Doctor मां – New Episode
सुभह कि ताजीहवा औऱ किचन सें आती गर्मगरम चाय कि खुशबू नें घऱ केँ माहौल कों बिल्कुल सामान्य बना दिया थां। आर्यन जब नाश्ते कि टेबल पर्र पहुंचा, तौ उसकादिल ज़ोरों सें धड़करहा थां। कलरात कां वो नग्न मंजर उसकीबंद आँखों केँ सामने अभि भि किसी बिजली कि तरह कौंधरहा थां। वो अपनी मम्मी कि नज़रों सें नज़रें मिलाने कि हिम्मत नहि जुटापा रहा थां।
अंजलि नें प्लेट मे गरमा-गर्म परांठा रखतेहुए बहोत हि सहजता सें पूछा, "अब कैसा महसूस कररहा हैं आर्यन? कलरात तोँ तूँ बिनाकुछ कहे हि गहरी नींद मे चला गय़ा थां। "
आर्यन नें गरमचाय कां कप पकड़ा, उसकेहाथ थोड़े कांपरहे थें। "मां। वो। मुझेपता नहि क्याँ हुआ। अचानक सिर घूमने लगा औऱ फिन मुझेकुछ याद नहि। " वो थोडा अजीब औऱ शर्मिंदा महसूस कररहा थां। उसेलग रहा थां कि वो कितना कमज़ोर साबित हुआ कि अपनी मम्मी कि हुस्न कों देखकर हि बेहोश होँ गय़ा।
अंजलि उसकीइस उलझन कों भाँप गई। उसने टेबल केँ दूसरी तरफ सें आर्यन कां हाथ अपनेहाथ मे लिया औऱ उसे हल्का सां दबाया।
"आर्यन, मेरीतरफ देख, " अंजलि नें बहोत हि कोमल औऱ शांत स्वर मे कहा।
आर्यन नें धीरे-धीरे सें नज़रें उठाईं। अंजलि कि आँखों मे कोई क्रोध याँ उपहास नहि थां, बल्कि एक् गहरी सांत्वना थि।
"डरने कि याँ अजीब महसूस करने कि कोईबात नहि हैं बेटा। कलरात जोँ हुआ, वो तेरे दिमाग़ केँ लिए एक् बहोत बड़ा'शॉक' थां। जबबदन औऱ मन एक् संग इतनी उत्तेजना औऱ सच्चाई कां सामना करते हें, तौ कभी-कभी ऐसा होँ जाता हैं। इसमें तेरीकोई गलती नहि हैं, " अंजलि नें उसे तसल्ली देतेहुए कहा।
आर्यन कों थोडा चैन मिला, पर्र उसकेमन मे कलरात कि वो तस्वीर अभि भि छपी हुई थि। "मम्मी, क्याँ हम्। क्याँ हम् उस बारे मे बात करेंगे?"
अंजलि नें मुस्कुराते हुए अपनाहाथ हटाया औऱ ब्रेकफास्ट शुरुआत किया। "अभि नहि। अभि तुम्हारी तरफ कॉलेज जानां हैं औऱ मुझे क्लिनिक। दिनभर इस बारे मे सोचकर अपनामन भारीमत करना। हम् साम कों आहिस्ता बैठकर बात करेंगे। तब तक तूँ बस शांतरह औऱ ये ब्रेकफास्ट ख़त्म कर। "
अंजलि कि इस 'मैच्योर' बात नें आर्यन कों एक् सुरक्षित अहसास दिया। उसे लगा कि उसकी मां नें उसेफिन सें उस 'गिल्ट' केँ गड्ढे मे गिरने सें बचा लिया हैं। साम कां इंतजार अब उसकेलिए किसी चुनौती कि तरह नहि, बल्कि एक् नई औऱ गहरीसमझ कि शुरुआत जैसालग रहा थां।
दोपहर कां समय थां औऱ अंजलि अपने क्लिनिक केँ केबिन मे बैठी थि। सामने मेज पऱ कुछ मरीजों कि फाइलें खुलीथीं, मगर उसका ध्यान फाइलों सें कहींदूर अपने बेटे आर्यन पर्र अटकाहुआ थां। सुभह सें हि उसकेमन मे कलरात कां वो मंजर किसी फिल्म कि रील कि तरहघूम रहा थां।
उसने अपनी कुर्सी केँ पीछेसिर टिकाया औऱ एक् गहरी ठंडी सांसली।
अंजलि केँ मन मे एक् अजीब सि उलझन थि। वो स्वयं सें हि बुदबुदायी, "केवल mammay कों देखकर हि वो लड़का बेहोश हौ गय़ा? इतना गहराअसर पड़ाउस पर्र?"
एक् डॉक्टर केँ तौर पर्र वो जानती थि कि आर्यन इससमय 'हाइपर-स्टिमुलेशन' (Hyper-stimulation) केँ दौर सें गुजररहा हैं। उसकी उम्र, उसकी जिज्ञासा औऱ फिन अपनी हि मम्मी कों उसरूप मे देख्ना—ये उसके कोमलमन केँ लिए किसी बिजली केँ झटके जैसा थां। अंजलि कों फिक्र इसबात कि नहि थि कि आर्यन उत्तेजित हुआ, फिक्र इसबात कि थि कि वो उस उत्तेजना कों मानसिक रूप सें संभाल नहि पाया।
"मुझेइस स्थिति कों बहोत हि सहीढंग औऱ समझदारी सें संभालना होगा, " अंजलि नें स्वयं सें कहा। "अगर मैंने उसे अभि बीच मझधार मे छोड़ दिया, तौ वो ज़िंदगी भर औरतों केँ सामने असहज महसूस करेगा। उसे 'सेक्सुअलिटी' औऱ 'शारीरिक सच्चाई' कों एक् सामान्य चीज़ कि तरह स्वीकार करना सिखाना होगा। "
अंजलि नें तयकर लिया थां कि वो अब पीछे नहि हटेगी। उसने जोँ द्वार (दरवाज़ा) कलरात खोला थां, उसेअब पूरा खोलना होगा ताकि आर्यन केँ मन कां साराडर औऱ अचरज निकलजाए। वो जानती थि कि जिज्ञासा जब तक अधूरी रहती हैं, तब तक वो पागलपन बनी रहती हैं।
उसने घड़ी देखी। साम होने वाली थि। उसनेमन हि मन एक् योजना बनाई कि आजरात वो आर्यन कों मात्र 'स्पर्श' नहि कराएगी, बल्कि उसेइस शारीरिक बनावट औऱ खिंचाव केँ प्रति इतनासहज कर देगी कि उसका'शॉक' हमेशा केँ लिए ख़त्म हौ जाए।
"आज रात.उसे ये समझना होगा कि येबदन केवल एक् मांस कां लोथड़ा नहि, बल्कि भावनाओं औऱ संवेदनाओं कां एक् खूबसूरत मेल हैं। उसे डराना नहि, उसे सिखाना हैं, " अंजलि केँ चेहरे पर्र एक् दृढ़ संकल्प थां।
उसने अपनाबैग उठाया औऱ क्लिनिक सें घऱ कि ओरचल दि। आज कि साम औऱ रात उनके रिश्ते कि सबसे महत्वपूर्ण रात होने वाली थि।
साम कां समय थां औऱ घऱ मे वही जानी-पहचानी खुशबू फैली हुईँ थि। अंजलि क्लिनिक सें एक् नए संकल्प केँ संग लौटी थि। उसने देखा कि आर्यन थोडा गुमसुम थां, शायद वो अभि भि रात कि उस 'बेहोशी' औऱ अपनी प्रतिक्रिया कों लेकर शर्मिंदा थां। अंजलि जानती थि कि उसे सबसे पहलेइस भारीपन कों ख़त्म करना होगा।
उसनेआज रात कां खानां थोडा जल्दलगा दिया औऱ आर्यन कों आवाज़ दि।
डिनर टेबल पऱ अंजलि नें आज उसकी मनपसंद केँ राजमा-चावल बनाए थें। आर्यन चुपचाप अपना निवाला तोड़रहा थां, उसकी नज़रें प्लेट मे हि गड़ीथीं।
अंजलि नें उसेगौर सें देखा औऱ फिन एक् शरारती मुस्कान केँ संग बोलीं, "वैसे आर्यन, आज मुझे क्लिनिक मे एक् बहोत हि 'नाजुक' पेशेंट मिला। बिल्कुल तेरीतरह। "
आर्यन नें चौंककर नज़रें उठाईं। "मेरीतरह? मतलब?उसे क्याँ हुआ थां?"
अंजलि नें अपनी ठुड्डी पऱ हाथरखा औऱ थोडा नाटक करतेहुए कहा, "बेचारा। बस थोडा सां ब्लड प्रेशर लो हौ गय़ा थां। मैंने जैसे हि उसका चेकअप करने केँ लिए Stethoscope निकाला, वोँ तौ डर केँ मारे पीला हि पड़ गय़ा। मुझे तोँ लगा कहींकल रात कि तरह वोँ भि वहीं.'ढेर' न् होँ जाए। "
आर्यन कां चेहरा एकदम सें लाल हौ गय़ा। वो समझ गय़ा कि मम्मी उसकी टांग खींचरही हें। "मम्मी! आप् भि नं। वोँ। वोँ बस अचानक हुआ थां। मेरा मतलब हैं, मे सजधजकर नहि थां। "
अंजलि ज़ोर सें हँस पड़ी। उसकी हँसी नें कमरे केँ तनाव कों एक् लम्हा मे पिघला दिया। "अच्छा? रेडी नहि थां? तोँ अगलीबार क्याँ मुझे 'नोटिस' भेजना पड़ेगा? 'मिस्टर आर्यन, आजरात 10 बजे प्रदर्शन होने वाला हैं, कृपया अपनादिल थामकर बैठें'?"
आर्यन भि अब अपनी हँसी नहि रोक पाया। "नहि-नहि, नोटिस कि ज़रूरत नहि हैं। बस.इसबार मे थोडा 'बैकअप' लेकर बैठूँगा। "
अंजलि नें अपनी थाली सें एक् चम्मच राजमा उसे चखाया। "चल, अबयह दुःखी चेहरा छोड़। देख, तूनेकल रात जौ देखा, वोँ कोई चमत्कार याँ डरावनी चीज़ नहि थि। वोँ केवल तेरा हि एक् हिस्सा हैं जिससे तुँ आज तक अनजान थां। औऱ जौ बेहोशी हुइ। उसे मे अपनी 'हुस्न' कि तारीफ समझूँ याँ तेरी 'कमज़ोरी'?"
