छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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इसलिये मे शालिनी सें बोला- “मे घऱ केँ अंदर जाता हूं, क्याँ तुम् भि आनां चाहती होँ?”
शालिनी बोलीं- “नहि मे बाहर् हि रहूँगी…”
मैंने फिन पूछा- “क्याँ मे बाबी केँ लेकर जाऊँ?”
तौ शालिनी बोलीं- “नहि रहनेदो। इसको बाहर् हि रहनेदो…”
मे एक् पेड़ केँ पीछे जाकर छाँव मे बैठ गय़ा औऱ सोने कि तैयारी करनेलगा। शालिनी मुझको मुड़-मुड़कर देखरही थि। मे समझ गय़ा वोँ मुझको सोते देख्ना चाहती हैं। इसलिये मे आँखबंद करकेसो गय़ा।
लगभग पाँच मिनट केँ बाद उसने मेरानाम पुकारा मगर मे चुपरहा औऱ सोने कां एक्सक्यूज़ करतारहा। फिन शालिनी भि एक् पेड़ केँ नीचे जाकरलेट गई, औऱ अपने सैंडल सें बाबी कां लण्ड, जौ कि अभि तक पूरा खड़ा नहि हुआ थां, छूनेलगी। बाबीअब शालिनी केँ औऱ पास गय़ा। शालिनी नें तब बाबी कों औऱ पास खींच लिया औऱ उसका लण्ड अपनेहाथ सें पकड़कर हिलाने लगी। सिर्फ़ दो मिनट केँ बाद बाबी कां लण्ड खड़ा होँ गय़ा औऱ बुर मे घुसने केँ लिए रेडी हौ गय़ा।
बाबी जल्द सें शालिनी केँ ऊपरचढ़ गय़ा। शालिनी चित्त लेटी हुई थि।
मेरीसमझ मे नहि आँ रहा थां कि शालिनी केसे चित्त लेटकर बाबी सें चुदवायेगी।
शालिनी नें बाबी कों अपने औऱ ऊपर खींच लिया। अब बाबी कां खड़ा लण्ड शालिनी कि मम्मों केँ ऊपर थां। शालिनी नें बाबी कों औऱ ऊपर खींचा। अब बाबी कां लण्डठीक शालिनी केँ मुँह केँ ऊपर थां। शालिनी नें अपनीजीभ निकालकर धीरे-धीरे सें बाबी केँ मोटे खड़े लण्ड कों चाटा। अब शालिनी नें धीरे-धीरे सें बाबी कां लण्ड अपने मुँह केँ अंदर लिया औऱ उसको जोर-शोर सें बड़े मज़े सें चूसने लगी औऱ संग-संग अपने एक् हाथ सें अपनी बुर मे उँगली डालकर अंदर-बाहर् कररही थि।
थोड़ी देरबाद शालिनी नें अपने मुँह सें बाबी कां लण्ड निकाला औऱ बाबी कां लण्ड अपनी मम्मों पऱ रगड़ने लगी औऱ दूसरे हाथ सें उसके गोल-गोल गोटे सहलाने लगी। बाबी नें बड़ीजोर सें एक् बार अपनीकमर हिलाई औऱ शालिनी कि मम्मों, मुँह औऱ चेहरे पे झड़ने लगा। शालिनी धीरे-धीरे सें अपनीजीभ निकालकर अपने मुँह औऱ चेहरे पर्र गिरा बाबी कां माल चाटने लगी।
मुझेये देखकर बड़ी हैरानी हुईँ क्योंकी आज तक शालिनी नें इतनेजोश औऱ ख़्वाहिश सें कभी मेरा लण्ड मुँह मे लेकर नहि चूसा थां, मगरआज वोँ बाबी कां लण्ड बड़ेमजे सें चूसरही थि। अब शालिनी धीरे-धीरे सें नीचेसरक कर अपनी चिकनी बुर बाबी केँ मुँह केँ पास लेँ गई,।
बाबीअब शालिनी कि गाण्ड सें लेकर उसकी बुर कि घुंडी तक चाटने लगा। बाबी केँ बुर चाटने सें शालिनी झड़ गई, औऱ बड़ी हसरतभरी निगाहों सें बाबी केँ लण्ड कि तरफ़ देखने लगी। सिर्फ़ दो-तीन मिनट केँ बाद हि बाबी कां लण्डफिन सें खड़ा होनेलगा औऱ अब मुझको समझ मे आनेलगा कि शालिनी बाबी कों एक् बार झड़ा लेना चाहती थि जिससे कि बाबीखूब देर तक शालिनी कि बुर कि अपने लण्ड सें चुदाई करसके।
