मैं उन्हें भइया बोलती हूँ complete - Hindi Sex Story – New Episode
कुछदेर मैंने भैया कां लन्ड चूसा, फिन भैया नें मुझे उठाया औऱ डायनिंग टेबल पऱ मुझे लिटा दिया औऱ मेरेऊपर चढ़कर मेरे पूरेबदन कों चूमने लगे, फिन उन्होंने मेरी बुर कों डायनिंग टेबल केँ किनारे पऱ किया औऱ स्वयं मेज सें नीचेउतर कर मेरी बुर कों चूसने लगे। भैया पूरेजोश मे आँ चुके थें, वोँ पागलों कि तरह मेरी बुर कों चूसेजा रहे थें, मे आँ आअह्ह आहह-आहह उइउइउइ करके सिसकारियाँ लेनेलगी औऱ कहनेलगी- भैया, थोडा धीरे-धीरे धीरे-धीरे चूसिये, मुझे दर्द होँ रहा हैं !
तौ भैया कहनेलगे- दर्द मे तोँ मज़ा आयेगा रोमा मेरीजान !
फिन भाभी किचन मे आँ गई, मैंने भाभी सें कहा- भाभी, भैया कों बोलो नं कि वोँ थोडा धीरे-धीरे धीरे-धीरे करें।
भैया नें भाभी सें कहा-पलक, जराजैम कि बोतल मे सें थोडा सां जैम तोँ निकाल करदो, इस ब्रेड पऱ लगाना हैं !
फिन भैया नें मेरी बुर पऱ जैमलगा दिया औऱ फिन सें उसे चूसने लगे। उधर भाभी भि डायनिंग टेबल केँ नीचे घुटनों केँ बलबैठ कर
भैया कां लन्ड चूसने लगी। बहुतदेर तक भैया मेरी बुर कों चूसते रहे औऱ भाभी भैया कां लन्ड चूसती रही। मेरे मुँह सें तोँ लगातार आआह्ह्ह ईइआअ आआअह्ह कि सीत्कारें हि निकलरही थि।
भाभी नें लन्ड कों जब अपने मुँह सें बाहर् निकाला तोँ भैया नें मुझे अपनीगोद मे उठा लिया औऱ भाभी सें कहा-चलो डार्लिंग, बेडरूम मे चलते हें।
औऱ हम् तीनों बेडरूम मे आँ गये। भईया नें मुझेबेड पऱ लिटा दिया, भाभी भि बेड पर्र बैठ गई औऱ भैया फिन सें मेरी बुर कों चाटने लगे। भाभी नें एक् हाथ मेरे वक्ष पर्र रखा औऱ दबाने लगी औऱ दूसरे हाथ कों उन्होंने मेरी बुर केँ पास लेजाकर बुर सहलाने लगी, भैया भि बुर कों चुसेजा रहे थें। मेरी सिसकारियाँ औऱ तेज हौ गई, मुझे औऱ मज़ाआने लगा थां। मेरे मुँह सें लगातार आँ आह्ह्ह्ह्ह ओआअह्ह आआम्म म्मम्म कि आवाजें निकलरही थि। अब भैया कों चुदाई कि जल्द थि, उन्होंने बुर पऱ सें मुँह हटाया औऱ मेरे पैरों कों फैला दिया। मे उनके सामने अपनी बुर खोले लेटी हुईँ थि, भैया मेरे दोनों पैरों केँ बीचआकर बैठगए औऱ अपने लन्ड कां सुपारा मेरी बुर पऱ लगा दिया, भाभी मेरे चूचेदबा रही थि औऱ बुर कों ऊपर सें सहलारही थि, मे तोँ पागलहुए जारही थि औऱ मचलरही थि। अब भैया नें लन्ड कां सुपारा मेरी बुर पर्र टिकाकर एक् झटका मारा तोँ उनका लन्ड मेरी बुर मे थोडा सां अन्दर चला गय़ा औऱ मेरे मुँह सें एक् जोर कि चीख निकली।
भाभी कहनेलगी- रोमा, मज़ा तौ आँ रहा हैं नां?
तब मैंने कहा-हाँ भाभी, बहोत आनंद आँ रहा हैं !