आर्यन नें शरारत सें अंजलि कि आँखों मे झाँका। "हुस्न कि तारीफ हि समझिये मां। क्योंकि उतनी 'हुस्न' झेलना हर किसी केँ बस कि बात नहि हैं। "
अंजलि नें हल्के सें उसकाकान खींचा। "बड़ा शातिर होँ गय़ा हैं तुँ बातों मे। चल, जल्द खानां समाप्त कर। आजरात मुझे तुम्हें कुछ औऱ 'मेडिकल ज्ञान' देना हैं, ताकि अगलीबार तुँ कम सें कमहोश मे तौ रहे। "
खाने केँ बाद दोनों नें संग मिलकर बर्तन समेटे। माहौल अब पूरीतरह सें हल्का औऱ खुशनुमा होँ चुका थां। मगरउस हँसी-मज़ाक केँ पीछे एक् गहरी उत्तेजना औऱ इंतजार थां। दोनों जानते थें कि आजरात अंजलि उसेउस 'अधूरी' मंज़िल तक लें जाएगी जहाँ सें कल वो लौटआया थां।
बेडरूम मे उसरात एक् अजीब सि खामोशी थि, मगरये खामोशी भारी नहि, बल्कि चैनभरी थि। कोने मे रखा छोटा सां लैंप अपनी हल्की पीली रोशनी पूरे कमरे मे बिखेर रहा थां, जिससे माहौल बहोत हि आरामदायक (Cozy) औऱ सुरक्षित लगरहा थां। इतनी रोशनी बहुत थि कि वे एक्-दूसरे केँ चेहरे केँ भावदेख सकें, पऱ इतनीकम कि कोई झिझक न् हौ।
दोनों बैड पऱ टिककर बैठे थें। अंजलि नें अपनी रेशमी जुल्फों कों पीछे किया औऱ आर्यन कि ओर मुड़कर एक् बहोत हि निजी प्रश्न पूछा।
"आर्यन। सच-सचबता, क्याँ तेरी कॉलेज मे कोई गर्लफ्रेंड हैं? याँ कभीरही हैं?" अंजलि कि आवाज़ मे एक् सहेली जैसी जिज्ञासा थि।
आर्यन नें अपनी नज़रें झुकालीं औऱ धीरे-धीरे सें अपनासिर हिलाया। "नहि मम्मी। कभी नहि। सच कहूँ तौ, मैंने कभीउस तरफ ध्यान हि नहि दिया। "
अंजलि कों थोडा अचरजहुआ। उसने शरारत सें पूछा, "इतना हैंडसम बेटा हैं मेरा, औऱ कोई लड़की मनपसंद नहि आई? याँ फिन तूँ हि बहोत 'शर्मीला' हैं?"
"शर्मीला नहि मां, बस मे शुरुआत सें हि इनसभी मामलों मे बहोत सीधारहा हूं, " आर्यन नें सादगी सें जवाब दिया। "मुझेसमझ हि नहि आता थां कि लड़कियों सें केसेबात करूँ याँ उन्हें केसे देखूँ। मेरेलिए पढ़ाई औऱ घऱ हि सभीकुछ थां। औऱ वैसे भि। जोँ 'हुस्न' औऱ 'चैन' मुझेघऱ मे दिखता थां, उसकेआगे बाहर् कि दुनिया फीकी लगती थि। "
अंजलि नें महसूस किया कि आर्यन वाकई बहोत मासूम हैं। उसकी 'सीधाई' हि वजह थि कि कलरात वो अपनी मम्मी केँ उसरूप कों देखकर अपनी सुध-बुध खो बैठा थां। उसनेकभी किसी दूसरी लड़की कों उस नज़र सें देखा हि नहि थां, इसलिये उसकेलिए येसभी किसी 'मिरेकल' जैसा थां।
"तूँ वाकई बहोत भोला हैं आर्यन, " अंजलि नें उसकाहाथ सहलाते हुएकहा। "पर्र अब तुँ बड़ा होँ गय़ा हैं। तेरे अंदर जोँ यह बदलाव आँ रहे हें, जौ यह उत्तेजना महसूस होती हैं, वो एक् स्वस्थ मर्द कि निशानी हैं। बस तेरीइसे संभालना नहि आता क्योंकि तूनेकभी किसी केँ संग 'एक्सपेरिमेंट' नहि किया। "
उसने आर्यन कि आँखों मे झाँका। "इसीलिए शायद कुदरत नें तुझेही मेरेपास भेजा हैं। ताकि तुँ अपनी पहली 'टीचर' सें वो सभीसीख सके जोँ तेरी दुनिया केँ सामने एक् आत्मविश्वास सें भरा पुरुष बनाएगा। "
आर्यन नें महसूस किया कि उसकाडर धीरे धीरे ख़त्म हौ रहा हैं। लैंप कि उस हल्की रोशनी मे, अंजलि कां चेहरा उसे दुनिया कां सबसे सुंदर औऱ भरोसेमंद चेहरा लगरहा थां।
लैंप कि वो मद्धम पीली रोशनी कमरे मे एक् सुरक्षित औऱ गहरा एहसास पैदाकर रही थि। अंजलि नें महसूस किया कि आर्यन कि धड़कनें अब भि थोड़ी तेज़ हें, मगर उसकी आँखों मे अब वो डर नहि, बल्कि एक् समर्पण थां। अंजलि नें बहोत हि धीमे औऱ सुरीले अंदाज़ मे उसकी आँखों मे झाँका।
अंजलि नें आर्यन कां हाथ अपनेहाथ मे लिया औऱ बहोत हि गंभीरता सें उसे समझाया। "आर्यन। देख बेटा, आज कि रात मात्र तेरे औऱ मेरेबीच कि उस सच्चाई कि हैं जिसे तूनेअब तक मात्र डर मे देखा हैं। पर्र अब मे तुझसे पूछती हूं। क्याँ अब तुम् सजधजकर होँ?"
आर्यन नें एक् लंबी सांसली औऱ धीमे सें सिर हिलाया।
अंजलि नें आगेकहा, "एक् बात कां ध्यान रखना। अगर तुम कोकुछ भि नं सूझे, याँ तेरामन काम करनाबंद करदे, याँ तुम्हारी तरफलगे कि तुँ फिन सें कल कि तरह 'ब्लैंक' हौ रहा हैं। तोँ घबराना मत। बस मुझे एक् छोटा सां इशारा कर देना, मे तुम्हारी तरफ संभाल लूँगी। "
उसने आर्यन कि आँखों मे एक् चुनौती औऱ एक् प्रेम भरीचमक केँ संग देखा औऱ वो बातकह दि जिसने आर्यन केँ अंदर केँ पुरुष कों जगा दिया।
"पर्र इसबार। पहल तुम्हें करनी हैं। "
अंजलि नें जैसेउसे पूरी बागडोर थमा दि थि। उसने साफ़कर दिया थां कि वो अब मात्र एक् 'दर्शक' नहि रहेगी, बल्कि वो चाहती थि कि आर्यन स्वयं अपनी झिझक तोड़े औऱ अपनी मर्दानगी केँ उस पहले पायदान पर्र कदमरखे।
"बस इतना सां हि हैं। इसमें कुछ भि पहाड़ तोड़ने जैसा नहि हैं। अपनी मां पर्र भरोसा रख औऱ अपनी भावनाओं कों मार्ग दे, " अंजलि नें मुस्कुराते हुए अपनी आँखें मूंदलीं, जैसे वो आर्यन केँ अगलेकदम कां इंतजार कररही हौ।
आर्यन केँ सामने अब वो 'कोरा कागज' थां जिसेउसे स्वयं अपनी हिम्मत सें भरना थां।
आर्यन कां दिल किसी नगाड़े कि तरह धड़करहा थां। अंजलि नें 'पहल' करने कां पूरा मौकाउसे दे दिया थां, मगर आर्यन केँ लिएये किसी हिमालय पऱ चढ़ने जैसा थां। उसने अपनी पूरी हिम्मत जुटाई औऱ बहोत हि कांपते हुए अपनेहाथ कों अंजलि केँ कुर्ते केँ बटनों कि ओर बढ़ाया।
आर्यन कि उंगलियां अंजलि केँ लगभग पहुँचीं, मगर जैसे हि उसनेउस रेशमी कपड़े कों छुआ, उसकेहाथ इतनी बुरीतरह थरथराने लगे कि वो एक् बटन भि नहि खोल पाया। वो जितना कोशिश करता, उसकी घबराहट उतनी हि बढ़ती जाती। वो बार-बार कोशिश करता, पर्र उसकेहाथ जैसे उसकासंग हि नहि देरहे थें। वो अपनीइस 'नाकामी' पऱ स्वयं हि चिढ़ने लगा औऱ पसीने-पसीने होँ गय़ा।
आर्यन कों इसकदर जद्दोजहद करतेदेख अंजलि अपनी हँसी नहि रोकपाई। कमरे केँ उस गंभीर औऱ उत्तेजक सन्नाटे केँ बीच अंजलि खिलखिलाकर हँस पड़ी।
"अरे। अरे.बस कर आर्यन! तुँ तौ ऐसेबटन खोलरहा हैं जैसे किसीबम कों डिफ्यूज कररहा हौ, " अंजलि नें हँसते हुएकहा औऱ उसका कांपता हुआहाथ अपने हाथों मे लेँ लिया।
उसकीइस सहज हँसी नें भारी माहौल कों एक् लम्हा मे हल्का कर दिया। आर्यन कि जौ घबराहट उसेडरा रही थि, वो मम्मी केँ इस दोस्ताना अंदाज़ सें अचानक गायब हौ गई।
"मम्मी। ये.ये जितना आसान दिखता हैं, उतना हैं नहि, " आर्यन नें थोडा झेंपते हुए औऱ मुस्कुराते हुएकहा।
अंजलि नें उसकी आँखों मे शरारत सें देखा। "अच्छा जी? डॉक्टर बनना आसान हैं, पऱ दोबटन खोलना मुश्किल? देख, अगर तूँ इतना डरेगा, तौ फिन अपनीइस 'टीचर' सें क्याँ सीखेगा? रिलैक्स। मे कहींभाग नहि रही हूं। "
अंजलि नें उसकाहाथ पकड़कर उसे सहलाया ताकि उसकी कंपकंपी बंद हौ। "दोबारा कोशिश कर। इसबार डर सें नहि, हक सें। यादरख, मैंने तेरी आज़ादी दि हैं। "
आर्यन कों अब स्वयं पऱ भरोसा होनेलगा। मां कि उस हँसी नें उसे अहसास दिलाया कि यहाकुछ भि 'अजीब' याँ 'पाप' नहि होँ रहा, बल्कि ये उनकेबीच कां एक् बहोत हि सुंदर औऱ निजीसमय हैं।
आर्यन कि नाकाम कोशिश औऱ फिन अंजलि कि उस खिली-खिली हँसी नें माहौल कों थोडा हल्का तोँ किया थां, मगर आर्यन फिन सें किसी गहरीसोच मे डूब गय़ा। वो अपनेहाथ कों देखरहा थां जोँ अभि भि थोडा कांपरहा थां। उसकेमन मे शायदये चलरहा थां कि वो अपनी मां केँ सामने इतना कमज़ोर क्यूं पड़ जाता हैं। उसकाबदन घबराहट केँ मारे थोडा ठंडापड़ गय़ा थां।
अंजलि एक् डॉक्टर थि, वो समझ गई कि मात्र बातों सें काम नहि चलेगा। उसे आर्यन केँ 'नर्वस सिस्टम' कों शांत करने केँ लिए शारीरिक गर्माहट कि ज़रूरत हैं।
