छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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मेरी बेहन कां गैंगरेप हुएकुछ हि दिनहुए थें औऱ अबवोह कालेज केँ यूनियन रूम मे रोज जीतू सें मिलने जाती थि जहाँ उसकीरोज चुदाई होँ रही थि।
जीतू कि गर्लफ्रेंड अलका भि उसकी चुदाई केँ मजे लेती थि, एक् दिन मेरी बेहन यूनियन रूम मे थि औऱ जीतू उसकोचोद रहा थां, मेरी बेहन केँ चिल्लाने कि आवाज़ बाहर् तक सुनाई पड़रही थि, मे यूनियन रूम कि विंडो सें अंदर देखने कि कोशिश कररहा थां कि तभीवहा अलका आँ गयीँ,।
औऱ मुझे देखकर मुश्कुराने लगी, वोह बोलि- “क्यूं अपनी बेहन कि चुदाई देख्ना चाहता हैं क्याँ?”
मे चुपरहा।
वोहफिन बोलि- “शर्मा मत तेरी बेहन तोँ वैसे भि कालेज कि टाप रंडीबन चुकी हैं, तुम कोअगर उसको चोदना हैं तोँ बोल, अभि इंतजाम कर देती हूं…”
मैंने अपनासिर नाँ मे हिला दिया औऱ वहा सें चला गय़ा।
अगली सुभह अलका मेरेपास आई औऱ बोलीं- “इस सनडे कों सुभह 9:00 बजे मेरेघऱ पहुँच जइओ क्यूंकी 10:00 बजे तेरी बेहन आएगी…”
मैंने पूछा- किसलिए?
तोँ वोह बोलीं- “तेरी बेहन सरिता कों पूरेदिन चोदने कां प्रोग्राम बनाया हैं औऱ बहुतलोग आएँगे औऱ अगर तूँ देख्ना चाहता हैं तौ एक् घंटा पहले आँ जइयो। मे तुम्हे पास केँ रूम मे छुपा दूँगी जहाँ सें तुँ पूरेदिन आहिस्ता बैठकर सरिता कि चुदाई देखियो…”
यहसुन मे एकदम भौचक्का रह गय़ा कि सरिता पूरेदिन केसे चुदेगी? क्यूंकी वोह एकदम पतली थि औऱ उसकी गाण्ड औऱ बुर केँ छेद बहोत छोटे थें। मगरपता नहि क्यूं मे मना नहि कर पाया। सनडे कों मे अलका केँ घऱ पहुँच गय़ा। अलका मुझे ड्राइंग रूम मे लें गई, जहाँ एक् सोफा, एक् स्टूल औऱ एक् टेबलरखी थि। पास मे एक् प्लास्टिक कि रस्सी औऱ एक् बेंत कि छड़ी भि पड़ी थि।
अलका नें मुझसे कहा कि- “सभी सरिता केँ लिएरखा हैं…”
मैंने उससे पूछा- “क्याँ मेरी बेहन सरिता कों इसके बारे मे पता हैं?”
तौ वोह बोलीं- “नहि, उसको तौ सिर्फ़ इतनापता हैं कि जीतू उसको चोदने आँ रहा हैं…”
थोड़ी देर मे बेलबजी औऱ मे जल्द सें बराबर केँ रूम मे छिप गय़ा। मैंने देखा कि लगभग 12 मुस्टंडे व्यक्ति अलका केँ घऱ मे आँ गये। वोँ सभीशकल सें मवाली लगरहे थें औऱ सभी हट्टे-कट्टे थें। तभीउन सबने अलका कों 500-500 रूपये देने शुरुआत किए। यह देखकर मे समझ गय़ा कि अलका नें मेरी बेहन कों रंडी केँ तरह सिर्फ़ 500 रूपये मे बेच दिया हैं।
अलका मेरेपास अंदरआई औऱ बोलीं- “तेरी बेहन फ्री मे रोज कालेज मे चुदवाती हैं। आजवोह पहलीबार कमाने वाली रंडी बनेगी…” औऱ वोँ मुश्कुरा केँ बाहर् बैठे 12 लोगों कों सरिता केँ बारे मे बताने लगी।
उसनेकहा- “आज जौ लड़कीयहा आएगी उसकानाम सरिता हें औऱ सेकन्ड एअर कि स्टूडेंट हैं, उसकीउमर 20 साल हैं, गोरी औऱ एकदम चिकनी हैं। पऱ हाँ…मगर थोड़ी पतली हैं इसलिये जरा आहिस्ता चोदना क्यूंकी उसकेछेद बहोत टाइट हें, बाकी थोड़ी बहोत चुदाई तोँ उसकीरोज होती हैं मगर इतना लंबा पहलीबार चुदेगी। औऱ हाँ जिसको जैसे भि चोदना हौ वैसे चोदे, उसको मारो पीटो, पेशाब पिलाओ औऱ गूः भि खिला सकते होँ। मतलब जोँ दिल मे होँ करनाबस जिंदा छोड़ देना…” औऱ ये कहकरवोह उनकेलिए दारू लेँ आई।
