छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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मेरा लण्ड भि फटने वाला हौ गय़ा। सरिता कां दर्द सें बुराहाल थां औऱ वोँ जीतू कां लण्ड निकालना चाहती थि मगर अलका नें उसकेहाथ पकड़रखे थें। सरिता केँ पूरे जिस्म पर्र पसीने कि बूंदे उभर गयीँ, उसने शायद इतना दर्दकभी नहि सहा थां।
अब जीतू नें लास्ट झटका मारा औऱ बोला- “बहन कि लोडी…यह लें…”
औऱ सरिता दर्द सें पागल होँ गई, औऱ अपनासर पटकने लगी। अब पूरा लण्ड उसकी बुर मे थां औऱ जीतू भि दर्द सें कराहरहा थां।
अलका नें जीतू कों थोडा होल्ड करने कों कहा औऱ सरिता सें बोलि- “सरिता, हिम्मत सें काम लेँ औऱ शांत हौ जा पच्च-पुच्च… अभि तौ शुरुआत हुआ हैं…”
फिन अलका मुश्कुराई औऱ जीतू सें बोलि- “जीतू भइया, बस अब रुकना मत… इसकी तौ पहली चुदाई हैं यह तोँ चिल्लाएगी हि…”
औऱ जीतू नें अपना लण्ड बाहर् कि तरफ खींचना शुरुआत किया। सरिता केँ माथे सें पसीना टपकरहा थां औऱ वोँ चीखरही थि- “ओह्ह… मम्मी अह्ह… बसस्स आहिस्ता करो… मे मर जाऊँगी… आअह्ह… अलका प्लीज़्ज़… ओह्ह…”
सरिता कि बुर इतनी टाइट थि कि पूरीतरह सें लण्ड सें ठुंसी थि औऱ उसकी बुर कि चमड़ी भि लण्ड केँ संग अंदर-बाहर् होँ रही थि। अब जीतू नें उसकी चुदाई तेजकर दि औऱ उसकी गाण्ड कि पिटाई भि करनेलगा। उधर अलका भि नंगी होकर अपनी बुर चुदवाने लगी। सरिता अलका कों भि देखरही थि जौ धीरे-धीरे चुदवाने कां मज़ा लेँ रही थि।
अब सरिता कों थोडा आनंद आँ रहा थां, बुर गीली होने सें उसका दर्द थोडा वीर्य होनेलगा औऱ वोँ भि चुदाई कां मजा लेनेलगी औऱ सिसकने लगी- “आहम्म्म… ओह्ह… बस्स्स… ओह्ह उम्म्म्म…” औऱ थोड़ी हि देर मे सरिता कां पानीझड़ गय़ा।
10 मिनट होँ चुके थें औऱ जीतू भि झड़ने वाला होँ गय़ा थां। उसने अपना लण्ड बाहर् निकाल लिया औऱ सरिता केँ मुँह कि तरफ भागा। सरिता कों सिर्फ़ कुछ पलों कां आराम मिला औऱ एक् दूसरा बड़ा लण्ड जोँ उसकी बुर कों फाड़ने कि लिए सजधजकर थां उसकी बुर मे घुस गय़ा। सरिता नें फिन दर्द सें अपना मुँहखोल दिया औऱ इतने मे हि जीतू नें अपना गीला लण्ड सरिता केँ मुँह मे डाल दिया।
अलकासभी देखरही थि औऱ वोँ बोलि- “जीतू भइया, इसको पूरा वीर्य खिलाओ। कुतिया कां मुँहबंद करदो नहि तोँ थूक देगी…”
औऱ जीतू नें सरिता केँ जबड़े कों दबा दिया औऱ उसकागला पकड़कर पूरा वीर्य उसके मुँह मे भर दिया। वोँ गूं-गूं-गूं करनेलगी मानो वीर्य कों बाहर् थूकना चाहती होँ। मगर वोँ ज़्यादा देर वीर्य अपने मुँह मे नहि रखपाई औऱ एक् हल्के सें घूंट केँ संग सारा निगल गयीँ,। अब जीतू नें अपना लण्ड उसके मुँह सें बाहर् निकाला। सरिता अब भि दर्द सें कराहरही रही थि औऱ अब उसके होंठों केँ साइड सें जीतू कां थोडा सां वीर्य चूरहा थां। सरिता कि चुदाई अभि भि ट्रेन केँ एंजिन कि तरहचल रही थि।
इसबार वोँ लड़का 5 मिनट मे हि झड़ गय़ा औऱ वोँ भि लण्ड निकालकर सरिता केँ मुँह कि तरफ बढ़ा। सरिता पहले हि समझ गयीँ, थि औऱ नां नां करनेलगी। मगर नाँ नाँ करते भि उसके लड़के कां लण्ड उसके मुँह मे घुस गियायगा औऱ उसने भि गर्म-गर्म वीर्य उसके मुँह मे उड़ेल दिया। सरिता नें थोडा उसको खाया औऱ थोडा उसके मुँह सें टपकरहा थां।
अब तीसरा लण्ड उसकी बुर मे घुस गय़ा औऱ सरिता फिन सें थोड़ी सि गर्म होँ गयीँ,। अब वोँ चुदाई कां मजा लें रही थि।
उधर अलका भि एक् बारझड़ चुकी थि। वोँ सरिता केँ पासआई औऱ बोलीं- “दर्दकम हुआ?
