छोटी-छोटी रसीली कहानियां, Total 18 stories Complete - desi kamuk kahaniyan – New Episode
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विक्रम नें अपनी एक् टाँग नीरा कि टाँगों केँ बीच मे घुसा दि औऱ अपनी जाँघ उसकी बुर पे रगड़ने लगा। नीरा कों भि अपनी टाँग पे उसके खड़े होते लण्ड कां कड़ापन महसूस हुआ औऱ बिना जाने हि नीरा अपना शरीर विक्रम सें रगड़ने लगी। विक्रम कां एक् हाथअब नीरा कि चूचियों पे थां औऱ उसकी मम्मों कों बड़े प्रेम सें मसलरहा थां। नीरा कि जीभ भि अब औऱ जोश सें विक्रम कि जीभ सें रगड़ने लगी। उसके चूतड़ों पे रखे विक्रम केँ हाथ नें कब उसकी कमीज़ कों ऊपरउठा दिया, नीरा कों इसबात कां तब एहसास हुआजब उसेवोह हाथ अपनी सलवार औऱ फिन पैंटी केँ अंदर सरकते हुए अपनी गाण्ड पे महसूस हुआ। इस अजनबी व्यक्ति कां हाथ अपने नंगे चूतड़ों पे नीरा कों बहोत अच्छा लगरहा थां।
नीरा रोमाँचित होकर एक् सुखद एहसास मे खोयी हुइ थि मगरजब उसे विक्रम कां हाथ औऱ नीचे सरकता हुआ महसूस हुआ औऱ उसकी अँगुलियां नीरा कि बुर मे घिसने कि कोशिश करने लगीं तोँ नीरा उछलकर विक्रम सें अलग हौ गयीँ,। नीरा कि साँसें बहोत तेजचल रहीथीं औऱ वोह मुश्कुराते हुए विक्रम कों ताकने लगी। नीरा कों एहसास हुआ कि वोह क्याँ कररही थि औऱ उसका चुदाई कि ज्वाला मे सुलगता शरीरकिस हद तक वशीभूत हौ गय़ा थां औऱ फिनवोह अंदरभाग गयीँ,।
बर्थडे पार्टी मे बाकी वक्तवोह अपने पति केँ संग हि चिपकी रही क्योंकी वोह जानती थि कि विक्रम केँ संगफिन सें अकेली हुईँ तौ स्वयं कों रोक पाने केँ लिए ख़्वाहिश शक्ति उसमें नहि थि। बाद मे रात कों जब अपने पति सें चुदाई कि सभी कोशिशें बेकार होँ गयीं तौ नीरा कां मनफिन सें विचलित होँ गय़ा औऱ वोह बर्थडे पार्टी मे मिले अजनबी विक्रम केँ बारे मे सोचने लगी। वोह कल्पना करनेलगी कि जश्न मे विक्रम केँ संगवोह किस सीमा तक जा सकती थि औऱ क्याँ वोह चोदने मे एक्सपर्ट थां। आखिरवोह भि तोँ विक्रम केँ सहलाने औऱ उसके लण्ड केँ स्पर्श सें चुदास होँ गयीँ, थि।
एक् अजनबी पराए मर्द नें उसकी पैंटी मे हाथ डालकर उसकी नंगी गाण्ड सहलायी थि औऱ स्वयं उसने भि तौ अपनी टाँगों केँ बीच मे उस व्यक्ति केँ लण्ड कां स्पर्श पाकर अपनी बुर उसकी टाँग पऱ रगड़ी थि। नीरा जानती थि कि वोह एक् विवाह-शुदा स्त्री होतेहुए भि अपनी बुर कि बेचैनी सें मजबूर होकेकुछ देर केँ लिएबहक गयीँ, थि औऱ इसबात सें नीरा बहोत चिंतित थि। पर्र फिन नीरा केँ दिल केँ किसी कोने मे उस अजनबी कों छोड़ केँ भाग जाने कां पछतावा भि थां क्योंकी अगरवोह वहा सें नहि भागती तोँ इस वक्त उसकी बुर चुदाई कि पिपासा कि अग्नि मे नां जलरही होती।