उन सबने दारू पीनी शुरुआत कर दि। अब 10:00 बज चुके थें औऱ सबको सरिता केँ आने कां प्रतीक्षा थां, कि तभी घंटीबजी औऱ सबके चेहरे खिलगये। अलका नें आई ग्लास सें देखा औऱ कन्फर्म किया- “लीजिए भइया लोगों आपकी सरिता जीगेट पऱ आँ गई, हें…”
अलका दरवाजा खोलने हि वाली थि कि एक् व्यक्ति बोला- “उसकोकहो कि कपड़े बाहर् गेट पऱ हि उतारदे औऱ नंगी होकर अंदरआए…”
इसपर अलका हँसी औऱ बोलीं- क्यूं नहि?
उसने सरिता कों बोला- “सरिता, अपने कपड़े बाहर् हि उतारदो औऱ नंगी होँ जाओ…”
इसपर सरिता कि आवाज़ आई- “क्याँ कहरही होँ अलका बाहर् कोई भि आँ जाएगा…”
मगर अलका नहि मानी औऱ बोलीं- “तौ ठीक हैं तेरेघऱ पर्र जाकरसभी बताआती हूं…”
तब सरिता बोलि- “अच्छा अच्छा उतारती हूं। तूँ भि नाँ हमेशा मुझसे ऐसेकाम करवाती हैं…” फिन सरिता पूरी नंगी होकरजोर सें बोलि- “अलका, प्लीज जल्द दरवाजा खोल, मे एकदम नंगी हूं…”
इसपर अलका नें दरवाजा खोल दिया औऱ सरिता रूम मे अंदर आँ गई,। वोह पूरी नंगी थि औऱ उसके लंबेबाल दोनों ओर सें उसकी छोटी-छोटी चूचियों कों आधा छुपाए हुए थें। उसकापेट एकदम फ्लैट थां औऱ कमर एकदम पतली औऱ बुर केँ ऊपर थोड़े सें बाल थें। सरिता नें अपने कपड़े अपने हाथों मे पकड़े थें। अब सरिता कि नजर अंदर बैठे 12 आदमियों पर्र पड़ी जौ उसकोआँख फाड़कर देखरहे थें।
उनको देखकर सरिता एकदमदंग रह गयीँ, औऱ लज्जा सें पानी-पानी होनेलगी। अबवोह अपने नंगे शरीर कों अपने कपड़ों सें छुपाने लगी, औऱ अलका कि तरफ बड़ी रोती हुईँ सि सूरत बनाकर देखने लगी। अब वोहसमझ गई, थि कि अलका नें उसकेसंग क्याँ चालचली हैं।
अलका सरिता कि तरफ देखकर मुश्कुराई औऱ उसके हाथों सें कपड़े छीनने लगी। औऱ बोलीं- “क्याँ हुआ घबरा क्यूं रही हैं, अरे पागलभूल गयीँ, पहली चुदाई, उसदिन भि तौ 7 लोग थें औऱ अब तौ यही तेरी जीवन हैं सरिता। चल हिम्मत सें काम लें औऱ पूरा मज़ा लेकर चुदवाना औऱ हाँ रोना धोना नहि हैं ओके…”ये कहकर उसने झटके सें सरिता केँ सारे कपड़े छीनलिए औऱ उसे एकदम निरा नंगा छोड़ दिया।
फिनउं मुस्टंडों सें बोलि- “अब आप् लोगों केँ हवाले हैं प्लीज शुरुआत कीजिए…”
सरिता डरी औऱ घबराहट सें काँपने लगी औऱ काँपती हुइ आवाज़ मे बोलीं- “प्लीज… मुझे जानेदो…” औऱ रोनेलगी।
औऱ वोह भूखे भेड़ियों कि तरह सरिता पर्र टूट पड़े। दो आदमियों नें बीच मे सें सेंटर टेबलहटा दि औऱ सरिता कों लाकरबीच मे खड़ाकर दिया। अब एक् व्यक्ति बोला-“चल री रांड़ ग्लास मे सबकेलिए दारूडाल…”
सरिता वहीं खड़ीरही औऱ अपनी चूचियां छुपाने कि कोशिश करतेहुए बोलि- “प्लीज भाइ साहब मुझे चोदोमत मुझे बहोत दर्द होता हैं…”
इसपर चौथा व्यक्ति उठा औऱ उसनेपास मे रखी हुई बेंत कि छड़ीउठा ली औऱ सरिता कि छोटी सि गाण्ड पऱ जोर सें लगा दि, छड़ी पड़ते हि सरिता दर्द सें तड़पउठी औऱ चिल्लाई- “आईइ मम्मी अया…अया… अहह…”
उस व्यक्ति नें फिन अपनाहाथ उठाया औऱ सरिता लपक केँ सबकेलिए दारू डालने लगी। उसकीचीख सुनकर अलका भि आँ गयीँ, औऱ बोलीं- “क्याँ हुआ चिल्लई क्यूं थि?”
