leela key rasleela ( + ) (incest special) (adultery special) – New Episode
अध्याय ५
रामू केँ जाते हि लीला नें दरवाजा जोर सें बंदकर दिया।
चिटकनी चढ़ाते टाइम उसकेहाथ काँपरहे थें, उसके घुटने पूरीतरह ढीलेपड़ गए थें। लीला दीवार कां सहारा लेकर आहिस्ता फर्श पर्र बैठ गई।
उसका पूरा शरीर पसीने सें तर थां, साड़ी उसकी त्वचा सें पूरीतरह चिपक गई थि, उसके मम्मों हर सांस केँ संग तेजी सें ऊपर-नीचे हौ रहे थें मानोकोई उन्हें ज़ोर-ज़ोर सें दबारहा हौ। ब्लाउज केँ अंदर निप्पल इतने सख्त औऱ उभरेहुए थें कि कपड़े मे चुभरहे थें।
सबसे अधिक यातना उसकी बुर मे थि।
पेटीकोट औऱ साड़ी केँ बीच उसकी जांघें पूरीतरह भीग चुकीथीं। गरम, चिपचिपा, पारदर्शी रस लगातार टपकरहा थां, बुर कि फूली हुईँ लिप्स सूज गई थीं औऱ हर सांस केँ संग अंदर कि दीवारें सिकुड़-फैल रहीथीं। जांघें आपस मे कस–कसकर रगड़रही थीं।
लीला नें दोनों हाथों सें अपना चेहरा पकड़ लिया, रामू कि आवाज़ बार-बार उसके कानों मे गूँजरही थि। रामू कि शरारती मुस्कान, उसकी भारी आवाज़, सभीकुछ एक् संगउसे याद आँ रहा थां।
“हायरे रे.” लीला नें काँपते हुए बुदबुदाया।
“रामू मेरा देवरु हैं। औऱ मे। उसकी बातें सुनकर इतनी गीली हौ गई हूं कि बैठे-बैठे मेरा पानीबह रहा हैं। पाँचसाल सें मुझे किसी मर्द नें छुआ तक नहि औऱ आज रामू केँ शब्दों नें मुझेइस हालत मे पहुंचा दिया। ”
लीला कि आंखों मे आँसूभर आए “लल्लू। कोमल। मेरे बच्चे हें, मे उनकी मम्मी हूं, अगर किसी कों कुछपता चल गय़ा तौ। मे विधवा हूं। इज्जतदार महिला हूं। मे ऐसी स्त्री नहि बन सकती.”
लीला नें एक् हाथ सें अपना बूब्ज़ दबाया। ब्लाउज केँ ऊपर सें हि उंगलियाँ निप्पल कों मसलने लगीं औऱ दूसरे हाथ नें धीरे धीरे अपनी जांघों केँ बीच कां मार्ग पकड़ा। साड़ी केँ ऊपर सें हि उंगलियाँ बुर पऱ दबगईं। पहले हल्का-हल्का फिन थोडा जोर सें दबाव डालने लगी।
“अहह.” एक् हल्की–सि कराहट उसके मुंह सें निकल गई।
अब उसकी उंगलियां तेजी सें घूमने लगीं। बुर सें औऱ रस निकलरहा थां, साड़ी कां कपड़ा भीगरहा थां। जांघें कस-कसकर रगड़रही थीं, वो फर्श पर्र बैठे-बैठे हि कमर हल्की-हल्की हिलारही थि। लीला कि सांसें औऱ तेज हौ गईं, अब उंगलियां औऱ जोर सें दबारही थीं, उसकी आँखें बंदथीं औऱ होंठ काँपरहे थें