सरिता नें टूटती हुई आवाज़ मे कहा-“हाँ… कम हौ गय्या…”
अलका बोलि- “चुदाई कां आनंद आँ रहा हैं?”
औऱ सरिता नें मानो शर्माकर सिर्फ़ अपनासिर हिला दिया।
अब जीतू बियर पीनेलगा औऱ सरिता केँ पासआया औऱ बोला- “सरिता…”
सरिता नें कहा-“हाँ जी…”
जीतू- कैसालग रहा हैं तेरी?
सरिता नें कोई जवाब नहि दिया मानो वोँ अपनी चुदाई मे बहोत व्यस्त हौ।
जीतू नें उसके बालों सें उसे पकड़ा औऱ उसकासिर ऊपर उठाकर पूचा-बोल कैसालग रहा हैं?
औऱ सरिता बोलि- “अच्छा सर…”
जीतू- औऱ चुदाई करें?
सरिता कुछ नहि बोलि औऱ पीछे सें हौ रही चुदाई केँ झटके सहतीरही।
जीतू बोला-“बोल मे रंडी हूं…”
सरिता चुपरही।
जीतू नें एक् जोर कां चांता उसकेगाल पऱ जड़ दिया औऱ फिन बोला-“बोल मे रंडी हूं…”
इसबार सरिता धीरे-धीरे सें बोलि- “मे रन…दि हूँन…”
अब जीतू बोला-“बोल मुझे तेज़-तेज़ सें चोदो…”
औऱ इसबार सरिता नें बिना किसी नखरे केँ बोल दिया- “मुझे तेज़-तेज़ सए चोओदो…” अब सरिता कि हालत पस्त होनेलगी थि औऱ तीसरा लड़का भि झड़ गय़ा थां। मगर अभि तौ 4 औऱ बाकी थें।
जीतू नें बोला-“अब एक् कामकरो, इसको लण्ड पऱ बिटाओ…” फिन जीतू नें चौत लड़के कों बोला- “तूँ इसके नीचेघुस जा औऱ अपने लण्ड कि सवारी करवा…”
सरिता नें बड़े आहिस्ता उनकीबात मानली औऱ उस लड़के केँ लण्ड पर्र चढ़ गयीँ,। उसने उसका लण्ड अपने आप् अपनी बुर केँ नीचेरखा औऱ धीरे-धीरे सें उसे अंदर लेनेलगी। यह तौ औऱ भि दर्दनाक थां औऱ वोँ फिन सें चिल्लाने लगी- “उफ्फ… उह्ह… मां, बहोत दर्द हौ रहा हैं…”
मगरअब किसी कों उसके चिल्लाने कां कोईफरक नहि पड़रहा थां। उसकी चुदाई होतेहुए पूरासवा घंटा होँ चुका थां। अब पूरा लण्ड उसकी बुर मे घुस चुका थां औऱ उसकी चुदाई फिन सें चालू होँ चुकी थि। वोँ पस्त होकरउस लड़के पर्र गिर गयीँ,। अब जीतू भि फिनउठा औऱ अपना लण्ड खड़ा करनेलगा, औऱ अब वोँ उन दोनों केँ ऊपरचढ़ गय़ा।
अलका बोलि- “जीतू भइया, दो लण्ड नहि लें पाएगी…”
जीतू बोला- “मे इसकी गाण्ड मारने जारहा हूं…”
इस पऱ अलका जल्दी सरिता केँ पास पहुँची औऱ बोलीं- “तुँ तौ गयीँ, अब…मगर घबरामत, थोडा दर्द होगा। अपनी गाण्ड जितनी खोल सकती हैं खोल…”
औऱ सरिता नें हल्की सि आवाज़ मे अलका सें पूछा-अब क्याँ बाकी हैं? क्याँ करेंगे जीतूजी?