अब शालिनी अपने अंग-अंग केँ बलझुक कर कुतिया जैसी होँ गयीँ,। अब कुत्ता पीछे सें आकर शालिनी कि बुर सूँघकर फिन सें चाटने लगा औऱ फिन शालिनी केँ ऊपरचढ़ गय़ा। अब बाबी कां लण्ड शालिनी कि बुर केँ छेद केँ सामने थां औऱ शालिनी नें अपनाहाथ पीछे लेजाकर बाबी कां लण्ड अपनी बुर केँ छेद सें मिला दिया।
अब बाबी अपनीकमर कों धीरे धीरे सें चलाकर अपना लण्ड आहिस्ता शालिनी कि बुर केँ अंदर डालने लगा औऱ आरामसे शालिनी कि बुर कों चोदने लगा। कुत्ते कां लण्ड शालिनी केँ बुर-रस सें भीगकर बहोत चमकरहा थां। बाबी केँ मोटे लण्ड सें शालिनी कि बुर कां छेद बहोत फैल गय़ा थां औऱ मुझको लगरहा थां कि कलरात कि चुदाई सें शालिनी कां छेद बाबी कां लण्ड आसानी सें भीतर लेँ लेगा। बाबीअब अपने मोटे लण्ड कों लगभग 5” इन्च बाहर् निकाल रहा थां औऱ पूरेजोर सें अंदरपेल रहा थां।
मुझेअब साफ़-साफ़ शालिनी कि बुर सें चुदाई कि आवाज़ सुनाई पड़रही थि। बाबी नें लगभग 15 मिनट तक शालिनी कि बुर कां मंथन किया औऱ इतने वक्त मे शालिनी लगभग 5 बार झड़ी क्योंकी शालिनी हरबार झड़ने केँ संग बहोत बड़बड़ा रही थि।
आखिरकार बाबीअब ठंडापड़ चुका थां पऱ उसक लण्ड शालिनी कि बुर मे फँस गय़ा थां। बाबी शालिनी कि पीठ सें अपनेआगे केँ पेर हटाकर मुड़ गय़ा औऱ अब दोनों कि गाण्ड सें गाण्ड चिपकी हुइ थि औऱ दोनों हाँफरहे थें। जब शालिनी कि साँसें सामान्य हुई औऱ वोँ गर्दन घुमाकर देखी तौ मुझसे नजरें टकरा गई,।
वोँ हँसकर बोलीं- “बाबी कां लण्ड बहोत मोटा औऱ लम्बा हैं औऱ कलरात कि चुदाई सें मेरी बुर लण्ड कि ठोकर खाने केँ लिए बेचैनी रही थि। फिनये कुत्ता तोँ कलचला हि जायेगा इसलिये मैंने इसके लण्ड सें फिन एक् बार अपनी बुर मरवाली। क्याँ बताऊँ बहोत हि मजाआया। जब बाबी धक्के मारता हैं तोँ लगता हैं उसका लण्ड मेरे मुँह सें निकलकर बाहर् आँ जायेगा। मे तौ अब इससे गाण्ड भि मरवाना चाहती हूं…”
इतनीदेर मे कुत्ते कां लण्ड प्लाप कि आवाज़ केँ संग शालिनी कि बुर सें निकलआया। मुझे शालिनी कि बुर कां फ़ैला हुआछेद अब साफ़-साफ़ दिखरहा थां औऱ उसमें सें बाबी कां मालटपक रहा थां। शालिनी कि बुर कां मटर-दाना (क्लिट) औऱ बुर कि पपड़ी बिल्कुल फूलकर लालपड़ चुकी थि।
मैंने शालिनी सें झील मे जाकर नहाने केँ लिए बोला।
तौ वोँ मेरा लौड़ा पकड़कर बोलि- “चलो तुम् भि नहालो क्योंकी तुम् मेरी चुदाई देखकर गर्म हौ गये हौ औऱ अब तोँ तुम्हारे कज़न कां भि आने कां वक्त होँ गय़ा हैं…”
मे बोला-“जब तुम् बाबी सें इतनी अच्छी तरह सें चुदवा सकती होँ तोँ मे आजरात कों तुमसे अपना लण्ड चुसवाऊँगा औऱ तुम्हारी गाण्ड भि मारूँगा…”