फिन भैया नें एक् औऱ जोर कां झटकामार कर पूरा कां पूरा लन्ड मेरी बुर मे घुसा दिया। भैया मेरी चुदाई करनेलगे औऱ भाभी जौ मेरे बूब्स दबारही थि, उन्होंने अब मेरे बूब्स कों अपने मुँह मे लेँ लिया औऱ उनको चूसने लगी।
इधर भैया जोरजोर सें धक्के लगाकर मेरी चुदाई कररहे थें औऱ मेरी आवाज़ पूरे कमरे मे गूंजरही थि। 5 मिनट कि चुदाई केँ बाद भाभी अपनी बुर कों हाथों सें फैलाते हुए खड़ी हुईँ औऱ बुर कों भैया केँ मुँह पर्र लगा दिया।
मे जान गई थि कि अब भाभी कों भि लन्ड अपनी बुर केँ अन्दर लेना हैं। इस 5 मिनट तक हुईँ एकधार चुदाई सें मे थक चुकी थि औऱ मेरा पानी भि निकल चुका थां।
तोँ भैया नें लन्ड कों मेरी बुर सें बाहर् निकाल कर भाभी कों बेड पर्र लिटा दिया औऱ एक् झटके मे हि उनका लन्ड भाभी कि बुर मे चल गय़ा क्यूँकि ये लन्ड औऱ बुर तौ जोर केँ हि दोस्त हें। अब भैया भाभी कों चोदने लगे औऱ मे भाभी कि बगल मे हि लेटी हुइ थि तोँ मैंने भि भाभी केँ बूब्स कों दबाना शुरु किया। उनके बूब्स बड़े थें, मे बूब्स कों दबारही थि तोँ उनमें सें दूध निकलरहा थां।
भाभी नें कहा- रोमा, जोर सें दबाओ इन्हें ! मुझे इनमें बहोत दर्द होँ रहा हैं। तुम् दबारही हौ तौ मुझे अच्छा लगरहा हैं।
तौ मे भि उनके बूब्स कों औऱ जोर-शोर सें दबाने लगी औऱ भैया भाभी कि जोरदार चुदाई कररहे थें, भाभी कि अब चीखें निकलरही थि, उनकी आवाजों सें साफपता चलरहा थां कि वोँ अब क्लाइमेक्स केँ बिल्कुल लगभग पहुँच चुकी हें औऱ उधर भैया कि भि हालत खराब थि, उन्हें भि चरमसुख केँ टाइम किसी कों जोर सें भींचने कि ख़्वाहिश हौ रही थि तौ उन्होंने मुझे पकड़कर भाभी केँ बूब्स केँ ऊपर बैठा दिया, मेरेबाल पकड़कर मुझेआगे झुका दिया औऱ मेरे कूल्हे ऊँचेकर दिए। मेरीये स्थिति बहोत हि उत्तेजक औऱ शर्मनाक होँ गयीँ, थि पऱ मे उन दोनों कां चरमसुख बिगाड़ना नहि चाहती थि इसलिये जैसे भैया नें चाहा, मैंने वैसे हि अपने चूतड़ उन्हें सौंपदिए।
भैया मेरे कूल्हों पऱ चांटे मारने लगे औऱ उन्हें चूमने लगे।
फिन जब भैया औऱ भाभी एक् संग डिस्चार्ज हुए तोँ भाभी नें मेरी बुर अपने मुँह मे लें ली औऱ भैया नें मेरे चूतड़ नौंच डाले औऱ फिन हम् तीनों हि एक् दूसरे पऱ निढाल होकरपड़ गए औऱ बहुतदेर तक ऐसे हि नंगे पड़ेरहे।
वोँ पूरीरात औऱ सुभह मेरेलिए कमाल सेक्स औऱ क़यामत कि रही, हम् तीनों नें बेशर्मी कि सारी सीमाएँ लांघ दि।
मैं उन्हें भइया बोलती हूँ complete - Hindi Sex Story – New Episode
रात कि चुदाई केँ बाद हम् सुभहदेर सें सोकरउठे, 10 बज चुके थें। उठने केँ बाद हम् तीनों फ्रेश हुए औऱ संग मे ब्रेकफास्ट किया तोँ करीब-करीब 12 बज चुके थें।
तभीघऱ केँ दरवाजे कि घंटीबजी तौ भाभी नें मुझेकहा- रोमा, जरा जाकर देखो तौ, कौनआया हैं।
मैंने दरवाजा खोला तोँ बाहर् भैया कि हि उम्र कां एक् व्यक्ति खड़ा थां, मैंने उनसे पूछा- किससे मिलना हैं?
तोँ उन्होंने कहा- मुझे गौरव अग्रवाल जी सें मिलना हैं।
तब मैंने भैया कों आवाज़ लगाई- भैया कोई आपसे मिलने आए हें।
भैया नें कहा- रोमा, तुम् उन्हें अन्दर बुलाओ, मे अभि आता हूं।
मैंने उनको अन्दर बुलाकर बिठाया औऱ मै अंदरचली गई। तब भैया बाहर् हॉल मे आए औऱ उन्हें देखते हि कहा-अरे प्रदीप? तूँ यहा केसे? बहोत दिनबाद मिलरहा हैं।
वोँ भैया केँ साथी थें।
प्रदीप- दोस्त, मे यहाकाम केँ सिलसिले मे आया हूं तोँ सोचा तुझसे मिललूँ इसलिये आँ गय़ा, औऱ आजसाम कि मीटिंग हैं।
भैया- चल अच्छा हैं, अबआया हैं तोँ यहीं रुकना। साम कों किस वक्त मीटिंग हैं?