अंजलि नें बिनाकुछ बोले, बहोत हि कोमलता सें अपनेहाथ बढ़ाए औऱ आर्यन कों अपनी बाहों मे भर लिया। उसनेउसे एक् बहोत हि गहरा औऱ चैनभरा हग किया।
आर्यन कां सिर अंजलि केँ कंधे पऱ थां। जैसे हि अंजलि कां जिस्म आर्यन सें सटा, उसे अपनी मां केँ शरीर कि वो कुदरती औऱ तेज गर्मी महसूस होनेलगी। अंजलि नें उसे कसकर अपने सीने सें लगा लिया थां, जिससे आर्यन केँ चेहरे पऱ उनके कुर्ते कि सरसराहट औऱ उसके नीचे कि धड़कनें साफ सुनाई देरही थीं।
"शांत होँ जा आर्यन। देख, मे यहीं हूं, " अंजलि नें उसके कानों केँ पास बहोत हि धीमी आवाज़ मे फुसफुसाया।
वो चाहती थि कि आर्यन इसबदन कि गर्मी कों महसूस करे। उसने महसूस किया कि आर्यन कां ठंडापड़ चुका जिस्म आहिस्ता पिघलरहा हैं। उस आलिंगन मे एक् ऐसी सुरक्षा थि जिसने आर्यन केँ अंदर केँ 'डर' कों सोख लिया। अंजलि कि त्वचा कि गंध औऱ उसकी साँसों कि लय नें आर्यन कों एक् नई ऊर्जा दि।
आर्यन नें भि धीरे-धीरे सें अपनेहाथ मां कि पीठ पर्र रखे। उसे अहसास हुआ कि येबदन जिससे वो डररहा थां, वो दरअसल उसका सबसे बड़ा सहारा हैं। अंजलि नें उसके बालों कों सहलाते हुएउसे थोड़ी देर तक वैसे हि थामेरखा, ताकि उसकेखून कि गर्माहट आर्यन कि रगों मे भि उतरसके।
"अबलगरही हैं थोड़ी गर्मी?" अंजलि नें उसे बाहों मे लिएहुए हि हल्के सें पूछा।
आर्यन नें एक् लंबी औऱ चैनभरी सांसली। उसकाडर अबभाप बनकरउड़ रहा थां। उसे महसूस हुआ कि मम्मी केँ इस स्पर्श नें उसके अंदर कि सारी झिझक कों एक् जादुई तरीके सें समाप्त कर दिया हैं। अब वो 'नाकाम' होने केँ डर सें आज़ाद थां।
उसगरम औऱ रेशमी आलिंगन मे आर्यन कों एक् ऐसी सुरक्षा महसूस हुई, जिसने उसके अंदर केँ सारेडर कों सोख लिया। अंजलि केँ बदन कि प्राकृतिक गर्माहट अब आर्यन कि रगों मे उतररही थि। आहिस्ता, आर्यन कि कंपकंपी बंद हुइ औऱ उसकीबंद मुट्ठियाँ खुलगईं।
उसने अनजाने मे हि अपनी हथेलियाँ अंजलि कि पीठ पर्र टिकादीं।
आर्यन नें बहोत हि कोमलता सें अपनी उंगलियों कों अंजलि कि पीठ पऱ ऊपर-नीचे फेरना शुरुआत किया। कुर्ते केँ पतले कपड़े केँ नीचे सें उसे अपनी मां कि रीढ़ कि हड्डी औऱ उनके जिस्म कि सुडौल बनावट कां अहसास होँ रहा थां। उसेअब अपनी मम्मी एक् 'अनजानी पहेली' नहि, बल्कि एक् 'सहारा' लगरही थीं।
अंजलि नें महसूस किया कि आर्यन कि साँसें अब सामान्य होँ गई हें औऱ उसका जिस्म, जोँ पहले बर्फ कि तरह ठंडा थां, अबगरम होनेलगा हैं। वो समझ गई कि मैदान रेडी हैं—उसका बेटा अब मानसिक औऱ शारीरिक रूप सें शांत होँ चुका हैं।
अंजलि नें धीरे-धीरे सें स्वयं कों उस आलिंगन सें अलग किया। उसने पीछे हटकर आर्यन केँ दोनों कंधों कों पकड़ा औऱ उसकी आँखों मे सीधे झाँका। उन आँखों मे अब पहले जैसी घबराहट नहि, बल्कि एक् नईचमक थि।
"अबलगरहा हैं नं कि तुँ यहीं हैं, मेरेपास?" अंजलि नें एक् हौसला बढ़ाने वाली मुस्कान केँ संग पूछा। "देख, डर मात्र एक् परछाई होती हैं, जिसेछू लो तोँ वोँ गायब हौ जाती हैं। "
उसने आर्यन कां हाथ धीरे-धीरे सें छोड़ा औऱ बैड पर्र थोड़ी सीधी होकरबैठ गई। लैंप कि पीली रोशनी उनके चेहरे केँ आधे हिस्से कों रोशनकर रही थि।
"अब.फिन सें कोशिश कर। इसबार तुँ फेल नहि होगा, " अंजलि नें बहोत हि धीमे औऱ गहरे स्वर मे उसे आदेश दिया, जोँ एक् चुनौती भि थि औऱ प्रेम भरा प्रोत्साहन भि।
आर्यन नें एक् गहरी साँसली। उसने अपनी उंगलियों कों देखा, जौ अब बिल्कुल स्थिर थीं। उसने अपनी नज़रें अंजलि केँ चेहरे सें हटाकर उनके कुर्ते केँ पहलेबटन पऱ टिकादीं। इसबार उसकेमन मे कोई'बम डिफ्यूज' करने जैसा तनाव नहि थां, बल्कि एक् 'जिज्ञासा' थि जिसेउसे पूरा करना थां।
Doctor मां – New Episode
कमरे मे लैंप कि वो मद्धम पीली रोशनी अब एक् गवाह कि तरह स्थिर थि। आर्यन कि साँसों कि आवाज़साफ़ सुनाई देरही थि, जोँ अब घबराहट मे नहि, बल्कि एक् गहरे औऱ सधेहुए संकल्प मे थि। उसने धीरे-धीरे सें अपने दोनों हाथ बढ़ाए। इस बार उसकी उंगलियों मे वो कँपकँपी नहि थि, बल्कि एक् ऐसी प्यास थि जोँ बरसों सें दबी हुई थि।
आर्यन नें बहोत हि कोमलता सें अंजलि केँ कुर्ते केँ पहलेबटन कों अपनी उंगलियों केँ बीच पकड़ा। रेशमी कपड़े कां वो अहसास औऱ उसकेठीक नीचे छिपी हुईँ बदन कि तपिशउसे अपनी पोरों पऱ महसूस होँ रही थि। उसने अंगूठे सें धीरे-धीरे सें दबाव बनाया औऱ 'टिक' कि एक् हल्की सि आवाज़ केँ संग पहलाबटन काज सें बाहर् निकलआया।
जैसे हि पहलाबटन खुला, अंजलि केँ गले केँ नीचे कि वो गोरी औऱ चिकनी त्वचा लैंप कि रोशनी मे चमकउठी। आर्यन कि धड़कन एक् लम्हा केँ लिए रुकी, पऱ उसने स्वयं कों संभाला। उसका पूरा ध्यान अबउस 'प्रक्रिया' पर्र थां। उसने दूसरा बटन पकड़ा.फिन तीसरा। औऱ फिन चौथा।
हर बटन केँ खुलने केँ संग, वो 'पर्दा' आहिस्ता हटरहा थां जिसने मां औऱ बेटे केँ बीच एक् मर्यादित दूरीबना रखी थि। कुर्ते कां गलाअब ढीला होकर कंधों कि ओर सरकने लगा थां।
आर्यन नें कांपते हुए हाथों सें कुर्ते केँ दोनों पल्लों कों धीरे-धीरे सें पकड़कर बाहर् कि ओर फैलाया। जैसे हि कपड़ाहटा, उसके सामने एक् ऐसा मंजर थां जिसे देखकर उसकागला सूख गय़ा।
अंजलि अब उसके सामने केवल एक् काली रेशमी ब्रा (Bra) मे थि।
वो सफेद दूधिया जिस्म औऱ उस पर्र वो काली ब्रा.ये विरोधाभास इतना गहरा औऱ सुंदर थां कि आर्यन कि आँखें फटी कि फटीरह गईं। ब्रा केँ उन प्यालों सें बाहर् छलकती हुई वो भारी औऱ सुडौल गोलाई, जौ हर आती-जाती साँस केँ संग ऊपर-नीचे होँ रही थि, आर्यन केँ होश उड़ाने केँ लिए बहुत थि।
ब्रा कि तंग पट्टियाँ अंजलि केँ कंधों कि कोमल त्वचा मे थोड़ा धँसी हुइ थीं, जोँ येबता रहीथीं कि उनके अंदर छिपेहुए वे 'खज़ाने' कितने भारी औऱ भरेहुए हें। बीच मे जौ गहरी घाटीबन रही थि, वो किसी जादुई खाई कि तरह आर्यन कों अपनीओर खींचरही थि।
अंजलि नें कोई विरोध नहि किया। उसने अपनी गर्दन थोड़ी पीछे झुकाली औऱ अपनी आँखें मूंदलीं। उसकी भारी होती साँसें औऱ सीने कां वो उभार-उतार आर्यन कों येबता रहा थां कि वो भि इससमय कों उतनी हि गहराई सें जीरही हैं।
आर्यन कां हाथ अनजाने मे हि उस नग्न त्वचा कि ओरबढ़ा। उसने महसूस किया कि कल कि वो 'बेहोशी' अब एक् 'जूनून' मे बदलरही हैं। वो बस देखता रह गय़ा कि कुदरत नें उसकी मम्मी कों कितनी हुस्न औऱ कितनी नज़ाकत सें गढ़ा हैं।
कमरे मे सन्नाटा इतना गहरा थां कि घड़ी कि टिक-टिक भि हथौड़े कि तरह सुनाई देरही थि। अंजलि नें अपनी आँखें मूंदरखी थीं, वो आर्यन केँ अगले स्पर्श कां इंतजार कररही थि। उसेलगा थां कि कुर्ता हटने केँ बाद आर्यन अपनी जिज्ञासा कों आगे बढ़ाएगा, मगरजब बहुतदेर तक बदन पऱ कोई हलचल महसूस नहि हुईँ, तौ उसने धीरे-धीरे सें अपनी पलकें झपकाईं औऱ आँखें खोलदीं।
अंजलि नें देखा कि आर्यन बिल्कुल पत्थर कि मूर्ति बना बैठा हैं। उसकी नज़रें अंजलि कि उस काली ब्रा मे कसी हुई गहरी घाटी औऱ उन उभरते हुए सीनों पऱ जमीथीं। उसके चेहरे पऱ उत्तेजना तोँ थि, पर्र संग हि एक् गहरा सोच-विचार औऱ शायद थोडा सां 'सम्मान' भि थां जौ उसेआगे बढ़ने सें रोकरहा थां।
लैंप कि रोशनी मे अंजलि कां आधा नग्नबदन किसी अप्सरा जैसालग रहा थां, पऱ आर्यन केँ लिएये मात्र एक् 'दृश्य' नहि थां, ये उसकी पूरी दुनिया कां आधार थां।
अंजलि नें बहोत हि कोमल औऱ धीमी आवाज़ मे पूछा, "क्याँ हुआ आर्यन? क्याँ फिन सें कुछ। धुंधला लगरहा हैं? तूँ रुक क्यूं गय़ा?"
