woh Sirf Meri Behene nahee – New Episode
PART 4
रात केँ सन्नाटे मे बाहर् हल्की सर्दहवा चलरही थि औऱ कमरे केँ अंदर कां माहौल किसी सुलगती हुई भट्टी जैसा हौ चुका थां।
आरव नें कुछ मिनटों पहले हि अपनी उत्तेजना कों शांत किया थां। उसने स्वयं कों समझा लिया थां कि अब वोँ सो जाएगा। उसने अपनी आँखें बंदकर लीथीं, मगर नींद उससे कोसों दूर थि। औऱ उसकी सबसे बड़ीवजह थि—सोनिया दि।
सोनिया उसके बिल्कुल सटकरसो रही थि। उसका एक् पांव अभि भि आरव केँ पैरों केँ ऊपर थां, औऱ उसकाहाथ आरव केँ सीने पऱ। आरव शांत हौ गय़ा थां मगरतभी नींद मे बेखबर सोनिया नें एक् गहरी करवटली औऱ वोँ आरव केँ औऱ भि लगभग आँ गई।
इस करवट केँ संग सोनिया कि वोँ ढीली-ढाली टी-शर्ट उसके कंधे सें औऱ नीचे खिसक गई। खिड़की सें आती चाँद कि रोशनी सोनिया केँ चेहरे औऱ उसकेबदन पर्र पड़रही थि। टी-शर्ट केँ खिसकने सें सोनिया कि गोरी, चिकनी गर्दन औऱ उसके सीने कि गहरी घाटी (क्लीवेज) पूरीतरह सें आरव कि आँखों केँ सामने खुल गई थि। ब्रा नां पहनने कि वजह सें सोनिया केँ बूब्स टी-शर्ट केँ कपड़े कों चीरकर बाहर् आने कों बेताब लगरहे थें। उसका एक् बूब्आरव केँ बांह सें सीधा रगड़खा रहा थां।
सोनिया कि साँसें आरव कि गर्दन पऱ टकरारही थीं।
आरव कां बदन जोँ कुछदेर पहले शांतहुआ थां, वोँ फिन सें सुलगने लगा। उसके पजामे केँ अंदर उसका लंड फिन सें फड़कने लगा। उसने स्वयं कों रोकने कि कोशिश कि, अपने होंठों कों दाँतों तले भींच लिया, मगर सोनिया केँ शरीर कि वोँ गर्माहट उसके अंदर केँ उस छुपेहुए शैतान कों जगारहा थां। आरव कां लंड पजामे केँ अंदरफिन सें पूरीतरह तनकर लोहे जैसा सख्त हौ गय़ा थां, इतना सख्त कि उसे कपड़े केँ अंदर दर्द महसूस होनेलगा।
"दि." आरव केँ गले सें एक् बेहददबी हुई, खुरदरी आवाज़ निकली।
सोनिया गहरी नींद मे थि। उसके होंठ हल्के सें खुलेहुए थें। आरव जानता थां कि सोनिया इतनी आसानी सें नहि जागती।
आरव सें अब बर्दाश्त नहि होँ रहा थां। उसने हमेशा अपनी बहनों कों दूर सें चाहा थां, मगरआज उसकी सबसेहॉट औऱ बिंदास बेहन उसकेबैड पऱ, उसकी बाहों केँ बीच, करीबआधी नंगी हालत मे सोरही थि।
आरव नें अपना कांपता हुआ दायां हाथ रजाई केँ अंदर डाला। इस बार उसने स्वयं कों नहि रोका। उसने बहोत हि आहिस्ता सें, बिनाकोई दबाव डाले, अपनी उंगलियों केँ पोरों कों सोनिया कि टी-शर्ट केँ नीचे सरका दिया। सोनिया कि नंगी, गरम औऱ रसीले कमर पऱ जैसे हि आरव कि उंगलियां पड़ीं, आरव केँ पूरे जिस्म मे बिजली सि दौड़ गई।
सोनिया कि त्वचा रेशम सें भि अधिक चिकनी थि। आरव कि उंगलियां आरामसे उसकी नाभि (navel) केँ पास रेंगने लगीं। वोँ सोनिया केँ पेट कों महसूस कररहा थां। उसने अपनाहाथ थोडा औऱ ऊपर किया औऱ सोनिया केँ भारी सीने केँ ठीक नीचे, जहाँ उसका टी-शर्ट समाप्त होँ रहा थां, वहा उसकी त्वचा कों छूनेलगा।
सोनिया नें नींद मे एक् हल्की सि 'हम्म' कि आवाज़ कि औऱ अपना पांवआरव कि जांघ पऱ औऱ कस लिया। सोनिया कि इस हरकत सें आरव कां सख्त लंड सीधा सोनिया कि रसीले जांघ सें जा टकराया। पजामे केँ पतले कपड़े केँ पार सें सोनिया कि जांघ कि वोँ नरमी औऱ दबाव महसूस करते हि आरव कि आँखों केँ आगे अंधेरा छानेलगा।
