I Am Murim Lord ( Reincarnation ) – New Episode
chapter 12
विराज घऱ केँ बाहर् खरा थां god नें एक् मोक्का दिया थां अपनी गलतीसही करने केँ लिये विराज केँ संग सुरु सें अब तक जोँ हुआ विराज केँ लिये भि यकीन करना मुश्किल थां
पऱ जौ भि हुआ थां विराज जनता थां सभीसच हैं
विराज आसुसाफ कर अपने आप् कों नॉर्मल करता हैं औऱ एक् गहरी सासू माँ लेता हैं औऱ जोर सें छोर अंदर जाते हुवेमन मे - आज अभि सें सभीसही करना हैं
विराज आगन मे आता हैं अंदर इमोसन छुपाये हुवे अपनेघऱ वहीआगन कमरेसभी वैसा हि देख विराज इमोसनल केँ संग बहुतखुश भि थां
विराज शिवानी केँ कमरे मे जाता हैं शिवानी अपनी बेटी कों दूध पिलारही होती हैं बैठ केँ मगर सारी सें सभीढका हुआ थां तोँ विराज कुछदेख नहीं पाता
शिवानी विराज कों देख - कियाबात हैं
विराज शिवानी कों कुछ सकेंद् देखता हैं इमोसन अंदर दबाये शिवानी केँ पासबैठ जाता हैं सांत
शिवानी भि विराज कों गोर सें देखती हैं विराज शिवानी कों देख मुस्कुराते हुवे - दिदी मेने अपने आप् कों आज अभि सें बदलने कां फैसला क्याँ हैं
शिवानी नॉर्मल होके - अच्छा समझ गई तुम्हारी तरफ जौ करना हैं कर
असल मे विराज नें कईबार यहीबात कही थि औऱ अगले हि दिन विराज अपनी बातों मे टिकता नहीं थां इस लिये शिवानी विराज कों उसकी बातों कों सिर्यस् नहीं लें रही थि जोकि विराज समझ गय़ा थां
विराज - आपको मेरी बातों पे भरोसा नहीं हौ रहा थां
शिवानी विराज कों देख - सहीकहा
विराज - अगर मे इससच मे अपने आप् कों बदलदु तोँ आप् सभी कि उमीद भरोसा कों जौ तोरा उसपेखरा उतरु तौ
शिवानी थोरा सिर्यस् विराज कों देख - मुझेमा बापू किसी कों भि तुमपे भरोसा नहींसमझ गय़ा फिन भि अगर तुम् जोँ केहरहे होँ वैसा करते होँ तौ तु जोँ मानेगा मेरेपास हुआ दूंगी
विराज मुस्कुराते हुवे अपना हाँथआगे कर - वादा करिये जोँ अपनेकहा मे जौ मांगूगा देगी
शिवानी हैरान होती हैं फिन विराज केँ हाथो पे हाथरख विराज कों देख - वादा
विराज शिवानी केँ गाल पे किस करते हुवे - इसबार आपका भइया किसी कों निरास नहीं करेगा
शिवानी एकदमशोक गाल पे हाथरख विराज कों देखती हैं विराज मुस्कुराते हुवे कमरे सें निकलआता हैं शिवानी अपनेगाल पे हाथरखे मन मे हैरान होके - आज विराज मुझे बदला बदला सां लगा क्याँ सच मे नहीं नहीं जोँ बदल नहीं सकता देख्ना कल वैसा हि होगा
विराज माला केँ कमरे मे आता हैं मालासो रही थि तोँ विराज घऱ सें बाहर् आता हैं औऱ चलते हुवे एक् पैर केँ नीचे अकेले बैठ सांतमन सें सोचने लग जाता हैं
विराज मन मे - मेरेपास पैसों कि कमी नहीं जितना चाहे सोना चांदी मुरिम दुनिया सें ला सकताहु मगर एकदम सें मे सभी कों पैसे दिखाऊँगा बराघऱ चाहे जौ लूंगा सभी समझेगे मेनेकोई चोरी कि हैं तोँ अब केसे क्याँ करू ताकि किसी कों सक् नां हौ औऱ मेराकाम भि हौ जाये
विराज सांतमन मे प्लान बनाने लगता हैं विराज कां सोचना सही थां एकदम सें विराज पैसे वालाबन जायेगा तोँ सभी विराज कों गलत हि समझ लेगे
शाम अंधेरा होँ चुका थां विराज घऱआता हैं आगन मे शिवानी खानां बनारही थि शिवानी कां बेटा आदीखेल रहा थां औऱ शिवानी कि बेटी आशी कों मालागोद मे लिये खटिये पे बैठी हुईँ थि रमनघऱ नहींआया थां शिवानी माला सें बातकर रही थि
विराज जबआगन मे आता हैं तौ आदि विराज कों देख मुस्कुराते हस्ते हुवेखरा होके मामू मामू करके चलते हुवे विराज केँ पास जाने लगता हैं शिवानी माला देखने लगते हैं
विराज भि प्रेम सें आदि कों गोद मे उठा केँ गाल पे किस करते हुवे - मेरा प्यारा भांजा
शिवानी विराज कां ताना मारते हुवे - प्यारा भांजे कों आज तक अपने पैसे सें कुछ खरीदकर दिया भि हैं एक् चॉकलेट भि स्वयं तुझेही खर्चा देना परता हैं हमे
माला - जानेदे देती कहते कहते मे थक गई हमारी कोई चिंता परवाह हैं हि नहींउसे
विराज अपनीमा बेहन कों देखता हैं औऱ समझ सकता थां जब तक वोँ स्वयं कुछ करने नहीं लगता उसकीमा बेहनऐसी हि बाते औऱ बेवहार करते रहेगे
विराज माला केँ पासबैठ आशी कों देख प्रेम करते हुवे - मेरी प्यारी भांजी कितनी कियुत् हैं तेरे मामू तुम्हे सभी देगेघऱ गारी जोँ मेरी भांजी कों चाहिये होगा
शिवानी मुहबना केँ - बरीबरी बाते
विराज शिवानी कों देख - दिदी मेने आपको क्याँ बोला थां हमारी सर्त भि लगी हैं नां
शिवानी विराज कों देख - हायाद हैं
माला विराज कों देख - बताया मुझे बेटी नें चल मे भि वादा करतीहु अगर तुम् नें जोँ कहा अपने आप् कों बदल दिखाया तौ जौ मांगेगा दूंगी
विराज मुस्कुराते हुवे अपनाहाथ आगेकर माला कों देख - वादा
माला विराज केँ हाथ पे हाथरख - वादा
तभीरमन भि आँ जाता हैं
रमनआते हुवे - किसचीज कां वादा हौ रहा हैं
शिवानी सारी बातेबता देती हैं रमन हस्ते हुवे - फिन तुम् सभीइस नालायक मे बिस्वास करनेलगे फिन देख्ना कल हि उमीदटूट जायेगी तुम् दोनो कि
विराज रमन कों देख - इसबार नहीं टूटेगी पिताजी
रमन मुस्कुराते हुवे - अगरऐसा हैं तोँ मे भि वादा करताहु जोँ मांगेगा मेरे अंदरहुआ दूंगा
विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं फिन
विराज मन मे - नहीं चाहिये मुझे मर्द कि गांड मारने कां कोईशोक नहीं हैं
माला - लास्ट एक् लास्ट बार हैं इसबार भि उमीद तोरी, माला इमोसनल होके, तोँ देख लेना
विराज माला कों गलेलगा केँ - नहीं टोराउंगा
खानां तैयार होता हैं फिनसब खानां खानेबैठ जाते हैं
विराज एक् बात बोलता हैं जिसेसुन माला शिवानी कां खानां गले मे फंस जाता हैं रमन केँ मुह सें पानी निकलआता हैं
विराज खानां खाते हुवे - मेरा एक् साथी सेहर मे काम करता हैं मे उसकेपास जारहा हु कमाने
बसयही बात शिवानी माला केँ गले मे खानां अटका देती हैं रमन पानीपी रहा थां मुह सें निकलआता हैं सबसंग संग विराज कों देखजोर सें - कियाकहा तुमने
विराज तीनों कों देख - इतना चिल्ला कियुरहे हैं
