अभि तौ तूने अपनीइस मासी कां असली हुनर देखा हि कहां हैं? क्याँ तुम्हें लगता हैं कि तेरीयह चीज़। मेरीइस पकड़ सें बच पाएगी?
कंचन कि उस पकड़ नें आर्यन केँ अंदर कि झेंप कों एक् नई किस्म कि उत्तेजना मे बदल दिया। उसे अब अहसास हुआ कि भले हि कंचन केँ पास वो 'चीज़' हैं, मगरइस वक़्त वो कंचन कि मुट्ठी मे कैद हैं। ये पावर प्लेउसे मदहोश कररहा थां।
आर्यन कि सांसें अब घोड़ों कि तरह चलनेलगी थीं। कंचन नें उसकाअंग सहलाते हुए अपनी दूसरी टांग आर्यन केँ ऊपरडाल दि औऱ अपनेउस उभरेहुए राज कों आर्यन कि जांघों पर्र ज़ोर सें रगड़ना शुरुआत किया।
"अब बता आर्यन। क्याँ अब भि तूँ दूर हटना चाहता हैं? याँ अपनीइस मासी कों पूरीतरह उघाड़ना चाहता हैं?"
कमरे कां माहौल अब किसी सुलगते हुए ज्वालामुखी जैसा हौ गय़ा थां। कंचन मासी नें जिसतरह सें आर्यन कि हिचकिचाहट कों भांपा औऱ उसे वापस अपनी गिरफ्त मे लिया, वो किसी मंझी हुईँ खिलाड़ी कि निशानी थि। आर्यन कां मन अभि भि उस 'अजीब' अहसास केँ बीचझूल रहा थां, मगर कंचन नें उसे सोचने कां मौका हि नहि दिया।
कंचन नें फिन सें आर्यन केँ होंठों पर्र अपना कब्ज़ा जमा लिया। इस बार चुंबन महज़ होंठों कां मिलन नहि थां, बल्कि 'जीभ सें जीभ कि मस्ती' थि। उन्होंने अपनीजीभ कों आर्यन केँ मुँह केँ अंदरऐसे घुमाया जैसे वो उसके अस्तित्व कि गहराई कों नापरही हों। उनकीजीभ कभी आर्यन कि जीभ सें टकराती, तौ कभीउसे चूसती। इस 'फ्रेंच किस' नें आर्यन केँ दिमाग़ केँ तर्क करने वाले हिस्से कों सुन्न कर दिया।
चुंबन केँ संग-संग कंचन कां दूसरा हाथ आर्यन कि छाती पऱ रेंगने लगा। उन्होंने अपनी उंगलियों सें आर्यन केँ छोटे औऱ सख्त निप्पल कों सहलाना शुरुआत किया। आर्यन केँ लिएये अनुभव उसकी मां सें बिल्कुल अलग थां। अंजलि केँ संग वो हमेशा 'आक्रामक' रहता थां, मगरयहा कंचनउसे 'अनुभव' करारही थीं। कंचन कां स्पर्श एक् स्त्री कि कोमलता औऱ एक् अनुभवी मर्द कि सटीकता कां मिश्रण थां।
आर्यन इससमय एक् ऐसी 'अल्टर स्टेट ऑफ कॉन्शियसनेस' मे थां जहाँउसे समझ नहि आँ रहा थां कि वो एक् महिला केँ संग हैं याँ किसीऐसी शक्ति केँ संग जोँ उसे पूरीतरह नियंत्रित कररही हैं। कंचन कि उंगलियां जब उसके निप्पल कों मरोड़तीं, तौ उसके जिस्म मे एक् ऐसीलहर दौड़ती जौ सीधे उसके७ इंच केँ फौलाद तक पहुँचती।
अंजलि केँ संग प्रेम मे एक् ममतामयी गहराई थि, मगर कंचन केँ संगइस खेल मे एक् 'अंधेरा रोमांच' थां। कंचनउसे सिखारही थीं कि जिस्म केँ किन हिस्सों सें उत्तेजना कि बिजली पैदा कि जा सकती हैं।
आर्यन कां दिमाग़ पूरीतरह सें कंचन कि दि हुई नई संवेदनाओं मे खो गय़ा थां। उसेलग रहा थां कि वो किसी जादुई नशे कि गिरफ्त मे हैं जहाँउसे अपनी मर्दानगी खोने कां डर नहि, बल्कि उसे एक् नए तरीके सें पाने कां जुनून हैं।
कंचन नें इसी मदहोशी कां फायदा उठाया। उन्होंने आर्यन कां हाथ पकड़ा, जोँ अब तक बैड कि चादर कों कसकर भींचे हुए थां, औऱ उसे धीरे-धीरे सें नीचे लेँ गईं। उन्होंने आर्यन कि हथेली कों सीधे अपनी काली सिल्क कि पैंटी केँ उस सख्त उभार पऱ रख दिया।
कंचन नें आर्यन केँ हाथ पऱ अपनी पकड़ मज़बूत कि औऱ उसे दबाव बनाने केँ लिए मजबूर किया। "देखो आर्यन। इसे महसूस करो। यह भागरहा नहि हैं, यह तुम्हारे लिए धड़करहा हैं, " कंचन नें चुंबन तोड़कर उसकी आँखों मे आँखें डालकर फुसफुसाया।
