मैं उन्हें भइया बोलती हूँ complete - Hindi Sex Story – New Episode
उस चुदाई केँ बाद अगली सुभह प्रदीप नें हि अपनी गाड़ी मे मुझे मेरेघऱ छोड़ा औऱ जाते जाते उसने मुझे सें मेराफोन नंबर लिया औऱ वोँ चला गय़ा। मे भि घऱ आँ गई।
उसकेबाद प्रदीप अक्सर मुझे फ़ोन करनेलगा औऱ मे घंटोघऱ मे छुपकर उस सें बातें करनेलगी। कभी-कभी जबघऱ मे कोई नहि होता थां तोँ मे प्रदीप केँ संग फ़ोन सेक्स भि किया करती थि। मुझे उससे बातें करना बहोत अच्छा लगता थां। प्रदीप हमेशा मुझे कहता कि रोमा मुझे तुम् सें फिन सें मिलना हें, पऱ मे हरबार उसे मिलने सें मनाकर देती थि।
एक् दिन तोँ प्रदीप बहोत ज़िद करनेलगा कि उसे मुझे सें मिलना हि हैं। मैंने फिनउसे मना कि पर्र वोँ नहि माना औऱ कहनेलगा कि कल वोँ आँ रहा हैं औऱ मे उस सें मिलूँ नहि तोँ वोँ मेरेघऱ हि आँ जाएगा।
मुझे उसकी ज़िद केँ आगे झुकना पड़ा औऱ मैंने कहा-हाँ मे कल तुम् सें मिलूंगी।
पर्र मैंने उसेये साफ-साफ कह दिया कि मे तुमसे अंतिम बारमिल रही हूं। इसकेबाद मे तुमसे नहि मिलूँगी औऱ तुम् मुझे मिलने केँ लिए मजबूर नहि करोगे।
प्रदीप नें कहा-ठीक हैं।
मैंने कहा- मुझे प्रोमिस करो।
प्रदीप नें मुझसे वादा किया औऱ फिन हमने अगलेदिन मिलने कां वक्ततय किया। प्रदीप नें मुझेकहा कि वोँ कलसाम 4 बजे मेरे हि घऱ केँ पास मेरा इन्तजार करेगा।
मैंने कहा-ठीक हैं, कल मिलते हें।
अगलेदिन मे रेडी हुइ औऱ घऱ मे माँ कों कहा- माँ आज मेरी एक् फ्रेंड कां बर्थ-डे हैं। मे उसके बर्थ-डे बर्थडे पार्टी मे जारही हूं। आने मे थोड़ी देर हौ जाएगी !
तौ माँ नें मुझे परमीशन दे दि, मे घऱ सें निकल गई औऱ प्रदीप कों फ़ोन किया कि वोँ कहां हैं?
उसनेकहा कि वोँ मेरेघऱ केँ राईट साइड मे जोँ चौराहा हैं, वोँ वहीं खड़ा हैं। मे जल्द जल्दवहा पहुँची। प्रदीप कि गाड़ी चौराहे केँ थोड़े साइड मे खड़ी थि औऱ प्रदीप भि वाहन केँ बाहर् मेरा इन्तजार करतेहुए खड़ा थां। मे जाकर उससे मिली, फिन हमारी थोड़ी बात हुइ।
उसकेबाद प्रदीप नें कहा-चलो रोमा वाहन मे बैठो, हम् कहीं लॉन्ग ड्राइव पऱ चलते हें।
मे गाड़ी मे बैठ गई। प्रदीप नें भि वाहन स्टार्ट कि औऱ वोँ वाहन चलाने लगा।
प्रदीप मुझ सें रोमांटिक बातें किएजा रहा थां। कुछ हि टाइमबाद हमारी गाड़ी सिटी केँ बाहर् आँ गई थि।
मैंने प्रदीप सें कहा- प्लीज़ प्रदीप, बताओ तोँ कि हम् कहां जारहे हें?