प्रदीप- 5 बजे।
भैया- अभि तौ बहोत समय हैं, तूँ फ्रेश हौ जा औऱ फिन खानां खाकर जानां मीटिंग केँ लिए।
तभी भाभी बाहर् आई, प्रदीप नें भाभी कों नमस्ते किया। तभी प्रदीप नें भैया सें कहा- भाभी सें तोँ मे मिल चुका हूं ! पर्र यह मोहतरमा कौन हें?
उन्होंने मेरीतरफ इशारा करतेहुए कहा।
तब भैया नें बताया कि ये मेरे अंकल कि बेटी रोमा हैं। मे भि अभि घऱ सें बाहर् थां तोँ येपलक सें संगरह रही थि, मे भि तोँ कल हि लौटा हूं।
तब भाभी नें कहा- मे कुछ ब्रेकफास्ट लेकरआती हूं !
मे औऱ भाभी किचन मे आँ गये, हम् सबने थोडा ब्रेकफास्ट किया, फिन प्रदीप नें भैया सें कहा- दोस्त मेरी गाड़ी बाहर् खड़ी हैं, उसे कहां पार्क करना हैं?
तौ भैया नें कहा- तूँ गाड़ी कि चाबी मुझेदे, मे गाड़ी कों पार्क कर देता हूं।
भैया नें प्रदीप कां सामान गेस्टरूम मे रखा औऱ उनसेकहा- तुम् आहिस्ता फ्रेश हौ जाओ, फिन हम् खानां खाते हें।
मेरा समान भि उसीरूम मे थां, मे औऱ भाभी दोपहर केँ खाने कि तैयारी करनेलगे। मैंने भाभी सें कहा- भाभी, मेरा समान भि उसीरूम मे हैं जिसरूम मे प्रदीप हैं औऱ पूरा समान बिखरा हैं, मेरे कपड़े पूरे खुले पड़े हें।
तब भाभी नें कहा- तुम् जाओ औऱ कपड़ों कों समेटकर अपनेबैग मे भरकर मेरेरूम मे लाकररख दो।
मे गेस्ट रूम मे गई, जैसे हि मैंने गेस्ट रूम कां दरवाजा खोला, मैंने देखा कि प्रदीप केवल अन्डरवीयर मे खड़े थें, मेरे दरवाजा खोलने सें उनकोकुछ आवाज़ हुई तौ वोँ मेरीतरफ मुड़े तोँ उनकेहाथ मे मेरी ब्रा थि। प्रदीप नें जैसे हि मुझे देखा तौ ब्रा कों वहीं नीचे फेंक दिया औऱ मेरीतरफ आकरकहा- रोमा तुम्?
तोँ मैंने कहा- मे अपना सामान लेनेआई हूं।
तौ उन्होंने कहा-ये तुम्हारा सामान हैं।
मैंने हाँ मे अपनासर हिलाया औऱ अपने कपड़े उठाने लगी। मे चोर नजरों सें उनकीतरफ देखरही थि क्यूंकि वोँ मात्र अन्डरवीयर मे थें औऱ उनकी अन्डरवीयर मे लन्ड कां उभार बहुत बड़ालग रहा थां।
मे जानबूझ कर धीरे-धीरे धीरे-धीरे कपड़े उठारही थि औऱ चोर नजरों सें उनकीतरफ देखरही थि।
फिन प्रदीप नें कहा- रोमा, तुम् अपने कपड़े उठालो, मे नहाकर आता हूं।
मैंने अपने सारे कपड़े समेटलिए, मेरामन बारबार प्रदीप कों देखने कों कररहा थां। तब मुझेयाद आया कि मेरी एक् ब्रा-पेंटी बाथरूम मे हि हैं, तौ मैंने सोचा कि अगर मे वोँ प्रदीप सें मांगूगी तोँ उसे बाथरूम कां दरवाजा खोलना पड़ेगा जिससे मे उसेदेख सकती हूं।
मे बाथरूम केँ पास गई औऱ कहा- प्रदीप जी, मेरेकुछ कपड़े अन्दर हें, क्याँ आप् मुझे वोँ दे दोगे?
तौ प्रदीप नें कहा- रोमा तुम्हारे यहाकोई कपड़े नहि हें।
तौ मैंने कहा- आप् ध्यान सें देखो, होंगे !