जैसे हि आर्यन कि हथेली नें उस पैंटी केँ कपड़े केँ नीचेउस 'बनावटी मर्दानगी' कि कठोरता औऱ उसकी धड़कन कों महसूस किया, उसकी उत्तेजना नें सारे बांध तोड़दिए। अबउसे वो चीज़ 'अजीब' नहि लगरही थि, बल्कि उसे वो एक् 'चुनौती' औऱ 'गिफ्ट' कां मिश्रण लगनेलगी थि।
आर्यन कि सांसें अब अनियंत्रित थीं। कंचन केँ हाथ कि पकड़ औऱ उनकेअंग कां वो खिंचाव आर्यन कों एक् ऐसी दुनिया मे लेँ गय़ा जहाँ'सही' औऱ 'गलत' केँ मायने समाप्त होँ गए थें। उसने स्वयं अपनी उंगलियों सें उस उभार कों सहलाना शुरुआत किया, जैसे वो उस राज़ कि गहराई कों मापरहा हौ।
"आह्ह्ह। मासी." आर्यन केँ मुँह सें पहलीबार एक् ऐसी आवाज़ निकली जिसमें डर नहि, बल्कि पूर्ण समर्पण औऱ प्रचंड भूख थि।
कमरे कां तापमान अबउस स्तर पऱ पहुँच चुका थां जहाँ नसों मे खून नहि, बल्कि पिघला हुआ लावा दौड़रहा थां। कंचन मासीइस खेल कि माहिर खिलाड़ी साबित होँ रहीथीं। वे जानती थीं कि अगर आर्यन कों एक् समय केँ लिए भि सोचने कां मौका दिया, तोँ उसके संस्कार याँ उसकी झेंपइस रोमांच कों समाप्त कर सकती हैं। इसलिये, उन्होंने अपनी कामुकता कि रफ्तार औऱ बढ़ा दि।
कंचन नें आर्यन कि आँखों मे झाँका, जहाँअब सिर्फ घोरहवस औऱ जिज्ञासा कां तांडव थां। उन्होंने बिना एक् लम्हा गंवाए अपनाहाथ नीचे अपनी काली सिल्क कि पैंटी कि कमान पर्र रखा औऱ आर्यन कां हाथ पकड़कर उसे अपनीओर खींचा।
एक् झटके केँ संग कंचन नें अपनी पैंटी कों नीचे जांघों तक सरका दिया। आर्यन कि आँखें फटी कि फटीरह गईं। उसकी नज़रों केँ सामने पहलीबार वो 'अनोखा राज' नग्न अवस्था मे थां। वो अंग किसीआम इंसान जैसा नहि थां; वो आधुनिक चिकित्सा औऱ विज्ञान कां एक् ऐसा जादू थां जोँ कंचन केँ औरत जिस्म पर्र एक् मर्दाना मुकुट कि तरहसजा थां। वो अंग पूरीतरह सें उत्तेजित, नसों सें भरा औऱ पत्थर कि तरह सख्त थां।
इससे पहले कि आर्यन उस दृश्य कों पूरीतरह प्रोसेस कर पाता, कंचन नें उसेफिन सें एक् गहरे औऱ गीले चुंबन मे उलझा लिया। उनकीजीभ नें आर्यन केँ मुँह मे फिन सें वही हलचल शुरुआत कर दि। संग हि, उनकाहाथ आर्यन केँ अंडरवियर केँ अंदर पहुंचा औऱ उसके 7 इंच केँ फौलाद कों पूरी ताकत सें जकड़ लिया।
इसी मदहोशी औऱ कशमकश केँ बीच, उत्तेजना केँ चरम पर्र पहुँचे आर्यन कां हाथ स्वयं-ब-स्वयं कंचन केँ उस नग्नअंग कि ओरबढ़ गय़ा। जैसे हि आर्यन कि उंगलियों नें उस चीज़ कों अपनी मुट्ठी मे लिया, पूरे कमरे मे जैसे एक् सन्नाटा छा गय़ा।
वो स्पर्श 'सर्द' थां, मगरसंग हि संगधधक रहा थां। कंचन कां वो अंग कुदरती नहि थां, इसलिये उसकीखाल कां तापमान औऱ उसकी बनावट आर्यन कि अपनी मर्दानगी सें बिल्कुल अलग थि। वो इतना सख्त थां कि आर्यन कों लगा जैसे उसने किसी लोहे कि रॉड पऱ मखमल चढ़ा दिया हौ।
ये एक् ऐसा क्षण थां जबदो 'मर्दानगियाँ' एक्-दूसरे सें टकरारही थीं। आर्यन केँ लिएये एक् सर्द अहसास थां क्योंकि उसने पहलीबार किसी स्त्री केँ जिस्म पऱ ऐसाकुछ महसूस किया थां। वहीं कंचन केँ लिए, आर्यन कां वो गरम औऱ धड़कता हुआ 7 इंच कां फौलाद उनकी मुट्ठी मे थां। ये गर्मी औऱ उस सर्दी कां मिलन थां।
आर्यन केँ दिमाग़ मे एक् धमाका हुआ। उसे अब अहसास हुआ कि कंचन मासीअब मात्र उसकी 'मासी' नहि रहीं, वे एक् ऐसी 'यौवन देवी'बन चुकी हें जिसके पास देने केँ लिए वो सभीकुछ हैं जिसकी एक् मर्द कल्पना कर सकता हैं।
कंचन नें चुंबन तोड़कर एक् गहरी सांसली। उनका चेहरा पसीने सें चमकरहा थां। "महसूस किया आर्यन? अबबता, क्याँ तुँ इस 'सर्द औऱ गरम' केँ संगम मे डूबने केँ लिए रेडी हैं?"