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Jemsbond wrote:Saare update एक् सें badhkar एक् haen Jaunpur bhay Keep it up dear Thanks for reading the kahani & responce
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तब अलका नें उसे बताया कि अब उसकी गाण्ड कि चुदाई होगी औऱ वोँ सरिता कों फिन सें रेडी करनेलगी। उसनेफिन सें उसको एक् कर्व मे झुकाया औऱ उसकी टाँगों कों मोड़वा दिया। अब सरिता फिन सें रेडी थि। उसकी गाण्ड ऊपरउठ गई थि औऱ नीचे सें चलरही चुदाई केँ झटकों सें बार-बार ऊपर आँ रही थि। अबसभी उसके मुँह कि तरफदेख रहे थें।
अलका मुश्कुराकर बोलीं- “जीतू भइया, आज लगता हैं इसको पूरी रांड़ बनाकर हि दम लोगे?
औऱ जीतू भि मुश्कुरा दिया। अब जीतू नें सरिता कि छोटी सें लाल गाण्ड कों अपने हाथों सें सहलाया औऱ उसके चूतड़ों कों दबाने लगा। सरिता अब लंबी-लंबी साँसें भररही थि। नीचे वाले लड़के नें उसकी बुर कि चुदाई थोड़ी देर केँ लिएरोक दि थि। अबसभी सजधजकर थें।
जीतू नें बड़े प्रेम सें उसकी छोटी सि गाण्ड कों अपने अंगूठे औऱ एक् उंगली सें चौड़ा किया औऱ अपने लण्ड कां टोपा उसकी गाण्ड केँ डार्क पिंकछेद पर्र रखा दिया। जीतू नें थोडा दम लगाया औऱ सरिता नें आँखें बंदकर लीं, मगर उसकी गाण्ड इतनी छोटी औऱ टाइट थि कि लण्ड अंदर नहि जा पाया। इस बार जीतू नें अपने लण्ड पऱ थूका औऱ उसकी बुर सें थोडा पानी अपनी उंलगी पर्र लेकर उसकी गाण्ड केँ छेद पऱ मला। जीतू नें फिन सें कोशिश कि औऱ इसबार टोपा अंदर गाण्ड मे घुस गय़ा।
औऱ सरिता चिल्लाई- “आआयईई… मम्मी मैंईई मर्र्रर गययी…”
सभी मुश्कुराने लगे औऱ अलका बोलि- “जीतू भइया, बस रगड़दो कुतिया कि गाण्ड कों…”
औऱ अब जीतू नें मानो पूरी ताकत केँ संग सरिता कि गाण्ड मारनी चालूकर दि। नीचे वाले लड़के नें भि चुदाई शुरुआत कर दि।
अब सरिता तेज़-तेज़ सें म्मम्मी मम्मी चिल्लाने लगी।
मगर जीतू औऱ तेज होता गय़ा। सरिता कि गाण्ड पूरीतरह सें फट गई, थि औऱ अब उसकी गाण्ड सें खून भि निकालने लगा थां।
अलका नें पांचवें लड़के सें बोला-“अरे तुँ ऐसाकर कि इसका मुँहभर दे…”
औऱ अब तीनों छेदों मे सरिता कि चुदाई चलरही थि। नीचे सें छप-छप कि औऱ ऊपर सें ठक-ठक कि आवाज़ आँ रही थि, जबकि उसके मुँह सें गों-गों-गों कि आवाज़ आँ रही थि।
अब जीतूफिन सें झड़ने वाला थां तौ उसने अपना लण्ड सरिता कि गाण्ड सें खींचा औऱ उसकी गर्दन पर्र बारिष कर दिया।
अब चौथे लड़के कि बारी थि जोँ बहोत देर सें इंतेजार कररहा थां। उसने भि जीतू भइया कि तरह गाण्ड कों चुना औऱ सातवें नें बुर कों।