अबआरव अपनी हदेंपार कररहा थां। वोँ चरम पऱ पहुँच चुका थां। उसने रजाई केँ अंदर हि अपने पजामे कां नाड़ा खींचा औऱ अपने पजामे कों अंडरवियर केँ संग घुटनों तक नीचे सरका दिया। उसका पूरीतरह सें तनाहुआ, सख्त औऱ गरम लंड अबहवा मे आज़ाद थां।
आरव नें अपनी बाईं मुट्ठी मे अपने लंड कों कसकर पकड़ लिया। उसकी नसें उभरी हुई थीं औऱ वोँ आग कि तरहतप रहा थां। उसने सोनिया केँ हसीन चेहरे कों देखा। सोनिया केँ माथे पर्र बिखरे बालों कों देखते हुएआरव नें अपनी लंड कों हिलाना शुरुआत कर दिया।
शुरुआत मे उसकीगति धीमी थि। वोँ सोनिया केँ बदन केँ उस सुंदर नज़ारे कों अपने दिमाग़ मे उतारते हुए, हर एक् रगड़ कों महसूस कररहा थां। उसका दायां हाथ अभि भि सोनिया कि टी-शर्ट केँ अंदर थां, जौ बहोत हि प्रेम सें उसकीकमर कों सहलारहा थां।
जैसे-जैसे आरव कां हाथ सोनिया कि कमर सें होतेहुए उसकी छाती केँ निचले हिस्से कों हल्के सें छूरहा थां, उसके बाएँहाथ कि रफ्तार औऱ भि तेज़ होतीजा रही थि। आरव अपने लंड कों मुट्ठी मे जकड़कर ऊपर-नीचे रगड़रहा थां। चमड़ी केँ रगड़ने कि वोँ हल्की-हल्की आवाज़ रजाई केँ अंदर गूंजरही थि, जिसेआरव नें अपनी भारी साँसों केँ नीचेदबा लिया थां।
सोनिया नें नींद मे अपनासिर आरव केँ औऱ लगभगकर लिया। उसके खुलेहुए होंठआरव केँ सीने सें करीब-करीब छूरहे थें। सोनिया कि हर एक् साँसआरव कि त्वचा कों जलारही थि। आरव नें अपनी आँखें बंदकर लीं औऱ अपना चेहरा सोनिया कि गर्दन मे छुपा लिया।
आरव कि मुट्ठी कि गतिअब रुकने कां नाम नहि लें रही थि। वोँ लंड द कों हिलारहा थां। उसका जिस्म पसीने सें भीग चुका थां।। उसका लंड इतना सख्त होँ गय़ा थां कि अब वोँ फटने कि कगार पऱ थां।
अचानक सोनिया नें नींद मे कुछ बड़बड़ाया औऱ अपनाहाथ आरव केँ सीने सें हटाकर आरव केँ पेट केँ पासरख दिया—आरव केँ लंड सें महज़कुछ इंच कि दूरी पर्र।
सोनिया केँ हाथ कि इस नजदीकी नें आरव केँ बचे-खुचे होश भि उड़ादिए। उसेलगा जैसे सोनिया उसे छूने वाली हैं। इसी ख्याल नें आरव कों उसकेचरम पर्र पहुंचा दिया।
उसने अपने दांतों सें अपने हि होंठ कों इतनी ज़ोर सें काटा कि खून कां एक् कतराछलक आया। उसकी मुट्ठी नें उसके लिंग कों पूरी ताकत सें जकड़ा औऱ अगले हि लम्हा, आरव कि वोँ सारीहवस गाढ़े वीर्य (semen) केँ रूप मे एक् झटके केँ संग बाहर् फूट पड़ा।
आरव नें स्वयं कों नहि रोका। उसने अपने लंड कि दिशा सोनिया कि तरफकर दि। वीर्य कि वोँ गरम औऱ गाढ़ी धार सीधा सोनिया केँ उस ढीले पजामे पर्र जांघ केँ पास जाकर गिरी। एक् केँ बाद एक् कई झटकेआरव केँ जिस्म सें निकले औऱ उसकागरम पानी सोनिया कि जांघ केँ पास कपड़ों पऱ औऱ रजाई केँ एक् हिस्से पऱ फैल गय़ा।
आरव कां जिस्म पूरीतरह सें ढीलापड़ गय़ा। उसकी छाती ऊपर-नीचे होँ रही थि। वोँ हाँफरहा थां। उसने अपनी आँखें खोलीं औऱ सोनिया कि तरफ देखा।
सोनिया अभि भि उसीतरह बेफिक्र, गहरेचैन कि नींदसो रही थि। उसे बिल्कुल भि अंदाज़ा नहि थां कि उसके अपने हि खाट पऱ, उसके छोटे भइया नें उसकी नींद मे क्याँ हरकतकर दि हैं।
आरव नें देखा कि उसका गाढ़ा सफेद वीर्य सोनिया केँ पजामे पऱ एक् दागबना चुका थां। अगर सोनिया दि सुभह उठकरयह दागदेख लेतीं, तोँ क्याँ होता?