तब पांचवें बंदे नें सरिता केँ बाल पकड़े औऱ उसकी गाण्ड अलका कों दिखाई। उसकी छोटी गाण्ड पर्र एक् लंबीलाल लकीर थि औऱ खाल भि उधड़ गयीँ, थि।
अलका बोलि- “अगर औऱ नखरेकरे तोँ इस कुतिया केँ हाथ पांव बाँधकर पीटना…”
थोड़ी देर मे हि सरिता नें सबको 4-4 पेग पिलादिए औऱ अबसब 12 लोगनशे मे उससेमजे लेनेलगे। अब सबने अपने कपड़े उतारने शुरुआत किए औऱ सब 12 बंदे पूरे नंगे होकर अपना-अपना लण्ड तानने लगे। सबके लण्ड बड़े-बड़े, गंदे औऱ मोटे थें औऱ सब सरिता कि बुर मे अपना लण्ड घुसाने कों मचलरहे थें। सरिता बेचारी बड़ीडरी हुइ सि अपने चारों औऱ फूंकरते हुए बड़े-बड़े लण्डदेख रही थि। तभी एक् व्यक्ति नें उसे घुटनों केँ बलबीच मे बैठने कों कहा औऱ वोहबैठ गई,।
अबसब 12 बंदे सरिता केँ चारों तरफ घेरा बनाकर खड़े होँ गये औऱ सबने अपना अपना लण्ड सरिता केँ मुँह केँ सामने खड़ाकर दिया। सरिता चारों तरफ सें लण्डों सें घिर गयीँ,, ऐसालग रहा थां मानो उसको लण्डों कां गुलदस्ता दियाजा रहा हौ।
अब अलका बोलि- “चल रांड़ एक्-एक् करके चूसना चालूकर औऱ 5 मिनट मे किसी कां भि लण्ड तेरे मुँह मे नहि झड़ा तोँ तेरीआज कोठे पऱ लेँ जाएँगे…”
कोठे कां नाम लेते हि सरिता डर गयीँ, औऱ जल्द सें उसने एक् लण्ड कों अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ जोर-शोर सें उसको चूसने लगी।
उधर अलका नें सामने एक् घड़ीरख दि औऱ बोलीं- “5 मिनट केँ ऊपर नहि होना चाहिए…”
अब सरिता नें औऱ ज़ोर-ज़ोर सें लण्ड कों चूसना शुरुआत कर दिया औऱ पूरा लण्ड अपने मुँह मे लेनेलगी। उस व्यक्ति कां लण्ड भि एकदम फटने कों होँ गय़ा औऱ पूरा 10 इंच कां बन गय़ा, 3 मिनट मे उस व्यक्ति कों मज़ाआने लगा औऱ जल्द हि उसने सरिता कां गला पकड़ा औऱ पूरे प्रेशर सें अपना पूरा वीर्य सरिता केँ मुँह मे भर दिया। वीर्य इतना सारा थां कि सरिता केँ मुँह सें टपकरहा थां।
तभी अलका बोलीं- “सुन रांड़ एक् बूँद भि अगर नीचे टपकी तोँ तेरी गाण्ड मे दो-दो लण्ड सें चुदाई होगी…”
सरिता फिनडर गई, औऱ उसने अपनीजीभ बाहर् निकाली औऱ टपकते हुए वीर्य कों चाटकर निगल गयीँ,। अभि वोह साँस भि नहि लेँ पाई थि कि एक् औऱ 9 इंच कां लण्ड उसके मुँह पर्र दस्तक देनेलगा। सरिता नें फिन अपना मुँहखोल दिया औऱ फिन सें लग गई। अगले 20 मिनट मे सरिता नें 5 लोगों केँ लण्ड चूस-चूसकर झाड़दिए थें, मगर बाकी केँ लोगबोर होँ रहे थें।
