शक कां अंजाम – New Episode
शक कां अंजाम
PART 3
Update 52
( New-16)
मूल लेखक नें यह किस्सा जिस स्थान खत्म कि हैं। मेरा प्रयास हैं किस्सा वही सें कों आगे बढ़ाने कां औऱ नए मौलिक भाग देने कि। एक् पाठक (जिन्होने अपनानाम नहि बताने केँ लिए अनुरोध किया हैं) औऱ मेरा मिलजुल कर प्रयास रहेगा, इसकथा कों औऱ आगे लेँ कर जाने कां। लीजिये पेश हैं भाग 3 Update 52। ( New-16)
ऋतू: झड़ने केँ बाद भि अविनाश लुढ़ककर साइड पऱ आँ गय़ा औऱ मेरे नितम्बो औऱ पीठ सें चिपका रहा औऱ मेरी चूचिया दबाता रहा
मे अविनाश केँ हाथों सें मेरी चूचियों केँ दबने कां मे बहोत मजा लेँ रही थि। उसकेऐसा करने सें मेरी चूचियाँ औऱ निपल्स बड़ी जल्द हि तनकर दुबारा बड़े हौ गये औऱ मेरी बुर पूरी गीली हि थि। मे धीमे-धीमे अपने रसीले नितंबों कों उसके खड़े लन्ड पऱ दबाने लगी।
अविनाश नें अब अपना दायाँ चूचियों सें हटा लिया औऱ नीचे कों मेरे नंगेपेट कि तरफ़ लेँ जानेलगा। मेरी नाभि केँ चारोओर हाथ कों घुमाया फिन नाभि मे अंगुली डालकर गोल घुमाने लगा।
ऋतू: आआआह.उहह!!
उसकी अँगुलियाँ मेरी झांटो कों छूने सहलाने लगीं। अपने आप् मेरी टाँगें आपस मे चिपक गयीँ, मगर अविनाश नें पीछे सें मेरे नितंबों पऱ एक् धक्का लगाकर जताया कि मेरा टाँगों कों चिपकाना उसे पसन्द नहि आया। मैंने लेटे लेटे हि फिन सें टाँगों कों ढीलाकर दिया।
अविनाश मेरे होठों कों चूमने लगा औऱ मेरे नंगे शरीर पर्र हर स्थान हाथ फिराने लगा। अब उसने धीरे-धीरे सें मुझेखाट पे चित्त लिटा दिया।
आआआआहह." मे उत्तेजना सें सिसकने लगी। अविनाश मेरी पूरी बायीं मम्मों कों जीभ लगाकर चाटरहा थां औऱ दायीं मम्मों कों हाथों सें सहलारहा थां। मे हाथ नीचे लें जाकर उसके खड़े लन्ड कों सहलाने लगी। फिन वो मेरी दायीं मम्मों केँ निप्पल कों ज़ोर सें चूसने लगा जैसे उसमें सें दूध निकालना चाहरहा हौ औऱ बायीं मम्मों कों ज़ोर सें मसलरहा थां, इससे मुझे बहोत खुशीमिल रहा थां। जब उसने मेरी चूचियों कों छोड़ दिया तौ मैंने देखा मेरी चूचियाँ अविनाश कि लार सें पूरी गीली होकरचमक रहीथीं। मेरे निपल्स उसने सूज़ा दिए थें।
फिन अविनाश मेरे चेहरे औऱ गर्दन कों चाटरहा थां। उसदिन पहलीबार मेरे पति कि बजायकोई गैर मर्द मेरे शरीर पर्र इसतरह सें चढ़ाहुआ थां औऱ मे सेक्स केँ लिए इतनी उतावली होँ चुकी थि कि मुझे इसमें कुछ भि गलत नहींलगा। औऱ जौ मजा मेरे पति नीरज नें मुझे दिया थां निश्चित हि उससे ज्यादा मुझे अभि अविनाश सें मिलरहा थां। औऱ फिन मे कईदिन सें सेक्स केँ लिए भूखी थि औऱ जबभूख अधिकलगी हौ तौ जोँ भि मिलजाए वोँ बहोत लजीज लगता हैं। नीरू मेरी बेहन मेरा भि उस वक़्त बसयही हाल थां.