प्रदीप कहनेलगा- रोमा हम् वहींजा रहे हें जहाँकोई आता-जाता नहि।
अब हमारी वाहन क्योंकि सिटी सें बाहर् आँ गई थि, इसलिये अब प्रदीप कि मस्ती चालू हौ गई थि। उसका एक् हाथ गाड़ी केँ स्टेयरिंग सें हटकर मेरे सीने केँ ऊपर आँ गय़ा औऱ वोँ बूब्स कों दबाने लगा।
मैंने उसकेहाथ हटाया औऱ कहा- प्लीज़, तुम् वाहनठीक सें चलाओ।
पऱ प्रदीप नहि मानरहा थां। कभी वोँ बूब्स कों दबाता तोँ कभी मेरी जींस केँ ऊपर सें हि मेरी बुर कों सहलाता।
मे बार-बार उसकाहाथ हटाते जारही थि पऱ वोँ नहि मानरहा थां। उसने गाड़ी चलाते-चलाते हि अपनी पैन्ट कि ज़िप खोली, औऱ लन्ड कों बाहर् निकाल कर मेरा एक् हाथ पकड़कर मेरेहाथ मे अपना लन्ड पकड़ा दिया।
प्रदीप कां लन्ड मेरेहाथ मे आते हि मेरे अंदर भि कुछ गर्मी सि आँ गई औऱ मे उसका लन्ड सहलाने लगी।
प्रदीप नें अब वाहन कों हाइवे सें उतारकर एक् कच्चे रास्ते पर्र डाल दिया जोँ जंगल केँ अंदरजा रहा थां।
मैंने प्रदीप सें पूछा-यह तुम् वाहन कों कहां लेँ जारहे हौ?
प्रदीप नें कहा- तुम् चुपचाप बैठीरहो। हाइवे पऱ वाहन खड़ी करनाठीक नहि होता। इसलिये हम् कच्चे रास्ते सें जंगल केँ अंदरजा रहे हें। मैंने ये स्थान देखी हुईँ हैं, बहोत अच्छी स्थान हैं, यहाकोई आता-जाता नहि हैं। यहा जंगल केँ अंदर हि एक् छोटा सां झरना हैं। ये बहोत सुन्दर स्थान हैं। तुम्हें पसन्द आएगी।
मे चुपचाप बैठी प्रदीप केँ लन्ड कों सहलारही थि।
जंगल केँ अंदरकुछ दूर जाकर प्रदीप नें एक् स्थान गाड़ी कों खड़ी किया औऱ मुझेकहा- उतरो मे तुम्हें यह स्थान दिखाता हूं।
मे वाहन सें उतरी तोँ देखा कि वहा पऱ एक् छोटा सां झरना थां। झरने सें पानी नीचेगिर रहा थां। नजारा बहोत सुन्दर लगरहा थां। हमेंवहा पहुँचने मे करीबआधा घंटालगा थां। उससमय 4:30 होँ गए थें।
प्रदीप नें कहा- देखा रोमा, मैंने कहा थां नं, ये स्थान बहोत सुन्दर हैं।
मे उस झरने कों देखरही थि कि तभी प्रदीप मेरेपास आया औऱ मुझे अपनी बाँहों मे लें लिया। मैंने भि उसे अपनी बाँहों मे लें लिया।
वोँ मेरी गर्दन कों चूमने लगा। फ़िर उसने मुझे गाड़ी सें टिकाकर मेरी गर्दन कों पकड़कर अपने होंठों कों मेरी होंठों पर्र रखकर उन्हें चूमने लगा। मे भि उसकासंग देरही थि।
अब उसकेहाथ गर्दन सें खिसककर नीचेआने लगे थें। उसने अपने दोनों हाथों कों मेरीकमर तक लेँ आया औऱ मेरी टी-शर्ट केँ अंदरहाथ डालकर टी-शर्ट कों ऊपर उठाने लगा।
उसने टी-शर्ट कों मेरे बूब्स तक उठाया औऱ बूब्स कों दबाने लगा औऱ संग हि लगातार वोँ मेरे होंठो कों भि चूमते जारहा थां।
कुछदेर तक हम् दोनों एक् दूसरे कों इसीतरह चूमते रहे। उसकेबाद प्रदीप नें मेरी टी-शर्ट औऱ ब्रा दोनों उतार दि औऱ गाड़ी कां पिछला गेटखोल कर मुझे उसने वाहन कि पिछली सीट पर्र लिटा दिया।
उसने अपनी शर्ट उतार दि फिन वोँ मेरेऊपर आँ गय़ा। मेरे एक् बूब्स कों अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा औऱ दूसरे कों एक् हाथ सें दबाने लगा।
मेरे मुँह सें अब कामुक आवाजें निकलने लगीं मे जोर-शोर सें ‘अहहहह आआअहह’ करनेलगी।
उसने मेरे दोनों बूब्ज़ कों अपने हाथों मे पकड़लिए औऱ उन्हें दबाने लगा।
उसने मुझसे पूछा- कैसालग रहा हैं तुम्हें रोमा?