मगर अचानक पता नहि उसे क्याँ हुआ “नहि। यह बहोत गलत हैं!” उसने जल्दी अपनाहाथ हटा लियामगर जिस्म अभि भि तरसरहा थां। लीला नें सिर पीछे दीवार सें टिका दिया औऱ आँखें बंद करके तेज-तेज सांस लेनेलगी।
“मे पागल होँ गई हूं। रामू मेरा देवरु हैं। मे केसे। अपने देवर जी केँ बारे मे ऐसासोच सकती हूं?” आँसू उसकी आँखों सें बहनेलगे। वो दोनों घुटनों कों छाती सें लगाकर बैठ गई औऱ सिर घुटनों पर्र रख दिया।
“ईश्वर। मुझेमाफ करदो। मे कमजोर होँ गई हूं.” फिन भि बुर अभि भि फड़करही थि, प्यास मिटने कां नाम नहि लेँ रही थि।
लीला काँपती हुईँ, लज्जा औऱ ख़्वाहिश केँ बीच फँसी हुई, फर्श पऱ बैठीरही।
उसकेमन मे दो तूफान संग-संग चलरहे थें एक् तरफ लज्जा, अपराधबोध, मां होने कां कर्तव्य औऱ समाज कां डर औऱ दूसरी तरफ पाँचसाल सें दबी हुई, भूखी, तरसती हुइ जवानी जोँ अब चीख-चीखकर कहरही थि कि उसे तृप्त करदे।
लीला फर्श पर्र बैठे-बैठे हि रोरही थि, मगर उसके जिस्म मे आग अभि भि धधकरही थि।
बहुतदेर तक लीला फर्श पऱ बैठीरही, बुर कां गीलापन साड़ी औऱ पेटीकोट मे सूख गय़ा थां। साम होँ चुकी थि, सूरजढल चुका थां। देहात मे आहिस्ता अंधेरा छारहा थां।
लीला नें किचन मे चूल्हा जलाया, चावल चढ़ाया, दाल मे तड़का लगाया, फिन रोटियाँ सेंकने लगी, उसे रह–रहकर रामू कि बातें याद आँ रहीथीं, उसने पानी कां लोटा उठाया, पानी पीने केँ बाद उसको थोड़ी–सि राहत मिलीमगर उसकी बुर फिन सें हल्की-हल्की गीली होनेलगी थि।
उसनेमन हि मनकहा “अकेले मे तौ मे पागल हौ जाऊंगी। ”
तभी बाहर् सें आवाज़ आई।
“मम्मी.!”
कोमल अपनी सहेली केँ घऱ सें लौटआई थि, उसकेहाथ मे सिलाई कां थैला थां। कोमल नें अंदरआते हि कहा, “मां, आज मुझे बहोत देर होँ गई, तुमने खानां बना लिया क्याँ?”
लीला नें स्वयं कों संभाला औऱ बोलि, “हाँ बेटी, बना लिया हैं, हाथ-मुंह धो लेँ, खा लेँ। लल्लू अभि तक खेत सें नहि लौटा?”
कोमल नें सिर हिलाया औऱ औऱ किचन मे आकरबैठ गई, लीला नें उसे रोटी, चावल औऱ दाल परोस दि।
कोमल खानां खातेहुए बोलीं, “मम्मी, आज सिलाई क्लास मे नई डिजाइन सीखी, तुम्हारे लिए भि एक् ब्लाउज कि डिजाइन लाई हूं। ”
लीला नें मुस्कुराने कि कोशिश कि, मगर उसका ध्यान कहीं औऱ थां।
कोमल खाते-खाते बोलि, “मम्मी, तुम् आजकुछ दुःखी लगरही हौ। सभीठीक तौ हैं नां?”