इसबार सरिता कि फिन सें पोजीशन चेंजकर दि गई,। उसको एक् मिनट केँ लिए फर्श पऱ खड़े होने कों बोला, औऱ वोँ ऐसे खड़ी हौ गई, जैसेसभी कुछ नार्मल हैं। उसकोइस बात कां कुछ भि अहसास नहि हुआ कि वोँ 7 नंगे लड़कों केँ बीच मे एकदम नंगी खड़ी हैं औऱ लगभगदो घंटों सें उसकारेप चलरहा हैं। वोँ अपना पसीना पोंछने लगी।
अबछठा लड़का टेबल पर्र बैठ गय़ा औऱ बोला- “सरिता जी। आँ जाओ जल्द सें…”
औऱ सरिता फिन सें टेबल पर्र चढ़ गयीँ,। अबछठे लड़के नें कहा-“ऐसा कर सरिता, मेरा लण्ड अपनी गाण्ड मे लें लेँ…”
इस पर्र वोँ फिन सें घबरा गयीँ, औऱ बोलीं- “आप् लोगआगे सें करलो, पीछे बहोत दर्द हौ रहा हैं…”
इस पऱ उस लड़के नें बिना किसीतरस केँ सरिता केँ चूचुक पकड़े औऱ जोर सें खींचने लगा।
सरिता दर्द सें चिल्लाने लगी- “आऐयईई… प्लीज़्ज़ छोड़ो… अल्ल्लका प्लीज़्ज़ कुछ बोलो…”
अलका बोलि- “साली कुतिया, क्यूं नखराकर रही हैं? जैसा तुम्हे बोलरहे हें वैसा हि कर…”
सरिता मरती क्याँ नाँ करती औऱ वोँ उसके 8 इंच मोटे लण्ड पऱ अपनी गाण्ड रखकर बैठने लगी, जैसे-जैसे लण्ड गाण्ड मे जारहा थां सरिता तेज़-तेज़ सें चिल्ला रही थि। अब पूरा लण्ड अंदरजा चुका थां औऱ वोँ एक् मेढक कि तरह लण्ड पर्र बैठकर फुदकरही थि।
अब सातवां लड़काआया औऱ उसने सरिता कि दोनों टाँगें अपने हाथों मे पकड़ली। सरिता भि पीछे कि तरफझुक गयीँ, औऱ अपनेहाथ नीचे वाले लड़के केँ कंधों पऱ रखलिए। नीचे वाला आदमी उसकी गाण्ड मे झटकेदे रहा थां औऱ संग-संग उसके छोटे-छोटे चूचेमसल रहा थां। अब सातवें लड़के नें उसकी बुर मे अपना लण्ड घुसा दिया।
इसबार सरिता कों दर्द नहि हुआ, शायद उसकी बुर अब चौड़ी औऱ ढीली हौ गई, थि। अबफिन सें सरिता केँ दोनों छेदों मे चुदाई चालू होँ गई,।
अलकायह सभी देखकर अपनी बुर मे उंगली डालरही थि। अब वोँ भि पूरी नंगी होकर टेबल पऱ चढ़ गयीँ, औऱ उसने अपनी बुर सरिता केँ मुँह पर्र रख दि औऱ बोलीं- “चल्ल इसको अच्छे सें चाट…”
औऱ सरिता नें अपनीजीभ बाहर् निकाली औऱ कुत्ते कि तरह अलका कि बुर कां पानी चाटने लगी। सरिता पूरी मस्त हौ गयीँ, थि औऱ सिसककर रही थि, औऱ थोड़ी हि देर मे उसने अलका कि पूरी बुर अपनी होठों मे दबाली औऱ आम कि तरहउसे चूसने लगी। थोड़ी हि देर मे अलका कां पानी सरिता केँ मुँह मे झड़ गय़ा औऱ मेरा पानी भि झड़ गय़ा।
उन दोनों लड़कों नें भि अपने लण्ड बाहर् निकाल लिए औऱ सरिता कों नीचे जमीन पऱ फेंक दिया। वोँ अधमरी हालत मे फर्श पर्र पड़ी थि। अब सबने उसके चारों तरफ घेरा बनाया। दोनों लड़कों नें अपने लण्ड कि पिचकारी सरिता केँ चेहरे औऱ छाती पऱ छोड़ दि।
अब जीतू नें उसकेबाल पकड़कर उसको उठाया औऱ बोला- “क्यूं कुतिया, फिन थप्पड़ मरेगी किसी कों?