आर्यन नें अब पूरी शिद्दत सें कंचन केँ उसअंग कों सहलाना शुरुआत कर दिया। उसे अबकोई डर नहि थां। वो उस अद्भुत स्पर्श कां खुशी लेँ रहा थां। कंचन कि मुट्ठी मे बंद उसका अपनाअंग भि अब अपनी सीमाओं कों लांघने केँ लिए बेताब थां।
आर्यन अब पूरीतरह सें हड़बड़ाहट सें बाहर् आँ चुका थां। उत्तेजना तोँ चरम पऱ थि हि, मगर उसके भीतर कां जिज्ञासु लड़का अबउस'सच' कों गहराई सें समझना चाहता थां जिसे उसने अभि-अभि अपनी मुट्ठी मे भरा थां। वो पलंग पर्र कंचन केँ बगल मे बैठ गय़ा, उसकी सांसें अभि भि भारीथीं, मगर आँखों मे अबडर कि स्थान एक् गहरा प्रश्न थां।
कंचनबैड पऱ नग्न अवस्था मे लेटीथीं, उनकी रेशमी साड़ी औऱ पैंटी फर्श पऱ पड़ी थि। उनके चेहरे पर्र एक् ऐसी तृप्ति थि जैसे उन्होंने कोई बहोत बड़ीजंग जीतली होँ।
आर्यन नें कंचन केँ चेहरे कि ओर देखा औऱ बहोत हि धीमे, मगर गंभीर स्वर मे पूछा:
"मासी। मुझेबस एक् बात जाननी हैं। क्याँ आपकोयह सभी 'अजीब' नहि लगता? मतलब, एक् महिला केँ बदन मे यह। औऱ मौसाजी? क्याँ उन्हें यहसभी अजीब नहि लगा? उन्होंने इसकी इजाज़त केसे दि? मुझेइस पूरी उलझन कों समझना हैं। "
कंचन नें एक् लंबी सांसली औऱ अपनी आँखों कों छत कि ओर टिका दिया, जैसे वोँ उन पुरानी यादों कों समेटरही हों। उन्होंने बड़े हि सहज अंदाज़ मे जवाब देना शुरुआत किया:
"आर्यन, शुरुआत मे सभीकुछ अजीब थां। जब मुझेपता चला कि तेरे मौसाजी कभी मुझे एक् स्त्री कां सुख नहि दे पाएंगे, तोँ मेरेपास दो रास्ते थें—याँ तौ मे उन्हें छोड़ देती, याँ ताउम्र घुट-घुट कर जीती। मगर हम् दोनों एक्-दूसरे सें प्रेम करते थें। उन्होंने स्वयं ये मार्ग सुझाया। उन्होंने कहा कि अगर वोँ मुझेसुख नहि दे सकते, तौ वोँ मुझे वोँ 'शक्ति' दे देंगे जिससे मे स्वयं कों मुकम्मल महसूस कर सकूँ। "
"उन्हें अजीब नहि लगता, बल्कि उन्हें इसमें एक् अलगतरह कां 'चैन' मिलता हैं। जब वोँ मुझेइस रूप मे देखते हें, तोँ उन्हें अपनीकमी कां अहसास कम होता हैं। वोँ मुझे एक् 'देवी' कि तरह पूजते हें जिसने उनकेघऱ कि इज़्ज़त बचाने केँ लिए अपनी पहचान बदलली। उनकेलिए मे अब केवल उनकी पत्नि नहि, उनका 'अहंकार' भि हूं। "
कंचन नें आर्यन कां हाथ पकड़कर फिन सें अपनेउस अंग पऱ रखा। "औऱ मुझे? आर्यन, शुरुआत मे जब मैंने शीशे मे स्वयं कों देखा, तौ मुझेलगा कि मे कोई राक्षस बन गई हूं। मगर जैसे-जैसे वक्त बीता, मुझे अपनीइस 'दोहरी ताकत' सें प्रेम हौ गय़ा। मे ऊपर सें पूरी स्त्री हूं, कोमल औऱ ममतामयी। औऱ नीचे सें मेरेपास वोँ हथियार हैं जोँ दुनिया कों झुका सकता हैं। अब मुझे अजीब नहि, बल्कि 'खास' महसूस होता हैं। "
आर्यन उनकी बातें सुनकर दंगरह गय़ा। उसेअब समझआया कि ये मात्र एक् सर्जरी नहि थि, बल्कि एक् स्त्री कां अपनी भाग्य सें लिया गय़ा बदला थां।
उसे मौसाजी केँ प्रति एक् अजीब सां सम्मान महसूस हुआ कि उन्होंने अपनी पत्नि कि खुशी केँ लिए इतनाबड़ा समझौता किया। संग हि, उसे कंचन मासीअब औऱ भि ज़्यादा रहस्यमयी औऱ 'हॉट' लगने लगीं।
अब आर्यन केँ मन मे कोई झेंप नहि थि। उसेलगा कि वो किसीगलत चीज़ केँ संग नहि हैं, बल्कि वो एक् ऐसी महिला केँ संग हैं जिसने अपनी कमियों कों अपनी सबसेबड़ी ताकतबना लिया हैं।
कंचन नें अपनीकमर थोड़ीऊपर उठाई औऱ आर्यन कि ओर देखते हुए शरारत सें बोलीं, "अब तूनेसभी जान लिया आर्यन। अब तेरेमन मे कोईबोझ नहि होना चाहिए। अब मे चाहती हूं कि तुँ इस 'अनोखे' बदन कां वोँ इस्तेमाल करे, जिसके लिए मैंने इसे बनाया हैं। बता। क्याँ तूँ रेडी हैं अपनी मासी केँ इसराज कों अपनी रगों मे महसूस करने केँ लिए?"