मैंने अपनी आँखें मूँदकर धीरे-धीरे सें कहा- अच्छा लगरहा हैं, प्रदीप औऱ ज़ोर-ज़ोर सें चूसो इन्हें।
वोँ फिन मेरे उरोजों कों चूसने लगा औऱ मे लगातार उस सें बोलेजा रही थि, “औऱ तेज़-तेज़ सें चूसो, प्रदीप बहोत आनंद आँ रहा हैं। ”
मेरेऊपर एक् नशा सां छारहा थां औऱ मैंने प्रदीप कों अपने दोनों हाथों सें जकड लिया। अब प्रदीप नें अपने आप् कों मेरी बाँहों सें छुड़ाया औऱ मेरी जींस केँ बटनखोल कर मेरी जींस कों उतारने लगा।
उसने मेरी जींस कों पूरी उतारकर आगे कि सीट पऱ रख दि औऱ कहा- रोमा तुम् तोँ आजइस पैन्टी मे बहोत सेक्सी लगरही होँ।
मैंने उसदिन कालेरंग कि पारदर्शी पैन्टी पहनी थि। उसने अपनाहाथ मेरी बुर पऱ रखा औऱ उसे पैन्टी केँ ऊपर सें हि सहलाने लगा।
उसने मेरी जाँघ केँ पास सें पैन्टी कों खींचकर अलग किया, जिससे मेरी बुर उसे दिखने लगी।
प्रदीप नें कहा- रोमा तुम्हारे यह बुर केँ बाल भि बहोत सेक्सी लगरहे हें।
उसने अपनी एक् उंगली मेरी बुर केँ अंदरडाल दि तौ मेरे मुँह सें एक् सीत्कार ‘अह्ह ह्ह्ह’ निकली फिन उसने अपना मुँह मेरी बुर केँ ऊपररखा औऱ बुर कों चूसने लगा।
मैंने उत्तेजना केँ मारे उसकेसर केँ बाल पकड़लिए, उसकेसर कों अपनी दोनों जाँघों केँ बीच बुर पऱ दबाने लगी औऱ जोर-शोर सें सिसकारियाँ लेनेलगी।
प्रदीप अपनी जुबान कों मेरी बुर केँ छेद मे डालने लगा औऱ मेरी बुर सें खेलने लगा।
मे बहोत उत्तेजक हौ गई थि औऱ प्रदीप कों कहरही थि, “प्रदीप चूसो मेरी बुर कों, खाजाओ उसे। ”
प्रदीप अब औऱ तेज़-तेज़ सें मेरी बुर कों चूसने लगा औऱ मे भि उसकेसर कों बुर पर्र दबाने लगीकुछ देर कि बुर चुसाई केँ बाद प्रदीप वाहन केँ बाहर् निकला औऱ अपनी पैन्ट औऱ अंडरवेयर उतारकर वाहन कि आगे कि सीट पर्र रखदिए।
प्रदीप नें मुझे भि खींचकर वाहन केँ बाहर् किया औऱ वाहन सें एक् कुशन कों निकलकर वाहन कां गेटलगा दिया औऱ स्वयं गाड़ी केँ गेट सें चिपककर खड़ा होँ गय़ा।
उसने मुझे वोँ कुशन दिया औऱ कहा-लो इसे अपने घुटनों केँ नीचेरख कर नीचेबैठ कर मेरा लन्ड चूसो।
मैंने वैसा हि किया। मैंने कुशन कों नीचेरख कर औऱ उस पर्र अपने घुटने टेककर खड़ी हुई औऱ प्रदीप केँ लण्ड कों अपने हाथों सें सहलाने लगी। प्रदीप नें अपना एक् हाथ मेरेसर मे बालों केँ अंदर किया औऱ मेरेसर कों पीछे सें आगे धकेलकर अपने लन्ड कों मेरे मुँह मे डाल दिया।
अब मे उसके लन्ड कों चूसने लगी औऱ प्रदीप झटके मारने लगा। जैसे वोँ मेरे मुँह कि हि चुदाई कररहा होँ।