माला विराज केँ सर दबाते हुवे - बेटा तुठीक तोँ हैं नाँ
शिवानी हैरान होके - तूने जोँ कहासच हैं
विराज - हा एकदमसच कल मे सुभह निकल जाऊंगा औऱ हा मे मजाक तौ बिल्कुल नहींकर रहा
शिवानी रमन मालासभी शोक थें यकीन नहींकर पारहे थें पर्र विराज केँ सिर्यस् फेस कों देखसभी कों नाँ चाहते यकीन करना परता हैं
विराज - मानता हु मे गलत रास्ते पे चला गय़ा आप् लोगो कि उमीद तोरी भरोसा तोराकई बार बातों सें ठेस पहुचाई दर्द दिया पर्र अब मे समझ गय़ा हु मे गलत थां मगरइस बार मे सच मे बदल केँ दिखाऊँगा
सांती छा जाती हैं शिवानी रमन माला विराज कों देखते रहते हैं
विराज - खानां खाइये औऱ माआज आप् मेरेसंग सोयेगी
मालाहोस मे आके - हाहाठीक हैं बेटा
सभी सांत खानां खाने लगते हैं मगरबार बार विराज कों देखते रहते
विराज सभीदेख रहा थां समझरहा थां भरोसा एक् बातकोई तोरदे तौ लोग उसपे जल्द बिस्वास नहीं करते दुबारा
खानां पीना होने केँ बाद विराज पलंग पे लेतमन मे - यही मेरा प्लान हैं एक् सालघऱ सें दूर रहूँगा फिनघऱ आऊंगा इतने पैसेबता हि सकताहु जिसमे एक् बरी रासन दुकान खोलसकु धीरे-धीरे धीरे-धीरे करना होगाफिन जाकेघऱ गारी एक् अच्छी लाइफ सुरु होगीसभी कों लगेगा मेने मेहनत सें सभी क्याँ हैं
विराज नें सारा प्लान बना लिया थां सभी सें दूर जानां तोँ नहीं चाहता थां इतनी जल्दमगर यह जरूरी थां
शिवानी आती हैं विराज केँ पासबैठ - क्याँ सच मे तुकल जाने वाला हैं
विराज उठबैठ शिवानी कों देख - हा दिदी मेने बहुत वक्त बेकार मे बर्बाद कर दि अब आप् लोगो केँ लिये अपने लियेकुछ करना हैं आप् सभी कि उमीद भरोसे कों जितना हैं उसपेखरा उतरना हैं
शिवानी कों यकीन नहीं तौ रहा थां उसका भइयासच मे एकदमबदल गय़ा हैं औऱ सिर्यस् भि हैं
शिवानी मुस्कुराते हुवे - सुनअगर यहसच हैं कलजारहा हैं तौ अच्छी बात हैं चल अच्छा हैं समझ तौ आयादेर सें हि सही
विराज शिवानी केँ चुचे कों देखता हैं नाइटी मे साफ चुचे टाइटखरे दिखाई देरहे थें निपल तोँ सुई जैसेखरे थें
विराज शिवानी कों देख - दिदी वादायाद रखना
शिवानी मुस्कुराते हुवे - मे तुम्हारी तरफ क्याँ हि दे सकतीहु मे तौ तुमसे उमीदलगा रहीहु मेरा भइया कमायेंगा तौ मुझे भि सारीकुछ खरीद देगा
विराज - चिंता मत करिये आते वक्तसभी केँ कियेकुछ नाँ कुछ लेके आऊँगा वैसे दिदी आप् बहुत सुंदर लगरही हैं
शिवानी हैरान शोक विराज कों देखने लगती हैं असल मे विराज नें पहलेकभी शिवानी कि तारीफ नहीं कि थि मगरआज विराज नें किया तोँ शिवानी कां शोक होना लाजमी थां
शिवानी हैरान विराज कों देख - छोटेतु ठीक तौ हैं आज अजीब हरकतकर रहा हैं पहले तोँ कभी तारीफ नहीं कि आज केसे
विराज शिवानी कों देख - वोँ दिदी मे तोँ अपने मे खोया रहता थां नाँ मगरअब नहींहु आजगोर सें ध्यान सें देखा तौ मुह
शिवानी विराज कों देखती हैं फिन सर्मा जाता हैं चेहरा लाल हौ जाता हैं
विराज केँ मुह सें तारीफ सुन शिवानी कों अच्छा लगता हैं
शिवानी नॉर्मल होके - हुहा तोँ पता हैं मुझे मे बहुत हसीनहु
विराज हस्ते हुवे - हासमझ गय़ा
शिवानी खरी होके - अच्छा मे जारही हु तुम्हारी भांजी भांजा अकेले हैं
विराज - जी दिदी
शिवानी जाने लगती हैं मगर विराज कि नजर शिवानी केँ मस्त गांड पे थें जौ शिवानी केँ चलने सें मस्तहिल ठुमकरहे थें
विराज मन मे - मस्त हैं
मालारमन कमरे मे थें माला नाइटी पहनरही थि रमन माला कों देख - यकीन नहीं होतायह तेरा बिग्रैल लरका एकदम सें बदल केसे गय़ा
मालारमन कि तरफमूर केँ - कहा थां नां एक् एक् जरूर मेरालाल सही रास्ते पे आँ जायेगा
रमन हस्ते हुवे - कहा तौ मेने भि थां मगर अभि भि बिस्वास नहींकर पारहा किया होगाकल जोँ उसनेकहा करे हि नहीं कियुंकी कईबार उसनेकहा मगर क्याँ नहीं हैं
मालारमन कों देख - नहीं मुझे नहीं लगताइस बार विराज सच मे बदल गय़ा हैं अच्छा अब मे जारही हु अपने बेटे केँ पास
रमन मुस्कुराते - जाओजाओ प्रेम दुलार दोकलचला जोँ जायेगा
माला - बहुत दर्द दिया उमीद भरोसा तोरामगर अबअगर सच मे विराज बदल गय़ा हैं कलचला जायेगा तौ दिल दुःखी हौ रहा हैं सोच हैं
रमन - तुम् हि एक् मा नहींकई बच्चे गावछोर सहर कमाने जाते हैं अबजाओ मुझे भि नींद आँ रही हैं
मालामुह बना केँ - हाहाजा रहीहु
माला विराज केँ कमरे मे आती हैं विराज अपनीमा कों नाइटी मे देखता हि रह जाता हैं हल्की नाइटी थि दोनो चुचे मस्तखरे साफदिख रहे थां
विराज केँ पास मालाआके लेत जाती हैं दोनोमा बेटे कां फेस एक् दूसरे केँ आमने सामने थें दोनो एक् दूसरे कों देखने लगते हैं बीच मे बस थोरागेप थां
माला विराज कों देख - क्याँ सच मे तुकलचला जायेगा
विराज गोर सें अपनी सुंदर मा केँ चेहरे कों देख - आपकीशपथ
माला पूरी हैरान विराज कों देखती रहती हैं माला नें कईबार विराज कों अपनीशपथ खाने कों कहा थां मगर विराज कभी नहीं खाता थां मगरआज खाया तोँ माला कों अबसाफ समझ आँ गय़ा थां अब उसका विराज सच मे बदल गय़ा हैं औऱ कलचला जायेगा
माला इमोसनल होके विराज केँ चेहरे पे हाथ फेरते हुवे - मे आज बहुतखुश हु बेटा देर सवेर हि सही मेरालाल वापस आँ गय़ा
विराज इमोसनल होँ जाता हैं
विराज इमोसनल होके - माफ करनामा मेने आपकादिल दुखाया आपकी उमीद भरोसे कों तोरा आपसे गुस्से सें बात कि
विराज केँ आखो सें आसु निकल परते हैं
माला विराज केँ आसुसाफ करते हुवे - फर्क नहीं परता मुझे तौ बस मेरा बेटा मिल गय़ा पुरानां वालाउसी सें खुशहु
माला विराज कों सीने सें लगा लेती हैं विराज भि माला सें चिपक माला कों बाहों मे लेके - मा वादा हैं जल्द हि आपकोबरे घऱ मे रखूँगा
माला हस्ते हुवे - जरूर मेरेलाल
विराज कुछदेर मे हि चैन कि नींद मे खो जाता हैं माला विराज केँ चेहरे कों देखते हुवेमन मे - एकदम सें क्याँ हुआ जौ विराज बदल गय़ा
आज केँ लिये इतना हि
I Am Murim Lord ( Reincarnation ) – New Episode