अविनाश केँ हाथ मेरी चूचियों पऱ थें औऱ हमारे होंठ एक् दूसरे सें चिपके हुए थें। हम् दोनों एक् दूसरे केँ होंठचबा रहे थें औऱ एक् दूसरे कि लार कां स्वाद लेँ रहे थें। फिन अविनाश खड़ा होँ गय़ा औऱ मेरे निचले जिस्म पर्र उसका ध्यान गय़ा।
अविनाश—ऋतू भाभी, प्लीज़ ज़रापलट जाओl
मे बेड पर्र अब नीचे कों मुँह करकेपलट गयीँ,। अविनाश कि आँखों केँ सामने मेरी गांड नंगी हि थि।
अविनाश : ऋतू भाभी थोड़ा गांडऊपर उठाओ औऱ कुत्तिया बनजाओ। ऐसे झुको जैसे कुत्तिया झुकती हैं कुत्ते केँ सामने। ठीक हैं। ”
मैंने नीरज सें कईबार कुतिया बनकर चुदाई करवाई थि इसलिये कुतिया बन गई,। अपनी गांड कों थोडा ऊपर कों धकेला औऱ अपनी कोहनियों केँ बललेट गयीँ, औऱ गांड मटकाने लगी। नीरज कों मेरीयह डा बहोत मनपसंद हैं। अविनाश नें जब पीछे सें मेरे कि अपनी भारी गाँड मटकाते हुए देखा तौ उसका लन्ड फुफकारने लगा।
अविनाश: भाभी आपकी गांड तौ बहोत शानदार हैं। मेरामन कररहा हैं आपकी गांड मारने कां
ऋतू : नहि वहां नहि अविनाश मैंने कभी गांड नहि मरवाई हैं। चाहो तौ पीछे सें बुर मे लन्ड डाललो
अविनाश: ठीक हैं भाभी आप् जैसा बोलो
मगर मेरी एकदम स्पंजी कमर मांसल यौवनदेख कर अविनाश नें मेरी गांड मारने कां मनबना लिया औऱ मुझे चूमने चाटने लगा.
अब अविनाश उसकातना हुआ लौडा औऱ संग हि मे भि नंगी, मेरे स्तन पे उसके कसतेहुए हाथ, मेरी फुदकती टाइट बुर औऱ कोमल, प्यारी, राजदुलारी गांड। अविनाश अपने हाथों सें उसके मम्मे औऱ भि ज़ोरों सें रगड़ने लगा, खूब मम्मे दबा केँ औऱ निप्प्ल चूसचूस केँ उसकेहाथ नीचे खिसके औऱ एक् हाथलगा बुर कों सहलाने तोँ दूसरा मेरी गांड सें खिलवाड़ करनेलगा। मैंने उसकेहाथ अपनी गांड सें हटाने केँ कुछ क्षीण प्रयास कियेमगर इतने दिनों सें वोँ मेरीताक मे थां तौ हाथ मे आने केँ बाद इतनी आसानी सें थोड़े नं छोड़ता.
फिन उसने मेरी जांघों कों फैलाया औऱ मेरी गांड कि दरार मे मुँह लगाकर जीभ सें चाटने लगा।
"उूउऊहह! "
मे कामोत्तेजना सें काँपने लगी। मेरी नंगी गांड कों चाटते हुए अविनाश भि बहोत कामोत्तेजित होँ गय़ा थां। पहले उसने मेरे दोनों नितंबों कों एक्-एक् करके चाटाफिन दोनों नितंबों कों अपनी अंगुलियों सें अलग करके मेरी गांड कि दरार कों चाटने लगा। वो मेरी गांड केँ रसीले माँस पऱ दाँत गड़ाने लगा औऱ मेरी गांड केँ छेद कों चाटने लगा। उसकेबाद अविनाश मेरी गांड केँ छेद मे धीरे-धीरे सें अंगुली करनेलगा।
मे आआआअहह। ओह्हकर कराहने लगी। उसेपता लग गय़ा अब मुझे मज़ा आँ रहा हैं
उसकी अंगुली केँ अंदर बाहर् होने सें मेरी सांस रुकने लगी। उसनेछेद मे अंगुली कि औऱ उसे इतना चाटा कि मुझेलगा छेद थोडा खुलरहा हैं औऱ अब थोडा बड़ादिख रहा होगा। मैंने भि अपनी गांड कों थोडा फैलाया ताकिछेद थोडा औऱ खुलजाएl