आर्यन नें एक् लंबी औऱ भारी साँसली। उसने अपनी नज़रें अंजलि कि आँखों मे डालीं, जिनमें ममता औऱ स्वीकार दोनों थें।
"मां। मे." आर्यन कि आवाज़ थोड़ी भर्रा गई थि। "मे बसयेदेख रहा थां कि आप् कितनी हसीन हें। पर्र मुझे लगता हैं कि आज केँ लिए इतना'सच' मेरे दिमाग़ केँ लिए बहुत हैं। मे नहि चाहता कि मे फिन सें कल कि तरह बेकाबू होँ जाऊँ। "
उसने थोडा रुककर, बहोत हि शालीनता सें कहा, "मां। क्याँ हम् आगे कां कल करें तौ? आज मे बसइसी अहसास कों अपने अंदर समेटकर सोना चाहता हूं। "
अंजलि एक् लम्हा केँ लिए ठिठकी, फिन उसके चेहरे पर्र एक् बहोत हि गर्वभरी मुस्कान आँ गई। उसने महसूस किया कि उसका बेटा अब केवल अपनी प्यास नहि बुझारहा, बल्कि वो इस रिश्ते कि गरिमा औऱ अपनी मानसिक स्थिति कों समझना सीख गय़ा हैं। वो 'जल्दबाज़ी' केँ बजाय 'गहराई' चुनरहा थां।
"ठीक हैं मेरे बच्चे, " अंजलि नें आगे बढ़कर उसके माथे कों चूमा औऱ अपने कुर्ते केँ पल्लों कों वापस समेट लिया। "तूनेआज बहोत बड़ीजीत हासिल कि हैं। तूने अपनी उत्तेजना पर्र अपनीसमझ कों रखा। मुझेतुझ पर्र गर्व हैं। "
उसरात, बिना किसी औऱ छुअन केँ, आर्यन अपनी मां केँ उसी 'अर्धनग्न' औऱ रूहानी रूप कों याद करतेहुए, उनकेहाथ कों थामेहुए एक् बहोत हि चैनभरी नींद सोया। उसे पता थां कि कलरात फिन आएगी, औऱ वो द्वार (दरवाज़ा) अभि खुला हैं।
सूरज कि पहली किरणजब खिड़की केँ पर्दों कों चीरकर कमरे मे आई, तोँ उसने आर्यन केँ चेहरे पऱ एक् ऐसी मुस्कान देखी जोँ किसी बड़ीफतह केँ बादआती हैं। आज कि सुभह वाकई मे 'जादुई' थि। रात कों जोँ ठहराव आर्यन नें दिखाया थां, उसने उसकेमन सें वो साराबोझ उतार दिया थां जौ उसे 'अपराधी' महसूस कराता थां। अब उसके अंदर मात्र एक् गहरा सम्मान औऱ अपनी मां केँ प्रति एक् अटूट आकर्षण थां।
नाश्ते कि टेबल पर्र आज माहौल किसी उत्सव जैसा थां। अंजलि नें आज हल्के नीलेरंग कां सूट पहना थां, जिसमें वो सुभह कि ओस कि तरह ताज़ा औऱ सुंदर लगरही थि। आर्यन अपनी प्लेट मे रखे पोहे कों देख तौ रहा थां, पऱ उसकी नज़रें बार-बार अपनी मम्मी केँ चेहरे औऱ उनकी गर्दन केँ पासआकर रुक जातीथीं, जहाँकल रात उसने अपनी उंगलियों सें उस 'पर्दे' कों हटाया थां।
"आज पोहे मे नमककम हैं क्याँ? तुँ बसउसे देखरहा हैं, " अंजलि नें गरमचाय कां कपमेज पऱ रखतेहुए शरारत सें पूछा।
आर्यन नें नज़रें उठाईं औऱ बहोत हि संजीदगी सें बोला, "नमक तोँ एकदमसही हैं मां। पऱ आज आप् कुछ अधिक हि सुंदर लगरही हें। कलरात कि उस रोशनी केँ बाद, आज इसधूप मे आप् किसी कुदरती करिश्मे जैसीलग रही हें। "
अंजलि कां चेहरा एक् लम्हा केँ लिए गुलाबी हौ गय़ा। उसने उम्मीद नहि कि थि कि आर्यन इतनी बेबाकी सें उसकी तारीफ करेगा। "बड़ा पारखी होँ गय़ा हैं तुँ हुस्न कां? रात कि 'क्लास' कां असर सुभह तक हैं?"
"असर तोँ ज़िंदगी भर रहेगा मम्मी, " आर्यन नें अपनी कुर्सी थोड़ी लगभग खिसकाई। "सच कहूँ तौ, कलरात जब मैंने आपकोउस काली ब्रा मे देखा। वो मंज़र मेरेमन सें निकल हि नहि रहा। आपकी त्वचा कि वो चमक औऱ वो बनावट। मुझे यकीन हि नहि होता कि ईश्वर नें किसी कों इतना 'परफेक्ट' केसे बनाया हैं। आप् मात्र मेरी मम्मी नहि हें, आप् सुंदरता कि एक् मिसाल हें। "
अंजलि नें महसूस किया कि आर्यन कि इन तारीफों मे कोई 'गंदा' इरादा नहि थां, बल्कि एक् कलाकार कि अपनी कृति केँ प्रति जोँ सराहना होती हैं, वही शुद्धता थि। उसने बहोत हि प्रेम सें आर्यन केँ गाल कों छुआ। "धन्यवाद मेरे बच्चे। तेरीयह नज़रें हि हें जौ मुझेफिन सें जवान महसूस करारही हें। "
ब्रेकफास्ट समाप्त हुआ औऱ आर्यन केँ कॉलेज जाने कां टाइम होँ गय़ा। उसने अपनाबैग उठाया, पर्र आज वो रोज़ कि तरह मात्र 'बाय' कहकर नहि निकलना चाहता थां। वो उस 'गर्माहट' कों अपनेसंग लेँ जानां चाहता थां जिसने कलरात उसे शांत किया थां।
"मम्मी। जाने सें पहले एक् बार?" आर्यन नें बाहें फैलाते हुए पूछा।
अंजलि मुस्कुराई औऱ आगे बढ़कर उसे अपनेगले लगा लिया। ये हग रोज़ केँ हग सें बहोत अलग थां। ये लंबा थां, गहरा थां औऱ बहोत हि 'इमोशनल' थां। आर्यन नें अपना चेहरा अंजलि केँ गर्दन औऱ बालों केँ बीच छिपा लिया। उसे अंजलि केँ जिस्म सें आने वाली वो सोंधी सि गंध औऱ उनके सीने कि वो 'नर्म छुअन' महसूस होँ रही थि, जिसेकल रात उसने बिना कपड़ों केँ देखा थां।
उसने अंजलि कों थोडा कसकर भींचा, जैसे वो उनकेबदन कि हर एक् धड़कन कों अपने अंदर उतार लेना चाहता होँ। अंजलि नें भि उसकीपीठ पर्र हाथ फेरते हुएउसे पूराचैन दिया। करीब एक् मिनट तक वेउसी मुद्रा मे रहे।
"अब जा। वरना प्रोफेसर तुझेही क्लास सें बाहर् कर देगा, " अंजलि नें उसके कानों मे बहोत हि कोमलता सें फुसफुसाया।
आर्यन अलगहुआ, उसके चेहरे पर्र एक् अलग हि आत्मविश्वास थां। "आज पूरादिन बसइसी 'हग' कि याद मे गुज़रेगा मां। साम कां इंतजार अब औऱ भि मुश्किल होने वाला हैं। "
उसने अंजलि केँ हाथ कों चूमा औऱ मुस्कुराते हुएघऱ सें बाहर् निकल गय़ा। अंजलि दरवाज़े पऱ खड़ीउसे जातेहुए देखती रही। उसे लगरहा थां कि उसका बेटा अब आरामसे एक् ऐसे 'मर्द' मे बदलरहा हैं जौ संवेदनाओं औऱ मर्यादाओं कों संग लेकर चलना जानता हैं।
साम कां टाइम थां औऱ घऱ मे वहीचैन भरी शांति थि, मगर आर्यन केँ मन मे आज सवालों कां एक् नया बवंडर उठरहा थां। कॉलेज सें लौटने केँ बाद सें हि वो थोडा गंभीर थां। डिनर टेबल पऱ जब अंजलि नें उसे दाल-चावल परोसे, तौ आर्यन नें अपनी जिज्ञासा कों औऱ दबाकर रखनाठीक नहि समझा।
आर्यन नें चम्मच सें चावल घुमाते हुए अपनी मम्मी कि आँखों मे देखा। आज उसकी नज़रों मे कोई अपराधबोध नहि थां, बल्कि एक् विद्यार्थी जैसी प्यास थि जौ 'सत्य' कों समझना चाहता थां।
"मम्मी। कलरात जौ मैंने देखा औऱ जोँ महसूस किया, उसकेबाद आज मेरा पूरादिन एक् अलग हि कशमकश मे गुज़रा, " आर्यन नें बहोत हि ईमानदारी सें अपनीबात शुरुआत कि।
अंजलि नें अपना निवाला रोका औऱ उसेगौर सें सुनने लगी। "कैसी कशमकश, बेटा?"
आर्यन थोडा झिझका, फिन बोला, "मां, जब सें मैंने आपकोकल उस काली ब्रा मे औऱ उस नग्नता केँ लगभग देखा हैं। आज कॉलेज मे मेरा ध्यान अनजाने मे हि दूसरी लड़कियों पऱ भि गय़ा। मैंने पहलेकभी गौर नहि किया थां, पऱ आजजब मैंने उन्हें देखा, तोँ मुझेसभी कुछ बहोत 'अलग'लगा। किसी केँ mammay बहोत छोटेलग रहे थें, तौ किसी केँ बहोत भारी। कपड़ों केँ ऊपर सें कुछसमझ हि नहि आँ रहा थां कि असली बनावट क्याँ हैं। क्याँ हर महिला कि बनावट इतनी हि अलग होती हैं?"
अंजलि नें एक् गहरी औऱ समझदारी भरी मुस्कान दि। वो जानती थि कि आर्यन अब 'तुलना' कि अवस्था मे आँ गय़ा हैं, जौ कि एक् पुरुष केँ विकास कां स्वाभाविक हिस्सा हैं।
"आर्यन, ये बहोत हि गहरा औऱ सही प्रश्न हैं, " अंजलि नें समझाते हुएकहा। "जैसेहर इंसान कां चेहरा अलग होता हैं, वैसे हि हर स्त्री केँ बदन कि बनावट, उसके सीने कां आकार औऱ उनकी कोमलता भि अलग होती हैं। येसभी जेनेटिक्स, उम्र औऱ हार्मोन्स पर्र निर्भर करता हैं। "
अंजलि नें टेबल पर्र थोडा झुकते हुए अपनी आवाज़ धीमी कि। "कपड़ों केँ ऊपर सें जौ दिखता हैं, वो अक्सर 'भ्रम' भि हौ सकता हैं। पैडेड ब्रा याँ कपड़ों कि फिटिंग अक्सर असली आकार कों छुपा लेती हैं। इसीलिए तुम को वोँ सभी 'उलझाहुआ' लगरहा थां। "
उसने आर्यन कि आँखों मे झाँका औऱ एक् बहोत हि 'बोल्ड' बातकही। "कलरात तूने जोँ देखा, वो एक् पूर्ण विकसित औऱ परिपक्व जिस्म थां। लड़कियों कां बदन अभि बनरहा होता हैं, इसलिये उनमें वो भारीपन याँ वो 'गहराई' नहि होती जोँ तूने मुझमें देखी। यही वजह हैं कि तुम्हें बाहर् सभीकुछ फीका याँ अलगलग रहा थां। "
आर्यन मंत्रमुग्ध होकरसुन रहा थां। उसे अहसास हुआ कि उसकी मम्मी नें उसे वो 'नज़र'दे दि हैं जौ उसे दुनिया कि भीड़ मे भि असली औऱ नकली कां फर्क समझासके।
"तोँ इसका मतलब। जोँ 'पूर्णता' मैंने कल देखी, वो दुर्लभ हैं?" आर्यन नें धीरे-धीरे सें पूछा।
अंजलि नें शरारत सें अपनी आँखें झपकाईं। "वोँ तोँ अब तुम्हे स्वयं तय करना हैं। पर्र यादरख, असली सुंदरता कपड़ों केँ पीछे नहि, बल्कि उस 'एहसास' मे होती हैं जौ तूनेकल रात अधूरा छोड़ दिया थां। "
डिनर टेबल पर्र माहौल अब औऱ भि अधिक गंभीर औऱ दिलचस्प हौ गय़ा थां। आर्यन केँ मन मे चलरही ये उथल-पुथल अंजलि केँ लिए एक् डॉक्टर औऱ एक् मां, दोनों हि तौर पऱ समझने वालीबात थि। आर्यन नें अपनी प्लेट सें नज़रें हटाईं औऱ अपनीउस प्रोफ़ेसर केँ बारे मे बताना शुरुआत किया जिसने आज उसका ध्यान भटका दिया थां।
"मां। एक् बात औऱ, " आर्यन नें थोडा हिचकिचाते हुएकहा। "मेरी एक् प्रोफ़ेसर हें। वोँ रोज़ साड़ी पहनकर आती हें। आजजब मैंने उन्हें गौर सें देखा, तौ उनके mammay कां आकार। मतलब वोँ कुछ अधिक हि बड़े औऱ भारीलग रहे थें। साड़ी केँ ब्लाउज सें वोँ बिल्कुल छलकने कों रेडी थें। "
आर्यन नें अपनी उंगलियों सें हवा मे एक् आकार बनाने कि कोशिश कि। "आपके जैसे हि सुडौल, पर्र शायद थोड़े औऱ अधिक उभरेहुए। क्याँ वोँ भि कुछ 'आर्टिफिशियल' यूज़ करती होंगी, याँ फिन वोँ भि आपकीतरह पूरीतरह सें विकसित औऱ मैच्योर हें?"