सरिता कुछ बोलीं नहि।
अब जीतू बोला-“कल सें तुँ रोज क्लास मे जाने सें पहले मेरेपास आएगी औऱ तेरी बुर मुझे हमेशा शेव्ड मिलनी चाहिए। अबचल सबका लण्डचूस केँ अच्छे सें साफकर…”
वोँ अपने घुटनों पऱ बैठी औऱ एक्-एक् करके सबके लटकेहुए लण्ड चूम-चूमकर साफ करनेलगी।
अलका नें अपने कपड़े पहनलिए थें। वोँ सरिता केँ पासआई औऱ बोलीं- “किसी कों मत बतइओ, बदनामी तेरी हि होगी औऱ हर लड़की केँ संगयह होता हैं…” अब वोँ सरिता कों फिन सें टेबल पऱ लें गयीँ, औऱ बोलि- “चलजरा दिखा हालत अपनी बुर कि…”
सरिता नें टेबल पर्र लेटकर अपनी टांगें खोलदीं। सभी उसकीफटी हुईँ बुर देखने केँ लिएपास आँ गये। जीतू नें बुर कों पकड़ा औऱ दबाकर देखा, सरिता कि बुर दोनों तरफ सें सूज केँ मोटी हौ गयीँ, थि औऱ एकदमलाल थि, जीतू नें उसकी टांगें औऱ ऊपर उठाई औऱ उसकी गाण्ड भि देखी। गाण्ड कां तौ हाल औऱ भि बुरा थां, छोटी सि गाण्ड कां छेद एकदम बड़ा हौ गय़ा थां औऱ उसमें सें लाल-लाल पानी बाहर् आँ रहा थां। जीतू उसकी गाण्ड औऱ बुर देखने केँ बाद अलका सें बोला- “मेरे ख्याल सें ठीकठाक चुदाई हुइ हैं कुतिया कि मगर मुझेलग रहा हैं एक्-एक् बार बुर औऱ मारनी चाहिए…”
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अलकाहँस पड़ी औऱ बोलि- “तुम् मानोगे तौ होँ नहि औऱ वैसे भि अब तोँ इसकेसंग कुछ भि करो…” औऱ यह कहकर उसने सरिता कों बोला- “सरिता चल एक् राउंड औऱ होगा अभि जल्द सें टेबल पर्र चढ़जा…”
इस पऱ सरिता एकदमडर गयीँ, औऱ बोलि- “प्लीज़्ज़… अबबसकरो, मेरी गाण्ड मे बहोत दर्द हौ रहा हैं…”
तब जीतू बोला-“ठीक हैं, हम् सभी सिर्फ़ तेरी बुर हि चोदेंगे पऱ तुम्हें इसबार सबका वीर्य खानां पड़ेगा…”
औऱ सरिता नें हाँ मे सर हिला दिया। वोँ फिन सें टेबल पऱ चढ़ गयीँ, औऱ कुतिया बनकर अपनी बुर कों परोस दिया औऱ बोलीं- “जीतू चोदो मुझे…”
औऱ फिन सें उसकी चुदाई शुरुआत होँ गई,, अब तक उसकी चुदाई होते 3 घंटेबीत चुके थें औऱ वोँ अब भि दर्द सें चिल्ला रही थि। अबसभी थक चुके थें, सरिता अधमरी हालत मे टेबल पऱ वीर्य मे लथफथ पड़ी थि औऱ आरामसे अपनी बुर कों सहलारही थि।
सबने अपने कपड़े पहनलिए।
सरिता अब भि नंगी थि औऱ आँखें झुकाए बैठी थि। उसने अलका कि तरफ देखा औऱ बोलीं- अब मे जाऊँ?