मैंने थोड़ा औऱ झुक केँ अपनी भारी गाँड बाहर् उघाड़ दि औऱ मेरे मम्मे आगेझूल रहे थें। ऋतू अपनाहाथ पीछे लें जाकर अपनी मोटी गाँड खोलते हुए बोलीं, “
ऋतू : ये लेँ अविनाश तेरीऋतू कुत्तिया बनके झुकी हैं तेरे सामने। मगरये बता कि तूँ मेरी भारी गाँड क्यूं मारना चाहता हैं?”अविनाश नें अपना लन्ड ऋतू कि खुली मोटी गाँड केँ छेद पे रखा औऱ हाथआगे बढ़ा केँ उसके झूलते हुए मम्मे पकड़लिए औऱ अपने लन्ड कों ऋतू कि मोटी गाँड पे दबाते हुए बोला,
अविनाश : ऋतू भाभी वाउ, आप् बड़ी समझदार हौ। मेरो कों आपकी मोटी गाँड भा गयीँ, औऱ मेरा लन्ड तुम्हारी कुंवारी रसीली गाँड कि अकड़ निकालने केँ लिएतड़प रहा हैं। आपको नहि पता तेरी रसीली गाँड कितनी लाजवाब हैं। आपके बुर, मम्मे, होंठ, गोल गाँड औऱ पूरा शरीर, सभी लाजवाब हैं।
फिन उसने मेरी जांघों कों फैलाया औऱ मेरी गांड कि दरार मे मुँह लगाकर जीभ सें फिन चाटने लगा।
उसकी अंगुली केँ अंदर बाहर् होने सें मेरी सांस रुकने लगी। उसनेछेद मे अंगुली कि औऱ उसे इतना चाटा कि मुझेलगा छेद थोडा खुलरहा हैं औऱ अब थोडा बड़ादिख रहा होगा। मैंने भि अपनी गांड कों थोडा फैलाया ताकिछेद थोडा औऱ खुलजाएl
अविनाश नें थोडा सां उंगली घुसेड दि मेरी बुर मे औऱ मे बहुत आश्चर्यचकित होँ उठी.
ऋतू -क्याँ कररहे होँ?
अविनाश - कुछ नहि, मजे लेँ रहा हूं.
अविनाश एक् ऊँगली बुर मे औऱ एक् मेरी गांड मे अंदर बाहर् करनेलगा। औऱ दुसरे हाथ सें लन्ड कों कों अपने हाथों सें सहला सहला केँ त्यार कररहा थां। अब लौडा इतना सख्त हौ गय़ा थां केँ फुन्फ्कारें मारने लगा औऱ अविनाश नें आव देखा न् ताव, बुर सें लन्ड लगाया औऱ हौले हौले सें घुसना शुरुआत किया। इतनी टाईट बुर केँ लन्ड महाराज केँ घुसते हि मेरे मुंह सें हल्की चीख निकलपडी। अविनाश नें मुझेदेख केँ देखा,
अविनाश: क्याँ हुआ भाभी, मेरा साथी नीरज आपकी नहि लेता क्याँ जौ इतनी टाईट हैं?
ऋतू : नहि, आजकलयह थोड़ा ओफिस केँ काम मे बिजी रहते हैं.
अविनाश : कोईबात नहि अब आपकोकभी कोईकमी नहि खलेगी भाभी
लन्ड एकदमफँस केँ बैठ गय़ा मेरी बुर मे तोँ अविनाश थोडा थोडा अन्दर बाहर् करनेलगा। मेरे चेहरे पे दर्द औऱ मजा केँ मिले जुलेभाव थें। अविनाश नें चुदाई थोड़ी तेजकर दि औऱ जोर सें गांडयूँ दबोचली केँ एक् हाथ मे एक् कुल्हा औऱ ज़ोरों सें ऐसे दबाई केँ बीच मे सें एकदम चौड़ी होँ जाए। उसके धक्के तेज़ होतेगए औऱ छूट केँ गीलेपन केँ चलते ज़ोरदार “फच्च फच्च” कि आवाज़ आनेलगी.
फिन अविनाश नें अपने हाथों सें उसकी पतली, नाज़ुक औऱ चीकनी कमर पर्र रेंगते हुए उसकी गांड तक लें आया.फिन मैंने एक् उंगली सें गांड कों थोडा टटोला,
औऱ इससे पहले केँ ऋतू भांप पाती, मेरा लन्ड उसकी बुर सें बाहर् औऱ लन्ड उसकी गांड केँ छेद पर्र लगा दिया
अविनाश - बहोत दिनों सें आपकी गांड पे नज़र थि, ऋतू भाभी ”,
अविनाश बोला.ऋतू नें कुछ केहना चाहामगर बोल नं पायी.
