woh Sirf Meri Behene nahee – New Episode
PART 14
सुभह बाहर् कां तापमान शून्य केँ लगभग थां, मगररूम केँ अंदर कां माहौल गरम थां।
सुभह केँ 4:37 बजरहे थें।
स्नेहा कि आँखें आहिस्ता खुलीं। नींद अभि भि उसकी आँखों मे थां। उसने करवट बदलने कि कोशिश कि, मगर नहि हुआ।
उसने अपनी नज़रें नीचेकीं। आरव कां एक् हाथ स्नेहा कि पतलीकमर पऱ रखाहुआ थां, औऱ आरव कां एक् पांव स्नेहा कि दोनों टांगों केँ ऊपर पड़ा थां।
स्नेहा नें अपनासिर थोडा पीछे किया। बिना चश्मे केँ भि, इतनी नज़दीकी सें आरव कां चेहरा एकदम साफ़ नज़र आँ रहा थां।
नींद कि आगोश मे आरव बिल्कुल एक् मासूम बच्चे कि तरहलग रहा थां। उसके बिखरे हुएघने बाल उसके माथे औऱ आँखों पऱ गिररहे थें। उसके हल्के खुलेहुए होंठों सें आती-जाती गरम साँसें स्नेहा केँ चेहरे पर्र टकरारही थीं।
स्नेहा कि नज़रें आरव केँ चेहरे पऱ फंसगईं। "यह कितना प्यारा लगरहा हैं." एक् समय केँ लिए स्नेहा भूल गई कि वोँ उसका भइया हैं।
अचानक स्नेहा केँ बदन मे एक् सिहरन दौड़ गई। कलबस केँ उससफर कि यादें आरव कां वोँ खड़ाहुआ लन्ड वोँ सभी सें स्नेहा अंदर हि अंदर एक्साइटेड हौ रही थि।
स्नेहा कि साँसें भारी होने लगीं। उसका दिमाग़ अब पूरीतरह सें सुन्न होँ चुका थां।
स्नेहा कि जांघों केँ बीच हलचल शुरुआत होँ गई। रजाई कि गर्माहट औऱ कल कि उस अधूरी उत्तेजना नें स्नेहा कि बुर पर्र नमी कि हल्की सि कर दि थि।
स्नेहा नें अपनी आँखें बंदकीं औऱ अपने होंठों कों दाँतों तलेदबा लिया। वोँ स्वयं कों रोकना चाहती थि, मगरआरव कां वोँ सुंदर औऱ मदहोश कर देने वाला चेहरा उसके बिल्कुल सामने थां।
उसने बहोत हि सावधानी सें, बिनाकोई आवाज़ किए, अपना दायां हाथ रजाई केँ अंदर नीचे कि तरफ खिसकाया। आरव अभि भि गहरी नींद मे थां।
स्नेहा केँ कांपते हुएहाथ उसके ढीले पजामे केँ अंदरसरक गए। जैसे हि उसकी ठंडी उँगलियों नें उसकी अपनीगरम औऱ गीली बुर कों छुआ, स्नेहा कां बदन मे एक् सिहरन दौड़ गई।
वोँ गीली होँ चुकी थि।
स्नेहा नें अपनीबीच कि उँगली कों अपनी बुर कि उस नाज़ुक सि दरार पऱ रखा औऱ सहलाना शुरुआत कर दिया।
रजाई केँ अंदर होने वालीउस हल्की सि सरसराहट कों स्नेहा नें दबा लिया थां। हरबार जब उसकी उँगली उसकी बुर सें रगड़ खाती, स्नेहा कां सिर पीछे कि तरफ तकिये मे धंस जाता।
औऱ वोँ यहसभी आरव केँ बिल्कुल लगभगलेट कररही थि। आरव कां हाथ अभि भि उसकीकमर पऱ थां। अगरआरव इस टाइमजाग जाता, तोँ, वोँ पकड़े जाने कां खौफ.इस चीज़ नें स्नेहा कि उत्तेजना कों औऱ बढ़ा दिया थां।
स्नेहा कि उँगलियों कि गतिअब तेज़ होनेलगी थि। बुर केँ पानी कि वजह सें उँगलियों केँ फिसलने कि हल्की-हल्की कि आवाज़ आँ रही थि।