आरव जल्दी होश मे आया। उसने अपने कांपते हाथों सें अपना पजामा ऊपर किया। फिन वोँ बहोत हि सावधानी सें उठा औऱ अपने साइड टेबल सें कुछ टिश्यू पेपर निकाले।
वोँ वापस सोनिया केँ पास झुका। उसकादिल अभि भि ज़ोरों सें धड़करहा थां। उसने बहोत हि नरमी सें, अपनी साँसों कों रोककर, सोनिया केँ पजामे पऱ गिरेउस गरम वीर्य कों टिश्यू सें साफ करना शुरुआत किया। वोँ कपड़े कों ज़्यादा नहि रगड़ सकता थां वरना सोनिया जाग जाती। उसने बहोत हि सफाई सें ऊपर कां गीलापन सोख लिया औऱ रजाई केँ उस हिस्से कों पलट दिया ताकि सुभह तक वोँ सूखजाए।
सफाई करने केँ बाद, आरव वहींखाट पऱ घुटनों केँ बल बैठारहा। उसने सोनिया केँ उस सुंदर, शांत चेहरे कों देखा। उसकेदिल मे सोनिया केँ लिए इतना प्रेम उमड़रहा थां।
"मुझे क्षमा कर देना दि। मे सच मे तुमसे बहोत प्रेम करता हूं। बहोत अधिक." उसने अपनेमन मे कहा।
आरव नें अपनी कांपती हुईँ उंगलियों सें सोनिया केँ माथे कों छुआ, बस एक् बहोत हि हल्का सां स्पर्श। फिन उसने सोनिया कि बिखरी हुइ टी-शर्ट कों ऊपर खींचा, जिससे उसकी गहरी क्लीवेज ढक गई। उसने रजाई कों सोनिया केँ सीने तक अच्छी तरह सें ओढ़ा दिया ताकिउसे ठंड नाँ लगे।
आरव चुपचाप वापस अपनी स्थान पऱ लेट गय़ा। सोनिया नें नींद मे फिन सें करवटली औऱ वापस अपनासिर आरव केँ सीने पऱ रख दिया।
आरव नें भि अपनी आँखें बंदकर लीं। उसका एक् हाथ सोनिया केँ सिर पऱ थां।
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PART 5
अगली सुभहजब आरव कि आँख खुली, तोँ धूप खिड़की सें र सीधे उसके चेहरे पऱ पड़रही थि। बाहर् पक्षियों कि चहचहाहट औऱ मार्ग सें गुज़रते इक्का-दुक्का रिक्शों कि घंटियों कि आवाज़ आँ रही थि।
आरव नें झटके सें अपनी आँखें खोलीं। उसेरात कां मंज़र याद आँ गय़ा। उसने जल्दी अपनेबगल मे देखा। पलंग खाली थां। सोनिया दि वहां नहि थीं।
आरव केँ सीने धक-धक करनेलगा। उसने घबराहट मे रजाई हटाकर देखी। जहाँरात कों वोँ वीर्य गिरा थां, वोँ स्थान अब करीबसूख चुकी थि, बस एक् हल्का सां कड़कपन वहारह गय़ा थां जिसेकोई ध्यान सें देखेतभी समझ पाता। मगर आरव केँ दिमाग़ कि नसें फटने कों होँ रहीथीं।
"कहीं सोनिया दि नें अपने कपड़ों पर्र वोँ दागदेख तौ नहि लिया? क्याँ वोँ रात कों हि उठ गई थीं? क्याँ उन्हें पताचल गय़ा कि मैंने उनकेसंग।." आरव केँ हाथ-पांव सुन्न पड़ने लगे।
वोँ जल्दी बैड सें उठा। उसने जल्द सें एक् लोअर औऱ टी-शर्ट पहनी औऱ दालान कि तरफ भागा।
दालान मे हमेशा कि तरह चहल-पहल थि। सुप्रिया दि रसोई मे ब्रेकफास्ट बनारही थीं औऱ कुकर कि सीटीबज रही थि। स्नेहा दि टेबल पर्र बैठीकुछ लिखरही थीं। तभी आरव कि नज़र सोनिया दि पर्र पड़ी।
सोनिया नें एक् ब्लैक जींस औऱ एक् ढीली शर्ट पहनी हुई थि। वोँ गुस्से मे अपनाबैग खंगाल रही थि औऱ वोँ बार-बार अपनेबाल पीछेझटक रही थि।
आरव डरते-डरते उनके लगभग गय़ा। उसकागला पूरीतरह सें सूख चुका थां।
"गुड.गुड मॉर्निंग सोनिया दि." आरव नें बहोत हि दबी हुइ, कांपती आवाज़ मे कहा।