chapter 13
सुभह माला कि नींद खुलती हैं तोँ देखती हैं विराज उसे बाहों मे लेके पुरा चिपका हुआ हैं टांगे माला केँ ऊपर थि चेहरा माला केँ चुचे केँ बीच चिपका हुआ
माला विराज कों देख मुस्कुराते हुवे - मुझे बाहों मे लेकेऐसे सोया हैं जैसे मे उसकी पत्नि हुउमर भि तौ होँ गई हैं जल्द हि सादी करनी परेगी
माला विराज केँ गाल पे प्रेम सें किस करती हैं फिन धीरे-धीरे सें खाट सें उठखेत तरफ जाती हैं फिनआती नहाती हैं शिवानी भि उठकरनहा धोके तैयार होती हैं फिन खानां बनाने मे लग जाती हैं
मालाआगन मे बैठी हुई थि रमन दातून करते हुवे माला कों देख मुस्कुराते हुवे - रात बहुत अच्छी नींदआई होगी कियु
मालारमन कों देख - कियु नहीं आयेगी अपने बेटे केँ संगचैन वाली नींदआई समझगये
रमन मुस्कुराते हुवे - अरे बाबावही तौ केहरहा थां
शिवानी रमन माला कों देख - मा पिताजी आपको लगता हैं विराज आजसच मे जायेगा कमाने वादा कसमे तौ खायेमगर पहले उसनेकई बार हमारा भरोसा तोरा हैं
रमन माला सांत शिवानी कों देखने लगते हैं कोईकुछ बोलता विराज कमरे सें बाहर् आते हुवे - भरोसा कोईजब एक् बार नहींकई बारतोर देता हैं तौ उस इंसान पे फिन सें भरोसा करना बहुत मुश्किल होता हैं दिदी मगर चिंता मत कीजिये 12 बजे केँ बाद आपका छोटा भइया एक् सालबाद हि सभी कों दिखेगा
शिवानी रमन माला हैरान विराज कों देखते हैं क्याँ बोले किसी कों समझ नहीं आँ रहा थां
विराज खेत कि तरफ जाते हुवे - मगर मेने जोँ उमीद भरोसा तोरा हैं उसेफिन हासिल करूँगा
विराज चला जाता हैं मगरसब बहुतशोक मे थें विराज कि हरकत बाते पहले सें बदलानजर आँ रहा थां
रमन माला कों देख - यह हमारा बेटा हि हैं नाँ
माला - तौ औऱ कोन हैं
रमन - नहींबस बदला सां नजर आँ रहा हैं बाते भि बरी अजीब करनेलगा हैं
शिवानी - बापू आपका कहनासही हैं विराज सच मे बदल गय़ा हैं
विराज घऱ सें दूर एक् छोटे पोखर केँ पासबैठ हल्का होतेमन मे - किसी कों अभि भि पुरा बिस्वास नहीं हैं मे बदल गय़ा हुआज जाने वालाहु खैरयह तोँ होना हि थां मगर मेरे जाने केँ बाद बिस्वास होगासभी कों
तभी विराज केँ मन मे एक् बातआती हैं विराज, एक् मिनट मे जाऊंगा कहा करूँगा क्याँ एक् साल तक एक् मिनट मुरिम दुनिया मे चला जाऊंगा एक् सालबाद वापस आँ जाऊंगा हायहसही हैं, तभी विराज कों यादआता हैं एक् महीने बाद हि मुरिम मे जा सकता हैं
विराज मन मे, लगगये मे तौ यहभूल हि गय़ा अब क्याँ करूहा 40 साल मुरिम मे रहा मेने अपनी हि दुनिया नहीं घुमि एक् महीने हर स्थान घूम लेताहु एक् महीने बाद मुरिम एक् महीने अपनी पिर्थ्वी ऐसे हि एक् साल निकल जायेंगे यहसही हैं
विराज नें प्लान बना लिया थां एक् साल केसेकहा निकालना हैं
विराज हल्का होकेघऱ आता हैं नहाता हैं तैयार होता हैं मालारमन शिवानी सांतचुप सभीदेख रहे थें विराज भि किसी कों कुछ नहीं केहता
विराज फिन अपने साथी सें मिलने चला जाता हैं 12 बजने वाले थें कमरे मे माला शिवानी बातेकर रहे थें
शिवानी - देखामा बोला थां 12 बजे जाने वाला हैं अभि तक आया भि नहीं
माला टेंसन मे थि
mala मन मे - क्याँ सच मे मेरालाल नहीं बदला हैं क्याँ फिन हमारी उमीद भरोसे कों तोर देगा
तभी माला शिवानी कों विराज कि आवाज़ सुनाई देती हैं
विराज - मा दिदी पिताजी मे जाने केँ लिये तैयार हु
माला शिवानी रमनआगन मे आते हैं तौ देखते हैं विराज तोँ पूरा तैयार थां बैग लेके जाने केँ लियेरमन माला शिवानी पुरेशोक होँ जाते हैं
माला जल्द सें विराज केँ पासआके कंधे पे हाथरख - बेटा क्याँ सच मे जारहा हैं मुझेलगा औऱ हमनेकोई तैयारी तुम्हारे लियेकुछ बनाया हि नहीं
विराज माला कों देख - मा जनताहु कोईबात नहींसमझ सकताहु
शिवानी विराज केँ पासआके - छोटेहमे यकीन नहीं थां मगरअब हौ गय़ा
विराज सभी कों देख - वक्त हौ गय़ा ट्रेन पकरनी हैं जानां होगा
तभी माला विराज कों एकदम सें गलेलगा केँ रोते हुवे - बेटा माफ करदे तेरी बातो पे कस्मो पे बिस्वास नहीं औऱ अब एकदम सें तुँ सच मे जारहा हैं मेरादिल बहुत दुःखी होँ गय़ा हैं
विराज माला कों बाहों मे लिये - मारोमत मेने बहुत दर्द रोलाया हैं मगरअब केवल खुसिया हि दूंगा
माला विराज केँ चेहरे कों पकरआसु लिये - पहलीबार जारहा हैं अगरदिल नां लगे तौ बिना झिझकघऱ आँ जानां कोईकुछ नहीं बोलेगा
विराज - ठीक हैं मा
विराज मन मे -मा तोँ मा होती हैं कैसा भि बेटा हौ बस चाहती हैं सही सलामत खुशरहे
शिवानी विराज केँ गलेलग - छोटे मुझे भि माफ करदे तेरे पे भरोसा नहीं क्याँ
विराज - दिदी मेने जोँ क्याँ जाहिर हैं
रमन विराज केँ पासआके कंधे पे हाथरख - बेटा खुशी हुई तुम् अपने आप् कों बदल लियेजा अपनी लाइफ कि नई सुरवात करयाद रख हमारे लियेकुछ नां भि करेगा तोँ चलेगा बस अपनी लाइफ केँ लियेकर एक् बाप मा अपने बेटे केँ लियेयही चाहता हैं
विराज भि इमोसनल होके अपने बापू केँ गलेलग जाता हैं विराज फिन अपनीमा दिदी पिताजी कों देखता हैं मालाआज बहुतखुश थि उसका बेटा बदल गय़ा मगर जाने सें दुखी भि थि
आदि चलते हुवे विराज केँ पेरपकर - मामाजी
विराज नीचेआदि कों देखता हैं फिनगोद मे उठा केँ प्रेम सें गाल पे पप्पी लेते हुवे - मेरा प्रेम भांजा तेरे मामाजी जारहे हैं मगर आयेगे तोँ बहुत सारी कॉकलेट कपड़े खिलौने लेके आयेगे
आदि विराज कों देख - मा कॉकलेट खिलौने
विराज मुस्कुराते हुवे - मा मेरे प्यारे भांजे
विराज शिवानी कों देख - मेरीपरी कहा हैं दिदी
शिवानी मुस्कुराते हुवे-सो रही हैं
विराज आदि कों शिवानी कों देता हैं कमरे मे जाता हैं आशीसुई बहुत प्यारी लगरही थि विराज आशी कों प्रेम सें देखता हैं गाल मे पप्पी करके बाहर् आता हैं औऱ फिनसभी घऱ सें बाहर् आते हैं
विराज - मा दिदी बापूजा रहाहु आप् सभी अपना ख्याल रखना
विराज सभी सें आशीर्वाद लेता हैं गले मिलता हैं