अविनाश-- भाभीअब आपको थोडा-सां दर्द होगा पऱ उसकेबाद बहोत मजा आएगा।
ऋतू -अविनाश प्लीज़ धीरे-धीरे सें करना मैंने कभी अपने पति नीरज कों भि अपने गांड नहि मारने दि हैं।
मैंने अविनाश सें विनती कि। अविनाश नें धीरे-धीरे सें झटका दिया, उसकेतेल सें चिकने लन्ड कां सुपाड़ा मेरी गांड केँ छेद मे घुसने लगा। लन्ड कों गांड मे अंदरघुस नहि पाया। मे दबकरआगे कों झुक गयीँ, औऱ पेट केँ बल हौ गयीँ, औऱ मैंने बेड कि चादर कों पकड़ लिया। अविनाश नें मेरे जिस्म केँ नीचेहाथ घुसाकर मेरी चूचियों कों पकड़ लिया औऱ उन्हें दबाने लगा।
ऋतू: ओह्ह.बहोत मजा आँ रहा हैं!
मैंने अविनाश कों औऱ ज्यादा मजा देने केँ लिए अपनी गांड कों थोडा ऊपर कों धकेला औऱ अपनी कोहनियों केँ बललेट गई,। इससे मेरी चूचियाँ हवा मे उठ गयीँ, औऱ दो आमों कि तरह अविनाश नें उन्हें पकड़ लिया। सच कहूँ तोँ मुझे थोडा दर्द हौ रहा थां पऱ शुक्र थां कि अविनाश नें तेल लगाकर चिकनाई सें थोडा आसानकर दिया थां औऱ वैसे भि वो किसी हड़बड़ाहट मे नहि थां बल्कि बड़े आराम-धीरे-धीरे मेरी गांड पर्र टकरारहा थां। हम् दोनों हि आरामसे सें कामक्रीड़ा कररहे थें। वो आहिस्ता अपना लन्ड घुसारहा थां औऱ मे अपनी गांड पीछे कों धकेलरही थि, अब उसने धक्के लगाने शुरुआत किए औऱ मे उसकेहर धक्के केँ संग कामोन्माद मे डूबती चली गयीँ,।
मेरी गांड टाइट थि याँ अविनाश कां लन्ड बड़ा थां पर्र अविनाश कां लन्ड अंदर नहि घुसरहा थां। कुछदेर तक वो धक्के लगाते रहा औऱ मे कामसुख लेतीरही।
अविनाश: भाभीअब संभालना। ”
अविनाश नें फिन मेरीमर पकड़के अपना लन्ड मेरी केँ गोल गाँड केँ छेद पे दबाया। मेरी साँसें तेज़ हौ गयीं औऱ वोँ धड़कते दिल सें अपने होंठ दाँतों केँ नीचेदबा केँ अविनाश केँ लन्ड केँ अपनी भारी गाँड मे घुसने कां इंतज़ार करनेलगी। क्योंकि अविनाश कां लन्ड बड़ा तगड़ा थां औऱ मैंने कभी रसीली गाँड नहि मरवायी थि कभी। मगर मुझेआज बहोत खुशी भि मिलरही थि क्योंकि इतने दोनीबाद नाँ मात्र मेरी चुदाई हौ रही थि बल्कि ऐसाबड़ा लन्ड मिलरहा थां।
हाथ पीछे करके मे अविनाश कां लन्ड पकड़के बोलि, “
ऋतू : ओहहहह अविनाश इतनी अच्छी लगी मेरीगोल गाँड तुम्हें? अविनाश इसिलिए तोँ हाईहील पहनती हूं। मुझेपता हैं कि इनसे मेरीचाल सैक्सी होँ जाती हैं औऱ लोगों कां ध्यान मेरी बलखाती भारी गाँड कि तरफ खिंच जाता हैं। तुम्हे मेरी रसीली गाँड अच्छी लगी औऱ तूने मेरी मोटी गाँड मारने कि सोची। तोँ अबदेख अविनाश तुझसे मोटी गाँड मरवाने जारही हूं औऱ अब बार-बार तुझसे चुदवाके तुझेही पूरामज़ा दूँगी। ”
मेरीइस बात सुनके अविनाश खुशहुआ औऱ एक् हाथ सें ऋतू कि कमरपकड़ केँ औऱ दूसरे हाथ सें उसके मम्मे ज़ोर सें दबाते हुए लन्ड ऋतू कि मोटी गाँड मे घुसाने लगा। जैसे हि अविनाश कां लन्ड मेरी भारी गाँड मे घुसा तोँ मे दर्द सें छटपटाती हुईँ ज़ोर सें चिल्लाने लगी,
“आआआआआआहहहहहहह अविनाश ऽऽऽरह.म खाआआ। मेरीईईई रसीली गाँड गयीईईईई.। बहोत दर्द हौ रहा हैं। प्लीज़ लन्ड निकाल मेरी रसीली गाँड सें। ”
अविनाश नें लन्ड धीरे-धीरे धीरे-धीरे अन्दर करना शुरुआत किया औऱ मैंने आँखेबंद करली औऱ हलके सें सिसकी ली। अविनाश नें अपना प्रयास ज़ारी रखा। थोड़ी देर मे हलके हलके सें धक्के लगालगा केँ लैंड पूरा अन्दर घुस गय़ा थां। उसकातना हुआ सख्तमौत लौड़ा मेरी एकदम टाईट गांड मे औऱ मेरीहर सांस केँ संग उसके लौड़े पे चारो औऱ सें उसकी गांड कां कसाव मे आँखें बंद करके लेतीरहे औऱ वोँ ढ़ाके मारता रहाहाथ सें मेरी दोनों चूचों कां मर्दन करतारहा। एक् एक् सेकंड इतना आनंददायी थां केँ लगरहा थां पूरे जिंदगी कि खुशियों केँ बराबर हौ.