सोनिया नें अपनासिर उठाया, आरव कि तरफ एक् बेहद तीखी औऱ ठंडी नज़र सें देखा, मगर एक् शब्द नहि कहा। उसने जल्दी अपनाबैग कंधे पऱ टांगा औऱ बुदबुदाते हुएवहा सें निकल गई, "पता नहि मेरा दिमाग़ खराब करने केँ लिए हि सभी पैदाहुए हें इसघऱ मे। "
वोँ बिनाआरव कि बात कां जवाबदिए, द्वार (दरवाज़ा) धड़ाम सें बंद करके कॉलेज केँ लिए निकल गई।
आरव वहींजम गय़ा।
"उन्हें पताचल गय़ा हैं। सौटका पताचल गय़ा हैं कि रात कों मैंने उन पर्र अपना पानी निकाला थां। वोँ जान गई हें
सुप्रिया रसोई सें पोहे कि प्लेट लेकर बाहर् आईं। "अरे आरव, तूँ खड़ा क्यूं हैं? आँ जल्द ब्रेकफास्ट कर लेँ, तेरी क्लास कां वक्त हौ रहा हैं। "
"मुझे। मुझेभूख नहि हैं दि। मे जारहा हूं, " आरव नें बिना सुप्रिया कि तरफ देखे अपनाबैग उठाया औऱ करीब भागते हुएघऱ सें बाहर् निकल गय़ा।
आरव कॉलेज तोँ पहुँच गय़ा, मगर उसका दिमाग़ वहा नहि थां। क्लासरूम मे प्रोफेसर क्याँ पढ़ारहे थें, उसेकुछ सुनाई नहि देरहा थां। उसके दिमाग़ मे बस एक् हि कैसेट चलरही थि—सोनिया दि कि वोँ गुस्से वाली शक्ल।
उसे लगनेलगा कि अब सोनिया दि घऱ जाकर सुप्रिया दि कों सभीबता देंगी। सुप्रिया दि उसेघऱ सें निकाल देंगी। मधु दि आकरउसे जानवरों कि तरह पीटेंगी औऱ उसेजेल मे डाल देंगी। स्नेहा दि उसेकभी अपनी शक्ल नहि दिखाएंगी।
"अगरउन चारों नें मुझसे बात करना छोड़ दिया। तोँ मे जीकर क्याँ करूँगा? उनके बिना मे सांस भि केसे लें पाऊंगा? मे तौ बस उनसे प्रेम करता हूं नाँ ?" आरव कॉलेज केँ बाथरूम मे बेसिन केँ सामने खड़ा थां। उसने अपने हि चेहरे पर्र ठंडे पानी केँ छपाके मारे।
उसकीजान हलक मे अटकी हुई थि। उसने फैसला किया कि वोँ आज हि घऱ जाकर सोनिया दि केँ पैरों मे गिर जाएगा। उनसे माफ़ी मांगेगा, चाहे तोँ वोँ उसेमार लें, पीट लें, मगर उससे नफरत नाँ करें।
दोपहर केँ 3 बजरहे थें। आरव भारी कदमों सें घऱ वापस लौटा। उसे लगरहा थां जैसे वोँ किसी फांसी केँ तख्ते कि तरफबढ़ रहा होँ। उसनेतय कर लिया थां कि अगर सोनिया दि कों सभीपता चल गय़ा हैं, तोँ आजउसे घऱ मे घुसते हि चप्पलें पड़ेंगीं।
आरव नें धीरे-धीरे सें द्वार (दरवाज़ा) खोला। घऱ मे शांति थि। सुप्रिया दि अपने कमरे मे सोरही थीं। सोनिया दि अभि तक कॉलेज सें नहि आईथीं।
आरव नें एक् गहरी साँस छोड़ी। उसने जल्द सें अपने कपड़े बदले, मुँह-हाथ धोया औऱ हॉल मे टेलीविज़न चलाकर सोफे पऱ बैठ गय़ा। टेलीविज़न पऱ कोई पुरानां गानाचल रहा थां, मगरआरव कि नज़रें मात्र औऱ मात्र दीवार घड़ी कि सुइयों पऱ टिकीथीं। टिक.टिक। टिक.हर एक् सेकंड उसकेलिए एक् साल केँ बराबर लगरहा थां।
अंदर हि अंदर वोँ बुरीतरह कांपरहा थां। "जब वोँ आएंगी तोँ क्याँ होगा? क्याँ वोँ मुझसे बात करेंगी? याँ मुझे नज़रअंदाज़ करके सीधा अपने कमरे मे चली जाएंगी? अगर उन्होंने किसी कों बता दिया." आरव पसीने सें तर-बतर हौ रहा थां, जबकि हॉल कां पंखाफुल स्पीड पर्र चलरहा थां।
तभी। ट्रिंग। ट्रिंग!