10 मिनट तक प्रदीप यूँ हि मेरे मुँह कि चुदाई करतारहा औऱ मे भि बड़ेमजे सें उसका लन्ड चूसती रही।
फिन प्रदीप नें मुझे अपनीगोद मे उठा लिया औऱ गाड़ी केँ बोनट पर्र बैठा दिया औऱ फिन सें मेरी जाँघ केँ पास सें पैन्टी कों खींचकर अलग किया औऱ बुर कों चूसने लगा।
फिन उसने अचानक अपने मुँह कों मेरी बुर पर्र सें हटाया औऱ मेरी बुर केँ ऊपर अपना लन्ड रखकर लन्ड सें बुर कों सहलाने लगा औऱ मेरी पैन्टी कों बुर पऱ सें खींचकर औऱ साइड मे कर दिया।
मैंने उसेकहा- पैन्टी उतारदो, फिन अच्छे सें कर सकोगे तुम्।
तोँ उस नें मनाकर दिया औऱ कहा- नहि मुझेऐसे मे हि आनंद आँ रहा हैं।
प्रदीप बस अपने लन्ड सें मेरी बुर कों सहलारहा थां। वोँ बुर मे लन्ड नहि डालरहा थां। वोँ मुझे तड़पा रहा थां।
मुझे वाहन कां बोनटगरम लगने लगनेलगा तोँ मैंने प्रदीप सें कहा- प्रदीप मुझे बोनटगरम लगरहा हैं। चलो वाहन केँ अंदर हि चलते हें।
तोँ उसनेकहा- ठीक हैं।
औऱ उसने मुझेफिन सें अपनीगोद मे उठाकर मुझे गाड़ी कि पिछली सीट पर्र लिटा दिया औऱ वोँ भि गाड़ी केँ अंदर आँ गय़ा।
मेरा एक् पेरसीट केँ नीचे थां औऱ दूसरे पांव कों प्रदीप नें उठाकर अपने कन्धे केँ ऊपररख लिया।
प्रदीप नें भि अपने एक् पेरसीट केँ नीचेरखा औऱ पांव कों घुटने केँ पास लें मोड़ लिया। फिन प्रदीप नें मुझे अपनीतरफ खींचा औऱ अपने लन्ड कों मेरी बुर पर्र टिकाया औऱ लन्ड कों जोर सें बुर केँ अंदर धकेला, जिससे मेरे मुँह सें केँ चीख निकली औऱ प्रदीप कां आधा लन्ड मेरी बुर केँ अंदरचला गय़ा। प्रदीप नें मेरे स्तनों कों पकड़ लिया औऱ उन्हें दबाने लगा।
मेरे मुँह सें सिस्कारियाँ निकलने लगी-आआह ऊऊह ह्ह्ह आँ आआआआह !
प्रदीप नें बचाहुआ अपनाआधा लन्ड भि एक् औऱ झटके मे बुर केँ अंदरडाल दिया।
मैंने कहा- कमीने थोडा धीरे-धीरे कर, मुझे दर्द होँ रहा हैं।
प्रदीप नें कहा- साली, थोडा दर्द हौ होगा हि नं। अभि कुछदेर मे तूँ स्वयं हि कहेगी, तेज़-तेज़ सें करो।
तोँ मैंने कहा- कमीने जब मे जोर सें करने कां बोलूँ तोँ जोर सें भि कर लेना, पर्र अभि तोँ थोडा धीरे-धीरे कर !
तब प्रदीप नें कहा- साली बहोत कमीनी हैं तुँ, चलअब तूँ भि अपनी गांड उछालकर मेरासंग दे।
प्रदीप जोर-शोर सें मुझे चोदने लगा औऱ मैंने भि अपनीकमर उछाल-उछाल कर उसकासंग देनेलगी। अब मुझे चुदने मे मज़ाआने लगा थां, मे उसे कहनेलगी- औऱ ज़ोर-ज़ोर सें चोदो प्रदीप !