मैंने कहा- मेरी ब्रा-पेंटी हैं अन्दर, वोँ मुझेदे दो।
तौ प्रदीप नें कहा-हाँ वोँ हें।
औऱ उसने बाथरूम कां दरवाजा खोला औऱ मुझे ब्रा पेंटी दि। दरवाजा खुलते हि मैंने उसकीओर देखा तौ उसने अभि भि अंडरवीयर पहनी हुई थि जोँ पानी सें गीली होँ चुकी हि औऱ उसकेशरीर सें चिपक गई थि तोँ उसके लन्ड कां उभार मुझे औऱ भि आकर्षक लगरहा थां।
मेरी नजरें उस पऱ सें हट नहि रही थि। फिन मैंने उसकेहाथ सें ब्रा-पेन्टी ली औऱ उसे अपनेबैग मे रखकररूम सें बाहर् आकर भाभी केँ रूम मे अपनाबैग रख दिया औऱ रसोई मे आकर खानां बनाने मे भाभी कि सहायता करनेलग गई।
बातों हि बातों मे मैंने भाभी कों बताया- भाभीजब मे गेस्टरूम मे गई तोँ प्रदीप मात्र अन्डरवीयर मे खड़े थें औऱ उनकेहाथ मे मेरी ब्रा थि, उन्होंने मुझेदेख कर ब्रा कों नीचे फेंक दिया, शायद मेरे अचानक वहा जाने सें वोँ घबरागए थें तोँ उन्होंने ब्रा कों नीचे फेंक दिया थां औऱ फिन वोँ बाथरूम मे चलेगये पर्र भाभी, मे उन्हें मात्र अंडरवीयर मे देखकर उनकीतरफ आकर्षित हौ गई थि, वोँ मुझे बहोत अच्छे लगरहे थें, उनका लन्ड उनकी अंडरवीयर मे बहुत बड़ालग रहा थां।
तब भाभी नें मुझेऐसे हि कहा- क्यूं रोमा, प्रदीप सें भि चुदाई करवाने कां मनकररहा हैं क्याँ?
तोँ मैंने भाभी सें कहा- क्याँ भाभी, आप् भि कुछ भि बोलरही हौ? कल हि तौ मैंने भैया केँ संग चुदाई कि थि।
तभी भाभी नें कहा- रोमाअगर तुम्हारा मन प्रदीप सें भि चुदवाने कां कररहा होँ तौ बतादो, मे तुम्हारे भैया कों कह दूँगी तोँ वोँ उसे प्रदीप सें कह देंगे ! वैसे भि वोँ प्रदीप भि कम नहि हैं, जहाँ लड़की देखी नहि कि उसे चोदने केँ ड्रीम्स देखने लगता हैं। तुम्हारे भैया नें मुझे बताया हैं उसके बारे मे ! मुझे तोँ लगता हैं कि शायद वोँ तुम्हें चोदने कां सपनादेख हि रहा होगा इसलिये वोँ रूम मे केवल अंडरवीयर मे थां औऱ तुम्हारी ब्रा उसकेहाथ मे थि।
फिन भाभी औऱ मेरीऐसे हि बातें होतीरही। खानां बन चुका थां तौ भाभी नें मुझेकहा- रोमा तुम् इसे डाइनिंग टेबल पऱ लगाओ, मे अभि आती हूं !
औऱ भाभी अपनेरूम मे चली गई, मे डाइनिंग टेबल पर्र खानां लगाने लगी। खानां लगाने केँ बादजब मे भाभी केँ रूम मे जानेलगी तोँ मैंने भैया औऱ भाभी कों बात करते सुना, भाभी भैया सें कहरही थि- रोमाजब गेस्ट रूम मे अपने कपड़े समेटने केँ लिए गई थि न्, तौ प्रदीप वहा केवल अंडरवीयर मे थां औऱ उसकेहाथ मे रोमा कि ब्रा थि, येबात मुझे रोमा नें बताई, औऱ वोँ कहरही थि कि उसका लन्ड अंडरवीयर मे बहुत बड़ालग रहा थां औऱ रोमा कों वोँ बहोत आकर्षित लगरहा थां, औऱ जब मैंने रोमा सें पूचा कि क्याँ तुम् उससे चुदना चाहती हौ तोँ उसने मुस्कुरा करबात कों टाल दिया, मुझे तोँ लगता हैं कि प्रदीप भि कहीं रोमा कों चोदने कि फ़िराक मे तौ नहि हैं?
तौ भैया नें कहा-हाँ होँ सकता हैं !
फिन मे रूम केँ अंदर गई औऱ भैया भाभी कों कहा-चलो, मैंने टेबल पऱ खानां लगा दिया हैं !
तोँ भैया नें कहा-चलो, मे प्रदीप कों बुला लाता हूं !
भैया चलेगए औऱ हम् भि रसोई मे आँ गए।
मैंने भाभी सें कहा- भाभी, आपकोये बात भैया कों बताने कि क्याँ जरुरत थि? मैंने आपकी बातें सुनली हें !
तभी भैया औऱ प्रदीप भि आँ गए। हमने खानां खाया, खानां खाने केँ बाद प्रदीप औऱ भैया तोँ हॉल मे जाकर टेलीविज़न देखने लगे औऱ इधर भाभी औऱ मे टेबल कों साफ करनेलगे। उसके हम् दोनों रूम मे चलेगए, वहा भाभी नें फिन मुझसे कहा- रोमा, तुम्हें प्रदीप अच्छा लगा नं?
तोँ मैंने बात कों पलटते हुएकहा- भाभी मे अभि आती हूं।
मे जबरूम सें बाहर् आई तोँ मैंने हॉल मे प्रदीप औऱ भैया कि फिन बातें सुनी।
भैया प्रदीप कों कहरहे थें कि ‘दोस्त, तुम् रोमा कि ब्रा कों हाथ मे लेकर क्याँ कररहे थें?’