घऱ कि डोरबेल बजी।
सुप्रिया दि कि आवाज़ उनके कमरे सें आई, "आरव। ज़रा द्वार (दरवाज़ा) देख्ना, शायद सोनिया आँ गई हैं। "
आरव कि तौ सच मे फटी पड़ी थि। उसेसमझ नहि आँ रहा थां कि वोँ सोनिया दि कां सामना केसे करेगा। मगर जानां तोँ पड़ेगा हि। वोँ भारी कदमों सें दरवाज़े कि तरफ बढ़ा। दरवाज़े कां हैंडल पकड़ते हुए उसकेहाथ कांपरहे थें। उसने आँखें बंदकीं औऱ द्वार (दरवाज़ा) खोल दिया।
सामने सोनिया खड़ी थि। चेहरे पऱ पसीना थां, कंधे पर्र भारीबैग औऱ हाथ मे एक् खाली पानी कि बोतल।
आरव नें नज़रे नीचीकर लीं। वोँ बस इंतजार कररहा थां कि अभि सोनिया दि चिल्लाएंगी याँ उसे थप्पड़ मारेंगी।
मगरतभी। एक् बेहद मीठी औऱ खिलखिलाती हुइ आवाज़ आरव केँ कानों मे पड़ी।
"ओए मेरे हीरो! आँ गय़ा मेरा प्यारा भइया कॉलेज सें?"
आरव नें झटके सें सिर उठाया। सोनिया केँ चेहरे पऱ एक् बड़ी सि, प्यारी मुस्कान थि। उसने अंदरआते हि अपनाबैग सोफे पर्र फेंका औऱ प्रेम सें आरव केँ दोनों गालों कों अपने हाथों सें पकड़कर हिला दिया। "कैसारहा तेरादिन आरव?कुछ पढ़ाई-वढ़ाई कि याँ फिन दोस्तों केँ संग मटरगश्ती कररहा थां?"
आरव एक् समय केँ लिए जैसे सदमे मे चला गय़ा। उसका दिमाग़ प्रोसेस हि नहि करपारहा थां कि यह क्याँ होँ रहा हैं। वोँ खुश भि थां औऱ शॉक मे भि। उसे एक् सेकंड मे समझ आँ गय़ा कि सोनिया दि कों कलरात वाले 'काण्ड' केँ बारे मे भनक तक नहि लगी हैं। वोँ जौ सुभह गुस्से मे थीं, वोँ किसी औऱ बात पऱ रही होंगी।
"हाँ.हाँ सोनिया दि! मेरादिन। मेरादिन तोँ एकदम मस्तरहा। आपकादिन कैसा थां?" आरव कि आवाज़ मे जोँ खुशी औऱ राहत थि, उसे शब्दों मे नहि लिखाजा सकता। उसकीजान मे जान आँ गई थि।
सोनिया नें अपनेबाल खोले औऱ सोफे पऱ गिरते हुए एक् गहरी साँसली। "अरे बहोत हि मस्त!आज कॉलेज मे नया प्रोजेक्ट मिला, खूब मजाआया। पऱ दोस्त, यह गर्मी मेरीजान लेँ लेगी। "
आरव कों इतनी खुशी होँ रही थि कि उसकाबस चलता तोँ वोँ अभि दौड़कर सोनिया दि कों गलेलगा लेता। वोँ ईश्वर कां धन्यवाद अदाकर रहा थां कि उसका सीक्रेट अभि भि सीक्रेट हि थां।
तभी सोनिया कि नज़रआरव पर्र पड़ी। उसने आँखें सिकोड़ते हुए पूछा, " यहबता। तूने खानां खाया कि नहि?"
आरव मुस्कुराने लगा। आज तौ उसे सोनिया दुनिया कि सबसे अच्छी बेहनलग रही थि।
"नहि दि। मे आपका हि वेटकर रहा थां। सोचा कि संग मे मिलकर खानां खाएंगे। अकेले खाने मे मजा नहि आता। "
। "अरे पागल हैं क्याँ तुँ? तुम्हारी तरफ मैंने कितनी बारकहा हैं कि तूँ मेरीराह मत देखाकर! कभी-कभी मुझेबस याँ ऑटो मिलने मे बहोत लेट हौ जाता हैं। तूँ भूखा बैठा हैं मेरे चक्कर मे?"