वोँ हाँफरही थि। उसने अपनी आँखें खोलीं औऱ सामने सोएहुए आरव कों देखा।
आरव केँ होंठ। वोँ मर्दाना होंठ। स्नेहा कि हवसअब उसके दिमाग़ पर्र पूरीतरह सें हावी होँ चुकी थि।
उसने अपना चेहरा आरव केँ चेहरे केँ औऱ लगभग किया। दोनों केँ बीचअब मात्र इंचभर कां फासला थां। स्नेहा कि उँगलियाँ नीचे उसकी बुर कों रगड़रही थीं, औऱ उसका चेहरा आरव केँ चेहरे केँ पास पहुँच चुका थां।
स्नेहा नें अपनी आँखें बंदकीं औऱ बिनाकुछ सोचे, अपने कांपते औऱ नर्म होंठों कों आरव केँ होंठों पऱ रख दिया।
जैसे हि स्नेहा केँ होंठआरव केँ होंठों सें टकराए, स्नेहा कों लगा जैसेउसे करंटलग गय़ा हौ। वोँ झटके सें पीछेहटी औऱ आरव कों देखने लगी।
आरव नें नींद मे करवटली।
स्नेहा कां दिल बाहर् आने कों बेताब थां। मगरउस एक् छोटी सि किस कां वोँ नशा इतना ज़बरदस्त थां कि स्नेहा स्वयं कों रोक नहि पाई। वोँ दोबारा आरव केँ चेहरे केँ लगभग गई।
इसबार स्नेहा नें अपने होंठ पूरीतरह सें आरव केँ होंठों पऱ टिकादिए। उसने अपनी आँखें कसकरबंद करलीं औऱ आरव केँ निचले होंठ कों बहोत हि हल्के सें चूमने लगी। आरव कि साँसों कि गर्माहट सीधा स्नेहा केँ मुँह केँ अंदरजा रही थि।
नीचे स्नेहा कि उँगलियाँ अब रफ्तार पकड़ चुकीथीं। वोँ अपनी बुर कों इतनीमजा लेकर रगड़रही थि कि उसका पूराबदन झटके खानेलगा थां।
स्नेहा कि साँसें आरव केँ होंठों पऱ जारही थीं। वोँ अपनेचरम (Orgasm) पर्र खड़ी थि। बसकुछ औऱ सेकंड। बसकुछ औऱ। औऱ वोँ झड़ने वाली थि।
उसकी जांघें कांपने लगीं। बुर सें रस कि एक् मोटीधार उँगलियों कों भिगोने लगी थि।
"आआअहह। आरव." स्नेहा केँ गले सें एक् आवाज़ निकली।
मगरतभी.
आरव नें रजाई केँ अंदर अंगड़ाई ली।
"हम्म्म्म." आरव केँ मुँह सें आवाज़ निकली।
स्नेहा कि आँखें झटके सें खुलीं।
जल्द सें स्नेहा नें अपने होंठआरव केँ होंठों सें हटाए। उसका दायां हाथ जौ पजामे केँ अंदर उसकी गीली बुर कों रगड़रहा थां, वोँ किसीतरह बाहर् निकला। स्नेहा नें एक् झटके मे करवट बदली औऱ आरव कि तरफपीठ करकेलेट गई जैसे वोँ बहोत गहरी नींद मे हौ। नीचे उसकी बुर सें अभि भि रसबहरहा थां।
आरव नें अपनी आँखें खोलीं। उसने एक् औऱ अंगड़ाई ली औऱ छत कि तरफ देखा। उसे कुछ भि अंदाज़ा नहि थां कि पिछले 5 मिनट मे उसकेबगल मे क्याँ हुआ हैं।
आरव नें करवटली औऱ देखा कि स्नेहा रजाई ओढ़े, उसकीतरफ पीठ करकेसो रही हैं।
कमरे मे ठंड बहोत थि। आरव कों लगा कि शायद स्नेहा दि कों ठंडलग रही हैं।
आरव नें बहोत हि प्रेम सें स्नेहा केँ कंधे पऱ रजाई कों ठीक सें ओढ़ा दिया। रजाई ओढ़ाते वक़्त आरव कां हाथ गलती सें स्नेहा कि गर्दन केँ पास बालों कों छू गय़ा।
स्नेहा जोँ नींद कां नाटककर रही थि, उस अचानक हुए स्पर्श सें हल्की सि हिली।