आर्यन नें बिनाकुछ कहे अपना सफेद अंडरवियर उतारकर फर्श पऱ फेंक दिया। उसका 7 इंच कां फौलाद अब आज़ाद थां औऱ कंचन केँ उस 'बनावटी फौलाद' केँ सामने अपनीचमक बिखेर रहा थां।
कमरे कि हवा मे अबहवस औऱ सन्नाटे कां एक् अजीब संगम थां। आर्यन, जोँ अब तक मानसिक द्वंद्व मे थां, पूरीतरह जिज्ञासा केँ वश मे आँ चुका थां। उसने अपनी धड़कनों कों काबू करतेहुए बहोत हि धीमी औऱ कांपती आवाज़ मे अनुमति मांगी, "मासी। क्याँ मे इसे.छू सकता हूं?"
कंचन केँ चेहरे पर्र एक् विजेता वाली मुस्कान फैल गई। उन्होंने कोई जवाब नहि दिया, बस अपनी रेशमी औऱ गरम हथेली सें आर्यन कि कलाई पकड़ी औऱ उसे घसीटकर सीधे अपनेउस 'अनोखे अंग' पऱ रख दिया।
आर्यन कि उंगलियां जैसे हि उस नग्न सत्य सें टकराईं, उसके पूरे शरीर मे एक् सिहरन दौड़ गई। वो अब किसीडर सें नहि, बल्कि एक् वैज्ञानिक औऱ कामुक 'परीक्षण' कि दृष्टि सें उसे टटोलरहा थां।
आर्यन नें अपनी मुट्ठी उसअंग केँ चारों ओरबंद कि। वो दंगरह गय़ा—उसकी लंबाई औऱ मोटाई बिल्कुल वैसी हि थि जैसा आर्यन कां अपना 7 इंच कां अंग थां। वो पत्थर कि तरह सख्त थां, मगर उसकी त्वचा कां अहसास थोडा अलग थां। वो कुदरती खाल जितनी लचीली नहि थि, बल्कि थोड़ी ज़्यादा तनी हुई औऱ चिकनी थि।
जैसे-जैसे आर्यन अपनी उंगलियों कों उस पऱ ऊपर-नीचे फिरारहा थां, उसेउस 'महीन फर्क' कां अहसास हुआ। उसके अपनेअंग मे नसों कां उभार औऱ खून कां बहाव महसूस होता थां, जबकि कंचन कां येअंग आधुनिक चिकित्सा कां एक् जादू थां—ये बनावटी थां पऱ काम पूरीतरह असलीकर रहा थां। इसमें एक् कृत्रिम ऊष्मा थि जोँ आर्यन केँ हाथ कों जलारही थि।
आर्यन अब गहराई सें उसका विश्लेषण कररहा थां। उसने अपने अँगूठे सें उसकी 'सुपारी' कों सहलाया। कंचन केँ मुँह सें एक् तीखी सिसकी निकली औऱ उन्होंने अपनीकमर ऊपर कि ओर उचका दि। "आह्ह्ह। आर्यन। संभलकर। यह बहोत संवेदनशील हैं, " कंचन नें हाँफते हुएकहा।
पलंग पऱ एक् बहोत हि अजीबमगर कामुक दृश्य थां। आर्यन नग्न बैठा थां, उसका अपना७ इंच कां फौलाद गुस्से मे तनाहुआ थां, औऱ उसकेहाथ मे कंचन कां वैसा हि विशाल अंग थां।
उसेअब एक् अजीब सि शक्ति महसूस हौ रही थि। उसेलग रहा थां कि उसने कंचन कि सबसे बड़ी कमजोरी औऱ ताकत दोनों कों अपनी मुट्ठी मे कैदकर लिया हैं। वो जितना उसे सहलारहा थां, उसका अपनाअंग उतना हि अधिक उत्तेजित हौ रहा थां।
कंचनबैड पर्र लेटी अपनी आँखें चढ़ाए हुएथीं। उन्हें अपनीइस 'शक्ति' कों आर्यन केँ हाथों मे देखकर एक् अलग हि मजामिल रहा थां। वो चाहती थीं कि आर्यन उसे पूरीतरह सें अपना लेँ।
आर्यन अब औऱ भि बेबाक होँ गय़ा। उसने अपनी हथेली मे थोडा थूक लिया औऱ उसे कंचन केँ अंग पऱ मलतेहुए उसे ज़ोर-ज़ोर सें सहलाना शुरुआत किया।
"मासी.यह तौ बिल्कुल मेरे जैसा हैं। बस थोडा 'ज्यादा' सख्त हैं, " आर्यन नें भारी आवाज़ मे कहा।
कंचन नें तड़पकर आर्यन केँ कंधे कों अपनी उंगलियों सें नोच लिया। "तौ फिनदेर किसबात कि हैं? जबसभी कुछदेख लिया औऱ परख लिया। तोँ अब अपनीइस प्यासी मासी कों वोँ सुख क्यूं नहि देता"
कमरे कि हवाअब इतनी भारी हौ चुकी थि कि सांस लेना भि एक् नशा सां लगरहा थां। कंचन मासीअब बैड पऱ उठकरबैठ गईं, उनकी नग्नता औऱ उनका वो 'अनोखा' अंगअब आर्यन केँ सामने पूरीतरह उजागर थां। उन्होंने आर्यन कि गर्दन केँ पीछे अपनेहाथ डाले औऱ उसकी आँखों मे आँखें डालकर एक् ऐसा चुंबन शुरुआत किया जिसमें नं मात्र हवस थि, बल्कि एक् किस्म कि 'जीत' कां अहसास भि थां।