लीला नें जल्द सें जवाब दिया, “हाँ बेटी, सभीठीक हैं, बस थोड़ी–सि थकान हौ रही हैं। ”
खानां खाने केँ बाद कोमल बर्तन धोनेलगी, लीला बाहर् चाकी पऱ बैठ गई। रात केँ अंधेरे मे तारेचमक रहे थें, हवा हल्की–हल्की चलरही थि।
तभी लल्लू खेत सें लौटा, उसका जिस्म पसीने सें तर थां। लल्लू नें लीला कों देखकर कहा, “मम्मी, खानां लगादो, बहोत तेजभूख लगी हैं। ”
लीला नें उसे खानां परोस दियामगर कुछ बोलि नहि, लल्लू भि चुपचाप खानां खानेलगा।
खानां खाने केँ लल्लू अपने कमरे मे चला गय़ा औऱ कोमल भि किचन कां काम निपटाकर अपने कमरे मे चली गई।
लीला नें आंगन कि सफाई करतेहुए फैसला किया “रज्जो जीजी केँ पासचली जाती हूं, उनसेबात करके शायदमन हल्का होँ जाए। ”
उसने एक् प्राचीन घड़ा उठाया जोँ पिछले दिन उसने रज्जो सें लिया थां, साड़ी कां पल्लू ठीक किया औऱ घऱ सें निकल पड़ी। रात केँ अंधेरे मे देहात कि गलियाँ सुनसान थीं, लीलातेज कदमों सें रज्जो केँ घऱ कि तरफबढ़ रही थि।
आखिरकार वो रज्जो केँ घऱ पहुंच गई।
रज्जो आंगन मे बैठकर सब्जी काटरही थि औऱ जैसे हि उसकीनजर लीला पर्र पड़ी तोँ उसके होंठों पऱ मुस्कान तैर गई।
"अरे लीला! आँ अंदर आँ जा। " रज्जो बोलीं
"जीजी, ये घड़ाकल लिया थां तुमसे, सोचा लौटादूं" लीला धीमी आवाज़ मे बोलीं
रज्जो नें लीला कों ध्यान सें देखा औऱ बोलीं "एक्सक्यूज़ अच्छा बना लेती हैं तेरा चेहरा देखकर लगरहा हैं कि तेरेमन मे कुछ औऱ चलरहा हैं। "
रज्जो लीला कों अंदर वाले कमरे मे लें आई, कमरे मे तेल कां दीपकजल रहा थां। रज्जो नें दरवाजा बंदकर दिया औऱ लीला कों अपनेखाट पर्र बिठाकर स्वयं उसकेपास बैठ गई।
“बेहन!” रज्जो नें लीला कां हाथ पकड़ते हुएकहा, “क्याँ बात हैं?”
लीला नें कुछसमय चुप रहकर आरामसे बोलीं, “जीजी। मेरा देवरु रामूआज फिन सुभहआया थां। ”
रज्जो कि आँखों मे चमक आँ गई, वो लीला केँ औऱ लगभगसरक आई औऱ बोलि, “अच्छा! तोँ क्याँ हुआ? क्याँ फिन सें उसनेकुछ बोला। "
लीला नें शर्माते हुए नजरें झुकाईं, रामू केँ शरारती औऱ डबल मीनिंग बातें रज्जो कों बताने लगी।
रज्जो जोर सें हँस पड़ी, उसने लीला केँ कंधे पऱ हाथ रखकरकहा, “वाउ! रामू तौ आजखूब जोश मे लगरहा थां, उसमें इतनी हिम्मत केसे आँ गई?”
लीला नें लज्जा सें सिर झुकाया औऱ बोलि, “जीजी, मेरी स्वयं कि हि गलती हैं, मुझेऐसी बातें नहि सुननी चाहिए थि। मुझे लज्जा आँ रही थि मगर। उसकी बातें सुनकर मे अंदर सें बहोत गरम हौ गई थि, मे स्वयं कों रोक नहि पारही थि। ”
रज्जो नें लीला कों गलेलगा लिया औऱ बोलीं, "इतनी लज्जा क्यूं कररही हैं? पाँचसाल हौ गए तेरे पति कों गएहुए। तूँ अभि भि जवान हैं, इसमें गलत क्याँ हैं? तूँ स्त्री हैं, तेरीभूख हैं, प्यास हैं, इसे नकारने सें क्याँ फायदा?”