तौ उसने चौंकते हुएकहा- दोस्त, ये तुझेही किस नें बताया?
तोँ भैया नें कहा- दोस्त रोमा नें पलक कों बताया तौ पलक नें मुझे बताया हैं।
प्रदीप नें कहा-ये बात भाभी कों भि पताचल गई दोस्त ! मैंने कुछ नहि किया, बस ब्रा कों हाथ मे किया थां, पऱ जब रोमावहा आँ गई तोँ मे उसे नीचेरख कर बाथरूम मे नहाने केँ लिएचला गय़ा थां। उसकेबाद रोमा हि मेरेपास आई थि औऱ बाथरूम केँ दरवाजे कों खटखटा करमुझ सें कहा कि ‘प्रदीप जी, मेरेकुछ कपड़े अंदर हें, वोँ मुझेदे दो’ तोँ मैंने कहा कि ‘यहाकोई कपड़े नहि हें’ तोँ उसने हि कहा थां कि मेरी ब्रा-पेन्टी अंदर हैं, वोँ देदो !’ तौ मैंने बसवही उसे दि थि।
तब भैया नें उसेकहा- दोस्त उसने तुम्हारी तरफ अंडरवीयर मे देखा तौ वोँ तेरीतरफ आकर्षित होँ गई थि। उसे तूँ अंडरवीयर मे बहोत अच्छा लगरहा थां। दोस्त, जब मे घऱआया थां तोँ उसने मेरेसंग भि चुदाई कि थि।
तभी प्रदीप नें कहा- दोस्त, मे भि उसे चोदना चाहता हूं, मे जब सें आया हूं, उसी केँ बारे मे सोचरहा हूं, वोँ बहोत सेक्सी हैं दोस्त ! तुँ हि मेरीकुछ सहायता कर नाँ ! मे उसे चोदना चाहता हूं।
तोँ भैया नें कहा- केसे दोस्त? तेरी तोँ अभि दो घंटेबाद मीटिंग हैं औऱ आजसाम कों वोँ अपनेघऱ चली जायेगी।
प्रदीप कहनेलगा- दोस्त आज केसे भि कर, उसे यहारोक लें, मे उसेआज रात कों चोदना चाहता हूं !
तब भैया नें कहा- दोस्त तूँ एक् कामकर ! अभि जब तुँ मीटिंग मे जाने केँ लिए रेडी होगा नं, तौ मे रोमा कों केसे भि करके तेरेपास भेज दूँगा, तुँ कमरे मे बिना कपड़ों केँ रहना, केसे भि करके रोमा कों अपनी औऱ आकर्षित करना। अगर वोँ तेरीओर आकर्षित हौ गई तोँ वोँ पक्का तेरेसंग सेक्स करने केँ लिए रेडी होँ जायेगी औऱ आजरात कों यहींरुक भि जायेगी।
तब प्रदीप नें कहा-हाँ ठीक हैं दोस्त ! मे कुछ करूँगा, तूँ एक् बार रोमा कों कमरे मे भेज देना दोस्त ! मे अब जाकर मीटिंग केँ लिए सजधजकर होता हूं।
मैंने उन दोनों कि यह सारी बातें सुनी तौ मेरेमन मे कुछ गुदगुदी सि होनेलगी थि औऱ मे वापस भाभी केँ कमरे मे आँ गई।
तभी भैया आए औऱ उन्होंने अपनी अलमारी कों खोला औऱ उस मे सें कुछटाई निकली औऱ मुझेकहा- रोमा, यह टाई तुम् जाकर प्रदीप कों देदो, उसे जरुरत हैं।
तब मैंने भैया सें कहा- मुझेपता हैं भैया कि आप् मुझेवहा क्यूं भेजरहे हौ !