शालिनी बोलि- “ठीक हैं, पहले मे तुम्हारा लौड़ा चूसूँगी औऱ फिन तुम् मेरी गाण्ड मे अपना लण्ड पेलकर मेरी गाण्ड फाड़ देना। बस अबचलो नंगे होकरझील मे नहाते हें…”
मेरा चचेरा भइयासाम कों हमारे घऱआया औऱ हमसे बोला- “मे 6 महीने केँ लिए विदेश जारहा हूं औऱ बाबी कों किसी केँ हाथ बेचकर जाऊँगा…”
शालिनी मेरी तरफ़ तिरछी नज़रों सें देखने लगीमगर कुछ बोलीं नहि। मे शालिनी कि तरफ़ देखते हुए भइया सें बोला-“अगर सिर्फ़ 6 महीने कि बात हैं तौ हम् लोग बाबी कों अपनेपास रख लेंगे क्योंकी हमारा घऱ भि बड़ा हैं औऱ हम् लोग बिल्कुल अकेले रहते हें…”
शालिनी मेरी तरफ़ देखकर मुश्कुराई औऱ आँखों सें मुझे शुक्रिया दिया।
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***** THE END ख़त्म *****
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. dosto, New kahani "पत्नि कि पसन्द_Biwi kee Pasand" iss posted. Index on page1 & Post No.2 iss also updated. Enjoy. Thanks
komaalrani wrote:waiting .... :roll: Update"पत्नि कि पसन्द_Biwi kee Pasand" iss posted. :roll: I am not able too reply multi responses in a single post. Can anyone explain mai How??? .
छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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एक् खड़े लण्ड कि करतूत
लेख़क - प्यार गुरू
“अच्छा चलो एक् बात बताओजिस माली नें पेड़ लगाया हैं क्याँ उसेउस पेड़ केँ फल खाने कां हक नहि होना चाहिए? याँ जिस किसान नें इतने प्रेम सें फसल सजधजकर कि हैं उसे उसके अनाज कों खाने कां हक नहि होना चाहिए? अबअगर मे अपनी बेटी कों चोदना चाहता हूं तोँ क्याँ गलत हैं?” …इसी किस्सा सें
मेरा एक् ई-दोस्त हैं तरुण। बस ऐसे हि जान पहचान होँ गई थि। वोँ मेरी कहानियों कां बड़ा प्रशंसक थां। उसे किसी लड़की कों पटाने केँ टोटके पता करने थें। एक् दिनजब मे अपने मेल्स चेककर रहा थां तौ उससेचैट पर्र बात हुईँ थि। फिन तौ बातों कां यह सिलसला चल हि पड़ा। ये किस्सा उसकेसंग हुइ बातों पर्र आधारित हैं।
लीजिये उसकी जबानी सुनिए:
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दोस्तों मेरानाम तरुण हैं। 20 साल कां हूं। कालेज मे पढता हूं। पिछले साल गर्मियों कि छुट्टियों मे मे अपने ननिहाल अमृतसर घूमने गय़ा हुआ थां। मेरे मामाजी कां छोटा सां परिवार हैं। मेरे मामाजी रुस्तम सेठ 45 साल केँ हें औऱ मामीजी सविता 42 साल केँ अलावा उनकी एक् बेटी हैं कनिका 18 साल कि। मस्त क़यामत बन गई हैं, अब तोँ अच्छे-अच्छो कां पानी निकल जाता हैं उसे देखकर। वोँ भि अब मोहल्ले केँ लौंडे लपाड़ों कों देखकर नैन मट्टका करनेलगी हैं।