नीरा कां हाथ उसकी चूचियां मसलने लगा। नीरा नें बाथरूम मे जाने कां भि कष्ट नहि किया। नीरा कल्पना कररही थि कि उसकी चूचियों पे उसका स्वयं कां नहि बल्कि विक्रम कां हाथ थां। संग-संग उसका दूसरा हाथ उसकी टाँगों केँ बीच मे पहुँच गय़ा। नीरा कां पति उसकीबगल मे हि गहरी नींद मे सोयाहुआ थां औऱ एक् अजनबी व्यक्ति केँ संग चुदाई कि कलपना करती हुई वोह अपनी बुर कों अपनी अँगुलियों सें चोदरही थि। जब अँगुलियों सें उसकी बुर कों तसल्ली नहि मिली तौ वोहहाथ फैला केँ साईड टबेल पे कुछऐसा ढूँढ़ने लगी जोँ कि वोह अपनी बुर मे डालसके पऱ कुछ भि उपयुक्त उसकेहाथ मे नहि आया। जब उसकाहाथ ज़मीन पऱ पड़ा तोँ उसका एक् सैंडल उसकेहाथ मे आँ गय़ा।
औऱ उस सैंडल कि लम्बी हीलवोह अपनी बुर मे घुसेड़कर अंदर-बाहर् करके चोदने लगी। थोड़ी देर मे जब नीरा झड़ी तोँ उसने इतनीजोर सें सिसकी मारी कि उसका पति नींद सें जाग गय़ा। नीरा नें जबउसे दिलासा दिया कि शायदवोह कोई बुरा सपनादेख रही थि तौ उसका पति फिन सें भुनभुनाता हुआ पलटकर सो गय़ा।
विक्रम केँ संग हुइ घटनाउन गगर्मि कि छुट्टियों केँ दौरान नीरा कि वैसी इकलौती वारदात नहि थि पर्र वही एक् घटनाऐसी थि जौ इतनीआगे तक बढ़ गयीँ, थि। नीरा जानती थि कि वोह अपने पति सें दगा करके किसी दूसरे मर्द सें चुदवाने केँ कितनी लगभग आँ गयीँ, थि। वोहऐसी स्थिति मे पड़ना नहि चाहती थि इसलिये विक्रम कि केवल कल्पना करकेमुठ मारती थि। नीरादिन भर इंटरनेट पे चुदाई कि कहानियां पड़ती याँ नंगी फिल्में देखती औऱ शराब पीकरखूब मुठ मारती थि।
इस सबके बावजूद पाटिर्यों मे नीरा कि शोखियां औऱ दूसरे मर्दों पे डोरे डालना कम नहि हुआ थां। उसे इसकीआदत सि पड़ गई, थि। उसके विद्यालय केँ कच्ची उम्र केँ लड़कों कि तरहजब दूसरे व्यक्ति भि उसको देखकर लार टपकाते थें तोँ नीरा कों बहोत अच्छा लगता थां औऱ एक् सम्पूर्ण महिला होने कां एहसास होता थां। मुठमार केँ नीरा अपनी बुर कि आग जितनी शाँत करने कि कोशिश करती थि, उसकी बुर कि आग उतनी हि औऱ दहकती थि।
आखिरकार छुट्टियां खतम हौ गयीं। नयी जॉब केँ पहलेदिन कि घबड़ाहट जौ कि अक्सर लोगों कों होती हैं वैसी हि नीरा कों भि थि क्योंकी कालेज कां माहौल विद्यालय केँ माहौल सें बहुतअलग होता हैं। विद्यालय मे अधिक अनुशासन होता हैं जबकि कालेज मे क्षात्रों ज़्यादा बे-फिक्र औऱ फसादी होते हें। नीरा नें बहोत सोच-विचार केँ पहलेदिन केँ लिए कपड़े मनपसंद किये थें जोँ बहोत ज़्यादा टाईट नाँ हों। उसने पीलेरंग कि सलवार कमीज़ औऱ संग मे हमेशा कि तरह बहुतहाई हील केँ सैंडल पहने थें।