माला इमोसनल होके - बेटा अपना ख्याल रखना खानां पीना वक़्त पे खानां
शिवानी - औऱ रोज मोबाइल करते रहनासमझ गय़ा
रमन - हा नहीं तौ तेरीमा कों रात नींद नहीं आयेगी
विराज हस्ते हुवे - ठीक हैं बाबा
विराज फिनसभी कों बायबोल निकल परता हैं
माला विराज कों जातेदेख - हमने यकीन नहीं क्याँ औऱ अबजारहा हैं तोँ दुख होँ रहा हैं मेने अपनेलाल केँ लियेकुछ बनाया भि नहीं नां कपड़े पैक किये
रमन माला केँ कंधे पे हाथरख - सांत हौ जाओ माला विराज बेटा जनता समझता थां वोँ बुरा नहीं मानेगा
शिवानी आदि कों गोद मे लिये - चला गय़ा यकीन नहीं होता lek अब उसके जाने सें दिल दुःखी हौ गय़ा हैं
आदि विराज कों दूर जातेदेख - मामाजी मामाजी
शिवानी आदि कों प्रेम सें - बेटा मामाजी जल्द आँ जायेंगे
विराज मैंनरोड केँ साइडखरा होँ जाता हैं एक् बसआती हैं विराज बैठ जाता हैं कहा जानां हैं विराज कों पता नहींमगर ऐसे हि एक् महीने निकालने थें
घऱ पे सभीकुछ सांत थां आगन मे शिवानी माला खटिये पे बैठे थें अभि भि यकीन नहीं हौ रहा थां विराज चला गय़ा हैं
वही विराज बस सें हि सफर करता रहता हैं कहीउतर गय़ा घूम लियाफिन कोई दूसरी बसनई स्थान ऐसे हि दिन निकलते गये
रात खानां खाते वक्तआगन मे
मालारमन मालासंग बैठेखा रहे थें
शिवानी - मा छोटा तौ सच मे चला गय़ा
माला - हा मेरालाल बदल गय़ा यहदेख बहुतखुश हि मगर उसकेपास नां होने सें दिल बेचैन हैं
रमन - बस भि करोकई लरके हैं जौ घऱमा बाप छोर सेहरकम कररहे हैं
मालारमन कों देख - तोँ क्याँ हा मे अपने बेटे कि चिंता भि नाकरू
रमन - मेनेऐसा तोँ नहींकहा
तभी विराज कां मोबाइल आता हैं माला जल्द सें मोबाइल उठा केँ - हा मेरेलाल कहा पहुंचा कैसा हैं
विराज - सांतमा मे ट्रेन मे बैठ गय़ा हु बाकी मे जब अपनेयार केँ पास पहुँच जाऊंगा तौ उसदिन मोबाइल करूँगा अब रखताहु
शिवानी - ध्यान रखना छोटे
रमन - पहुँचते हि मोबाइल करना
माला - खानां खा लेना औऱ पहुँचे मोबाइल करनासमझ गय़ा
विराज समझ गय़ा मा
मोबाइल कट
3 दिनबाद
विराज हर स्थान घूमता रहा औऱ रात होटल मे रूम लेके रहतादिन इधरउधर स्थान घूमते मजे सें निकाल रहा थां
विराज - तीनदिन हि हुवे हैं अभि एक् सालबाद हि मे मा दिदी बापू केँ सामने जा सकताहु
रात 9 बजरहे थें मालारमन खाट पे लेते हुवे थें
माला - आज हमारा बेटा पहुँच गय़ा होगामगर मोबाइल अभि तक नहींआया
रमन - माला चिंता मुझे भि हैं बाप हु उसका पहलीबार गाव सें हम् सें दूर गय़ा हैं मगर इंतजार कर याँ स्वयं मोबाइल कर लेँ नां
माला मोबाइल उठा केँ - आपनेसही कहा, मगरतभी विराज कां मोबाइल आँ जाता हैं माला जल्द सें मोबाइल उठा केँ, बेटा कैसा हैं पहुँच गय़ा नां
विराज होटल केँ रूम मे लेता - जीमा अच्छे सें पहुँच गय़ा आप् सभी चिंता मतकरो औऱ हा मित्र सें बात कि हैं कल जाकेकाम पे लग जाऊंगा तोँ कलशाम फिन मोबाइल करूँगा आप् नें खानां खा लिया नां
माला - हा बेटा खा लिया तूने
विराज - मेने भि पिताजी मा आप् सभी चिंता मत करना मेरा मे रोज मोबाइल करता रहूँगा
रमन - ठीक हैं बेटा अपना ध्यान रखना
विराज - ठीक हैं मा बापू रखताहु दिदी सें बात करनी हैं फिन सोना भि हैं
माला - ठीक हैं बेटा सफ़र सें करकेथक गय़ा होगा
मोबाइल कट
रमन - अब राहत मिली
मालारमन कों देख - हु
वही शिवानी पलंग पे लेती चूत मे उंगली कररही थि वीडियो कॉलआई पे शिवानी कां पति थां औऱ शिवानी नाइटी उठाये जोरजोर सें उंगली करके सिसकिया लियेजा रही थि शिवानी कां पति वीडियो कॉलआई पे सभीदेख लन्ड हिलारहा थां तभी विराज कां मोबाइल आता हैं
शिवानी - सुनिये छोटे कां मोबाइल आँ रहा हैं बाद मे करेगे
विकी - साले कों गलतसमय पे हि मोबाइल करना थां
शिवानी गुस्से सें - क्याँ बोला
विकी डरते हुवे - कुछ नहींकर लोबात
शिवानी - हु
शिवानी विराज कां मोबाइल उठा केँ - छोटे पहुँच गय़ा नां अच्छे सें
विराज - जी दिदी पहुँच गय़ा अब तौ बिस्वास हौ गय़ा नाँ
शिवानी - माफ करदे भइयाअब बिस्वास हौ गय़ा
विराज - कोईबात नहींमगर वादायाद रखना
शिवानी हस्ते हुवे - याद हैं जोँ मेरेपास होगा जोँ दे सकूँगी मागेगा दूंगी
विराज मन मे - आपकी चूत चाहिये दिदी एक् कोसिस हैं मुरिम सें आने केँ बाद हिम्मत आँ गई पहलेडर लगता थां इस लियेकुछ नहीं क्याँ अब भि डरलगरहा हैं मगर कोसिस करने सें क्याँ जाता हैं मिला तौ ठीक नहीं मिला तौ कोईबात नहीं
विराज - आपकेपास आपके अंदर जौ होगावही मांगूगा अच्छा मेरी प्यारी भांजी भांजे सोगये हैं क्याँ कोई आवाज़ नहीं आँ रही
शिवानी हस्ते हुवे - सहीकहा आहिस्ता सोरहे हैं
विराज - ठीक हैं दिदी थकाहु सोनेजा रहाहु कल मोबाइल करूँगा
शिवानी - ठीक हैं सोजा औऱ हा अपना ख्याल रखना
विराज - जी दिदी
मोबाइल कट
शिवानी फिन विकी कों मोबाइल करती हैं फिन दोनो सुरु होँ जाते हैं
दिन गुजरते जाते हैं विराज रोजरात अपनीमा दिदी पिताजी सें कर करता रहता हैं बाकी केँ दिन मे अच्छी स्थान घूमते निकाल एक् महीने होँ जाते हैं
विराज एक् स्थान खरा थां पार्क मे आसपास कोई नहीं थां विराज पोटलखोल मुरिम दुनिया कां अंदरचला जाता बाहर् आता हैं तौ देखता हैं rin aria बाहर् पैर केँ नीचे कुर्सी पे बैठेजूस पीते बातेकर रहे थें मगर जैसे हि दोनो कि नजर विराज पे जाती हैं दोनो पुरेशोक होँ जाते हैं मगरउसी केँ संग खुशी सें उछलते हुवे तेजी सें भाग विराज केँ गलेलग जाते हैं विराज भि अपनी दोनो पत्नि कों बाहों मे कस लेता हैं
rin विराज कों देखते हुवे - आप् तोँ जल्द अचानक केसे आँ गये
aria - हा अचानक केसे आप् तोँ
विराज पहले दोनो केँ होठ कां रस पिता हैं
विराज दोनो कों देख - चलो धीरे-धीरे बाते करते हैं
तीनों बैठ जाते हैं विराज सारी बाते बताता हैं
aria हैरान होके - अच्छा मगर सीधेबता देते आपकेपास पैसे कि कमी नहीं हैं
rin - नहीं सायदऐसा नहींकर सकते हैं हैं नां पति जी