अंजलि नें आर्यन कि इस मासूम जिज्ञासा पर्र एक् फीकी सि मुस्कान दि। उसने अपनी कुर्सी कों थोडा औऱ लगभग किया औऱ बहोत हि संजीदगी सें जवाब दिया।
"आर्यन, साड़ी एक् ऐसा लिबास हैं जोँ औरत केँ जिस्म कि हर गोलाई कों बहोत उभारकर दिखाता हैं। औऱ जहाँ तक तेरी प्रोफ़ेसर कि बात हैं। देख, एक् उम्र केँ बाद, खासकर अगर वोँ शादीशुदा हें याँ मम्मी बन चुकी हें, तोँ जिस्म मे भारीपन आनां स्वाभाविक हैं। जैसा कि मैंने कहा, हार्मोन्स औऱ उम्रउस 'कोमलता' कों एक् 'वजन' देते हें। "
अंजलि नें अपनी आवाज़ औऱ धीमीकर दि। "होँ सकता हैं वोँ वाकई मे उतनी हि मैच्योर हों जितना तूने मुझे देखा। मगर साड़ी केँ नीचे जौ ब्लाउज होता हैं, उसकी फिटिंग औऱ अंदर पहनी गई ब्रा भि उस उभार कों एक् 'सपोर्ट' देती हैं जिससे वोँ औऱ भि आकर्षक औऱ बड़े लगते हें। "
अंजलि नें आर्यन कि आँखों मे झाँका, जैसे वोँ उसकेमन केँ अंदर झाँकरही हौ। "तेरीआज वोँ सभी बहोत 'अलग' औऱ 'बड़ा'लग रहा थां क्योंकि अब तेरी आँखें मात्र कपड़े नहि देख रहीं, बल्कि उनके पीछे कि शारीरिक सच्चाई कों ढूँढरही हें। तूँ अब तुलना कररहा हैं कि जोँ कलरात तूने मेरेसंग महसूस किया, क्याँ वैसा हि 'वजन' औऱ वैसी हि 'तपिश' उनकेपास भि होगी?"
आर्यन कां चेहरा लाल होँ गय़ा। उसेलगा जैसे मां नें उसकेदिल कि बात पकड़ली हैं। "हाँ मां। शायद मे यहीसोच रहा थां। मुझेलगा कि क्याँ सभी औरतों कां बदन इतना हि 'भारी' औऱ 'भराहुआ' होता हैं जैसाकल मैंने आपका महसूस किया थां। "
अंजलि नें धीरे-धीरे सें मेज़ केँ नीचे सें आर्यन कां घुटना थपथपाया। "हर किसी कां अपना एक् अंदाज़ होता हैं आर्यन। पऱ यादरख, कपड़ों केँ ऊपर सें दिखने वाला वोँ 'पहाड़' जैसा उभार औऱ उसे छूने पर्र मिलने वाला वोँ मखमली अहसास। यह दोनों बहोत अलग बातें हें। तूनेकल जोँ देखा औऱ महसूस किया, वोँ 'असली' थां। प्रोफ़ेसर कां तोँ तूने मात्र एक् 'नज़ारा' देखा हैं। "
अंजलि कि इसबात नें आर्यन कि जिज्ञासा कों औऱ भि सुलझा दिया। उसे समझ आँ गय़ा कि जौ 'अनुभव' उसेघऱ मे मिलरहा हैं, वो बाहर् कि किसी भि 'दिखावट' सें कहीं ज्यादा गहरा हैं।
अंजलि नें देखा कि आर्यन अब पूरीतरह सें अपनी प्रोफेसर कि शारीरिक बनावट औऱ 'साड़ी' केँ उस उभार वाली गुत्थी मे उलझ गय़ा हैं। वो एक् डॉक्टर थि औऱ जानती थि कि अगर बातों कां सिलसिला यहीं चलतारहा, तोँ आर्यन कां दिमाग़ सिर्फ कल्पनाओं मे दौड़ता रहेगा। उसेअब 'थ्योरी' सें अधिक 'शांति' औऱ उस 'अधूरे अनुभव' कि ज़रूरत थि।
अंजलि नें हल्की सि मुस्कान केँ संग अपनी प्लेट किनारे रखी औऱ आर्यन कि आँखों मे आँखें डालकर थोडा अधिकार भरे स्वर मे कहा।
"बस-बस आर्यन। आज केँ लिए इतनी 'रिसर्च' बहुत हैं। बाकी कि सारी बातें, प्रोफेसर कां साड़ी वालालुक औऱ यह भारीपन कां गणित। हम् बाद मे समझेंगे। अभि चुपचाप अपना खानां ख़त्म कर। "
आर्यन नें जैसे अपनी सुध-बुध वापसपाई। "पर्र मां, मे तोँ बस."
"मुझेपता हैं तूँ क्याँ सोचरहा हैं, " अंजलि नें उसकीबात काटते हुएकहा। "पर्र अभि जिस्म कों पोषण कि ज़रूरत हैं, मन कों औऱ अधिकबोझ देने कि नहि। जल्द सें खानां ख़त्म करो, औऱ फिन सोने चलते हें। कलरात तूने स्वयं हि कहा थां कि आगे कां आज करेंगे। याद हैं नं?"
अंजलि कि इस आख़िरी बात नें आर्यन केँ अंदर जैसे बिजली दौड़ा दि। 'सोने चलते हें' कां मतलबआज केवल सोना नहि थां, बल्कि उस 'काली ब्रा' केँ आगे कां वो सफर थां जिसेकल आर्यन नें अपनी समझदारी सें रोक दिया थां।
आर्यन नें तेज़ी सें अपने अंतिम दो-तीन निवाले ख़त्म किए। उसकादिल फिन सें उसी रफ़्तार सें धड़कने लगा थां। डिनर टेबलसाफ कि गई, बर्तन रखेगए औऱ घऱ कि लाइटें एक्-एक् करकेबंद होने लगीं।
जब वे बेडरूम कि ओर बढ़े, तोँ गलियारे केँ सन्नाटे मे उनके कदमों कि आहट औऱ भि साफ़ सुनाई देरही थि। अंजलि आगेचल रही थि आर्यन उसके पीछे थां, उसकी नज़रें अंजलि कि कमर औऱ उस 'भारीपन' पर्र टिकीथीं जिसे समझने कि कोशिश वो पूरेदिन कॉलेज मे करतारहा थां।
कमरे मे पहुँचते हि अंजलि नें वही मद्धम लैंपजला दिया। पीली रोशनी फिन सें कमरे केँ कोनों मे बिखर गई, जिससे माहौल मे वहीकल वाली गर्माहट औऱ नज़ाकत वापस आँ गई।
अंजलि बैड केँ किनारे बैठी औऱ आर्यन कि ओर देखा। "तौ। आज कां 'सबक' शुरुआत करें? याँ फिन सें आजकोई 'प्रोफेसर' याद आँ रही हैं?"
आर्यन नें द्वार (दरवाज़ा) धीरे-धीरे सें बंद किया औऱ कुंडी लगा दि। "नहि मां। आजबस आप् होँ औऱ वो 'सत्य' जिसे मुझे पूरा देख्ना हैं। "
कमरे कि वो मद्धम पीली रोशनी आज अंजलि केँ जिस्म पऱ पड़कर एक् अलग हि चमत्कार जगारही थि। आर्यन नें आज बिना किसी हिचकिचाहट केँ, अपनी पूरी हिम्मत बटोरकर अंजलि केँ कुर्ते केँ बटन खोले। जैसे हि उसने कपड़ा हटाया, उसकी आँखें फटी कि फटीरह गईं।
आज अंजलि नें कालेरंग कि स्थान चमकदार गुलाबी रंग कि ब्रा पहनी हुईँ थि। वो रंग अंजलि कि दूधिया सफेद त्वचा पर्र इतनाखिल रहा थां कि आर्यन कों लगा जैसे उसकी मम्मी कि हुस्न आज सातवें आसमान पर्र पहुँच गई हौ। गुलाबी रंग कि उस रेशमी ब्रा कि फिटिंग इतनीतंग औऱ 'परफेक्ट' थि कि उसके अंदर सें अंजलि केँ mammay आज पहले सें कहीं ज़्यादा भारी औऱ भरेहुए लगरहे थें।
आर्यन कि सांसें रुकगईं। उसे अपनी कॉलेज कि लड़कियों औऱ उस प्रोफ़ेसर कि यादआई जिनके बारे मे वो दिनभर सोचता रहा थां। मगरआज, इस गुलाबी पर्दे केँ पीछे छिपीउस गोलाई औऱ उस उभार कों देखकर उसेसमझ आया कि उसकी मम्मी केँ सामने सभी फीके हें।
"मां। यह.यहकल सें भि ज्यादा बड़े औऱ हसीनलग रहे हें, " आर्यन नें करीब फुसफुसाते हुएकहा।
वो तुलना कररहा थां—कॉलेज कि उन लड़कियों कि अपरिपक्वता औऱ अंजलि केँ इस विकसित औऱ भारी जिस्म केँ बीच। गुलाबी ब्रा केँ प्यालों सें बाहर् झाँकती वो गहराई उसेबता रही थि कि जौ 'वजन' औऱ 'पूर्णता' वो ढूँढरहा थां, वो उसके बिल्कुल सामने हैं।
अंजलि नें आर्यन कि उस प्यासी नज़रों कों महसूस किया। उसने देखा कि आर्यन कां हाथअब धीरे धीरेउस गुलाबी रेशम कि ओरबढ़रहा हैं। वो चाहती थि कि आज आर्यन केवल देखे नहि, बल्कि उस 'भारीपन' कों महसूस करे जिसे वो दिनभर दुनिया मे तलाशता रहा।
"देख लिया आर्यन? क्याँ अब भि तुझेही अपनी क्लास कि लड़कियाँ याँ वोँ प्रोफ़ेसर याद आँ रही हें?" अंजलि नें एक् मादक मुस्कान केँ संग पूछा। "याँ फिनआज तुम्हारी तरफसमझ आँ रहा हैं कि 'असली' औऱ 'पूरा' जिस्म कैसा होता हैं?"