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नीरा नें शीशे केँ सामने स्वयं कों निहारा। उसकी कमीज़ कां गला बहुत गहरा थां पऱ उसने अपने दुपट्टे सें अपनी चूचियों कों ढकरखा थां। हालाँकि उसकी कमीज़ घुटनों केँ ऊपर हि थि औऱ उसकी पीली काटन कि सलवार पारदर्शी थि पऱ टाईट नहि थि औऱ सभी मिलाकर नीरा साधारण औऱ उपयुक्त पऱ संग हि बहुत हसीन भि लगरही थि।
मगरजब उसने अपनी कमीज़ कों थोड़ी सि ऊपर उठाया तौ मुश्कुराए बिना नहि रहसकी क्योंकी उसकी पारदर्शी पीली सलवार केँ नीचे सें उसकी काली र्फेंच-कट पैंटी साफदिख रही थि। शायद किसी खुश-किश्मत लड़के कों मेरी पैंटी कि झलकदिख जाये, नीरा नें मन मे सोचा पर्र फिन अपनी बेशर्मी औऱ नुमाईश कि आदत पे स्वयं कों झाड़ा औऱ फिन अपनी कमीज़ ठीक करके कालेज केँ लिए निकल गयीँ,।
कालेज मे जब उसने लड़कों कों अपनीतरफ घूरते देखा तोँ नीरा नें सोचा कि लड़के तौ लड़के हि रहेंगे। कालेज केँ कैम्पस मे नीरा कों पीछे सें एक्-दो सीटियां भि सुनायी पड़ीं। ऊपर सें तोँ नीरा थोडा क्रोध दिखारही थि पर्र अंदर हि अंदर रोमाँचित हौ रही थि कि इस उम्र मे भि उसकेलिए लड़कों कि सीटियां निकलरही थीं। अगर मेरा जिस्म इतना आकर्षक औऱ सेक्सी हैं तौ उसकी नुमाईश करने मे क्याँ बुराई हैं। नीरा सोचने लगी। नीरा नें कालेज केँ आफिस मे जाकरसभी औपचारिकतायें पूरी कि औऱ फिन स्टाफ-रूम मे मित्र लेक्चररों सें परिचय करके अपनी क्लास लेने गई,।
जब उसने क्लास मे प्रवेश किया तौ वहा एकदम चुप्पी छा गयीँ,। नीरा नें देखा कि सभी स्टुडेंट्स कि नज़रें उसपर हि थीं। जहाँ लड़कियों कि आँखों मे नयी लेक्चरर कों देखकर जिज्ञासा थि वहीं लड़कों कि नज़रों मे सरहाना औऱ कामुकता झलकरही थि। क्लास-रूम मे आगे चबूतरे पर्र एक् डेस्क औऱ बठने केँ लिए कुर्सी कि स्थान एक् ऊँचा स्टूल थां जिसकी टाँगों पे आधी ऊँचाई पर्र एक् स्टील कां रिंगलगा हुआ थां पेर रखने केँ लिए। नीरा नें वोह स्टूल डेस्क केँ पीछे सें घसीटकर सामने रखा औऱ अपना एक् पांवउस रिंग पे रखकर स्टूल पे चढ़ केँ बैठ गई,। नीरा कि दूसरी टाँग नीचे हि लटकरही थि औऱ उसके सैंडल कां आगे कां हिस्सा ज़मीन कों महज़छू भररहा थां।
नीरा नें देखा कि उसके बिल्कुल सामने बैठा लड़काउसे मुँह खोलेताक रहा थां। नीराउसी क्षणसमझ गई, कि बैठते वक़्त उसकी ऊँची कमीज़ मे सें उस लड़के कों उसकी जाँघों केँ बीच कां हिस्सा दिख गय़ा होगा पर्र इसबात कां यकीन नहि थां कि उसकी काली पैंटी कि झलकउस लड़के कों दिखी कि नहि। जौ भि हौ, नीरा कों उस लड़के कि प्रतिक्रिया बहोत दिलकश लगी थि।