आरव कों लगा कि स्नेहा उसकीवजह सें जाग गई हैं।
"गुड मॉर्निंग दि." आरव नें कहा।
स्नेहा नें कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहि दिया। वोँ अपनी साँसों कों नॉर्मल करने कि कोशिश कररही थि। फिन उसने आँखें मलतेहुए पलटने कां नाटक किया।
"हम्म्म्म। गुड मॉर्निंग, " स्नेहा नें आधी खुली आँखों सें आरव कों देखा। स्नेहा कां चेहरा लाल हौ रहा थां।
आरव नें स्नेहा कां वोँ लाल चेहरा औऱ बिखरे हुएबाल देखे। वोँ एक् लम्हा केँ लिएउसे बस देखता हि रह गय़ा। "दि, आप् ठीक हौ? औऱ हाथ सीधा स्नेहा केँ माथे पऱ रख दिया।
स्नेहा कि साँसफिन सें फंस गई। आरव कां हाथ उसके माथे पऱ थां औऱ नीचे उसका अपनाहाथ, जिसपर अभि भि उसकी बुर कां रसलगा हुआ थां, वोँ रजाई केँ अंदर छुपाहुआ थां।
"न्। नहि आरव। वोँ। वोँ बस रजाई केँ अंदर गर्मी लगरही थि नाँ। इसलिये, " स्नेहा नें नज़रें चुराते हुए हकलाकर जवाब दिया।
"गर्मी? बाहर् माइनस मे टेंपरेचर हैं औऱ आपको गर्मी लगरही हैं?, " आरव नें हँसते हुएकहा औऱ पलंग सें नीचेउतर गय़ा।
आरव नें अपनी टी-शर्ट उठाई औऱ बाथरूम कि तरफ जानेलगा। "मे पहलेनहा लेता हूं दि, फिन आप् चली जानां। ?"
"हाँ.हाँ तुँ जा, " स्नेहा नें जल्द सें कहा।
जैसे हि बाथरूम कां द्वार (दरवाज़ा) बंदहुआ औऱ शावर चलने कि आवाज़ आई, स्नेहा नें रजाई अपने चेहरे सें हटाई औऱ साँस छोड़ी।
उसने अपने दाएँहाथ कों देखा। उसकी उँगलियों पऱ उसकी अपनी हि उत्तेजना कां रसलगा हुआ थां। स्नेहा नें अपने होंठों कों छुआ, जहाँ अभि भि आरव केँ होंठों कि छुअन महसूस होँ रही थि।
"हे ईश्वर। मैंने यह क्याँ किया?अगर वोँ एक् सेकंड पहलेउठ जाता तोँ? " स्नेहा नें अपना माथापीट लिया।
मगर डर केँ संग-संग स्नेहा केँ चेहरे पर्र एक् मुस्कान भि आँ गई। वोँ जौ अधूरी प्यास उसकेबदन मे रह गई थि, वोँ उसे बार-बार आरव कि तरफ खींचरही थि।
बाथरूम केँ अंदर पानी केँ गिरने कि आवाज़ आँ रही थि, औऱ बाहर् बैड पऱ पड़ी स्नेहा कां पूराबदन अपने हि भइया केँ ख्यालों मे सुलगरहा थां।
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PART 15
बाथरूम केँ अंदर सें पानी गिरने कि आवाज़ पूरे कमरे केँ सन्नाटे कों चीररही थि। पलंग पर्र बैठी स्नेहा केँ लिए पानी कि ये आवाज़ किसी मीठी यातना सें कम नहि थि।
कुछ हि मिनटों पहलेआरव केँ होंठों कि वोँ छुअन औऱ रजाई केँ अंदर अपनी हि उँगलियों सें मिला वोँ अधूरा सुख। स्नेहा कां जिस्म अभि भि उसी उत्तेजना कि आग मे सुलगरहा थां। चरमसुख केँ बिल्कुल लगभग सें वापसलौट आने कि वजह सें उसके बुर दर्द हौ रहा थां। उसकी जांघें आपस मे रगड़खा रहीथीं औऱ बुर सें लगातार बहतेरस कि वजह सें उसका पजामा औऱ पेंटी अंदर सें पूरीतरह चिपचिपा हौ चुका थां।