फिन उसने मेरे मम्मे कस केँ दबाते हुए हलके हलके धक्के लगाने शुरुआत किये। जोँ धीरे-धीरे ढीरेतेज होँ गए औऱ औऱ उसनेजम केँ मेरी गांड कों चौदा। बीचबीच मे रुक जाता याँ लौड़ा निकाल लेता कहींमाल नां निकलजाए। लौड़ा बीचबीच मे निकल केँ घुसाड़ने मे बहोत आनंदआरा थां दोनों कों.
ऐसे हि करते करतेजब टाइमआया तौ उसनेजोर सें मेरे चूचे दबाये औऱ लन्ड कों उसकी गांड मे जितना घुसता थां घुसा केँ अपनी जांघ कों उसकी गांड सें एकदमजोर सें सटा केँ पिचकारी मारी.तीन चार पिचकारियाँ कम सें कम निकली होंगी। फिरउसने लन्ड बाहर् निकला, मेरेनरम औऱ गोल मांसल कूल्हों सें रगड़ केँ साफ़ किया औऱ खाट मे मेरेसंग चिपककर पड़ारहा.
साढे ग्यारह बजे सें लेकरढाई बजे तक अविनाश नें लगातार मेरी चुदाई कि
ढाईबजे अविनाश चला जाता हैं औऱ फिन वोँ रात कों खाने पऱ आता हैं। रात कों मे अविनाश सें नजरें नहि मिलापा रही थि मगर अविनाश बिल्कुल नार्मल लगरहा थां जैसेकुछ हुआ हि नहि हौ। नीरज कि मीटिंग अच्छी नहि रही थि। इसलिये वोँ भि परेशान थां। दूसरे दिन एक् बार अविनाश फिन 11 बजेआया मैंने उसे रोकने कि बहोत कोशिश कि। मगर नाकाम रही औऱ एक् बारफिन वोँ अपनी मनमानी करकेचला गय़ा। यह सिलसिला 15 दिन तक लगातार चलतारहा। अविनाश दोपहर कों आता औऱ मेरी चुदाई करचला जाता हैं। शुरूआत मे दोतीन दिन तोँ मैंने उसे समझाने कि कोशिश कि। मगरफिन मुझे भि उसका प्रतीक्षा रहनेलगा। 11 बजे मे उसका प्रतीक्षा करती थि। 15 दिनबाद नीरज मुझसे कहता हैं कि जौ पिछली बारजिस मीटिंग मे काम नहि बन पाया थां अब वोँ मीटिंग फिन होँ रही हैं मगर दूसरे शहर मे हें औऱ याँ तोँ रात 8 बजे होगी याँ फिन सुभह 10 बजे इसलिये उसेसाम कों हि निकलना होगा औऱ मीटिंग रात कों होती हैं तौ रात 2 बजे तक वोँ घऱ आँ जाएंगा नहि तोँ फिन दूसरे दिनसाम तक हि घऱ आँ पाएगा। नीरज केँ घऱ सें जाते हि अविनाश आँ जाता हैं। अविनाश मुझे बेडरूम मे लेँ आता हैं औऱ मेरी चुदाई करने केँ बाद कहता हैं कि आजसाम कों वोँ मुझे घुमाने लेँ जाएगा। मे मना करती हूं मगर वोँ मानता नहि हें। रात कों अविनाश घूमाने केँ नाम पऱ अपने फ्लैट पऱ लें जाता हैं जहां उसकेतीन विदेशी मित्र उपस्थित थें औऱ टेलीविज़न पर्र एक् मूवीचल रही थि जिसेदेख मेरेहोश उड जाते हें कि क्यूं यह मूवी मेरी औऱ अविनाश कि चुदाई कि थि।
ऋतु : अविनाश यह तुमने क्याँ किया मेरेसंग धोखा किया हैं तुमने
अविनाश : मैंने कोई धोखा नहि दिया, तुम् हि मेरे विस्तर गरम करने कों सजधजकर होँ गई थि। यह मेरे मित्र हैं औऱ रोज मे दोपहर कों गायब रहता हूं जिस कारण सें इन्हें मुझे पऱ शकहुआ। मेराकाम करने कि इन्होंने शर्तरखी थि कि यहलोग भि तुम्हारी चुदाई करना चाहता हें।