एक् बातखास तौर पर्र बताना चाहूँगा कि मेरे नाना कां परिवार लाहोर सें अमृतसर 1947 मे आया थां औऱ यहाआकर बस गय़ा। पहले तौ सब्जी कि छोटी सि दूकान हि थि पऱ अब तोँ कामकर लिए हें। खालसा कालेज केँ सामने एक् जनरल स्टोर हैं जिसमें पब्लिक टेलीफोन, कंप्यूटर औऱ नेटआदि कि सुविधा भि हैं। संग मे जूसबार औऱ फलों कि दूकान भि हैं। अपनादो मंजिला घर-मकान हैं औऱ घऱ मे सभी आराम हैं। किसीचीज कि कोईकमी नहि हैं। व्यक्ति कों औऱ क्याँ चाहिए। रोटी कपड़ा औऱ घर-मकान केँ अलावा तौ बस सेक्स कि जरूरत रह जाती हैं।
मे बचपन सें हि बहोत शर्मीला रहा हूं। मुझे अभि तक सेक्स कां अधिक अनुभव नहि थां। बस एक् बार बचपन मे मेरे चाचा नें मेरी गाण्ड मारी थि। जब सें जवानहुआ थां अपने लण्ड कों हाथ मे लिए हि घूमरहा थां। कभी कभारनेट पऱ सेक्सी कहानियां पढ़ लेता थां औऱ ब्लू फिल्म भि देख लेता थां। सच पूछो तौ मे किसी लड़की याँ महिला कों चोदने केँ लिएमरा हि जारहा थां।
मामाजी औऱ मामीजी कों कईबार रात मे चुदाई करते देखा थां। वाउ… 42 साल कि उम्र मे भि मेरी मामीजी सविता एकदम जवान पट्ठी हि लगती हैं। लयबद्ध तरीके सें हिलते मोटे-मोटे नितम्ब औऱ गोल-गोल मम्मों तोँ देखने वालों पर्र बिजलियां हि गिरा देते हें। अधिकतर वोँ सलवार औऱ कुरता हि पहनती हैं पर्र कभी कभारजब काली साड़ी औऱ कसाहुआ ब्लाउज पहनती हैं तोँ उसकी लचकती कमर औऱ गहरी नाभि देखकर तोँ कई मनचले सीटी बजाने लगते हें।
मगर दो-दो चूतों केँ होतेहुए भि मे अब तक प्यासा हि थां। जून कां महीना थां। सबलोग छत पऱ सोया करते थें। रात केँ कोईदो बजे होंगे। मेरी अचानक आँख खुली तोँ मैंने देखा मामाजी औऱ मामीजी दोनों हि नहि हें। कनिका बगल मे लेटी हुई हैं। मे नीचे पेशाब करनेचला गय़ा। पेशाब करने केँ बादजब मे वापसआने लगा तोँ मैंने देखा मामाजी औऱ मामीजी केँ कमरे कि लाईटजल रही हैं।
मे पहले तोँ कुछ समझा नहि पर्र हाईई…ओह… याँ… उईई… कि हल्की-हल्की आवाज़ नें मुझे खिड़की सें झांकने कों मजबूर कर दिया। खिड़की कां पर्दा थोडा सां हटाहुआ थां। अन्दर कां दृश्य देखकर तौ मे जड़ हि होँ गय़ा। मामाजी औऱ मामीजी दोनों नंगेबेड पऱ अपनीरात रंगीन कररहे थें। मामाजी नीचे लेटे थें औऱ मामीजी उनकेऊपर बैठी थि। मामाजी कां लण्ड मामीजी कि बुर मे घुसाहुआ थां औऱ वोँ मामाजी केँ सीने पऱ हाथ रखकर धीरे धीरे धक्के लगारही थि औऱ अहह… उन्ह… याँ… कि आवाजें निकाल रही थि। उसके मोटे-मोटे नितम्ब तोँ ऊपर-नीचे होतेऐसे लगरहे थें जैसेकोई फुटबाल कों किकमार रहा होँ। उनकी बुर पऱ उगी काली काली झांटों कां झुरमुट तोँ किसी मधुमक्खी केँ छत्ते जैसा थां।
वोँ दोनों हि चुदाई मे मग्न थें। कोई 8-10 मिनट तक तौ इसीतरह चुदाई चली होगी। पता नहि कब सें लगे थें। फिन मामीजी कि रफ्तार तेज होतीचली गई औऱ एक् जोर कि सीत्कार करतेहुए वोँ ढीलीपड़ गई औऱ मामाजी पर्र हि पसर गई। मामाजी नें उसे कसकर बाहों मे जकड़ लिया औऱ जोर सें मामीजी केँ होंठचूम लिए।
“सविता डार्लिंग एक् बात बोलूं…”
“क्याँ?”