चुंबन केँ दौरान हि, कंचन नें अपनीकमर कों थोड़ाआगे बढ़ाया। देखते हि देखते, कंचन कां बनावटी अंग औऱ आर्यन कां कुदरती ७इंच कां फौलाद एक्-दूसरे केँ आमने-सामने आँ गए। जैसे हि उन दोनों केँ गरम औऱ सख्त सिरों कां स्पर्श हुआ, दोनों केँ जिस्म मे बिजली कां एक् ऐसा झटकालगा जिसने रूह तक कपा दि।
आर्यन केँ लिएये अनुभव किसी 'साइंटिफिक फैंटेसी' जैसा थां। जब उसका अपना मांसल औऱ धड़कता हुआअंग कंचन केँ उस पत्थर जैसे सख्तअंग सें टकराया, तोँ उसे एक् अजीब सां रोमांच महसूस हुआ।
उसे लगा कि वो किसी स्त्री सें नहि, बल्कि एक् ऐसी सत्ता सें मिलरहा हैं जोँ उसके बराबर कि ताकत रखती हैं। वो 'सर्द' औऱ 'गरम' कां संगम उसकी नसों मे आगलगा रहा थां। उसे अपनी मर्दानगी पऱ गर्व भि हौ रहा थां औऱ कंचन कि इस कृत्रिम शक्ति केँ प्रति एक् गहरा आकर्षण भि। जब वो अपनेअंग कों कंचन केँ अंग केँ ऊपर-नीचे रगड़रहा थां, तोँ उसेलग रहा थां जैसेदो तलवारें म्यान मे जाने केँ लिएआपस मे टकरारही हों।
कंचन केँ लिएये वो पल थां जिसके लिए उन्होंने सालों इंतजार किया थां। उन्होंने अपनी सर्जरी केँ बादकई ड्रीम्स देखे थें, मगर एक् जवान औऱ ताकतवर मर्द केँ असलीअंग कां स्पर्श उनकेअंग केँ लिए एक् नई अग्निपरीक्षा जैसा थां।
जैसे हि आर्यन कां ७इंच कां गरम फौलाद उनकेअंग कि खाल सें रगड़ खाया, कंचन केँ मुँह सें चुंबन केँ बीच हि एक् दबी हुइ चीख निकली। उन्हें महसूस हुआ कि उनकी 'मशीनी मर्दानगी' कों अब एक् 'असली चुनौती' मिलरही हैं। आर्यन केँ अंग कि गर्मी औऱ उसकी धड़कन उनके बनावटी अंग मे भि संवेदनाएं पैदाकर रही थि। उन्हें लगरहा थां कि वेअब मात्र एक् महिला नहि रहीं, वे एक् ऐसी योद्धा बन गई हें जौ एक् शेर कों अपनी बाहों मे जकड़ेहुए हैं।
दोनों नें एक्-दूसरे केँ अंगों कों अपनी जांघों केँ बीचदबा लिया औऱ आपस मे रगड़ना शुरुआत किया।
कमरे मे उनदो सख्त अंगों केँ टकराने कि 'चप-चप' कि आवाज़ गूँजने लगी। ये आवाज़ अंजलि केँ संग होने वाले मिलन सें बिल्कुल अलग थि। यहा मांस सें मांस नहि टकरारहा थां, बल्कि मांस सें फौलाद कां घर्षण होँ रहा थां।
कंचन नें आर्यन केँ कान केँ पासआकर भारी आवाज़ मे कहा, "महसूस कररहा हैं आर्यन? देख, मेरायह हिस्सा तेरे हिस्से कों केसेचूम रहा हैं। हम् दोनों आज एक् हि सिक्के केँ दो पहलूबन गए हें। "
आर्यन नें कंचन केँ स्तनों कों पीछे सें भींचते हुए अपनीकमर कों औऱ तेज़ी सें हिलाया। उसेअब फर्कसमझ नहि आँ रहा थां कि कौन सां अंग उसका हैं औऱ कौन सां कंचन कां। उसेबस एक् अनंतसुख महसूस हौ रहा थां जोँ उसे एक् नई दुनिया कि सैरकरा रहा थां।
चुंबन कां नशा औऱ दोनों अंगों केँ घर्षण नें कंचन कों पूरीतरह सें उत्तेजना केँ उस मोड़ पऱ पहुंचा दिया थां जहाँअब 'इंतजार' मुमकिन नहि थां। कंचन नें अपनी एक् हि मुट्ठी मे आर्यन केँ कुदरती ७इंच केँ फौलाद औऱ अपने बनावटी अंग कों एक् संग जकड़ लिया औऱ उन्हें आपस मे रगड़ते हुए आर्यन कि आँखों मे झाँका।
उनकी सांसें उखड़रही थीं। उन्होंने भारी आवाज़ मे फुसफुसाते हुए पूछा, "आर्यन। अहह.घऱ मे लुब्रिकेशन पड़ा हैं क्याँ? मुझेआज बहोत गहरा उतरना हैं."