प्रदीप तोँ उसने अपनी स्पीड औऱ बढ़ा दि औऱ कहनेलगा- लेँ साली लें ! औऱ लें, आज तुम कोखूब चोदूँगा।
करीब-करीब दस मिनट तक प्रदीप मुझेयूँ हि धकाधक चोदता रहा, फिन वोँ कहनेलगा- रोमा, मेरा निकलने वाला हैं।
तोँ मैंने कहा- तुम् बुर केँ अंदर नहि छोड़ देना !
उसने अपना लन्ड जल्द सें बुर सें निकाला औऱ अपना सारा वीर्य मेरी बुर केँ ऊपर छोड़ दिया, जिससे कि मेरी बुर औऱ पैन्टी गन्दी होँ गई थि।
उसके वीर्य कि कुछ बूँदें मेरे स्तनों तक भि आईं। अब तक प्रदीप मे जौ जोशभरा थां वोँ थोडा कम होँ गय़ा, ढीला हौ कर मेरेऊपर हि लेट गय़ा, मेरे होंठो कों चूमने लगा।
कुछ देरऐसे हि पड़े रहने केँ बाद प्रदीप मुझ पऱ सें हटा तौ मैंने उसेकहा- देखो तुमने ये क्याँ किया, मुझे पूरा गन्दा कर दिया औऱ स्वयं भि होँ गए ! अबइसे कौनसाफ करेगा?
प्रदीप नें कहा- तुम् चिन्ता मतकरो, मे यहसभी साफकर दूँगा। देखोइस झरने कां पानी अपनेकिस काम आएगा?
उसने मुझे गाड़ी सें बाहर् निकाल कर अपनीगोद मे उठाया। फिन झरने केँ पास लेकर गय़ा झरने सें जौ पानीबह रहा थां, वोँ केवल पैरों केँ टखने तक हि थां।
प्रदीप नें मुझे लेँ जाकर एक् चौड़े पत्थर केँ ऊपर लिटा दिया औऱ पहले मेरी पैन्टी कों उतारकर उसे धोनेलगा फिन पैन्टी कों अलग एक् पत्थर पर्र रख दिया औऱ अपने हाथों सें पानी लें कर मेरी बुर केँ ऊपर जौ उसका वीर्य थां, उसेसाफ करनेलगा। उसने मेरा सारा शरीर पानी सें गीलाकर दिया थां।
मैंने उससेकहा- तुम् भि तौ अपने आप् कों साफकर लो।
‘तुम् साफकर दो रोमा ! मैंने तुम्हें साफ किया हैं, तुम् मुझेसाफ करदो। ”
मैंने कहा-ठीक हैं, अब तुम् यहालेट जाओ।
उसके पत्थर पऱ लेटने केँ बाद मैंने भि उसका सारा शरीरसाफ किया।
मैंने कहा- प्रदीप मुझे ठण्डलग रही हैं औऱ देखो, अँधेरा भि हौ रहा हैं। अब हमेंयहा सें चलना चाहिए।
तब वोँ कहनेलगा तुम्हारी ठण्ड कों मे अभि दूरकर दूँगा। मेराहाथ पकड़कर उसने खींचा औऱ अपनेऊपर मुझे लिटा लिया औऱ मुझे अपनी बाँहों मे जकड़ लिया- इससे तुम्हारी ठण्डदूर होँ जाएगी।
कुछदेर मे औऱ प्रदीप वहाऐसे हि लेटेरहे।
प्रदीप नें कहा- रोमा तुम् मेरा थोडा सां लन्ड चूसो, इससे तुम्हारी ठण्ड औऱ दूर होँ जाएगी।
मैंने प्रदीप कि छाती कों चूमते हुए नीचे उसके लन्ड केँ पासआई, प्रदीप कां लन्ड छोटा थां, वोँ खड़ा नहि थां। मैंने उसके लन्ड कों अपनेहाथ मे लिया औऱ अपने मुँह मे लेनेलगी तोँ उस कां लन्ड अब खड़ा होनेलगा। मे लन्ड कों अपने मुँह मे भरकर चूसने लगी।
प्रदीप केँ लन्ड कों एक् मिनट भि नहि लगा औऱ उसका लन्ड एकदम खड़ा होँ गय़ा। मे तेज़-तेज़ सें उसका लन्ड चूसने लगी, मुझे बहुत आनंदआने लगा लन्ड चूसने मे।
5 मिनट लन्ड चुसवाने केँ बाद प्रदीप नें कहा- रोमा, मे तुम्हें एक् बार औऱ चोदना चाहता हूं। पता नहि तुम् फिनकब मिलोगी?