औऱ मैंने भैया केँ हाथ सें टाईली औऱ गेस्टरूम मे जानेलगी। मैंने जब गेस्टरूम कां दरवाजा खोला तौ प्रदीप वहाफिन सें मात्र अंडरवीयर मे हि खड़ा थां।
मैंने उससेकहा- यहकुछ टाई भैया नें दि हैं आपको देने केँ लिए ! औऱ जब मैंने उसके अंडरवीयर कि तरफ देखा तौ उसका लन्ड मुझे पहले सें भि ज़्यादा बड़ालग रहा थां। वोँ शायदकुछ खड़ा होँ गय़ा थां।
उसने मेरेहाथ सें टाई लें ली। जब मे वापसआने केँ लिए मुड़ी तौ उसने मेराहाथ पकड़ लिया औऱ मुझे अपनीतरफ खींच लिया औऱ कहा- रोमा, तुम् मुझे बहोत सेक्सी लगती होँ।
मैं उन्हें भइया बोलती हूँ complete - Hindi Sex Story – New Episode
मुझे उसकी बांहों मे आकर बहोत अच्छा लगा। फिन उसने मेरे एक् हाथ कों अपने एक् हाथ सें पकड़ा औऱ मेरेहाथ कों अपने अंडरवीयर
पऱ रखकर लन्ड कों मेरेहाथ सें दबाने लगा।
मे तौ बेसुध सि हौ गई थि, मुझेकुछ समझ नहि आँ रहा थां कि मे क्याँ करूँ। फिन उसने अंडरवीयर कों नीचे करके अपना लन्ड मेरेहाथ मे थमा दिया औऱ अपनेहाथ सें मेरेहाथ कों पकड़कर लन्ड कों सहलाने लगा।
उसकागरम लन्ड मेरेहाथ मे आते हि मेरे अंदर एक् झनझनाहट सि महसूस हुई औऱ उसने अपने होंठों कों मेरे होंठों पर्र रख दिया औऱ उन्हें चूसने लगा। मेरी साँसें तेज होँ गई औऱ मे पागल सि होनेलगी। मैंने अब अपने आप् कों उसके हवाले कर दिया।
फिन उसने मुझसे कहा- रोमा, मे तुम्हारे संग सेक्स करना चाहता हूं।
तब मुझेहोश आया औऱ मैंने अपने आपको उसकी बांहों सें किसीतरह छुड़ाया औऱ उससेकहा- अभि आप् जाइये, आपको मीटिंग केँ लिएदेर होँ रही हैं। देखो 4 बजगए हें।
उसनेफिन मुझसे पूछा- रोमा मेरेसंग सेक्स करोगी क्याँ?
तोँ मैंने मन मे सोचा कि घऱ जाने सें पहले एक् बार औऱ सेक्स कर लेती हूं तौ मैंने अपनासर हाँ मे हिला दिया औऱ रूम सें बाहर् आई। फिन जब मे भाभी केँ रूम मे गई तोँ उधर भैया भाभी कि चुदाई कां प्रोग्राम चलरहा थां, भैया भाभी कों चोदरहे थें।
भाभी नें मुझसे कहा- रोमा तुम् मिनी कों बाहर् लेँ जाओ, हम् अभि आते हें।
मिनी भाभी कि बेटी कां नाम हैं मैंने अपनी पुरानी कथा मे बताया भि थां शायद !
तौ मे मिनी कों लेकरहॉल मे आँ गई औऱ टेलीविज़न देखने लगी। कुछ हि देर मे भैया-भाभी भि अपना चुदाई कां प्रोग्राम समाप्त करकेहॉल मे आँ गये, फिन प्रदीप भि आया औऱ उसनेकहा- मे मीटिंग केँ लिएजा रहा हूं, आने मे थोड़ी देर हौ जायेगी।
उसने अपनी वाहन निकली औऱ वोँ चला गय़ा।
प्रदीप केँ जाने केँ बाद भैया नें मुझसे कहा- रोमा, तुम्हें प्रदीप कों टाई देने मे इतनीदेर केसे होँ गई थि? क्याँ हुआरूम मे?
तौ मैंने भैया सें कहा- भैया, मुझेपता हैं कि आपने मुझे प्रदीप कों टाई देने केँ लिए क्यूं भेजा थां, मैंने आपकी औऱ प्रदीप कि सारी बातें सुनली थि कि आपनेउसे क्याँ क्याँ कहा थां।
तोँ भैया भाभी नें मुझसे पूछा- तौ क्याँ हुआ रोमा, तुम् आज यहींरुक रही होँ नाँ?
फिन तौ मैंने हाँकही औऱ वोँ सारीबात बताई जोँ प्रदीप नें मेरेसंग रूम मे कि थि। फिन भैया भाभी कों कहा- मैंने सोचा कि घऱ जाने सें पहले प्रदीप केँ संग एक् बार सेक्स कर हि लेती हूं क्यूं कि उसने मुझेरूम मे बहोत गरमकर दिया थां।
ऐसे हि बातों केँ बाद भैया मार्किट सब्जी लाने केँ लिएचले गये तोँ भाभी औऱ मे टेलीविज़न देखने लगी।
भैया मार्किट सें सब्जी लाए तोँ भाभी औऱ मे रात केँ खाने कि तैयारी मे लगगए।
रात केँ लगभग 9 बजे प्रदीप आया, उसने मुझे देखा तौ उसके चेहरे कि खुशीसाफ दिखरही थि।
भैया नें प्रदीप सें कहा-जाओ प्रदीप, तुम् जाकर फ्रेश हौ आओ, खानां रेडी हैं ! खाने केँ बाद तुम् बताना कि तुम्हारी मीटिंग कैसीरही। खाने केँ बाद भैया औऱ प्रदीप फिनहॉल मे चलेगए औऱ टेलीविज़न देखने लगे। इधर भाभी औऱ मे भि रूम मे चलेगये। रूम मे जाकर भाभी नें मुझे एक् नाइटी निकाल कर दि औऱ कहा-लो रोमा, तुम् इसेपहन लो !