आर्यन मदहोशी कि हालत मे पलंग सें उठा। उसका७ इंच कां अंगहवा मे गर्व सें तनाहुआ थां। वो हॉल कि तरफ भागा जहाँ उसकेबैग मे वो लुब्रिकेंट पड़ा थां जिसे वो अक्सर अंजलि केँ संग इस्तेमाल करता थां। बैग सें जेल कि बोतल निकालकर जब वो वापस बेडरूम मे घुसा, तौ सामने कां नज़ारा देखकर उसकेकदम ठिठकगए।
कंचन मासीअब खाट केँ बीचों-बीच पीठ केँ बल लेटीथीं। उन्होंने अपनी गोरी औऱ सुडौल टांगों कों फैलाकर घुटनों सें मोड़ लिया थां, जिससे उनका वो 'अनोखा' अंगऊपर कि ओर चुनौती देताहुआ तन गय़ा थां। ये एक् पारंपरिक मिशनरी पोजीशन थि, मगरआज ये 'अनोखी' होने वाली थि क्योंकि नीचे लेटी हुई महिला केँ पास भि एक् 'हथियार' थां।
आर्यन खाट पर्र उनके घुटनों केँ बीचबैठ गय़ा। उसने लुब्रिकेंट कि बोतल खोली औऱ ढेर सारा ठंडा, चिकना जेल अपनी हथेली पर्र लिया। उसने पहले कंचन केँ उस बनावटी अंग कों जड़ सें लेकर सिरे तक उसजेल सें सराबोर कर दिया औऱ फिनवही चिकनाहट अपने७ इंच केँ फौलाद पर्र मली।
आर्यन धीरे-धीरे सें कंचन केँ ऊपर झुका। अब उसका पूरावजन कंचन केँ कोमलबदन पर्र थां।
जैसे हि आर्यन नें अपने चिकने अंग कों कंचन केँ चिकने अंग केँ समानांतर (Parallel) रखा औऱ मिशनरी पोजीशन मे उन दोनों कों आपस मे सटाया, उसे एक् अविश्वसनीय फिसलन कां अनुभव हुआ। लुब्रिकेंट कि वजह सें अबवे दोनों अंग एक्-दूसरे केँ ऊपर बिना किसी रुकावट केँ फिसलरहे थें। आर्यन नें अपनी बाहें कंचन केँ कंधों केँ नीचे डालीं औऱ अपनीकमर केँ झटकों सें उन दोनों अंगों कों आपस मे रगड़ना शुरुआत किया।
कंचन नें नीचे सें अपनीकमर कों ऊपर कि ओर धक्का देना शुरुआत किया। जेल कि चिकनाहट औऱ आर्यन केँ ७इंच केँ भारी दबाव नें उनके बनावटी अंग कि संवेदनाओं कों जगा दिया थां। उन्हें ऐसालग रहा थां जैसेदो गरम लोहे कि छड़ें एक्-दूसरे मे समाने कि कोशिश कररही हों। उन्होंने अपनी टांगें आर्यन कि कमर पऱ कसलीं ताकि घर्षण औऱ भि गहरा हौ सके।
पूरे कमरे मे लुब्रिकेंट कि वजह सें होने वाली 'चप-चप' कि गीली आवाज़ें गूँजरही थीं। आर्यन कंचन केँ कानों मे अपनी भारी सांसें छोड़रहा थां। "मासी.यह अहसास। यह तौ पागलकर देने वाला हैं!"
कंचन नें अपनी आँखें बंदकर लीं औऱ आर्यन कि पीठ पर्र अपने नाखून गड़ादिए। "हाँ आर्यन। औऱ ज़ोर सें। मुझे महसूस होनेदे कि तुँ मुझसे कितना अधिक शक्तिशाली हैं!"