स्नेहा कां जिस्म उस अधूरी प्यास कों बुझाने केँ लिए उतावलापन रहा थां।
तभी बाथरूम कां द्वार (दरवाज़ा) खुला।
स्नेहा नें झटके सें तकिये सें मुँह बाहर् निकाला। द्वार (दरवाज़ा) खुलते हि अंदर सें आरव निकला।
आरव नें केवल अपनीकमर पऱ एक् सफेद तौलिया लपेटा हुआ थां। उसका सीना पूरीतरह सें नंगा थां। गीले बालों सें पानी कि बूंदें टपककर उसके सीने सें होतेहुए सीधे फिसलकर तौलिये केँ अंदरजा रहीथीं। ठंड कि वजह सें आरव कि त्वचा हल्की लाल होँ रही थि औऱ उसकेबदन सें साबुन कि गंध आँ रही थि।
स्नेहा कि आँखें आरव केँ बदन पर्र जैसे चिपक सि गईं। जौ लड़कीकल रात तक आरव कों केवल एक् बच्चा समझती थि, आज उसकी नज़रें आरव कों चेकआउट कररही थीं।
आरव नें एक् छोटे तौलिये सें अपनेबाल पोंछते हुए स्नेहा कि तरफ देखा।
"दि, मे नहा लिया। पानी बहोत गरम हैं, मजा आँ गय़ा। आप् भि नहालो, " आरव नें कहा।
"हाँ। हाँ.जा रही हूं, " स्नेहा हड़बड़ाते हुए पलंग सें उठी।
जल्दबाज़ी मे स्नेहा कां पांव रजाई मे उलझा औऱ वोँ सीधाआरव कि तरफ गिरने लगी। आरव नें जल्दी आगे बढ़कर स्नेहा कों उसकीकमर सें पकड़ लिया।
स्नेहा केँ हाथ अनजाने मे आरव केँ नंगे सीने पर्र जा टिके। आरव केँ गीलेबदन कि वोँ गर्माहट औऱ उसकीकसी हुइ त्वचा। स्नेहा केँ बदन मे एक् बारफिन सें बिजली दौड़ गई। आरव केँ तौलिये केँ ऊपर सें उसकी नंगी जांघों कि रगड़ स्नेहा केँ पैरों पर्र महसूस हुइ।
"धीरे-धीरे" आरव नें हँसते हुए स्नेहा कों सीधा खड़ा किया।
"व। वोँ रजाई। छोड़ मुझे!" स्नेहा नें झेंपते हुएआरव कों हल्का सां धक्का दिया औऱ अपने कपड़े लेकर बाथरूम मे घुस गई।
'खटॅक!' स्नेहा नें दरवाज़े कि कुंडी अंदर सें कसकरबंद कर दि।
बाथरूम केँ अंदर चारों तरफगरम पानी कि भाप फैली हुइ थि। आईना पूरीतरह सें धुंधला होँ चुका थां। मगर सबसे अधिक पागलकर देने वाली चीज़ थि उसबंद बाथरूम मे फैलीआरव कि खुशबू।
स्नेहा दरवाज़े सें पीठ टिकाकर खड़ी हौ गई। उसकी तेज़चल रहीथीं।
उसने कांपते हुए हाथों सें अपने नाइटसूट केँ बटन खोलने शुरुआत किए।
एक्-एक् करके कपड़े ज़मीन पर्र गिरते गए, औऱ कुछ हि पलों मे स्नेहा बाथरूम मे पूरीतरह सें नंगी खड़ी थि। उसका, सफ़ेद बदनठंड औऱ उत्तेजना कि वजह सें कांपरहा थां। उसके बूब्स पूरीतरह सें सख्त हौ चुके थें।
स्नेहा नें धुंधले आईने पऱ अपनाहाथ फेरा औऱ उसमें अपना अक्स देखा। उसका चेहरा लाल थां, आँखें नशीली हौ रहीथीं औऱ होंठ हल्के सें खुलेहुए थें।
स्नेहा धीरे-धीरे सें आगे बढ़ी औऱ शावर केँ ठीक नीचेआकर गरम पानी कां नलखोल दिया।
गरम पानी कि बूंदें जैसे हि स्नेहा केँ नंगे जिस्म पर्र गिरीं, उसके मुँह सें एक् सिसकी निकली.
''सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स। आआआहह.''
पानी उसके बालों सें होताहुआ उसकी गर्दन, उसके बूब्स औऱ उसकी पतलीकमर सें फिसलता हुआ सीधे उसकी जांघों केँ बीचजा रहा थां।
स्नेहा नें अपनी आँखें बंदकर लीं। उसने अपने दोनों हाथों कों अपने सीने पऱ रखा औऱ पानी कि धार केँ नीचे अपने बूब्स कों सहलाना शुरुआत कर दिया। उसकी उँगलियों केँ बीच उसके सख्त होँ चुके निप्पल्स रगड़खा रहे थें। उसेऐसा लगरहा थां जैसेयह उसके अपनेहाथ नहि, बल्कि आरव केँ हाथ हें जोँ कलरात उसकीकमर औऱ पैरों कों सहलारहे थें।
"आआअहह." स्नेहा नें अपनासिर पीछे कि तरफ झुका लिया।
शावर केँ गरम पानी केँ बीच, स्नेहा कां एक् हाथ आहिस्ता नीचे कि तरफ सरकने लगा। उसकाहाथ उसके चिकने पेट सें होताहुआ, उसकी जांघों केँ बीच कि उस नाज़ुक औऱ भीगी हुईँ दरार तक पहुँच गय़ा।
स्नेहा कि बुर पहले सें हि रस सें लबालब थि। पानी औऱ उसके अपने हि कामुक रस कि वजह सें वोँ चिकना हौ चुका थां।
स्नेहा नें अपनीबीच कि उँगली कों अपनी बुर केँ कसेहुए होंठ केँ बीचरखा औऱ अपनी बुर कों रगड़ना शुरुआत कर दिया।
"उफ़्फ़। आरव." स्नेहा केँ होंठों सें अनजाने मे हि आरव कां नाम मे निकल गय़ा।
उँगलियों कि रगड़ स्नेहा केँ सुन्न पड़े दिमाग़ कि नसों कों झकझोर गई। जोँ सुभहबैड पऱ अधूरा रह गय़ा थां, वोँ अब दुगनी ताकत सें बाहर् आने केँ लिए उतावलापन रहा थां।
स्नेहा नें बाथरूम कि दीवार पऱ अपना एक् हाथ टिकाया औऱ अपनी दोनों टांगों कों थोडा औऱ चौड़ा कर लिया। अब उसका दूसरा हाथ उसकी बुर कों रगड़रहा थां।
उसने अपनी उँगली सें अपनी बुर केँ दाने (Clitoris) पऱ हल्का सां दबाव बनाते हुएउसे गोल-गोल रगड़ना शुरुआत कर दिया।
"सस्स्स्स्स्स्स्स." स्नेहा केँ दाँतआपस मे भिंचगए।
बंद आँखों केँ पीछे स्नेहा कों केवल औऱ मात्र आरव दिखाई देरहा थां।
उसेयाद आँ रहा थां कि केसेबस केँ उससफर मे आरव कासख्त औऱ गरम लन्ड उसके गांड औऱ फिन उसकेपेट पऱ लगातार रगड़खा रहा थां। स्नेहा नें उस एहसास कों महसूस करने केँ लिए अपनी एक् उँगली कों धीरे-धीरे सें अपनी बुर केँ छेद केँ अंदर सरका दिया।
उसकी बुर इतनी गीली थि कि उँगली बहोत हि आसानी सें अंदर फिसल गई। अंदर कि वोँ गर्माहट औऱ वोँ कसावट। स्नेहा स्वयं अपनी हि उँगली कों महसूस करके पागल हौ रही थि।
वोँ शावर केँ पानी केँ नीचे, दीवार केँ सहारे अपनीकमर कों हल्का-हल्का आगे-पीछे हिलाने लगी। उसकाहाथ तेज़ी सें चलनेलगा थां। उँगली अंदर-बाहर् होँ रही थि औऱ अँगूठा ऊपरउस दाने कों मसलरहा थां।
"आरव। औऱ ज़ोर सें। आरव." स्नेहा कि सिसकारियाँ अब थोड़ी तेज़ होनेलगी थीं, मगर पानी केँ गिरने कि आवाज़ नें उन सिसकारियों कों बाथरूम केँ बाहर् जाने सें रोकरखा थां।