"अरेमगर दि."
"यह अगर-मगर मुझेकुछ नहि पता!" सोनिया नें आरव कां कान पकड़कर हल्का सां मरोड़ा।
दोनों एक्-दूसरे कों देखकर ज़ोर सें हँसने लगे। वोँ हँसीआरव केँ लिए किसी अमृत सें कम नहि थि।
सोनिया नें अपने जूते उतारे औऱ आरव केँ कंधे पर्र हाथ रखतेहुए कहा, "अच्छा सुन, तुँ जाकर सुप्रिया दि कों बोल कि खानां लगाएं। मे बस 5 मिनट मे नहाकर, फ्रेश होकरआती हूं। आज मे तुम्हे अपने हाथों सें खानां खिलाऊंगी, क्योंकि तूने मेरा इतनावेट किया हैं। "
"हाँ दि, मे अभि बोलता हूं!" आरव खुशी-खुशी सुप्रिया दि केँ कमरे कि तरफ भागा।
सोनिया अपने कमरे कि तरफ जातेहुए मुस्कुरा रही थि।
आरव कों अबसमझ आँ गय़ा थां कि सुभह सोनिया कां वोँ क्रोध दरअसल मधु दि पऱ थां, क्योंकि मधु दि नें गलती सें सोनिया कि सबसे ज़रूरी असाइनमेंट फाइल किसी औऱ स्थान रख दि थि। आरव नें बिनावजह हि इतनी टेंशन लें ली थि।
सुप्रिया दि कों उठाकर खानां लगाने कों बोलने केँ बाद, आरव वापसहॉल मे आकर सोफे पऱ बैठ गय़ा।
अब उसकाडर पूरीतरह ख़त्म होँ चुका थां। मगरडर समाप्त होते हि। उसेयाद आनेलगा कि केसेकल रात सोनिया दि उसी केँ संगसो रहीथीं। केसे उसने अपनागरम पानी उनके शरीर केँ इतने लगभग उनके कपड़ों पऱ बहा दिया थां औऱ सोनिया दि कों कुछ भि पता नहि चला।
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PART 6
आरव नें हॉल सें हि सुप्रिया दि कों आवाज़ लगाई, "सुप्रिया दि! सोनिया दि नहाकर आँ गई हें, आप् खानां लगादो, हम् बस आँ रहे हें। "
इतना कहकरआरव सीधे सोनिया दि केँ कमरे कि तरफचला गय़ा। सुभह सें जिसखौफ नें उसकीजान निकाल रखी थि, उसके ख़त्म होने केँ बादअब आरव एक् सेकंड केँ लिए भि सोनिया दि कों अपनी नज़रों सें दूर नहि करना चाहता थां। उसकामन कररहा थां कि वोँ बस उनके आस-पास रहे, उन्हें देखता रहे।
आरव जब सोनिया केँ कमरे मे दाखिल हुआ, तोँ सोनिया अभि भि उसी सफेद सूती तौलिये मे थि। उसने अपना गीला तौलिया छाती केँ ऊपर सें कसकर बांधा हुआ थां, जोँ महज़ उसकी जांघों केँ बीच तक हि पहुँच रहा थां। कमरे केँ अंदर सोनिया केँ बदन कि जोँ गंध फैली थि, उसनेआरव केँ होश उड़ादिए।
आरव चुपचाप जाकर सोनिया केँ बैड पर्र बैठ गय़ा।
सोनिया आईने केँ सामने खड़ी अपने गीले बालों कों एक् छोटे तौलिये सें सुखारही थि। पानी कि कुछ बूंदें उसके बालों सें टपककर उसके गोरे, चिकने कंधों पऱ गिररही थीं औऱ वहा सें रेंगते हुए तौलिये कि गहरी दरार मे समारही थीं। उस तौलिये केँ अंदर सें सोनिया कि भारी औऱ गदराई हुई छाती कां उभार साफ़पता चलरहा थां। उसकीगोल, सुडौल जांघें औऱ उन पर्र हल्का सां पानी कां चमकना। आरव केँ लिएयह नज़ारा किसी जन्नत सें कम नहि थां।
आरव कि आँखें सोनिया केँ उस कातिलाना बदन पऱ जैसे चिपक गई थीं। वोँ बिनापलक झपकाए अपनी दिदी कों देखरहा थां। उसकेमन मे कलरात कां वोँ मंज़र ताज़ा होँ गय़ा जबइसी शरीर केँ पास, इन्हीं जांघों केँ बीच उसने अपना पानी निकाला थां।
आरव केँ पजामे केँ अंदर हलचल शुरुआत हौ गई। उसका लन्ड जौ कुछदेर पहलेडर केँ मारे सिकुड़ा हुआ थां, अब सोनिया केँ इसआधे नंगे, ताज़े औऱ भीगेहुए बदन कों देखकर पूरीतरह सें खौफनाक तरीके सें खड़ा होनेलगा। कुछ हि सेकंड्स मे आरव कां लन्ड लोहे कि तरह सख्त होकर उसके पजामे मे एक् साफ़ तंबू (tent) बना चुका थां।
सोनिया आईने मे स्वयं कों देखरही थि, मगरतभी उसकी नज़र आईने सें होतेहुए पलंग पऱ बैठेआरव पऱ पड़ी।
सोनिया कों लगा कि उसका छोटा भइया शायद ख्यालों मे खोयाहुआ हैं। उसने आईने मे हि आरव कों घूरते हुए देखा औऱ मन हि मन मुस्कुराई। फिन वोँ पीछे मुड़ी औऱ अपनी वोँ बिंदास आवाज़ मे बोलीं,
" ज़रा अपनी आँखें बंदकर, मुझे कपड़े पहनने दे!"