इस मिशनरी पोजीशन मे, कंचन कां अंग आर्यन केँ पेट औऱ उसकेअंग केँ बीच दबकर बुरीतरह रगड़खा रहा थां। ये एक् ऐसा संगम थां जहाँ मर्द औऱ महिला केँ पारंपरिक मायने समाप्त होँ चुके थें औऱ मात्र दो प्यासे बदन एक्-दूसरे कि आग मे जलरहे थें।
कमरे कि हवाअब हवस केँ भारीपन सें जैसेजम गई थि। कंचन कि आँखों मे अब ममता याँ शिष्टाचार कां एक् कतरा भि नहि बचा थां, वहा केवल एक् 'हंटर' कि भूख थि। उसने आर्यन कि आँखों मे झाँकते हुए एक् ऐसी मुस्कान दि, जिससे आर्यन कि रीढ़ कि हड्डी मे सिहरन दौड़ गई।
"आर्यन। अब तक तौ तूने मात्र खिलौनों सें खेला हैं, " कंचन नें भारी औऱ गहरी आवाज़ मे कहा, "अब देख कि तेरीयह मासी तेरी मर्द केसे बनाती हैं। रेडी होँ जा। क्योंकि अब वापसी कां कोई मार्ग नहि हैं। "
आर्यन अभि समझ हि नहि पाया थां कि मासी कां 'असलीखेल' क्याँ हैं, तब तक कंचन नें बैड पऱ अपनी पोजीशन बदल दि। उसने आर्यन कों अपनीओर खींचा औऱ लुब्रिकेंट कि बोतल उठाकर उसका ढक्कन खोल दिया।
कंचन नें ढेर सारा पारदर्शी, गाढ़ा औऱ चिपचिपा जेल अपनी हथेली मे लिया। उसने पहलेउसे आर्यन केँ 7 इंच केँ खंभे पर्र ऊपर सें नीचे तक ऐसेमला कि उसका वो फौलाद कांच कि तरह चमकने लगा। फिन, उसने अपनी टांगें हवा मे उठाईं औऱ अपनी उंगलियों सें अपने गुदा दरवाज़ा केँ गुलाबी औऱ संकीर्ण छेद पऱ उस लुब्रिकेंट कि मोटीपरत चढ़ा दि।
आर्यन हक्का-बक्का रह गय़ा। उसनेकभी ड्रीम्स मे भि नहि सोचा थां कि कंचन मासीउसे उस रास्ते पऱ लें जाएँगी जहाँ सें केवल'परम सुख' औऱ 'पाप' कां मार्ग गुजरता हैं। कंचन नें स्वयं अपनेहाथ सें आर्यन केँ धधकते हुए मूसल कों पकड़ा औऱ उसे अपनेउस तंग औऱ मखमली छेद केँ मुहाने पर्र 'सेट'कर दिया।
आर्यन केँ लिएये अनुभव इतनानया औऱ इतना तीव्र थां कि उसकी साँसें रुकगईं। जैसे हि उसकेअंग कि सुपारी नें कंचन केँ उस सख्त औऱ संकरे दरवाज़ा कों छुआ, उसे लगा कि उसने किसीगरम अंगीठी मे कदमरख दिया हैं।
"आह्ह्ह मासी.यह। यह बहोत तंग हैं, " आर्यन केँ मुँह सें सिसकी निकली। जैसे हि उसने थोडा दबाव बनाया, उसे कंचन केँ जिस्म कि वो अद्भुत कसावट महसूस हुइ जोँ उसकी मम्मी अंजलि केँ पास भि नहि थि। कंचन कां वो छेद किसीगरम मखमली सुरंग कि तरह उसके 7 इंच केँ अंग कों निगलने लगा। लुब्रिकेंट कि वजह सें घर्षण तौ कम थां, मगरउस रास्ते कि संकीर्णता आर्यन केँ अंग कि नसों कों फाड़ने केँ लिए बहुत थि।
कंचन नें अपने दाँत भींचलिए औऱ पलंग कि चादर कों मुट्ठी मे जकड़ लिया। उसका वो 'बनावटी अंग'हवा मे तेज़ी सें थिरकरहा थां। "डालदे आर्यन। पूरा अंदर उतारदे। अपनीइस मासी कि हस्ती मिटादे आज!" उसने एक् गहरीअहह भरतेहुए अपनीकमर कों ऊपर कि ओर उचकाया, जिससे आर्यन कां अंगआधा अंदरसमा गय़ा।
आर्यन अब बेकाबू हौ चुका थां। उस संकरे रास्ते कि गर्मी नें उसके दिमाग़ केँ सारे तंतुजला दिए थें। उसने कंचन केँ दोनों घुटनों कों पकड़कर अपने कंधों तक खींच लिया औऱ अपनी पूरी ताकत सें एक् प्रचंड धक्का मारा।
'प्लक' कि एक् गीली आवाज़ केँ संग आर्यन कां पूरा 7 इंच कां फौलाद कंचन कि गहराइयों मे दफन होँ गय़ा। आर्यन कों लगा जैसेउसे जन्नत मिल गई हौ। कंचन कि आँखेऊपर चढ़गईं औऱ उसके मुँह सें एक् लंबी, दर्दभरी मगर सुखदायक चीख निकली।
अब कमरे मे केवल लुब्रिकेंट कि 'चप-चप। थप-थप' कि आवाज़ें गूँजरही थीं। आर्यन किसी पागल सांड कि तरह कंचन केँ उस पिछले दरवाज़ा कों रौंदरहा थां। कंचन कां वो बनावटी अंगहर झटके केँ संग आर्यन केँ पेट सें टकरारहा थां, जिससे एक् दोहरी उत्तेजना कां माहौल बन गय़ा थां।