तब उनमें सें एक् नें बोला- “दोस्त इसको खड़ीकरो, मुँह सें यह लण्ड चूसे लेगी औऱ एक्-एक् करके हम् इसकी गाण्ड भि मारते रहेंगे…”
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supar hot update
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ये सुनकर सरिता फिन सें रोनेलगी औऱ बोलीं- “मे तुम् लोगों केँ आगेहाथ जोड़ती हूं, पर्र पीछे सें मतकरो मुझसे सहा नहि जाता…”
यहसुन सभी हँसने लगे औऱ अलका भि हँसने लगी। वोह सरिता केँ पासआई औऱ बोलि- “तूँ चिंता मतकर…आज जब तूँ यहा सें जाएगी तब तेरी गाण्ड इतनी ढीली होगी कि दो-दो लण्ड उसमें घुस जाया करेंगे…”
सरिता अब भि अपनेहाथ जोड़े खड़ी औऱ अपनी चूचियां छुपारही थि।
यह देखकर अलका बोलीं- “भाइयों इसको लज्जा बहोत आती हैं, इतने लण्ड चूसने केँ बाद भि, देखो केसे शर्मा रही हैं। तौ आप् सब लोगों सें गुजारिश हैं कि आज इसको एकदम बेशरम रंडीबना केँ हि यहा सें जाने देना…”
इसपरसब आरामसे हँसने लगे औऱ तब एक् व्यक्ति उठा औऱ उसने अपनी पैंट कि जेब सें एक् छोटी सि बोतल निकाली जिसमें कुछलाल रंग कां लिक्विड भरा थां। अब उसने उसका ढक्कन खोला औऱ अपनेहाथ मे थोडा सां लिक्विड डाला। वोँ कुछतेल जैसा थां औऱ उसकीमहक भि बड़ी अजीब सि थि। उसनेवोह तेल अपने लण्ड पर्र मला औऱ सोफे पऱ बैठ गय़ा। अबवोह अपने लण्ड कों दोनों हाथों सें गोल-गोल रगड़ने लगा। थोड़ी देर मे हि उसका लण्ड एकदमलाल होँ गय़ा औऱ साइज मे भि बढ़ गय़ा।
सरिता भि यहसभी देखरही थि औऱ शायदसोच रही थि कि आज तोँ उसकीदबा केँ चुदाई होगी।
अबउस व्यक्ति नें सरिता कां हाथ पकड़ा औऱ बोला-“चल आँ जा औऱ मेरे लण्ड पर्र बैठजा…”
बेचारी सरिता नें सोचा कि सिर्फ़ बैठना हैं मगर उसने जैसे हि अपनी गाण्ड उस व्यक्ति केँ ऊपररखी उसने एकदम अपना लण्ड खड़ाकर दिया औऱ वोह सरिता कि गाण्ड मे घुस गय़ा। क्यूंकी सरिता पूरेवजन केँ संग नीचे बैठी थि इसलिये उसकाआधा लण्ड उसकी गाण्ड मे घुस गय़ा औऱ सरिता इतनीजोर सें चीखी कि मे भि एक् मिनट कों डर गय़ा।
वोँ कुछइस तरह सें चिल्लाई थि- “आई…अफ…आफ… आह्ह्ह… अहह…मर गई,, मर गयीँ,, अहह… मेरी मां…”
उस व्यक्ति नें सरिता कों जोर सें कमर सें पकड़ लिया।
सरिता कों दर्द सें पसीने आनेलगे। अबवोह पागलों जैसीलग रही थि औऱ कहरही थि- “अलका बचाओ, अलका बचाओ, अलका बचाओ…”