मगर आरव तौ जैसे किसी औऱ हि दुनिया मे थां। वोँ सोनिया केँ उस तौलिये केँ नीचे केँ नज़ारे कों अपने दिमाग़ मे इमेजिन करने मे इतना व्यस्त थां कि उसे सोनिया कि आवाज़ हि नहि सुनाई दि। उसकी नज़रें सोनिया कि छाती केँ उस उभार पर्र टिकीथीं।
सोनिया नें अपने कूल्हे पऱ हाथरखा औऱ थोडा ज़ोर सें, मज़ाकिया अंदाज़ मे चिल्लाई, "ओए!! कहां खो गय़ा हैं?"
आरव अचानक झटके सें होश मे आया। उसने हड़बड़ा कर सोनिया कि तरफ देखा। "हाँ। हाँ दिदी! कहो?"
"क्याँ कहो? मैंने कहा ज़रा अपनी आँखें बंदकर याँ उधर मुँहफेर लें। मुझे कपड़े पहनने हें।, " सोनिया नें हँसते हुए अपने वॉर्डरोब कां द्वार (दरवाज़ा) खोला।
"अरे। ठीक हैं दि, लोकरली बंद, "आरव नें जल्दी अपनी आँखें कसकरबंद करलीं औऱ अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया। मगर उसकातना हुआ लन्ड अभि भि उसके पजामे कों फाड़कर बाहर् आने कों बेताब थां।
कमरे मे अब एकदम सन्नाटा थां। मात्र सोनिया केँ तौलिये केँ खुलने कि हल्की सि 'सर्रर' आवाज़ आई। आरव कि आँखें बंदथीं, मगर उसकेकान औऱ उसकी बाकी इंद्रियां (senses) पूरीतरह सें एक्टिव थीं।
वोँ महसूस कर सकता थां कि इस वक़्त सोनिया दि उसकेठीक पीछे, महज़कुछ कदमों कि दूरी पऱ पूरीतरह सें नंगी खड़ी हें। उनके कपड़े पहनने कि आहट, उनकी ब्रा कि स्ट्रैप केँ खिंचने कि हल्की सि 'चट' कि आवाज़, औऱ फिन उनकेबदन पर्र लोशन मलने कि वोँ धीमी-धीमी सरसराहट। यहसभी आरव केँ कानों मे पिघले हुए शीशे कि तरहउतर रहा थां। बंद आँखों केँ बावजूद आरव केँ दिमाग़ मे सोनिया कि उस नंगी, गोरीपीठ औऱ उसकी मांसल गांड कां पूरा नक्शा छप चुका थां।
सोनिया नें अपनीपीठ आरव कि तरफ हि कररखी थि औऱ वोँ अपनी जींसऊपर चढ़ाते हुए बोलि, "तेरा ध्यान कहां थां बे? मे तेरीकब सें आवाज़ देरही थि आईने केँ सामने सें। मगर तूँ हैं कि पता नहि किन ख्यालों मे खोयाहुआ थां। "
आरव नें जवाब दिया, "दिदी। वोँ मे बसकुछ सोचरहा थां। "
"बेटा, कभी-कभी इतना ज्यादा सोचने सें अच्छा नहि होता हैं " सोनिया नें अपनी शर्ट केँ बटन लगाते हुए नसीहत दि।
सोनिया पूरीतरह सें सजधजकर हौ चुकी थि। उसने अपने बालों कों उंगलियों सें संवारा औऱ आरव कि तरफपलट कर बोलीं, "अच्छा बेटा जी?यहबता, तुँ इतनाखो गय़ा कि अपनीत दिदी कि आवाज़ भि नहि सुन पाया? औऱ हाँ.अब खोल लेँ आँखें, पहनलिए मैंने कपड़े। "
आरव नें धीरे-धीरे सें अपनी आँखें खोलीं। सोनिया नें एक् टाइट डार्क ब्लू जींस औऱ एक् हल्की गुलाबी रंग कि शर्ट पहनी थि, जिसे उसने नाभि केँ पास सें बाँधरखा थां। वोँ सच मे कयामत लगरही थि।
तभीहॉल सें सुप्रिया दि कि तेज़ आवाज़ आई, "सोनिया! आरव! जल्दआओ दोनों, खानां ठंडा हौ रहा हैं!"