ऋतु : देखों अविनाश यहसभी नहि होँ सकता मे ऐसी स्त्री नहि हूं।
अविनाश : तौ कैसी महिला होँ अपने पति केँ अलावा तुम् दूसरे मर्द सें चुदरही हौ। अबदो सें चुदो याँ 20 सें कोई फर्क नहि पडता। औऱ यदि तुमने मना किया तौ इस फिल्म कि सीडी तुम्हारे पति कों भि भेजीजा सकती हैं।
ऋतु : अविनाश कि धमकी सें मे धबरा गई।
जारी रहेगी
Khani mai picture aur gif hone say khani kaa majaa khatam hi jata h … ye koy comic thodi padh rahen h joo cartoon dikhne chahiye … kharab mat manna ye meri rai h matr …
bhay sex wali update yaar juldi khatm karo mazaa nai aa raha etne dino bad update dete hu or sex pe he khatm muze lag raha h 3 ya 4 update sex kaa he doge kyu kahani kaa mazaa kahrab krr rahe hu bhay
bhay apne ab tak bhut aache say ko aage badhaya h pr sex scene jyada lamba hone say yeh story thora bhatak rahi h so plz sex scene jyada mat dalna takii story track say na utre. Thanks for a great update and waiting for next.
Sir iske baad avinash or uske friends k sath ritu kee joo chudayi hongi usko gangbang ya hardcore type likhna. majaa aa jayega. baki iss story hu aage badhane k liye aapka bhut bhut shukriya.
शक कां अंजाम – New Episode
Xforum कि दूसरी चोदमपट्टी वाली स्टोरी नहि हैं यह, रिश्तों पऱ आधारित well established किस्सा थि यह, इसको टेलीविज़न सीरियल कि तरहआगे नहि बढ़ा सकतेइसे पूरा करने केँ लिए दूरदृष्टिता होनी चाहिए, एडवांस मे प्लानिंग करनी पड़ती, मुझेखुद लगता हैं कि ऋतु केँ उसके पति केँ साथी केँ संग सेक्स नें कथा कों गलत दिशा मे मोड़ दिया, अगर ऋतु अपनी बेहन कां घऱ बसाने हेतु अविनाश सें समझौता करती तोँ वोँ तर्कसंगत होता, पाठकों कि तरहयदि आपको औऱ आपकेसह लेखक कों भि लगता हैं कि किस्सा कां रुखकुछ औऱ हि दिशा मे मोड़ दिया गय़ा हैं, तौ पिछले एकाध अपडेट्स कों डिलीट करके स्टोरी कों वापस पटरी पर्र लायाजा सकता हैं, एक् बार आप् दोनों अच्छे सें चर्चा कर लीजिए, अगर निजी कारणों केँ कारणभाग नहि आँ रहे हें तौ पहले उन्हें पूरा करें, जिम्मेदारी ली हैं तोँ उसे पूरी करें, यूँ हि जिम्मेदारियों सें मुँह नाँ मोड़िए।
शक कां अंजाम – New Episode
bhay ap dono friend es story ko amjaam tak pahuchaoge esi umeed h.bhay apka mehnat बहुत hi shaandaar h ese hi कोई bi kisi doosre की story पर अपना waqt west नहीं krta h apne bida uthaya h too plz ese complete karo और apke es mehnat ko ko slaam.
Umeed h की bhay ap es story ko jaroor pura karenge.
Waiting bhay for new update।
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