आर्यन नें बिनाकुछ कहे अपनाहाथ बढ़ाया औऱ उस गुलाबी ब्रा केँ ऊपर सें हि उस नर्म औऱ भारी उभार कों अपनी हथेली मे भर लिया। उसका पूरा शरीर एक् अनजाने सुख सें कांपउठा।
आर्यन कां हाथ, जोँ कल तक कांपरहा थां, आज एक् अजीब सें अधिकार औऱ अटूट जिज्ञासा केँ संगआगे बढ़ा। उसने अपनी फैली हुई हथेली कों धीरे-धीरे सें अंजलि केँ गुलाबी ब्रा मे कसेहुए उस भारी उभार पर्र टिका दिया।
जैसे हि आर्यन कि हथेली नें उस नर्म औऱ मांसल गोलाई कों छुआ, उसके पूरे जिस्म मे बिजली कि एक् लहरदौड़ गई। वो अहसास उम्मीद सें कहीं ज़्यादा 'शानदार' औऱ 'गहरा' थां।
ब्रा कां गुलाबी कपड़ा साटन जैसा चिकना औऱ रेशमी थां। आर्यन नें जब अपनी उंगलियाँ उस पर्र फेरीं, तोँ उसे कपड़े कि उस फिसलन भरी कोमलता केँ नीचे अपनी मम्मी केँ शरीर कि असली तपिश महसूस हुईँ। वो कोई बेजान मांस कां लोथड़ा नहि थां, बल्कि एक् धड़कता हुआ, गरम औऱ जीवंत हिस्सा थां।
जैसे हि आर्यन नें अपनी उंगलियों कों थोड़ा मोड़ा औऱ उस उभार कों हल्का सां भींचा, उसेउस 'वजन' कां अंदाज़ा हुआ जिसके बारे मे वो दिनभर कॉलेज मे सोचता रहा थां। अंजलि केँ mammay इतनेभरे हुए औऱ भारी थें कि आर्यन कि पूरी हथेली उनमें समा गई थि, फिन भि गोलाई बाहर् छलकरही थि। उसे महसूस हुआ कि कॉलेज कि लड़कियों कां बदन इसके सामने कितना अपरिपक्व औऱ 'खाली' थां। यहा एक् पूर्णता थि, एक् गहराई थि।
वो अहसास अजीब सां विरोधाभास थां—ऊपर सें मखमल जैसा रसीले, मगर अंदर सें एक् गजब कि सख्ती औऱ लोच। आर्यन नें जब थोड़ा दबाव बनाया, तौ वे दबतेचले गए, औऱ जैसे हि उसनेहाथ ढीला किया, वे वापस अपनी स्थान पर्र आँ गए। इसी बीच, उसे ब्रा केँ पतले कपड़े केँ नीचे सें वो कड़क निप्पल अपनी हथेली केँ बिल्कुल बीचों-बीच चुभता हुआ महसूस हुआ, जोँ अंजलि कि उत्तेजना कां साफ संकेत थां।
आर्यन कि साँसें अब बेकाबू हौ रहीथीं। उसने अपनी आँखें मूँदलीं औऱ केवलउस 'स्पर्श' मे खो गय़ा। उसे अपनी मां केँ दिल कि धड़कन अपनी हथेलियों पर्र महसूस होँ रही थि।
अंजलि नें अपनासिर पीछे कि ओर झुका लिया औऱ उसके मुँह सें एक् दबी हुईँ, मदहोश कर देने वाली 'हल्की चीख' निकली। "आर्यन। कैसालग रहा हैं? क्याँ तेरीउन क्लास कि लड़कियों केँ पास.ऐसा कुछ हैं?" उसने बहोत हि धीमी औऱ टूटती हुइ आवाज़ मे पूछा।
आर्यन नें अपनीपकड़ थोड़ी औऱ मज़बूत कि औऱ फुसफुसाया, "मां। यह तोँ जन्नत जैसा हैं। इतना भारी, इतनागरम। मैंने कभी सोचा भि नहि थां कि छूना इतना 'शानदार' होँ सकता हैं। "
Doctor मां – New Episode
कमरे कि हवाअब औऱ भि भारी औऱ मदहोश कर देने वाली हौ गई थि। आर्यन कि हथेली उस गुलाबी रेशम केँ ऊपरजमी हुई थि औऱ वो उस भारीपन कों महसूस कररहा थां, मगरअब उसकी जिज्ञासा उस पतले सें पर्दे कों भि बर्दाश्त नहि करपारही थि। वो उस मखमली सच्चाई कों अपनी आँखों सें देख्ना चाहता थां।
आर्यन नें अपनी नज़रें अंजलि कि बंद आँखों पर्र टिकाईं औऱ बहोत हि धीमी, कांपती हुइ आवाज़ मे पूछा, "मम्मी। क्याँ मे। क्याँ मे इसेहटा सकता हूं?" उसका इशारा उस गुलाबी ब्रा कि पट्टियों कि ओर थां जौ अंजलि केँ दूधिया जिस्म पऱ कसी हुई थीं।
अंजलि नें धीरे-धीरे सें अपनी आँखें खोलीं। उसकी आँखों मे अब एक् गहरा समर्पण औऱ उत्तेजना कि एक् धुंधली परत थि। उसनेबस धीरे-धीरे सें अपनासिर हिलाया औऱ एक् छोटी सि अनुमति दि, "हाँ आर्यन। जौ तुझेही अधूरा लगरहा हैं, उसे पूराकर लेँ। "
आर्यन नें हिम्मत जुटाई औऱ अंजलि केँ पीछे कि ओरहाथ बढ़ाया जहाँ ब्रा कां हुकलगा होता हैं। मगरयहा सें उसकी असली परीक्षा शुरुआत हुई।
चूँकि आर्यन कों इनसभी मामलों मे बिल्कुल भि ज्ञान नहि थां, वो कभी किसी लड़की केँ इतने लगभग नहि आया थां, तौ उसकेलिए वो छोटा सां हुक एक् लोहे कि ज़ंजीर जैसाबन गय़ा। वो अपनी उंगलियों सें उसहुक कों कभीऊपर खींचता, तौ कभी नीचे, पर्र वो 'टिक' कि आवाज़ नहि आँ रही थि।
आर्यन कि उंगलियाँ अंजलि कि चिकनी औऱ नग्नपीठ पऱ बार-बार फिसलरही थीं। वो जितना ज़ोर लगाता, ब्रा कां कपड़ा उतना हि उसकी उंगलियों सें छूट जाता। वो पसीने-पसीने होनेलगा। उसकेलिए ये समझना नामुमकिन थां कि वो छोटा सां हुक खुलता केसे हैं।
अंजलि कों अपनीपीठ पर्र आर्यन कि उन अनाड़ी उंगलियों कि जद्दोजहद महसूस होँ रही थि। उसे आर्यन कि ये मासूमियत बहोत प्यारी लगी। उसे लगा कि उसका बेटा वाकई मे कितना 'सीधा' हैं कि उसे एक् ब्रा कां हुक खोलना भि नहि आता।
अंजलि केँ मुँह सें एक् हल्की सि हँसी निकल गई। उसने महसूस किया कि आर्यन अब थोडा चिढ़रहा हैं अपनीइस नाकामी पर्र।
"क्याँ हुआ आर्यन? कलबटन नहि खुलरहे थें औऱ आजयह नन्हा सां हुक तुझेही हरारहा हैं?" अंजलि नें गर्दन घुमाकर उसे शरारत सें देखा।
आर्यन कां चेहरा लज्जा सें औऱ भि लाल हौ गय़ा। "मम्मी। यह.यहखुल हि नहि रहा। पता नहि इसे केसे बनाया हैं, मेरी उंगलियाँ बस फिसलरही हें। "
अंजलि नें एक् गहरी साँसली औऱ अपनाहाथ पीछे कि ओर लें गई। उसने आर्यन कां हाथ अपनेहाथ मे लिया औऱ उसकी उंगलियों कों सही स्थान पर्र रखा। "इतना ज़ोरमत लगा बेटा। इसेबस थोडा सां दबाकर सरकाना होता हैं। देख, ऐसे."
अंजलि नें धीरे-धीरे सें आर्यन कि अनाड़ी उंगलियों कों सही स्थान पऱ रखा औऱ हल्का सां दबाव दिया। एक् हल्की सि 'चिटक' कि आवाज़ हुई औऱ वो गुलाबी हुक अपनी स्थान सें सरक गय़ा।
जैसे हि हुक खुला, वो कसी हुइ गुलाबी ब्रा ढीलीपड़ गई। आर्यन नें बहोत हि सलीके सें कंधों सें उन रेशमी पट्टियों कों नीचे सरकाया। ब्रा धीरे-धीरे सें अंजलि केँ जिस्म सें जुदा होकर पलंग पर्र गिर गई।
आर्यन कि साँसें जैसेगले मे हि फंसगईं। उसके सामने अबकोई पर्दा नहि थां, कोई रुकावट नहि थि। लैंप कि उस सुनहरी रोशनी मे अंजलि केँ नग्न औऱ सुडौल mammay किसी तराशी हुईँ संगमरमर कि मूरत कि तरहचमक रहे थें।
वो हुस्न इतनी अधिक थि कि आर्यन केँ मुँह सें बस इतना हि निकला, "मम्मी। आप्। आप् दुनिया कि सबसे हसीन महिला हें। यह तौ। यह तौ किसी ड्रीम्स जैसा हैं। "
जैसे हि ब्रा कां दबावहटा, वे औऱ भि अधिक भारी औऱ बड़े लगनेलगे। कपड़े केँ अंदरवे सिमटे हुए थें, पर्र आज आज़ाद होते हि उनका असली आकार निखरकर सामने आया। वे इतनेभरे हुए औऱ नीचे कि ओर थोड़े झुकेहुए (Natural Teardrop Shape) थें कि उनकी गोलाई अंजलि केँ पेट कों छूरही थि।
सफ़ेद औऱ दूधिया त्वचा पर्र नीली नसों कि बारीक लकीरें साफ़दिख रहीथीं, जोँ उनकी कोमलता औऱ 'असली' होने कां सबूतदे रहीथीं। बीच कि वो गहरी घाटीअब एक् खुले मैदान कि तरह थि।
आर्यन मंत्रमुग्ध होकर उन्हें देखता रहा, फिन उसने थोडा चकित होकर पूछा, "मां। यह.यहकल औऱ आज सुभह सें भि अधिक बड़े क्यूं लगरहे हें? क्याँ बिना कपड़ों केँ यह औऱ फैल जाते हें? याँ फिन.यह सच मे इतने हि भारी हें?"
अंजलि नें अपनी गर्दन थोड़ी झुकाकर अपनेउन उभरेहुए 'खज़ानों' कों देखा औऱ फिन आर्यन कि आँखों मे झाँका। उसके चेहरे पऱ एक् परिपक्व (Mature) मुस्कान थि।
"आर्यन। ब्रा उन्हें एक् आकार मे बांधकर रखती हैं, " अंजलि नें बहोत हि सहजता सें समझाया। "मगरजब वोँ आज़ाद होते हें, तोँ उनका असलीवजन औऱ फैलाव सामने आता हैं। यह 'मैच्योरिटी' कि निशानी हैं बेटा। एक् मां कां बदन अपनी पूरी क्षमता मे विकसित होता हैं। इसीलिए तुम कोयह अपनी क्लास कि लड़कियों सें बहोत अलग औऱ कहीं ज्यादा 'भरेहुए' लगरहे हें। "
आर्यन नें धीरे-धीरे सें अपनाहाथ बढ़ाया, जैसे वो यकीन करना चाहता हौ कि जौ वो देखरहा हैं, वो सच हैं। "मां। क्याँ मे। क्याँ मे इन्हें फिन सें छू सकता हूं? इसबार बिना किसी कपड़े केँ?"