यह सुनकर अलका उसकेपास आई औऱ बोलि- “सरिता एकदम रिलैक्स हौ जाओकुछ नहि हुआ हैं, शांत, शांत…"
5 मिनट मे सरिता थोड़ी शांत होँ गई, मगर दर्द सें अभि भि सि… सि… कररही थि। अब दूसरे व्यक्ति नें बाकी कां तेल सरिता केँ नंगेबदन पर्र डाल दिया औऱ अलका औऱ वोँ दोनों उसतेल सें सरिता कि मालिश करनेलगे। सरिता बेहोशी जैसी हालत मे थि औऱ अबवोह नाँ अपनी चूचियां छुपारही थि औऱ नाँ हि शर्मा रही थि, बल्कि ऐसालग रहा थां जैसेअब वोँ मेंटली चुदाई केँ लिए सजधजकर हौ चुकी थि। अलका औऱ वोँ व्यक्ति तेज़-तेज़ सें सरिता कि चूचियां पऱ वोहतेल रगड़रहे थें औऱ धीरे धीरेवोह व्यक्ति जिसका लण्ड सरिता कि गाण्ड मे घुसाहुआ थां, उसकी गाण्ड कों सहलारहा थां औऱ धीरे धीरे अपना लण्ड उसकी गाण्ड मे औऱ अंदर तक डालता जारहा थां।
थोड़ी देर मे सरिता कां मुँह औऱ उसकी छाती एकदमलाल हौ गयीँ, औऱ उसको बहोत गर्मी लगनेलगी, ऐसालग रहा थां जैसेवोह तेल किसीतरह कां ठरक लाने वाला केमिकल थां। अब सरिता बड़ी शांति सें लंबी-लंबी साँसें लेँ रही थि औऱ अपनी गाण्ड मे घुसे लण्ड कों एंजाय कररही थि। तभी उसकी बुर सें सफेद-सफेद गाढ़ा-गाढ़ा पानीआने लगा।
यह देखकर अलका बोलि- “ये तौ लगता हैं मस्त होँ गई, हैं, बसअब आप् सभीलोग इसकी रगड़ाई शुरुआत करो…”
अब वोह व्यक्ति जिसने अपना लण्ड सरिता कि गाण्ड मे डालरखा थां, उठा औऱ सरिता कों अपने नीचे लें आया। उसने उसको कुतिया कि पोजीशन मे सोफे पर्र खड़ाकर दिया औऱ उसकीकमर पकड़कर उसकी गाण्ड कों थोडा तेजी सें चोदने लगा। सरिता कां पतला चिकना गोरा नंगा जिस्म पसीने मे चमकरहा थां। उसके छोटे-छोटे गहरे गुलाबी रंग केँ चूचुक उसकी गोरी-गोरी चूचियों पऱ अलग हि दिखरहे थें।
औऱ उसका पूरा पतला कमसिन नंगा जिस्म गाण्ड मे चलरही चुदाई सें आगे पीछे हौ रहा थां। अब सरिता सभीकुछ भूलकर पूरा ध्यान अपनी चुदाई पर्र लगारही थि। थोड़ी-थोड़ी देर मे दर्द कि वजह सें उसके माथे पर्र सलवटें पड़रही थीं औऱ वोह हल्के-हल्के कराहने केँ संग-संग सिसक भि रही थि। कुछइस तरह- “एयेए… आह्ह्ह… आह्ह्ह… एयेए…हाँ हाँ आह्ह्ह…”
यहसभी देखकर मेरा लण्ड भि फटने कों होँ गय़ा औऱ मे भि अपने कपड़े उतारकर नंगा होँ गय़ा औऱ धीरे धीरेमूठ मारने लगा।
तभी अलका मेरेरूम मे आई औऱ मुझेमूठ मारता देखकर दबी हुइ आवाज़ मे बोलि- “तुँ बहोत ठरकी हैं, बाहर् तेरी बेहन कि 12 लोग चुदाई कररहे हें औऱ वोँ दर्द सें मररही हैं औऱ तुँ मूठमार रहा हैं…”