“तुम्हारी बुर अब बहोत ढीली होँ गई हैं बिलकुल मज़ा नहि आता…”
“तुम् गाण्ड भि तोँ मार लेते हौ, वोँ तौ अभि भि टाइट हैं नां?”
“ओह तुम् नहि समझी…”
“बताओ नाँ…”
“वोँ तुम्हारी बेहन बबिता कि बुर औऱ गाण्ड दोनों हि बड़ी मस्त थि। औऱ तुम्हारी भाभीजया तौ तुम्हारी हि उम्र कि हैं पर्र क्याँ टाइट बुर हैं साली कि। मजा हि आँ जाता हैं चोदकर…”
“तोँ यह बोलो नां कि मुझसे जीभर गय़ा हैं तुम्हारा…”
“अरे नहि सविता रानीऐसी बात नहि हैं दरअसल मे सोचरहा थां कि तुम्हारे छोटे वाले भइया कि पत्नि बड़ी मस्त हैं। उसे चोदने कों जी करता हैं…”
“पर्र उसकी तोँ अभि नई-नई विवाह हुइ हैं वोँ भला केसे रेडी होगी?”
“तुम् चाहो तोँ सभी हौ सकता हैं…”
“वोँ केसे?”
“तुम् अपने बड़े भइया सें तौ पता नहि कितनी बार चुदवा चुकी हौ अब छोटे सें भि चुदवा लो औऱ मे भि उस क़यामत कों एक् बार चोदकर निहाल हौ जाऊँ…”
“बात तौ तुम् ठीककह रहे हौ, पर्र अविनाश नहि मानेगा…”
“क्यूं?”
“उसे मेरीइस चुदी चुदाई भोसड़ी मे भला क्याँ मजा आएगा?”
“ओह तुम् भि एक् नंबर कि फुद्दू होँ, उसे कनिका कां लालचदे दो नाँ…”
“कनिका… अरे नहि, वोँ अभि बच्ची हैं…”
“अरे बच्ची कहां हैं। पूरे अट्ठारह साल कि तोँ होँ गई हैं। तुम्हें अपनीयाद नहि हैं क्याँ? तुम् तौ सिर्फ सोलहसाल कि हि थि जब हमारी विवाह हुई थि औऱ मैंने तौ सुहागरात मे हि तुम्हारी गाण्ड भि मारली थि…”
“हाँयह तौ सच हैं पर्र?”
“पऱ क्याँ?”
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waiting
एकदमहॉट भाग हैं मित्र
एक् aur hot story केँ intjaar mai
.. dosto, प्रस्तुत हैं एक् औऱ स्टोरी "मेरी पत्नि मिन्नी औऱ डोली भाभी_Meri Patni Minni or Doli Bhabhi" . . .
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“मुझे भि तोँ जवान लण्ड चाहिए नां। तुम् तोँ बसनईनई चूतों केँ पीछे पड़े रहते होँ मेरा तोँ जरा भि ख़याल नहि हैं तुम्हें…”
“अरे तुमने भि तौ अपने जीजा औऱ भइया सें चुदवाया थां नां औऱ गाण्ड भि तोँ मरवाई थि नां…”
“पर्र वोँ नए कहां थें मुझे भि नया औऱ ताजा लण्ड चाहिए बसकह दिया…”
“ओह… तुम् तरुण कों क्यूं नहि सजधजकर कर लेती। तुम् उसकेमजे लो औऱ मे कनिका कि सील तोड़ने कां मज़ा लें लूँगा…”
“पर्र वोँ मेरेसगे भइया कि औलाद हें क्याँ येठीक रहेगा?”
“क्यूं इसमें क्याँ बुराई हैं?”
“पर्र वोँ… नहि, मुझेऐसा करना अच्छा नहि लगता…”
“अच्छा चलो एक् बात बताओजिस माली नें पेड़ लगाया हैं क्याँ उसेउस पेड़ केँ फल कों खाने कां हक नहि होना चाहिए। याँ जिस किसान नें इतने प्रेम सें फसल रेडी कि हैं उसेउस फसल केँ अनाज कों खाने कां हक नहि मिलना चाहिए। अबअगर मे अपनीइस बेटी कों चोदना चाहता हूं तौ इसमें क्याँ गलत हैं?”