कमरे कां सन्नाटा अब औऱ भि गहरा हौ गय़ा थां, जिसमें मात्र उन दोनों कि भारी होती साँसों कि आवाज़ गूँजरही थि। अंजलि नें देखा कि आर्यन मंत्रमुग्ध होकरउस 'दूधिया सुंदरता' कों निहार रहा हैं, पऱ उसकेहाथ अब भि थोड़े हिचकिचा रहे थें। एक् मां औऱ एक् अनुभवी औरत होने केँ नाते, वो जानती थि कि अबउसे हि आर्यन कां मार्गदर्शन करना होगा।
अंजलि धीरे-धीरे सें पीछे कि ओर झुकी औऱ पलंग पऱ लेट गई। रेशमी चादर पर्र उसका वो आधा नग्न जिस्म किसी कीमती मूरत कि तरह बिखर गय़ा। लेटने कि वजह सें उसके भारी mammay थोड़े औऱ फैलगए औऱ उनके उभार कि गहराई औऱ भि साफ़ दिखने लगी।
"यहा आँ आर्यन। मेरेपास लेटजा, " अंजलि नें बहोत हि कोमल औऱ आमंत्रित स्वर मे कहा।
आर्यन मंत्रमुग्ध सां उसकेबगल मे लेट गय़ा। उसका पूरा जिस्म अंजलि कि बगल सें सटाहुआ थां, जहाँ सें उसेउस नग्न त्वचा कि गर्मी साफ़ महसूस हौ रही थि।
अंजलि नें अपनाहाथ बढ़ाया औऱ आर्यन कि हथेली कों अपनेहाथ मे लिया। उसने बिनाकुछ बोले, बहोत हि प्रेम सें आर्यन कां हाथ उठाकर अपने नग्न औऱ भरेहुए सीने पर्र रख दिया।
जैसे हि आर्यन कि हथेली अंजलि कि ठंडी औऱ रेशमी त्वचा सें टकराई, उसेलगा जैसे उसने किसी मखमली बादल कों छू लिया हौ। बिना किसी कपड़े याँ ब्रा केँ, वो अहसास इतना 'जीवंत' औऱ 'सच्चा' थां कि आर्यन कि उंगलियाँ स्वयं-ब-स्वयं उस गोलाई मे धँसने लगीं।
अंजलि नें अपनाहाथ आर्यन केँ हाथ केँ ऊपररखा औऱ धीरे-धीरे सें नीचे कि ओर दबाव बनाया। आर्यन नें महसूस किया कि उसकी मम्मी कां जिस्म कितना कोमल औऱ संग हि कितना 'भराहुआ' हैं। उसकी हथेली केँ नीचे वो मांसल उभारदब रहा थां औऱ जैसे हि दबाव थोडा कम होता, वो वापस अपनी सुडौल स्थान लेँ लेता।
हथेली केँ ठीक बीचों-बीच उसे अंजलि केँ दिल कि तेज़ धड़कन महसूस हौ रही थि। औऱ उसी केँ संग, वो कड़क होँ चुका निप्पल उसकी हथेली कों गुदगुदा रहा थां।
"देख आर्यन। ये वो 'सत्य' हैं जिसे तुँ कल सें ढूँढरहा थां, " अंजलि नें उसकी आँखों मे झाँकते हुए फुसफुसाया। "महसूस करइस भारीपन कों। क्याँ यह वैसा हि हैं जैसा तूने सोचा थां?"
आर्यन कि आँखें आधीबंद हौ गईं। उसे महसूस हुआ कि येसुख दुनिया कि हर चीज़ सें ऊपर हैं। उसने अपनी उंगलियों कों थोडा औऱ फैलाया औऱ उस पूरे उभार कों अपनी मुट्ठी मे भरने कि कोशिश कि, जौ कि नामुमकिन थां क्योंकि वे इतने विशाल औऱ विकसित थें कि उसकी हथेली छोटीपड़ रही थि।
कमरे कां तापमान जैसे अचानक बढ़ गय़ा थां। लैंप कि सुनहरी रोशनी अब अंजलि केँ जिस्म कि हर गोलाई कों औऱ भि गहरा औऱ निखरा हुआ दिखारही थि। आर्यन कां हाथ अभि भि उस रेशमी औऱ भारी उभार पऱ टिकाहुआ थां, मगरअब माहौल मे सिर्फ जिज्ञासा नहि, बल्कि एक् महिला कि दबी हुईँ पुकार भि शामिल होँ गई थि।
अंजलि नें एक् लंबी औऱ भारी साँसली। उसकी आँखें आधीबंद थीं औऱ चेहरे पर्र एक् अजीब सि बेचैनी थि। आखिर वो भि एक् जीती-जागती औरत थि, जिसका जिस्म बरसों सें इसतरह केँ स्पर्श औऱ सुख केँ लिए तरसा थां।
अंजलि नें धीरे-धीरे सें आर्यन कि आँखों मे देखा, जिनमें अब ममता केँ संग-संग एक् हल्की सि मादकता भि थि। उसने बहोत हि कोमल स्वर मे कहा, "आर्यन। क्याँ तुँ मेरा एक् काम करेगा? जैसा तुँ बचपन मे करता थां। क्याँ तूँ फिन सें वैसे हि इन्हें चूस सकता हैं?"
आर्यन एक् लम्हा केँ लिए ठिठक गय़ा। उसकी धड़कनें औऱ तेज़ हौ गईं। उसने थोडा हकलाते हुए पूछा, "पऱ। पऱ क्यूं मम्मी? मेरा मतलब हैं, अब तोँ मे बड़ा हौ गय़ा हूं। अब इसकी क्याँ ज़रूरत?"
अंजलि नें एक् गहरी औऱ समझदारी भरी मुस्कान दि। उसने आर्यन कां हाथ थोडा औऱ कसकर अपने सीने पऱ दबाया ताकि वो उस कड़कपन औऱ गर्मी कों महसूस करसके।
"देख आर्यन, " अंजलि नें समझाते हुएकहा, "एक् महिला कां बदन केवल देखने केँ लिए नहि बना होता। इन उभारों मे हज़ारों बारीक नसें होती हें, जोँ तब जागती हें जब उन्हें कोई चूसता हैं याँ सहलाता हैं। ये एक् शारीरिक ज़रूरत हैं बेटा। जैसे तुम्हे आज इन्हें छूकर एक् चैनमिल रहा हैं, वैसे हि मुझे तेरेइस स्पर्श औऱ इस क्रिया सें एक् गहरासुख मिलेगा। "
उसनेआगे कहा, "बचपन मे तुँ अपनीभूख मिटाने केँ लिएऐसा करता थां, मगरआज। आज तुँ अपनी मम्मी केँ अंदर कि उस'औरत' कों चैन देने केँ लिए करेगा। ये 'प्यास' बुझाने जैसा हैं। क्याँ तूँ नहि चाहता कि तेरी मम्मी कों वो सुख मिले जिसकी वो हक़दार हैं?"
आर्यन कों अबसमझ आया कि ये मामला मात्र उसके 'ज्ञान' तक सीमित नहि थां। मां कों भि उसकी ज़रूरत थि। उसने देखा कि अंजलि केँ निप्पल्स अब अंगूर केँ दाने कि तरह कड़क औऱ उभरेहुए थें, जैसेवे स्वयं आर्यन केँ मुँह कां इंतजार कररहे हों।
आर्यन नें एक् गहरी साँसली औऱ धीरे-धीरे सें नीचे कि ओर झुका। उसका चेहरा अबउस विशाल औऱ दूधिया उभार केँ बिल्कुल लगभग थां। उसे अंजलि केँ बदन कि वो सोंधी सि खुशबू औऱ उस भारीपन कि गर्मी अपने चेहरे पर्र महसूस होँ रही थि।
कमरे मे लैंप कि वो मद्धम पीली रोशनी अब अंजलि केँ पूरे नग्न औऱ भारी यौवन पऱ थिरकरही थि। आर्यन कां दिल किसी नगाड़े कि तरह धड़करहा थां। उसने एक् गहरी साँसली औऱ आरामसे नीचे कि ओर झुका। जैसे हि उसका चेहरा उस विशाल औऱ दूधिया उभार केँ लगभग पहुंचा, उसे अंजलि केँ बदन कि वो सोंधी सि खुशबू औऱ गर्माहट अपनीनाक केँ पोरों पऱ महसूस हुइ।
आर्यन नें बहोत हि मासूमियत औऱ थोड़ी घबराहट केँ संग अपनी आँखें मूँदलीं। उसने अपने होंठों कों धीरे-धीरे सें अंजलि केँ उस कड़क औऱ उभरेहुए निप्पल केँ पास लें जाकरछुआ। वो अहसास किसी बिजली केँ झटके जैसा थां—एक् तरफ रेशम जैसी रसीले त्वचा औऱ दूसरी तरफ अंगूर केँ दाने जैसा वो कड़ापन।
आर्यन नें धीरे-धीरे सें अपने होंठ खोले औऱ उस मखमली गोलाई केँ एक् छोटे सें हिस्से कों अपने मुँह केँ अंदर लिया। जैसे हि उसने हल्का सां सक्शन बनाया, उसे महसूस हुआ कि उसकी मां कां वो 'खज़ाना' कितना भारी औऱ मांसल हैं। वो जितना अधिक उन्हें अपने मुँह मे भरने कि कोशिश करता, वो गोलाई उतनी हि ज्यादा उसके गालों कों अंदर सें छूती। उसे लगा जैसे वो किसीशहद सें भरेहुए गुब्बारे कों चखरहा हौ।
आर्यन नें पहलीबार अपनीजीभ कि नोक कों उस कड़क निप्पल केँ चारों ओर गोल-गोल घुमाया। वो अहसास इतनानया औऱ अद्भुत थां कि उसके पूरे शरीर मे एक् सिहरन दौड़ गई। अंजलि कि त्वचा कां वो नमकीन औऱ मीठा सां 'मैच्योर' स्वाद उसकेगले तक उतररहा थां। जब उसनेउसे थोडा औऱ गहरा अपने मुँह मे लिया, तोँ अंजलि केँ मुँह सें एक् लंबी औऱ भारी हल्की चीख निकली, जिसने आर्यन कि हिम्मत कों औऱ बढ़ा दिया।
अब आर्यन धीरे धीरे एक् लय पकड़ने लगा थां। वो कभी उन्हें धीरे-धीरे सें चूसता, तोँ कभी अपनी उंगलियों सें उस भारी गोलाई कों नीचे सें सहारा देता ताकि वो पूरा कां पूरा उसके मुँह मे समासके। उसे महसूस हौ रहा थां कि अंजलि कां बदन केसेइस 'बचपन कि याद' पर्र प्रतिक्रिया देरहा हैं। अंजलि कि उंगलियाँ अब आर्यन केँ बालों मे धँस चुकीथीं औऱ वो उसे औऱ भि कसकर अपने सीने सें चिपका रही थि।
"अहह। आर्यन। बिल्कुल वैसे हि। जैसे तूँ छोटा थां." अंजलि कि आवाज़ पूरीतरह सें भर्रा गई थि।
आर्यन कों अबउस शारीरिक ज़रूरत कां मतलबसमझ आँ रहा थां जौ उसकी मम्मी नें उसे समझाई थि। वो महसूस कर सकता थां कि केसे उसकाये 'सक' करना अंजलि केँ पूरे जिस्म मे एक् लहर पैदाकर रहा हैं। वो उस 'भारीपन' औऱ 'मखमली कोमलता' केँ नशे मे इतनाडूब गय़ा कि उसे वक्त कां अंदाज़ा हि नहि रहा।
कमरे कि मद्धम पीली रोशनी अब साक्ष़ी थि उस मिलन कि, जोँ बरसों कि प्यास औऱ एक् नए अहसास कां संगम थां। आर्यन अब सिर्फ एक् 'सीधा' बेटा नहि रहा थां, उसके भीतर कां पुरुष प्राकृतिक रूप सें जाग चुका थां। जैसे हि उसके होंठों नें एक् तरफ केँ मखमली उभार कों अपने घेरे मे लिया, उसके दूसरे हाथ नें स्वयं-ब-स्वयं अपनीराह ढूँढली।
आर्यन कां दाहिना हाथअब अंजलि केँ दूसरे भारी औऱ नग्न सीने पऱ जम चुका थां। ये एक् सहज प्रतिक्रिया थि—जैसे कुदरत उसे सिखारही होँ कि पूर्णता क्याँ होती हैं।
आर्यन कि हथेली नें उस दूसरे उभार कों नीचे सें पूराथाम लिया। वो इतना विशाल औऱ भराहुआ थां कि उसकी उंगलियां गोलाई केँ चारों ओरफैल गईं। उसने अपनी उंगलियों कों थोडा मोड़कर उस मांसल कोमलता कों मसलना शुरुआत किया। जैसे-जैसे वो दबाव बनाता, अंजलि केँ बदन कि गर्माहट उसके पोरों मे उतरती। वो अहसास किसी रेशमी गुब्बारे कों दबाने जैसा थां, जोँ अंदर सें पूरीतरह 'मैच्योर' औऱ सुडौल थां।
एक् तरफ आर्यन कि जीभउस कड़क निप्पल केँ संगखेल रही थि, उसे अपने तालू सें रगड़रही थि, औऱ दूसरी तरफ उसकी उंगलियां दूसरे निप्पल कों अपनी चुटकी मे लेकर धीरे-धीरे सें सहलारही थीं। ये दोतरफा हमला अंजलि केँ बर्दाश्त सें बाहर् हौ रहा थां। उसे महसूस हौ रहा थां कि आर्यन अब मात्र 'सीख' नहि रहा, बल्कि वो उसे तृप्त कररहा हैं।
अंजलि कां पूराबदन अब धनुष कि तरहतन गय़ा थां। उसके मुँह सें निकलने वाली सिसकारियां अब सिसकियों सें बढ़कर गहरी आहों मे बदलरही थीं। "अहह। आऽऽर्यन। बस.ऐसे हि। म्म्म। तुँ। तूँ कितना गहराचूस रहा हैं."