"तूँ हि मेरा मर्द हैं आर्यन। आह्ह्ह। मार औऱ ज़ोर सें मार!" कंचन कि सिसकारियाँ अब चीखों मे बदलरही थीं, औऱ आर्यन अपनी मर्दानगी कां सबसे बड़ा झंडाआज कंचन केँ उस किले मे गाड़ चुका थां।
कमरे कि दीवारों नें शायद हि कभीऐसी चीखें औऱ ऐसा जुनून सुना होगा। कंचन मासी, जौ अब तक इसखेल कि सूत्रधार बनी हुईँ थीं, अब स्वयं उसआग मे झुलसरही थीं जिसे उन्होंने हि भड़काया थां। आर्यन कां 7 इंच कां मोटा फौलाद जब उनकेउस तंग औऱ अनछुए पिछले दरवाज़ा कि दीवारों कों चीरता हुआ अंदर धंसा, तोँ वक्त जैसे वहींठहर गय़ा।
कंचन कि चीखें अब बेडरूम कि खामोशी कों चीररही थीं। उनकेलिए ये अनुभव किसी मीठेज़हर जैसा थां।
कंचन केँ पति कां अंगकभी भि आर्यन जैसा विशाल औऱ आक्रामक नहि रहा थां। आजजब आर्यन कां वो मूसल जैसाअंग उनके गुदा रास्ता कि एक्-एक् मांसपेशी कों घसीटकर अंदरसमा रहा थां, तौ उन्हें महसूस हुआ कि 'असली मर्दानगी' कां बोझ क्याँ होता हैं। दर्द इतना थां कि उनकी आँखों सें पानी निकलआया, मगर वो दर्द एक् अकल्पनीय रोमांच मे लिपटा हुआ थां। उन्हें लगरहा थां जैसे उनका जिस्म पीछे सें दो हिस्सों मे फट जाएगा, फिन भि वो अपनीकमर कों ऊपर उचकाकर आर्यन कों औऱ भि गहराई मे आमंत्रित कररही थीं।
आर्यन केँ लिएये उसकी ज़िंदगी कां पहला 'बैकडोर' अनुभव थां। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि वो स्वर्ग मे हैं याँ किसीऐसी तंग सुरंग मे जहाँ सें निकलना नामुमकिन हैं। कंचन केँ छेद कि कसावट इतनी प्रचंड औऱ तंग थि कि आर्यन कों लगरहा थां कि उसकाअंग किसीगरम प्रेस मे दबरहा हैं। उस खिंचाव नें उसके पौरुष कों अपनी सीमाओं तक खींच दिया थां।
आर्यन अब किसी पागल शिकारी कि तरह कंचन केँ ऊपरचढ़ा हुआ थां। उत्तेजना कां स्तर इतनाबढ़ गय़ा थां कि उसनेहोश खोदिए थें।
जहाँ नीचे आर्यन कां फौलाद कंचन कि गहराइयों कों नापरहा थां, वहीं उसका एक् हाथ कंचन केँ उस नग्न औऱ सख्त बनावटी अंग पर्र जा टिका। उसनेउसे जड़ सें पकड़ा औऱ अपनीकमर केँ झटकों कि लय केँ संग हि उसे ऊपर-नीचे करना शुरुआत कर दिया।
ये दृश्य कामुकता कि सारी हदेंपार कर चुका थां। आर्यन कंचन केँ पिछले दरवाज़ा कों रौंदरहा थां औऱ संग हि उसके 'मर्दाना राज' कों अपनी मुट्ठी मे भींचकर उसेचरम कि ओर लेँ जारहा थां। कंचन कां वो अंगहर झटके केँ संग आर्यन केँ पेट सें रगड़खा रहा थां, जिससे घर्षण औऱ भि बढ़ गय़ा थां।
कमरे मे लुब्रिकेंट कि 'चप-चप' औऱ शरीरों केँ टकराने कि 'थप-थप' केँ संग कंचन कि सिसकारियां मिलकर एक् मदहोश म्यूज़िक रचरही थीं। दोनों केँ बदन पसीने सें ऐसे लथपथ थें जैसे अभि-अभि बारिश मे भीगकर आएहों।
कंचन नें अपनी गर्दन पीछे कि ओर मोड़ी, उनके चेहरे पर्र दर्द औऱ शर्म कि स्थान अब मात्र एक् पागलपन भरीहवस थि। "आर्यन। आह्ह्ह। मत रुकना। मुझे समाप्त करदे! तेरीयह कसावट। यह गहराई। मुझे पागलकर देगी!"
आर्यन नें अपने दांत भींचलिए, उसकी आँखों केँ सामने अंधेरा छानेलगा थां। कंचन केँ उसतंग रास्ते कि गर्मी नें उसके 7 इंच केँ मूसल कों फटने कि कगार पऱ पहुंचा दिया थां। वो अब छोटे औऱ तेज़ धक्के मारने लगा, हर धक्के केँ संग कंचन कां पूराबदन खाट पर्र आगे कि ओर खिसक जाता।
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