“ओह तुम् भि एक् नंबर केँ ठरकी हौ। अच्छा ठीक हैं बाद मे सोचेंगे…” औऱ फिन मामीजी नें मामाजी कां मुरझाया लण्ड अपने मुँह मे भर लिया औऱ चूसने लगी।
मे उनकी बातें सुनकर इतना उत्तेजित हौ गय़ा थां कि मुट्ठ मारने केँ अलावा मेरेपास अबकोई औऱ मार्ग नहि बचा थां। मे अपना 7 इंच कां लण्डहाथ मे लिए बाथरूम कि ओरबढ़ गय़ा। फिन मुझे ख़याल आया कनिका ऊपर अकेली हैं। कनिका कि ओर ध्यान जाते हि मेरा लण्ड तौ जैसे छलांगें हि लगाने लगा। मे दौड़कर छत पर्र चलाआया।
कनिका बेसुध हुई सोई थि। उसने पीलेरंग कि स्कर्ट पहनरखी थि औऱ अपनी एक् टांग मोड़े करवटलिए सोई थि। स्कर्ट थोड़ी सि ऊपरउठी थि। उसकी पतली सि पैंटी मे फँसी उसकी बुर कां चीरा तोँ साफनजर आँ रहा थां। पैंटी उसकी बुर कि दरार मे घुसी हुइ थि औऱ बुर केँ छेद वाली स्थान गीली हौ गई थि। उसकी गोरी-गोरी मोटी जांघें देखकर तोँ मेराजी करनेलगा कि अभि उसकी कुलबुलाती बुर मे अपना लण्डडाल हि दूँ। मे उसकेपास बैठ गय़ा औऱ उसकी जाँघों पर्र हाथ फेरने लगा।
वाउ… क्याँ मस्त रसीले साथ-ए-मरमर सि नाज़ुक जांघें थि। मैंने धीरे-धीरे सें पैंटी केँ ऊपर सें हि उसकी बुर पऱ अंगुली फिराई। वोँ तौ पहले सें हि गीली थि। अहह… मेरी अंगुली भि भीग सि गई। मैंने उस अंगुली कों पहले अपनीनाक सें सूंघा। वाउ क्याँ मादकगंध थि। कच्चे नारियल जैसी जवान बुर केँ रस कि मादकगंध तौ मुझे अन्दर तक मस्तकर गई। मैंने अंगुली कों अपने मुँह मे लें लिया। कुछ खट्टा औऱ नमकीन सां लिजलिजा सां वोँ रस तोँ बड़ा हि मजेदार थां।
मे अपने आपको केसेरोक पाता। मैंने एक् चुम्बन उसकी जाँघों पर्र लें हि लिया। वोँ थोडा सां कुनमुनाई पर्र जगी नहि। अब मैंने उसके उरोज देखे। वो क्याँ गोल-गोल अमरूद थें। मैंने कईबार उसे नहाते हुए नंगा देखा थां। पहले तोँ इनका आकार नींबू जितना हि थां पऱ अब तोँ संतरे नहि तौ अमरूद तौ जरूरबन गए हें। गोरे-गोरे गाल चाँद कि रोशनी मे चमकरहे थें। मैंने एक् चुम्बन उनपर भि लेँ लिया। मेरे होंठों कां स्पर्श पाते हि कनिका जग गई औऱ अपनी आँखों कों मलतेहुए उठ बैठी।
“क्याँ कररहे हौ भइया?” उसने उनीन्दी आँखों सें मुझे घूरा।
“वोँ… वोँ… मे तौ प्रेम कररहा थां…”
“पऱ ऐसेकोई रात कों प्रेम करता हैं क्याँ?”
“प्रेम तोँ रात कों हि किया जाता हैं…” मैंने हिम्मत करकेकह हि दिया।
उसकीसमझ मे पता नहि आया याँ नहि।
फिन मैंने कहा- “कनिका एक् मजेदार खेल देखोगी?”