मैंने प्रदीप कों पत्थर पऱ सें उठने कों कहा औऱ स्वयं उस पत्थर पऱ लेट गई औऱ प्रदीप सें कहा-लो आज जौ करना हैं, करलो।
तोँ उसने थोड़ी सि भि देर नां करतेहुए मेरे दोनों पैरों कों उठाकर अपने दोनों कन्धों पर्र रखलिए औऱ अपने लन्ड कों बुर केँ ऊपररख कर एक् जोर कां झटका मारा जिससे उसका पूरा कां पूरा लन्ड मेरी बुर केँ अंदरचला गय़ा।
मे एक् बारफिन जोर सें चिल्लाई- कमीने, थोडा धीरे-धीरे डाल !
पर्र वोँ अब मेरी नहि सुनरहा थां, वोँ मुझे चोदने मे लगाहुआ थां, ज़ोर-ज़ोर सें लन्ड मेरी बुर केँ अंदर-बाहर् कररहा थां।
मे ‘आआहऊउह आअह’ करतेहुए सिसकारियाँ लेनेलगी।
मे बहोत गरम होँ गई थि, जिससे मेरा निकलने वाला थां।
मैंने बताया कि मेरा निकलने वाला हैं, तौ उसने अपना लन्ड मेरी बुर सें निकाल लिया औऱ अपना मुँह मेरी बुर पर्र लगा दिया, ‘अहह आअहउह’ करतेहुए मे झड़ गई।
प्रदीप मेरा वोँ सारा पानी पीनेलगा। उसने चाट-चाट कर मेरी बुर कों साफ किया औऱ फिन उसने मेरे पैरों कों फैलाकर अपना लन्ड मेरी बुर रखकरउसे अंदर डाला औऱ फिन सें मेरी चुदाई करनेलगा।
मे फिन सें गरम होँ गई, वोँ मुझेऐसे हि चोदता रहा। कुछ देरबाद हम् दोनों एक् संग झड़े औऱ प्रदीप नें मुझेफिन सें अपनी बाँहो मे भर लिया औऱ मुझे चूमने लगा।
हम् दोनों उठे औऱ हमने झरने मे नहाया। वहा सें जब जानेलगे तोँ मैंने पत्थर पऱ सें अपनी पैन्टी उठाई।
वोँ अभि गीली थि, तब मैंने प्रदीप सें कहा- देखो, यह तुमने क्याँ किया थां। मेरी पैन्टी गीली हौ चुकी हैं। अब मे क्याँ पहनूँगी?
प्रदीप हँसकर बोला- मुझेपता थां ऐसाकुछ होगा इसलिये मैंने इसका इंतजाम पहले सें हि कररखा थां। जब मे आँ रहा थां, तब हि मैंने मार्किट सें तुम्हारे लिए एक् ब्रा औऱ पैन्टी खरीदी थि, चलो, गाड़ी मे रखी हैं। मे हि तुम्हें आज अपनेहाथ सें वोँ ब्रा औऱ पैन्टी पहना देता हूं।
हम् वाहन केँ पासआए तौ प्रदीप नें वाहन सें वोँ ब्रा पैन्टी निकाली औऱ मुझे पहनाई। फिन मैंने अपने कपड़े पहने औऱ प्रदीप नें भि अपने कपड़े पहने औऱ हम् वहा सें निकल पड़े।
प्रदीप औऱ मैंने सिटी केँ बाहर् हि एक् ढाबे मे खानां खाया। फिन प्रदीप नें मुझेघऱ छोड़ दिया औऱ वोँ चला गय़ा।
तोँ ये थि दोस्तो, मेरीआज कि कथाउस वाहन मे औऱ जंगल केँ बीच झरने केँ पास मुझे चुदने मे अपना हि एक् अलग आनंदआया। उम्मीद करती हूं, आप् सब कों मेरी स्टोरी पसन्द आई होगी। आपकोये किस्सा कैसीलगी, आप् मुझे बताइयेगा जरूर !
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