विराज दोनो कों देख - हामा पिताजी अगरनेक अच्छे इंसान हैं तोँ उन्हें एकदम सें रुपया देखाये जाये तोँ पूछेगे इतने पैसेकहा सें आये तोँ मे क्याँ जवाब देताकहो
aria - अच्छा आपकेबात तोँ सहीकही
विराज - इस लिये मे एक् एक् महीने पे यहाआता रहुंगा एक् महीने पिर्थ्वी पे एक् महीने यहा
aria rin खुश होके - तब तोँ हमे भि लेके चलिये नां
विराज कुछसोच केँ - अच्छा आइडिया हैं पिर्थ्वी पे लोग केसे रहते हौ बाते करते हैं रहनसहन दुनिया केँ बारे मे जान लोगी तौ मा बापू दिदी सें मिलने केँ बाद तुम् दोनो कों दिकत नहीं होगी
rin aria खुश होके - हा आपनेसही कहा
तभी mingu आता हैं औऱ विराज कों देखशोक होके - दामाद जी
विराज खरा होके - ससुरजी जी
mangu भि कुर्सी लेकेबैठ जाता हें विराज सारी बातेबता देता हैं
mingu - अच्छा यहबात हैं सही हैं यहा भि आपका आनां जानां लगा रहेगा आप् स्वयं सभी कैसाचल रहा हैं देख लेगे
विराज - हायहबात तौ हैं
रात होती हैं विराज नँगा aria rin नंगी होके विराज कों मदहोस अदा सें देख - पति जी सुरु करिये मा
विराज दोनो कों देख मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं करते होँ सुरु
विराज aria कों खाट पे लेता केँ चूत पे लन्ड घुसा केँ जोरदार चुदाई करते हुवे चुचे निपलमसल दबाने लगता हैं aria - अहहउफ पति जी औऱ जोर सें कईदिन सें चूत तरप्रही थि अब जाकेअहह चैन मिला हैं अहहउफ मज़ा आँ रहा हैं
aria केँ बाद rin विराज केँ ऊपर लन्ड चूत मे लेकेमजे सें गांडउपर नीचे करते हुवे चूत मे लन्ड लेने लगती हैं
विराज रिं कों देख - मेरीजान बहुतजोस मे होँ उफ चूत बहुतगरम हैं
rin गांडउपर नीचे करके लन्ड लेते हुवे विराज कों देख - अहह पति जीआज निकाल दो मेरी चूत कि गर्मी उफअहह आनंद आँ रहा हैं
पूरीरात चुदाई चलती हैं कोई नॉर्मल इंसान तौ थें नहीं जोँ एक् चुदाई मे थक जाये सुभह मस्त तरीके सें होती हैं फिन विराज rinaria कों लेकेसब sect master सें मिलने देखने निकल परता हैं
10 दिनबाद विराज aria rin कों लेके पोटलखोल अपनी दुनिया मे लेकेआता हैं jin कों विराज दूसरी बार आयेगा तौ लेके जायेगा बोल दिया थां
aria rin जैसे हि पिर्थ्वी पे आते हैं गारीघऱ लोग केँ कपड़े भीर लोगो कि बाते खानेसभी कुछदेख पुरेशोक हौ जाते हैं
विराज नें पावर सें rin aria कि हुस्न दबा दिया थां दोनो नॉर्मल लरकी केँ तरहलग रहे थें जिसतरह जिनलग रहा थां
विराज rin aria कों बाजार मे घुमाने लगता हौ rin aria तोँ हैरान इधरउधर लाइट गारीघऱ बिकरहे समान कों हि देखेजा रहे थें
aira धीरे-धीरे सें - पति जी आपकी दुनिया मे बहुतअलग हें कई अजीब समानबिक रहे हैं औऱ यह गारी हि नां
विराज - हा बताया तौ थां
rin चारों तरफदेख - कपड़े खाने कों देख तौ मुझे भुक् लगनेलगी हैं
विराज दोनो कों देख मुस्कुराते हुवे - पहले अच्छे सें घूमलॉ फिन जौ खानां हौ खायेंगे
विराज aria rin कों बहुत अच्छे स्थान सभीकुछ दिखाते समझाते जाता हैं फिनसभी खानां खाते हैं रात एक् होटल मे रूम लेकेबैड पे लेत जाते हैं
aria rin विराज कि सीने पे सररखे - आपकी दुनिग तौ कमाल कि हैं अभि तौ बहुतकुछ देख्ना बाकी हैं
विराज दोनो कों देख - हा बहुतकुछ देख्ना बाकी होँ हैं मे स्वयं पूरी दुनिया अपनी देखी नहीं पऱ चिंता मतकरकल धीरे-धीरे धीरे-धीरे सभी देखा दूंगा
बसकल सें विराज अपनी दोनो पत्नि कों अपनी दुनिया देखाने लगतासंग मे बताता भि रहतायह कोन सि स्थान हैं किया बोलते हैं समान गारी बिजली सभीकुछ अच्छे सें बताते रहता हैं
रात विराज अपनीमा दिदी पिताजी सें बाते करता तोँ rin aria अपनी सासू ससुरजी दिदी कि आवाजे बातेचुप चाप सुनती रहती थि
दिन महीने गुजरते चले जाते हैं विराज नें अच्छे सें rin aria कों दुनिया देखाया समझा भि दिया थां अब तोँ rin aria जानसमझ गये थें
विराज जीजी उसकी पत्नि अपने ससुरजी कों भि लेके अपनी दुनिया दिखाता घुमाता हैं सभी कां रेयक्सन् भि बहुत खतरनाक थां
साल पुरे हौ गये थें विराज हररात मा सें बाते करता थां मगरजब मुरिम दुनिया मे होता तोँ पहले हि सभी कों कोई बहाने बना केँ बता देतासभी मान भि जाते थें
मगरइस सालों मे विराज नें अपनीमा दिदी सें कुछगलत कहने कि बाते करने कि कोसिस नहीं कि बस थोरि मस्ती बाते करतारहा
विराज कों जौ चाहिये थां अपनीमा दिदी कि चूत वोँ वादे पे टिका थां विराज कों भि नहींपता थां किया होगाजब वोँ बताएगा उसे क्याँ चाहिये
विराज मुरिम दुनिया मे थां jin mangu rin aria कों बायबोल सीधा अपनी दुनिया मे आता हैं पार्क मे विराज बैठ जाता हैं दोपहर 2 बजरहे थें विराज माला कों मोबाइल करता हैं
माला - विराज मेरेलाल एक् साल हौ गये मेरीआखे तुम्हें देखने कों तरसगये घऱआजा मेरेलाल
विराज - मा आप् नें कहा मे आज हि गारीपकर लूंगा
मालाखुश होके - हा मेरेलाल आजा तेरीमा तुम्हें देख्ना चाहती हैं
विराज - ठीक हैं मा मे रखताहु
माला - ठीक हैं बेटा
विराज मोबाइल रखमन मे - अबघऱ जाने कां समय आँ गय़ा हैं मगर मे जौ चाहता हु मुझेमिल पायेगा केसे कहूंगा दिदी मा सें कही मुझेमार नां देउफडर भि लगरहा हैं मगर विराज हिम्मत करनी हि होगीअगर मा दिदी कि चूत चाहिये तोँ
शाम कों विराज ट्रेन पकर लेता हैं औऱ अपनीमा दिदी बापू सें बात भि कर लेता हैं माला शिवानी रमन बहुतखुश थें
तीनदिन बाद
सुभह 10 बजरहे थें आगन मे शिवानी माला बैठे बातेकर रहे थें आदि तौ आशी खेलने मे लगे थें माला शिवानी कों पता pta थां विराज कभी भि आँ जायेगा वैसा होता भि हैं
विराज घऱ केँ अंदरआगन नें आता हैं तौ सबसे पहले माला कि नजर विराज पे जाती हैं तौ माला पूरीशोक मे खरे होके - बेटा
अपनीमा कों इतना हैरान शोक विराज कां नाम लेते शिवानी भि पीछेमूर देखती हैं तौ शिवानी भि हैरान शोक मे खरी होँ जाती हैं विराज कों देखती रहती हैं
वही विराज भि स्वयं बहुत हैरान शोक मे अपनीमा बेहन कों देखरहा थां