तोँ मैंने अपने कपड़े उतारे औऱ वोँ नाइटी पहनली। भाभी नें भि एक् नाइटी पहनली औऱ हम् फिन बाहर् हॉल मे हि आकरबैठ गए।
11 बज चुके थें, कुछदेर बादअब प्रदीप सें सब्र नहि होँ रहा थां तौ उसने भैया केँ कान मे कुछकहा तोँ भैया नें…
भाभी सें कहा-चलो पलक, अब हमें सोना चाहिए !
तौ वोँ दोनों वहा सें अपने कमरे मे चलेगये। मुझे थोडा डरलगरहा थां तौ मे भि उठकर रसोई मे जाकर पानी पीनेलगी।
तभी प्रदीप भि वहा आँ गय़ा औऱ उसने मुझे पकड़ लिया औऱ मेरी गर्दन पर्र चुम्बन करनेलगा औऱ कहनेलगा- रोमा, अब तोँ तुम् इस
नाइटी मे पहले सें भि ज़्यादा सुन्दर लगरही हौ।
तभी वहां भाभी आँ गई तोँ उसने मुझे छोड़ दिया।
भाभी नें फ्रिज सें पानी कि बोतल निकाली औऱ चली गई।
तोँ प्रदीप नें मुझेफिन सें पकड़ लिया औऱ कहनेलगा- चलो नां रोमा, रूम मे चलते हें।
उसने मुझे अपनीगोद मे उठा लिया औऱ रूम मे लाकर मुझेबेड पऱ बैठा दिया, फिन उसने मेरे हाथों कों अपने हाथों मे लिया औऱ उन्हें चूम लिया।
अब उसने मेरे हाथों कों अपने कंधों पऱ रखा औऱ मुझे मुझे अपनीतरफ खींच लिया तौ मे आसानी सें उसकेऊपर जा गिरी।
प्रदीप नें अपने होंठों कों मेरे होंठों पर्र रखा औऱ उन्हें चूसने लगा। मेरी साँसें अबगरम होनेलगी थि औऱ वोँ मेरे होंठों कों चूसेजा रहा थां। फिन उसने मेरे निचले होंठ कों अपने दोनों होंठों केँ बीच लिया औऱ चूसने लगा, उसके हाथों कि अंगुलियाँ मेरे बालों मे उलझी हुई थि। उसने मेरीजीभ कों अपने मुँह मे लिया औऱ बहोत हि सुन्दर ढंग सें चूसरहा थां।
उसकेहाथ अब मेरीपीठ पऱ घूमते हुएकमर सें होतेहुए नीचे जानेलगे औऱ फिन उसने अपनेहाथ मेरी नाइटी केँ अंदरडाल दिए औऱ नाइटी कों उठाने लगे तोँ मैंने भि अपने चूतड़ उठाकर नाइटी उतरने मे उसकी सहायता कि।
उसने नाइटी उतरकर अलगकर दियाअब धीमे धीमे उसकेहाथ मेरे वक्ष कि गोलाइयों केँ नजदीक तक पहुँच गए, उसकेहाथ मेरी ब्रा पर्र महसूस होँ रहे थें। इसबीच हम् दोनों नें एक् दूसरे कों चूमना जारीरखा उसकी हरकतें मुझे बहोत हि अधिक उत्तेजित कररही थि, अब मैंने भि अपनेहाथ उसकीकमर पऱ रखकर उसकी टी-शर्ट ऊपर करके निकाल दि। इसबीच मुझे महसूस हुआ कि उसका लन्ड खड़ा होँ गय़ा हैं जोँ उसके लोअर कों फाड़कर बाहर् आने कों सजधजकर थां। मे उसके सख्त हौ चुके लन्ड कों लोअर केँ ऊपर सें हि रगड़रही थि। फिन मैंने उसके लोअर कों पूरा नीचे सरका दिया तोँ उसने भि उसे अपने पैरों सें निकाल करअलग कर दिया। अब मे अंडरवीयर केँ ऊपर सें हि प्रदीप केँ लन्ड कों पकड़कर सहलाने लगी औऱ वोँ मेरे होंठों कों चूमने लगा।
कुछ हि देरबाद उसने मुझेबेड पर्र सें उठाकर नीचे बिठा दिया औऱ मेरे सामने आकर अपनी अंडरवेअर कों भि उतारकर फेंक दिया औऱ अपने लण्ड कों मेरे लबों पऱ टिका दिया। वोँ बहोत गरम थां, उसकाये सभी करना मुझे औऱ उत्तेजित कररहा थां।
उसनेकहा- रोमा, चूसोइसे !