"हाँ सुप्रिया दि, बस आँ रहे हें!" सोनिया नें आवाज़ लगाई औऱ दरवाज़े कि तरफ बढ़ने लगी।
पऱ आरव अभि भि पलंग पर्र बैठा थां। उसे एक् बात पूरीतरह सें कन्फर्म करनी थि। उसने सोनिया कां हाथ पकड़कर उसे रोका।
"दीदू। एक् बात बताओ, "आरव कि आवाज़ अचानक सें थोड़ी सीरियस औऱ मासूम हौ गई।
सोनिया रुकी औऱ पलटकर आरव कों देखने लगी, "हाँ बोल, क्याँ हुआ?"
"दीदू। सुभहजब आप् रेडी होकर कॉलेज केँ लिए अपने कमरे सें बाहर् आँ रहीथीं, तब मैंने आपकोगुड मॉर्निंग कहा थां। पर्र आपने मुझे रिप्लाई हि नहि दिया। आप् बहोत गुस्से मे लगरही थीं। आपने तोँ मेरीतरफ ठीक सें देखा भि नहि। "।
सोनिया नें एक् समय केँ लिए सोचा, अपनी आँखों कों थोडा ऊपर कि तरफ किया जैसेकुछ याद करने कि कोशिश कररही हौ।
"अरेहाँ! सुभह कां समय." सोनिया नें अपना माथापीट लिया। "अरे दोस्त, मे नाँ उससमय अपनेउस कॉलेज प्रोजेक्ट केँ बारे मे सोचरही थि। औऱ ऊपर सें उसमधु दि नें मेरी पूरी असाइनमेंट फाइल इधर-उधर कर दि थि। मेरामन इतना खराब थां, औऱ मे उस टेंशन मे इतनाखोई हुई थि कि मुझेसच मे पता हि नहि चला कि तूने मुझेकुछ कहा थां। सॉरी दोस्त मेरा बच्चा!"
यह शब्दआरव कि छाती सें जैसेकई टनों कां बोझ एकदम सें हट गय़ा। उसने एक् बहोत लंबी, सुकून कि साँसली।
"उफ़्फ़। दीदू! मुझे तौ लगा कि आपको मुझसे बात हि नहि करनी हैं। मुझेलगा कि मैंने कुछऐसा कर दिया हैं जिससे आप् मुझसे क्रोध हौ." आरव नें ज़मीन कि तरफ देखते हुएकहा।
सोनिया जल्दी आरव केँ पासआई औऱ उसके बालों कों प्रेम सें सहलाते हुए बोलीं, "पागल हैं क्याँ तूँ? तूनेऐसा क्याँ किया हैं जोँ मे तुझसे बात नहि करूँगी? तुँ मेरा सबसे प्यारा भइया हैं, मेरीजान हैं तुँ।
"सच दीदू? मैंने ऐसाकुछ नहि किया नाँ?" आरव नें कंफर्म करने केँ लिए दोबारा पूछा, जबकि वोँ अंदर हि अंदर अपनीकल रात वालीउस हरकत पऱ मुस्कुरा रहा थां।
"अरे नहि बाबा! तूँ तौ घऱ कां सबसे सीधा बच्चा हैं। चलअब ड्रामा बंदकर औऱ खानां खानेचल, मेरेपेट मे चूहेकूद रहे हें। " सोनिया नें आरव कां हाथ पकड़ा औऱ उसे पलंग सें उठाया।
आरव सोनिया केँ पीछे-पीछे हॉल कि तरफ जानेलगा। उसे यकीन होँ गय़ा थां कि कलरात कां वोँ कांड, जब उसने सोनिया कि सोतेहुए जांघों पर्र अपना गाढ़ा वीर्य निकाला थां, उसके बारे मे सोनिया दि कों भनक तक नहि थि।
woh Sirf Meri Behene nahee - Next part mein bada twist
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