माला शिवानी इस लियेशोक थि कियुंकी विराज बहुत हि जायदा हैंडसम मस्त बॉडी वालाबन गय़ा थां एक् सालदूर रहने कां फायदा उठा केँ विराज अपने आप् कों बहुत हैंडसम मस्त बॉडी वालाबना लिया थां
तोँ वही विराज इस लिये अपनीमा दिदी कों देखशोक थां कियुंकी माला शिवानी पहले सें बहुत सुंदर मस्त शरीर कि मलकिन बन गई थि
जब हम् किसी कों रोज देखते रहते तोँ सामने वाला कितना बदल गय़ा हैं बता नहीं चलतामगर जब आप् किसी कों एक् साल देखता हैं तोँ बदलाव साफनजर आता हैं सामने वाला कितना बदल गय़ा हैं
विराज इसी लिये अपनीमा दिदी केँ बॉडीदेख हैरान थां
अजब हि सीन थां विराज दोनो कां देख दोनोअभय कों कों देखशोक थें
आज केँ लिये इतना हि
Maf krna friends aj update likh nahee paya kaam mai biji thaa kal( तुलौट केँ आजा मेरेलाल) pe update dunga halanki parso say update roj samy pe milta rahega
I Am Murim Lord ( Reincarnation ) – New Episode
chapter 14
विराज आँ गय़ा थां घऱ एक् साल विराज एक् महीने मुरिम तौ एक् महीने अपनी दुनिया मे अपनी दोनो पत्नि केँ संगखूब मजे किये rin aria कों भि बहुत मज़ाआया औऱ पिर्थ्वी पे लोग केसे हैं केसे जीते हैं सभीजान समझ लिया थां
विराज अपनीमा दिदी केँ सामने खरा थां माला शिवानी विराज कों देख हैरान शोक थें विराज अपनीमा दिदी कों
एक् सालदूर रहने कां फायदा विराज नें अच्छे सें उठाया अपनी बॉडी हैंडसम नेस कों बहुत बढ़ा लिया थां यहीदेख माला शिवानी हैरान शोक विराज कों देखरहे थें सोचरहे थें सामने वाला विराज हि हैं नां
विराज भि माला शिवानी कों देख हैरान थां एक् साल मे माला पहले सें औऱ गोरी हसीनहॉट मस्त फिगर वालीबन गई थि
वही शिवानी भि एक् साल मे औऱ हसीन हौ गई थि पहले थोरि पतली थि अबभरा शरीर मस्त फिगर वालीबन गई थि
माला विराज केँ पासआके विराज केँ गाल पे हाथ रखते हुवे विराज कों देख - तुम् मेरे बेटे हि होँ नां
विराज माला केँ गाल पे हाथ रखते हुवे - आप् मेरीमा हि हौ नाँ
माला विराज केँ गाल पे मारते हुवे - नालायक मे तेरीमा हि हु एक् साल मे हि अपनीमा कों पहचान नहींरहा
विराज हस्ते हुवे - यहीबात तौ मे आपसे भि केह सकताहु
माला मुस्कुराते हुवे विराज कों उपर सें नीचे तक देखते हुवे - तुम् पहले सें बहुत हि जायदा हैंडसम हौ गये हौ बॉडी भि मस्तबना ली हैं इस लिये पहचान नहींपाई
विराज भि सेम माला कों उपर सें नीचे तक अच्छे सें देखते हुवे मुस्कुरा केँ - मा आप् भि तौ पहले सें बहुत सुंदर हॉट हौ गई हैं इस लिये मे भि आपकोदेख हैरान होँ गय़ा
माला हैरान मुह पे हाथरख विराज कों देख सर्मा केँ - बेसर्म मा कों हॉट बोलता हैं
मालाफिन विराज कों गलेलगा केँ - बहुतमिस क्याँ बेटा तेरी
विराज भि अपनीमा केँ गलेलगे - मेने भि मा
तभीबीच मे शिवानी आते हुवे विराज कों देख - मुझेभूल गय़ा मे भि हुयहा
विराज शिवानी कों देख - आप् बिल्कुल नहीं बदली वैसी हि हैं
शिवानी हैरान शोक मे - क्याँ मा सुंदर लगीमा कि तारीफ कि मेरा क्याँ हा
विराज हस्ते हुवे शिवानी कों उपर सें नीचे तक देखते हुवे - दिदी आप् भि पहले सें बहुत सुंदर हॉट होँ गई हैं सचकेह रहाहु
शिवानी सर्मा केँ - हाहापता हैं मे तोँ बसपूछ लिया
विराज शिवानी केँ गलेलग - दिदी आपको बहुतमिस करता थां
शिवानी विराज केँ गलेलगे हुवे - छोटे मेने भि बहुतमिस किया
तभीआदि आशी विराज केँ पासआके विराज कों देख - मामू मामू बोलने लगते हैं
माला शिवानी मुस्कुराते हुवे देखने लगते हैं विराज अपनी भांजी भांजे कों देख बहुतखुश होता हैं फिन दोनो कों गोद मे उठा केँ प्रेम करते हुवे - वोँ मेरा बच्चा देखो मे आँ गय़ा औऱ तुम् दोनो केँ लिये बहुत सारी कॉकलेट खिलौने भि लायाहु
आदि - मामू कॉकलेट चाहिये
विराज मुस्कुराते हुवे - हा जरूर दूंगा बहुत सारी
आशी प्यारी तोतली आवाज़ मे - मामू खिलौने
विराज आशी केँ गाल मे पप्पी करते हुवे - जरूर दूंगा मेरी प्यारी गुरिया
शिवानी - दोनो तुम्हें बहुतमिस करते थें मामू मामू कहते रहते थें
माला - आदि तोँ तुम्हें ढूंढता रहता थां अच्छा चलनहा लें दिमाग़ फ्रेस् होँ जायेगा लम्बा सफर करकेआया हैं
विराज दोबरे बैगउठा केँ - जीमा
विराज फिन नहाता खाता हैं उसकेबाद फिन एक् कमरे मे बैठबात सुरु होती हैं
माला विराज कों देख इमोसनल होके - आज मे बहुतखुश हु बेटा यहदेख मेरालाल बदल गय़ा मेरे टूटे उमीद भरोसे मे तुखरा उतरा
शिवानी - छोटे मे भि तेरे लियेखुश भि देर सवेर हि सही मेरा भइयाअब संभल गय़ा हैं
विराज अपनीमा दिदी कों देख - मा दिदी मुझे भि खुशी मिली हैं पहले मेनेसभी कां दिल दुखाया थां उसके लियेमाफ करना
माला शिवानी मुस्कुराते हुवे - भूलजा पहले कां सभी
विराज खरा होकेबरे बैग सें छोटाबैग निकालता हैं जिसमे माला शिवानी रमनआदि आशी केँ लिये कपड़े थें
विराज माला कों दोबैग देते हुवे - मा एक् मे आपके लिये कपड़े हैं दूसरे मे पिताजी केँ लिये, विराज शिवानी कों दोबैग देते हुवे, दिदी एक् मे आपके कपड़े दूसरे मे आदिआशी केँ कपड़े खिलौने हैं
शिवानी तौ खुशी खुशीबैग लेके - क्याँ बात हैं छोटे मेरे लियेनये कपड़े आहिस्ता देखुंगी केसे कपड़े लाया हैं अपनी दिदी केँ लिये औऱ अपनी भांजी भांजे केँ लिये
विराज - हा धीरे-धीरे देख लेना
माला - मे भि लेख लुंगी मेरालाल पहलीबार मेरे लियेकुछ लाया हैं मे बहुतखुश हु
विराज - अच्छा मा दिदी मे घुमने जारहा हुशाम तक आँ जाऊंगा
माला - ठीक हैं जल्द आँ जानां
विराज घऱ सें बाहर् निकल - चलो पुरानी यादे ताजाकर लेते हैं
विराज अपनेगाव घुमने लगता हैं औऱ घूमते घूमते अपने मित्र यानी रूबी केँ घऱ केँ बाहर् खरा होके रूबी केँ घऱ कों देखमन मे - रूबीअब मुझे तुमपे क्रोध नहींआता बल्कि तेरा सुक्रिया उसदिन वोँ सभी नहीं होता तोँ आज मे जोँ हु नहीं होताआज मे मुरिम दुनिया कां लॉर्ड हुइस दुनिया मे भि मे सभी सें जायदा पावरफुल हु मेरी दोनो पत्नि rin aria केँ सामने तुम् क्याँ इस दुनिया कि कोई भि लरकी स्त्री ठीक नहीं सकती हुस्न मे पावर मे तौ भूल हि जाओ