मगर मे इतना उत्तेजित थां कि मे बोला- “अलका, साली कुतिया कों इतना चोदो कि वोँ चलने केँ काबिल भि नाँ रहे। …”
इसपर अलका बोलीं- “उसकी चिंता मतकर अभि तोँ सिर्फ़ शुरुआत किया हैं रात केँ 9:00 बजे तक इसकायही हाल रहेगा औऱ चाल तोँ इसकीआज हमेशा केँ लिएबदल जाएगी…”
उधर सरिता कि फिन सें चिल्लाने कि आवाज़ आई। मे औऱ अलका नें एकदम सें बाहर् देखा तोँ नजारा कुछइस तरह कां थां- सरिता कों एक् बंदे नें अपनी गोदी मे उठारखा थां औऱ सरिता कि दोनों टाँगें उसकीकमर केँ दोनों तरफ बंधी हुईँ थि उसके नंगे चूचुक उस व्यक्ति कि छाती सें रगड़खा रहे थें। उसका लण्ड सरिता कि बुर मे घुसाहुआ थां औऱ दूसरा व्यक्ति सरिता केँ पीछे खड़ा थां औऱ उसका मोटा काला लंबा लण्ड सरिता कि गाण्ड मे घुसा थां। वोह दोनों सरिता कों हवा मे उछालरहे थें औऱ दोनों केँ लण्ड सरिता कि गाण्ड औऱ बुर कों फाड़रहे थें।
सरिता हर झटके मे इसतरह चिल्ला रही थि- “आई…आई…बस मुझे नीचे उतारो…”
यह देखकर अलका बोलि- “अब मज़ा आएगा…” औऱ यहकह वोँ बाहर् चली गयीँ,।
10 मिनटहवा मे चोदने केँ बाद उन्होंने सरिता कों सोफे पर्र फेंक दिया औऱ अब एक् औऱ व्यक्ति आगे बढ़ा औऱ सरिता केँ मुँह मे अपना ढीला लण्ड घुसा दिया औऱ बोला-“चल मेरी रांड़ चूस…”
सरिता नें एक् अच्छी बच्ची कि तरहझट सें लण्ड मुँह मे डाला औऱ चूसने लगी।
अब अलका नें पासरखी लकड़ी कि छड़ी उठाई औऱ बोलि- “सरिता जरा कुतिया बन औऱ लण्ड मुँह सें नहि निकलना चाहिए…”
सरिता लण्ड कों मुँह मे रखे-रखे घूमी औऱ सोफे पऱ कुतिया बन गयीँ,।
अब अलका नें सब आदमियों कों देखा औऱ एक् कोने मे खड़े बंदे सें बोलि- “आप् आओइधर, आपका सबसे बड़ा औऱ मोटा हैं…”
जबवोह व्यक्ति लगभगआया तोँ मे भि देखकर हैरान रह गय़ा कि किसी कां लण्ड इतना बड़ा केसे हौ सकता हैं। वोँ कम सें कम 10 इंच लंबा, दो इंच मोटा औऱ एकदम सख़्त लण्ड थां।
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xyz wrote:भइयाजी धमाके पे धमाका कर दिया हैं आपने वेरीगुड भइया Thanks Bro.
rajsharma wrote:मित्र आपकोयहा नईनई कहानियों केँ संग देखकर बहोत प्रसन्नता होँ रही हैं अब लगता हैं इस फोरम कां क़िस्मत बदलने वाला हैं मेरी कोशिश यही हैं कि कहानियां अच्छी हों,नई लगें(भले हि पुरानी हों)।आगे पाठकों कि पसन्द?? शुक्रिया .
dosto, Update thodii der mai.