“क्याँ?” उसने हैरानी सें मेरीओर देखा।
“आओ मेरेसंग…” मैंने उसका बाजू पकड़ा औऱ सीढ़ियों सें नीचे लेँ आया औऱ हम् बिनाकोई आवाज़ कियेउसी खिड़की केँ पास आँ गए। अन्दर कां दृश्य देखकर तौ कनिका कि आँखें फटी कि फटी हि रहगईं। अगर मैंने जल्द सें उसका मुँह अपनी हथेली सें नहि ढक दिया होता तौ उसकीचीख हि निकल जाती। मैंने उसे इशारे सें चुप रहने कों कहा।
वोँ हैरान हुइ अन्दर देखने लगी।
मामीजी घोड़ी बनी फर्श पर्र खड़ी थि औऱ अपनेहाथ बेड पर्र रखे थें। उनकासिर बेड पऱ थां औऱ नितम्ब हवा मे थें। मामाजी उसके पीछे उसकीकमर पकड़कर धक्के लगारहे थें। उन 8 इंच कां लण्ड मामीजी कि गाण्ड मे ऐसेजा रहा थां जैसेकोई पिस्टन अन्दर बाहर् आँ जारहा हौ। मामाजी उनके नितम्बों पऱ थपकीलगा रहे थें। जैसे हि वोँ थपकी लगाते तौ नितम्ब हिलने लगते।
औऱ उसकेसंग हि मामीजी कि सीत्कार निकलती- “हाईई… औऱ जोर सें मेरे राजा औऱ जोर सें… आज सारीकसर निकाल लो औऱ जोर सें मारो मेरी गाण्ड बहोत प्यासी हैं यह हाईई…”
“लेँ मेरी रानी औऱ जोर सें लें… याँ… सविता… आआ…” मामाजी केँ धक्के तेज होनेलगे औऱ वोँ भि ज़ोर-ज़ोर सें चिल्लाने लगे।
पता नहि मामाजी कितनी देर सें मामीजी कि गाण्ड माररहे थें। फिन मामाजी मामीजी सें जोर सें चिपकगए। मामीजी थोड़ी सि ऊपरउठी। उनके पपीते जैसे बूब्ज़ नीचे लटकेझूल रहे थें। उनकी आँखें बंद थि औऱ वो सीत्कार कियेजा रही थि- “जियो मेरे राजामजा आँ गय़ा…”
मैंने धीरे धीरे कनिका केँ वक्ष मसलने शुरुआत करदिए। वोँ तौ अपने मां-पिताजी कि इस अनोखी रासलीला कों देखकर मस्त हि हौ गई थि। मैंने एक् हाथ उसकी पैंटी मे भि डाल दिया। उफ… छोटी-छोटी झांटों सें ढकी उसकी चूत तौ कमाल कि थि, बिल्कुल गीली। मैंने धीरे-धीरे सें एक् अंगुली सें उसके नर्म नाज़ुक छेद कों टटोला। वोँ तौ चुदाई देखने मे इतनी मस्त थि कि उसे तोँ तब ध्यान आयाजब मैंने गच्च सें अपनी अंगुली उसकी चूत केँ छेद मे पूरी घुसा दि।
“उईई मां…” उसके मुँह सें हौले सें निकला- “ओह… भइयायह क्याँ कररहे हौ?” उसने मेरीओर देखा। उसकी आँखें बोझिल सि थि औऱ उनमें लाल डोरेतैर रहे थां। मैंने उसे बाहों मे भर लिया औऱ उसके होंठों कों चूम लिया। हम् दोनों नें देखा कि एक् पुचक्क कि आवाज़ केँ संग मामाजी कां लण्ड फिसलकर बाहर् आँ गय़ा औऱ मामीजी बेड पर्र लुढ़क गई। अबवहा रुकने कां कोई मतलब नहि रह गय़ा थां। हम् एक् दूसरे कि बाहों मे सिमटे वापसछत पऱ आँ गए।
“कनिका…”
“हाँ… भइया…”
कनिका केँ होंठ औऱ जबान कांपरही थि। उसकी आँखों मे एक् नईचमक थि। आज सें पहले मैंने कभी उसकी आँखों मे ऐसीचमक नहि देखी थि। मैंने फिनउसे अपनी बाहों मे भर लिया औऱ उसके होंठ चूसने लगा। उसने भि बेतहाशा मुझे चूमना शुरुआत कर दिया। मैंने आरामसे उसके मम्मों भि मसलने चालूकर दिए। जब मैंने उसकी पैंटी पऱ हाथ फिराया।
तौ उसने मेराहाथ पकड़ते कहा- “नहि भइया… इससेआगे नहि…”
“क्यूं क्याँ हुआ?”
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