तभीघऱ सें विराज कां साथी रूबी कां भइया दीपक बाहर् आता हैं विराज कों देख दीपक हैरान कंफ्यूज होता हैं मगरगोर सें देखने केँ बाद दीपक औऱ हैरान शोक होके विराज केँ पासआके - मेरे साथी विराज तुम् हि होँ नां
विराज दीपक कों देख मुस्कुराते हुवे - हा कैसा हौ दीपक
दोनोगले मिलते हैं
दीपक विराज कों गोर सें देखते हुवे - दोस्त एक् साल मे तु कितना बदल गय़ा हैं यकीन नहीं होता इतना हैंडसम मस्त बॉडीसच केहरहा हु लरकिया तुम्हे देख दीवानी होँ जायेगी
विराज मन मे - अभि तोँ आधेरूप मे हि हु मुरिम दुनिया मे एक् पे एक् लरकिया ऑन्टी मेरे पीछे थि मगर मेरी दोनो बीबियाँ किसी कों आने हि नहीं देती हैं भगा देती हैं
विराज हस्ते हुवे - क्याँ दोस्त बता क्याँ चलरहा हैं
दीपक - दोस्त तु थां नहीं रूबी कि सादी हौ गई जीजा रूबीआये हैं चल मिलवाता हु
विराज मुस्कुराते हुवे - ठीक हैं चल
विराज दीपक केँ पीछेघऱ केँ अंदर जाते हुवेमन मे - हा मुझेपता हैं दिदी नें बताया थां
विराज एक् कमरे मे जाता हैं रूबी उसका पति बैठे थें रूबी जैसे हि विराज कों देखती हैं पूरीशोक मे चली जाती हैं
विराज मुस्कुराते हुवे रूबी कों देख - कैसी हैं मेरी मित्र रूबी
रूबीहोस मे आके विराज कों देख - विराज तुम् होँ कितना बदलगये होँ
विराज मुस्कुराते हुवे - समय हालत बदलने पे मजबूर कर देते हैं नाँ बदलो तौ आप् उसी मे खो केँ रह जाओगे
रूबी विराज कि बातसमझ गई थि मगरबात घुमाते हुवे अपने पति कों देख - यह हैं मेरे पति अशोक एक् xxx कपनी केँ सुपरवाइज़र 30000 महिना हैं
विराज हैरान शोक मे - क्याँ सच्ची मे
रूबी मुस्कुराते हुवे - हाअगर तुम्हे कोईकाम चाहिये केहना मे लगवा डुगी इनसे बोलके मेरेयार होँ इतनाकर हि सकतीहु
विराज - सुक्रिया सुक्रिया मेरे लिये बहुत अच्छा होगा
रूबीमन मे - हु भिखारी अच्छा हुआ तुम कोछोर दियाकोन लरकी एक् भिखारी सें सादी करेगी
विराज रूबी कों देखमन मे - कमीनी बरीआई रोब दिखारही हैं 30000 हजार मेरी दोनो पत्नि नें जौ गेहने पहने हैं नां इसकी कीमत कां दूरदूर तक अंदाज़ा तुलगा नहीं पायेगी अरे कपड़े कां हि लगा नहीं पायेगी
विराज अशोक कों देख - मेरीयार बहुत अच्छी हैं ख्याल रखना नहींरखा तौ उर् जायेगी
अशोक हैरान कंफ्यूज मे - मतलब
विराज रूबी कों देख मुस्कुराते हुवे - मलतबखुश रखेगी फिन भि आपको
अशोक - अच्छा
रूबीमन मे - कमीना आया कियु हैं एक् बात तौ हैं इस एक् साल मे बहुत जायदा हैंडसम होँ गय़ा हैं बॉडी भि मस्त हैं मगर क्याँ फायदा गरीब कां गरीब हि रहेगा.
विराज दीपक कों देख - चलघूम केँ आते हैं
दीपक अशोक कों देख - जीजा चलेंगे
अशोक - हाठीक हैं
विराज एक् बार रूबी कों देखता हैं फिन तीनो निकल परते हैं
रूबी अकेली मन मे - एक् बार भि मुझेकुछ बोला नाँ क्रोध क्याँ नां प्रश्न क्याँ पऱ कियुजब विराज नें मुझे किसी औऱ केँ संगदेख लिया थां तबउसे क्रोध होना चाहिये थां मुझे गाली याँ कुछ तोँ बोलता हि पर्र नहीं उसने एक् शब्द नहींकहे यहीबात हजम नहीं होँ रही
विराज दीपक अशोक कों लेके जाता हैं खुब खिलता पिलाता हैं औऱ घऱछोर भि देता हैं उसकेबाद शाम विराज अपनेघऱ नशे मे आता हैं मगर अंदर जानेदे पहलेनसा गायबकर नॉर्मल होके अंदर जाता हैं
आगन मे बच्चे खेलरहे थें शिवानी खानां बनारही थि औऱ मालारमन बैठे बातेकर रहे थें
रमन विराज कों देख हैरान होके -माला हमारा बेटा तोँ सही मे बदल गय़ा हैं कितना हैंडसम हौ गय़ा हैं बॉडी भि मस्तबना ली हैं
माला विराज कों देख मुस्कुराते हुवे - मेनेकहा थां नाँ
रमन - हुदेख रहाहु
। विराज रमन केँ गलेलग - बापू
रमन विराज केँ पीठथप् थापते हुवे - सबास् मेरेसेर तूनेइस बार उमीद नहीं तोरी
शिवानी - बापूअब छोटाबदल गय़ा हैं
बाते मस्ती करते विराज अपनी झूठी स्टोरी सभी कों बताने लगता हैं एक् साल केसे क्याँ क्याँ फिन खानां खानेबैठ जाते हैं
विराज - मा मे सोचरहा हु पक्के कां घऱ बनवाना सुरुकर दु
रमन माला शिवानी हैरान शोक मे - क्याँ
माला - बेटा नया पक्के कां घऱ बनाने मे बहुत खर्चआता हैं
विराज - मा जनताहु मगर आपनेलाल नें इतना पैसेकमा लिये हैं कि घऱ कां आधाकाम हौ सकता हैं मुझेफिन जानां होगा 2 साल औऱ काम करूँगा उसकेबाद हमारे पाससभी होगा
रमन हैरान - अच्छा समझ गय़ा तेरी भाग्य अच्छी थि बरी कपनी मे काममिल गय़ा औऱ बेटा तूने भि बहुत मेहनत कि हैं इसी लिये इतना अच्छा रुपया मिलता हैं
विराज - जी बापू
विराज मे झूठी स्टोरी बना केँ सभी कों पहले हि पता दिया थां ताकिजब आये तौ सभी जायदा प्रश्न नां पूछे
विराज नें बताया सभी कों वोँ एक् बरी कपनी मे काम केँ लिये गय़ा जोँ ब्रांड कपड़े बनाती हैं उसने जल्द मशीन चलाना सिख लियाअब उसकी सेलरी लाख हैं यहीकथा विराज सब कों बताते आया हैं इस लियेसभी जायदा प्रश्न नहीं किये
माला - ठीक हैं बेटा जैसा तुम् चाहो
शिवानी - वाउ भइया मेराअब एक् लाख महिना कमाता हैं माइसगाव मे कोई नहीं होगा जोँ छोटे जितना रुपया कमाता होगाहा कुछलोग कों छोर केँ
माला खुशी सें - मेरेलाल तूने हमारी इज़तरख लीआसपास केँ लोग बोलते थें तेरा बेटा घूमता रहता हैं कुछ नहीं करतामगर अबसभी कि बोलती बंद होँ जायेगी
विराज सभी कों खुशदेख मन मे - सुक्रिया god एक् मोक्का देने केँ लिये
खानां बाते होने केँ बादसब अपने कमरे मे चले जाते हैं विराज खाट पे लेता अपनी पत्नि कों कब केसेसभी सें मिलाये यहीसोच रहा थां 25 मिनटबाद शिवानी बच्चो कों सुला केँ आती हैं औऱ बैठ जाती हैं विराज भि बैठ जाता हैं
विराज - दिदी आदिआशी केँ कपड़े केसेलगे अच्छे तोँ हैं नां
शिवानी विराज कों देख - बहुत सुंदर अच्छे हैं