लीला नें रज्जो कि छाती पऱ सिररख दिया औऱ धीरे-धीरे सें बोलीं, “जीजी, मे बहोत परेशान हूं, एक् तरफ मेरे बच्चे हें औऱ समाज हैं तौ दूसरी तरफ मेरी शारीरिक जरूरतें हैं, कभी-कभी तौ लगता हैं कि बसअब औऱ नहि सहा जाएगा"
रज्जो नें लीला केँ बालों मे उँगलियाँ फिराईं औऱ दृढ़ स्वर मे कहा, “देख लीला, तुँ मेरी छोटी बेहन हैं, मे तुम्हारी तरफ समझती हूं मगरअगर तूँ भि अंदर सें रेडी हैं तौ डरमत, तुँ कम सें कम बाहर् तौ मुंह नहि माररही। ”
लीला नें हैरानी सें सिर उठाया औऱ बोलीं, “जीजी। मे केसे.”
रज्जो नें मुस्कुराते हुए लीला केँ गाल पर्र हाथ फेरा औऱ बोलीं, “क्याँ हुआ? वोँ मर्द हैं औऱ तूँ भि महिला हैं, अगर दोनों कि ख़्वाहिश हैं तौ बीच मे समाज कों मतला वरना जीवनभर मिट्टी कि मूर्ति बनकररह जाएगी। ”
लीला चुपचाप रज्जो कि गोद मे सिर रखकर बैठीरही।
फिनकुछ देरबाद लीला अपनेघऱ लौटआई।
शुक्रिया मित्रों एपसोड पोस्ट कर दिया गय़ा हैं कृपया पढ़ने केँ बाद लाइक्स करें औऱ कमेंट्स मे अपने रिव्यूज जरूरी दें।
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पिछले 3 दिनों सें मे इस किस्सा पर्र पूर्ण रूप सें एक् विश्लेषण लिखकर पोस्ट करने कां प्रयास कररहा हूं मगर दफ़्तर केँ काम नें इतना उलझा दिया हैं कि वक्त हि नहि मिलपा रहा हैं, फिलहाल इतना हि कह सकता हूं कि इस किस्सा केँ संवाद दो अर्थी होकर भि इतने मदमस्त हैं कि तन शरीर मे आगलगा दे, मगर जैसा कि nigga भइया नें कहा हैं कि इस किस्सा पर्र उसतरह कि प्रतिक्रिया नहि मिलरही हैं जैसी उन्हें उम्मीद थि शायद इसका एक् कारणयह भि हैं कि अधिकतर लोगइस कथा मे मम्मी बेटे कि अपेक्षा केँ संग हि पढ़ने आते होंगे मगर लीला कि औरों केँ संग रासलीला पढ़कर उदास हौ जाते होंगे !
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वैसेये कुछ ideas हैं जिन्हे मैंने अन्य लेखकों केँ संग भि साझा किया थां, मगर उन्होंने इस दिशा मे काम नहि किया। अगर आपकोयह ideas मनपसंद आते हैं, तोँ आप् इसे अपनी शैली मे जरूर आज़मा सकते हें। मुझे पूरा विश्वास हैं कि आप् इसे बेहद हुस्न सें प्रस्तुत कर पाएंगे।
Incest - avashyakta (A FAMILY kahani)
Hello everyone। Ek new kahani likhne jaa raha hun joo बहुत dino से मेरे dimag में ghum Rahi h ummid krta hun जैसे मेरी pahli kahani 'behna kaa roop' ap logo ko पसंद आया aur support dikhaya usi prakaar iss kahani में bi अपना pyaar aur support dikhana। mein कोई professional writer नहीं hun।
Incest - मुझे प्रेम करो,,,
mein Puri koshish krta hoon SB mujhe suganda ko hi de rahe hu bindiya kbse geeli padi hleela key rasleela ( + ) (incest special) (adultery special) - Kahani ab aur interesting hogi
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