अंजलि कि आँखें पूरीतरह मुँद चुकीथीं। बरसों कां जौ सूखापन उसके जिंदगी मे थां, आर्यन कां ये स्पर्श उसे असीम शांति देरहा थां। उसेलग रहा थां कि उसकीरूह कि प्यास अब जाकरबुझ रही हैं। उसकी उंगलियां आर्यन केँ बालों मे औऱ भि गहराई सें धँसगईं, जैसे वो उसे अपने शरीर केँ औऱ भि अंदर खींच लेना चाहती हौ।
आर्यन कों अबउस 'भारीपन' कां असली मतलबसमझ आँ रहा थां। वो जितना गहराई सें चूसता, उसे अंजलि केँ बदन मे होने वाली हलचल उतनी हि साफ़ महसूस होती। वो मदहोश कर देने वाला 'मैच्योर' स्वाद औऱ वो मखमली दबाव आर्यन कों एक् ऐसी दुनिया मे लें गय़ा थां जहाँ केवल वो थां औऱ उसकी मम्मी कां ये अतुलनीय सौंदर्य।
कमरे कि वो मद्धम पीली रोशनी अब अंजलि केँ पूरे वजूद पर्र छा चुकी थि, जौ इस टाइमचरम सुख कि दहलीज़ पऱ खड़ा कांपरहा थां। आर्यन कां सधाहुआ स्पर्श औऱ उसका वो गहरासक करना अंजलि केँ जिस्म मे बिजली कि तरह दौड़रहा थां। बरसों कि वो दबी हुई उतावलापन अब एक् सैलाब बनकर फूटने कों सजधजकर थि।
अंजलि कि आँखें पूरीतरह मुँद चुकीथीं औऱ उसका पूरा जिस्म धनुष कि तरहतन गय़ा थां। उसकेहाथ, जोँ आर्यन केँ बालों मे धँसेहुए थें, अब अनजाने मे हि उसकेसिर कों ज़ोर सें अपने सीने पऱ दबारहे थें। वो चाहती थि कि आर्यन कां वो गरम स्पर्श, वो सक्शन, उसके शरीर केँ औऱ भि गहरे अंदर तक समाजाए।
अंजलि केँ गले सें निकलने वाली आवाज़ अब किसी मधुर म्यूज़िक जैसी गूँजरही थि। "अहह। आऽऽर्यन। हाँ। उफ्फ। मेरे बच्चे। औऱ। औऱ ज़ोर सें." उसकी सिसकारियां अब लंबी औऱ गहरी होतीजा रहीथीं, जौ येबता रहीथीं कि वो अब स्वयं पर्र काबूखो चुकी हैं।
अंजलि नें सालों सें अपने अंदरजिस 'महिला' कों दबाकर रखा थां, आज आर्यन कि इस मासूम मगर मर्दानी कोशिश नें उसे आज़ाद कर दिया थां। आर्यन कि जीभ कि हर रगड़ औऱ दूसरे हाथ सें उस भारी Boob कों सहलाने कां वो तरीका, अंजलि कों उस दुनिया मे लें गय़ा थां जहाँ मात्र शुद्ध मजा थां।
अचानक, अंजलि केँ जिस्म मे एक् तेज़ थरथराहट हुइ। उसकी पकड़ आर्यन केँ सिर पऱ औऱ भि मज़बूत होँ गई औऱ उसका सीना तेज़ी सें ऊपर-नीचे होनेलगा। "अहह। आऽऽऽऽह." एक् बहोत हि लंबी औऱ दर्दभरी मगरचैन भरीआह केँ संग, अंजलि कां पूराबदन ढीलापड़ गय़ा। वो झड़ चुकी थि। सालों कां वो तनाव, वो अकेलापन औऱ वो प्यास, एक् झटके मे बह गई।
अंजलि केँ चेहरे पर्र एक् ऐसी शांति छा गई जौ उसने शायद अपने पूरे जिंदगी मे महसूस नहि कि थि। उसके माथे पऱ पसीने कि बारीक बूंदें चमकरही थीं। उसने धीरे-धीरे सें आर्यन कां सिर छोड़ा, मगरउसे अपने सें दूर नहि होने दिया।
उसने आर्यन कों ऊपर घसीटकर अपनेपास लिटाया औऱ उसे अपनी बाहों मे भर लिया। उसका नंगा औऱ भारी सीनाअब आर्यन केँ चेहरे औऱ छाती सें सटाहुआ थां, जौ अभि भि तेज़ी सें धड़करहा थां।
"तूने। तूनेआज मुझे वोँ दे दिया आर्यन। जोँ शायद दुनिया कि कोई औऱ चीज़ नहि दे सकती थि, " अंजलि नें बहोत हि धीमी औऱ थकी हुई आवाज़ मे फुसफुसाया। "आज तेरी मम्मी कों वोँ 'शांति' मिली हैं, जिसके लिए वो बरसों सें तरसरही थि। "
आर्यन भि उस अद्भुत अहसास मे खोयाहुआ थां। उसे महसूस होँ रहा थां कि उसकी मम्मी कां जिस्म अब पहले सें कहीं अधिक कोमल औऱ 'हल्का' लगरहा हैं। वो उस दूधिया सुख केँ नशे मे पूरीतरह डूबाहुआ थां।
अंजलि केँ चेहरे पर्र अब एक् ऐसा रूहानी चैन थां, जौ बरसों कि तपस्या केँ बाद किसी साधक कों मिलता हैं। उसका पूराबदन, जोँ कुछदेर पहले तक उत्तेजना कि आग मे तपरहा थां, अबओस कि बूंदों कि तरह शीतल औऱ शांत होँ चुका थां। कमरे कि वो मद्धम रोशनी अब उसके चेहरे कि चमक कों औऱ भि उभाररही थि।
अंजलि नें धीरे-धीरे सें अपनी आँखें खोलीं। उसकी नज़रों मे अब वो 'तूफान' नहि थां, बल्कि एक् शांत समंदर जैसी गहराई थि। उसनेबगल मे लेटे आर्यन कि ओर देखा, जौ अभि भि उसी मदहोश कर देने वाले अहसास मे डूबाहुआ थां।
उसने बहोत हि स्नेहपूर्ण तरीके सें अपनाहाथ बढ़ाया औऱ आर्यन केँ माथे पर्र बिखरे बालों कों सहलाया। उसका नंगा औऱ भारी सीना अभि भि आर्यन कि बांहों सें सटाहुआ थां, पऱ अबउस स्पर्श मे 'प्यास' सें ज़्यादा 'अपनापन' थां।
"तूनेआज अपनी मां कों फिन सें जी उठना सिखा दिया, आर्यन, " अंजलि नें बहोत हि धीमी औऱ मखमली आवाज़ मे फुसफुसाया। "सालों सें जोँ बोझ मे अपने सीने पर्र दबाए बैठी थि, तूनेउसे एक् समय मे हल्का कर दिया। "
अंजलि कों महसूस होँ रहा थां कि उसकाबदन अब पहले सें कहीं ज़्यादा हल्का औऱ कोमल होँ गय़ा हैं। वो 'झड़ना' केवल एक् शारीरिक क्रिया नहि थि, बल्कि उसकेमन कि सारी गाँठें खुल गई थीं।
उसने आर्यन कों ऊपर सें नीचे तक निहारा। उसे गर्व होँ रहा थां कि उसका बेटा अब इतना समझदार औऱ संवेदनशील होँ गय़ा हैं कि वो अपनी मम्मी कि मौन पुकार कों समझसका औऱ उसे वो चरमसुख दिया, जिसके लिए वो नं जानेकब सें तरसरही थि।
आर्यन नें जब अपनी मां कि उन स्नेह भरी आँखों मे देखा, तौ उसे महसूस हुआ कि उसनेआज कोई'गलत' काम नहि किया, बल्कि एक् रूहानी फर्ज़ निभाया हैं। उसने अंजलि केँ हाथ कों अपने होंठों सें छुआ औऱ वहीं अपनी आँखें मूँदलीं।
अंजलि नें उसे अपनी बाहों मे औऱ भि कसकर भींच लिया। उस रात, वे दोनों बिना किसी औऱ शब्द केँ, एक्-दूसरे कि धड़कनों कों सुनते हुएउस गुलाबी रेशमी चादर पर्र सोगए। ये नींद उनके जिंदगी कि सबसे गहरी औऱ सबसेचैन भरी नींद थि।
Doctor मां - Kahani ab aur interesting hogi
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