विराज - औऱ आपके लिये लाया थां वोँ
शिवानी थोरा सर्मा जाती हैं कियुंकी विराज सारीसूट केँ संग बिकनी पैंटी भि लाया थां
शिवानी - बहुत अच्छे हैं मुझे मनपसंद आया
शिवानी मन मे - कोई भइया बेहन केँ लिये बिकनी पैंटी भि लाता हैं क्याँ मगर एक् बात तौ हैं सारीसूट औऱ बिकनी पैंटी बहुत अच्छे मेहगे हैं मेने बिकनी पैंटी पहन केँ भि देखती बहुत सॉफ्ट नर्म हैं
विराज - जानकर अच्छा लगा
शिवानी विराज कि तरफ आहिस्ता बैठ - अच्छा तूने बोला थां मुझसे तुम्हे कुछ चाहिये तुबदल गय़ा मेनेमा बापू नें देख लियाअब बारी मेरी हैं अपने वादे पुरे करने कि बोल क्याँ चाहिये देसकी तौ जरुर दूंगी
विराज मन मे - क्याँ करूबोल दु याँ अभि नहींमगर डरलगरहा हैं मगरबोल हि देताहु आगे देरीकरी तोँ भि वही होगा जौ अभि होगा
विराज शिवानी कों देख हिम्मत करके - दिदी मुझे आपकेसंग वोँ करना हैं जौ जीजाजी करते हैं कि कों
शिवानी - फिन सें बोल क्याँ बोला तूने
शिवानी नें सभी अच्छे सें सुना थां पऱ यकीन नहींकर पारही थि
विराज डरते हुवेफिन वहीबात बोलता हैं उसके जल्दी हि कई थप्पर विराज केँ गाल पे परने लगते हैं
शिवानी गुस्से सें लाल होँ चुकी थि शिवानी गुस्से सें जोर सें बोलने वाली थि मगरफिन समझआता हैं जोर सें बोलेगी तौ मा पिताजी सुन लेकेइस लिये आवाज़ धीरे-धीरे मगर गुस्से सें विराज कों देख
शिवानी - तूने क्याँ बोलापता भि हैं छितु अपनी बेहन मेरेसंग तेरे दिमाग़ मे मेरे लियेयह सभी थां छिछि छोटे पहलेतु नाकारा थां मगरअब जब बदला तोँ तौ औऱ भि नीच गिराबन गय़ा हैं केसे भइया केसे मेरेसंग छि भइयाछि मुझेअब तुमसे नफरत होँ गई हैं घिन आँ रही हैं कहा मे खुश थि मेरा भइया सुधर गय़ा कमारहा हैं नाम रोसन् कररहा हैं मगर तूनेमा पिताजी कों पता चलेगा तोँ
विराज गाल पे हाथरखे नजरे नीचे किये - माफ करदो दिदी
शिवानी गुस्से सें - केसेमाफ करदुसमझ नहींआता कब सें बता, शिवानी पुरे गुस्से सें विराज केँ कानजोर सें खीचते हुवे - कब सें मेरे बारे मे गंदीसोच रखरहा थां बता एक् भइया केँ अंदर अपनी बेहन केँ लिये गंदीसोच कब सें केसेआई मे भि तौ जानुबता जल्द
विराज डरते हुवेरों देता हैं आखो सें आसु निकलआते हैं शिवानी विराज कों रोतादेख सांत हौ जाती हैं औऱ विराज कां कानछोर देती हैं मगर क्रोध नहीं गय़ा थां
विराज आसु बहाते हुवे - मे किसी सें प्रेम करता थां
शिवानी शोक मे विराज कों देखती हैं फिनकुछ सोचने केँ बाद - कही वोँ रूबी तौ नहीं
अब विराज शोक होके शिवानी कों देखता हैं
शिवानी विराज कों शोकदेख सरपकर - कईबार सकहुआ मुझे
शिवानी विराज कों मारते हुवे, तुझेही उस कमीनी केँ अलावा कोई नहीं मिला एक् बारबता तोँ देता मे वही तुम कोरोक देतीअरे रूबी एक् नंबर कि छि। हैं मे अच्छे सें जानती हु पऱ तुम्हें दिखाई नहीं दिया
विराज मार खाता रहता हैं पर्र घंटा विराज कों कोई फर्क पर्र रहा थां
शिवानी - आगे भि बोल
विराज नजरे नीचे किये - उसदिन मेने रूबी कों किसी औऱ केँ संगदेख लिया मुझे बहुतबरा झटकालगा दिलटूट गय़ा तबसमझ मे आया मे किस लरकी केँ लिये अपनो कि उमीद भरोसे तोँ तोरदिल दुखारहा थां बसउसी दिन मेने अपने आप् कों बदलने कां जौ भरोसा उमीद आप् लोगो कि तोरीउसे पाने कां फैसला लिया
शिवानी हैरान शोक सें सभीसुन केँ - आगे जौ मे जानना चाहती हु
विराज - आपकी सादी केँ एक् महीने पहलेरात कों मे सुसु करने बाहर् निकला तौ आपके कमरे सें अजीब आवाजे सुनाई दि पास गय़ा तोँ औऱ अजीब आवाजे सुनाई दि मे रोक नहीं पाया औऱ दरवाजे केँ छेद सें देखा आप् उसी केँ बाद सें
शिवानी मुह पे हाथरख शोक विराज कों देख गुस्से सें - फिन भि दिदी हु तेरी केसे
विराज रोते हुवे - माफकर दो दिदी मेने उसकेबाद कभी आपको लेके गंदे विचार नहींआये मगरजब मेनेकहा मे बदलना चाहता हु औऱ आपसेकुछ चाहिये अपनेकहा बस मे होगा दूंगी तोँ उससमय फिन गंदे विचार आँ गये
शिवानी कों शोक पे शोकमिल रहे थें
शिवानी - डर नहींलगा सोचा नहीं उसका अंजाम
विराज - सोचापता थां आप् क्रोध करेगी मारेगी नफरत करेगी मगरयह अच्छे सें जनता थां आप् मा पिताजी कों नहीं बतायेगी औऱ आप् मुझेमाफ भि कर देगी कियुंकी आप् मुझे बहुत प्रेम करती हैं इस लिये हिम्मत हि
शिवानी शोक मे - प्रेम कां इतनागलत फायदा उठाने कि सोची
विराज शिवानी केँ दोनोहाथ पकरआसु लिये शिवानी कों देख - जनताहु आज आपकादिल बहुत दुखाया दिदी माफकर दो प्लेस
शिवानी सांत होके विराज कों देख - छोटे समझती हु तेरीउमर हौ गई हैं फिन भि मे तेरी बेहनहु सोचना भि पाप हैं
विराज - जनताहु गलती होँ गई दिदी आप् बहुत सुंदर हैं जब आपको देखता थां सोचता थां काश आप् मेरी दिदी नहीं होती कियुंकी आप् जितनी हसीन हैं उतनी हि दिल कि अच्छी साफ भि आपकी जैसी पत्नि हरकोई पाना चाहेगी बसयही एक् चीज खलती थि सोचता थां काश आपकी जैसीकोई मुझे मिले पऱ मेरी दिदी जैसीकोई हैं हि नहीं जीजाजी सें जलन होती हैं कभीकभी दिदी मानता हुगलत हुबस मेरी एक् चाहत थि जौ मेने आपको बताईमगर वादा करताहु अभि आप् जोँ बोलोगी करूँगा बसमाफ करदो अपने बेवकूफ भइया कों
विराज कि यह लाइन बाते शिवानी कां पूरा क्रोध गायबकर देती हैं
शिवानी विराज कों देखती रहती हैं फिन पलंग पे लेत जाती हैं औऱ अपने चेहरे पे चादरडाल केँ - ठीक हैं कर लें पहलीबार तूनेकुछ मंगा हैं भले हि गलत हैं जल्द सें कर लेँ मे नहीं चाहती मा बापू कों पताचले
विराज हैरान शिवानी कों देखता हैं फिन जल्द सें कपड़े निकाल नँगा होके शिवानी कों देखमन मे - एक् मोक्का मिला हैं आज दिदी कों एहसास कराऊंगा असली चुदाई किसे कहते हैं भलेआगे फिन मोक्का नां मिलेमगर आप् यहरात पूरी जीवनकभी भूल नहीं पायेगी
आज केँ लिये इतना हि
I Am Murim Lord ( Reincarnation ) - Kahani ab aur interesting hogi
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