तोँ मैंने उसके लन्ड कों अपने मुँह मे लें लिया औऱ चूसने लगी। वोँ लन्ड कों मेरे मुँह मे हि आगे पीछे करनेलगा मानो मुँह कि हि चुदाई कररहा हौ।
कुछदेर बाद उसने मुझे वापसबेड पऱ बैठा दिया औऱ अपने हाथों कों मेरीपीठ पर्र लाकर मेरी ब्रा कां हुकखोल दिया। अब मेरे वक्ष कि दोनों गोलाइयाँ उसके सामने बिल्कुल आजाद होकर झूलने लगी, वोँ मेरी चूचियाँ अपने हाथों मे लेकर दबाने लगा। मेरे चेहरे पर्र बेचैनी थि। उसने मेरे एक् निप्पल कों अपनी अंगुलियों मे लेकर मसला तौ मेरे मुँह सें एक् अह्ह कि आवाज़ निकली।
फिन उसने झुककर मेरे दूसरे निप्पल कों अपनेमुख मे लेँ लिया औऱ उसे अपनीजीभ सें सहलाने लगा, मुझे बहोत अच्छा लगरहा थां, मे सिसकारियाँ लेनेलगी।
अब प्रदीप नें अपना एक् हाथ निप्पल पर्र सें हटाकर पेरेपेट सें सरकते हुए पेन्टी केँ ऊपररख दिया औऱ मेरी बुर कों पेन्टी केँ ऊपर सें हि सहलाने लगा।
कुछ हि देरबाद उसने अपना मुँह भि मेरे निप्पल पऱ सें हटाकर मेरी बुर कि तरफआकर एक् हि झटके मे मेरी पेन्टी कों मेरी जाँघों सें सरकाकर अलग फेंक दिया औऱ अपनेहाथ कि अंगुली कों मेरी बुर केँ अंदरडाल दिया औऱ अंदर-बाहर् करनेलगा।
फिन मुझेबेड केँ किनारे लाकर स्वयं बेड केँ नीचेबैठ गय़ा औऱ अपना मुँह मेरी बुर पर्र रखकरजीभ सें उसे चाटने लगा। मेरी बेसबरी अब बढ़ती जारही थि तौ मैंने उसके बालो कों पकड़कर उसकेसर कों अपनी बुर पऱ दबाया। जैसे जैसे उसकीजीभ अपनाकाम कररही थि, मे औऱ भि उत्तेजित होतीजा रही थि, कुछदेर उसकीजीभ सें मेरी बुर कि चुदाई केँ बाद उसने मेरे दोनों पैरों कों फैलाया, मेरी बुर उसके सामने थि तोँ उसने एक् समय कि भि देरी किये बिना अपने लन्ड कों मेरी बुर पर्र रखा औऱ उसके अंदर डालने लगा।
उसका लन्ड बहुत मोटा थां जोँ आसानी सें अंदर नहि जारहा थां औऱ मुझे बहोत दर्द होँ रहा थां। तौ उसनेवहा मेज पर्र रखी बॉडी लोशन कि बोतल सें थोड़ी क्रीम अपने लन्ड औऱ मेरी बुर पर्र लगाई, फिन लन्ड कों मेरी बुर पऱ रखकर लन्ड कों अंदर डालने कि कोशिश कि तौ लन्ड थोडा सां अंदरचला गय़ा औऱ मेरीचीख निकल गई।
वोँ थोडा रुका औऱ फिन एक् औऱ जोर कां झटका मारा तोँ उसका पूरा लन्ड मेरी बुर मे जा चुका थां। मुझे बहोत दर्द हौ रहा थां औऱ मे दर्द केँ मारे उतावलापन रही थि। कुछदेर बादजब मेरा दर्दकम हौ गय़ा तौ प्रदीप नें लन्ड कों आगे पीछे करना शुरु किया औऱ मुझे चोदने लगा। फिन एक् दूसरे कों धक्के देने कां सिलसिला चालू हौ गय़ा, हम् दोनों कि चोदन-गति बढ़ती जारही थि, मेरेपेर हवा मे खुलेहुए थें जिससे प्रदीप कों लन्ड बुर केँ अंदर तक डालने मे आसानी होँ रही थि।
अब उसका लन्ड तेजी सें बुर केँ अंदर-बाहर् हौ रहा थां, एक् जबर्दस्त घर्षण उसके लन्ड सें मेरी बुर कि दीवारों पर्र उत्पन्न होँ रहा थां। हम् दोनों आनन्द कि एक् दूसरी दुनिया मे तैररहे थें। मेरी बुर सें गरम पानी निकलने लगा जोँ लुब्रीकेंट कां कामकर रहा थां।
हम् दोनों अपनीचरम सीमा केँ नजदीक पहुँच रहे थें, इस चुदाई सें फच्च फच्च कि आवाज़ आनेलगी थि, हमारे अंदर एक् जबर्दस्त तूफान उबालमार रहा थां, हम् दोनों केँ अंदर एक् लावाभभक रहा थां जोँ हमारी चुदाई केँ अन्तिम पलों मे फ़ूट पड़ा, हम् दोनों केँ जिस्म शांत हौ गए औऱ थोड़ी देर तक एक् दूसरे कि बाहों मे पड़ेरहे।
ये मस्ती कां दौररात मे फिनदो बार औऱ चला !
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