इस पर्र अलका नें उसके कपड़े उठाने शुरुआत किए। पऱ अचानक हि अलका केँ दिमाग़ मे फिनकुछ आँ गय़ा औऱ उसने सरिता केँ कान मे कुछकहा। जिसे सुनकर सरिता थोड़ी मुश्कुराई औऱ नाँ मे गर्दन हिलाने लगी। इस पऱ अलका बोलि- “अरे अंतिम काम हैं कर लेँ जीतू भइयाखुश हौ जाएँगे…”
जीतू कोने मे खड़ा अपनी शर्टपहन रहा थां औऱ अचानक सरिता नंगी हि जीतू कि तरफ बढ़ने लगी औऱ जीतू केँ पासआकर बोलीं- “वोँ मैंईएन्न्न्…”
जीतू बोला-हाँ बोल क्याँ हैं…”
सरिता नें अपनेगाल पऱ आतेहुए बाल अपनेकान केँ पीछे अटकाए औऱ वहीं खड़ीरही।
इस पऱ अलका जीतू केँ पासआई औऱ बोलि- “जीतूयह थोडा चखना चाहती हैं…”
मे भि कुछसमझ नहि पाया, मगर जीतूसमझ गय़ा औऱ बहोत खुशहुआ औऱ बोला-“अरे सरिता तूने तोँ दिलजीत लिया, चल बैठ नीचे…”
सरिता नीचेबैठ गयीँ, औऱ जीतू नें फिन सें अपना लण्ड उसके मुँह मे डाल दिया औऱ सरिता नें अपना मुँहबंद कर लियाअब औऱ थोड़ी हि देर मे सरिता मानो कुछ-कुछ गटकरही थि। औऱ अब मे समझ गय़ा कि जीतू उसको अपना पेशाब पीलारहा थां। अगले हि समय जीतू नें अपना लण्ड बाहर् निकाल लिया औऱ उसका पेशाब सरिता केँ होंठों पर्र टपकता हुआ उसकी टाँगों पर्र भि गिरा।
अलका नें इसबार तेज़-तेज़ सें तालियां बजाई औऱ सरिता मुश्कुराते हुए शर्मा गयीँ,। अब वोँ अपने कपड़े पहनने लगी। सरिता अब एक् रांड़ बन चुकी थि।
मे जनता थां कि मे यहसभी कुछरोक सकता थां मगर शायद मे यहसभी कुछ देख्ना चाहता थां औऱ मैंने अपने आपकोमाफ कर दिया। आखिरयह दिन तौ हर लड़की कि ज़िंदगी मे आता हैं कोई एक् सें चुदती हैं तौ कोई अनेक सें।
साम कों घऱ जातेसमय मैंने अपनी बेहन कों अलका केँ संग देखा। अलका मेरीतरफ देखकर मुश्कुराई औऱ बोलि- “अब जीतू सें डरने कि कोई जरूरत नहि हैं। अब तुम्हारी बेहन उसकी…” इतना बोलकर वोँ बोलि- “क्याँ बन गई, हैं वोँ तेरी बेहन बताएगी…”
सरिता शरमाने लगी औऱ बोलीं- “सिर्फ़ फ्रेंड…” औऱ लड़खड़ाते हुए अलका केँ संग कैंटीन मे चली गई,।
मे एक् बारफिन अपनी बेहन कों चुदवाने जाने केँ लिए देखता रहा। यह एक् असली घटना हैं औऱ शायद तुममें सें कोईउस कालेज मे रहा होँ, 10 साल पहले तोँ मुझे औऱ सरिता कों पहचान जाओगे। सरिता आज भि एक् रंडी हैं औऱ पता नहि कहां-कहां चुदवाती होगी।
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***** Next Part too be Contd।.*****
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भइयाजी धमाके पे धमाका कर दिया हैं आपने वेरीगुड भइया
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