नीरा नें उस लड़के पऱ नज़र रखतेहुए लैक्चर ज़ारी रखा। जब नीरा कों यकीन थां कि वोह लड़काउसी कि तरफदेख रहा हैं तोँ नीरा नें उसकीतरफ घूमते हुए अपनी दूसरी टाँग भि उठाकर अपने सैंडल कि हील स्टील केँ रिंग मे फँसा दि। ऐसा करतेहुए जानबूझ कर नीरा नें इसतरह सें अपने घुटने फैला दिये कि येसभी एक् इत्तेफाक लगे। लेक्चर देतेसमय हर टाइम नीरा कि निगाहें चोरी-चोरी उस लड़के पे हि थीं। वोह लड़काजब आँखें फाड़े नीरा कों कि टाँगों केँ बीच मे ताकने लगा तौ उसकी बाहर् कों निकली आँखों सें साफ ज़हीर हौ गय़ा कि उसेअब नीरा कि सलवार मे सें काली पैंटी साफ-साफ दिखरही थि।
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too be contd।.
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Rohit Kapoor wrote:superb jounpur bhay ji Jemsbond wrote:excellent job bhay supremo009 wrote:Very nice effort bro...!!! keep it up......हम् too आते rahenge aapki kahaniyo ko padhane केँ liye..... Thanks Bro for reading the bakvas. . .
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नीरा नें उस लड़के पऱ नज़र रखतेहुए लैक्चर ज़ारी रखा। जब नीरा कों यकीन थां कि वोह लड़काउसी कि तरफदेख रहा हैं तोँ नीरा नें उसकीतरफ घूमते हुए अपनी दूसरी टाँग भि उठाकर अपने सैंडल कि हील स्टील केँ रिंग मे फँसा दि। ऐसा करतेहुए जानबूझ कर नीरा नें इसतरह सें अपने घुटने फैला दिये कि येसभी एक् इत्तेफाक लगे। लेक्चर देते वक़्त हर वक़्त नीरा कि निगाहें चोरी-चोरी उस लड़के पे हि थीं। वोह लड़काजब आँखें फाड़े नीरा कों कि टाँगों केँ बीच मे ताकने लगा तोँ उसकी बाहर् कों निकली आँखों सें साफ ज़हीर होँ गय़ा कि उसेअब नीरा कि सलवार मे सें काली पैंटी साफ-साफ दिखरही थि।
नीरा नें अपनी अपनी कमीज़ कों ठीक करतेहुए घुटने आपस मे मिलालिए मगरउसे उस लड़के कि बे-करारी सें बड़ारस मिलरहा थां। ऐसे हि दिन निकलने लगे औऱ औऱ नीरा भि कालेज केँ वातावरण कि आदी हौ गई,। कईतरह सें नीरा कों विद्यालय मे पढ़ाने केँ मुकाबले कालेज ज़्यादा आसानलगा क्योंकी कालेज मे ज़्यादा आज़ादी औऱ फुर्सत थि औऱ संग दूसरे टीचरों औऱ कालेग मैंनेजमेट कि कोई दखल-अँदाज़ी नहि थि। जल्द हि नीरा केँ कपड़े औऱ अधिकतँग, चुस्त औऱ पारदर्शी होँ गये। उसकी सलवार-कमीज़ों केँ गलों कां कटाव बहुत गहरा होँ गय़ा जिससे कि उसकी गोरी बड़ी-बड़ी चूचियां दुपट्टे सें ढकी नां होने पऱ साफ दिखती थीं औऱ सलवारें इतनी पारदर्शी थीं कि अगरभीग जायें तौ नीरा बिल्कुल नंगी दिखे।