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अलका नें सरिता केँ हाथकमर केँ पीछे खींचलिए औऱ बोलि- “सरिता, लण्ड मुँह सें नहि निकलना चाहिए…"
सरिता सिर्फ़ घुटनों केँ बल बैठी थि औऱ कुतिया कि पोजीशन मे बड़ी मुश्किल सें अपने आपको संतुलित करके अभि भि लण्ड कों अपने मुँह मे लिए थि। अब अलका नें मोटे लण्ड वाले व्यक्ति कों सरिता कि गाण्ड केँ पीछे बुलाया औऱ सरिता केँ हाथउस व्यक्ति कों पकड़ा दिए।
औऱ फिन बोलि- “इसकी कलाइयां पकड़ो औऱ जरा इसकी गाण्ड कां छेद थोडा बड़ाकरो…”
यह सुनकर मे समझ गय़ा कि अलका वाकई मेरी बेहन कों आजहर सम्भव तरीके सें चुदवाकर उसको बेशर्म रंडी बनाकर कोठे पऱ लेँ जाएगी।
अब सरिता कां औऱ बुरासमय शुरुआत होने वाला थां। उस व्यक्ति नें सरिता केँ हाथ पकड़े औऱ अपना बड़ा लण्ड उसकी गाण्ड केँ छेद पऱ रखा दिया औऱ उसने सरिता केँ हाथों कों पीछे कि ओर खींचा औऱ मोटा लंबा लण्ड एक् इंच सरिता कि गाण्ड मे धंस सां गय़ा।
तौ सरिता नें इतना बड़ा मुँह खोला जैसे उसको गोलीलग गयीँ, हौ औऱ लगभग 5 सेकेंड केँ बाद सरिता कि चीख कि आवाज़ उसकेगले सें बाहर् आई- “अइया…” औऱ बिलख-बिलख केँ रोनेलगी औऱ कहनेलगी- “जौ कहोगे करूँगी, ईश्वर केँ लिएयह मेरी गाण्ड सें निकालो वरना मे मर जाऊँगी। अलका प्लीज़…”
अब अलका जिसके हाथ मे लकड़ी कि डंडी थि बोलि- “आए रंडी… मैंने तुम्हें बोला थां नां कि मुँह सें लण्ड नहि निकलना चाहिए…” औऱ उसने सरिता कि गाण्ड केँ ऊपर पूरी ताकत सें 4 बारवोह डंडीजड़ दि।
सरिता अब औऱ जोर सें चिल्लाई क्यूंकी डंडी सें उसके चूतड़ कि खालउतर गयीँ, थि औऱ उधर वोँ मोटा लण्ड उसकी गाण्ड कों फाड़रहा थां। मगर डंडी कि मार सें वोँ गाण्ड कां दर्दभूल गयीँ, औऱ झट सें अपने मुँह मे उसने सामने वाले व्यक्ति कां लण्ड लें लिया। अब सरिता अपनी गाण्ड कां दर्दसह रही थि औऱ लण्ड भि चूसरही थि।
उधर मोटे लण्ड वाला आदमी भि दर्द सें कराहरहा थां, उसका लण्ड इतना मोटा थां कि बड़ी मुश्किल सें अंदर-बाहर् हौ रहा थां। थोड़ी हि देर मे उसका लण्डखून सें सन गय़ा।
तब अलका बोलीं- “बसअब निकललो… लगता हैं इसकी गाण्ड फट गई, हैं…”
औऱ जब उसका लण्ड बाहर् आया तोँ मेरी बेहन कि गाण्ड कां छेद इतना बड़ा होँ गय़ा थां कि उसमें एक् गोल्फ कि बालचली जाए औऱ उसकी गाण्ड सें खून भि टपकरहा थां। सरिता डंडी कि मार सें इतनाडर गयीँ, थि कि अभि भि लण्ड मुँह मे लिए थि।
अब अलका नें सरिता कों फे्श पऱ खड़ा किया औऱ बोलीं- “लण्ड चूसती रह औऱ एक् टाँग पर्र आगे कि ओरझुक कर खड़ी हौ जा…”
सरिता नें यह पोजीशन बनाने कि कोशिश कि मगर नीचेगिर पड़ी।
इसपर अलका कों बहोत क्रोध आया औऱ वोँ सरिता केँ छोटे-छोटे काले चूचुक पकड़कर उठाने लगी।
सरिता बोलीं- “अहह… मे उठरही हूं, अलका मेरे चुचे छोड़ो… दर्द होता हैं…”
अब अलका नें फिन सें उसकी पोजीशन बनाईमगर इसबार मोटे लण्ड वाला व्यक्ति सरिता केँ पीछेआया औऱ उसने उसकोकमर सें पकड़ लिया औऱ उसकी एक् टाँग उठाकर अपनेहाथ मे सीधी पकड़ली। अलका नें सरिता कों आगे कि तरफ झुकाया औऱ उसे लण्ड चूसने कों कहा।