स्नेहा कों यादआया कि केसेआज सुभहआरव केँ होंठों कि छुअन कितनी मादक थि। उसने अपने दूसरे हाथ कि उँगलियों कों अपने हि होंठों पऱ रखा औऱ उन्हें चूसने लगी, जैसे वोँ आरव केँ होंठों कों चूसरही हौ।
वोँ सोचरही थि कि आरवइसी बाथरूम मे हैं, उसनेउसे दीवार सें सटारखा हैं औऱ वोँ अपने लन्ड सें उसकी बुर कों बेरहमी सें चोदरहा हैं।
उसकी उँगलियों कि रफ्तार अब बेकाबू होँ चुकी थि। 'चप-चप' कि आवाज़ शावर केँ पानी कि आवाज़ केँ संग मिलकर एक् अजीब सां नशा पैदाकर रही थि। स्नेहा कां पूराबदन पसीने औऱ पानी सें भीग चुका थां। उसकी जांघें बुरीतरह सें कांपने लगीथीं।
"ओह.गॉड। आरव। मे। मे झड़ने वाली हूं। आआआअहह."
स्नेहा नें अपनी बुर केँ दाने कों अपनी उँगलियों सें बहोत ज़ोर सें दबाया औऱ अंदर वाली उँगली सें तेज़-तेज़ झटके देनेलगी।
कुछ हि सेकंड्स मे, स्नेहा कां जिस्म एक् कसी हुइ कमान कि तरहतन गय़ा। उसके पैरों केँ पंजे फर्श पऱ सिकुड़ गए।
औऱ फिन। "आआआआआआआआआअहहहह्ह्ह!!!!" स्नेहा केँ मुँह सें एक् मदहोश कर देने वालीचीख निकली।
उसकेबदन नें झटके खानां शुरुआत कर दिया। उसकी बुर नें उसकी हि उँगली कों कसकर जकड़ लिया औऱ अंदर सें गरमरस बाहर् आने लगीं। स्नेहा कां वोँ गाढ़ा, रस उसकी उँगलियों सें होताहुआ उसकी जांघों पऱ बहनेलगा, जोँ शावर केँ पानी केँ संग मिलकर फर्श कि तरफ फिसलरहा थां।
, स्नेहा कां बदन पूरीतरह सें निढाल होँ गय़ा। वोँ दीवार केँ सहारे घुटनों केँ बल फर्श पर्र गिर पड़ी।
उसकी छाती तेज़ी सें ऊपर-नीचे होँ रही थि। शावर कां गरम पानी अभि भि उसके नंगे, कांपते हुए शरीर पर्र गिररहा थां। स्नेहा नें अपनी आँखें खोलीं। चैन उसके चेहरे पर्र साफझलक रहा थां।
। उसने अपने हि हाथों कों देखाजिन पर्र अभि भि उसकी उत्तेजना कां रस औऱ गंध मौजूद थि।
उसने धीरे-धीरे सें शावरबंद किया। तौलिये सें अपने जिस्म कों पोंछते हुए वोँ आईने केँ सामने आई।
बाहर् आरव उसका इंतजार कररहा थां।
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What a kahani। Great writing skills।
Majja aa gya bhay। muze तो lga thaa pahle soniya kaa number ayega lekin sneha kaa aa gya nahii asha h iske sath romantic rkhna bhay padaku jaisa और madhu के sath rough rkhna poora और please update regular rkhna। Baki jaisa apki theek lge
woh Sirf Meri Behene nahee - Next part mein bada twist
thank you very much bro bro i have a question index kese banate haen jaha readers updates no pr click karte hi uske page pr chale jaye
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