जबवोह साड़ी पहनती तोँ उसके ब्लाऊज़ इतने छोटे होते कि उनके नीचे ब्रा पहनना हि बेकार थां औऱ वोह पारदर्शी साड़ियां भि बहोत कसकर पहनती थि। नीरा अपने अँगों कि नुमाईश केँ नये-नये तरीके ईजाद करनेलगी औऱ लड़के-लड़कियां हि नहि बल्कि स्टाफ केँ कई लोगों मे उसकी चर्चा होनेलगी। एक् तरफ लड़के नीरा कि कामुक अदाओं औऱ जिस्म कि नुमाईश पे मरते थें तौ दूसरी तरफ कितनी हि लड़कियां उसे अपना आदर्श समझकर उसकीतरह हि फैशन औऱ मेक-अप वगैरह करने लगीं। नीरा नें भि देखा कि उसकी क्लास मे क्षात्रों कि अनुपिस्थति, खास करके लड़कों कि अनुपिस्थति नाँ केँ बराबर थि औऱ इसका श्रेय नीरा कि समझ मे उसके जिस्म कि नुमाईश औऱ क्लास मे उसकी लड़कों केँ संग दिल्लगी कों जाता थां।
एक् दिन नीरा दोपहर मे अपनी अंतिम क्लास खतम होने पऱ अपने डेस्क केँ पास एक् लड़के सें लेक्चर केँ बारे मे बातकर रही थि औऱ बाकी केँ लोग झुँड मे एक् दूसरे कों करीब धकेलते हुए जल्द-जल्द क्लास केँ बाहर् निकलरहे थें। अचानक नीरा नें महसूस किया कि किसी नें उसके चूतड़ों कों हाथ सें पकड़कर मसल दिया औऱ वोह चौंककर तेजी सें पीछेघूम गयीँ, पर्र उसे क्षात्रों केँ झुँड केँ अलावा कुछ नहि दिखा। किसने उसकी गाण्ड कों दबाया थां ये जानने कां नीरा केँ पासकोई तरीका नहि थां।
नीराइस घटना सें बेचैन होँ गयीँ,। जब वोँ विद्यालय मे पढ़ाती थि तोँ नीरा केँ इतनी छेड़खानी औऱ दिल्लगी करने केँ बावजूद कभी किसी लड़के नें उसे छूने याँ बदतमीज़ी कि हिम्मत नहि कि थि पर्र आज कालेज केँ एक् लड़के नें उसे केवलछुआ हि नहि बल्कि खुल्लम खुल्ला उसके चूतड़ों कों मसला थां। इससे भि अधिक बेचैनी नीरा कों इसबात कि थि कि उसेइस हरकत पे क्रोध नहि आया थां बल्कि उसेमजा आया थां औऱ उसकी बुर मे हलचल सि हुइ थि। नीरा नें उसदिन घऱजा केँ अपनी बेचैनी औऱ सुलगती बुर शाँत करने केँ लिए व्हिस्की पीकरनशे मे मदहोश होकर एक् मोटे सें खीरे सें खूबमुठ मारी।
जिस क्लास मे उसकी गाण्ड मसली गई, थि, अगलेदिन नीराउस क्लास मे बड़े ध्यान सें लड़कों केँ चेहरों कों पढ़रही थि। पर्र किसी केँ भि चेहरे सें नीरा कों कोई सुराग नहि मिला। नीरा कों पता थां कि इनमें सें हि कोई एक् हैं। पर्र वोह हैं कौन?ये जानने केँ लिए नीरा बेताबी सें पागल सि हुईँ जारही थि। नीरा नें दोषी लड़के कों पहचानने केँ लिएउन लड़कों कों अपनी अदाओं सें औऱ भि अधिक उत्तेजित करने कां फैसला किया। नीरा नें उसदिन उस क्लास मे अपनी जवानी केँ जलवों कि इतनी बेहयाई सें नुमाईश कि जितनी उसनेआज तक नहि कि थि। उसने अपने दुपट्टे कों चूचियों सें हटाकर अपनीगले पे खिसका दिया औऱ झुक-झुक कर अपनी गोरी-गोरी चूचियां कि नुमाईश कि। अपनी टाँगें खोलकर अपनी पैंटी कि झलक देतेहुए वोहकई बार अपने डेस्क औऱ ऊँचे स्टूल पे चढ़कर बैठी औऱ एक् बार तोँ बिल्कुल धीरे-धीरे अपनी कमीज़ थोड़ी सि ऊपर खिसका केँ सलवार केँ ऊपर सें अपनी बुर भि खुजलायी।