सरिता आगे झुकी औऱ उसने सामने वाले व्यक्ति कि जांघें पकड़ी औऱ उसका लण्ड अपने मुँह मे लेँ लिया। अब सरिता सिर्फ़ एक् टाँग पऱ खड़ी थि। अब बारी थि बुर कि, तोँ मोटे लण्ड वाले नें सरिता कि बुर मे अपना लण्ड घुसाना चालू किया।
औऱ जैसे-जैसे लण्ड सरिता कि बुर मे घुसरहा थां, वैसे-वैसे सरिता दर्द सें बोलती- “आह्ह्ह… आह्ह्ह… अहह…”अब सरिता पूरेपोज मे थि औऱ थोड़ी गर्म भि हौ गई, थि।
मोटे लण्ड वाले नें सरिता कि बुर कों ठोंकना शुरुआत कर दिया, औऱ भि ज़ोर-ज़ोर सें सरिता कि चुदाई होनेलगी। उधर तीसरा व्यक्ति आगे बढ़ा औऱ सरिता केँ चूतड़ सहलाने लगा औऱ उसके चूतड़ों कों अपनीजीभ सें चाटने लगा। चौथा व्यक्ति सरिता कि छाती केँ नीचे आँ गय़ा औऱ उसने उसकोकमर सें पकड़ा औऱ उसके छोटे-छोटे नीचे लटकते चूचों कों मुँह मे डालकर चूसने लगा।
पूरा दृश्य बहोत गर्मलग रहा थां। सब व्यक्ति बहोत मस्त होकर सरिता कि कमसिन औऱ चिकनी जवानी कां भरपूर अंनद लेँ रहे थें, सरिता भि बड़ी मस्त होकर लण्डचूस रही थि, वोह भि एक् हि टाँग पऱ खड़े रहकर। जबकि मोटे लण्ड वाला व्यक्ति ठकाटक उसकी बुर ठोंकरहा थां।
अलकायह सभी देखकर सरिता केँ पास गयीँ, औऱ बोलि- “शाब्बास… लगीरह मेरी रांड़ औऱ पूरा मज़ा लेँ 12 लण्डों कां। किसी-किसी लड़की कों हि ऐसादिन नसीब होता हैं…” ये कहकर अलका मेरेरूम मे आँ गई,।
मे अभि भि अपना लण्डहाथ मे लिएमूठ माररहा थां।
अलका मेरेपास आई औऱ पूछा- अपनी बेहन कों चोदेगा?
मैंने कंपकंपाती आवाज़ मे कहा-मगर वोँ मुझे देखेगी तोँ?
अलका बोलि- “चिंता मतकर… थोड़ी देर मे उसकी आँखों पऱ पट्टी बांधेंगे, तब तुँ चुपचाप उसकोचोद दियो…”
औऱ मैंने हाँ मे अपनासिर हिला दिया।
अब अलका वापिस बाहर् चली गई, औऱ एक् मोटा सां खीरा अपनेहाथ मे लेकरआई औऱ बोलि- “सरिता कि चीख केँ बिनासभी सूना-सूना लगरहा हैं, जरा कुतिया कों कस केँ पकड़ना, मे इसकी गाण्ड थोड़ी औऱ खोलती हूं…” औऱ यह कहकर अलका नें सरिता कि छोटी सें घायल गाण्ड मे एक् मोटा खीरा घुसाना शुरुआत कर दिया।
मारे दर्द केँ सरिता एक् टाँग पर्र उछलने लगी औऱ कहनेलगी- “बस-बसरहम करो… अलका, मे मार जाऊँगी, मुझे बहोत दर्द हौ रहा हैं…”
यहसुन अलका नें आधे अंदर घुसे खीरे पऱ एक् धक्का मारा औऱ वोँ पूरा सरिता कि गाण्ड मे घुस गय़ा।
औऱ सरिता जोर सें चिल्लाई- “प्लीज़्ज़… निकालो इसको…”
अब अलका बोलीं- “बस इसको थोड़ी देर अंदररख फिन तेरी गाण्ड मे दो लण्ड घुसेंगे। चलो भाइयों लगेरहो, मे आप् लोगों केँ लिए औऱ ड्रिंक्स लाती हूं…” औऱ अलका अंदरचली गयीँ,।
मगर सरिता कि चूत कि चुदाई अब औऱ जोर सें होनेलगी थि। मोटे लण्ड वाला व्यक्ति अब हाँफने लगा थां औऱ उसकी बुर मे लंबे-लंबे झटकेमार रहा थां, जबकि नीचे बैठा व्यक्ति सरिता केँ दोनों मम्मे ज़ोर-ज़ोर सें रगड़रहा थां।
उधर सरिता अपने मुँह मे फँसे लण्ड कों मस्त होकरचूस रही थि। सबलोग मज़ा लें रहे थें औऱ मे भि झड़ने वाला थां।
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