पर्र जब उसने देखा तोँ सब लड़के अपनी सीटों पे अपने खड़ेहुए लण्डलिए बेकरारी सें नीरा कों ताकते हुए कसमसा रहे थें। दोषी लड़के कों पहचानने मे नीरा कि सभी कोशिशें बेकार हौ गयीं। जब वोह क्लास खतम हुइ तौ नीरा अपने डेस्क केँ पास क्लास केँ बाहर् निकलते हुए स्टुडेंट्स कि तरफपीठ करके खड़ी होँ गई,। वोह सजधजकर थि कि जैसे हि वोह लड़काउसे छूने लगेगा तौ वोहघूम केँ उसे पकड़ लेगी पऱ किसी नें ऐसा नहि किया औऱ नीरा क्लास मे अकेली रह गयीँ,। फिन नीरा अपने डेस्क पे कुहनियां रखकर स्टूल पे बैठ गयीँ, औऱ अपना चेहरा अपनी हथेलियों सें ढक लिया।
“ढिल्लो मैडम, आप् ठीक तौ हें नं?”
नीरा नें चौंककर सिरउठा केँ देखा तौ उसका एक् स्टूडेंट, रोहित सेठी, उसकेपास खड़ा थां।
“मे ठीक हूं…” नीरा थोड़ी हड़बड़ाती हुईँ बोलीं- “बिल्कुल ठीक…”
“पर्र आप् कुछ परेशान लगरही हें…” वोह बोला।
“नहि, केवल थोड़ी थक गई, हूं…”
“असल मे आप् अच्छी हि दिखरही हें…”
“रोहित… क्याँ चाहिए तुम्हें। क्याँ बात हैं?” नीरा नें परेशान होतेहुए पूछा।
“ढिल्लो मैडम, तुम् बहोत हि सेक्सी औऱ दिल्लगी-बाज़ महिला हौ…”
“क्याँ? तुम्हारी इतनी हिम्मत…” नीरा गुस्से सें चिल्लाई।
“तुम् जब सें इस कालेज मे आयी हौ। तब सें हमें अपनी चूचियां गाण्ड औऱ यहा तक कि बुर कि झलकियां दिखा-दिखाकर हमें तड़पा रही हौ। पर्र आज तोँ आपने अपने शरीर कि जैसे नुमाईश कि औऱ लड़कों कों लुभाया, उसकेलिए तुमको आस्कर मिलना चाहिए…” रोहित बे-बाक होके बोला।
“सुनो, रोहित अब बहोत होँ गय़ा। अगर तुम् इसी वक़्त चलेजाओ तौ मे तुम्हारे यह बदतमिज़ी कों भूलने कों सजधजकर हूं। समझे?”
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Dear dosto, Update iss posted. .
आज कां भाग मस्त हैं भइया
धीरे-धीरे सें मारा तौ गुस्से सें बोलीं किधरदे रहा हैं किधरजा रहा हैं झटके सें मारा तौ हँसकर केँ बोलीं दिएजा राजामजा आँ रहा हैं परम खूबसूरत कथा आपके द्वारा यार
rajsharma wrote:धीरे-धीरे सें मारा तौ गुस्से सें बोलि किधरदे रहा हैं किधरजा रहा हैं झटके सें मारा तोँ हँसकर केँ बोलि दिएजा राजामजा आँ रहा हैं परम हसीन स्टोरी आपके द्वारा साथी भइयायह बातइस स्टोरी पऱ एक् दम स्लिम हैं कथा हैं हि इतनी मस्त
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